सांस फूलने का तुरंत कराएं इलाज, ये सब हो सकते हैं दिल की बीमारी शुरूआती लक्षण, एक्सपर्ट ने बचाव के बताए टिप्स

Last Updated:March 10, 2026, 13:31 IST दिल के दौरे आने के कई वजह हो गए हैं. जिसका सबसे मुख्य वजह है कि इंडिया का सेडेंटरी लाइफ़स्टाइल से बीपी शुगर बहुत कॉमन हो गया है. बीपी शुगर धीरे-धीरे लोगों के नसों को गड़बड़ कर दे रहा है पूरे दिल की मांसपेशियों में घुस जाता है. और सारी ब्लड नसों को ब्लॉक कर देता है जिसकी वजह खून का प्रवाह बंद हो जाता है. जिसकी वजह से खून का दौरा दिल में बंद हो जाता है. ख़बरें फटाफट मऊः वर्तमान में देखा जा रहा है लोग दिल के दौरे के मरीज होते जा रहे हैं. छोटी-छोटी लापरवाही बड़ी समस्याओं का कारण बन रही है. ऐसे में दिल के दौरे के मरीज क्यों तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और इसे कैसे बच सकते हैं आईए जानते हैं दिल रोग विशेषज्ञ के द्वारा कि वह क्या कुछ इसके बचाव के टिप्स देते हैं. लोकल 18 से बात करते हुए प्रेमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के दिल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अम्मान अली बताते हैं कि दिल के दौरे आने के कई वजह हो गए हैं. जिसका सबसे मुख्य वजह है कि इंडिया का सेडेंटरी लाइफ़स्टाइल से बीपी शुगर बहुत कॉमन हो गया है. बीपी शुगर धीरे-धीरे लोगों के नसों को गड़बड़ कर दे रहा है पूरे दिल की मांसपेशियों में घुस जाता है. और सारी ब्लड नसों को ब्लॉक कर देता है जिसकी वजह खून का प्रवाह बंद हो जाता है. जिसकी वजह से खून का दौरा दिल में बंद हो जाता है. जिसके कारण अचानक ही दिल में तीव्रता से दर्द उठने लगता है जो लोगों की परेशानियां बढ़ा देता है. सांस फूलने पर तुरंत कराए इलाज इस बीमारी के मुख्य लक्षण सांस फूलना, छाती में दर्द होना, ऐसा दर्द जो कभी न हुआ हो, पसीने आना व बेहोश हो जाना, यह ब्लड प्रेशर नीचे गिर जाना यह दिल के दौरे पड़ने के प्रमुख लक्षण हैं। यदि इस प्रकार की कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल में किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर उसके परामर्श से दवा लेना शुरू कर दें। अन्यथा कहीं दिल का दौरा पड़ गया तो कहीं ऐसा ना हो की छोटी सी लापरवाही में आपकी जान चली जाए। शुगर बीपी रखें कंट्रोल यदि इस बीमारी से बचाव चाहते हैं तो स्वस्थ जीवन अपने प्रत्येक दिन व्यायाम करें, शुगर या ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी से ग्रसित है तो उसे कंट्रोल रखें. अच्छी क्वालिटी का तेल इस्तेमाल करें, उल्टी सीधी चीजों का परहेज करें, ज्यादा मीठा व ड्राई फ्रूट खाना ना खाएं, जंक फूड का सेवन ज्यादा ना करें क्योंकि यह आपकी समस्या को बढ़ा सकता है. छोटी सी लापरवाही आपकी जान तक ले सकता है. क्योंकि दिल के दौरे पड़ने से अधिकतर लोगों की जान चली जाती है ऐसे में आप छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें जिससे दिल के डर आपको ना पड़े और इसे गंभीर बीमारी से बचे रहें. छोटी सी लापरवाही से जा सकती है दिल के दौरे से जान पहले यह देखा जाता था कि बड़े लोगों में यह बीमारी होती थी लेकिन खान-पीन पर विशेष ना ध्यान देना और लाइफस्टाइल बदलकर जीने से यह कम उम्र के लोगों में भी बीमारी देखी जा रही है. क्योंकि अस्पतालों में अब 20% ऐसे आ रहे हैं जो जवानों में भी यह बीमारी देखी जा रही है ऐसे में अपने सेहत का विशेष ध्यान रखते हुए कुछ चीजों का परहेज करें और समय-समय पर व्यायाम करते रहें जिससे दिल के दौरे जैसी बीमारी से दूर रहे क्योंकि दिल के दौरे जैसी बीमारी से आपकी जान जा सकती है. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें Location : Mau,Uttar Pradesh First Published : March 10, 2026, 13:31 IST
राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग, इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने; 2018 में 1.08 लाख, 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने अपना देश छोड़ा

दुनिया के सबसे अमीर परिवारों के बीच इन दिनों अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने की लहर सी चल रही है। विशेषज्ञ इसे इतिहास का ‘सबसे बड़ा निजी संपत्ति प्रवास’ बता रहे हैं। कभी टैक्स लाभ की तलाश में होने वाला यह पलायन अब ‘रक्षात्मक’ हो गया है। अमीर अब अपनी संपत्ति बचाने, पीढ़ियों की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए ‘गोल्डन वीसा’ और विदेशी नागरिकता का सहारा ले रहे हैं। स्विस बैंक यूबीएस ने अपने 87 अरबपति ग्राहकों के सर्वेक्षण में पाया कि 2025 में 36% अरबपति कम से कम एक बार अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, जबकि 9% अन्य इस पर विचार कर रहे हैं। विशेष रूप से 54 वर्ष से कम उम्र के 44% युवा अरबपति पिछले साल दूसरे देश शिफ्ट हुए हैं। निवेश प्रवास फर्म ‘हेनली एंड पार्टनर्स’ के पास साल-दर-साल आवेदनों में 28% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हेनले एंड पार्टनर्स की ‘प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट’ के मुताबिक 2018 में जहां करीब 1.08 लाख अरबपतियों ने देश बदला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.34 लाख और 2025 में रिकॉर्ड 1.42 लाख पहुंच गया और इस साल यानी 2026 में और ज्यादा माइग्रेशन का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स एफिशिएंसी अमीरों के फैसले की बड़ी वजह है। इटली में नए रेजीडेंट्स के लिए €2 लाख सालाना फ्लेट टैक्स स्कीम 15 साल तक विदेशी आय पर टैक्स को कैप करती है, जो अमीरों के लिए आकर्षक है। पुर्तगाल ने पुराने ‘गोल्डन वीसा’ और नई स्कीम के तहत 20% टैक्स छूट और रिसर्च/इनोवेशन इंसेंटिव देकर धनी प्रवासियों को खींचा है। सिंगापुर ने भी इसी तरह की कई रियायतें घोषित की हैं। हेनले रिपोर्ट कहती है कि 2025 में इटली में 3,600, पुर्तगाल में 1,400 और ग्रीस में 1,200 नए अरबपति बसे हैं। दूसरी तरफ ब्रिटेन लगातार नेट आउटफ्लो झेल रहा है, जहां हाई टैक्स और ब्रेग्जिट के बाद की अनिश्चितता से पैसे वाले परिवार विकल्प तलाश रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने अमीरों को ‘जहां चाहो, वहीं रहो’ की आजादी दी माइग्रेशन सलाहकार जेरमी सेवरी कहते हैं, ‘टेक्नोलॉजी ने अमीरों के लिए दुनिया को खुला मैदान बना दिया है। अब आप कंपनी सिंगापुर, परिवार इटली और संपत्ति दुबई में रख सकते हैं।’ हेनले की रिपोर्ट भी मानती है कि रिमोट वर्क, डिजिटल बिजनेस और फिनटेक टूल्स ने देश छोड़ना आसान बनाया है। हेनले के सीईओ डॉ. युर्ग स्टेफन कहते हैं, ‘पुरानी वेल्थ राजधानी जैसे ब्रिटेन और अमेरिका से पलायन और दक्षिण यूरोप, एशिया की ओर अरबपतियों के बसने का झुकाव नई हकीकत है।’
राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग; इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने, 2018 में 1.08 लाख और 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने देश छोड़ा

दुनिया के सबसे अमीर परिवारों के बीच इन दिनों अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने की लहर सी चल रही है। विशेषज्ञ इसे इतिहास का ‘सबसे बड़ा निजी संपत्ति प्रवास’ बता रहे हैं। कभी टैक्स लाभ की तलाश में होने वाला यह पलायन अब ‘रक्षात्मक’ हो गया है। अमीर अब अपनी संपत्ति बचाने, पीढ़ियों की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए ‘गोल्डन वीसा’ और विदेशी नागरिकता का सहारा ले रहे हैं। स्विस बैंक यूबीएस ने अपने 87 अरबपति ग्राहकों के सर्वेक्षण में पाया कि 2025 में 36% अरबपति कम से कम एक बार अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, जबकि 9% अन्य इस पर विचार कर रहे हैं। विशेष रूप से 54 वर्ष से कम उम्र के 44% युवा अरबपति पिछले साल दूसरे देश शिफ्ट हुए हैं। निवेश प्रवास फर्म ‘हेनली एंड पार्टनर्स’ के पास साल-दर-साल आवेदनों में 28% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हेनले एंड पार्टनर्स की ‘प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट’ के मुताबिक 2018 में जहां करीब 1.08 लाख अरबपतियों ने देश बदला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.34 लाख और 2025 में रिकॉर्ड 1.42 लाख पहुंच गया और इस साल यानी 2026 में और ज्यादा माइग्रेशन का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स एफिशिएंसी अमीरों के फैसले की बड़ी वजह है। इटली में नए रेजीडेंट्स के लिए €2 लाख सालाना फ्लेट टैक्स स्कीम 15 साल तक विदेशी आय पर टैक्स को कैप करती है, जो अमीरों के लिए आकर्षक है। पुर्तगाल ने पुराने ‘गोल्डन वीसा’ और नई स्कीम के तहत 20% टैक्स छूट और रिसर्च/इनोवेशन इंसेंटिव देकर धनी प्रवासियों को खींचा है। सिंगापुर ने भी इसी तरह की कई रियायतें घोषित की हैं। हेनले रिपोर्ट कहती है कि 2025 में इटली में 3,600, पुर्तगाल में 1,400 और ग्रीस में 1,200 नए अरबपति बसे हैं। दूसरी तरफ ब्रिटेन लगातार नेट आउटफ्लो झेल रहा है, जहां हाई टैक्स और ब्रेग्जिट के बाद की अनिश्चितता से पैसे वाले परिवार विकल्प तलाश रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने अमीरों को ‘जहां चाहो, वहीं रहो’ की आजादी दी माइग्रेशन सलाहकार जेरमी सेवरी कहते हैं, ‘टेक्नोलॉजी ने अमीरों के लिए दुनिया को खुला मैदान बना दिया है। अब आप कंपनी सिंगापुर, परिवार इटली और संपत्ति दुबई में रख सकते हैं।’ हेनले की रिपोर्ट भी मानती है कि रिमोट वर्क, डिजिटल बिजनेस और फिनटेक टूल्स ने देश छोड़ना आसान बनाया है। हेनले के सीईओ डॉ. युर्ग स्टेफन कहते हैं, ‘पुरानी वेल्थ राजधानी जैसे ब्रिटेन और अमेरिका से पलायन और दक्षिण यूरोप, एशिया की ओर अरबपतियों के बसने का झुकाव नई हकीकत है।’
देवास में शीतला सप्तमी पर मंदिरों में भीड़:महिलाओं ने एक दिन पहले बनाकर रखा भोजन, बासी प्रसाद के रूप में करेंगे ग्रहण

देवास शीतला सप्तमी के अवसर पर मंगलवार को शहर के शीतला माता मंदिरों में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने सुबह मंदिर पहुंचकर माता शीतला की पूजा-अर्चना की और ठंडे भोजन का भोग अर्पित किया। शहर के गोया स्थित शीतला माता मंदिर में भी बड़ी संख्या में महिलाएं दर्शन और पूजा के लिए पहुंचीं। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा की और आरती उतारी। इस पर्व पर एक दिन पहले बनाया गया भोजन माता को अर्पित करने की परंपरा होती है। एक रात पहले बनाकर रखती हैं खाना, अगले दिन खाती हैं पूजा करने पहुंची श्वेता चौधरी ने बताया कि शीतला सप्तमी के दिन महिलाएं एक रात पहले ही भोजन बनाकर रखती हैं और अगले दिन ठंडा होने पर माता शीतला को भोग लगाती हैं। इसके बाद परिवार के लोग वही प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि शीतला सप्तमी का व्रत रखने और पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। महिलाएं अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।
भारत बनेगा स्पेस मेडिसिन का विश्वगुरु, एम्स और ISRO ने मिलाया हाथ, इन 6 चीजों पर होगी रिसर्च aiims delhi and isro mou on space medicine news

होमताजा खबरदेश भारत बनेगा स्पेस मेडिसिन का विश्वगुरु, एम्स और ISRO ने मिलाया हाथ, इन 6….. Last Updated:March 10, 2026, 11:36 IST AIIMS नई दिल्ली और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के एचएसएफ सेंटर ने स्पेस मेडिसिन पर ऐतिहासिक एमओयू साइन किया है. अब एम्स के डॉक्टर और इसरो के वैज्ञानिक मिलकर मानव शरीर, हृदय, नर्वस सिस्टम, माइक्रोग्रैविटी, माइक्रोबायोम, जीन और मानसिक स्वास्थ्य पर रिसर्च करेंगे . एम्स और इसरो मिलकर स्पेस मेडिसिन पर रिसर्च करेंगे. भारत अब स्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में बहुत कुछ बड़ा करने जा रहा है. इसके लिए देश के दो लीडिंग संस्थानों ने आपस में हाथ मिलाया है. मेडिकल के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली और अंतरिक्ष मामलों के टॉप संगठन इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के एचएसएफसी ने पहली बार ऐतिहासिक एमओयू साइन किया है. इसके तहत अब स्पेस और मेडिकल संबंधी 6 प्रमुख विषयों पर गहन रिसर्च किया जाएगा. एम्स और इसरो का ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर अब भारत में स्पेस मेडिसिन रिसर्च को आगे बढ़ाने जा रहे हैं. इस दौरान इसरो के वैज्ञानिक और एम्स के डॉक्टर मिलकर यह अध्ययन करेंगे कि अंतरिक्ष यात्रा का मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है. इससे न केवल आने वाले समय में अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य को लेकर बड़ी सफलताएं मिल सकेंगी बल्कि ह्यूमन स्पेश मिशन को भी बड़ा लाभ मिलेगा. इन 6 चीजों पर होगा रिसर्च का फोकस . मानव शरीर की कार्यप्रणाली (Human Physiology) . हृदय और नर्वस सिस्टम का नियंत्रण . माइक्रोग्रैविटी में हड्डियों और मांसपेशियों का स्वास्थ्य . माइक्रोबायोम और इम्यून सिस्टम . जीन और बायोमार्कर . मानसिक और व्यवहारिक स्वास्थ्य समझौता साइन करते हुए एम्स नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा कि यह सहयोग दोनों संस्थानों के लिए एक नया और रोमांचक अध्याय है. ‘यह समझौता हमें स्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में साथ मिलकर आगे बढ़ने की गति देगा. AIIMS और ISRO के बीच सहयोग से मरीजों, देश और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा. जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, हमें उम्मीद है कि हम स्पेस मेडिसिन में भी विश्वगुरु बनेंगे.’ वहीं इस मौके पर इसरो के चेयरमैन वी नारायणन ने याद करते हुए कहा कि शुरुआत में रॉकेट और उपकरण साइकिल और बैलगाड़ियों से ले जाए जाते थे, लेकिन आज भारत अंतरिक्ष तकनीक में दुनिया की एक प्रमुख शक्ति बन चुका है. AIIMS जैसे प्रमुख मेडिकल और रिसर्च संस्थानों के साथ साझेदारी भविष्य में भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को और मजबूत करेगी. वहीं ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर के निदेशक दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि यह साझेदारी भारत की चिकित्सा और अंतरिक्ष तकनीक की ताकत को एक साथ जोड़ने में मदद करेगी. इससे मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी बायोमेडिकल रिसर्च में नई प्रगति का रास्ता खुलेगा. इस दौरान रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, एम्स स्टूडेंट एसोसिएशन और सोसायटी ऑफ यंग साइंटिस्ट शामिल हुए. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीनियर हेल्थ रिपोर्टर काम कर रही हैं. इन्हें पिछले 14 साल से फील्ड में रिर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्त है. इससे पहले ये हिंदुस्तान दिल्ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें First Published : March 10, 2026, 11:36 IST
गुलाम नबी आजाद ने जेपीसी के समक्ष ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन किया, इसे शासन के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 10, 2026, 08:50 IST जेपीसी पैनल को संबोधित करते हुए, आज़ाद ने एक साथ चुनावों को देश के लिए “जीत-जीत परिदृश्य” बताया। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद (छवि: पीटीआई) जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को इस मुद्दे की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के साथ बातचीत के दौरान प्रस्तावित एक राष्ट्र, एक चुनाव (ओएनओई) पहल के लिए समर्थन व्यक्त किया। पैनल को संबोधित करते हुए, आज़ाद ने एक साथ चुनावों को देश के लिए “जीत-जीत परिदृश्य” के रूप में वर्णित किया, तर्क दिया कि सुधार राष्ट्रीय विकास में तेजी लाने और शासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने समिति को बताया कि राज्यों में लगातार चुनावों के मौजूदा चक्र के परिणामस्वरूप प्रशासनिक समय और राजनीतिक ध्यान का महत्वपूर्ण विचलन होता है। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से सरकारों और राजनीतिक नेतृत्व को लगातार प्रचार के बजाय शासन और विकास पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा। आजाद ने यह भी बताया कि आजादी के बाद के शुरुआती दशकों में भारत में एक साथ चुनाव होते थे, जब लोकसभा और अधिकांश राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे। बाद में कई विधानसभाओं और संसद के समय से पहले भंग होने के कारण यह चक्र बाधित हो गया, जिसके कारण देश भर में अलग-अलग चुनाव हुए। आजाद के मुताबिक, एक साथ चुनाव बहाल करने से देश का लोकतांत्रिक चरित्र या संघीय ढांचा कमजोर नहीं होगा। इसके बजाय, उन्होंने तर्क दिया, चुनाव प्रचार के लिए राष्ट्रीय नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों पर भारी निर्भरता के बजाय मजबूत क्षेत्रीय नेतृत्व पर अधिक निर्भरता को प्रोत्साहित करके यह प्रणाली विपक्षी दलों को भी लाभ पहुंचा सकती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि समकालिक चुनाव निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा दलबदल के खिलाफ एक निवारक के रूप में कार्य कर सकते हैं, जिससे अधिक राजनीतिक स्थिरता आएगी। आज़ाद ने आगे कहा कि सुधार से चुनाव खर्च में काफी कमी आएगी, मतदाताओं की थकान दूर होगी और चुनाव प्रबंधन कर्मियों पर बोझ कम होगा, जो वर्तमान में विभिन्न अंतरालों पर देश भर में कई चुनाव आयोजित करते हैं। प्रस्ताव को “मास्टरस्ट्रोक” कहते हुए, आज़ाद ने समिति को बताया कि एक साथ चुनाव के फायदे कार्यान्वयन की चुनौतियों से कहीं अधिक हैं, उन्होंने कहा कि सुधार भारत के शासन ढांचे के लिए काफी हद तक सकारात्मक प्रक्षेपवक्र प्रदान करता है। एक राष्ट्र, एक चुनाव के प्रस्ताव की प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पुरजोर वकालत की है, जिन्होंने तर्क दिया है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराने से शासन की दक्षता में सुधार होगा और बार-बार होने वाले चुनावों का वित्तीय और प्रशासनिक बोझ कम होगा। केंद्र सरकार ने राजनीतिक दलों, संवैधानिक विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ परामर्श शुरू कर दिया है और एक संयुक्त संसदीय समिति वर्तमान में प्रस्ताव की विस्तार से जांच कर रही है। इस समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी हैं. सुप्रिया सुले (एनसीपी) और कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक, रणदीप सुरजेवाला और प्रियंका गांधी वाद्रा से लेकर अनिल देसाई (शिवसेना यूबीटी) और कल्याण बनर्जी (टीएमसी) तक, विपक्षी बेंचों का अच्छा प्रतिनिधित्व है। एनडीए की ओर से बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर, संबित पात्रा, बैजयंत पांडा, अनिल बलूनी और शिवसेना के श्रीकांत शिंदे के साथ टीडीपी के हरीश बालयोगी भी हैं। एक साथ चुनाव लागू करने के किसी भी कदम के लिए महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधनों के साथ-साथ राज्यों और राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति की आवश्यकता होने की उम्मीद है। प्रस्ताव ने एक व्यापक राजनीतिक बहस शुरू कर दी है, समर्थकों का तर्क है कि यह शासन को सुव्यवस्थित करेगा, जबकि आलोचक संघवाद और क्षेत्रीय राजनीतिक गतिशीलता पर संभावित प्रभाव के बारे में आगाह करते हैं। पहले प्रकाशित: मार्च 10, 2026, 08:50 IST समाचार राजनीति गुलाम नबी आज़ाद ने जेपीसी के समक्ष ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ का समर्थन किया, इसे शासन के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)गुलाम नबी आज़ाद(टी)वन नेशन वन इलेक्शन(टी)जेपीसी
खबर हटके- सड़क पर मिले टिकट ने जिताए ₹20 करोड़:कुएं में फंसे कुत्ते को 3 साल जिंदा रखा; कुत्ते-बिल्लियां लटकाकर कार चला रहे लोग

सड़क पर मिले एक टिकट ने शख्स को करोड़पति बना दिया। वहीं कुएं में फंसे एक कुत्ते को लोगों ने तीन साल तक खाना खिलाकर जिंदा रहा। उधर चीनी न्यू ईयर के दौरान लोग अपने कुत्ते-बिल्लियों को गाड़ी से लटकाकर कार चलाते दिखे। आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…
गैरी कर्स्टन श्रीलंका के नए हेड कोच बने:दो साल का कॉन्ट्रैक्ट, पूर्व साउथ अफ्रीकी ने भारत को 2011 वर्ल्ड कप दिलाया था

पूर्व साउथ अफ्रीकी ओपनर गैरी कर्स्टन श्रीलंका के नए हेड कोच होंगे। सोमवार को श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) ने इसका ऐलान किया। वे 15 अप्रैल 2026 से टीम की जिम्मेदारी संभालेंगे। जयसूर्या की जगह लेंगे कर्स्टन को दो साल के कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किया गया है। वे सनथ जयसूर्या की जगह लेंगे, जिन्होंने हाल ही में खत्म हुए टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में टीम के सुपर-8 से बाहर होने के बाद पद छोड़ दिया था। 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक साथ रहेंगे श्रीलंका के साथ उनके दो साल के कार्यकाल में सबसे बड़ा टूर्नामेंट 2027 का वनडे वर्ल्ड कप होगा, जो दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाएगा। टीम की कोशिश उस टूर्नामेंट के लिए सीधे क्वालिफाई करने की होगी। टी-20 वर्ल्ड कप में नामीबिया के कोच थे गैरी कर्स्टन इससे पहले टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान नामीबिया टीम के कंसल्टेंट कोच भी रहे थे। खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के लिए 101 टेस्ट और 185 वनडे खेले हैं। 2011 वनडे वर्ल्ड कप जीता था कोचिंग में भी कर्स्टन का अच्छा रिकॉर्ड रहा है। उनके मार्गदर्शन में भारत ने 2011 का वनडे वर्ल्ड कप जीता था। इसके बाद टीम ने टेस्ट में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और रैंकिंग में नंबर-1 बना था। इसके बाद उन्होंने दो साल तक साउथ अफ्रीका की टीम को भी कोचिंग दी। पाकिस्तानी कोच का पद बीच में छोड़ा कर्स्टन अप्रैल 2024 में पाकिस्तान टीम के व्हाइट बॉल कोच भी बने थे, लेकिन बोर्ड और खिलाड़ियों के साथ मतभेद के कारण उन्होंने बीच में ही पद छोड़ दिया था। IPL में RCB और GT के साथ रहे कस्टर्न का अनुभव IPL में भी रहा। वे रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और गुजरात टाइटंस (GT) के साथ जुड़े रहे हैं। गुजरात टाइटंस ने 2022 में अपने पहले ही सीजन में खिताब जीता था, उस समय कर्स्टन टीम के बैटिंग कोच थे। ———————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… भारत टी-20 में तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन, न्यूजीलैंड को हराया टी-20 वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा का एक विज्ञापन आया। इसमें रोहित कहते नजर आए- ‘टीम इंडिया हिस्ट्री रिपीट भी करेगी और टीम इंडिया हिस्ट्री डिफीट भी करेगी।’ सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर हिस्ट्री रिपीट भी की और हिस्ट्री डिफीट भी की। पढ़ें पूरी खबर…
विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव निरस्त:नामांकन में क्रिमिनल रिकॉर्ड छिपाया था; ग्वालियर हाईकोर्ट ने रामनिवास को MLA घोषित किया

ग्वालियर हाईकोर्ट ने विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द कर दिया है। ग्वालियर बेंच के जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया ने यह फैसला BJP नेता और पूर्व मंत्री रामनिवास रावत की याचिका पर सुनाया। रावत अब विजयपुर विधानसभा सीट से नए MLA होंगे। रामनिवास रावत ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मुकेश मल्होत्रा ने 2024 के उपचुनाव नॉमिनेशन में अपने खिलाफ दर्ज क्रिमिनल केस की पूरी जानकारी नहीं दी थी। मुकेश ने 4 क्रिमिनल रिकॉर्ड बताए थे, जबकि 2 केस छिपाए थे। याचिका में रावत ने मल्होत्रा के खिलाफ दर्ज सभी 6 क्रिमिनल केस की जानकारी दी थी। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि रामनिवास रावत उपचुनाव में दूसरे नंबर पर आए थे, इसलिए मुकेश मल्होत्रा का चुनाव रद्द किया जाता है। साथ ही रावत को विजयपुर का MLA घोषित किया जाता है। मल्होत्रा के वकील बोले- हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे मुकेश मल्होत्रा के वकील प्रतीप बिसोरिया ने बताया कि BJP उम्मीदवार राम निवास रावत की फाइल की गई पिटीशन में दो मामलों में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया है। एक जिसमें निपटारा हो चुका था। दूसरा जिसमें आरोपों के बारे में जानकारी छिपाने की बात थी। कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि जानकारी छिपाने वाले दो मामलों में चुनाव रद्द कर दिया गया है। हमने एक एप्लीकेशन फाइल की है, जिसमें कहा है कि हम अपील करने के हकदार हैं। जब तक हम अपील करते हैं, इस ऑर्डर पर 15 दिन के लिए रोक लगनी चाहिए। हम सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं। रावत बोले- नॉमिनेशन में जानकारी देना कैंडिडेट की जिम्मेदारी रामनिवास रावत ने कहा- मैं हाई कोर्ट के ऑर्डर को इस तरह देखता हूं कि कोर्ट के बनाए गए इलेक्शन रिफॉर्म्स के हिसाब से नॉमिनेशन में जानकारी देना कैंडिडेट की जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने एफिडेविट में क्रिमिनल जानकारी छिपाई थी। इसलिए, उनके खिलाफ एक पिटीशन फाइल की गई थी, जिसे आज फैसला आया है। उन्होंने बताया कि मुकेश मल्होत्रा ने दो क्राइम केस की जानकारी छिपाई थी। उन्होंने यह भी छिपाया था कि उन पर एक क्राइम में चार्ज लगा था। वह सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। यह उनका ज्यूडिशियल राइट है। उन्हें 15 दिन का टाइम दिया गया है। रामनिवास रावत के समर्थकों ने फोड़े पटाखे कोर्ट के फैसले के बाद विजयपुर में रामनिवास रावत के समर्थकों ने पटाखे फोड़कर जश्न मनाया। वहीं मुकेश मल्होत्रा के घर के बाहर सन्नाटा पसरा हुआ है। BJP के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि बीजेपी हाई कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले का स्वागत करती है। ये 3 तस्वीरें देखिए… जीतू पटवारी बोले- सुप्रीम कोर्ट जाएंगे हमें न्याय मिलेगा चुनाव कैंसिल होने पर मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि एक साल पहले विजयपुर की जनता ने कांग्रेस को जनादेश दिया। मुकेश मल्होत्रा को भारी वोटों से जिताया। फैसले के खिलाफ हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। पटवारी ने कहा- हमें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा। अगर चुनाव भी हुआ तो जितने वोटों से रामनिवास रावत को हराया था। उससे दोगुना वोटों से फिर हराएंगे। विजयपुर की जनता रावत को और बीजेपी को हराने के लिए फिर तैयार बैठी है। मुकेश और रामनिवास दोनों ने बदली थी पार्टी मुकेश ने मई 2024 में कांग्रेस जॉइन की थी पूर्व राज्यमंत्री और आदिवासी नेता मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को कांग्रेस जॉइन की थी। उन्होंने मुरैना जिले में आयोजित प्रियंका गांधी की चुनावी सभा में सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव–2023 में मुकेश मल्होत्रा विजयपुर सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे थे, तब पूरे क्षेत्र के आदिवासियों ने उनका साथ दिया था। उन्हें 45 हजार वोट मिले थे। मुकेश विजयपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पहले में बीजेपी में थे, तब सरकार ने उन्हें सहारिया प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया था। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बनाया था। विधानभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने 2023 के चुनाव से पहले भाजपा का साथ छोड़ दिया था। दरअसल, विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में सहारिया आदिवासी समाज के 70 हजार से ज्यादा वोट हैं। कांग्रेस ने आदिवासी वोटों को ध्यान में रखकर मुकेश को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था। रावत ने विधायक रहते कांग्रेस छोड़ी, भाजपा ने मंत्री बनाया, फिर हारे थे कांग्रेस के सीनियर लीडर रामनिवास रावत श्योपुर जिले की विजयपुर सीट से 6 बार विधायक रहे। 2023 के विधानसभा चुनाव में रामनिवास रावत कांग्रेस के टिकट पर विजयपुर सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। रामनिवास मध्यप्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके थे। लोकसभा चुनाव के दौरान 30 अप्रैल 2024 को वे भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा में जाने के बाद रामनिवास को मंत्री बनाया गया। उनके इस्तीफा देने के कारण ही विजयपुर सीट खाली हुई थी। नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में रामनिवास रावत को हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने भाजपा के सीनियर लीडर्स पर लोगों को बरगलाने के आरोप भी लगाए थे। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, पूर्व वन मंत्री राम निवास रावत ने ग्वालियर हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें श्योपुर के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा के झूठा हलफनामा दाखिल करने को चुनौती दी गई थी। पूर्व मंत्री राम निवास रावत ने ग्वालियर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के सामने एक याचिका दायर की थी, जिसमें कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा पर उपचुनाव के लिए अपने हलफनामे में अपने खिलाफ क्रिमिनल केस की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। ग्वालियर हाईकोर्ट ने उम्मीदवारों को जारी किया था नोटिस पूर्व मंत्री राम निवास रावत की याचिका पर सुनवाई करते हुए ग्वालियर हाईकोर्ट ने उपचुनाव लड़ रहे 11 उम्मीदवारों को नोटिस जारी किया था, जिसमें विजयपुर से कांग्रेस MLA मुकेश मल्होत्रा भी शामिल थे। सभी उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा गया था। इस केस में अब आगे क्या होगा ? 1. सदस्यता तत्काल समाप्त कानूनी मामलों के जानकारों का कहना है कि जैसे ही हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी होता है, विधायक की विधानसभा सदस्यता समाप्त हो जाती है। कोर्ट के आदेश की प्रति मिलते ही विधानसभा सचिवालय अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी कर सदस्यता रद्द कर देता है। 2. दूसरे नंबर के प्रत्याशी को विधायक घोषित अगर कोर्ट दूसरे नंबर के कैंडिडेट
सुप्रीम कोर्ट में प्याज-लहसुन को तामसिक मानने की याचिका:CJI ने पूछा-आधी रात को पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या; फालतू बताकर 5 याचिकाएं खारिज

सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने 5 पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन(PIL)/जनहित याचिका फाइल की थीं। इनमें से एक कहा गया था कि प्याज और लहसुन में तामसिक या नेगेटिव एनर्जी होती है या नहीं इसके लिए रिसर्च की मांग की गई थी। इस पर सोमवार को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया(CJI) सूर्यकांत ने एडवोकेट सचिन गुप्ता को फटकार लगाई। CJI ने पूछा- आधी रात को ये सब पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या? CJI और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने वकील की पांचों PIL अस्पष्ट, फालतू और बेबुनियाद बताकर खारिज कर दीं। पिटीशनर ने जवाब दिया कि यह एक आम मुद्दा है और दावा किया कि गुजरात में खाने में प्याज के इस्तेमाल को लेकर कथित तौर पर एक तलाक हुआ था। CJI बोले- आप जैन समुदाय की भावना को ठेस पहुंचाना चाहते हैं प्याज और लहसुन से संबंधित पिटीशन में जैन समुदाय के खाने-पीने के तरीकों का जिक्र था, जो पारंपरिक रूप से प्याज, लहसुन और जड़ वाली सब्जियों को तामसिक खाना मानते हुए उनसे परहेज करते हैं। CJI ने गुप्ता से पूछा, “आप जैन समुदाय की भावनाओं को ठेस क्यों पहुँचाना चाहते हैं? बेंच ने कहा- आप वकील नहीं होते फाइन लगाते बेंच ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अगर पिटीशनर वकील नहीं होता तो हम बहुत ज्यादा फाइन लगाकर इसे खारिज करते। बेंच ने आगे कहा कि याचिका कैजुअल ड्राफ्टिंग और सुप्रीम कोर्ट पर बोझ डालने का एक उदाहरण है। गुप्ता को चेतावनी दी गई कि अगली बार जब आप ऐसी पिटीशन फाइल करेंगे, तो बहुत ज्यादा फाइन लगाएंगे। एडवोकेट सचिन गुप्ता की ये याचिकाएं भी खारिज ————– ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला-AI जेनरेटेड सबूतों पर फैसला लेना बिल्कुल गलत:इसका सीधा असर न्याय प्रक्रिया पर पड़ता है सुप्रीम कोर्ट ने 2 मार्च को एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार सबूतों के आधार पर फैसला लिखना गलत है। जस्टिस पी एस नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि यह साधारण गलती नहीं हो सकती। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इसका सीधा असर न्याय देने की प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर पड़ता है। पूरी खबर पढ़ें…









