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‘सभ्यता की विफलता’: आतंकवाद पीड़ितों के परिजनों की उपेक्षा पर जम्मू-कश्मीर एलजी, 37 से अधिक नौकरियों की नियुक्तियां सौंपी | राजनीति समाचार

Several people are feared to have been injured after an incoming Air Canada Express CRJ-900 flight and a fire engine collided on runway 4 of the airport.

आखरी अपडेट:मार्च 23, 2026, 19:37 IST जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने पुनर्वास सहायता योजना के तहत आतंक पीड़ितों के परिजनों, सरकारी कर्मचारियों और लाभार्थियों को 37 नियुक्ति पत्र सौंपे 23 मार्च, 2026 को जम्मू में एसआरओ 43 (आतंकवाद के शिकार) और पुनर्वास सहायता योजना (आरएएस) के तहत नियुक्ति आदेश सौंपने के समारोह के दौरान जम्मू और कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा। (छवि: पीटीआई) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को आतंकवाद पीड़ित परिवारों की दशकों से चली आ रही उपेक्षा को “सभ्यतागत विफलता” बताया, साथ ही आतंकवादी पारिस्थितिकी तंत्र पर निरंतर समर्थन और कड़ी कार्रवाई की घोषणा की। सिन्हा ने पुनर्वास सहायता योजना के तहत लाभार्थियों के साथ-साथ आतंकवाद पीड़ितों के 37 परिजनों और सेवा के दौरान मारे गए सरकारी कर्मचारियों के 29 परिवार के सदस्यों को नियुक्ति पत्र सौंपे। जम्मू के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा, “ऐसे क्षण आते हैं जब शब्द छोटे और लगभग असहाय महसूस होते हैं… मानवीय पीड़ा की सीमा भाषा की सीमाओं से परे हो जाती है।” उन्होंने कहा कि ये परिवार जिस दौर से गुजरे हैं उसे ”शब्दों से बयान नहीं किया जा सकता, न ही शब्द इसे सुधार सकते हैं।” आतंकी हमलों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें “उनके जीवन के सबसे उज्ज्वल चरण में” ले जाया गया और इस बात पर जोर दिया कि उनका बलिदान देश की सामूहिक चेतना में अंकित रहना चाहिए। ‘पीड़ितों को मिटा दिया गया’ सिन्हा ने कहा कि आतंक पीड़ित परिवार न केवल हिंसा से तबाह हो गए, बल्कि उनकी रक्षा के लिए बनी व्यवस्था ने भी उन्हें त्याग दिया। उन्होंने कहा, “मैं इसे महज एक प्रशासनिक चूक के रूप में नहीं देखता… यह उस समय की सभ्यतागत विफलता थी।” उन्होंने बताया कि दशकों तक, इन परिवारों को “समाज की स्मृति से मिटा दिया गया”, बिना नौकरी, मान्यता या समर्थन के छोड़ दिया गया। साथ ही, उन्होंने कहा, एक बेहद परेशान करने वाली स्थिति सामने आई है जहां आतंकी नेटवर्क से जुड़े लोगों को सिस्टम के भीतर जगह और लाभ मिला है। “हम किस तरह का समाज बन गए… जहां पीड़ित बोझ बन गया और आतंक से जुड़े लोग लाभार्थी बन गए?” उसने पूछा. ‘नई नैतिक घोषणा’ हाल के वर्षों में बदलावों पर प्रकाश डालते हुए, सिन्हा ने कहा कि प्रशासन ने पीड़ितों के परिवारों को प्राथमिकता देकर और आतंकवाद से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करके इस असंतुलन को ठीक करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा, “आतंकवाद से सीधे तौर पर जुड़े लोगों को सेवा से बर्खास्त किया जा रहा है, जबकि दशकों से उपेक्षित आतंक पीड़ित परिवारों को उनकी गरिमा सुरक्षित रखने के लिए सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं।” इसे एक नीतिगत बदलाव से कहीं अधिक बताते हुए उन्होंने कहा, “मैं इसे केवल एक नीतिगत सुधार के रूप में नहीं, बल्कि नए जम्मू-कश्मीर के लिए एक नई नैतिक घोषणा के रूप में देखता हूं।” उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी प्रणाली के उद्भव का प्रतीक है जहां न्याय केवल शब्दों तक सीमित नहीं है बल्कि कार्रवाई में परिलक्षित होता है। “यह एक स्पष्ट संदेश है कि एक नया आदेश आ गया है… जो आतंकवाद से जुड़े लोगों को बेरहमी से दंडित करेगा और पीड़ितों की गरिमा को बहाल करेगा।” ‘आतंकवादी नेटवर्क के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं’ आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र के शेष तत्वों और जिन्हें उन्होंने “संघर्ष उद्यमियों” कहा था, को चेतावनी जारी करते हुए सिन्हा ने कहा कि उनका समय समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, “जम्मू-कश्मीर के लोग जानते हैं कि ऐसे तत्वों को किसने बचाया, लेकिन वह ढाल अब टूट रही है।” “मैं उन्हें चेतावनी देता हूं कि जम्मू-कश्मीर में अब आतंकवादियों या उन्हें समर्थन देने वाले नेटवर्क के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं है।” उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अतीत में सरकारी मशीनरी में घुसपैठ की, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने कहा, “उन्हें एक-एक करके पहचाना जाएगा, सरकारी नौकरियों से हटाया जाएगा और कानून के मुताबिक दंडित किया जाएगा।” उपराज्यपाल ने न्याय के विचार का भी विस्तार किया और कहा कि यह अदालतों और सजा से परे है। उन्होंने कहा, “न्याय भी इसमें निहित है कि समाज किन कहानियों को याद रखना चाहता है… इसका मतलब है दुखी परिवारों के आंसू पोंछना, उनके दर्द को स्वीकार करना और उनकी आत्माओं पर लगे घावों को ठीक करना।” उन्होंने कहा कि आतंक पीड़ितों के परिवारों की कहानियाँ, जिन्हें एक बार भुला दिया गया था, अब “नई स्मृति और सम्मान के साथ” फिर से लिखी जा रही हैं। अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन तब तक अपने प्रयास जारी रखेगा जब तक कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को न्याय, सम्मान और समर्थन नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा, ”जब तक हर परिवार तक न्याय नहीं पहुंच जाता, हम आराम से नहीं बैठेंगे।” वर्तमान क्षण को एक निर्णायक मोड़ बताते हुए उन्होंने कहा, “हम आज जम्मू-कश्मीर में एक निर्णायक मोड़ पर खड़े हैं… युवा और ये परिवार उज्ज्वल भविष्य की आकांक्षा रखते हैं, और उस भविष्य को वास्तविकता बनाना हमारी साझा जिम्मेदारी है।” जगह : जम्मू, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 23, 2026, 19:37 IST समाचार राजनीति ‘सभ्यता की विफलता’: आतंकवाद पीड़ितों के परिजनों की उपेक्षा पर जम्मू-कश्मीर एलजी ने 37 से अधिक नौकरियों की नियुक्तियां सौंपी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)जम्मू और कश्मीर के आतंकवादी पीड़ितों का समर्थन(टी)मनोज सिन्हा पुनर्वास योजना(टी)जम्मू और कश्मीर के आतंक पीड़ित 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IPL गाइडलाइन- मैच के दिन प्रैक्टिस पर रोक:फिटनेस टेस्ट नहीं, जर्सी नंबर बदलने पर बताना होगा; ड्रेसिंग रूम में सिर्फ स्टाफ को एंट्री

IPL गाइडलाइन- मैच के दिन प्रैक्टिस पर रोक:फिटनेस टेस्ट नहीं, जर्सी नंबर बदलने पर बताना होगा; ड्रेसिंग रूम में सिर्फ स्टाफ को एंट्री

IPL 2026 के लिए BCCI ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत मैच के दिन कोई भी टीम प्रैक्टिस नहीं कर सकेगी। साथ ही खिलाड़ियों के लिए मैच-डे पर फिटनेस टेस्ट नहीं होगा। वहीं जर्सी नंबर बदलने से 24 घंटे पहले जानकारी देनी होगी और ड्रेसिंग रूम में सिर्फ स्टाफ को ही एंट्री मिलेगी। IPL की शुरुआत 28 मार्च से होगी। पहला मैच डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम पर खेला जाएगा। BCCI ने 11 मार्च को IPL 2026 के पहले फेज का शेड्यूल जारी किया है। विरोधी टीम के नेट्स का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में टीमों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। यहां दोनों टीमों को प्रैक्टिस के लिए अलग-अलग विकेट मिलेंगे और कोई भी टीम विरोधी टीम के विकेट का इस्तेमाल नहीं कर सकेगी। प्रैक्टिस से जुड़े मुख्य नियम हर टीम को प्रैक्टिस एरिया में दो नेट और मुख्य स्क्वायर पर एक साइड विकेट दिया जाएगा। मुंबई में यदि दोनों टीमें एक साथ अभ्यास करती हैं, तो उन्हें दो-दो विकेट दिए जाएंगे। ओपन नेट की अनुमति नहीं होगी, जिससे अभ्यास व्यवस्थित रहे। साथ ही, अगर कोई टीम अपनी प्रैक्टिस जल्दी खत्म कर देती है, तो दूसरी टीम उसके विकेट का उपयोग नहीं कर सकेगी। सबसे अहम नियम यह है कि मैच के दिन किसी भी प्रकार की प्रैक्टिस पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। मैच के दिन फिटनेस टेस्ट नहीं होगा मैच के दिन मुख्य स्क्वायर पर किसी भी तरह का फिटनेस टेस्ट नहीं किया जाएगा। खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए टीम बस से ही आना होगा, हालांकि जरूरत पड़ने पर उन्हें दो बैच में लाया जा सकता है। खिलाड़ियों के परिवार और दोस्त अलग वाहन से आएंगे और केवल हॉस्पिटैलिटी एरिया से ही प्रैक्टिस देख पाएंगे। ड्रेसिंग रूम और मैदान पर सिर्फ अधिकृत स्टाफ को ही प्रवेश की अनुमति होगी, ताकि सुरक्षा और अनुशासन बना रहे। स्टाफ को एक्रेडिटेशन कार्ड रखना होगा मैच के दिन सभी अधिकृत स्टाफ के लिए एक्रेडिटेशन कार्ड साथ रखना अनिवार्य होगा, अन्यथा जुर्माना लगाया जाएगा। खिलाड़ियों को LED बोर्ड के पास बैठने या गेंद हिट करने से बचने की सलाह दी गई है। ब्रॉडकास्ट के नियमों के तहत शुरुआती ओवरों में ऑरेंज और पर्पल कैप पहनना जरूरी होगा। इसके अलावा, पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन के दौरान स्लीवलेस जर्सी या फ्लॉपी पहनने की अनुमति नहीं होगी। मैच के दिन केवल 12 सपोर्ट स्टाफ (जिसमें डॉक्टर भी शामिल है) को ही टीम के साथ रहने की अनुमति मिलेगी। जर्सी नंबर बदलने की जानकारी देनी होगी टीमों को अपने खिलाड़ियों के जर्सी नंबर में किसी भी बदलाव की जानकारी कम से कम 24 घंटे पहले देनी होगी। इन सभी नए नियमों का उद्देश्य मैच के दौरान अनुशासन बनाए रखना और सभी टीमों के लिए समान परिस्थितियां सुनिश्चित करना है। ————————– क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… कोहली ने लंदन के लिए चार्टर्डफ्लाइट वाली खबर को नकारा IPL 2026 से पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के बल्लेबाज विराट कोहली ने लंदन आने-जाने के लिए चार्टर्ड फ्लाइट मांगने की खबरों को खारिज कर दिया है। उन्होंने इन रिपोर्ट्स को अफवाह बताते हुए इंस्टाग्राम पर हंसने वाले इमोजी के साथ प्रतिक्रिया दी। पढ़ें पूरी खबर…

तमिलनाडु में ‘धुरंधर 2’ पर बैन की मांग:मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा मामला, विधानसभा चुनाव से पहले फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग उठी

तमिलनाडु में ‘धुरंधर 2’ पर बैन की मांग:मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा मामला, विधानसभा चुनाव से पहले फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग उठी

रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। अब तमिलनाडु में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग उठी है, जिसके बाद मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंच गया है। चुनावी माहौल के बीच इस फिल्म की रिलीज को लेकर आपत्ति जताई गई है। Daily Thanthi की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एडवोकेट शीला ने मद्रास हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग करते हुए फिल्म पर बैन लगाने की अपील की। याचिकाकर्ता का कहना है कि फिल्म की कहानी और विषय राजनीतिक प्रकृति के हैं, ऐसे में चुनाव से ठीक पहले इसका प्रदर्शन आचार संहिता का उल्लंघन कर सकता है। हालांकि कोर्ट ने इस मौखिक अपील पर तुरंत रोक लगाने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को औपचारिक याचिका दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले में अगला फैसला याचिका दाखिल होने के बाद ही लिया जाएगा। तमिलनाडु में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक या संवेदनशील कंटेंट वाली फिल्म को लेकर प्रशासन और अदालत दोनों सतर्क नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि फिल्म की रिलीज टाइमिंग पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। फिल्म ‘धुरंधर 2’ पहले से ही कई विवादों में घिरी हुई है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके कंटेंट को लेकर विरोध हो चुका है। कुछ नेताओं और संगठनों ने इसे प्रोपेगेंडा तक बताया है, जबकि कई दर्शकों ने भी फिल्म की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा तमिलनाडु में फिल्म के शोज भी पहले रद्द होने की खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि सेंसर और कंटेंट से जुड़े विवादों के कारण कई थिएटरों में स्क्रीनिंग प्रभावित हुई, जिससे दर्शकों को टिकट रिफंड तक देना पड़ा। ‘धुरंधर 2’ एक पैन-इंडिया फिल्म है, जिसे हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में रिलीज किया गया है। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, लेकिन विवाद इसकी राह में लगातार अड़चन पैदा कर रहे हैं। फिलहाल सभी की नजर मद्रास हाईकोर्ट के अगले कदम पर टिकी है। अगर कोर्ट इस मामले में सुनवाई स्वीकार करता है, तो तमिलनाडु में फिल्म की रिलीज पर असर पड़ सकता है। वहीं, फिल्म इंडस्ट्री भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि चुनावी समय में फिल्मों पर इस तरह के विवाद भविष्य के लिए एक मिसाल बन सकते हैं।

तमिलनाडु में ‘धुरंधर 2’ पर बैन की मांग:मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा मामला, विधानसभा चुनाव से पहले फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग उठी

तमिलनाडु में ‘धुरंधर 2’ पर बैन की मांग:मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा मामला, विधानसभा चुनाव से पहले फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग उठी

रणवीर सिंह स्टारर फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। अब तमिलनाडु में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग उठी है, जिसके बाद मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंच गया है। चुनावी माहौल के बीच इस फिल्म की रिलीज को लेकर आपत्ति जताई गई है। Daily Thanthi की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एडवोकेट शीला ने मद्रास हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग करते हुए फिल्म पर बैन लगाने की अपील की। याचिकाकर्ता का कहना है कि फिल्म की कहानी और विषय राजनीतिक प्रकृति के हैं, ऐसे में चुनाव से ठीक पहले इसका प्रदर्शन आचार संहिता का उल्लंघन कर सकता है। हालांकि कोर्ट ने इस मौखिक अपील पर तुरंत रोक लगाने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को औपचारिक याचिका दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले में अगला फैसला याचिका दाखिल होने के बाद ही लिया जाएगा। तमिलनाडु में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में किसी भी राजनीतिक या संवेदनशील कंटेंट वाली फिल्म को लेकर प्रशासन और अदालत दोनों सतर्क नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि फिल्म की रिलीज टाइमिंग पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। फिल्म ‘धुरंधर 2’ पहले से ही कई विवादों में घिरी हुई है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसके कंटेंट को लेकर विरोध हो चुका है। कुछ नेताओं और संगठनों ने इसे प्रोपेगेंडा तक बताया है, जबकि कई दर्शकों ने भी फिल्म की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा तमिलनाडु में फिल्म के शोज भी पहले रद्द होने की खबरें सामने आई थीं। बताया गया कि सेंसर और कंटेंट से जुड़े विवादों के कारण कई थिएटरों में स्क्रीनिंग प्रभावित हुई, जिससे दर्शकों को टिकट रिफंड तक देना पड़ा। ‘धुरंधर 2’ एक पैन-इंडिया फिल्म है, जिसे हिंदी के साथ-साथ तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में रिलीज किया गया है। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, लेकिन विवाद इसकी राह में लगातार अड़चन पैदा कर रहे हैं। फिलहाल सभी की नजर मद्रास हाईकोर्ट के अगले कदम पर टिकी है। अगर कोर्ट इस मामले में सुनवाई स्वीकार करता है, तो तमिलनाडु में फिल्म की रिलीज पर असर पड़ सकता है। वहीं, फिल्म इंडस्ट्री भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि चुनावी समय में फिल्मों पर इस तरह के विवाद भविष्य के लिए एक मिसाल बन सकते हैं।

धुरंधर 2 मुंबई 26/11 हमलों का निजी बदला है:अर्जुन रामपाल बोले- उस दर्द को परदे पर उतारा, जिसे सालों से महसूस कर रहा था

धुरंधर 2 मुंबई 26/11 हमलों का निजी बदला है:अर्जुन रामपाल बोले- उस दर्द को परदे पर उतारा, जिसे सालों से महसूस कर रहा था

बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल ने अपनी फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ को लेकर कहा है कि यह फिल्म उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि 26/11 मुंबई आतंकी हमलों का निजी बदला है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अर्जुन रामपाल ने बताया कि 26 नवंबर 2008 का दिन उनके जीवन का सबसे भयावह दिन था। यह उनका 36वां जन्मदिन था और वह दोस्तों के साथ जश्न मनाने निकले थे। पहले वे वर्ली के एक होटल में रुके, जहां अचानक धमाके की आवाज सुनाई दी। शुरुआत में लगा कि कोई गैंगवार हुआ है, लेकिन कुछ ही देर में पूरे शहर में आतंक फैल गया। उन्होंने बताया कि होटल को तुरंत बंद कर दिया गया और सभी को अंदर रहने के निर्देश दिए गए। बाहर हालात बेहद खराब थे। रामपाल ने कहा, “मेरे जन्मदिन पर मैंने 26/11 की भयावहता अपनी आंखों से देखी।” इस घटना का उन पर गहरा मानसिक असर पड़ा। अगले दिन घर लौटते समय उन्हें कई बार गाड़ी रोकनी पड़ी, क्योंकि उनकी तबीयत खराब हो रही थी। जब निर्देशक आदित्य दर ने उन्हें ‘धुरंधर’ की कहानी सुनाई, तो 26/11 से जुड़ा सीन सुनते ही उन्होंने फिल्म करने का फैसला कर लिया। रामपाल के मुताबिक, उसी समय उन्हें लगा कि यह उनके अंदर की पीड़ा और गुस्से को बाहर निकालने का मौका है। फिल्म में रामपाल मेजर इकबाल का किरदार निभा रहे हैं, जो 26/11 हमलों के मास्टरमाइंड के रूप में दिखाया गया है। इस किरदार के जरिए उन्होंने उस दर्द को अभिनय में उतारा, जिसे वे सालों से महसूस कर रहे थे। ‘धुरंधर: द रिवेंज’ एक स्पाई-थ्रिलर फिल्म है, जिसमें रणवीर सिंह समेत कई बड़े कलाकार नजर आए हैं। फिल्म की कहानी आतंकवाद और उसके खिलाफ बदले की भावना पर आधारित है, जो दर्शकों से भावनात्मक रूप से जुड़ रही है। रामपाल का कहना है कि यह फिल्म उनके लिए सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक भावनात्मक सफर और व्यक्तिगत क्लोजर है।

कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से कैंटीन-चौपाटी-ढाबे बंद:रीवा में सैकड़ों लोगों पर रोजगार का संकट, रेस्टोरेंट्स के बाहर लगे अस्थाई बंद के नोटिस

कमर्शियल सिलेंडर न मिलने से कैंटीन-चौपाटी-ढाबे बंद:रीवा में सैकड़ों लोगों पर रोजगार का संकट, रेस्टोरेंट्स के बाहर लगे अस्थाई बंद के नोटिस

रीवा में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत ने होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को गहरे संकट में डाल दिया है। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जिससे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण शहर की कई कैंटीन, रेस्टोरेंट, चौपाटी और ढाबे बंद होने लगे हैं। इस संकट का सीधा असर कारोबारियों की आय पर पड़ रहा है। रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि जहां पहले वे महीनेभर में संतोषजनक कमाई कर लेते थे, वहीं अब कर्मचारियों का वेतन और अन्य खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। दुकानें बंद होने की वजह से बड़ी संख्या में काम करने वाले लोग बेरोजगार होने लगे हैं। गैस की कमी के चलते भोजन तैयार करना संभव नहीं हो पा रहा, जिससे ग्राहकों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। शहर के कई रेस्टोरेंट्स के बाहर नोटिस चस्पा कर दिए गए हैं, जिनमें साफ लिखा है कि सिलेंडर की कमी के चलते संस्थान अस्थायी रूप से बंद किया गया है। रीवा की चौपाटी, जो आमतौर पर 24 घंटे गुलजार रहती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। संचालकों का कहना है कि हालात लॉकडाउन से भी बदतर होते जा रहे हैं। कुछ संचालक कोयले भट्टी का ले रहे सहारा कुछ रेस्टोरेंट संचालक मजबूरी में गैस के विकल्प के रूप में कोयले और लकड़ी का सहारा लेकर काम चला रहे हैं। हालांकि, इससे लागत बढ़ रही है और धुएं के कारण कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि फिलहाल कारोबार को किसी तरह बचाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। कलेक्टर बोलीं- आपूर्ती को सामान्य करने की कोशिश कर रहे रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इस मामले में कहा कि कमर्शियल और एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य की जा रही है। प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक संस्थानों की कैंटीन और रेस्टोरेंट में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार किए जा रहे हैं। जल्द ही स्थिति पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है। फिलहाल, रेस्टोरेंट संचालकों की स्थिति बेहद कठिन बनी हुई है और कई प्रतिष्ठान बंद होने की कगार पर हैं। अब देखना होगा कि गैस आपूर्ति कब तक पूरी तरह सामान्य होती है और कारोबार फिर से पटरी पर लौट पाता है।

रेलवे ट्रैक पर मिला 70 वर्षीय एथलीट का शव:3 मेडल जीतकर भिवानी में घर जा रहा था; शताब्दी एक्सप्रेस में सवार था इंटरनेशनल खिलाड़ी

रेलवे ट्रैक पर मिला 70 वर्षीय एथलीट का शव:3 मेडल जीतकर भिवानी में घर जा रहा था; शताब्दी एक्सप्रेस में सवार था इंटरनेशनल खिलाड़ी

हरियाणा के भिवानी जिले के 70 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय एथलीट की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत है। उम्र के इस पड़ाव पर भी खेल के मैदान में सक्रिय रहकर देश का नाम रोशन करने वाले व्यक्ति 3 मेडल जीतकर लौट रहे थे, लेकिन उनका यह सफर अधूरा रह गया। कालका नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस में सफर के दौरान उनकी लाश सोनीपत के राठधाना और नरेला के बीच रेलवे ट्रैक पर मिलने से मामला रहस्यमय बन गया है। परिवार और खेल जगत के लिए यह घटना गहरे सदमे से कम नहीं है। प़ुलिस ने शव का पोस्टमॉर्टम करवा परिजनों को सौंप दिया है। सोनीपत जीआरपी पुलिस मामले में जांच कर रही है। कैसे हुआ हादसा, क्या है पूरा घटनाक्रम जानकारी के अनुसार फूल कुंवार चंडीगढ़ से दिल्ली होते हुए अपने घर भिवानी लौट रहे थे। वे कालका-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस में सवार थे। बताया जा रहा है कि जब ट्रेन सोनीपत पार कर राठधाना स्टेशन के नजदीक पहुंची, तभी उनकी डेड बॉडी रेलवे ट्रैक पर मिली। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि या तो ट्रेन के दरवाजे से गिरने के कारण यह हादसा हुआ या फिर किसी ने धक्का दिया। हालांकि, अभी तक किसी भी संभावना की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे मामला पूरी तरह संदिग्ध बना हुआ है। जीत की खुशी मातम में बदली फूल कुंवार 21 और 22 मार्च को चंडीगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गए थे। यहां उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए हाई जंप और हैमर थ्रो में गोल्ड मेडल जीता, जबकि शॉट पुट में सिल्वर मेडल अपने नाम किया। तीन मेडल जीतकर वे बेहद खुश थे और रविवार शाम को घर लौट रहे थे, लेकिन यह खुशी कुछ ही घंटों में परिवार के लिए गहरे गम में बदल गई। एथलेटिक्स में चमकदार करियर फूल कुंवार का खेल जीवन बेहद शानदार रहा है। उन्होंने 1978 से 1986 के बीच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैकड़ों मेडल जीते। शॉट पुट, बांस कूद (पोल वॉल्ट) और हैमर थ्रो उनके मुख्य इवेंट रहे। 1982 में उन्होंने बांस कूद में नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया था। जर्मनी, मलेशिया, चीन और जापान जैसे देशों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल किए। पुलिस और रेलवे में भी निभाई अहम भूमिका खेल के साथ-साथ फूल कुंवार ने सरकारी सेवाओं में भी अपनी पहचान बनाई। 1978 में वे हरियाणा पुलिस में सीधे एएसआई के पद पर भर्ती हुए और करीब 7 वर्षों तक सेवा दी। इसके बाद 1982 में वे रेलवे दिल्ली में चीफ टिकट इंस्पेक्टर बने और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। उनकी नौकरी भी खेल कोटे के आधार पर लगी थी, जो उनकी प्रतिभा का प्रमाण है। 70 की उम्र में भी फिटनेस का जुनून फूल कुंवार ने रिटायरमेंट के बाद भी खेल को कभी नहीं छोड़ा। वे मास्टर एथलेटिक्स कैटेगरी में लगातार हिस्सा लेते रहे। 70 साल की उम्र में भी वे रोज सुबह और शाम दो-दो घंटे प्रेक्टिस करते थे। इतना ही नहीं, वे युवा खिलाड़ियों को भी मैदान में टिप्स देते और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। उनकी फिटनेस और ऊर्जा को देखकर हर कोई हैरान रह जाता था। परिजनों के सवाल, बढ़ा संदेह परिजनों के अनुसार फूल कुंवार के साथ भिवानी के 2 अन्य साथी भी ट्रेन में सफर कर रहे थे। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर यह घटना कैसे हुई। परिवार का कहना है कि वे पूरी तरह स्वस्थ और खुश थे, ऐसे में अचानक इस तरह की घटना समझ से परे है। परिजनों ने ट्रेन के सीसीटीवी फुटेज खंगालने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ फूल कुंवार अपने पीछे पत्नी और एक शादीशुदा बेटी को छोड़ गए हैं। तीन मेडल जीतकर लौटने की खुशी का इंतजार कर रहा परिवार अब गहरे सदमे में है। घर में जश्न की जगह मातम पसरा हुआ है। जांच में जुटी जीआरपी जीआरपी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सोनीपत सिविल अस्पताल भेजा, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए दुखद है, बल्कि हरियाणा के खेल जगत के लिए भी एक बड़ी क्षति मानी जा रही है, जिसने एक समर्पित और प्रेरणादायक खिलाड़ी को खो दिया।

2029 तक महिला कोटा: केंद्र तेजी से आरक्षण की ओर बढ़ा, विस्तारित लोकसभा में 273 सीटों पर नजर | भारत समाचार

Several people are feared to have been injured after an incoming Air Canada Express CRJ-900 flight and a fire engine collided on runway 4 of the airport.

आखरी अपडेट:मार्च 23, 2026, 15:18 IST सूत्रों ने कहा कि सरकार मौजूदा संसद सत्र में संशोधित कानून लाने की इच्छुक है और आम सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों के साथ परामर्श शुरू कर चुकी है। 2023 में राज्यसभा द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) पारित होने के बाद महिला सांसदों के साथ प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी। (पीटीआई) सूत्रों ने कहा कि केंद्र 2029 के आम चुनावों से पहले इसके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए महिला आरक्षण कानून में महत्वपूर्ण संशोधन लाने की तैयारी कर रहा है, साथ ही लोकसभा सीटों के महत्वपूर्ण विस्तार पर भी विचार किया जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम में प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने के लंबे समय से लंबित प्रावधान को क्रियान्वित करना है। योजना के एक महत्वपूर्ण हिस्से में कार्यान्वयन को 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन अभ्यास से जोड़ना शामिल है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि इससे लोकसभा की ताकत मौजूदा 543 सीटों से बढ़कर लगभग 816 सीटों तक पहुंच सकती है। इनमें से, कानून के तहत परिकल्पित एक तिहाई कोटा के अनुरूप, लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। सूत्रों ने कहा कि सरकार संसद के चालू सत्र में संशोधित कानून लाने की इच्छुक है और आम सहमति बनाने के लिए विपक्षी दलों के साथ परामर्श शुरू कर चुकी है। समझा जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई विपक्षी नेताओं को प्रस्तावित रोडमैप के बारे में जानकारी दी है। परिसीमन प्रक्रिया में अद्यतन जनसंख्या डेटा के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों के संशोधन को सक्षम करने के लिए परिसीमन अधिनियम सहित मौजूदा कानूनों में संशोधन की आवश्यकता होगी। अधिकारियों ने कहा कि आरक्षित सीटों का आवंटन ड्रॉ के माध्यम से किए जाने की संभावना है, एक तंत्र जिसका उद्देश्य रोटेशन और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। हालाँकि, सिक्किम सहित कुछ छोटे राज्यों में प्रस्तावित ढांचे के तहत बदलाव नहीं देखा जा सकता है। संसदीय मामलों की कैबिनेट समिति की हालिया बैठक के बाद इस प्रयास में तेजी आई, जहां प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2029 तक महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। जबकि मूल कानून में अगली जनगणना और परिसीमन अभ्यास के बाद कार्यान्वयन की परिकल्पना की गई थी, नए संशोधनों का उद्देश्य समयसीमा को आगे बढ़ाना और निष्पादन पर स्पष्टता प्रदान करना है। यदि इसे आगे बढ़ाया जाता है, तो यह कदम दशकों में भारत की संसदीय प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तनों में से एक होगा, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में महिलाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए प्रतिनिधित्व का विस्तार होगा। पहले प्रकाशित: मार्च 23, 2026, 15:18 IST न्यूज़ इंडिया 2029 तक महिला कोटा: केंद्र तेजी से आरक्षण की ओर बढ़ा, विस्तारित लोकसभा में 273 सीटों पर नजर अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)महिला आरक्षण कानून भारत(टी)नारी शक्ति अभिनंदन अधिनियम(टी)महिला आरक्षण लोकसभा(टी)महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण(टी)लोकसभा सीट विस्तार(टी)2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन(टी)महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व भारत(टी)महिला कोटा के लिए संवैधानिक संशोधन

हरियाणा में बेकाबू कैंटर ने 7 लोगों को रौंदा:3 की मौत, सड़क पर बिखरीं लाशें; फ्लाईओवर के 2 पिलर के बीच फंसकर रुका

हरियाणा में बेकाबू कैंटर ने 7 लोगों को रौंदा:3 की मौत, सड़क पर बिखरीं लाशें; फ्लाईओवर के 2 पिलर के बीच फंसकर रुका

हरियाणा के झज्जर में सोमवार की दोपहर एक कैंटर ने सात लोगों को कुचल दिया। इस हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक महिला सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा तेज रफ्तार की वजह से हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पहले टैंकर ड्राइवर ने सड़क पार कर रहे दो युवकों को कुचला। इसके बाद भी ड्राइवर नहीं रुका और तेज गति से कैंटर दौड़ा दिया। इसी भागमभागम में कई और लोगों को भी चपेट में ले लिया। इनमें एक और बाइक सवार युवक की मौत हो गई, जबकि चपेट में आकर ऑटो सवार महिला समेत चार घायल हो गए। इसके बाद बेकाबू कैंटर फ्लाईओवर के दो पिलर के बीच फंस कर रुक गया तो ड्राइवर कूदकर कर फरार हो गया। हादसे के बाद सड़क पर अफरातफरी मच गई। पुलिस के आने तक शव सड़क पर ही पड़े रहे। इसके बाद सूचना पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लिया और लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया। बहादुरगढ़ में हुए हादसे के कुछ PHOTOS…. यहां सिलसिलेवार ढंग से जानिए कैसे हुआ हादसा… मामा चौक पर हुआ हादसा, पहले 2 युवकों को मारी टक्कर जानकारी अनुसार, हादसा बहादुरगढ़ में दिल्ली-रोहतक रोड पर स्थित आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र (MIE) के मामा चौक पर सोमवार की दोपहर हुआ। चौक की तरफ से आ रहे तेज रफ्तार कैंटर (HR-63E-4325) ने सड़क पार कर रहे दो युवकों को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। युवकों को टक्कर मारने के बाद बाइक सवार को रौंदा पहले हादसे के बाद ड्राइवर रुका नहीं, बल्कि पकड़े जाने के डर से कैंटर को और तेज भगाते हुए बाईपास की ओर ले गया। बाईपास पर कैंटर ने एक मोटरसाइकिल को रौंद दिया। इस हादसे में कानोंदा निवासी योगेंद्र (30) की मौत हो गई, जबकि उसका साथी प्रवीण गंभीर रूप से घायल हो गया। ऑटो को मारी टक्कर, महिला सहित 3 चपेट में आए इसके बाद बेकाबू कैंटर ने एक ऑटो को जोरदार टक्कर मारी। ऑटो में सवार लाइनपार निवासी प्रेम (महिला), उनके पति कृष्ण और ड्राइवर जयवीर घायल हो गए। कई लोगों ने इधर-उधर भाग कर अपनी जान बचाई। हादसे के बाद सड़क पर अफरा तफरी मच गई। पुलिस ने लोगों की मदद से घायलों को अस्पताल पहुंचाया इसके बाद सूचना पर पहुंची पुलिस ने आसपास के लोगों की मदद से घायल लोगों को उठाकार बहादुरगढ़ सिविल अस्पताल में पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने अशोक (32) निवासी छपरा (बिहार) और शंभू (22) निवासी छपरा (बिहार) और हरियाणा के कानोंदा निवासी योगेंद्र (30 वर्ष) को मृत घोषित कर दिया। महिला प्रेम को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। पिलर के बीच में फंसकर रुका कैंटर, ड्राइवर फरार उधर, ऑटो में टक्कर मारने के बाद भी ड्राइवर कैंटर को दौड़ाता रहा। ड्राइवर तेज रफ्तार से नजफगढ़ फ्लाईओवर की ओर बढ़ा, लेकिन कैंटर अनियंत्रित होकर फ्लाईओवर के नीचे दो पिलर के बीच फंस गया। इसके बाद ड्राइवर कैंटर को मौके पर ही छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने कैंटर को कब्जे में लेकर उसके नंबर के आधार पर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। ——————- ये खबर भी पढ़ें… मुरथल ढाबे पर परांठे खाने गए 2 दोस्तों की मौत:सोनीपत में कार डिवाइडर से टकराई, 5 घायल; एक की होने वाली थी शादी सोनीपत में नेशनल हाईवे (GT रोड) पर रात को एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। इस हादसे में कार सवार 2 युवकों की मौत हो गई। जबकि इनके पांच अन्य साथी गंभीर रूप से घायल हैं। सभी दिल्ली से परांठे खाने के लिए मुरथल के ढ़ाबे पर आए थे। (पूरी खबर पढ़ें)

धुरंधर 2 में आर माधवन के सीन पर विवाद:शिवसेना नेता ने गुरबाणी के अपमान पर उठाया सवाल, फिल्म मेकर्स से सार्वजनिक माफी की मांग की

धुरंधर 2 में आर माधवन के सीन पर विवाद:शिवसेना नेता ने गुरबाणी के अपमान पर उठाया सवाल, फिल्म मेकर्स से सार्वजनिक माफी की मांग की

फिल्म धुरंधर 2 को लेकर नया विवाद सामने आया है। फिल्म के एक सीन में गुरबाणी के कथित अपमान को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। शिव सेना गुरजोत सिंह कीर ने ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए फिल्म मेकर्स से सार्वजनिक माफी की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद उस सीन को लेकर है जिसमें आर माधवन का किरदार गुरबाणी का उच्चारण करता नजर आता है। आरोप है कि इस दौरान उनके हाथ में सिगरेट दिखाई गई है। सिख समुदाय और नेताओं का कहना है कि यह प्रस्तुति धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ है और इससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। यही इस पूरे विवाद का मुख्य कारण बन गया है। शिवसेना नेता गुरजोत सिंह कीर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी इस सीन को बेहद आहत करने वाला और अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि गुरबाणी सिख धर्म की पवित्र वाणी है और इसे इस तरह दिखाना किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से तुरंत माफी मांगने और विवादित सीन को हटाने की मांग की है। नेता ने चेतावनी भी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन हो सकता है। उनका कहना है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतना जरूरी है, खासकर जब बात किसी समुदाय की आस्था की हो। यह मामला अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। खबर के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर शिकायत भी दर्ज कराई गई है। शिकायत में फिल्म से जुड़े लोगों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल, फिल्म के मेकर्स या कलाकारों की तरफ से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि बढ़ते विरोध के बीच मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गौरतलब है कि धुरंधर 2 पहले भी अलग-अलग कारणों से चर्चा में रही है, लेकिन गुरबाणी से जुड़े इस विवाद ने इसे फिर सुर्खियों में ला दिया है।