पुनः आरंभ की खाली 24 नामांकन पर चुनाव की तारीखों का ऐलान, जानें कब होगी वोटिंग

चुनाव आयोग ने जून-जुलाई में 24 सीटों के लिए खाली होने की घोषणा कर दी है। इसके अलावा महाराष्ट्र और तमिलनाडु में भी राज्य के दो रेज़्यूमे की तारीख का खुलासा किया गया है। 10 राज्यों में सागर के 24 सदस्यों का कार्यकाल जून-जुलाई में समाप्त होने वाला है। इन सभी 24 नामांकनों के लिए आयोग ने चुनाव की तारीखें घोषित की हैं। कब होगा यूक्रेन की रिक्त पद पर चुनाव? 10 राज्यों में चुनाव के लिए राज्यसभा की शुरूआत होगी, जहां स्थायी सदस्यों का कार्यकाल 21 जून से 19 जुलाई के बीच अलग-अलग तारीखों पर समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार, 18 जून को द्विवार्षिक चुनावों के लिए मतदान होगा और उसी दिन नतीजे घोषित किये जायेंगे। चुनाव आयोग 1 जून की अधिसूचना जारी करेगा। 8 जून को नामांकन नामांकन की अंतिम तिथि जारी की गई है। किस प्रकार का आवेदन पर होगा चुनाव? आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीटें, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीटें, झारखंड की दो सीटें और बौद्ध मठ, मेघालय, आंध्र प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट पर होगी। नामांकन नामांकन की अंतिम तिथि आठ जून है. राजस्थान राज्यसभा चुनाव 2026: राजस्थान की तीन सीटों पर होगा मुकाबला! हो गई तारीखों का एलान” href=’https://www.abplive.com/states/rajस्थान/rajasthan-rajya-sabha-election-2027-contest-between-bjp-and-congress-for- three-rajya-sabha-seats-election-date-3133628″ target=”_self”>राजस्थान राज्यसभा चुनाव 2026: राजस्थान की तीन सीटों पर होगा मुकाबला! हो गई तारीखों का एलान दो चौथाई पर संकलन EC ने राज्य सभा के दो जिलों की भी घोषणा की है. दोनों क्रांतिकारी नेताओं के पद छोड़ने के बाद खाली हो गए हैं। महाराष्ट्र में सुनेत्रा की रिहाई के बाद सागर की एक सीट पर अंतिम विदाई हुई। उनका पद 4 जुलाई 2028 तक था, लेकिन राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें 6 मई को पद से हटा दिया गया था। वहीं, एआईएडीएमके नेता सीवी शनामुगम ने 7 मई को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में मैलाम क्षेत्र से विधायक बनने के बाद संघ से इस्तीफा दे दिया। उनका यह सन्देश 29 जून 2028 को समाप्त हो गया था। आयोग की योजना के अनुसार, 18 जून को वोट होंगे और उसी दिन नतीजे घोषित किये जायेंगे। आयोग ने निर्देश दिया है कि स्वतंत्र और सिविल चुनाव के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करें, चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए आवश्यक शर्तें रखें। झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान, एक सीट 2025 से ही है खाली” href=’https://www.abplive.com/states/jharखण्ड/झारखंड-rajya-sabha-elections-2026-election-dates-announced-for-the-two-rajya-sabha-seats-3133632′ target=”_self”>झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026: झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान, एक सीट 2025 से ही है खाली (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग न्यूज(टी)एबीपी न्यूज(टी)राज्यसभा(टी)राज्यसभा चुनाव(टी)राज्यसभा चुनाव 2026(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 समाचार(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 वोटिंग(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 अपडेट(टी)राज्यसभा(टी)राज्यसभा चुनाव(टी)राज्यसभा चुनाव 2026(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 समाचार(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 वोट(टी)राज्यसभा चुनाव 2026 अपडेट
BSF ने बॉर्डर पर 2 पाकिस्तानी नागरिक पकड़े:गाड़ी लेकर भारत में घुसने की कोशिश करते दबोचा; सुरक्षा एजेंसियां पूछताछ में जुटी

अमृतसर में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) जवानों ने अवैध तरीके से भारत में दाखिल हुए 2 पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से एक गाड़ी भी बरामद की गई है। इस संबंध में सुरक्षा एजेंसियां दोनों से पूछताछ कर रही हैं। जानकारी के अनुसार दोनों व्यक्ति पाकिस्तान के कसूर इलाके में दुकानों पर अलग-अलग सामान सप्लाई करने का काम करते थे। इसी दौरान वे अपनी निजी गाड़ी में सीमा पार करते हुए भारतीय क्षेत्र में पहुंच गए, जहां बीएसएफ जवानों ने उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया। दोनों लाहौर के रहने वाले गिरफ्तार नागरिकों की पहचान मोहम्मद सलीम पुत्र नजीर अहमद (60), निवासी नास्टर कॉलोनी, फिरोजपुर रोड, लाहौर और अमीर नवाज पुत्र मोहम्मद नवाज (40 ), निवासी जसहीन टाउन, गज्जी रोड लाहौर के रूप में हुई है। हर एंगल से जांच कर रही बीएसएफ BSF अधिकारियों ने जीरो लाइन पर पाकिस्तानी रेंजर्स को भी इस संबंध में जानकारी दे दी है। फिलहाल दोनों आरोपियों से अमृतसर सेक्टर में BSF अधिकारी बारीकी से पूछताछ कर रहे हैं। अधिकारी यह भी जांच रहे है कि कहीं यह गलती से तो भारत में दाखिल नहीं हुए।
सेंसेक्स 300 अंक चढ़कर 75,500 पर कारोबार कर रहा:निफ्टी भी 90 अंक ऊपर 23,750 पर आया; बैंक और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी

आज यानी शुक्रवार, 22 मई को सेंसेक्स 300 अंक (0.42%) की तेजी के साथ 75,500 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी 90 अंकों (0.39%) की तेजी है, ये 23,750 पर पहुंच गया है। आज के कारोबार में बैंक और रियल्टी शेयरों में खरीदारी है। एशियाई बाजारों में तेजी के साथ कोरोबार कल अमेरिकी बाजारों में भी तेजी रही विदेशी निवेशकों ने कल 1891 करोड़ के शेयर बेचे कल सेंसेक्स 135 अंक गिरकर बंद हुआ था
वर्ल्ड अपडेट्स:सेंट्रल अमेरिकी देश होंडुरास में गोलीबारी, 16 की मौत; बंदूकधारियों ने मजदूरों और पुलिसकर्मियों पर बरसाईं गोलियां

सेंट्रल अमेरिकी देश होंडुरास में गुरुवार को दो अलग-अलग हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, हमलों में 10 मजदूर और 6 पुलिसकर्मी मारे गए। पहला हमला उत्तरी होंडुरास के ट्रूजिलो नगर में एक प्लांटेशन पर हुआ। नेशनल पुलिस के प्रवक्ता एडगार्डो बाराहोना के मुताबिक, बंदूकधारियों ने वहां काम कर रहे मजदूरों पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि मृतकों की सही संख्या अब भी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि कुछ परिजन शव अपने साथ ले गए। रिपोर्ट के मुताबिक, यह इलाका लंबे समय से जमीन और खेती को लेकर संघर्ष का केंद्र रहा है। दूसरा हमला ग्वाटेमाला सीमा के पास कॉर्टेस विभाग के ओमोआ नगर में हुआ। यहां हमलावरों ने पुलिस टीम पर गोलीबारी की, जिसमें 6 पुलिसकर्मी मारे गए। मृतकों में एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल है। पुलिस के मुताबिक, ये अधिकारी गैंग विरोधी अभियान में तैनात थे और राजधानी टेगुसिगाल्पा से ओमोआ जा रहे थे। होंडुरास के सुरक्षा मंत्रालय ने कहा है कि दोनों हमलों की जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों और अभियोजकों की टीमें बनाई जाएंगी। साथ ही प्रभावित इलाकों में पुलिस और सेना की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी।
अमेरिकी पुलिस गुरुद्वारे में जूते पहनकर घुसी, VIDEO:सिर भी नंगा; गोलक को लेकर हुआ था झगड़ा; SGPC बोली- दोषियों पर कार्रवाई हो

अमेरिका की पुलिस एक गुरुद्वारे में जूते पहनकर ही अंदर घुस गई। जिस जगह पुलिस वाले खड़े थे, वहीं पर श्री गुरू ग्रंथ साहिब का पवित्र स्वरूप भी रखा हुआ था। इसका वीडियो सामने आते ही पंजाब में सिख संगठनों में गुस्सा है। उन्होंने इसे मर्यादा के उलट बताया है। पुलिस यहां गोलक को लेकर हुए विवाद के बाद आई थी। हालांकि इस बारे में अभी तक गुरुद्वारा कमेटी या अमेरिकी पुलिस की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि अमेरिका में रहने वाले कुछ लोगों का दावा है कि जूते भी अमेरिकी पुलिस की यूनिफॉर्म का हिस्सा हैं। ऑन ड्यूटी होने पर वह इसे नहीं उतार सकते। वहीं SGPC ने इस मामले में श्री अकाल तख्त साहिब से मामले की जांच करवाकर ऐसे हालात बनाने के दोषियों को तलब करने और उन पर कार्रवाई की मांग की है। जानिए क्या है पूरा मामला:- जानकारी के मुताबिक अमेरिका के फिलाडेल्फिया में गुरुद्वारा है। 19 मई को यहां पर गोलक में आए डॉलर और नोट गिने जा रहे थे। इस दौरान गिनती में अंतर को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। झगड़ा इतना बढ़ गया कि किसी ने फोन कर वहां अमेरिकी पुलिस बुला ली। पुलिस वाले सीधे गुरुद्वारे के अंदर आ गए। इस दौरान भी 2 पक्षों में वहां बहस होती दिखी। किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो रिकॉर्ड कर दिया। वीडियो में नजर आ रहा है कि जहां पर पुलिसकर्मी खड़ा है, वहीं पर श्री गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूप भी हैं। वहीं पास में ही डॉलर और नोट भी जमीन पर गिरे हुए हैं। इस दौरान अमेरिकी पुलिस का जवान लोगों को शांत करने की कोशिश कर रहा है। इस दौरान एक पुलिसकर्मी ने सिख मर्यादा के मुताबिक सिर भी नहीं ढका जबकि दूसरे ने टोपी पहन रखी थी। मनजीत जीके बोले- गोलक का झगड़ा निंदनीय, दूसरों को क्या कहेंगे दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने कहा- मैंने फिलाडेल्फिया का वीडियो देखा। यहां झगड़ा भी गोलक को लेकर हुआ। मैं समझता हूं कि इससे निंदनीय बात नहीं हो सकती कि गोलक का झगड़ा हो और उसके पीछे पुलिस आ जाए। पुलिस जूतों समेत नंगे सिर गुरुघर में आ जाती है। यही नहीं, श्री गुरू ग्रंथ साहिब के बिल्कुल आगे खड़ी हो जाती है, जहां हम माथा टेकते हैं। इस दौरान संगत उनसे गुजारिश करती है और प्रबंधक मौके से भाग जाते हैं। मुझे ये समझ नहीं आती, कि प्रबंधक गुरुघर के कस्टोडियन हैं। ये ऐसा काम क्यों करते हैं कि पुलिस अंदर आए। SGPC मेंबर बोले- सिख कौम की भावनाएं आहत हुईं इस बारे में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित गुरुद्वारा साहिब में पुलिस कर्मियों के जूते पहनकर आना दुखदाई और चिंताजनक है। इस वीडियो ने पूरी सिख कौम की भावनाओं को आहत किया है। गुरुद्वारा साहिब, जो श्रद्धा और मर्यादा का केंद्र होता है, वहां इस प्रकार की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्रेवाल ने कहा कि चाहे यह मामला गुरुद्वारे के प्रबंधन, गोलक या आपसी विवाद से जुड़ा हो, लेकिन गुरु साहिब की हजूरी में पुलिस का जूतों सहित खड़ा होना सिख परंपराओं और मर्यादा के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे हालात क्यों बने और इसके लिए जिम्मेदार लोग कौन हैं। उन्होंने संगत से भी सहयोग की अपील की, ताकि भविष्य में किसी भी गुरुद्वारा साहिब में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो और गुरुघर की मर्यादा हमेशा कायम रहे।
प्लेट छोड़िए, पत्ता अपनाइए, जानिए केले के पत्ते पर खाने के फायदे और परंपरा के पीछे का विज्ञान

Last Updated:May 21, 2026, 21:25 IST Benefits of Eating Food on Banana Leaves: दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा स्वास्थ्य, संस्कृति और पर्यावरण का अनूठा संगम माना जाता है. इसमें पत्ते की प्राकृतिक संरचना का उपयोग कर भोजन को अधिक स्वादिष्ट और सुरक्षित बनाया जाता है. गरम भोजन परोसने से पत्ते के प्राकृतिक यौगिक भोजन में मिलकर पाचन और इम्युनिटी को लाभ पहुंचाते हैं. पत्ते में मौजूद पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स गरम भोजन के संपर्क में आकर स्वास्थ्य लाभ देते हैं. यह परंपरा प्लास्टिक मुक्त और इको-फ्रेंडली है और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाती है. मंदिरों और घरों में इसका विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन करना स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कृति का अनूठा संगम माना जाता है. गरमा-गरम भोजन परोसने से पत्ते में मौजूद पॉलीफेनोल्स जैसे प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट भोजन में मिल जाते हैं जो पाचन और सेहत के लिए लाभकारी होते हैं. यह परंपरा केमिकल-मुक्त और इको-फ्रेंडली मानी जाती है और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है. इसके साथ ही यह मेहमान-नवाजी और समृद्धि का प्रतीक है. पत्ते को बिछाने, धोने और मोड़ने की प्रक्रिया में सांस्कृतिक शिष्टाचार भी जुड़ा होता है. दक्षिण भारतीय घरों और मंदिरों में इसका विशेष महत्व है और यह परंपरा आज भी प्रचलित है. केले के पत्तों में पॉलीफेनोल्स एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो ग्रीन टी में भी मौजूद होते हैं. जब गरम भोजन इन पत्तों पर परोसा जाता है तो इनमें मौजूद जैव सक्रिय यौगिक भोजन में मिल जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं. ये तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी को मजबूत करते हैं और पाचन तंत्र को सुधारते हैं. यह परंपरा सांस्कृतिक के साथ वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपयोगी मानी जाती है. केले के पत्तों का उपयोग पर्यावरण के लिए सुरक्षित और इको-फ्रेंडली है. यह भोजन को प्राकृतिक सुगंध भी प्रदान करते हैं स्वाद बढ़ाता है. होटलों या शादियों में अक्सर प्लास्टिक या धातु की प्लेटों को साफ करने के लिए डिटर्जेंट और केमिकल वाले डिशवॉशर का उपयोग किया जाता है, जिनके सूक्ष्म अंश सतह पर रह जाने की संभावना रहती है. इसके विपरीत, केले के पत्ते प्राकृतिक रूप से शुद्ध और केमिकल-मुक्त होते हैं. इन्हें इस्तेमाल करने से पहले केवल साफ पानी से हल्का धोना पर्याप्त होता है. इनमें किसी भी प्रकार का कृत्रिम कोटिंग या प्रसंस्करण नहीं होता, जिससे भोजन पूरी तरह प्राकृतिक सतह पर परोसा जाता है. यह न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी टिकाऊ और इको-फ्रेंडली विकल्प है. Add News18 as Preferred Source on Google केले के पत्ते की ऊपरी सतह पर प्राकृतिक रूप से एक मोम जैसी पतली परत पाई जाती है. जब इस पर गरमा-गरम भोजन जैसे चावल, सांभर या रसम परोसा जाता है तो यह परत हल्की गर्मी से सक्रिय होकर भोजन में एक खास सुगंध और स्वाद जोड़ देती है. इससे खाने का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है और एक पारंपरिक देसी अनुभव मिलता है. यह प्राकृतिक प्रक्रिया भोजन को हल्की सौंधी खुशबू प्रदान करती है जो इंद्रियों को आकर्षित करती है. यही कारण है कि दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन करना स्वाद और संस्कृति दोनों के लिए विशेष माना जाता है. केले के पत्ते पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में माने जाते हैं और डिस्पोजेबल प्लास्टिक या थर्माकोल की प्लेटों का बेहतरीन विकल्प हैं. इनका उपयोग एक बार भोजन परोसने के बाद किया जाता है, जिसके बाद इन्हें आसानी से नष्ट किया जा सकता है. ये प्राकृतिक रूप से जल्दी सड़कर मिट्टी में मिल जाते हैं और कुछ समय बाद जैविक खाद में बदल जाते हैं. इससे न तो प्लास्टिक कचरा बढ़ता है और न ही पर्यावरण प्रदूषण होता है. यह परंपरा टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देती है और प्रकृति संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर भोजन परोसने की परंपरा के पीछे सांस्कृतिक और व्यावहारिक मान्यताएं हैं. पत्ता हमेशा इस तरह बिछाया जाता है कि उसका चौड़ा हिस्सा दाईं ओर और नुकीला हिस्सा बाईं ओर रहे. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अधिकतर लोग दाएं हाथ से भोजन करते हैं जिससे दाईं ओर अधिक जगह मिलती है और चावल व मुख्य व्यंजन आसानी से परोसे जाते हैं. पत्ते के ऊपरी हिस्से में नमक, अचार, चटनी, सूखी सब्जियां और मिठाई रखी जाती हैं. निचले हिस्से में चावल, सांबर और रसम जैसे मुख्य व्यंजन परोसे जाते हैं. यह परंपरा स्वाद और व्यवस्था दोनों को संतुलित बनाती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
गर्मियों में कूलिंग टिप्स: घर में नहीं है एसी या लैपटॉप? भारी गर्मी में मसाला को ठंडी बनायेगी ये एक चीज, पोछे के पानी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है

अगर आपके घर में भी एसी या लैपटॉप नहीं है तो एक चीज आपकी मदद कर सकती है, वो है फिटकरी। पोछा बनाने वाले पानी में फिटकरी मिलाने से लेकर देर तक ठंडा एहसास होता है। साथ ही घर में ताजगी भी रहती है। छवि: फ्रीपिक एक बाल्टी ठंडा या सामान्य पानी लें। इसमें फिटकरी का छोटा टुकड़ा दाल या छोटा फिटकरी पाउडर मिला लें। फ़्लोरिडा तो कुछ बल्बें नींबू या गुलाब जल की भी डाल सकते हैं। अब इस पानी से पूरे घर में पोछा क्षेत्र। छवि: एआई फिटकरी वाले पानी के सामान को जल्दी ठंडा करने में मदद मिलती है और मछली को भी थोड़ा कम लगता है। छवि: फ्रीपिक फिटकरी में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सुपरमार्केट की कुछ समय तक बनाए रखने में मदद करते हैं। विशेष रूप से मिश्रित और टाइल्स वाले एसएएम पर प्रभाव अधिक महसूस होता है। छवि: एआई जब आलमारी ठंडी रहती है तो का तापमान भी असुंदर आरामदायक महसूस होता है। इससे संबंधित कम जानकारी है। छवि: फ्रीपिक फिटकरी वाला पानी को कम करने में मदद करता है। यह घर का ताज़ा ताज़ा लगता है। फिटकरी में व्हीस विरोधी-सतत् गुण होते हैं, जिससे ई-सफ़ाई की सफाई बेहतर होती है। छवि: एआई बहुत ज्यादा फिटकरी का इस्तेमाल नहीं किया जाता। संगमरमर या लकड़ी के टुकड़े पर पहले थोड़ा परीक्षण कर लें। बच्चों और सामान की पहुंच से फिटकरी दूर। छवि: मेटा एआई दिन में ऑर्थोडॉक्स पर मोटोरोला स्कर्ट रहता है। शाम के समय खोले गए सामान ताकि हवा सुरक्षित रहे। कमरे में पानी से भरी बाल्टी या औषधियों का उपयोग करें। छवि: एआई अगर आप भी बिना एसी और पावर के घर को थोड़ा ठंडा और आरामदायक रखना चाहते हैं, तो फिटकरी वाला ये आसान घरेलू उपाय जरूर आजमाएं। कम खर्च में यह उपाय गर्मी और मित्र दोनों को राहत से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)समर फ्लोर कूलिंग टिप्स(टी)फ्लोर क्लीनिंग DIY(टी)फिटकरी का उपयोग(टी)फिटकारी का पोचा लगाने के फायदे(टी)फर्श सफाई टिप्स(टी)होम कूलिंग टिप्स(टी)समर होम कूलिंग टिप्स
रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?
रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?
बादाम केसर ठंडाई ड्रिंक रेसिपी: गरमा गरम घर पर पहले से तैयार बाजार में जैसी बादाम-केसर वाली ठंडी, बनाएं ही हो जाएं कूल-कूल

सामग्री: 1 किलो दूध, 20 बादाम, 1 बड़ा चम्मच खरबूजे के बीज, 1 बड़ा चम्मच, 1 छोटा चम्मच खसखस, 4 काली मिर्च, 5 इलायची, 10 केसर के टुकड़े, 5 बड़ा चम्मच चीनी, 1 बड़ा चम्मच गुलाब जल, बर्फ के टुकड़े, बादाम-पिस्ता छवि: फ्रीपिक सबसे पहले बादाम को 2-3 घंटे पानी में डुबोएं। इसके बाद बादाम का छिलका हटा दिया गया। पिस्सू में बादाम, खरबुजे के बीज, सौंफ, खसखस, काली मिर्च और इलायची के टुकड़े, पानी के टुकड़े और स्टॉक पेस्ट तैयार कर लें। छवि: एआई अब एक पोटैशियम में दूध और सम्मिलित पेस्ट मिलाप तैयार करें। इसके बाद चीनी, केसर और गुलाब जल स्मारक से मिश्रण करें। अगर आप ज्यादा ठंडा स्वाद चाहते हैं तो इसमें बर्फ के टुकड़े भी डाल सकते हैं. छवि: एआई अब ठंडी को 20-30 मिनट के लिए फ़्रिज़ में रखें ताकि इसका स्वाद और भी बढ़ जाए। बिना सोचे-समझे ठंडा बादाम-केसर ठंडाई के गिलास में और ऊपर से कटे हुए बादाम-केसर ठंडाई सर्व करें। छवि: एआई इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बेहद पसंद आता है। यह शरीर को गर्मी और लू से बचने में मदद करता है। बादाम से शरीर को ताकत और ऊर्जा मिलती है। छवि: फ्रीपिक सौंफ और इलायची पेट को ठंडा रखने में मदद मिलती है। केसर का स्वाद और शुभकामनाएँ दोनों पुनर्प्राप्त हैं। छवि: फ्रीपिक इस हीट होम पर बनी इस बादाम-केसर कूलाई को जरूर ट्राई करें और इसके साथ ठंडक भरा स्वाद का आनंद लें। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)बादाम-केसर वाली ठंडीई(टी)बादाम-केसर वाली ठंडीई रेसिपी(टी)बादाम ठंडाई(टी)केसर ठंडाई(टी)समर ड्रिंक(टी)कूलिंग ड्रिंक(टी)ठंडाई रेसिपी








