20 साल से ट्रैक्टर चलाने वालों को बहरेपन का खतरा:55 ड्राइवरों पर रिसर्च के बाद सीआईएई भोपाल के वैज्ञानिकों का खुलासा

खेतों में ट्रैक्टर चलाने वाले किसानों की सुनने की शक्ति कमजोर हो रही है। एक ताजा रिसर्च में खुलासा हुआ है कि जो किसान 20 साल या उससे ज्यादा समय से ट्रैक्टर चला रहे हैं, उनमें से कई को सामान्य बातचीत करने में भी जोर लगाना पड़ता है। ऑफिस वर्कर के मुकाबले देखें तो दफ्तर में यह जोखिम 0.2% है, जबकि ट्रैक्टर चलाने वालो में यह बढ़कर 7.1% तक पहुंच जाता है। जो 35 गुना ज्यादा है। केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (सीआईएई), भोपाल के वैज्ञानिकों ने 55 ट्रैक्टर ड्राइवरों पर यह रिसर्च की है। जो 5 से 43 सालों से खेत जोत रहे हैं। सामने आया कि यह केवल कानों तक सीमित नहीं, बल्कि ड्राइवरों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी सीधा असर कर रहा है। ड्राइवरों में डिप्रेशन (अवसाद), एंग्जायटी (चिंता) और भारी तनाव जैसी मानसिक बीमारियां घर कर रही हैं। इस अध्ययन में सीआईएई के डॉ. अभिजीत खड़त्कर, सीआर मेहता, विजय कुमार और रतलाम मेडिकल कॉलेज कम्युनिटी मेडिसिन के लोकेंद्रसिंह कोट शामिल रहे। रिसर्च डेटा: कम हाइट वालों को दोगुना नुकसान 55 में से 45 ड्राइवरों के बाएं कान की क्षमता दाएं कान के मुकाबले कम थी। 15-20 ड्राइवर जिन्हें 20 साल से ज्यादा अनुभव है, उनकी स्थिति गंभीर, हर तीसरे ड्राइवर में चिड़चिड़ापन और मानसिक तनाव की शिकायत भी सामने आई है। ट्रैक्टर की डिजाइन : दाएं से ज्यादा बाएं कान को नुकसान दायां कान: दायां कान कम प्रभावित मिला, बढ़ती उम्र, शोर का असर रहा। बायां कान: कम लंबाई वाले ड्राइवर धुआं निकलने वाले पाइप के ज्यादा करीब होते हैं, जिससे बाएं कान पर ज्यादा असर होता है। यह जानना जरूरी है… कानों की सुरक्षा: इयरप्लग या इयरमफ शोर को 20 से 30 डेसिबल तक कम करते हैं। मशीन का रखरखाव: पुराने ट्रैक्टरों के साइलेंसर और मफलर समय पर बदलें। काम का बंटवारा: लगातार घंटों तक अकेले ट्रैक्टर न चलाएं, बीच-बीच में आराम लें। औजारों का शोर: ट्रैक्टर के साथ इस्तेमाल होने वाला ‘डिस्क हैरो’ ज्यादा शोर करता है। नियमित जांच जरूर करवाएं।
दिल्लीवासियों की आंखों की सेहत पर एम्स की चौंकाने वाली स्टडी.

ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइसेज के आरपी सेंटर की एक पायलट स्टडी ने दिल्लीवासियों की चिंता बढ़ा दी है. राजधानी में रहने वाले करीब 30 फीसदी लोगों की आंखों पर मुसीबत मंडरा रही है और सबसे खास बात है कि बच्चे भी इससे अछूते नहीं हैं. स्कूल जाने वाले बच्चों की आंखों में नजर का स्तर लगातार गिर रहा है और इन सभी लोगों को चश्मे की बेहद जल्दी जरूरत है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्थेल्मिक साइंसेज की रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली में लगभग 30 फीसदी लोगों को रिफ्रैक्टिव एरर (दृष्टि दोष) के कारण चश्मे की जरूरत है. यह ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को साफ दिखाई देने में कठिनाई होती है. अध्ययन के आंकड़े साझा करते हुए कम्यूनिटी ऑप्थेल्मोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और प्रमुख डॉ. प्रवीण वशिष्ठ ने बताया कि ये आंकड़े दिखाते हैं कि दिल्ली में नजर से जुड़ी समस्याएं कितनी आम हो चुकी हैं.स्टडी के अनुसार 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में समस्या सबसे ज्यादा है, जिनमें लगभग 70% लोगों को साफ देखने के लिए चश्मे की जरूरत होती है. वे आगे कहते हैं कि यह समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं है. करीब 20 फीसदी स्कूली बच्चों को भी चश्मे की जरूरत पड़ती है, जो कम उम्र में आंखों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ा रहा है. हालांकि एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो समय से न तो चश्मे की जांच करा रहे हैं और न ही पर्याप्त रूप से पहन रहे हैं. डॉक्टर पर्याप्त लेकिन जांचने वाले कम प्रोफेसर वशिष्ठ ने बताया कि दिल्ली में नेत्र रोग विशेषज्ञ (Ophthalmologists) की संख्या अच्छी है लेकिन एक बड़ी कमी यह है कि नजर की जांच करने वाले ऑप्टोमेट्रिस्ट (Optometrists) की संख्या जरूरत से काफी कम है. ऑफ्थेल्मोलॉजिस्ट के पास व्यक्ति तभी जाता है जब उसे आंखों में कोई परेशानी होती है क्योंकि ये आंखों की बीमारियों का इलाज करते हैं. जबकि ऑप्टोमेट्रिस्ट आंखों की जांच करते हैं और चश्मे का नंबर लिखते हैं.इसलिए रिफ्रैक्टिव एरर जैसी समस्याओं के समाधान के लिए ऑप्टोमेट्रिस्ट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. डॉ. वशिष्ठ बताते हैं कि दिल्ली में लगभग 249 संस्थान आंखों की देखभाल की सेवाएं देते हैं, जिनमें से अधिकतर प्राइवेट सेक्टर में हैं. शहर में करीब 1,085 नेत्र रोग विशेषज्ञ और लगभग 489 ऑप्टोमेट्रिस्ट मौजूद हैं. डब्ल्यूएचओ के मानकों से कम हैं विशेषज्ञ उन्होंने बताया कि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइंस के अनुसार प्रति 50,000 लोगों पर कम से कम एक ऑप्टोमेट्रिस्ट होना चाहिए, लेकिन दिल्ली अभी इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई है. यहां प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं में भी आंखों की सेवाएं सीमित हैं. दिल्ली में लगभग 270 आयुष्मान आरोग्य मंदिर केंद्र हैं, लेकिन इनमें से केवल लगभग 50 केंद्रों पर ही आंखों की देखभाल की सेवाएं उपलब्ध हैं. ऐसे में जरूरी है कि आंखों की नियमित जांच की सुविधा बढ़ाई जाए और प्रशिक्षित ऑप्टोमेट्रिस्ट की संख्या बढ़ाई जाए. ताकि बच्चों और बुजुर्गों में दृष्टि समस्याओं का जल्दी पता लगाया जा सके और अधिक लोगों को समय पर चश्मा मिल सके.
पन्ना में मटेरियल से भरा डंपर पलटा:ड्राइवर-हेल्पर मौके से भागे, बिलपुरा के पास रैपुरा-मोहन्द्रा मार्ग पर लगा लंबा जाम

पन्ना जिले के रैपुरा-मोहन्द्रा मार्ग पर बिलपुरा के पास मंगलवार शाम, 10 मार्च को सामान से भरा एक डंपर पलट गया। ड्राइवर ने कूद कर जान बचाई। इस हादसे की वजह से सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और रास्ता पूरी तरह जाम हो गया। प्रत्यक्षदर्शी शैलेन्द्र यादव ने बताया चालक और हेल्पर का पता नहीं पाया है। शायद दोनों भाग गए हैं। जानकारी के मुताबिक, निर्माण सामग्री (मटेरियल) से भरा यह डंपर टिकरिया मोड़ और बिलपुरा के बीच अचानक बेकाबू होकर पलट गया। डंपर ठीक सड़क के बीचों-बीच गिरा, जिससे आने-जाने का रास्ता बंद हो गया। अच्छी बात यह रही कि डंपर की चपेट में कोई दूसरी गाड़ी या इंसान नहीं आया। लगा लंबा जाम, यात्री परेशान हादसे के बाद सड़क के दोनों ओर वाहनों की लाइन लग गई और आवाजाही ठप हो गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी खबर पुलिस और प्रशासन को दी। जाम में फंसे मुसाफिरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। क्रेन की मदद से रास्ता साफ करने की कोशिश मौके पर पहुंची पुलिस ने गांव वालों की मदद से डंपर को हटाने का काम शुरू किया। भारी-भरकम क्रेन मंगवाई गई है ताकि डंपर को किनारे कर जल्द से जल्द रास्ता खुलवाया जा सके और ट्रैफिक फिर से शुरू हो सके।
नरसिंहपुर में हाईवे पर तेंदुए का शव मिला:वाहन की टक्कर से मौत की आशंका, 3 साल का था

नरसिंहपुर-सागर नेशनल हाईवे 44 पर झिराघाटी के पास मंगलवार रात एक तेंदुए का शव मिला है। तेंदुआ सड़क की उस लेन पर पड़ा था जो सागर से नरसिंहपुर की ओर जाती है। घटना की खबर डायल 112 के जरिए पुलिस को मिली, जिसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। सुआतला थाना प्रभारी प्रियंका केवट ने बताया कि डायल 112 पर सूचना मिली थी कि झिराघाटी के पास किसी एक्सीडेंट में एक ‘चीता’ घायल हो गया है। जब पुलिस की टीम वहां पहुंची, तो पता चला कि वह एक तेंदुआ था और उसकी मौत हो चुकी थी। इसके तुरंत बाद वन विभाग को जानकारी दी गई। 3 साल का था नर तेंदुआ बरमान वन परिक्षेत्र अधिकारी एचएल बिसेन के मुताबिक, मारा गया तेंदुआ नर है और उसकी उम्र करीब 3 साल के आसपास है। शुरुआती जांच में यही लग रहा है कि किसी तेज रफ्तार वाहन ने उसे टक्कर मार दी, जिससे उसकी जान चली गई। जंगल से निकलकर पार कर रहा था रोड अंदेशा जताया जा रहा है कि तेंदुआ सागर और नरसिंहपुर जिले की सीमा पर लगे जंगल से निकलकर सड़क पार कर रहा होगा, तभी वह किसी गाड़ी की चपेट में आ गया। वन विभाग की टीम ने मौके की बारीकी से जांच की है और मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।
पंजाब: मोमोज खाने से दो बच्चों की मौत, जंक फूड्स पर सवाल eating momos can cause death

हाल ही में पंजाब के तरनतारन में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसमें मोमोज खाने से दो सगे भाई-बहनों की मौत हो गई. माता-पिता की ओर से बताया गया कि शनिवार शाम को मोमोज और सोया चाप खाने के बाद बच्चों के पेट में भीषण दर्द उठा और उल्टियां होने लगीं. दोनों बच्चों की हालत बिगड़ती देख उन्हें घर पर रखी उल्टी रोकने की दवा दे दी और वे सो गए लेकिन रविवार सुबह उनकी मौत हो गई. जंक फूड के लगभग ऐसे ही दो मामले कुछ दिन पहले यूपी से भी आए थे जब पेरेंट्स ने बताया था कि उनकी बेटी ज्यादा चाऊमीन-बर्गर खाने की लत के चलते बीमार हुई और फिर उसकी मौत हो गई. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जंक फूड्स अब जानलेवा होते जा रहे हैं? मोमोज हो या चाऊमीन-बर्गर क्या ये चीजें खाने के तुरंत बाद किसी की जान ले सकती हैं? आईए सर गंगाराम अस्पताल नई दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी एंड पैनक्रिएटिको बिलियरी साइंसेज के वाइस चेयरपर्सन डॉ. पीयूष रंजन और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में डायटीशियन मनीषा वर्मा से जानते हैं उनकी राय.. विशेषज्ञों से जानें मोमोज, बर्गर आदि जंक फूड कितने नुकसानदेह हैं? डॉ. पीयूष रंजन कहते हैं कि मोमोज वाले मामले में क्लिनिकल डिटेल्स ज्यादा नहीं मालूम है इसलिए पूरी तरह ये बताना तो मुश्किल है कि बच्चों की मौत की असली वजह क्या है, हालांकि मौत के पीछे खाना नहीं बल्कि इससे या किसी और चीज से होने वाला इन्फेक्शन वजह हो सकता है. बाहर के खाने पीने की चीजों में अगर गंदगी है और हाईजीन का अभाव होता है तो बच्चों को टाइफॉइड हो सकता है, ज्यादा गंभीर स्थिति में ब्लीडिंग हो सकती है, आंतें फट सकती हैं. इन्फेक्टेड खाने से एक्यूट डायरिया हो सकता है, जिसमें पेट में दर्द और उल्टी होती हैं. संक्रमण के बाद एक और जो खराब चीज हो सकती है वह है रैपिडली किडनी का शट डाउन होना. किडनी शट डाउन 24 घंटे या उससे थोड़े ज्यादा समय में भी हो सकता है. वहीं डायटिशियन मनीषा कहती हैं कि जंक फूड नुकसानदेह तो होता ही है लेकिन सिर्फ मोमोज खाने भर से किसी की मृत्यु हो जाए ये संभव नहीं लगता. हालांकि बच्चों की मौत के पीछे मोमोज में मौजूद कोई टॉक्सिक चीज वजह हो सकती है. मोमोज बनाने से लेकर रखरखाव तक क्या उसमें किसी तरह की अनहाइजेनिक कंडीशन, टॉक्सिक चीजें या मिलावट की गई है तो वह संक्रमण पैदा कर सकती है, शरीर में जहरीले तत्व पहुंच सकते हैं और तब उससे जान जा सकती है. डॉ. रंजन आगे कहते हैं कि फूड पॉइजनिंग का मामला अगर हो भी तो उससे मौत की संभावना कम दिखती है. डिहाइड्रेशन से भी इतनी जल्दी जान नहीं जा सकती है. मामोज खाने और बच्चों की मौत होने का पीरियड इतना छोटा है कि इसमें किसी प्रकार के संक्रमण और किडनी शट डाउन की संभावना हो सकती हैं, हालांकि ये सभी संभावनाएं हैं और ऐसे केसेज में ऐसी चीजें हो सकती हैं लेकिन एक्जेक्टली हुआ क्या है यह तो जांच का विषय है. वहीं मनीषा कहती हैं कि इस चीज का खुलासा तो बच्चों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या फॉरेंसिक जांच के बाद ही हो सकता है कि उन मोमोज में ऐसा क्या था. क्या उसमें खराब मीट या चिकन का इस्तेमाल हुआ, या अगर वेज मोमोज थे तो उनमें किसी प्रकार की खराब या अनहाइजेनिक चीजें मिली थीं या उनके रखरखाव के समय उसमें कुछ गड़बड़ हुई. क्या जंक फूड हैं नुकसानदेह डायटीशियन मनीषा कहती हैं, हालांकि जंक फूड सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह होते हैं और ये लंबे समय तक खाने से शरीर को काफी नुकसान पहुंचाते हैं. सबसे बड़ी बात है कि आपको नहीं पता कि ये कैसे बनाए गए हैं, इन्हें कैसे रखा गया है, कितनी साफ-सफाई का ध्यान रखा गया है या नहीं रखा गया है, कैसा पानी इस्तेमाल हुआ है, क्या संक्रमित चीजें इनके प्रभाव में आई हैं. इसलिए बाहर के खाने को अवॉइड करें या सिर्फ वहीं से खरीदें जहां आपको साफ-सफाई का भरोसा हो. सड़क किनारे कहीं भी मिलने वाले फूड्स को न खाएं.
निवाड़ी में 5 कॉलोनाइजरों को नोटिस:बिना अनुमति प्लॉटिंग पर कार्रवाई, प्रशासन ने 17 मार्च को दस्तावेजों के साथ बुलाया

निवाड़ी जिले में अवैध कॉलोनियों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। बिना अनुमति के धड़ल्ले से प्लॉट काटकर जमीन बेचने वाले पांच कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई की गई। कलेक्टर कोर्ट ने इन सभी को नोटिस भेजकर 17 मार्च को पेश होने का फरमान सुनाया है। जांच में पता चला कि इन लोगों ने न तो कॉलोनाइजर का लाइसेंस लिया था और न ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TCP) से कोई मंजूरी ली थी। नियमों को ताक पर रखकर, बिना किसी सरकारी परमिशन के जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े कर बेच दिए गए, जो कि सीधा-सीधा कानून का उल्लंघन है। इन लोगों को थमाया गया नोटिस प्रशासन ने जिन पांच मामलों में कार्रवाई की है, वे ये हैं- चंद्रपाल यादव (झांसी): ओरछा के फुटेरा गांव में बिना लाइसेंस प्लॉटिंग करने का आरोप। रेणु सिंह राठौर (जेर): पृथ्वीपुर में करीब 11 अलग-अलग खसरा नंबरों की जमीन पर अवैध तरीके से प्लॉट बेचने का मामला। बिजयकांत और उदयकांत सोनी (पृथ्वीपुर): करगुवा गांव की भारी-भरकम जमीन पर अवैध कॉलोनी काटने का आरोप। शैलेंद्र सिंह यादव (झांसी): ओरछा में करीब डेढ़ हेक्टेयर जमीन पर बिना मंजूरी के प्लॉटिंग। लक्ष्मीनारायण नामदेव (झांसी): ओरछा की जमीन पर बिना किसी परमिशन के टुकड़े कर बेचने का आरोप। 17 मार्च को पेशी, वरना होगी सख्त कार्रवाई एसडीएम की जांच में इन सभी को नियमों का दोषी पाया गया है। कलेक्टर कोर्ट ने साफ कह दिया है कि अगर ये लोग 17 मार्च 2026 को अपने कागजों के साथ हाजिर नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ एकतरफा सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन इन जमीनों को फिर से पुराने हाल में लाने (अवैध निर्माण ढहाने) की तैयारी भी कर सकता है।
रश्मिका मंदाना मेहंदी डिजाइन: शिव-ओम-स्वास्तिक वाले पारंपरिक मेहंदी डिजाइन… आप भी मेहंदीका मंदाना की तरह हाथों पर यूं लगाएं मेहंदी डिजाइन

रश्मिका मंदना डिजाइन डिजाइन | छवि: इंस्टाग्राम विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना मेहंदी समारोह की तस्वीरें: साउथ फिल्म इंडस्ट्री की खूबसूरत एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना और एक्टर विजय देवरकोंडा 26 फरवरी को शादी के बंधन में बंध गए थे। उनकी शाही शादी की नीलामी में टोकवा और कोडावा रीति-रिवाजों के साथ बेहद शानदार से हुई। कपल की शादी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। परदे पर रश्मिका का ट्रेडिशनल लुक और उनका डिजाइन डिजाइन लोगों को खूब पसंद आ रहा है। उनकी मूर्तियों में शिव, ॐ और स्वास्तिक जैसे पवित्र चिन्ह बने हुए थे, जो भारतीय परंपरा और संस्कृति को सुंदरता से नवाजते हैं। वीडियो और प्रधानम सेरेमनी की खास झलक हाल ही में रशमिका और विजय ने अपने प्रशंसकों के साथ लाॅग और प्राइमा सेरेमनी की कुछ खूबसूरत तस्वीरें शेयर कीं। यह सुविधा 25 फरवरी को हुई थी। दोनों में बेहद खूबसूरत नजर आ रहे हैं और उनके चेहरे का मुस्कान इस खास दिन की खुशी साफ नजर आ रही है। रश्मिका ने तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि ये शाम बहुत ही अच्छी थी, लेकिन पल भर में गुजर गई। उन्होंने डिजाइन ब्रांड तोरानी का भी शुक्रिया अदा किया, इस खास चीज को और यादगार बनाया। रश्मिका की डिजाइनिंग क्यों है खास? रश्मिका की मूर्ति विशेष रूप से सुंदर नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक और पारंपरिक भी है। इसमें कई पवित्र चिह्न शामिल थे, जैसे शिव जी का प्रतीक – जो शक्ति और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है ॐ का चिन्ह -हिन्दू धर्म को अत्यंत पवित्र माना जाता है स्वास्तिक – शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक इन चिन्हों के साथ डिजाइनर बेल और फूलों की डिजाइन में आकर्षक पौधे को और भी आकर्षक बनाया गया है। आप भी देख सकते हैं ऐसे फोटो अगर आप शादी, तीज, करवा चौथ या किसी खास मौके पर अलग और ट्रेडिशनल वेडिंग डिजाइन चाहते हैं तो आप इन डिजाइन को ट्राई कर सकते हैं। तो आइए देखते हैं अन्य खूबसूरत संग्रहालयों की तरह, रश्मिका की तस्वीरें ॐ डिज़ाइन लेआउट आप प्लास्टिक पर गोल डिजाईन इलेक्ट्रानिक मशीन बना सकते हैं। इसके साथ आप स्टेक पर भी लाइन डिजाइन या अन्य कोई न्यूनतम सा आकार डिजाइन को पूरा कर सकते हैं। लोटस लेआउट डिजाइन फूल वाली सब्जी हमको जड़ी-बूटियों पर लगाना पसंद है। ऐसे में आप कमल के फूल मिनिमल सी बेल के डिजाइन को हाथों के पिछले हिस्से पर डिजाइन कर सकते हैं। देखिए यह बेहद खूबसूरत सुंदरता। त्रिशूल लेआउट डिजाइन शिव का प्रतीक त्रिशूल आप की हथेली पर मंडप के माध्यम से बनाया जा सकता है। इस तरह का डिज़ाइन बैकहैंड के लिए बेहतर पद पर हो सकता है। इस तरह की लेआउट डिजाइन देखने में सिंपल लेकिन बेहद एलिगेंट रहेगी। स्वास्तिक डिजाइन डिजाइन हर शुभ काम की शुरुआत करने से पहले हम स्वास्तिक तोड़ रहे हैं। इसी तरह का लेबल भी अक्सर शुभ घड़ी में ही मिलता है। मिनिमल डिजाइन में आप हाथों पर खूबसूरत सा बेल का डिजाइन स्वास्तिक बना सकते हैं। चंद्रमा सूर्य और डिजाइन लेआउट चंद्रमा या सूर्य के डिजाइन वाली बिल्डिंग भी आजकल ट्रेंड में नजर आ रही है। इस तरह के डिजाइन से आप खुद भी पत्थरों पर सजा पा सकते हैं। न सिर्फ हाथ बल्कि इस तरह की खूबसूरत खूबसूरत नजर आएंगी। रश्मिका और विजय की शादी सिर्फ एक शानदार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव जैसी लग रही थी। दोनों ने अपने लुक से यह दिखाया कि ट्रेंड्स से लेकर खूबसूरत भव्य हमारी परंपरा और संस्कृति है। सोशल मीडिया पर इस कपल की लोकप्रियता पर आकर्षक प्यार लुटा रहे हैं और रश्मिका की गैलरी डिजाइन भी लोगों के बीच नए ट्रेंड ट्रेंड में नजर आ रही हैं। यह अवश्य पढ़ें: विजय रश्मिका वेडिंग लुक: शाही शादी में सिर से लेकर टूटे तक सोने से लड़े थे रश्मिका-विजय, जानें इस ‘रॉयल लुक’ की झलक (टैग्सटूट्रांसलेट)रश्मिका मंदाना(टी)मेहंदी डिजाइन(टी)विजय देवरकोंडा रश्मिका मंदाना शादी(टी)विजय देवरकोंडा(टी)रश्मिका मंदाना(टी)भगवान शिव मेहंदी(टी)मेहंदी डिजाइन(टी)मेहंदी डिजाइन(टी)सुंदर मेहंदी
मादक पदार्थ बिक्री के आरोप पर पासी समाज का विरोध:धार एसपी को ज्ञापन देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

धार शहर में अवैध मादक पदार्थों की बिक्री और मारपीट के एक मामले को लेकर पासी समाज के लोगों ने मंगलवार को पुलिस प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। समाजजनों ने एसपी कार्यालय पहुंचकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारुल बेलापुरकर को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन विधायक नीना वर्मा और केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर के नाम भी दिया गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि बौरासी मोहल्ला फड़फे मार्ग क्षेत्र में स्थित प्राचीन भगवान शिव मंदिर के आसपास दीपक बौरासी और अन्य लोग खुलेआम गांजा, कोकेन और पाउडर जैसे मादक पदार्थों की बिक्री कर रहे हैं। समाजजनों का दावा है कि इस अवैध कारोबार को भाजपा नेता विपिन राठौर का संरक्षण प्राप्त है, जिससे क्षेत्र का माहौल बिगड़ रहा है। समाज के अनुसार, रंग पंचमी की पूर्व संध्या, 7 मार्च को दिनेश बौरासी के तीन पहिया वाहन में दीपक बौरासी और उसके साथियों ने तोड़फोड़ की थी। अगले दिन, 8 मार्च को जब दिनेश इस संबंध में बात करने पहुंचे, तो दीपक बौरासी, उसके पुत्र शुभम, मुकेश और अन्य लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की। लाठी-डंडों से मारपीट का भी आरोप बीच-बचाव करने आए राजू बौरासी, उनके पुत्र तुषार और उनकी पत्नी के साथ भी लाठी-डंडों से मारपीट की गई। इस घटना में उन्हें गंभीर चोटें आई हैं और उनका उपचार जारी है। स्थानीय निवासी सुमित बौरासी ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध गतिविधियां चल रही हैं, जिससे आसपास के लोग परेशान हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। पासी समाज ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में एक पक्ष की एफआईआर दर्ज कर ली गई, जबकि दूसरे पक्ष की रिपोर्ट केवल एनसीआर के रूप में दर्ज की गई। समाजजनों ने प्रशासन से अवैध मादक पदार्थों के कारोबार में शामिल लोगों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है।
बैतूल के विजयग्राम में पेयजल संकट पर ग्रामीणों का आक्रोश:17 मार्च तक पानी नहीं मिला तो स्टेट हाईवे पर चक्काजाम की चेतावनी

बैतूल के भेसदेही विकासखंड की विजयग्राम पंचायत में पेयजल संकट को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सामने आया है। मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण ट्रैक्टरों में भरकर झल्लार थाने पहुंचे और थाना प्रभारी को अपनी समस्या बताते हुए एक आवेदन सौंपा। उन्होंने प्रशासन को 17 मार्च तक पेयजल व्यवस्था न होने पर चक्काजाम की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में पिछले चार माह से नल-जल योजना से पानी नहीं आ रहा है। इसके कारण करीब 800 की आबादी वाले नीमढाना में पेयजल का गंभीर संकट गहरा गया है। अब तक लोग हैंडपंप और निजी बोर से पानी का इंतजाम कर रहे थे, लेकिन अब वे स्रोत भी सूख गए हैं। महिलाओं को आधा किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार सरपंच और सचिव को अवगत कराया गया। कलेक्टर और विधायक तक भी शिकायतें पहुंचाई गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। मंगलवार को पंचायत में एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें सरपंच और सचिव को भी बुलाया गया था, लेकिन वे बैठक में नहीं पहुंचे, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव की पुरानी सड़क बंद पड़ी है और पुलिया का निर्माण कार्य भी अधूरा है, जिससे लोगों को आवागमन में भी परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 17 मार्च तक गांव में पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो वे विजयग्राम बस स्टैंड पर चक्काजाम करेंगे। उन्होंने कहा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
भड़काऊ सोशल पोस्ट करने पर युवक गिरफ्तार:पटेल समाज को पीटने की बातें कहीं थीं, मऊगंज में कोर्ट ने भेजा जेल

हनुमना थाना क्षेत्र के अटरिया गांव में सोशल मीडिया पर एक भड़काऊ पोस्ट की वजह से तनाव फैल गया। पुलिस ने पटेल समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले 26 साल के युवक दीपक साकेत को गिरफ्तार कर लिया है। कोर्ट में पेशी के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है। अटरिया के रहने वाले दीपक साकेत ने अपनी फेसबुक आईडी से पटेल समाज को लेकर गलत और उकसाने वाली बातें लिखी थीं। यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई, जिससे समाज के लोगों में भारी नाराजगी फैल गई और इलाके का माहौल बिगड़ने लगा। पुरानी घटना के चलते बढ़ गया था खतरा इलाके में तनाव की एक बड़ी वजह यह भी थी कि चार दिन पहले ही ढाबा गौतमान गांव में पटेल और साकेत परिवारों के बीच झगड़ा हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई थी। ऐसे नाजुक समय में दीपक ने खुद को ‘जय भीम वाला’ बताते हुए धमकी भरी पोस्ट डाल दी, जिससे दो समाजों के बीच विवाद और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई। पुलिस की कार्रवाई हनुमना पुलिस ने मंगलवार को तुरंत एक्शन लिया और दीपक को धर दबोचा। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर भाईचारा बिगाड़ने वाली या भड़काऊ बातें लिखने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है ताकि इलाके में शांति बनी रहे।






