बादाम केसर ठंडाई ड्रिंक रेसिपी: गरमा गरम घर पर पहले से तैयार बाजार में जैसी बादाम-केसर वाली ठंडी, बनाएं ही हो जाएं कूल-कूल

सामग्री: 1 किलो दूध, 20 बादाम, 1 बड़ा चम्मच खरबूजे के बीज, 1 बड़ा चम्मच, 1 छोटा चम्मच खसखस, 4 काली मिर्च, 5 इलायची, 10 केसर के टुकड़े, 5 बड़ा चम्मच चीनी, 1 बड़ा चम्मच गुलाब जल, बर्फ के टुकड़े, बादाम-पिस्ता छवि: फ्रीपिक सबसे पहले बादाम को 2-3 घंटे पानी में डुबोएं। इसके बाद बादाम का छिलका हटा दिया गया। पिस्सू में बादाम, खरबुजे के बीज, सौंफ, खसखस, काली मिर्च और इलायची के टुकड़े, पानी के टुकड़े और स्टॉक पेस्ट तैयार कर लें। छवि: एआई अब एक पोटैशियम में दूध और सम्मिलित पेस्ट मिलाप तैयार करें। इसके बाद चीनी, केसर और गुलाब जल स्मारक से मिश्रण करें। अगर आप ज्यादा ठंडा स्वाद चाहते हैं तो इसमें बर्फ के टुकड़े भी डाल सकते हैं. छवि: एआई अब ठंडी को 20-30 मिनट के लिए फ़्रिज़ में रखें ताकि इसका स्वाद और भी बढ़ जाए। बिना सोचे-समझे ठंडा बादाम-केसर ठंडाई के गिलास में और ऊपर से कटे हुए बादाम-केसर ठंडाई सर्व करें। छवि: एआई इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को बेहद पसंद आता है। यह शरीर को गर्मी और लू से बचने में मदद करता है। बादाम से शरीर को ताकत और ऊर्जा मिलती है। छवि: फ्रीपिक सौंफ और इलायची पेट को ठंडा रखने में मदद मिलती है। केसर का स्वाद और शुभकामनाएँ दोनों पुनर्प्राप्त हैं। छवि: फ्रीपिक इस हीट होम पर बनी इस बादाम-केसर कूलाई को जरूर ट्राई करें और इसके साथ ठंडक भरा स्वाद का आनंद लें। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)बादाम-केसर वाली ठंडीई(टी)बादाम-केसर वाली ठंडीई रेसिपी(टी)बादाम ठंडाई(टी)केसर ठंडाई(टी)समर ड्रिंक(टी)कूलिंग ड्रिंक(टी)ठंडाई रेसिपी
सुदर्शन बोले-चेन्नई की बस देखने सड़क पर खड़ा रहता था:आज उनके खिलाफ खेलना खास, शुभमन गिल को बताया मास्टरमाइंड

गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज साई सुदर्शन ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब वह सिर्फ चेन्नई सुपर किंग्स की टीम बस देखने के लिए स्कूल के बाहर सड़क पर खड़े रहते थे। आज IPL में गुजरात का मुकाबला चेन्नई से होना है। मैच से पहले सुदर्शन ने जियोस्टार से बातचीत में अपनी भावनाएं साझा कीं। सुदर्शन ने कहा, क्रीज पर समय बिताना हमेशा खास होता है, खासकर जब मैं चेन्नई के खिलाफ खेलता हूं। चाहे कुछ भी कहा जाए, चेन्नई के साथ मेरा एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। मैं चेन्नई को खेलते हुए देखकर बड़ा हुआ हूं। उन्होंने आगे कहा, हम स्कूल के पास सड़क पर सिर्फ उनकी टीम बस को गुजरते देखने के लिए खड़े हो जाया करते थे। वो यादें आज भी बेहद खास हैं। भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे चेन्नई के खिलाफ कुछ यादगार पारियां खेलने का मौका मिला। सुदर्शन ने अपना पहला शतक चेन्नई के खिलाफ ही लगाया सुदर्शन ने मई 2023 के IPL फाइनल में चेन्नई के खिलाफ 96 रन बनाए थे। यह उस सीजन की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। इसके बाद 2024 में सुदर्शन ने इसी टीम के खिलाफ अपना पहला IPL शतक लगाया। यह उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया। कप्तान शुभमन गिल के साथ साझेदारी और तालमेल कप्तान शुभमन गिल के साथ अपनी साझेदारी और समझ को लेकर सुदर्शन ने कहा, शुभमन एक मास्टरमाइंड हैं। वे खेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं। उनके साथ होने से आपको कुछ भी करने की आजादी मिलती है क्योंकि आपको पता होता है कि शुभमन वहां मौजूद हैं। मुझे लगता है कि इसका उल्टा भी उतना ही सच है, जब वे गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता होता है कि मैं वहां हूं और पारी को संभाल हमारे बीच बेहतरीन संबंध हैं, हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। बल्लेबाजों को भी खुद को बदलना होगा इस सीजन धीमी शुरुआत पर सुदर्शन ने कहा, मैं चीजों को जितना हो सके खुला रखने की कोशिश करता हूं। अगर मैच अच्छा रहा है, तो हां, हम उस आत्मविश्वास को आगे ले जा सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ है, तो हम आगामी मैचों के लिए अपने दिमाग को जितना संभव हो उतना फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं। यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि खेल कैसे बदल रहा है क्योंकि टी-20 क्रिकेट बहुत तेजी से बदलता है। बल्लेबाजों के रूप में हमें पता होना चाहिए कि टीम या स्थिति की मांग के अनुसार खुद को ढाल सकें। अगर हम ऐसा करने में सक्षम हैं, तो मुझे लगता है कि यह सबसे अच्छी बात है।
सुदर्शन बोले-चेन्नई की बस देखने सड़क पर खड़ा रहता था:आज उनके खिलाफ खेलना खास, शुभमन गिल को बताया मास्टरमाइंड

गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज साई सुदर्शन ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब वह सिर्फ चेन्नई सुपर किंग्स की टीम बस देखने के लिए स्कूल के बाहर सड़क पर खड़े रहते थे। आज IPL में गुजरात का मुकाबला चेन्नई से होना है। मैच से पहले सुदर्शन ने जियोस्टार से बातचीत में अपनी भावनाएं साझा कीं। सुदर्शन ने कहा, क्रीज पर समय बिताना हमेशा खास होता है, खासकर जब मैं चेन्नई के खिलाफ खेलता हूं। चाहे कुछ भी कहा जाए, चेन्नई के साथ मेरा एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। मैं चेन्नई को खेलते हुए देखकर बड़ा हुआ हूं। उन्होंने आगे कहा, हम स्कूल के पास सड़क पर सिर्फ उनकी टीम बस को गुजरते देखने के लिए खड़े हो जाया करते थे। वो यादें आज भी बेहद खास हैं। भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे चेन्नई के खिलाफ कुछ यादगार पारियां खेलने का मौका मिला। सुदर्शन ने अपना पहला शतक चेन्नई के खिलाफ ही लगाया सुदर्शन ने मई 2023 के IPL फाइनल में चेन्नई के खिलाफ 96 रन बनाए थे। यह उस सीजन की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। इसके बाद 2024 में सुदर्शन ने इसी टीम के खिलाफ अपना पहला IPL शतक लगाया। यह उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया। कप्तान शुभमन गिल के साथ साझेदारी और तालमेल कप्तान शुभमन गिल के साथ अपनी साझेदारी और समझ को लेकर सुदर्शन ने कहा, शुभमन एक मास्टरमाइंड हैं। वे खेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं। उनके साथ होने से आपको कुछ भी करने की आजादी मिलती है क्योंकि आपको पता होता है कि शुभमन वहां मौजूद हैं। मुझे लगता है कि इसका उल्टा भी उतना ही सच है, जब वे गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता होता है कि मैं वहां हूं और पारी को संभाल हमारे बीच बेहतरीन संबंध हैं, हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। बल्लेबाजों को भी खुद को बदलना होगा इस सीजन धीमी शुरुआत पर सुदर्शन ने कहा, मैं चीजों को जितना हो सके खुला रखने की कोशिश करता हूं। अगर मैच अच्छा रहा है, तो हां, हम उस आत्मविश्वास को आगे ले जा सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ है, तो हम आगामी मैचों के लिए अपने दिमाग को जितना संभव हो उतना फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं। यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि खेल कैसे बदल रहा है क्योंकि टी-20 क्रिकेट बहुत तेजी से बदलता है। बल्लेबाजों के रूप में हमें पता होना चाहिए कि टीम या स्थिति की मांग के अनुसार खुद को ढाल सकें। अगर हम ऐसा करने में सक्षम हैं, तो मुझे लगता है कि यह सबसे अच्छी बात है।
चेहरा चमकाने के लिए स्किन में इंजेक्शन घुसेड़ा तो खैर नहीं, ब्यूटी क्लिनिकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, लड़कियां भी ध्यान दें

CDSCO Warn against Injectable Cosmetic Products: शहरों में ब्यूटी क्लिनिकों की कोई कमी नहीं है. ऐसे कई ब्यूटी क्लिनिक मिल जाएंगे जहां दावा किया जाएगा कि हमारे पास प्रतिष्ठित संस्थानों से ट्रेंड डर्मेटोलॉजिस्ट है. कुछ क्लिनिकों में चेहरे काया पलट करने के लिए खास सलाह दी जाती है. इसमें कहा जाता है कि जो क्रीम आप चेहरे पर लगाते हैं वह जल्दी असर नहीं करती, इसलिए इसका इंजेक्शन लगा लीजिए. कुछ लोग इस झांसे में आ जाते हैं और झट से इस इंजेक्शन को लगा लेते हैं. इस प्रैक्टिस पर सख्त नराजगी जताते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO ने एक नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में कहा गया है कि किसी भी हाल में कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में मंजूरी नहीं है. इसलिए यदि कोई ब्यूटी क्लीनिक ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्स से सख्त कार्रवाई की जाएगी. कॉस्मेटिक का इस्तेमाल इंजेक्शन के लिए नहीं दरअसल, कई ऐसी शिकायतें आ रही थी जिनमें किसी व्यक्ति ने चेहरे में इंजेक्शन लगाया और उसे कई तरह की परेशानियां हो गईं. इसी के बाद CDSCO ने यह नोटिस जारी की. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ ने साफ किया है कि किसी भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कोई कंपनी, क्लीनिक या विक्रेता कॉस्मेटिक उत्पादों को इंजेक्शन के जरिए इस्तेमाल करने का दावा करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. भारत के औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि कॉस्मेटिक कंपनियां ऐसे दावे नहीं कर सकतीं जो लोगों को गुमराह करें. किसी भी उत्पाद के लेबल, पैकेजिंग या विज्ञापन में झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर या इलाज जैसे दावे करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध सरकार ने स्पष्ट किया है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कॉस्मेटिक वे उत्पाद हैं, जो शरीर पर लगाने, छिड़कने या बाहरी इस्तेमाल के लिए होते हैं. इनका उद्देश्य केवल सफाई, सुंदरता बढ़ाना और आकर्षक दिखाना है. इन्हें इलाज या इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. नोटिस में यह भी कहा गया है कि असुरक्षित या प्रतिबंधित सामग्री वाले कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल और कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध है. सीडीएससीओ ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं कॉस्मेटिक उत्पादों का गलत इस्तेमाल, भ्रामक प्रचार या इंजेक्शन के जरिए उपयोग होता दिखे, तो इसकी जानकारी तुरंत नियामक एजेंसियों या राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को दें. अधिकारियों के मुताबिक यह चेतावनी खास तौर पर एस्थेटिक, ब्यूटी और वेलनेस क्लीनिकों के लिए अहम है, जहां स्किन ग्लो, एंटी-एजिंग और ब्यूटी ट्रीटमेंट के नाम पर इंजेक्शन आधारित प्रक्रियाएं की जा रही हैं. सीडीएससीओ के पास हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है. क्यों खतरनाक हैं ये ब्यूटी इंजेक्शन हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो किसी भी तरह के कॉस्मेटिक प्रोडेक्ट में कई तरह के केमिकल होते हैं. इसलिए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को इस तरह से बनाया जाता है कि इसमें मौजूद खतरनाक भारी मेटल स्किन के अंदर न घुसे. अगर स्किन की सतह पर लगाए जाने वाले कॉस्मेटिक्स को सीधे इंजेक्शन के जरिए स्किन की भीतरी परतों में डाल दिया जाए, तो यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है. यह कोशिकाओं के स्तर पर विनाशकारी साबित हो सकता है. इसके कई कारण है. इन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में पैराबेंस, फेथलेट्स, फॉर्मलडिहाइड, मर्करी, पारा, लेड, सीसा जैसे अत्यंत हानिकारक तत्व होते हैं. इसलिए इसमें सिलिकॉन और मिनिरल ऑयल मिले होते हैं तो त्वचा में लगाने के साथ तुरंत एक सिंथेटिक परत बना लें लेकिन जब ये भारी टॉक्सिक तत्व स्किन के अंदर घुस जाएंगे तो खून में पहुंचकर किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचाने लगते है. मर्करी, लेड जैसे तत्व सीधे नर्वस सिस्टम को अटैक करते हैं. फॉर्मेल्डिहाइड जैसे तत्व कैंसर का कारण भी बन सकता है. कभी-कभी गलत डोज के कारण चेहरा संवारने के बजाय चेहरा बदसूरत होने लगता है. गलत डोज या गलत तरीके से सुई लगाने से चेहरे पर परमानेंट निशान, सूजन या पैरालिसिस तक हो सकता है. लड़कियां खास ध्यान दें इन ब्यूटी क्लिनिकों में अधिकांश लड़कियां जाती हैं. उन्हें इस बात पर खास ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि उन्हें नहीं पता होता है कि कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में लेने के बाद इसका क्या अंजाम होता है. अगर कोई इंजेक्शन या लेजर ट्रीटमेंट का सुझाव दे रहा है, तो पहले सुनिश्चित करें कि वह डर्मेटोलॉजिस्ट है या नहीं. उसका लाइसेंस देखें, उस क्लिनिक के पास हेल्थ डिपार्टमेंट से सर्जिकल या कॉस्मेटिक प्रक्रिया का लाइसेंस है या नहीं यह भी देखना चाहिए. आप किस डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं, उसके बारे में सब कुछ पहले पता करें. सबसे बेहतर यही है कि नेचुरल पर भरोसा करें. इंस्टेंट निखार के बजाय अच्छी डाइट, पर्याप्त पानी, नींद और तनाव रहित जीवन को अपनाएं.
सोनाक्षी सिन्हा-जहीर इकबाल ने बनाया मेलोडी टॉफी पर वीडियो:पीएम मोदी ने मेलोनी को गिफ्ट की टॉफी; सोशल मीडिया पर शुरू हुआ मेलोडी ट्रेंड

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा और उनके पति जहीर इकबाल सोशल मीडिया पर चल रहे ‘मेलोडी’ ट्रेंड में शामिल हो गए हैं। दोनों ने बुधवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक मजेदार वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में जहीर मेलोडी टॉफी की मशहूर टैगलाइन बोलते नजर आ रहे हैं। दरअसल, यह पूरा ट्रेंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी देने के बाद शुरू हुआ है। जॉइंट इंस्टाग्राम पोस्ट में शेयर किए गए इस वीडियो में सोनाक्षी अपने पति जहीर से पूछती हैं, “तुम क्या पूछना चाहते हो?” इस पर जहीर जवाब देते हैं, “तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं।” जब सोनाक्षी चिढ़ाते हुए कहती हैं “नहीं”, तो जहीर तुरंत अपनी जेब से मेलोडी टॉफी निकालते हैं और कहते हैं, “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।” पीएम मोदी और मेलोनी के वीडियो से शुरू हुआ ट्रेंड इस मेलोडी ट्रेंड का बैकग्राउंड काफी दिलचस्प है। हाल ही में इंस्टाग्राम पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में दोनों नेताओं के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत हो रही थी। जी-7 समिट या द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान भारत की तरफ से इटली को मेलोडी टॉफी का एक पैकेट गिफ्ट किया गया था। इसके बाद से ही यह मामला चर्चा में आया। ‘मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ’ की कहानी वीडियो में इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी कहती हैं, “प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक गिफ्ट लेकर आए हैं, यह बहुत अच्छी टॉफी है।” इस पर पीएम मोदी हंसते हुए कहते हैं, “मेलोडी।” इसके बाद दोनों नेता हंसने लगते हैं। दोनों देशों के बड़े नेताओं के बीच हुई इस बातचीत के बाद से ही सोशल मीडिया पर मेलोडी को लेकर अलग-अलग रील्स और वीडियो बनाने का ट्रेंड शुरू हो गया, जिसमें अब बॉलीवुड के ये सेलिब्रिटीज भी शामिल हो रहे हैं। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की थी शादी बता दें कि सोनाक्षी और जहीर ने साल 2024 में ‘स्पेशल मैरिज एक्ट’ के तहत शादी की थी। यह कानून अलग-अलग धर्मों के लोगों को बिना धर्म बदले शादी करने की अनुमति देता है। चूंकि यह एक अंतरधार्मिक विवाह था, इसलिए सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी चर्चा और बहस हुई थी। सलमान खान की पार्टी में हुई थी पहली मुलाकात सोनाक्षी और जहीर की लव स्टोरी करीब 10 साल पुरानी है। दोनों की पहली मुलाकात साल 2016 में सलमान खान की एक पार्टी में हुई थी। यहीं से उनकी दोस्ती शुरू हुई, जो समय के साथ और मजबूत होती गई। साल 2017 से दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया।
तमिलनाडु और बंगाल में वंदे मातरम विवाद: भारत की ‘राजनीतिक प्लेलिस्ट’ पर पार्टियां क्यों लड़ रही हैं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:21 मई, 2026, 16:41 IST प्रोटोकॉल के अनुसार, जब कई राष्ट्रगान गाए जाते हैं, तो राष्ट्रीय गीत या राष्ट्रगान को आधिकारिक अनुक्रम में शामिल किया जाना चाहिए एक साधारण ऑडियो ट्रैक एक बड़े राजनीतिक तूफान को जन्म दे सकता है, इसका कारण भारतीय संघवाद की नाजुक बनावट है। (प्रतीकात्मक छवि) भारत की सांस्कृतिक और संघीय राजनीति राष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रतीकों के क्रम, क्रम और प्रवर्तन को लेकर एक नाटकीय मोड़ पर पहुंच गई है। पश्चिम बंगाल में, नई भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के तहत मदरसा शिक्षा निदेशालय ने एक व्यापक निर्देश जारी किया है, जिसमें सुबह की सभाओं के दौरान वंदे मातरम गाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे इन संस्थानों को सभी राज्य स्कूलों के लिए पहले से अनिवार्य समान कोड के तहत लाया गया है। इसके साथ ही तमिलनाडु में एक हाई-प्रोफाइल शपथ ग्रहण समारोह के दौरान भयंकर प्रोटोकॉल युद्ध छिड़ गया है। कई दिनों में दूसरी बार, अभिनेता-राजनेता जोसेफ सी विजय के नेतृत्व वाली नवगठित सरकार से जुड़े लोक भवन कार्यक्रम में राज्य के आह्वान गीत, तमिल थाई वाज़्थु से पहले वंदे मातरम का प्रदर्शन किया गया। इस संरचनात्मक पुनर्व्यवस्था ने क्षेत्रीय दलों की उग्र प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है, जिसने भारत की देशभक्ति की धुनों को नियंत्रित करने वाले जटिल कानूनी पदानुक्रम पर ध्यान केंद्रित किया है। भारतीय कानून के तहत वंदे मातरम की आधिकारिक कानूनी स्थिति क्या है? वर्तमान बहु-राज्य संवैधानिक बहस को समझने के लिए, किसी को 24 जनवरी, 1950 को भारत की संविधान सभा द्वारा पारित ऐतिहासिक फैसले को देखना चाहिए। सत्र की अध्यक्षता करते हुए, भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक निश्चित वक्तव्य दिया, जिसने देश के देशभक्ति संगीत के लिए कानूनी ढांचा स्थापित किया। उन्होंने घोषणा की कि जहां रवींद्रनाथ टैगोर का जन गण मन आधिकारिक राष्ट्रगान के रूप में काम करेगा, वहीं बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के ऐतिहासिक स्वतंत्रता गान, वंदे मातरम, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, को समान रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए और राष्ट्रगान के बराबर दर्जा दिया जाना चाहिए। इस राष्ट्रपति के आदेश ने वंदे मातरम को भारत के आधिकारिक राष्ट्रीय गीत के रूप में स्थापित किया, जिससे इसे मानक क्षेत्रीय या राज्य गीतों से अलग एक अद्वितीय, पवित्र संवैधानिक स्थान प्राप्त हुआ। प्रोटोकॉल पदानुक्रम राष्ट्रीय और राज्य गीतों के अनुक्रम को कैसे व्यवस्थित करता है? चेन्नई में चल रहा टकराव लंबे समय से चले आ रहे क्षेत्रीय सम्मेलन और संघीय सलाहकार प्रोटोकॉल के बीच सीधे टकराव से उत्पन्न हुआ है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्ट दिशानिर्देशों और ऐतिहासिक राज्य प्रोटोकॉल के अनुसार, सभी औपचारिक संवैधानिक और राज्य कार्यों में राष्ट्रीय प्रतीकों को पूर्ण प्राथमिकता दी जाती है। जब एक से अधिक गान गाए जाते हैं, तो राष्ट्रीय गीत या राष्ट्रगान को आधिकारिक अनुक्रम का आधार बनाना चाहिए। पारंपरिक राज्य प्रोटोकॉल तय करता है कि एक राज्य मंगलाचरण गीत, जैसे कि तमिल थाई वाज़्थु, एक स्थानीय सांस्कृतिक आह्वान के रूप में कार्य करता है और इसलिए यदि इसे शुरुआत में बजाया जाता है या अनिवार्य समापन कोड के लिए रास्ता दिया जाता है, तो इसे व्यापक राष्ट्रीय प्रतीकों से पहले होना चाहिए। शपथ ग्रहण समारोह में राष्ट्रीय गीत के पीछे राज्य गान को शामिल करने को संघीय समर्थकों द्वारा राष्ट्रीय मिसाल के सख्त पालन के रूप में देखा जाता है, जबकि क्षेत्रीय दल इस पुनर्व्यवस्था को राज्य की पहचान के प्रत्यक्ष क्षरण के रूप में व्याख्या करते हैं। क्या कोई सरकार कानूनी तौर पर संस्थानों को राष्ट्रीय गीत गाने के लिए बाध्य कर सकती है? पश्चिम बंगाल का शासनादेश मदरसों को वंदे मातरम के अनिवार्य गायन को लागू करने के लिए बाध्य करता है, जो सीधे तौर पर अत्यधिक जटिल संवैधानिक ग्रे जोन में आता है। जबकि राज्य सरकार शैक्षिक एकरूपता सुनिश्चित करने के उपाय के रूप में आदेश का बचाव करती है, उसे बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य मामले में 1986 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक उदाहरण द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण न्यायिक बाधा का सामना करना पड़ता है। उस ऐतिहासिक फैसले में, शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया कि किसी छात्र को उनकी कर्तव्यनिष्ठ धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ सक्रिय रूप से राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर करना संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त अंतरात्मा और धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है, बशर्ते वे खड़े होकर उचित सम्मान दिखाएं। इसके अलावा, कानूनी परिदृश्य 1937 के ऐतिहासिक समझौते से जटिल है, जो धर्मनिरपेक्ष सद्भाव बनाए रखने के लिए वंदे मातरम के केवल पहले दो छंदों को गाने की सिफारिश करता है, क्योंकि बाद के छंदों में जटिल प्रतीकात्मक संदर्भ होते हैं जो अल्पसंख्यक समुदायों के बीच धार्मिक बहस को भड़काते हैं। क्षेत्रीय पहचान के लिए गानों का क्रम शून्य-काल का फ्लैशप्वाइंट क्यों बन गया है? एक साधारण ऑडियो ट्रैक एक बड़े राजनीतिक तूफान को जन्म दे सकता है, इसका कारण भारतीय संघवाद की नाजुक बनावट है। तमिलनाडु जैसे भाषा-आधारित पहचान की राजनीति के गहरे इतिहास वाले राज्यों में, तमिल थाई वाज़थु – जिसे आधिकारिक तौर पर 2021 में राज्य गीत घोषित किया गया है – को केवल एक संगीत विकल्प के रूप में नहीं माना जाता है; इसे क्षेत्रीय संप्रभुता और सांस्कृतिक गौरव के एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में देखा जाता है। जब जोसेफ सी विजय की नवगठित सरकार वंदे मातरम को औपचारिक कार्यक्रम के शीर्ष पर रखकर संघीय सलाह को समायोजित करती है, तो यह एक तीव्र राजनीतिक दुविधा पैदा करती है। प्रशासनिक ढांचे के लिए, यह राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के साथ एक संरेखण का प्रतिनिधित्व करता है; क्षेत्रीय गठबंधनों के लिए, यह एक प्रतीकात्मक वापसी का प्रतिनिधित्व करता है, जो यह साबित करता है कि आधुनिक भारतीय राजनीति में, एक गीत का क्रम राजनीतिक अधिकार का एक उच्च-स्तरीय दावा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया तमिलनाडु और बंगाल में वंदे मातरम विवाद: भारत की ‘राजनीतिक प्लेलिस्ट’ पर पार्टियां क्यों लड़ रही हैं? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते
मेलोडी टॉफ़ी रेसिपी: बाज़ार में चिप्स मिल रही मेलोडी? घर पर मिनट में तैयार करें क्लासिक ही चौको टॉफी, नोट करें आसान रेसिपी

21 मई 2026 को 14:56 IST पर अद्यतन किया गया मेलोडी टॉफी रेसिपी: बाजार में मिलने वाली बच्चों और बड़ों की पसंदीदा ‘मेलोडी’ चॉकलेट टॉफी अब आप बेहद आसानी से और कम खर्च में घर पर ही तैयार कर सकते हैं। अगर बाजार के दाम आपकी जेब पर भारी हैं, तो इस सिंपल रेसिपी की मदद से आप मिंटों में बिल्कुल सही चॉकलेट-चॉकलेट साधारण घर की रसोई में ला सकते हैं। अनुसरण करना : आप यहां ‘मेलोडी घर इतनी चॉकलेटी क्यों है’ वाला स्वाद पा सकते हैं। यह बच्चों के लिए सुरक्षित और आपके बजट के लिए उपयुक्त है। दूध और कोको पाउडर, मक्खन, दूध, कंडेनड मिल्क, कैरामेल मसाला, चीनी आदि लें। छवि: मेटा एआई एक मक्खन वाले पैन में मक्खन। इसमें दूध और चीनी मिट्टी के बरतन पर आधारित जब तक चीनी खो न जाए। अब इसमें मिल्क पाउडर और कोको पाउडर डालें और लगातार बनाते रहें। छवि: मेटा एआई अब इसमें कैंडीड और मिल्क वेनिला एसेंस मिलाएं। यह टॉफी को वह खास बाजार जैस और पिज्जानेस देता है। छवि: मेटा एआई एक छोटे पैन में कैरामेल सॉस और एक दूध गर्म करके पिज्जा और स्टिक ग्लास तैयार कर लें। यही वो राज है जो आपकी टॉफी को ‘चॉकलेटी’ बनाता है। छवि: मेटा एआई हाथों पर घी और मिश्रण का छोटा हिस्सा लेकर गोल करें। बीच में कैरेमल स्थान और टॉफ़ी का वज़न आकार। टॉफियों को 1 घंटे के लिए फ़िरोज़ में सेट किया गया। बटर पेपर में लपेटकर एयरटाइट में जगह। छवि: मेटा एआई टॉफ़ी को फ़िरोज़ में रखने से यह 15 दिन तक रहता है और फिर मेलोडी खायी और खुद जान जाती है। छवि: इंस्टाग्राम द्वारा प्रकाशित: आर्या पांडे प्रकाशित 21 मई 2026 14:56 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)पीएम मोदी इटली यात्रा(टी)जियोर्जिया मेलोनी मेलोडी वीडियो(टी)मोदी मेलोनी वायरल वीडियो(टी)मेलोडी चॉकलेट टॉफी रेसिपी(टी)घर पर बनी कॉफी टॉफी(टी)घर पर मेलोडी चॉकलेट कैसे बनाएं(टी)10 मिनट की कॉफी टॉफी रेसिपी(टी)कंडेंस्ड मिल्क टॉफी रेसिपी(टी)ट्रेंडिंग मेलोडी चॉकलेट न्यूज(टी)इजी चॉकलेट रेसिपी हिंदी में
लू लगने पर पैरासिटामोल क्यों हो जाती है बेअसर, हीट स्ट्रोक का शिकार होने पर क्या करें, यहां जानें सबकुछ

Last Updated:May 21, 2026, 14:36 IST Heat Stroke Prevention Tips: हीट स्ट्रोक एक इमरजेंसी कंडीशन है, जिसमें शरीर का टेंपरेचर 40 डिग्री या इससे ज्यादा हो जाता है. डॉक्टर्स के अनुसार हीट स्ट्रोक होने पर शरीर को तुरंत ठंडा करना और मेडिकल मदद लेना जरूरी है, वरना व्यक्ति की जान जा सकती है. हीट स्ट्रोक में पैरासिटामोल दवा भी काम नहीं करती है, क्योंकि कोर टेंपरेचर बाहरी कारणों से बढ़ता है. गर्मी हीट स्ट्रोक से बचने के लिए धूप में बाहर न निकलें. Can Paracetamol Help in Heat Stroke: देश के कई हिस्सों में इस वक्त गर्मी से बुरा हाल है. आसमान से आग बरस रही है और गर्म हवाएं लोगों का जीना मुश्किल कर रही हैं. कई जगहों पर भीषण हीटवेव यानी लू चल रही है. तेज धूप और अत्यधिक तापमान शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं. कई लोग लू लगने पर बुखार समझकर पैरासिटामोल खा लेते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक हीट स्ट्रोक में यह दवा अक्सर असरदार नहीं होती. ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि लू लगने और सामान्य बुखार में क्या फर्क होता है और हीट स्ट्रोक की स्थिति में तुरंत क्या करना चाहिए. लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया जब गर्म हवाएं और धूप के कारण हमारे शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है, तब इस कंडीशन को हीट स्ट्रोक कहा जाता है. हीट स्ट्रोक के कारण शरीर का कोर टेंपरेचर तेजी से बढ़कर 40°C या उससे ज्यादा हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा रखने में असफल हो जाता है. समय पर इलाज न मिलने पर यह हीट स्ट्रोक जानलेवा साबित हो सकता है. हीट स्ट्रोक के दौरान शरीर में कई गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं. इनमें तेज बुखार, चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, उल्टी, भ्रम की स्थिति, तेज धड़कन, ड्राई स्किन और बेहोशी शामिल हो सकते हैं. कई बार मरीज को पसीना आना भी बंद हो जाता है, जो गंभीर संकेत माना जाता है. लू लगने पर पैरासिटामोल क्यों नहीं करती असर? डॉक्टर के अनुसार पैरासिटामोल सामान्य बुखार में इसलिए काम करती है, क्योंकि वह शरीर के तापमान को कंट्रोल करने वाले ब्रेन के हिस्से पर असर डालती है. हीट स्ट्रोक में शरीर का तापमान संक्रमण की वजह से नहीं, बल्कि बाहरी गर्मी और शरीर की कूलिंग सिस्टम फेल होने की वजह से बढ़ता है. इसलिए पैरासिटामोल इस स्थिति में ज्यादा फायदा नहीं पहुंचाती है. हीट स्ट्रोक में पैरासिटामोल लेने से बचना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत ठंडी और छायादार जगह पर ले जाएं. शरीर का तापमान कम करने के लिए गीले कपड़े या ठंडे पानी की पट्टियां इस्तेमाल करें. पंखा या कूलर चलाएं और अगर व्यक्ति होश में है, तो उसे पानी या ORS पिलाने की कोशिश करें. किन लोगों को ज्यादा खतरा और कैसे करें बचाव? एक्सपर्ट की मानें तो छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग हीट स्ट्रोक के ज्यादा शिकार हो सकते हैं. जो लोग लंबे समय तक धूप में काम करते हैं, जैसे मजदूर, डिलीवरी वर्कर्स या ट्रैफिक पुलिस, उनमें भी इसका खतरा अधिक रहता है. हीट स्ट्रोक से बचने के लिए दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप में निकलने से बचना चाहिए. शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी, नारियल पानी, छाछ और ORS का सेवन करें. हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें और बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें. ज्यादा कैफीन और शराब से बचना भी जरूरी माना जाता है, क्योंकि इससे डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है. कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए? अगर किसी व्यक्ति का शरीर बहुत ज्यादा गर्म हो, वह बार-बार उल्टी कर रहा हो, बेहोश हो जाए या भ्रम की स्थिति में हो, तो तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी सेवा से संपर्क करना चाहिए. हीट स्ट्रोक को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है. सही समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है. गंभीर स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी होता है, क्योंकि हीट स्ट्रोक इमरजेंसी स्थिति मानी जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
DU PG कोर्सेज के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू:82 कोर्स में ले सकते हैं एडमिशन, जानें पूरी एप्लीकेशन प्रोसेस

दिल्ली विश्वविद्यालय यानी DU ने 2026-27 सत्र के लिए पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम्स में एडमिशन के लिए 16 मई से रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। रजिस्टर करने की आखिरी तारीख 7 जून है। यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कॉलेजों में पीजी कोर्स में एडमिशन लेने के इच्छुक छात्र अब ऑफिशियल एडमिशन पोर्टल पर अप्लाई कर सकते हैं। रजिस्ट्रार ऑफिस के मुताबिक, जो छात्र अभी अपने ग्रेजुएशन के तीसरे या चौथे साल में पढ़ रहे हैं, वे दो साल के मास्टर्स प्रोग्राम में अप्लाई कर सकते हैं। DU PG कोर्स में एडमिशन के लिए 50% मार्क्स जरूरी DU में PG कोर्स के लिए अप्लाई कर रहे UR/OBC-NCL/EWS कैटेगरी के छात्रों को UG क्वालिफाइंग एग्जाम में कम से कम 50% टोटल मार्क्स या उसके बराबर ग्रेड होना जरूरी है। वहीं, SC/ST/PwBD कैटेगरी के छात्रों के लिए क्वालिफाइंग एग्जाम में कम से कम 45% टोटल मार्क्स या उसके बराबर ग्रेड होना चाहिए। स्टूडेंट्स को जिस कोर्स में एडमिशन लेना है, उसकी एलिजिबिलिटी पूरी करने के साथ ही पीजी एडमिशन के लिए होने वाला कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट यानी CUET (PG)- 2026 एग्जाम देना जरूरी है। DU मास्टर्स में 82 कोर्स ऑफर कर रहा DU की टोटल 16 फैकल्टीज में करीब 6.5+ लाख स्टूडेंट्स हर साल पढ़ते हैं। यूनिवर्सिटी में 86 डिपार्टमेंट और 91 कॉलेज हैं। DU मास्टर्स में 82 कोर्स ऑफर करती है। पूरे कोर्स और फैकल्टी की लिस्ट देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें। 250 रुपए एप्लीकेशन फीस लगेगी अनारक्षित, OBC और EWS कैटेगरी के लिए अप्लीकेशन फीस 250 रुपए प्रति कोर्स है। SC/ST और PwBD के लिए एप्लीकेशन फीस 100 रुपए प्रति कोर्स ली जाएगी। इस बार यूनिवर्सिटी ने छात्रों के लिए एक नई सुविधा शुरू की है। अब DigiLocker/API Setu प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों की जानकारी जैसे नाम, जन्मतिथि, कैटेगरी, जेंडर, माता-पिता का नाम और CUET स्कोर अपने-आप जुड़ जाएंगे। DU के PG CSAS 2026 पोर्टल पर ऐसे करें रजिस्टर नोट: नए नियमों के मुताबिक, सारी डिटेल्स की बजाय सिर्फ डिजिलॉकर या API SETU के लिंक करने को कहा जा सकता है। इससे पोर्टल पर जरूरी जानकारी जैसे कैंडिडेट का नाम, D.O.B, CUET स्कोर, अपने आप अपलोड हो जाएगी। ये 4 डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें पोर्टल पर एडमिशन के आवेदन के 10 स्टेप्स यूनिवर्सिटी ने यह भी कहा है कि नई शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के तहत शुरू किए गए एक साल के PG प्रोग्राम्स के लिए जल्द ही अलग पोर्टल पर एप्लीकेशन शुरू होंगे। छात्रों को अपडेट के लिए admission.uod.ac.in वेबसाइट देखते रहने की सलाह दी गई है। DU में 27% OBC और SC/ST स्टूडेंट्स के लिए 22.5% सीटें आरक्षित DU के कॉलेजों में 27% सीटें OBC (सेंट्रल लिस्ट में नॉन क्रिमी लेयर) के लिए आरक्षित हैं। SC/ST के लिए टोटल 22.5% आरक्षित है, इनमें भी SC को 15% और ST को 7.5%। EWS कोटा के लिए भी 10% सीटें आरक्षित हैं, लेकिन EWS सर्टिफिकेट 31 मार्च 2026 के बाद का अपडेटेड होना चाहिए। PwBD कैंडिडेट्स के लिए हर कोर्स में 5% सीटों आरक्षित हैं। इनके लिए अलग से सीट एलोकेशन रिजल्ट डिकलेयर किया जाएगा। स्टोरी – सोनाली राय ——————— ये खबर भी पढ़ें… कीड़ों की तरह रेंगकर शिक्षा मंत्री आवास पहुंचे कैंडिडेट्स:यूपी 69000 शिक्षक भर्ती रिजर्वेशन घोटाले के खिलाफ कैंडिडेट्स का अनोखा प्रदर्शन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कैंडिडेट्स कीड़ों की तरह रेंगकर यूपी शिक्षा मंत्री के आवास पहुंच रहे हैं। इसका वीडियो सोशल मीडिया वायरल हो रहा है। कैंडिडेट्स यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती की मांग के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। साथ ही कैंडिडेट्स इस तरह से चीफ जस्टिस के ‘कॉकरोज’ वाले बयान का भी प्रतिकात्मक विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने कीड़ा समझा, इसीलिए रेंग कर प्रोटेस्ट कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
यो लो, पीरियड्स में दिक्कत होने पर शराब पीने लगती हैं महिलाएं! खूब जोर की लगती है तलब, चॉकलेट दूसरे नंबर पर

महिलाओं में मासिक धर्म यानी पीरियड्स की शुरुआत होने से कुछ दिनों पहले से ही कुछ लक्षण नजर आने लगते हैं. किसी को पेट में दर्द होता है, तो किसी को बहुत ज्यादा मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन, सिर दर्द होना शुरू हो जाता है. कुछ महिलाओं को तो पीरियड्स शुरू होने से पहले किसी चीज की क्रेविंग्स बहुत तेज होती है. आमतौर पर ये देखा गया है कि महिलाओं में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) में नमकीन, चॉकलेट, आइसक्रीम या फिर कोई भी मीठी चीजें खाने की जबरदस्त क्रेविंग होती है. अब कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में कुछ महिलाओं के अंदर शराब के सेवन की भी इच्छा उत्पन्न होती है. शोध के अनुसार, प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में एल्कोहल लेने की क्रेविंग जटिल हार्मोनल बदलावों से जुड़ी हो सकती है. एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में उतार-चढ़ाव मस्तिष्क की रसायन प्रक्रिया, खासकर डोपामिन रिवार्ड सिस्टम, को प्रभावित करते हैं, जिससे साइकिल के कुछ चरणों में शराब अधिक आकर्षक लग सकती है. पीरियड्स के दौरान शराब की क्रेविंग क्यों बढ़ती है? कई महिलाओं को पीरियड्स आने से पहले मूड स्विंग्स, थकान, चिड़चिड़ापन और अलग-अलग तरह की क्रेविंग्स महसूस होती हैं. हाल में हुए शोध के अनुसार, कुछ महिलाओं में शराब पीने की इच्छा भी बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव अहम भूमिका निभाते हैं. पीरियड्स साइकिल और हार्मोन का असरआमतौर पर पीरियड्स साइकिल सामान्यतः 28 दिनों का होता है, जिसमें मुख्य रूप से दो चरण शामिल होते हैं: फॉलिक्युलर फेज- यह ओव्यूलेशन से पहले का समय होता है.ल्यूटियल फेज- यह ओव्यूलेशन के बाद और पीरियड्स शुरू होने से पहले का समय होता है. शोधों के अनुसार, शराब की क्रेविंग अक्सर उस समय बढ़ती है, जब शरीर में एस्ट्रोजन लेवल ऊपर जा रहा होता है. खासकर मिड-फॉलिक्युलर फेज और ल्यूटियल फेज के दौरान यह इच्छा अधिक महसूस हो सकती है. प्रोजेस्टेरोन में गिरावट और पीएमएसजब गर्भधारण नहीं होता, तो पीरियड्स से पहले एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दोनों हार्मोन तेजी से गिरते हैं. इस दौरान कई महिलाओं को PMS के लक्षण महसूस हो सकते हैं. ये लक्षण निम्न हो सकते हैं. मूड स्विंग्सचिंता, स्ट्रेसचिड़चिड़ापनउदासीथकान जब आप शराब का सेवन करते हैं तो अस्थायी रूप से ये नर्वस सिस्टम को शांत करती है.डोपामिन बढ़ाती है, इसलिए कुछ महिलाओं में ये इमोशनल स्ट्रेस से राहत पाने का आसान तरीका लग सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. क्या कहती है रिसर्च?2025 में हुई एक स्टडी में शोधकर्ताओं ने 21 से 35 वर्ष की महिलाओं को लगातार कई दिनों तक ट्रैक किया. उन्होंने पाया कि पीरियड्स साइकिल के दौरान शराब की क्रेविंग में स्पष्ट बदलाव दिखाई देते हैं. अध्ययन में कहा गया कि ओव्यूलेशन से पहले शराब की इच्छा अधिक हो सकती है. जब एस्ट्रोजन अधिक और प्रोजेस्टेरोन कम होता है, तब क्रेविंग बढ़ सकती है. ये हॉर्मोनल बदलाव बिंज ड्रिंकिंग से भी जुड़े हो सकते हैं. शराब क्यों नुकसानदायक हो सकती है?शराब थोड़ी देर के लिए राहत दे सकती है, लेकिन लंबे समय में यह पीएमएस के लक्षणों को और खराब कर सकती है. इससे आपकी नींद खराब हो सकती है. चिंता बढ़ सकती है, शरीर में सूजन और ब्लोटिंग हो सकती है. मूड अधिक अस्थिर हो सकता है. खासकर ल्यूटियल फेज में इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है. शराब की क्रेविंग को कैसे करें कंट्रोल?-अपने पीरियड्स साइकिल को ट्रैक करें.-ऐप्स या कैलेंडर की मदद से उन दिनों को पहचानें, जब cravings ज्यादा होती हैं. इससे आप पहले से खुद को तैयार कर सकती हैं.-शराब की जगह हेल्दी विकल्प चुनें, जैसे हर्बल टी, मॉकटेल, नारियल पानी पिएं.-अपनी लाइफस्टाइल को सुधारें. पर्याप्त नींद लें. संतुलित भोजन करें. मैग्नीशियम और बी-विटामिन युक्त डाइट लें.-योग, मेडिटेशन और हल्की एक्सरसाइज करें.-आप शराब पीना चाहती हैं तो मात्रा सीमित रखें. पर्याप्त पानी पिएं.– बहुत अधिक क्रेविंग हो तो एक बार विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.







