दावा- एअर इंडिया CEO कैंपबेल विल्सन ने इस्तीफा दिया:सितंबर 2027 तक कार्यकाल था; अहमदाबाद प्लेन क्रैश की जांच रिपोर्ट आने के बाद नए CEO की नियुक्ति

एअर इंडिया के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) कैंपबेल विल्सन ने इस्तीफा दे दिया है। न्यूज एजेंसी ANI ने सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी कहा गया है कि एयरलाइन नए CEO की तलाश कर रही है। सूत्रों के अनुसार, अहमदाबाद प्लेन क्रैश की फाइनल जांच रिपोर्ट आने के बाद नए CEO की नियुक्ति की जाएगी। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने 12 जुलाई 2025 को प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। अंतिम रिपोर्ट जून 2026 में आ सकती है। इसके बाद सितंबर में विल्सन अपना पद छोड़ सकते हैं। पिछले हफ्ते हुई कंपनी की बोर्ड बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। कैंपबेल विल्सन का पांच साल का कार्यकाल अगले साल सितंबर तक था, लेकिन उससे पहले ही उनका इस्तीफा सामने आया है। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है…
ग्वालियर में तेज रफ्तार कार ने बाइक सवारों को रौंदा:2 दिन चले उपचार के बाद एक की मौत; हादसे के वक्त सैलरी लेकर लौट रहा था घर

ग्वालियर में दोस्तों के साथ सैलरी लेकर घर लौट रहे बाइक सवारों को तेज रफ्तार कार ने रौंद दिया। घटना मुरार थाना क्षेत्र के त्यागी नगर पुलिया के पास शुक्रवार रात 9 बजे की है। घटना का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद घायलों को उपचार के लिए पहुंचाया। जहां पर एक युवक ने सोमवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। जबकि दो की हालत स्थिर बनी हुई है। पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। प्राइवेट जॉब करता था अंशु काल्पीब्रिज कॉलोनी निवासी 22 वर्षीय अंशु राजे पिता महावीर राजौरिया प्राइवेट जॉब करता था। शुक्रवार शाम वह अपने दोस्तों पवन व सूरज के साथ जॉब से सैलरी लेने के बाद वापस आ रहा था, अभी वह त्यागी नगर पुलिया के पास पहुंचा ही था कि सामने से आ रही बलेनो कार (एमपी 04 सीयू 9284) के चालक ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। कार की टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक पर सवार अंशु, पवन व सूरज हवा में उछले और सड़क पर गिरे। जिससे अंशु को गंभीर चोट लगी और सूूरज व पवन को कुछ कम चोट आई। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को उपचार के लिए पहुंचा दिया। दो दिन लड़ी जिंदगी की जंग अंशु को बचाने के लिए 2 दिन डॉक्टरों की टीम लगी रही और दो दिन जिंदगी से जंग लड़ने के बाद सोमवार सुबह अंशु ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उसकी मौत का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसके शव को पीएम हाउस पहुंचा कर आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अभी पवन और सूरज का उपचार चल रहा है।
भोपाल में रिटायर्ड कर्नल के बंगले में घुसा नकाबपोश:पढ़ाई कर रहे बेटे ने पकड़ा, मारपीट कर भागा आरोपी; पुलिस जांच में जुटी

भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र के ई-4 अरेरा कॉलोनी में सोमवार तड़के पांच बजे एक नकाबपोश रिटायर्ड कर्नल के बंगले में दाखिल हो गया। वह चोरी का प्रयास कर रहा था। तभी अपने रूम में पढ़ाई कर रहे कर्नल के बेटे की नजर आरोपी पर पड़ी। बेटे ने आरोपी को पकड़ लिया, हालांकि आरोपी ने मारपीट की और मौके से भाग निकला। हमले में कर्नल के बेटे के सिर पर चोट आई है। पुलिस ने अज्ञात बदमाश के खिलाफ चोरी की नियत से बंगले में घुसने और मारपीट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, ई-4 अरेरा कॉलोनी निवासी कान्हा समर्थ बोधिसत्व पुत्र मुकेश कुमार (29) प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनके पिता मुकेश कुमार सेना से रिटायर्ड कर्नल हैं। भारी चीज से सिर में वार किया मुकेश ने पुलिस को बताया कि सोमवार सुबह वह अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। सुबह करीब चार बजे आहट हुई। बाहर देखा तो बंगले में एक नकाबपोश दबे पैर चलता हुआ नजर आया। लिहाजा कान्हा समर्थ ने नकाबपोश को पकड़ लिया और शोर मचाने लगा। पकड़ ढीली होते ही भाग निकला बदमाश इसी बीच छूटने के प्रयास में आरोपी ने कान्हा समर्थ के साथ मारपीट की और उसके सिर पर पास ही पड़ा सामान उठाकर मार दिया। मुंह पर चोट लगने के कारण कान्हा की पकड़ ढीली हो गई। लिहाजा आरोपी छूटकर भाग निकला। पुलिस हुलिया के आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है।
100 की आबादी वाले मजरे-टोलों तक बनेंगी सड़कें:अब ड्रोन से होगी कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की मॉनिटरिंग; सीएम डॉ. मोहन यादव ने ली बैठक

प्रदेश के दूरस्थ मजरे-टोलों तक अब पक्की सड़कों का जाल बिछेगा। 100 या उससे अधिक आबादी वाली छोटी बस्तियों को भी सड़क सुविधा से जोड़ा जाएगा, वहीं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को समत्व भवन में “सुगम संपर्कता परियोजना” की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति को प्राथमिकता दी जाए। बैठक में सीएम के साथ मुख्य सचिव अनुराग जैन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी मौजूद थे। एक हजार करोड़ रुपए से बनेंगी सड़कें मुख्यमंत्री ने कहा कि गांवों के बीच बेहतर संपर्क से आवागमन सुगम होगा और ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान बनेगी। उन्होंने सिपरी सॉफ्टवेयर के उपयोग को बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे सड़कों की डीपीआर तैयार करने के साथ-साथ पुल-पुलिया और कल्वर्ट की आवश्यकता का भी सटीक आकलन किया जा रहा है। परियोजना के तहत प्रदेश में लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लागत से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसमें मजरों-टोलों के साथ सांदीपनि विद्यालयों तक सड़कें बनाई जाएंगी, जिससे विद्यार्थियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। कंस्ट्रक्शन क्वालिटी की निगरानी ड्रोन से होगी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ड्रोन से नियमित मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही सड़कों के निर्माण और प्रगति की निगरानी के लिए जनपद, जिला और राज्य स्तर पर डैशबोर्ड प्रणाली विकसित की गई है, जिससे हर स्तर पर पारदर्शिता बनी रहेगी। परियोजना के अंतर्गत प्रत्येक जनपद पंचायत को तीन करोड़ रुपए तक के कार्यों की स्वीकृति देने का अधिकार दिया गया है। सड़कों का निर्माण मनरेगा के तहत किया जाएगा और गांवों को दोहरी संपर्कता प्रदान करने पर विशेष जोर रहेगा, ताकि वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध हो सकें। पुरानी सड़कों की जियो इन्वेंट्री हो रही तैयार नई सड़कों के चयन में दोहराव रोकने के लिए रिम्स पोर्टल के माध्यम से पूर्व में बनी सड़कों की जियो-इंवेंट्री तैयार की जा रही है। अब तक 33 हजार 655 सड़कों में से 17 हजार 437 सड़कों का रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है, जबकि कई जिलों में सर्वे कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना के तहत अब तक 7 हजार 135 नई सड़कों के प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं और 29 जिलों में 1771 सड़कों को स्वीकृति भी मिल चुकी है। मैदानी स्तर पर कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 2100 से अधिक इंजीनियरों और तकनीकी स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं सरपंच, सचिव और ग्राम रोजगार सहायकों को भी तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान की साप्ताहिक समीक्षा करने और जनभागीदारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित और पारदर्शी व्यवस्था से ही ग्रामीण विकास को गति मिलेगी और अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई जा सकेंगी।
प्रोटीन पाउडर रोज पी रहे हैं? कहीं मस्कुलर बॉडी बनाने के चक्कर में न हो जाए नुकसान, जान लें सच

Last Updated:April 06, 2026, 22:50 IST प्रोटीन पाउडर आजकल फिटनेस और हेल्थ के लिए काफी इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन इन्हें लेने से पहले इसके फायदे के साथ-साथ संभावित जोखिमों को समझना भी जरूरी है. सही जानकारी के बिना इसका अधिक सेवन सेहत पर असर डाल सकता है. दूध या स्मूदी में प्रोटीन पाउडर मिलाना एक आसान और हेल्दी तरीका लग सकता है, क्योंकि प्रोटीन मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों के स्वास्थ्य और पूरे शरीर के सही कामकाज के लिए जरूरी होता है. खासकर वे लोग, जिनकी भूख कम होती है, जैसे कि बुजुर्ग, वे अपनी रोजाना की प्रोटीन जरूरत पूरी करने के लिए प्रोटीन पाउडर का सहारा लेते हैं, क्योंकि यह जल्दी और सुविधाजनक तरीका होता है. प्रोटीन पाउडर प्रोटीन का एक कंसंट्रेटेड स्रोत होता है, जो आमतौर पर पौधों, अंडे या दूध से तैयार किया जाता है. इसमें कई बार स्वाद बढ़ाने के लिए चीनी, फ्लेवर, गाढ़ापन देने वाले तत्व, विटामिन और मिनरल्स भी मिलाए जाते हैं. हालांकि यह सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसके सेवन से जुड़े कुछ छिपे हुए स्वास्थ्य जोखिम भी हो सकते हैं, जिनके बारे में जानना जरूरी है. प्रोटीन पाउडर के एक स्कूप में प्रोटीन की मात्रा काफी अलग-अलग हो सकती है. यह 10 ग्राम से लेकर 30 ग्राम तक हो सकती है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि वह मसल्स बढ़ाने के लिए बना है या वजन घटाने के लिए. Add News18 as Preferred Source on Google प्रोटीन पाउडर डाइटरी सप्लीमेंट्स की कैटेगरी में आते हैं, इसलिए इनके निर्माण और लेबलिंग की जिम्मेदारी कंपनियों पर ही होती है. ऐसे में कई बार यह जानना मुश्किल हो जाता है कि इसमें वास्तव में क्या-क्या मिलाया गया है. पाचन से जुड़ी समस्याएं: दूध से बने प्रोटीन पाउडर कुछ लोगों में पेट फूलना, गैस या असहजता पैदा कर सकते हैं. खासकर जिन्हें लैक्टोज इनटॉलरेंस या डेयरी से एलर्जी होती है, उन्हें इससे ज्यादा दिक्कत हो सकती है. छिपी हुई शुगर और ज्यादा कैलोरी- कई प्रोटीन पाउडर में अतिरिक्त शुगर और कैलोरी होती है, जो नियमित सेवन करने पर वजन बढ़ाने और ब्लड शुगर लेवल बढ़ाने का कारण बन सकती है. लंबे समय के असर स्पष्ट नहीं- प्रोटीन सप्लीमेंट्स का लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में सेवन करने के असर पर अभी पर्याप्त शोध उपलब्ध नहीं है. इसलिए इसे रोजाना लंबे समय तक लेने को लेकर कुछ चिंताएं बनी रहती हैं. हालांकि प्रोटीन पाउडर इस्तेमाल में आसान होते हैं, लेकिन ये पूरी तरह जोखिम से मुक्त नहीं हैं. बेहतर और सुरक्षित तरीका यह है कि आप प्रोटीन प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से लें और सप्लीमेंट्स का उपयोग समझदारी और सीमित मात्रा में करें. First Published : April 06, 2026, 22:50 IST
उमा भारती ने टीकमगढ़ में अतिक्रमण मुहिम का विरोध किया:कहा- गरीबों पर कार्रवाई गलत, पहले अमीरों के कब्जे हटें

मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने टीकमगढ़ में प्रशासन की अतिक्रमण हटाओ मुहिम पर ऐतराज जताया है। सोमवार रात उन्होंने सिविल लाइन रोड पहुंचकर उन हाथ ठेला और फुटपाथ दुकानदारों से मुलाकात की। उन्होंने दुकानदारों को भरोसा दिलाया कि वे दोबारा अपनी दुकानें लगाएं और अब उन्हें कोई नहीं हटाएगा। अचानक हुई कार्रवाई पर उठाए सवाल उमा भारती पिछले कुछ दिनों से टीकमगढ़ में ही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी पूर्व सूचना के गरीब दुकानदारों के ठेले जेसीबी से तोड़ दिए गए और उनका सामान तहस-नहस कर दिया गया। उन्होंने कहा कि जब तक वह मौके पर पहुंचीं, तब तक काफी नुकसान किया जा चुका था। तय फैसले के खिलाफ काम करने का आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि भाजपा के पार्षद दल ने उन्हें जानकारी दी है कि यह कार्रवाई आपसी सहमति के उलट हुई है। योजना यह थी कि पहले शहर में दो-तीन जगह चुनी जाएंगी, वहां जरूरी सुविधाएं दी जाएंगी और फिर दुकानदारों को चेतावनी देकर शिफ्ट किया जाएगा। लेकिन प्रशासन ने इन सब बातों को दरकिनार कर सीधे गरीबों की रोजी-रोटी पर हमला कर दिया। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष को दी जानकारी उमा भारती ने इस पूरी कार्रवाई को शर्मनाक और अमानवीय बताया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पार्षद दल के साथ हुए निर्णय का पालन किया जाए। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया है। चर्चा है कि इस मुद्दे को लेकर उन्होंने भाजपा जिलाध्यक्ष सरोज राजपूत को फटकार भी लगाई है।
छिंदवाड़ा में लेनदेन विवाद में कार समेत युवक का अपहरण:घंटों में पुलिस ने छुड़ाया; रस्सियों से कुर्सी पर बंधा मिला पीड़ित, चार आरोपी गिरफ्तार

छिंदवाड़ा जिले के चांदामेटा थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़कुही चौकी इलाके में हुए अपहरण के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज कुछ घंटों में पीड़ित को सकुशल बरामद कर लिया। इस दौरान पुलिस ने आज (सोमवार) चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। घटना 4 अप्रैल 2026 की शाम करीब 7:30 बजे की है। पुलिस को सूचना मिली कि ग्राम इकलहरा टोल के पास इंडेन गैस एजेंसी के सामने कुछ लोगों के बीच विवाद हुआ है। इसी दौरान अज्ञात आरोपी संजू यदुवंशी (38), निवासी सुकरी बस्ती, जुन्नारदेव का उसकी कार (MH02-BT-9104) सहित अपहरण कर ले गए। कमरे में बंधा मिला युवक मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी और अन्य माध्यमों से लोकेशन ट्रेस कर पुलिस टीम गुरैया स्थित महावीर कॉलोनी पहुंची, जहां एक मकान के ऊपर कमरे में संजू यदुवंशी को रस्सियों से कुर्सी पर बांधकर रखा गया था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर युवक को मुक्त कराया। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि पुराने पैसों के लेन-देन को लेकर अनुराग गढ़ेवाल और उसके साथियों ने उसका अपहरण किया और बंधक बना लिया था। 4 आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी दो कार समेत अन्य सामान जब्त पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त बलेनो कार (MP-50-CA-1801), पीड़ित की कार, एक प्लास्टिक कुर्सी और दो नायलॉन रस्सियां जब्त की हैं। कार्रवाई में थाना प्रभारी खेलचंद पटले, चौकी प्रभारी अक्रजय धुर्वे सहित चांदामेटा थाना स्टाफ और साइबर सेल की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव खारिज:लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष लेकर आया था महाभियोग प्रस्ताव, 193 सांसदों ने साइन किए थे

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया है। इस प्रस्ताव पर 12 मार्च को 193 विपक्षी सांसदों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) ने साइन किए थे। कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर विचार के बाद स्पीकर बिरला और राधाकृष्णन ने इसे न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत मंजूरी नहीं दी। इस फैसले के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी, जब तक नए सिरे से संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप पहल न की जाए। नियम के अनुसार 100 सांसदों के दस्तखत जरूरी यह नोटिस INDIA गठबंधन के सभी दलों के सांसदों ने मिलकर साइन किया था। यह पहली बार है जब मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए ऐसा नोटिस दिया जा रहा है। राज्यसभा में इसके लिए कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। वहीं लोकसभा में CEC को हटाने के प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। विपक्ष का आरोप-SIR केंद्र सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए विपक्ष का आरोप है कि CEC कई मौकों पर सत्तारूढ़ भाजपा को फायदा पहुंचाने में मदद कर रहे हैं, खासकर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) नाम की मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया को लेकर। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया केंद्र की सरकार को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा रहा है। कानून के अनुसार प्रस्ताव मंजूर होने पर ही जांच समिति मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके से हटाया जा सकता है जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है। अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश जरूरी होती है। जजेज़ (इन्क्वायरी) एक्ट 1968 के अनुसार, अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है, तो जांच समिति तभी बनेगी जब दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाएगा। इसके बाद लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा चेयरमैन मिलकर एक संयुक्त जांच समिति बनाएंगे।
कैडर से प्रमुख तक: रवींद्र चव्हाण ने व्यक्तिगत चिंतन के साथ भाजपा स्थापना दिवस मनाया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:06 अप्रैल, 2026, 20:48 IST महाराष्ट्र भाजपा प्रमुख ने पार्टी का स्थापना दिवस मनाया, कैडर संचालित विकास, आंतरिक लोकतंत्र, सामाजिक विविधता और योजनाओं, तकनीक, 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित किया। महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण. (छवि X/@RaviDadaChavan के माध्यम से) भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस के अवसर पर, महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने न केवल पार्टी के विकास, बल्कि इसके भीतर अपनी यात्रा पर भी विचार किया – एक सामान्य कार्यकर्ता से राज्य इकाई के प्रमुख तक। एक लिखित नोट के माध्यम से साझा किए गए उनके संदेश में व्यक्तिगत अर्थ और पार्टी की आंतरिक संरचना के बारे में व्यापक राजनीतिक दावा दोनों शामिल थे। 6 अप्रैल, 1980 को अपनी स्थापना के बाद से पार्टी के 47वें वर्ष में प्रवेश करते हुए, चव्हाण ने भाजपा को विचारधारा में गहराई से निहित और अपने कैडर के निरंतर प्रयासों पर निर्मित एक संगठन बताया। उन्होंने अपने स्वयं के उत्थान को पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया – एक ऐसी प्रणाली जहां एक जमीनी स्तर का कार्यकर्ता रैंकों में आगे बढ़ सकता है। पीछे मुड़कर देखें तो, चव्हाण ने भाजपा की उत्पत्ति को दशकों पहले भारत के राजनीतिक माहौल की पृष्ठभूमि में रखा, जब, जैसा कि उन्होंने कहा, समाजवादी और वामपंथी विचारधाराओं का बोलबाला था। उन्होंने श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं का जिक्र किया और उन्हें एक वैकल्पिक राजनीतिक कथा को आकार देने का श्रेय दिया, जिसके बारे में उनका मानना है कि यह पार्टी का मार्गदर्शन करता रहेगा। यह भी पढ़ें: राय | स्कूटर से स्टेट्समैन तक: एक कार्यकर्ता की यात्रा महाराष्ट्र में, चव्हाण ने कई राज्य नेताओं के योगदान के माध्यम से भाजपा के विस्तार का पता लगाया। गोपीनाथ मुंडे, जिन्होंने पार्टी को ग्रामीण और ओबीसी समुदायों तक पहुंचने में मदद की, से लेकर नितिन गडकरी और देवेंद्र फड़नवीस तक, जिन्होंने संगठन और शासन दोनों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जोर निरंतरता और विकास पर रहा। साथ ही उनकी टिप्पणी ने राजनीतिक धार भी ले ली. उस आलोचना को संबोधित करते हुए, जिसने कभी भाजपा को सामाजिक रूप से विशिष्ट करार दिया था, चव्हाण ने महाराष्ट्र में पार्टी के नेतृत्व रिकॉर्ड की ओर इशारा करते हुए विविध सामाजिक पृष्ठभूमि के प्रतिनिधित्व का उल्लेख किया। विरोधियों का नाम लिए बिना, उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी का विकास पारंपरिक जाति-आधारित आख्यानों को चुनौती देता है। इतिहास और पहचान से परे, चव्हाण ने भाजपा की वर्तमान प्राथमिकताओं को रेखांकित किया – अपने संगठनात्मक नेटवर्क का विस्तार करना, प्रौद्योगिकी को अपनाना और सरकारी योजनाओं की अंतिम मील तक डिलीवरी सुनिश्चित करना। उन्होंने इन प्रयासों को भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में बदलने के बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य से जोड़ा, जिसमें महाराष्ट्र को प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में रखा गया। फिर भी, राजनीतिक संदेश के नीचे, स्वर एक कैडर-संचालित बल के रूप में पार्टी के विचार पर टिका रहा। चव्हाण के लिए, स्थापना दिवस उत्सव के बारे में कम और एक विश्वास की पुष्टि के बारे में अधिक था – कि भाजपा की ताकत सिर्फ नेतृत्व में नहीं, बल्कि उसके कार्यकर्ताओं की सामूहिक महत्वाकांक्षा में निहित है। पहले प्रकाशित: 06 अप्रैल, 2026, 20:48 IST समाचार राजनीति कैडर से प्रमुख तक: रवींद्र चव्हाण ने व्यक्तिगत चिंतन के साथ भाजपा स्थापना दिवस मनाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट) महाराष्ट्र बीजेपी स्थापना दिवस(टी)रवींद्र चव्हाण(टी)बीजेपी का आंतरिक लोकतंत्र(टी)बीजेपी कैडर-आधारित पार्टी(टी)महाराष्ट्र में बीजेपी(टी)बीजेपी नेतृत्व विविधता(टी)बीजेपी संगठनात्मक विस्तार(टी)$5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था भारत
मंदसौर पुलिस ने गुजरात से पकड़ा ड्रग तस्कर:डेढ़ किलो एमडी की तस्करी के मामले में था फरार, एसपी ने बनाई थी टीम

मंदसौर सिटी कोतवाली पुलिस ने एमडी ड्रग्स तस्करी के एक बड़े मामले में फरार चल रहे आरोपी को गुजरात से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस द्वारा नशे के सौदागरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। एसपी के निर्देश पर थाना प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह राठौर के नेतृत्व में टीम ने कार्रवाई करते हुए गुजरात निवासी आरोपी गोविंद भाई को पकड़ लिया। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश जारी थी। 1.5 किलो एमडी ड्रग्स के साथ पकड़े गए थे आरोपी जानकारी के अनुसार, 1 फरवरी 2026 को कोतवाली पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों गुलशेर खान पठान और नंदकिशोर उर्फ नंदू को गिरफ्तार किया था। दोनों के कब्जे से 1 किलो 500 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की गई थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये बताई गई। इसके अलावा आरोपियों से डोडाचूरा और दो मोटरसाइकिल भी जब्त की गई थीं। कुल जब्ती की कीमत 1 करोड़ 51 लाख 22 हजार रुपये आंकी गई। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए पहले ही आरोपी अजय सिंह शक्तावत को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने बताया कि मादक पदार्थ गुजरात निवासी गोविंद भाई को सप्लाई किया जाना था। इसी आधार पर पुलिस टीम को गुजरात भेजा गया, जहां कार्रवाई करते हुए आरोपी को सुरेंद्रनगर जिले के मूली थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। यह आरोपी गिरफ्तार अजय सिंह शक्तावत, निवासी सेमलिया हीरा, थाना दलौदा, जिला मंदसौर गोविंद भाई कोडी पटेल, निवासी जैपर, तहसील मूली, जिला सुरेंद्रनगर (गुजरात) पुलिस की सतर्कता से तस्करी पर बड़ा प्रहार कोतवाली पुलिस की इस कार्रवाई को नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है और अभियान लगातार जारी रहेगा।









