Friday, 11 Sep 2026 | 05:25 AM

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विदिशा में गेहूं उपार्जन पर कांग्रेस का प्रदर्शन:रैली निकालकर उठाई किसानों की आवाज; समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी

विदिशा में गेहूं उपार्जन पर कांग्रेस का प्रदर्शन:रैली निकालकर उठाई किसानों की आवाज; समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी

विदिशा जिले में गेहूं उपार्जन प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने रैली निकाली और कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस नेताओं ने व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की। जिलाध्यक्ष मोहित रघुवंशी ने आरोप लगाया कि उपार्जन प्रक्रिया में बड़े किसानों के स्लॉट बुक नहीं हो पा रहे हैं, जबकि वे भी KCC के जरिए कर्ज लेकर खेती करते हैं। सैटेलाइट आधारित स्लॉट बुकिंग को उन्होंने जटिल बताया। कांग्रेस ने कहा कि कई केंद्रों पर तुलाई में विसंगतियां हैं। कहीं कम रकबे पर ज्यादा स्लॉट, तो कहीं ज्यादा रकबे पर कम स्लॉट मिल रहे हैं। तुलाई के बाद भुगतान में देरी, बारदाने की कमी और वेयरहाउस में सीमित तुलाई जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। क्षमता से कम हो रही खरीदी, किसानों को नुकसान जहां प्रतिदिन 2500-3000 क्विंटल तुलाई होनी चाहिए, वहां केवल 1500 क्विंटल ही हो पा रही है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस नेताओं ने शनिवार की छुट्टी खत्म कर उस दिन भी तुलाई शुरू करने की मांग की, ताकि कम समय में अधिक उपार्जन हो सके। नेताओं ने कहा कि मौसम में बदलाव के कारण खुले में रखा गेहूं खराब होने का खतरा बना हुआ है, जिससे किसानों को और नुकसान हो सकता है। प्रदेश सचिव आनंद प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की व्यवस्था ऐसी है, जिससे किसान मजबूरी में अपनी फसल कम दामों पर व्यापारियों को बेचने को विवश हो रहे हैं। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि 25 मई तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो जिले की सभी समितियों पर मुख्यमंत्री का ‘आंख बंद’ पुतला रखकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

बैतूल में कचरे से भड़की आग पेड़ों तक पहुंची:कॉलेज चौक पर पेड़ जले, धनोरा में डीपी क्षतिग्रस्त; फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

बैतूल में कचरे से भड़की आग पेड़ों तक पहुंची:कॉलेज चौक पर पेड़ जले, धनोरा में डीपी क्षतिग्रस्त; फायर ब्रिगेड ने पाया काबू

मंगलवार को बैतूल के कॉलेज चौक के पास कचरे में लगी आग तेजी से फैलकर पास खड़े पेड़ों तक पहुंच गई। लपटें और धुआं उठते देख इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और काफी प्रयास के बाद आग पर काबू पाया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। दूसरी घटना धनोरा क्षेत्र में हुई, जहां आग की चपेट में आने से बिजली विभाग की डीपी जल गई। इस दौरान धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जिससे आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। गनीमत रही कि ट्रांसफार्मर सुरक्षित रहा और आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया। प्रारंभिक जांच में अत्यधिक गर्मी और सूखे कचरे को आग लगने की वजह माना जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से खुले में कचरा न जलाने और सावधानी बरतने की अपील की है। 4 तस्वीरों में देखिए आग…

एबीपी ग्राउंड रिपोर्ट: दक्षिण दिनाजपुर में बंद पड़ी लाइब्रेरी बनी बेरोजगारी, शिक्षा संकट पर किससे आम जनता का साथ?

एबीपी ग्राउंड रिपोर्ट: दक्षिण दिनाजपुर में बंद पड़ी लाइब्रेरी बनी बेरोजगारी, शिक्षा संकट पर किससे आम जनता का साथ?

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित शिक्षा, रोजगार की कमी से लोग नाराज, दिशाहीन। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: पहले चरण का नामांकन शोर शांत हो चुका है और अब 23 तारीख को पहले चरण का मतदान होना है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की हलचल के बीच, बिजला जिला दक्षिण दिनाजपुर एक अलग तरह की हलचल से गुजर रहा है। यहां ऑक्सफोर्ड शोर के पीछे एक मानवीय संकट गहराता दिख रहा है, पुरानी और पारंपरिक लाइब्रेरी का बंद होना। शिक्षा का यह ढाँचागत ढाँचा धीरे-धीरे ख़त्म होता जा रहा है और स्थानीय लोग इसे सिर्फ तीन साल के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के साथ-साथ पढ़ते हुए मान रहे हैं। बालुराघाट से लेकर हिली तक का रास्ता इस संकट की गवाही देता है। सड़क किनारे लगे कई सरकारी पुस्तकालय अब बंद शटर और जंग किनारे के पीछे स्थित हैं। कभी जहां छात्र-छात्रा स्कायर में डूबे रहते थे, वहीं अब छात्रा पसरा है। एक स्थानीय यात्री छात्र हैं, ‘यह लाइब्रेरी सालभर बंद रहती है। पहले हम ‘नोटबुक’ लेकर अध्ययन करते थे।’ वहीं एक युवा छात्र ने कहा, ‘मुझे तो पता ही नहीं था कि यह लाइब्रेरी है।’ यह सिर्फ एक या दो जगह की कहानी नहीं है. जिले भर में 57 पुस्तकालयों में से अधिकांश या तो बंद हैं या बेहद खराब स्थिति में चल रहे हैं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सूरज दास कर्मचारी हैं, ‘पिछले 10-15 वर्षों से पुस्तकालय बंद होने का डर था। अब हालात ये हैं कि लाइब्रेरी में करीब 90 प्रतिशत स्टाफ की भारी कमी है। कई जगह प्रोटोटाइप कर्मचारी ही काम कर रहे हैं।’ शिक्षा से गहरा संकट स्थानीय शिक्षण वर्ग का मानना ​​है कि यह केवल वास्तुशिल्प का विनाश नहीं है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक पतन की शुरुआत है। यह लाइब्रेरी कभी सिर्फ कथावाचक का केंद्र नहीं रही, यह संवाद, विचार और समाज के निर्माण की जगह थी। अब उनका समापन एक पूरी पीढ़ी के उत्कृष्ट विकास पर प्रभाव डाल सकता है। दक्षिण दिनाजपुर जैसे पुरातात्विक जिले में, जहां पहले से ही पुस्तकालय की कमी है, वहां पुस्तकालय का महत्व और विकास हो रहा है, लेकिन स्थिर असमानताओं में यह पुरातात्विक संरचना ही दम तोड़ती नजर आ रही है। यह भी पढ़ें: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: पीएम मोदी पर बड़ा बयान, फिर दी सफाई, भड़की बीजेपी बोली- मांगो मार्जिन झील क्षेत्र: प्रतिस्पर्धी प्रतिस्पर्धा, कई परतें राजनीतिक रूप से यह जिला इस बार बेहद दिलचस्प ग्राहकों का गवाह है। मुख्य लड़ाई कैथोलिक कांग्रेस और भाजपा के बीच मनी जा रही है, लेकिन कांग्रेस और वाम दल भी अपना खोया आधार वापस पाने की कोशिश में हैं। 2021 विधानसभा चुनाव में कुल 6 मंजिलों में से 3 मंजिलें और 3 मंजिलें भाजपा में शामिल हुईं। कश्मीरी ने कुशमंडी, कुमारगंज और हरिरामपुर पर कब्जा कर लिया, जबकि बीजेपी ने बालुरघाट, तपन और गंगारामपुर पर कब्जा कर लिया। 2024 के चुनाव में दोनों दल अपने-अपने गढ़ से बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन इस बार अलग-अलग दिख रहे हैं। बीजेपी का हमला: ‘पूरी तरह विफल सरकार’ जिले के भाजपा अध्यक्ष सुरजीत चौधरी का सरकार पर आरोप है कि स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है, राजमार्ग परियोजना भूमि अधिग्रहण के कारण रुकी हुई है और शिक्षा व्यवस्था खराब हो रही है। दक्षिण दिनाजपुर में वर्जिन पूरी तरह से विफल रही है। लाइब्रेरी की समस्या खुद बताएं कि सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं। बीजेपी का दावा है कि वह 2021 और 2024 के गठबंधन में इस बार बेहतर प्रदर्शन करेगी और जिलों में अपनी पकड़ मजबूत बनाएगी। यह भी पढ़ें: ‘बंगाल-तमिलनाडु’ में ‘प्रमोशन का शोर’, अब 23 अप्रैल को अचानक आया फैसला वैज्ञानिक का उत्तर: ‘राजनीतिक सिद्धांत’ वैश्विक इस मुद्दे को स्वीकार तो किया जाता है, लेकिन इसे चुनावी हथियार के रूप में पेश किये जाने का विरोध किया जाता है। बालुराघाट से प्रत्याशित अल्पास्था घोषा को सभी लोगों द्वारा नामांकित किया जाता है, लेकिन इसे दूर करने के लिए भविष्य में कदम रखा जाएगा। उन्होंने कहा, ‘भाजपा जब से बंगाल में दूसरे स्थान पर है, वह यहां की मजबूती की कोशिश कर रही है। ये खतरनाक है. बालुराघाट की अपनी एक पहचान थी, जो अब बदल रही है।’ निर्भय घोष का दावा है कि जातीय विभाजन और बाहरी हस्तक्षेप जैसे सामाजिक आंदोलन को लेकर जनता में असंतोष है, जो भाजपा के खिलाफ हो सकता है। जमीनी हकीकत: नामांकित है, लेकिन दिशा अज्ञात है जमीनी स्तर पर बात करने पर साफ होता है कि लोगों में पेपर-पिलिटरी शिक्षा, रोजगार और फुटपाथ-बिस्तरों को लेकर आती है, लेकिन यह पेपर किस राजनीतिक दिशा में जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। एक कॉलेज के छात्र कहते हैं, ‘हमें लाइब्रेरी चाहिए, नौकरी चाहिए। नेता आते हैं, वादे करते हैं, लेकिन कुछ नहीं बदलते।’ एक स्थानीय व्यापारी का कहना है, ‘यहां निवेश नहीं हो रहा है।’ युवा बाहर जा रहे हैं. चुनाव में हम उसी को वोट देंगे जो कुछ ठोस होगा.’ दक्षिण दिनाजपुर का बड़ा सवाल दक्षिण दिनाजपुर में इस बार का चुनाव सिर्फ नामांकन की लड़ाई नहीं है। यह विकास मॉडल, शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक वर्गीकरण की दिशा तय करने वाला चुनाव बनाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में कुल छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं और ये सभी बालुरघाट भी आंध्र प्रदेश में आते हैं। इनमें कुशमंडी (एससी), कुमारगंज, बालूरघाट, तपन (एसटी), गंगारामपुर (एससी) और हरिरामपुर शामिल हैं। ये सभी क्षेत्रीय क्षेत्र आगामी 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए अहम माने जा रहे हैं। (रिपोर्टः दीपक घोष) यह भी पढ़ें: एक्सक्लूसिव: ‘भ्रष्ट है टीएमसी, सुरक्षित नहीं है बंगाल’, ममता के नारे पर शिक्षा मंत्री, प्रधान मंत्री ने बताया बीजेपी के लिए क्या है मुद्दा

कांग्रेस का पीएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस:आरोप- राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्षी सांसदों के वोट पर सवाल उठाए, कार्रवाई की मांग

कांग्रेस ने पीएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस का दिया:लोकसभा स्पीकर को लिखा लेटर; कहा- सांसदों के वोट पर टिप्पणी नियमों के खिलाफ

कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेटर लिखकर कहा कि पीएम ने ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ में विपक्षी सांसदों के वोट और उनके इरादों पर सवाल उठाए थे। यह नियमों के खिलाफ है। वेणुगोपाल ने लिखा कि पीएम ने करीब 29 मिनट के संबोधन में विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण बिल रोकने का आरोप लगाया। सांसदों के वोटिंग पैटर्न पर सवाल उठाए। उनके फैसलों के पीछे की मंशा पर भी टिप्पणी की। कांग्रेस सांसद ने मांग की है कि इस मामले को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए और प्रधानमंत्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। स्पीकर को लिखे लेटर की चार मुख्य बातें… जयराम रमेश बोले- पीएम ने कांग्रेस पर 59 बार टारगेट किया कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन आमतौर पर देश को जोड़ने और भरोसा बढ़ाने के लिए होता है। इस बार संबोधन में खुलकर राजनीतिक बात हुई। कांग्रेस पर 59 बार निशाना साधा गया। इसे प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड पर एक और दाग माना जाएगा। PM ने कहा था- विपक्ष ने आधी आबादी का अधिकार छीना, उन्हें इस पाप की सजा मिलेगी पीएम नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल को देश को संबोधित किया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके जैसे विपक्षी दल इस भ्रूणहत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं। नारी शक्ति के अपराधी हैं। जिन लोगों ने आधी आबादी का अधिकार छीना, उन्हें इस पाप की सजा मिलेगी। दरअसल, लोकसभा में 17 अप्रैल को महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं हो सका था। बिल में लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव था। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इसे पास करने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी। क्या है विशेषाधिकार हनन? संसद के सांसदों और समितियों को कुछ खास अधिकार दिए जाते हैं, ताकि वे बिना दबाव के अपना काम कर सकें। अगर कोई सांसद या कोई बाहरी व्यक्ति इन अधिकारों में दखल देता है या उन्हें नुकसान पहुंचाता है, तो इसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है। ऐसे मामले में कोई भी सांसद सदन में प्रस्ताव ला सकता है और कार्रवाई की मांग कर सकता है। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… लोकसभा सीटें बढ़ाने का बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम लोकसभा में सीटें बढ़ाने के लिए लाया गया संविधान का 131वां संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लोकसभा में बिल पर 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। उपस्थित 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। पूरी खबर पढ़ें…

कांग्रेस ने पीएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस का दिया:लोकसभा स्पीकर को लिखा लेटर; कहा- सांसदों के वोट पर टिप्पणी नियमों के खिलाफ

कांग्रेस ने पीएम के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस का दिया:लोकसभा स्पीकर को लिखा लेटर; कहा- सांसदों के वोट पर टिप्पणी नियमों के खिलाफ

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लेटर लिखकर कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्षी सांसदों के वोट और उनके इरादों पर सवाल उठाए, जो नियमों के खिलाफ है। वेणुगोपाल ने अपने पत्र में लिखा कि 17 अप्रैल 2026 को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका। इसके अगले दिन 18 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने टीवी पर देश को संबोधित किया। लेटर के मुताबिक प्रधानमंत्री ने करीब 29 मिनट के संबोधन में विपक्षी दलों पर बिल रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने सांसदों के वोटिंग पैटर्न पर सीधे सवाल उठाए और उनके फैसलों के पीछे की मंशा पर भी टिप्पणी की। वेणुगोपाल ने नियम 222 के तहत यह नोटिस दिया है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले को लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जाए और प्रधानमंत्री के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाए। स्पीकर को लिखे लेटर की चार मुख्य बातें… जयराम रमेश बोले- पीएम ने कांग्रेस पर 59 बार टारगेट किया कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन आमतौर पर देश को जोड़ने और भरोसा बढ़ाने के लिए होता है। इस बार संबोधन में खुलकर राजनीतिक बात हुई। कांग्रेस पर 59 बार निशाना साधा गया। इसे प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड पर एक और दाग माना जाएगा। क्या है विशेषाधिकार हनन? संसद के सांसदों और समितियों को कुछ खास अधिकार दिए जाते हैं, ताकि वे बिना दबाव के अपना काम कर सकें। अगर कोई सांसद या कोई बाहरी व्यक्ति इन अधिकारों में दखल देता है या उन्हें नुकसान पहुंचाता है, तो इसे विशेषाधिकार हनन माना जाता है। ऐसे मामले में कोई भी सांसद सदन में इसके खिलाफ प्रस्ताव ला सकता है और कार्रवाई की मांग कर सकता है। —————

वे तेलंगाना राज्य ‘बंगाल-तमिलनाडु’ में प्रचार के शोर में चले गए, अब 23 अप्रैल को डेमोक्रेटिक पार्टी के भाग्य पर निर्णय

वे तेलंगाना राज्य 'बंगाल-तमिलनाडु' में प्रचार के शोर में चले गए, अब 23 अप्रैल को डेमोक्रेटिक पार्टी के भाग्य पर निर्णय

विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में पहले चरण के मतदान से 48 घंटे पहले अब मंगलवार को चुनाव का प्रचार किया गया है। तमिल में सभी 234 पर 23 अप्रैल को मतदान होना है। वहीं बंगाल में पहले चरण की 152 सीट पर वोटिंग होगी। चुनावी प्रचार के बाद किसी भी तरह की सार्वजनिक रैली और राजनीतिक प्रचार अब उम्मीदवार नहीं कर सकता। तमिल की सभी सामग्री पर मतदान होगा तमिल की बात करें, तो इस बार एक साथ सभी 234 रिज्यूमे पर वोटिंग होगी। इस बार राज्य में कुल 4,023 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इस बार सभी के सहयोगी राज्य के अभिनेता से नेता बने विजय पार्टी टीवीके पर भी हैं। राज्य की कई सिफारिशों पर टीवीके को काफी समर्थन मिल रहा है। इस चुनाव में कुल 5.73 करोड़ वोट का खर्चा आया। बंगाल में 152 नामांकन पर पहले चरण का मतदान होगाबंगाल की 152 सीटों पर पहले चरण का मतदान होना है। 4 मई को सभी पश्चिमी राज्यों की गिनती की जाएगी। इस बार पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण में मतदान होना है। पहले चरण में कुल 1,478 प्रतियोगिता मैदान हैं। करीब तीन करोड़ 60 लाख 77 हजार 171 कलाकार अपने मत का उपयोग करेंगे। इन कॉलेजों में एक करोड़ 75 लाख 77 हजार 210 महिलाएं हैं। इस बार प्रचार में महिलाओं से लेकर सबसे प्रमुख मुसलमानों तक ने सभी विश्वविद्यालयों को शामिल किया है। इन चतुर्थांश पर बंगाल में होगी वोटिंग चुनाव आयोग की जानकारी के मुताबिक, बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण के लिए 23 अप्रैल से 16 अप्रैल तक 152वें चरण में मतदान होगा। इनमें उत्तर बंगाल के आठ, दक्षिण बंगाल के तीन और जंगलमहल क्षेत्र के पांच जिले शामिल हैं। मुर्शिदाबाद की 22, कुशबिहार की नौ, जलपाईगुड़ी की सात, अलीपुरद्वार की पांच, क्लिंपोंग की एक, दार्जिलिंग की पांच, उत्तर दिनाजपुर की नौ, दक्षिण दिनाजपुर की छह, मालदा की 12, बीरभूम की 11, पश्चिम बुद्धमान की नौ, पूर्व मेदिनीपुर की 16, पश्चिम मेदिनीपुर की 15, ओझाग्राम की चार, पुरुलिया की नौ और बांकुड़ा की 12 देवता शामिल हैं. यह भी पढ़ें: बंगाल-तमिलनाडु चुनाव में गड़बड़ी रोकने के लिए EC का मेगा प्लान! एक सेकंड के लिए भी बंद हुआ कैमरा तो फिल्मी वोट!

‘सांसदों पर आक्षेप लगाना’: कांग्रेस ने राष्ट्र के नाम संबोधन पर पीएम मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया | राजनीति समाचार

Kerala Lottery Result Today: The first prize winner of Sthree Sakthi SS-516 will take home Rs 1 crore. (Image: Shutterstock)

आखरी अपडेट:21 अप्रैल, 2026, 16:40 IST वेणुगोपाल ने आरोप लगाया, “देश के सर्वोच्च कार्यकारी पदाधिकारी द्वारा इस तरह के बयान विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की अवमानना ​​हैं।” वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार के संसद में अपेक्षित बहुमत नहीं जुटा पाने के बाद विपक्षी दलों की आलोचना करने के लिए प्रधानमंत्री का राष्ट्र को संबोधित करना “अभूतपूर्व, अनैतिक और सत्ता का खुला दुरुपयोग” है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक विशेषाधिकार नोटिस दायर किया है, जिसमें उन पर पिछले सप्ताह राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान विपक्षी सांसदों पर आक्षेप लगाने का आरोप लगाया गया है। नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को संबोधित किया गया है, जिससे 2029 में महिला आरक्षण लागू करने पर सदन द्वारा विधेयकों को खारिज किए जाने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ गया है। स्पीकर को लिखे एक पत्र में, कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सदस्यों पर उनके मतदान व्यवहार के लिए “उद्देश्य थोपना” जानबूझकर विशेषाधिकार का उल्लंघन और सदन की अवमानना ​​है, उन्होंने आरोप लगाया और बिड़ला से इस मामले को विस्तृत जांच के लिए लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजने का आग्रह किया। लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमों के नियम 222 के तहत प्रस्तुत अपने नोटिस में, उन्होंने दावा किया कि 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 की हार के बाद 18 अप्रैल को प्रधान मंत्री ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अपने 29 मिनट के भाषण में, प्रधान मंत्री ने विधेयक को रोकने के लिए विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की और विपक्षी सदस्यों के वोटिंग पैटर्न का सीधा संदर्भ दिया, उनके इरादों को जिम्मेदार ठहराया। वेणुगोपाल ने कहा, “इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि एक निर्वाचित प्रतिनिधि पर अपना कर्तव्य निभाने पर सवाल उठाना न केवल व्यक्तिगत हमला है, बल्कि संसद के अधिकार और भारत के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा अपमान है।” वेणुगोपाल ने कहा कि यह अच्छी तरह से स्थापित है कि संसद सदस्यों द्वारा संसद में दिए गए भाषणों के संबंध में उन पर विचार करना, आक्षेप लगाना और इरादों पर आरोप लगाना “विशेषाधिकार का घोर उल्लंघन और सदन की अवमानना” के समान है। वेणुगोपाल ने अपने नोटिस में कहा, “इसलिए मैं विशेषाधिकार हनन का यह नोटिस आपके माननीय अध्यक्ष को सौंपता हूं, ताकि इस गंभीर घटना को स्पष्ट रूप से और जानबूझकर विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना ​​के रूप में संज्ञान लिया जा सके और मामले को विस्तृत जांच के लिए लोकसभा की विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सके ताकि प्रधान मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार कार्यवाही शुरू की जा सके।” कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि एक निर्वाचित प्रतिनिधि पर अपना कर्तव्य निभाने पर सवाल उठाना “केवल एक व्यक्तिगत हमला नहीं है, बल्कि संसद के अधिकार और भारत के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा अपमान है”। नोटिस में कहा गया है, “माननीय अध्यक्ष, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि संसद की पवित्रता और इसके सदस्यों को दी गई संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाएं, ताकि इस तरह के उल्लंघनों को न तो नजरअंदाज किया जाए और न ही दोहराया जाए।” इस बीच, पूर्व सिविल सेवकों, शिक्षाविदों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों सहित 700 से अधिक नागरिकों ने भारत के चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी द्वारा आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। 20 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त को संबोधित एक पत्र में, कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि महिला आरक्षण विधेयक पर प्रधान मंत्री का संबोधन एमसीसी अवधि के दौरान “चुनावी प्रचार और पक्षपातपूर्ण प्रचार” था। पीएम मोदी के संबोधन में क्या था? 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में, पीएम मोदी ने नारी शक्ति पहल को 21वीं सदी में महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक “महान यज्ञ” बताया। उन्होंने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर परिसीमन प्रक्रिया के बारे में गलत जानकारी फैलाने का भी आरोप लगाया, उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के बीच भ्रम पैदा करने के लिए भ्रामक कथाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संशोधन महिलाओं को उनके लंबे समय से लंबित अधिकारों को प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो दशकों से विलंबित था, जिसकी शुरुआत 2029 के लोकसभा चुनावों से हुई थी। यह संबोधन एक प्रमुख महिला आरक्षण विधेयक के संसद में पारित होने में विफल रहने के एक दिन बाद आया। लोकसभा में शुक्रवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर तीखी बहस हुई, जिसमें कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 21 अप्रैल, 2026, 16:38 IST समाचार राजनीति ‘सांसदों पर आक्षेप लगाना’: कांग्रेस ने राष्ट्र के नाम संबोधन पर पीएम मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केसी वेणुगोपाल विशेषाधिकार नोटिस(टी)नरेंद्र मोदी संबोधन(टी)विशेषाधिकार का उल्लंघन(टी)लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला(टी)महिला आरक्षण विधेयक(टी)संविधान 131वां संशोधन(टी)आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन(टी)भारत का चुनाव आयोग

आलिया भट्ट के नाम पर पाकिस्तान में फर्जीवाड़ा:एक्ट्रेस की AI एडिट फोटो से बेच रहे कपड़े; अलग-अलग इवेंट्स से उठाई तस्वीरें

आलिया भट्ट के नाम पर पाकिस्तान में फर्जीवाड़ा:एक्ट्रेस की AI एडिट फोटो से बेच रहे कपड़े; अलग-अलग इवेंट्स से उठाई तस्वीरें

पाकिस्तानी क्लोदिंग ब्रांड ‘वजायशा ऑफिशियल’ आलिया भट्ट की कुछ तस्वीरें पोस्ट कर विवादों में आ गया है। आलिया इन तस्वीरों में एथनिक कलेक्शन में नजर आ रही हैं। लेकिन यह कोई ऑफिशियल शूट नहीं है, बल्कि आलिया की पुरानी तस्वीरों को AI और डिजिटल एडिटिंग के जरिए ब्रांड के कपड़ों पर सुपरइम्पोज (चिपकाया) किया गया है। पाकिस्तानी ब्रांड आलिया की AI तस्वीरों के जारिए अपने सिल्क कलेक्शन का प्रमोशन कर रहा है। ऐसे पकड़ी गई ब्रांड की चोरी 16 अप्रैल को ब्रांड ने इंस्टाग्राम पर एक कैरोसेल पोस्ट किया। इसमें आलिया को गहरे लाल, टील और ब्लैक कलर के सिल्क सूट में दिखाया गया। ब्रांड ने कैप्शन में लिखा- “आलिया भट्ट को भी हमारा शीशा सिल्क कलेक्शन पसंद है।” लेकिन गौर से देखने पर पता चलता है कि ये तस्वीरें एक्ट्रेस के अलग-अलग इवेंट्स से उठाई गई हैं। इसमें आलिया का 2024 का लोरियल पेरिस रैंप वॉक वाला ‘वेट हेयर लुक’ और उनके सब्यसाची फोटोशूट के गहनों का इस्तेमाल किया गया है। यहां तक कि फरवरी 2026 के गुच्ची मिलान फैशन वीक के उनके लुक को भी एडिट किया गया है। ब्रांड बोला- ‘हमें वायरल कर दो’ इस पोस्ट पर फैंस का गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने पूछा कि क्या आलिया को इस बारे में पता भी है? इस पर ब्रांड ने बिना किसी डर के हंसने वाले इमोजी के साथ रिप्लाई किया- “इसे प्लीज वायरल कर दो, ताकि उन्हें भी पता चल जाए।” जब एक यूजर ने चेतावनी दी कि “वे तुम पर केस (Sue) कर देंगी”, तो ब्रांड ने जवाब दिया- “नहीं, वे ऐसा नहीं करेंगी।” यूजर्स ने आलिया को किया टैग सोशल मीडिया पर अब इस ब्रांड को काफी ट्रोल किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे कॉपीराइट का उल्लंघन बताया है। एक यूजर ने लिखा, “यह पूरी तरह से AI का काम है, मैं यह आलिया को भेजूंगा।” फैंस लगातार आलिया भट्ट और उनकी टीम को टैग कर रहे हैं ताकि इस कमर्शियल धोखाधड़ी पर एक्शन लिया जा सके।

आलिया भट्ट के नाम पर पाकिस्तान में फर्जीवाड़ा:एक्ट्रेस की AI एडिट फोटो से बेच रहे कपड़े; अलग-अलग इवेंट्स से उठाई तस्वीरें

आलिया भट्ट के नाम पर पाकिस्तान में फर्जीवाड़ा:एक्ट्रेस की AI एडिट फोटो से बेच रहे कपड़े; अलग-अलग इवेंट्स से उठाई तस्वीरें

पाकिस्तानी क्लोदिंग ब्रांड ‘वजायशा ऑफिशियल’ आलिया भट्ट की कुछ तस्वीरें पोस्ट कर विवादों में आ गया है। आलिया इन तस्वीरों में एथनिक कलेक्शन में नजर आ रही हैं। लेकिन यह कोई ऑफिशियल शूट नहीं है, बल्कि आलिया की पुरानी तस्वीरों को AI और डिजिटल एडिटिंग के जरिए ब्रांड के कपड़ों पर सुपरइम्पोज (चिपकाया) किया गया है। पाकिस्तानी ब्रांड आलिया की AI तस्वीरों के जारिए अपने सिल्क कलेक्शन का प्रमोशन कर रहा है। ऐसे पकड़ी गई ब्रांड की चोरी 16 अप्रैल को ब्रांड ने इंस्टाग्राम पर एक कैरोसेल पोस्ट किया। इसमें आलिया को गहरे लाल, टील और ब्लैक कलर के सिल्क सूट में दिखाया गया। ब्रांड ने कैप्शन में लिखा- “आलिया भट्ट को भी हमारा शीशा सिल्क कलेक्शन पसंद है।” लेकिन गौर से देखने पर पता चलता है कि ये तस्वीरें एक्ट्रेस के अलग-अलग इवेंट्स से उठाई गई हैं। इसमें आलिया का 2024 का लोरियल पेरिस रैंप वॉक वाला ‘वेट हेयर लुक’ और उनके सब्यसाची फोटोशूट के गहनों का इस्तेमाल किया गया है। यहां तक कि फरवरी 2026 के गुच्ची मिलान फैशन वीक के उनके लुक को भी एडिट किया गया है। ब्रांड बोला- ‘हमें वायरल कर दो’ इस पोस्ट पर फैंस का गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने पूछा कि क्या आलिया को इस बारे में पता भी है? इस पर ब्रांड ने बिना किसी डर के हंसने वाले इमोजी के साथ रिप्लाई किया- “इसे प्लीज वायरल कर दो, ताकि उन्हें भी पता चल जाए।” जब एक यूजर ने चेतावनी दी कि “वे तुम पर केस (Sue) कर देंगी”, तो ब्रांड ने जवाब दिया- “नहीं, वे ऐसा नहीं करेंगी।” यूजर्स ने आलिया को किया टैग सोशल मीडिया पर अब इस ब्रांड को काफी ट्रोल किया जा रहा है। कई यूजर्स ने इसे कॉपीराइट का उल्लंघन बताया है। एक यूजर ने लिखा, “यह पूरी तरह से AI का काम है, मैं यह आलिया को भेजूंगा।” फैंस लगातार आलिया भट्ट और उनकी टीम को टैग कर रहे हैं ताकि इस कमर्शियल धोखाधड़ी पर एक्शन लिया जा सके।

साधु ने वकील पर किया त्रिशूल से हमला:सिग्नल पर रुकी कार, गाली-गलौज के बाद वार; बचाव में हाथ आगे किया तो हथेली में लगा त्रिशूल

साधु ने वकील पर किया त्रिशूल से हमला:सिग्नल पर रुकी कार, गाली-गलौज के बाद वार; बचाव में हाथ आगे किया तो हथेली में लगा त्रिशूल

भोपाल के बागसेवनिया इलाके में सोमवार दोपहर एक साधु ने जिला न्यायालय में पदस्थ अपर लोक अभियोजक नारायण सिंह ठाकुर पर त्रिशूल से हमला कर दिया। घटना मिसरोद स्थित बापू की कुटिया के सामने लाल सिग्नल पर उस वक्त हुई, जब वे परिवार के साथ कार से घर लौट रहे थे। फरियादी के मुताबिक जैसे ही उन्होंने सिग्नल पर अपनी कार रोकी, तभी एक साधु वहां पहुंचा और गालियां देने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने त्रिशूल से कार के सामने के कांच पर वार कर दिया। इसके बाद वह ड्राइवर साइड आया और साइड विंडो पर भी त्रिशूल मारकर कांच तोड़ दिया। बचाव में हाथ आगे किया तो हथेली में घोंपा त्रिशूल घटना के दौरान आरोपी ने दोबारा हमला किया, जिसे रोकने के लिए वकील ने हाथ आगे किया। इस दौरान त्रिशूल उनकी दाहिनी हथेली में घुस गया, जिससे वे घायल हो गए और खून बहने लगा। आरोपी ने जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के वक्त वकील की पत्नी, बेटा समेत मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव किया। आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था, तभी पुलिस को सूचना दी गई और मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे पकड़ लिया। आरोपी की पहचान, केस दर्ज पुलिस पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम अरविंद चौधरी बताया है। बागसेवनिया थाना पुलिस ने मामले में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हमले में वकील की कार के आगे और साइड के कांच पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है।