क्रिकेटर विजय शंकर ने IPL और डोमेस्टिक से संन्यास लिया:बोले- क्रिकेट ही मेरी जिंदगी: 2019 वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लिया था

भारतीय क्रिकेटर विजय शंकर ने घरेलू क्रिकेट और IPL से संन्यास लेने का ऐलान किया है। शुक्रवार को उन्होंने X पर एक भावुक पोस्ट डाला। 25 साल लंबे करियर के बाद उन्होंने बीसीसीआई, परिवार और साथ देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया। पेसर ऑलराउंडर विजय ने साफ किया है कि वे पूरी तरह क्रिकेट नहीं छोड़ रहे हैं और नए विकल्प के साथ क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। विजय बोले- ‘क्रिकेट ही मेरी जिंदगी है’ विजय ने लिखा कि क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जिंदगी रही है। उन्होंने नागपुर में भारत के 500वें वनडे मैच में आखिरी ओवर फेंकने और 2019 वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लेने को सबसे यादगार पल बताया। उन्होंने BCCI, IPL टीमों और अपनी घरेलू टीम तमिलनाडू क्रिकेट को धन्यवाद कहा। उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलने को सबसे गर्व भरा पल बताया है। फर्स्ट क्लास में 9 हजार रन, 150+ विकेट लिए तमिलनाडू के विजय ने 10 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरु किया था। उन्होंने अंडर-13 से लेकर सीनियर टीम तक अपना ज्यादातर क्रिकेट तमिलनाडु के लिए खेला। उन्होंने 77 फर्स्ट क्लास मैच में 4253 रन बनाए और 43 विकेट लिए। लिस्ट ए में 112 मैचों में 2790 रन और 73 विकेट, जबकि 159 टी20 मैचों में 2583 रन और 38 विकेट उनके नाम रहे। भारत के लिए दूसरे ही टी20 में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने विजय को 2018 में निदहास टी20 ट्रॉफी के लिए भारतीय टीम में चुना गया। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया, जबकि दूसरे ही टी20 में बांग्लादेश के खिलाफ 2 विकेट लेने के लिए मैन ऑफ द मैच चुने गए। विजय ने जनवरी 2019 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे डेब्यू किया। उन्होंने 12 वनडे और 9 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। उन्होंने करियर के दौरान मिली नफरत और आलोचना पर कहा कि उन्होंने हमेशा इसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ना चुना। भारत के लिए 2019 वर्ल्ड कप खेले विजय को 2019 वर्ल्ड कप में नंबर-4 बल्लेबाज और उपयोगी मीडियम पेसर के तौर पर चुना गया। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टूर्नामेंट की पहली ही गेंद पर इमाम उल हक का विकेट लिया। आईपीएल में उनका सफर 2013 में चेन्नई सुपर किंग्स से शुरू हुआ। उन्होंने गुजरात टाइटंस, सनराइजर्स हैदराबाद, दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेला। 2022 में गुजरात टाइटंस की ट्रॉफी जीत वाली टीम का हिस्सा रहे। उन्होंने 2023 में 301 रन बनाए, जो उनका बेस्ट सीजन रहा। ——————————— स्पोर्ट्स की ये खबर भी पढ़ें… ऑस्ट्रेलिया वनडे सीरीज के लिए पाकिस्तान टीम घोषित:बाबर-शादाब और नसीम की वापसी; रिजवान सहित 6 खिलाड़ियों को बाहर किया गया पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज के लिए 16 सदस्यीय टीम घोषित कर दी है। टीम में सीनियर बल्लेबाज बाबर आजम, ऑलराउंडर शादाब खान और तेज गेंदबाज नसीम शाह की वापसी हुई है। यह तीनों खिलाड़ी बांग्लादेश दौरे वाली व्हाइट बॉल टीम में शामिल नहीं थे। सीरीज 30 मई से रावलपिंडी में शुरू होगी। पुरी खबर पढ़ें..
विजय शंकर ने IPL और डोमेस्टिक से संन्यास लिया:बोले- क्रिकेट ही मेरी जिंदगी: 2019 वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लिया था

भारतीय क्रिकेटर विजय शंकर ने घरेलू क्रिकेट और IPL से संन्यास लेने का ऐलान किया है। शुक्रवार को उन्होंने X पर एक भावुक पोस्ट डाला। 25 साल लंबे करियर के बाद उन्होंने बीसीसीआई, परिवार और साथ देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया। पेसर ऑलराउंडर विजय ने साफ किया है कि वे पूरी तरह क्रिकेट नहीं छोड़ रहे हैं और नए विकल्प के साथ क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे। विजय बोले- ‘क्रिकेट ही मेरी जिंदगी है’ विजय ने लिखा कि क्रिकेट उनके लिए सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जिंदगी रही है। उन्होंने नागपुर में भारत के 500वें वनडे मैच में आखिरी ओवर फेंकने और 2019 वर्ल्ड कप में पहली गेंद पर विकेट लेने को सबसे यादगार पल बताया। विजय ने बताया कि करियर के दौरान उन्हें भारी नफरत और आलोचना का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा इसे नजरअंदाज कर आगे बढ़ना चुना। उन्होंने BCCI, IPL टीमों और अपनी घरेलू टीम तमिलनाडू क्रिकेट को धन्यवाद कहा। उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलने को सबसे गर्व भरा पल बताया है। फर्स्ट क्लास में 9 हजार रन, 150+ विकेट लिए तमिलनाडू के विजय ने 10 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरु किया था। उन्होंने अंडर-13 से लेकर सीनियर टीम तक अपना ज्यादातर क्रिकेट तमिलनाडु के लिए खेला। उन्होंने 77 फर्स्ट क्लास मैच में 4253 रन बनाए और 43 विकेट लिए। लिस्ट ए में 112 मैचों में 2790 रन और 73 विकेट, जबकि 159 टी20 मैचों में 2583 रन और 38 विकेट उनके नाम रहे। भारत के लिए दूसरे ही टी20 में ‘मैन ऑफ द मैच’ बने विजय को 2018 में निदहास टी20 ट्रॉफी के लिए भारतीय टीम में चुना गया। उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ अपना इंटरनेशनल डेब्यू किया, जबकि दूसरे ही टी20 में बांग्लादेश के खिलाफ 2 विकेट लेने के लिए मैन ऑफ द मैच चुने गए। विजय ने जनवरी 2019 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे डेब्यू किया। उन्होंने 12 वनडे और 9 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। भारत के लिए 2019 वर्ल्ड कप खेले विजय को 2019 वर्ल्ड कप में नंबर-4 बल्लेबाज और उपयोगी मीडियम पेसर के तौर पर चुना गया। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टूर्नामेंट की पहली ही गेंद पर इमाम उल हक का विकेट लिया। आईपीएल में उनका सफर 2013 में चेन्नई सुपर किंग्स से शुरू हुआ। उन्होंने गुजरात टाइटंस, सनराइजर्स हैदराबाद, दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेला। 2022 में गुजरात टाइटंस की ट्रॉफी जीत वाली टीम का हिस्सा रहे। उन्होंने 2023 में 301 रन बनाए, जो उनका बेस्ट सीजन रहा। ——————————— स्पोर्ट्स की ये खबर भी पढ़ें… ऑस्ट्रेलिया वनडे सीरीज के लिए पाकिस्तान टीम घोषित:बाबर-शादाब और नसीम की वापसी; रिजवान सहित 6 खिलाड़ियों को बाहर किया गया पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज के लिए 16 सदस्यीय टीम घोषित कर दी है। टीम में सीनियर बल्लेबाज बाबर आजम, ऑलराउंडर शादाब खान और तेज गेंदबाज नसीम शाह की वापसी हुई है। यह तीनों खिलाड़ी बांग्लादेश दौरे वाली व्हाइट बॉल टीम में शामिल नहीं थे। सीरीज 30 मई से रावलपिंडी में शुरू होगी। पुरी खबर पढ़ें..
Ebola Outbreak 2026: कोरोना से कम संक्रामक पर 50% मृत्यु दर, इबोला के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन पर क्यों काम नहीं कर रही पुरानी वैक्सीन? WHO का रेड अलर्ट!

नई दिल्ली: सेंट्रल अफ्रीका में फैले नए इबोला वायरस ने पूरी दुनिया को डरा दिया है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इंफेक्शन बहुत तेजी से पैर पसार रहा है. सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और मामलों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है. एक्सपर्ट्स को डर है कि मई की शुरुआत में हुई एक ‘सुपर स्प्रेडर’ घटना के बाद यह वायरस कई देशों में फैल सकता है. इसी बीच वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडहानोम गेब्रिएसस ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने सबको चिंता में डाल दिया है. उनका कहना है कि इस नए इबोला आउटब्रेक से निपटने के लिए अगले 6 से 9 महीने तक कोई भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाएगी. जब दुनिया के पास पहले से ही इबोला की वैक्सीन मौजूद है, तो इस बार ऐसा क्यों हो रहा है. आखिर क्यों मौजूदा मेडिकल साइंस इस नए खतरे के सामने बेबस नजर आ रही है. इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण है, जिसे समझना बेहद जरूरी है. इबोला का इतिहास क्या है? इबोला वायरस की खोज पहली बार साल 1976 में हुई थी. यह एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी है, जो इंसानों और प्राइमेट्स (जैसे चिंपैंजी और गोरिल्ला) को अपना शिकार बनाती है. WHO की रिपोर्ट बताती है कि यह वायरस चमगादड़, साही और प्राइमेट्स के जरिए इंसानों में आता है. इसके बाद यह मरीजों के खून, शारीरिक तरल पदार्थ (बॉडी फ्लूइड्स) और उनके कपड़ों के संपर्क में आने से दूसरे इंसानों में फैलता है. इस बीमारी की औसतन मृत्यु दर लगभग 50 परसेंट है. आज से करीब एक दशक पहले साल 2014 में वेस्ट अफ्रीका में इबोला का सबसे खतरनाक हमला हुआ था. उस आउटब्रेक में दुनिया भर में 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. उस समय तबाही मचाने वाला वायरस इबोला का ‘जायरे स्ट्रेन’ (Zaire strain) था. वह इतिहास का सबसे बड़ा आउटब्रेक था, जो गिनी से शुरू होकर सिएरा लियोन और लाइबेरिया तक फैल गया था. जायरे स्ट्रेन का इलाज न होने पर मृत्यु दर 90 परसेंट तक पहुंच जाता है. यही वजह थी कि वैज्ञानिकों ने रात-दिन एक करके इस खास स्ट्रेन के खिलाफ दो बेहतरीन वैक्सीन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज तैयार कर ली थीं. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन क्या है और यह क्यों खतरनाक है? मौजूदा संकट के पीछे असली विलेन इबोला का एक बिल्कुल अलग रूप है, जिसे ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ (Bundibugyo strain) कहा जाता है. इंसानों को बीमार करने वाले इबोला के मुख्य रूप से चार स्ट्रेन हैं, जिनमें जायरे और बुंडिबुग्यो शामिल हैं. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का इतिहास बहुत छोटा है. इतिहास में इसके सिर्फ दो आउटब्रेक देखे गए हैं. पहला साल 2007 में युगांडा में और दूसरा साल 2012 में कांगो में हुआ था. इस स्ट्रेन की चपेट में आने वाले करीब एक-तिहाई मरीजों की मौत हो जाती है. सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हमारे पास जो 5 लाख से ज्यादा वैक्सीन डोज (जैसे एरवेबो वैक्सीन) का स्टॉक मौजूद है, वह जायरे स्ट्रेन के लिए बना है. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन पर वह वैक्सीन काम करेगी या नहीं, इसका कोई ठोस सबूत नहीं है. वायरस की बनावट अलग होने के कारण पुरानी वैक्सीन इस नए आउटब्रेक को रोकने में नाकाम साबित हो रही है. नई वैक्सीन आने में 9 महीने का समय क्यों लगेगा? WHO के एडवाइजर डॉ. वासी मूंथी के मुताबिक, बुंडिबुग्यो इबोला के खिलाफ दो ‘कैंडिडेट वैक्सीन’ पर काम चल रहा है, लेकिन अभी तक इनका इंसानों पर ट्रायल (क्लीनिकल ट्रायल) नहीं हुआ है. पहली वैक्सीन उसी रीकॉम्बीनेंट वेसिकुलर स्टोमेटाइटिस वायरस (rVSV) प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिससे जायरे स्ट्रेन की सफल वैक्सीन बनी थी. इसे सबसे ज्यादा उम्मीद जगाने वाली वैक्सीन माना जा रहा है, लेकिन इसके क्लीनिकल ट्रायल में 6 से 9 महीने का समय लगना तय है. दूसरी वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) मिलकर तैयार कर रहे हैं. यह एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन की तरह ChAdOx प्लेटफॉर्म पर काम करती है. यह वैक्सीन अगले दो से तीन महीनों में क्लीनिकल ट्रायल के लिए तैयार हो सकती है. हालांकि, अभी तक इसका जानवरों पर भी पूरी तरह टेस्ट नहीं हुआ है, जिससे इसकी सफलता को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है. जानवरों के टेस्ट सफल होने के बाद ही इसे इंसानों के ट्रायल के लिए मंजूरी मिलेगी. इसी वजह से WHO ने वैक्सीन उपलब्ध होने के लिए 6 से 9 महीने की समयसीमा तय की है. इस पूरे मामले पर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है? हेल्थ एक्सपर्ट्स इस स्थिति को बेहद गंभीर मान रहे हैं. डलास की यूटी साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर की एसोसिएट प्रोफेसर कृतिका कुप्पल्ली कहती हैं कि भले ही बुंडिबुग्यो के आउटब्रेक पहले कम हुए हों, लेकिन यह एक बेहद घातक पैथोजन (बीमारी फैलाने वाला वायरस) है. इस बार स्थिति इसलिए ज्यादा डरावनी है क्योंकि हमारे पास इसके लिए कोई मान्यता प्राप्त वैक्सीन या खास दवा उपलब्ध नहीं है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के फिजिशियन डॉ. अबरार करन इसे ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ यानी एक बहुत बड़ी मुसीबत की शुरुआत बताते हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि इबोला हवा के जरिए नहीं फैलता. इसलिए यह कोविड-19 या खसरे (Measles) जितना संक्रामक नहीं है. इबोला के मरीजों का इलाज कर चुकीं डॉ. नाहिद भदेलिया बताती हैं कि इबोला का एक मरीज औसतन दो लोगों को संक्रमित करता है, जबकि खसरे का एक मरीज 18 लोगों को बीमार कर सकता है. भले ही यह कम फैलता हो, लेकिन इसकी मृत्यु दर बहुत ज्यादा है. इस आउटब्रेक को लेकर क्या राजनीति हो रही है? इस महामारी के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी शुरू हो गई है. अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने आरोप लगाया है कि WHO ने इस आउटब्रेक को संभालने में काफी देर कर दी. दूसरी तरफ, कांगो के इस संकट के बीच अमेरिकी प्रशासन ने वहां 50 इबोला ट्रीटमेंट क्लिनिक बनाने के लिए 23 मिलियन डॉलर की मदद का एलान किया है. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी आपातकालीन फंड से 60 मिलियन डॉलर जारी किए हैं. हालांकि, युगांडा के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अमेरिका की तरफ से ऐसे किसी ट्रीटमेंट सेंटर बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं मिली है. मार्को रुबियो के आरोपों का
‘अशोभनीय, अक्षम्य’: पीएम मोदी पर अनुचित टिप्पणी को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस के अजय राय पर साधा निशाना | भारत समाचार

आखरी अपडेट:22 मई, 2026, 18:22 IST बीजेपी पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस नेता पर राजनीतिक शालीनता की सारी सीमाएं लांघने का आरोप लगाते हुए वीडियो ऑनलाइन शेयर किया. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी; उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय (एल) (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) के प्रमुख अजय राय का शुक्रवार को एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जिसमें उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अनुचित टिप्पणी करते हुए दिखाया गया है। यह घटना, जब राय एक कार के अंदर थे, रिकॉर्ड की गई, तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। क्लिप में, राय टिप्पणी करते समय समर्थकों के एक समूह की ओर हाथ हिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसकी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी आलोचना की है। पार्टी नेताओं ने कांग्रेस नेता पर राजनीतिक शालीनता की सभी सीमाएं लांघने का आरोप लगाते हुए वीडियो ऑनलाइन साझा किया। कुछ दिन पहले जब यूपीपीसीसी प्रमुख अजय राय रैली थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सार्वजनिक रूप से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। यही कांग्रेस की राजनीति का स्तर है -… pic.twitter.com/AkbPemddlq – अमित मालवीय (@amitmalviya) 22 मई 2026 यह विवाद तब से बड़े पैमाने पर राजनीतिक टकराव में बदल गया है, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने विपक्षी पार्टी पर कड़े हमले शुरू कर दिए हैं। बीजेपी की कड़ी प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टिप्पणियों की निंदा करते हुए उन्हें “अशोभनीय, असंसदीय और अक्षम्य” बताया। उन्होंने कहा कि यह बयान कांग्रेस पार्टी की “राजनीतिक भ्रष्टता” को दर्शाता है, उन्होंने कहा कि बार-बार की हार ने पार्टी को “हताशा और हताशा” में धकेल दिया है। आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, “कांग्रेस अब हताशा, निराशा, हताशा और मानसिक दिवालियापन के चरम पर पहुंच गई है। अब वे देशवासियों से माफी मांगने लायक भी स्थिति में नहीं हैं।” आदर्श प्रधानमंत्री श्री @नरेंद्र मोदी जी के विषय में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा अभद्र, असंसदीय और विकलांग टिप्पणी कांग्रेस के राजनीतिक कुसंस्कारों को प्रकट करती है। पूर्व में कांग्रेस के ‘युवराज’ भी अपने कुसंस्कारों का परिचय दे चुके हैं। कांग्रेस अब कज़रा,… – योगी आदित्यनाथ (@mयोगीआदित्यनाथ) 22 मई 2026 भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी राय की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में एक बीमारी के दौरान उनके अच्छे होने की कामना की थी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह का शिष्टाचार निभाया गया, जिसे उन्होंने अपमानजनक भाषा बताया। मालवीय ने कहा, “यह कांग्रेस की राजनीति का स्तर है – शिष्टाचार का जवाब अशिष्टता से देना।” इस बीच, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर अभद्र भाषा व्यापक हो गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने “मर्यादा की सभी सीमाओं को पार कर लिया है” और उस पर अभद्र भाषा को राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने आगे दावा किया कि बार-बार चुनावी असफलताओं ने कांग्रेस को संगठनात्मक और राजनीतिक रूप से कमजोर कर दिया है। मौर्य ने कहा, “सच्चाई यह है कि माननीय प्रधान मंत्री जी के खिलाफ कांग्रेस नेताओं द्वारा बोला गया हर अपमानजनक शब्द उनकी बार-बार की राजनीतिक हार से होने वाले दर्द और सत्ता से दूर होने की हताशा का प्रमाण है। देश की जनता ऐसे अहंकारी और संस्कृतिहीन नेताओं को एक शानदार लोकतांत्रिक जवाब देगी।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : उत्तर प्रदेश, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘अशोभनीय, अक्षम्य’: बीजेपी ने पीएम मोदी पर अनुचित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस के अजय राय को जिम्मेदार ठहराया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अजय राय की नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी(टी)अजय राय विवाद(टी)उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख(टी)मोदी की अभद्र टिप्पणी(टी)बीजेपी की प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश(टी)योगी आदित्यनाथ की आलोचना(टी)अमित मालवीय की प्रतिक्रिया(टी)राजनीतिक विवाद कांग्रेस बीजेपी
ध्रुव राठी बोले- मोदी जहां भी जाएं, उन्हें शर्मिंदा करें:भड़कीं एक्ट्रेस गुल पनाग; बोलीं- विदेशी धरती पर प्रधानमंत्री पद का मजाक उड़ाना गलत

बॉलीवुड एक्ट्रेस गुल पनाग ने सोशल मीडिया पर यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक पोस्ट की आलोचना की है। ध्रुव राठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक पोस्ट लिखा था, जिसमें उन्होंने पीएम को विदेशी धरती पर शर्मिंदा करने की बात कही थी। इस पर जवाब देते हुए गुल पनाग ने कहा कि सरकार से असहमत होना और विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विदेश में देश के प्रधानमंत्री और उनके पद का मजाक बनाना ठीक नहीं है। एक्ट्रेस के मुताबिक, ऐसा करने से देश की संस्थाएं और खुद भारतीय कमजोर होते हैं। ध्रुव राठी ने लिखा- मोदी को शर्मिंदा करें यूट्यूबर ध्रुव राठी ने 19 मई को एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि मोदी जहां भी जाएं, उन्हें हर जगह शर्मिंदा किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री बनने के बाद पिछले 12 साल में उन्होंने एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। ध्रुव राठी ने आगे लिखा कि वे दूसरे देशों के विदेशी पत्रकारों से भी कहेंगे कि वे पीएम मोदी से जहां भी मिलें, उनसे सवाल जरूर पूछें। उन्हें लोगों के सामने जवाब देने के लिए मजबूर करें। ध्रुव राठी के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई थी। पत्रकार के वीडियो के बाद शुरू हुआ विवाद यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के बाद शुरू हुआ। ओस्लो में नॉर्वे की पत्रकार हेले लेंग ने प्रधानमंत्री से भारत में मानवाधिकारों और लोकतंत्र को लेकर सवाल पूछने की कोशिश की थी। इस दौरान पीएम मोदी बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए थे। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया था, जिसके बाद ध्रुव राठी ने पत्रकार के समर्थन में यह पोस्ट लिखा था। विरोध करना अलग, लेकिन यह तरीका सही नहीं ध्रुव राठी के इस पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए गुल पनाग ने लिखा कि आप किसी प्रधानमंत्री को नापसंद कर सकते हैं, सरकार से असहमत हो सकते हैं, डिबेट कर सकते हैं और अलग तरह से वोट कर सकते हैं। यही लोकतंत्र है। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री के ऑफिस और विदेश में वे जिसे रिप्रेजेंट करते हैं, उसका विदेशी धरती पर मजाक बनाना सही नहीं है। यह विरोध का सही तरीका नहीं है, बल्कि इससे हमारा ही नुकसान होता है। राजनीति में भी सक्रिय रह चुकी हैं एक्ट्रेस गुल पनाग एक्टिंग के साथ-साथ राजनीति और सामाजिक कार्यों से भी जुड़ी रही हैं। साल 2014 के आम चुनाव में उन्होंने चंडीगढ़ लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जहां वे तीसरे स्थान पर रही थीं। बाद में उन्होंने खुद को राजनीतिक गतिविधियों से अलग कर लिया और जून 2021 में आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे एक एनजीओ भी चलाती हैं जो शिक्षा और लैंगिक समानता के लिए काम करता है।
रुड़की की सोनिया ने सीनियर नेशनल एथलेटिक्स में जीता सिल्वर:रांची के ट्रैक पर 10 हजार मीटर दौड़ीं; पहले ही दिन हासिल किया पदक

झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में शुक्रवार से शुरू हुई 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन चैंपियनशिप में उत्तराखंड की बेटी ने पहले ही दिन पदक हासिल कर लिया। रुड़की के एक छोटे से गांव की रहने वाली एथलीट कुमारी सोनिया ने महिला वर्ग की 10,000 मीटर रेस में सिल्वर मेडल जीतकर राज्य को गौरवान्वित किया। सोनिया ने यह रेस 36 मिनट 16.22 सेकंड में पूरी की। वह स्पोर्ट्स कॉलेज में उत्तराखंड के वरिष्ठ कोच लोकेश कुमार से प्रशिक्षण ले रही हैं। सोनिया की इस सफलता के पीछे उनके संघर्षों की एक लंबी कहानी है। यह वही सोनिया हैं, जिन्होंने संसाधनों की भारी कमी के बावजूद कभी हालातों के आगे घुटने नहीं टेके। फटे जूतों से रांची के पोडियम तक का सफर सोनिया की असली पहचान 2025 में हुए राष्ट्रीय खेलों के दौरान बनी थी, जब उन्होंने 10,000 मीटर की दौड़ में ही ब्रॉन्ज मेडल जीता था। उस जीत की सबसे बड़ी बात यह थी कि सोनिया के पास दौड़ने के लिए सही स्पाइक्स तक नहीं थे। वह फटे जूतों में ट्रैक पर उतरी थीं। इसके बाद उन्होंने जापान के फुकुओका में हुई 18वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में भी ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था। महंगे सप्लीमेंट्स तो दूर, वह ऑनलाइन मिलने वाले सस्ते मल्टी-विटामिन के सहारे ही अपनी तैयारी कर रही थीं। स्नेह राणा ने बढ़ा था हौसला, दिए थे नए स्पाइक्स हाल ही में जब सोनिया के संघर्ष की यह कहानी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर स्नेह राणा तक पहुंची थी, तो उन्होंने देहरादून स्थित अपने स्पोर्ट्स स्ट्राइव टर्फ पर सोनिया को बुलाया था। फटे जूतों में दौड़ने वाली सोनिया को जब स्नेह राणा ने प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और बेहतर न्यूट्रिशन सपोर्ट सौंपा, तो वह भावुक हो गई थीं। नए स्पाइक्स और स्नेह राणा से मिले उसी नए आत्मविश्वास को लेकर सोनिया रांची के ट्रैक पर उतरीं और सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया। पिता करते हैं मजदूरी, बहनों ने निभाया मां का फर्ज सोनिया का पूरा बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में चार बहनें और एक भाई हैं। पिता मजदूरी करके घर चलाते हैं और मां का निधन हो चुका है। सोनिया बताती हैं कि कई बार ऐसा वक्त आया जब तंगी के कारण ट्रेनिंग छोड़ने का मन हुआ, लेकिन उनकी बहनों ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। बहनों ने ही मां की कमी पूरी की और हर मुश्किल में साथ खड़ी रहीं। गांव के तानों को बनाया अपनी ताकत सोनिया के सफर में सिर्फ गरीबी ही नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव भी बड़ी चुनौती रहा। गांव के लोग अक्सर ताने मारते थे और परिवार से कहते थे कि लड़की को वापस बुला लो। लेकिन, सोनिया ने इन बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने लोगों को जवाब देने के बजाय अपनी मेहनत से खुद को साबित करने का रास्ता चुना और आज रांची में जीता गया यह सिल्वर मेडल उन सभी तानों का जवाब है।
पेट्रोल-डीजल पर VAT घटा सकते हैं राज्य:तेलंगाना में सबसे ज्यादा लगता है टैक्स, ₹10 तक एक्साइज ड्यूटी घटा चुका केंद्र

केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर पेट्रोल-डीजल सस्ता करने की तैयारी कर रही है। केंद्र सरकार जल्द ही राज्यों से पेट्रोल और डीजल पर वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) कम करने की अपील कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा शासित 22 राज्यों में वैट में कटौती की पूरी संभावना है। डीजल की कीमतों को नियंत्रित करना प्राथमिकता है, क्योंकि इसका सीधा असर परिवहन, खेती और उद्योग जगत पर पड़ता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की बढ़ रही हैं। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.9% बढ़कर $104.52 प्रति बैरल पर पहुंच गया है। ऐसे में बढ़ती महंगाई से लोगों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी। हालांकि, इसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमत में 3.90 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी। सचिवों के समूह ने की ईरान युद्ध के असर पर चर्चा ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर हाल ही में सचिवों के एक अधिकार प्राप्त ग्रुप की बैठक हुई। इस बैठक में चर्चा की गई कि महंगे कच्चे तेल के बोझ को कम करने के लिए वैट में कटौती जरूरी है। केंद्र सरकार ने पिछले महीने ही डीजल पर एक्साइज ड्यूटी ₹10 प्रति लीटर घटाकर शून्य कर दी थी, जबकि पेट्रोल पर ₹3 की कटौती की गई थी। अब केंद्र चाहता है कि राज्य भी अपनी ओर से टैक्स कम करें। डीजल पर फोकस, क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई पर अधिकारियों के मुताबिक, भाजपा शासित राज्य सबसे पहले डीजल पर टैक्स कम करने पर विचार कर सकते हैं। भारत में हर साल करीब 9.47 करोड़ टन डीजल की खपत होती है, जो किसी भी अन्य पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से कहीं ज्यादा है। पेट्रोल का इस्तेमाल ज्यादातर निजी वाहनों के लिए होता है, लेकिन डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट, खेती और इंडस्ट्री में होता है। अगर डीजल सस्ता होता है तो माल ढुलाई सस्ती होगी, जिससे रोजमर्रा की चीजों के दाम गिरेंगे। अप्रैल में थोक महंगाई दर 42 महीने के उच्च स्तर 8.3% पर पहुंच गई थी। 2022 का फॉर्मूला फिर दोहराने की तैयारी अगर भाजपा शासित राज्य वैट कम करते हैं, तो यह साल 2022 की स्थिति जैसा होगा। उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए थे। तब भी केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी घटाई थी और राज्यों से वैट कम करने को कहा था। वर्तमान में भाजपा और उसके सहयोगी दल देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में हैं। भारत में अलग-अलग राज्यों में वैट की दरें 1 से 27% तक लगता हैं। इसमें कटौती होने से तेल की कीमतों में बड़ा अंतर आ सकता है। एक्सपर्ट बोले- जनता के जीवन स्तर को बचाना जरूरी प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने कहा, “ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ी हैं, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम सिर्फ 4% के करीब बढ़े हैं। केंद्र ₹10 की एक्साइज ड्यूटी घटा चुका है, अब राज्यों की बारी है। हमें साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि आम नागरिक के जीवन स्तर पर कोई बुरा असर न पड़े। राज्यों को अपने खजाने पर ज्यादा असर डाले बिना यह कदम उठाना चाहिए।” राज्यों की कमाई और तेल कंपनियों का घाटा विपक्ष का पलटवार: ‘कीमतें बढ़ाने की जमीन तैयार हो रही’ दूसरी ओर, कांग्रेस प्रवक्ता रंजीत रंजन ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्यों से वैट घटाने के लिए कहना इस बात का संकेत है कि सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक और बड़ी बढ़ोतरी की जमीन तैयार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता था, तब केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपना खजाना भरा और जनता को लाभ नहीं दिया।
घंटों बैठकर करते हैं लैपटॉप पर काम, तो पड़ सकता है रीढ़ की हड्डी के लिए भारी..यहां जानिए डॉक्टर की सलाह

Last Updated:May 22, 2026, 12:22 IST आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक बैठकर काम करना लोगों की रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर डाल रहा है. फरीदाबाद के स्पाइन विशेषज्ञ डॉक्टर आशीष तोमर के अनुसार गलत पोश्चर, लगातार स्क्रीन देखने और व्यायाम की कमी से गर्दन और कमर दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है. नियमित वॉक, योग और सही तरीके से बैठना स्पाइन हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है. फरीदाबाद: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना लोगों की मजबूरी बन गया है. दफ्तर हो या घर लगातार मोबाइल और लैपटॉप पर काम करने की आदत अब आम हो चुकी है. लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर हमारी रीढ़ की हड्डी पर पड़ रहा है. शुरुआत में लोग गर्दन, पीठ या कमर में हल्का दर्द समझकर इसे नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन धीरे-धीरे यही परेशानी बड़ी बीमारी का रूप ले सकती है. लंबे वक्त तक बैठकर काम करने से नुकसान Local18 से बातचीत में डॉक्टर आशीष तोमर फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में ऑर्थोपेडिक्स और मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी विभाग के निदेशक बताते हैं कि लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की बैक मसल्स कमजोर होने लगती हैं. हमारी मांसपेशियों का काम रीढ़ की हड्डी को सही स्थिति में बनाए रखना होता है लेकिन जब व्यक्ति लगातार बैठा रहता है तो ये मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाती हैं. क्या है काम करने का सही तरीका डॉक्टर आशीष तोमर बताते हैं बैठने के तरीके का भी सीधा असर कमर पर पड़ता है. अगर कोई व्यक्ति सीधे बैठता है तो कमर पर दबाव कम बनता है, लेकिन झुककर बैठने से रीढ़ की हड्डी पर ज्यादा दबाव पड़ता है. यही वजह है कि आगे चलकर डिस्क खिसकने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. कुर्सी पर सीधा बैठने से कमर पर लगभग डेढ़ गुना कम दबाव पड़ता है. गर्दन और कमर दर्द आज के समय में बहुत आम समस्या बन चुकी है. लगातार स्क्रीन देखने और गर्दन झुकाकर लैपटॉप पर काम करने से गर्दन पर काफी दबाव बढ़ जाता है. यही कारण है कि लोगों में गर्दन दर्द, अकड़न और पीठ दर्द तेजी से बढ़ रहा है. रोज थोड़ा बहुत व्यायाम करना बेहद जरूरी डॉक्टर आशीष बताते हैं शरीर को मजबूत रखने के लिए रोज थोड़ा बहुत व्यायाम करना बेहद जरूरी है. रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टर आशीष तोमर बताते हैं मैं लोगो को रोजमर्रा की कुछ अच्छी आदतें अपनाने की सलाह देता हूं.शरीर की कोर मसल्स और पीठ की मांसपेशियां सबसे ज्यादा जरूरी होती हैं. इन्हें मजबूत रखने के लिए भुजंग आसन जैसे योग करने चाहिए. इसके अलावा नियमित रूप से टहलना और लंबे समय तक लगातार न बैठना भी जरूरी है. अगर कोई व्यक्ति आधे घंटे या एक घंटे से ज्यादा समय तक बैठा है तो उसे बीच-बीच में उठकर थोड़ा चलना चाहिए. नजरअंदाज नहीं करना चाहिए शरीर के संकेत डॉक्टर आशीष तोमर बताते हैं कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. जैसे गर्दन का दर्द हाथों तक जाने लगे…हाथों में सुन्नपन महसूस हो, कमजोरी आए, रात में दर्द के कारण नींद न आए या गर्दन दबाने पर ज्यादा दर्द हो तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए. इसी तरह कमर दर्द अगर पैरों तक पहुंचने लगे तो यह भी गंभीर संकेत हो सकता है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Faridabad,Faridabad,Haryana
स्मिता पाटिल और राज बब्बर के रिश्ते पर बोले आर्य:कहा- किसे अच्छा लगेगा उसके पापा का अफेयर हो; सौतेले भाई प्रतीक बब्बर से जारी अनबन

राज बब्बर के बेटे आर्य बब्बर ने हाल ही में पिता और स्मिता पाटिल के अफेयर पर बात की है। उनका कहना है कि दोनों के अफेयर से उन्हें काफी दिक्कत हुई थी। वहीं आर्य बब्बर का ये भी कहना है कि वो स्मिता पाटिल को स्मिता मां कहते हैं, लेकिन प्रतीक बब्बर अपने पिता को ही पिता नहीं मानते। उन्होंने ये भी कहा कि उनके और प्रतीक के बीच सुलह नहीं हो सकती। राज बब्बर ने नादिरा जहीर से शादी की थी, जिससे उन्हें दो बच्चे आर्य बब्बर और जूही हुए। आर्य महज 3 साल के थे, जब राज बब्बर ने स्मिता पाटिल से शादी कर पहली पत्नी और बच्चों को छोड़ दिया। हालांकि 3 साल में जब स्मिता ने बेटे प्रतीक को जन्म दिया, तो डिलीवरी कॉम्प्लिकेशन से उनका निधन हो गया। इसके बाद राज बब्बर, पहली पत्नी के साथ रहने लगे। इन सभी चीजों से पारिवारिक रिश्तों में तनाव रहा। हाल ही में प्रतीक बब्बर ने शादी में पिता को नहीं बुलाया और फिर अपने नाम से पिता का सरनेम हटाकर मां स्मिता का नाम जोड़ लिया। तब भी ये रिश्ते विवादों में रहे। अब हाल ही में विक्की ललवानी को दिए इंटरव्यू में आर्य बब्बर ने स्मिता-राज के रिश्ते पर कहा, मैं आज 44 साल का हूं, ये तब हुआ जब मैं 4-5 साल का था। मेरे पिता ने जिंदगी में बहुत कुछ किया उसके बाद। लेकिन सबसे जरूरी चीज जो हम सबकी रह गई है वो ये कि हमारे पापा का एक अफेयर हुआ था। एक रिश्ते को उन्होंने इज्जत दी, साथ दिया था। वो हम सबकी जिंदगी का इशू बन गया। जो शायद नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम सब आगे बढ़ गए हैं। आगे जब पूछा गया कि क्या इससे पिता से रिश्ते बिगड़ गए, तो आर्य कहते हैं, किस बच्चे को अच्छा लगेगा कि उसके पापा का बाहर अफेयर हो। अगर आपको पता चलता कि आपके पापा का अफेयर है, आपको अच्छा लगता। हर कोई मूव ऑन कर गया। पापा ने मूव ऑन कर लिया, उनका दूसरा अफेयर भी हो गया। आर्य ने बातचीत में ये भी बताया कि स्मिता पाटिल के लिए राज बब्बर ने घर खरीदा था और वो परिवार को छोड़कर उनके साथ जाकर रहने लगे थे। उस घर में फिलहाल प्रतीक बब्बर अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। आगे आर्य ने कहा, मैं स्मिता मां को प्यार और इज्जत देता हूं, क्योंकि उन्हें वो प्यार और इज्जत मेरे पिता ने दी। हमारी मां ने हमें समझाया है कि चाहे कुछ भी हो, प्रतीक के साथ हमारा स्वाभाव गलत नहीं होना चाहिए। हमारी मां ने हमें सिखाया, पिता ने नहीं। यही वजह है कि हम उसके साथ अच्छे से रहते हैं। जब मैंने देखा कि प्रतीक मेरी मां को मां कह रहा है, तो मैं भी स्मिता को स्मिता मां कहने लगा। आखिर में आर्य ने कहा, जिस स्मिता मां के लिए पापा ने हमें छोड़ा, आज उन्हीं का बच्चा पापा को पापा नहीं मान रहा है। उन्होंने ये भी साफ किया कि अब उनके प्रतीक से रिश्ते कभी सुधर नहीं सकेंगे।
स्मिता पाटिल और राज बब्बर के रिश्ते पर बोले आर्य:कहा- किसे अच्छा लगेगा उसके पापा का अफेयर हो; सौतेले भाई प्रतीक बब्बर से जारी अनबन

राज बब्बर के बेटे आर्य बब्बर ने हाल ही में पिता और स्मिता पाटिल के अफेयर पर बात की है। उनका कहना है कि दोनों के अफेयर से उन्हें काफी दिक्कत हुई थी। वहीं आर्य बब्बर का ये भी कहना है कि वो स्मिता पाटिल को स्मिता मां कहते हैं, लेकिन प्रतीक बब्बर अपने पिता को ही पिता नहीं मानते। उन्होंने ये भी कहा कि उनके और प्रतीक के बीच सुलह नहीं हो सकती। राज बब्बर ने नादिरा जहीर से शादी की थी, जिससे उन्हें दो बच्चे आर्य बब्बर और जूही हुए। आर्य महज 3 साल के थे, जब राज बब्बर ने स्मिता पाटिल से शादी कर पहली पत्नी और बच्चों को छोड़ दिया। हालांकि 3 साल में जब स्मिता ने बेटे प्रतीक को जन्म दिया, तो डिलीवरी कॉम्प्लिकेशन से उनका निधन हो गया। इसके बाद राज बब्बर, पहली पत्नी के साथ रहने लगे। इन सभी चीजों से पारिवारिक रिश्तों में तनाव रहा। हाल ही में प्रतीक बब्बर ने शादी में पिता को नहीं बुलाया और फिर अपने नाम से पिता का सरनेम हटाकर मां स्मिता का नाम जोड़ लिया। तब भी ये रिश्ते विवादों में रहे। अब हाल ही में विक्की ललवानी को दिए इंटरव्यू में आर्य बब्बर ने स्मिता-राज के रिश्ते पर कहा, मैं आज 44 साल का हूं, ये तब हुआ जब मैं 4-5 साल का था। मेरे पिता ने जिंदगी में बहुत कुछ किया उसके बाद। लेकिन सबसे जरूरी चीज जो हम सबकी रह गई है वो ये कि हमारे पापा का एक अफेयर हुआ था। एक रिश्ते को उन्होंने इज्जत दी, साथ दिया था। वो हम सबकी जिंदगी का इशू बन गया। जो शायद नहीं होना चाहिए, क्योंकि हम सब आगे बढ़ गए हैं। आगे जब पूछा गया कि क्या इससे पिता से रिश्ते बिगड़ गए, तो आर्य कहते हैं, किस बच्चे को अच्छा लगेगा कि उसके पापा का बाहर अफेयर हो। अगर आपको पता चलता कि आपके पापा का अफेयर है, आपको अच्छा लगता। हर कोई मूव ऑन कर गया। पापा ने मूव ऑन कर लिया, उनका दूसरा अफेयर भी हो गया। आर्य ने बातचीत में ये भी बताया कि स्मिता पाटिल के लिए राज बब्बर ने घर खरीदा था और वो परिवार को छोड़कर उनके साथ जाकर रहने लगे थे। उस घर में फिलहाल प्रतीक बब्बर अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। आगे आर्य ने कहा, मैं स्मिता मां को प्यार और इज्जत देता हूं, क्योंकि उन्हें वो प्यार और इज्जत मेरे पिता ने दी। हमारी मां ने हमें समझाया है कि चाहे कुछ भी हो, प्रतीक के साथ हमारा स्वाभाव गलत नहीं होना चाहिए। हमारी मां ने हमें सिखाया, पिता ने नहीं। यही वजह है कि हम उसके साथ अच्छे से रहते हैं। जब मैंने देखा कि प्रतीक मेरी मां को मां कह रहा है, तो मैं भी स्मिता को स्मिता मां कहने लगा। आखिर में आर्य ने कहा, जिस स्मिता मां के लिए पापा ने हमें छोड़ा, आज उन्हीं का बच्चा पापा को पापा नहीं मान रहा है। उन्होंने ये भी साफ किया कि अब उनके प्रतीक से रिश्ते कभी सुधर नहीं सकेंगे।








