बालाघाट पंचायतकर्मियों ने सीईओ के खिलाफ किया प्रदर्शन:कहा- तबादलों पर रोक के बावजूद सचिवों को इधर-उधर भेजा जा रहा

बालाघाट में जिला पंचायत सीईओ और पंचायत कर्मचारियों के बीच का विवाद अब आंदोलन में बदल गया है। वित्तीय वर्ष (Financial Year) खत्म होने से पहले काम का टारगेट पूरा करने के दबाव को लेकर कर्मचारियों ने सीईओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को पंचायत सचिवों, जनपद और जिला पंचायत कर्मचारियों के साथ ही इंजीनियरों ने एक ‘संयुक्त मोर्चा’ बना लिया है। उन्होंने एलान किया है कि कल से दो दिनों तक सभी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। कर्मचारियों के गंभीर आरोप पंचायत सचिव संगठन के अध्यक्ष जितेंद्र चित्रिव ने सीईओ अभिषेक सराफ पर मनमानी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के खिलाफ जाकर कर्मचारियों के वेतन काटे जा रहे हैं। तबादलों पर रोक के बावजूद सचिवों को इधर-उधर भेजा जा रहा है। बेवक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) ली जाती है, जिससे महिला कर्मचारियों को बहुत दिक्कत होती है। सरकारी नियमों को दरकिनार कर बेजा दबाव बनाया जा रहा है। सीईओ ने दी सफाई इन आरोपों पर जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ का कहना है कि साल खत्म होने वाला है और उन पर भी काम पूरा करने का सरकारी दबाव है। उन्होंने सफाई दी कि वे दफ्तर के समय में ही बैठकें लेते हैं ताकि शासन के काम समय पर पूरे हो सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सब काम की जिम्मेदारी की वजह से है, न कि किसी को परेशान करने के लिए।
केरल हाईकोर्ट से ‘द केरल स्टोरी 2’ को राहत:सिंगल जज के अंतरिम आदेश पर दो हफ्तों की रोक, रिलीज पर फैसला सुरक्षित

केरल हाईकोर्ट ने फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज पर लगी रोक को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सिंगल जज के उस अंतरिम आदेश पर दो हफ्तों के लिए रोक लगा दी है, जिसमें फिल्म की रिलीज 15 दिनों के लिए स्थगित की गई थी। कोच्चि में शुक्रवार को जस्टिस सुष्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस पी. वी. बालकृष्णन की खंडपीठ ने यह आदेश फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की अपील पर सुनाया। अपील देर गुरुवार रात दायर की गई थी, ठीक कुछ घंटों बाद जब फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई गई थी। खंडपीठ ने गुरुवार रात ही सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है। निर्माता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि फिल्म का उद्देश्य केरल राज्य या किसी धार्मिक समुदाय को बदनाम करना नहीं है। उनके वकीलों ने कहा कि फिल्म केवल एक सामाजिक बुराई को दर्शाती है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि यदि रिलीज पर रोक जारी रहती है तो निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान होगा। फिल्म 27 फरवरी को भारत में 1,500 और विदेशों में 300 से अधिक सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तय थी। इससे पहले सिंगल जज ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया सेंसर बोर्ड ने कानूनी आवश्यकताओं पर उचित विचार नहीं किया। जज ने यह भी आशंका जताई थी कि फिल्म की सामग्री से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है या किसी समुदाय की छवि धूमिल हो सकती है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि फिल्म के टीजर की सामग्री में प्रथम दृष्टया सार्वजनिक धारणा को विकृत करने और सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित करने की क्षमता दिखाई देती है। अब खंडपीठ के ताजा आदेश के बाद फिल्म की रिलीज को लेकर स्थिति अस्थायी रूप से बदल गई है। विस्तृत आदेश आने के बाद ही आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
TVK प्रमुख और अभिनेता विजय पर बेवफाई का आरोप:पत्नी संगीता ने 25 साल बाद दायर की तलाक याचिका

साउथ के मशहूर अभिनेता और तमिलागा वेट्री काझागम (TVK) प्रमुख थलापति विजय की पत्नी संगीता सोर्नालिंगम ने अपने 25 साल के वैवाहिक जीवन के बाद तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर दी है। उनकी तरफ से दायर पिटिशन में आरोप लगाया गया है कि विजय ने अधिकारियों और व्यक्तियों के साथ संबंध रखे, जिससे उनका वैवाहिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सिलीब्रिटी सर्कल में यह मामला तुरंत सुर्खियों में आ गया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, संगीता ने चेन्नगपट्टू फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा है कि विजय पर बेवफाई (इन्फिडेलिटी) का गंभीर आरोप है, और इसी कारण अब वह साथ नहीं रहना चाहती। इससे पहले यह दंपती मीडिया के सामने अक्सर एक साथ दिखते थे, लेकिन अब संगीता द्वारा तलाक की मांग किए जाने से तमिल सिनेमा व राजनीति के दोनों मोर्चों पर चर्चा शुरू हो गई है। विजय के खिलाफ दायर इस पिटिशन को अदालत ने विकासशील मामला बताया है और आगे की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के तर्क सुने जाएंगे। विजय और संगीता की पहली मुलाकात 1990 के दशक के आखिर में हुई थी। संगीता उस समय यूके में रहती थीं और विजय की बड़ी फैन थीं। बताया जाता है कि वह उनकी एक फिल्म की शूटिंग के दौरान चेन्नई पहुंचीं और सेट पर उनसे मिलने की इच्छा जताई। मुलाकात के दौरान संगीता ने विजय को बताया कि वह उनकी फिल्मों की नियमित दर्शक हैं। यह बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती में बदली। बाद में दोनों परिवारों की सहमति से रिश्ता आगे बढ़ा और 25 अगस्त 1999 को शादी कर ली। शादी के बाद संगीता ज्यादातर लाइमलाइट से दूर रहीं, लेकिन पारिवारिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों में विजय के साथ नजर आती रही हैं। इस कपल के दो बच्चे हैं। बेटा जेसन संजय जो फिल्ममेकिंग की पढ़ाई कर चुके हैं, और बेटी दिव्या साशा है। विजय ने अपने लंबे 33 साल के फिल्मी करियर के बाद 30 जनवरी 2026 को घोषणा की कि वह अभिनय से संन्यास ले रहे हैं और अब पूरी तरह राजनीति पर ध्यान देंगे। उनकी आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ 9 जनवरी 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन अभी तक यह फिल्म नहीं रिलीज हो पाई है। इस फिल्म को अभी सेंसर सर्टिफिकेट नहीं मिला है। इससे पहले मेकर्स ने फिल्म को सेंसर बोर्ड में सबमिट किया, लेकिन बोर्ड ने सर्टिफिकेट जारी नहीं किया और मामला मद्रास हाईकोर्ट तक पहुंच गया। सेंसर बोर्ड की रिवाइजिंग कमिटी ने फिल्म की समीक्षा करना बाकी रखा है, इसलिए फाइनल सर्टिफिकेट नहीं मिला है, जिससे रिलीज डेट तय नहीं हो पा रही है।
TVK चीफ-एक्टर विजय की पत्नी ने तलाक याचिका दायर की:पति पर एक्ट्रेस से अफेयर का आरोप; शादी के 27 साल हुए, दो बच्चे भी

तमिल सुपरस्टार और मिलगा वेट्री कजगम(TVK) प्रमुख विजय की पत्नी संगीता ने 24 फरवरी 2026 को चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए याचिका दाखिल की है। याचिका में विजय पर एक एक्ट्रेस के साथ अवैध संबंध का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर केस फैमिली वेलफेयर कमिटी को भेज दिया। दंपति पिछले दो साल से अलग रह रहे थे। दोनों की शादी 1999 में हुई थी। शादी को 27 साल हो चुके हैं। कोर्ट में इस मामले पर अगली सुनवाई 20 अप्रैल को करेगा। विजय की टीम और संगीता ने मामले पर अबतक कोई बयान नहीं दिया है। शादी को 27 साल हो चुके हैं विजय और संगीता की शादी को करीब 27 साल हो चुके हैं। 25 अगस्त 1999 को कपल शादी के बंधन में बंधे थे। जल्द ही दोनों को एक-दूसरे से प्यार हो गया और दोनों ने शादी का फैसला कर लिया। दोनों ने उस दौर में हिंदू और ईसाई दोनों धर्मों से शादी की थी। 2000 में कपल ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया जिसका नाम जेसन संजय है, वहीं 2005 में उनके घर बेटी का जन्म हुआ। रैली में भगदड़ से विवादों में आए विजय 27 सितंबर तमिलनाडु के करूर में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम यानी TVK की रैली में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। बताया गया है कि 9 साल की एक बच्ची गुम हो गई थी। विजय ने मंच से उसे तलाशने की अपील पुलिस और अपने लोगों से की, जिसके बाद वहां भगदड़ जैसे हालात बन गए। इसमें 41 लोगों की मौत हो गई थी। भीड़ में फंसने से कई लोगों को सांस लेने में परेशानी हुई और कई लोग और कार्यकर्ता बेहोश होने लगे। हालात बिगड़ते देख विजय ने भाषण रोक दिया और लोगों से शांति की अपील की। इसके बाद वे भाषण छोड़कर निकल गए। विजय की रैली के लिए 10 हजार लोगों की परमिशन थी। प्रशासन को 50 हजार लोगों के जुटने का अनुमान था, लेकिन वहां करीब 1 लाख 20 हजार लोग एकत्र हो गए थे। मामले में CBI ने 6 घंटे पूछताछ की थी इसी साल 12 जनवरी को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन(CBI) ने रैली में भगदड़ मामले में एक्टर से 6 घंटे पूछताछ की थी। विजय सुबह 11.29 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच काली रेंज रोवर से नई दिल्ली के CBI हेडकॉर्टर पहुंचे थे, शाम को लगभग 6.15 बजे बाहर निकले थे।
बंधुआ मजदूरी का खुलासा, बैतूल के 18 मजदूर मुक्त:16–18 घंटे काम कराया, मारपीट की; मजदूर बोले-ठेकेदार और एजेंट पर FIR हो

बैतूल जिले के 18 मजदूरों को महाराष्ट्र के सोलापुर से तीन महीने बाद मुक्त कराया गया है। एजेंट और ठेकेदारों द्वारा इन मजदूरों को मजदूरी का झांसा देकर सोलापुर ले जाया गया था, जहां उनसे जबरन गन्ना कटाई का काम कराया जा रहा था। ये मजदूर बैतूल के भीमपुर विकासखंड के ग्राम धुंधरी और हरदा जिले के दिदमंदा गांव के निवासी हैं। मजदूरों ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पानमंगुर गांव में बंधक बनाकर रखा गया था। मजदूरों के अनुसार, उनसे प्रतिदिन 16 से 18 घंटे काम कराया जाता था। विरोध करने या आराम करने पर उन्हें गालियां दी जाती थीं और मारपीट की जाती थी। शौच के लिए जाने पर भी निगरानी रखी जाती थी और देरी होने पर पिटाई की जाती थी। उन्हें मोबाइल फोन पर बात करने की भी अनुमति नहीं थी। एजेंट और ठेकेदार ने पैसे हड़प लिए मजदूरों का आरोप है कि उन्हें कोई मजदूरी नहीं दी गई। एजेंट और ठेकेदार ने उनके पैसे हड़प लिए। एक एजेंट ने 4 लाख रुपये लेकर भुगतान का वादा किया था, लेकिन एक भी रुपया नहीं दिया गया। किसी तरह मजदूरों ने जानसाहस संस्था के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर मदद मांगी। सूचना मिलने पर संस्था की टीम बैतूल से सोलापुर पहुंची और स्थानीय प्रशासन की सहायता से सभी मजदूरों को मुक्त कराया। बैतूल कलेक्टर ने सोलापुर कलेक्टर से समन्वय स्थापित कर मजदूरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की। बैतूल लौटने के बाद मजदूरों ने कलेक्टर को एक आवेदन सौंपा है। उन्होंने एजेंट और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। मजदूरों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें उनका बकाया मेहनताना दिलाया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि ऐसा करने से भविष्य में कोई भी ठेकेदार मजदूरों के साथ ऐसी धोखाधड़ी या शोषण नहीं कर पाएगा।
कटनी नगर निगम के 3.81 करोड़ सरकारी विभागों पर बकाया:नगर निगम आयुक्त बोलीं-वित्तीय संकट गहराया, विकास कार्य हो रहा है प्रभावित

कटनी नगर निगम इन दिनों वित्तीय संकट से जूझ रहा है। दरअसल, सरकारी विभागों पर सालों से लंबित सेवा कर की वजह से है। निगम के अनुसार विभिन्न शासकीय संपत्तियों पर कुल 3 करोड़ 81 लाख 48 हजार 560 रुपए का कर बकाया है। यह राशि वित्तीय 2010-11 से लेकर 2025-26 तक की अवधि से जुड़ी है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण निगम की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। विकास कार्यों पर पड़ रहा असर निगम अधिकारियों का कहना है कि बकाया राशि के चलते शहर के जरूरी विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सड़कों की मरम्मत, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था और पार्कों के रखरखाव जैसे कामों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल पा रहा है। जब संबंधित विभागों से संपर्क किया जाता है तो वे बजट की कमी का हवाला देकर भुगतान टाल देते हैं। 56 विभागों पर बकाया, पांच बड़े देनदार निगम की सूची में कुल 56 सरकारी विभाग शामिल हैं जिन पर सेवा कर बकाया है। इनमें पांच प्रमुख बकायादार इस प्रकार हैं: सचिव, कृषि उपज मंडी- 86 लाख 21 हजार 263 रुपए जिला अस्पताल- 53 लाख 32 हजार 035 रुपए शासकीय तिलक महाविद्यालय-37 लाख 62 हजार 719 रुपए शासकीय औद्योगिक संस्थान (आईटीआई) – 30 लाख 58 हजार 260 रुपए कलेक्टर कार्यालय (जिला दण्डाधिकारी)-14 लाख 79 हजार 653 रुपए अधिकारियों ने जारी किया नोटिस वित्तीय साल की समाप्ति नजदीक आते ही निगम ने वसूली अभियान तेज कर दिया है। राजस्व अधिकारी जागेश्वर प्रसाद पाठक ने बिलैया तलैया स्थित निगम की 15 दुकानों के आवंटियों को तीन दिन में किराया जमा करने का नोटिस दिया है। समय पर भुगतान नहीं होने पर लीज निरस्त कर दुकानों में ताला लगाने की चेतावनी दी गई है। आम नागरिकों के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं और बकाया न चुकाने वालों के नल कनेक्शन भी काटे जा रहे हैं। समयसीमा में वसूली का प्रयास नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार ने बताया कि कर वसूली के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। शासकीय विभागों को पत्र भेजकर समयसीमा में भुगतान करने को कहा गया है। उनका कहना है कि प्रयास है कि वसूली पूरी हो, ताकि शहर की मूलभूत सुविधाएं प्रभावित न हों।
पंजाबी सिंगर रमन लखेसर के गाने पर कंट्रोवर्सी:बादलां दा गढ़ लंबी थाना बल्लिए हटाया, शिअद बोला-एक लाइन से AAP सरकार डर गई

पंजाबी सिंगर रमन लखेसर का गाना माई वर्ल्ड -2 फिर कंट्रोवर्सी में है। इसके लिरिक्स में से जाणदा निआणा की सियाणा बल्लिए, बादलां दा गढ़ थाना लंबी बल्लिए को हटा दिया गया है। गाने को सिंगर रमन लखेसर ने गाया है। 9 महीने पहले रिलीज हुए इस गाने पर पहले भी बादलों का नाम लेने पर कंट्रोवर्सी हो चुकी है। इस पर सिंगर ने कहा था कि ये लाइन किसी ने उससे नहीं डलवाई है, बल्कि वह इसी इलाके का रहने वाला है तो ये लाइन नेचुरली उसके दिमाग में आई थी तो गाने में डाली है। सिंगर ने बादलों की तारीफ के आरोपों को भी नाकारा था। अब यूथ अकाली दल ने इसे लेकर AAP सरकार को घेरा है। आरोप है कि आप की शह पर इस गीत से बादलों का नाम हटाया गया है। यूथ अकाली दल के अध्यक्ष सरबजीत सिंह झिंझर ने एक्स पर वीडियो जारी कर कहा कि सरकार बादलों के नाम से बौखला चुकी है। अब गीतों पर सेंसिरशिप’ लगाने जैसा काम किया जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि एक गाने की लाइन को हटवाने से पंजाब के लोगों की भावनाएं नहीं बदली जा सकतीं। बता दें कि 9 महीने पहले रिलीज इस गीत को 20 मिलियन व्यू मिल चुके हैं। जानें यूथ अकाली दल ने सरकार पर क्या कहा
मायावती की बसपा ने 2027 यूपी चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की, जातिगत अंकगणित पर ध्यान केंद्रित किया | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:27 फरवरी, 2026, 12:41 IST बहुजन समाज पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की है, जिसका लक्ष्य ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित गठबंधन को फिर से हासिल करना है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती. (फोटो क्रेडिट: एक्स) 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी एक साल से अधिक समय बाकी है, ऐसे में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने प्रारंभिक तैयारी शुरू कर दी है, जो पार्टी प्रमुख मायावती के तहत सोशल इंजीनियरिंग पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने का संकेत है। मायावती के नेतृत्व वाली पार्टी ने अब तक उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों – पूर्वाचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी से चार उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें दो मुस्लिम और दो ब्राह्मण नेता हैं, जो 2027 के चुनावों के लिए पार्टी के ब्राह्मण-मुस्लिम-दलित राजनीतिक संयोजन बनाने के प्रयास का संकेत देते हैं। यह कदम 2022 के विधानसभा चुनावों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद आया है, जब बसपा सिर्फ एक सीट जीतने में सफल रही, हालांकि वह 18 निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रही। खोई जमीन वापस पाने के लिए दृढ़ संकल्पित पार्टी की योजना मार्च 2026 तक 100 से अधिक सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा करने की है। ये उम्मीदवार कौन हैं? अबुल क़ैस आज़मी (दीदारगंज) आज़मगढ़ की दीदारगंज सीट पर, बसपा ने लंबे समय से पार्टी के नेता अबुल क़ैस आज़मी को मैदान में उतारा है, जिन्होंने पहले 2012 और 2017 में फूलपुर पवई से चुनाव लड़ा था। उन्होंने उन चुनावों में क्रमशः 46,000 और 61,000 वोट हासिल किए और दोनों बार मामूली अंतर से दूसरे स्थान पर रहे। उन्होंने 2022 के चुनावों में भाग नहीं लिया लेकिन अब एक नई सीट पर अपनी संभावनाओं का परीक्षण करेंगे। इस निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिम और दलित आबादी है। यहां करीब 95,000 मुस्लिम और 80,000 दलित मतदाता हैं. ओबीसी में राजभर (38,000), चौहान (14,000) और निषाद (7,000) एक बड़ा समूह बनाते हैं। 2022 में समाजवादी पार्टी ने 37% वोट शेयर के साथ सीट जीती, जबकि बीजेपी को 30% और बीएसपी को 23% वोट मिले। बसपा को उम्मीद है कि वह इन वोटों को एकजुट कर लेगी। फिरोज आफताब (सहारनपुर ग्रामीण) पश्चिमी यूपी के सहारनपुर ग्रामीण से बसपा ने फिरोज आफताब को उम्मीदवार बनाया है, जो हाल ही में समाजवादी पार्टी छोड़कर पार्टी में शामिल हुए हैं। उनके दादा चौधरी जफर अहमद कांग्रेस से यूपी की पहली विधानसभा के लिए चुने गए थे। आफताब ने स्वयं कई चुनाव लड़े हैं, जिसमें 1996 में निर्दलीय चुनाव भी शामिल है, जब वह लगभग 40,000 वोट पाने के बावजूद भाजपा से मात्र 90 वोटों से हार गए थे। इस सीट पर प्रभावशाली ओबीसी और उच्च जाति के मतदाताओं के साथ-साथ मुस्लिम और दलित मतदाताओं का एक बड़ा आधार है। सहारनपुर ग्रामीण में लगभग 1.25 लाख मुस्लिम और 90,000 दलित मतदाता हैं, साथ ही सैनी (32,000), गुर्जर (18,000) और लगभग 24,000 ब्राह्मण-ठाकुर मतदाता हैं। 2022 में सपा के आशु मलिक 1.07 लाख वोटों से जीते, बीजेपी के जगपाल सिंह को 76,000 और बसपा उम्मीदवार को 62,000 वोट मिले. विनोद मिश्र (मुंगरा बादशाहपुर) जौनपुर के मुंगरा बादशाहपुर में ब्राह्मण नेता विनोद मिश्रा को चुना गया है. मिश्रा ने सपा में जाने से पहले भाजपा के साथ अपना करियर शुरू किया, जहां वह 2022 तक रहे। वह छह महीने पहले बसपा में शामिल हुए और अपना पहला चुनाव लड़ेंगे। इस निर्वाचन क्षेत्र में दलित और ओबीसी मतदाताओं के साथ-साथ ब्राह्मणों की भी मजबूत उपस्थिति है। ओबीसी में 30,000 मुसलमानों के साथ पटेल (60,000) और यादव (40,000) प्रभावशाली हैं। 2022 में सपा के पंकज पटेल 92,000 वोटों से जीते, बीजेपी के अजय शंकर दुबे को 86,000 वोट मिले और बसपा उम्मीदवार 32,000 से पीछे रहे. आशीष पांडे (माधौगढ़) बुंदेलखंड की माधौगढ़ सीट पर पार्टी ने क्षेत्र में दलित-ब्राह्मण समीकरण पर भरोसा करते हुए आशीष पांडे को मैदान में उतारा है। 2017 और 2022 में टिकट से वंचित होने के बाद, उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में नामांकन हासिल किया है। माधौगढ़ में लगभग 90,000 दलित मतदाता हैं – जो सबसे बड़ा समूह है – इसके बाद 44,000 ब्राह्मण, 40,000 राजपूत और 20,000 मुस्लिम हैं। कुशवाह और कुर्मी समेत ओबीसी मतदाताओं की संख्या करीब 1.5 लाख है. 2022 में बीजेपी ने 41% वोट शेयर के साथ सीट जीती, जबकि बीएसपी को 27% और एसपी को 24% वोट मिले। बड़ी रणनीति हाल की बैठकों में मायावती ने बार-बार सामाजिक अंकगणित के महत्व पर जोर दिया है। उत्तर प्रदेश की आबादी में दलित लगभग 20%, मुस्लिम लगभग 19% और ब्राह्मण 9-11% के बीच हैं। बसपा नेतृत्व का मानना है कि इन समूहों को एकजुट करने से कई निर्वाचन क्षेत्रों में उसके वोट शेयर में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। पार्टी ने वरिष्ठ नेताओं को जाति आउटरीच प्रयासों का प्रबंधन करने का काम भी सौंपा है, जिसका लक्ष्य समुदायों में अपना समर्थन आधार फिर से बनाना है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि बसपा की शुरुआती घोषणाओं का उद्देश्य बूथ-स्तरीय संगठन को मजबूत करना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों का मुकाबला करना है, जो वर्तमान में राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर हावी हैं। पूर्वी, पश्चिमी और बुंदेलखंड क्षेत्रों में उम्मीदवारों की शुरुआती घोषणाओं के साथ, बसपा अपनी खोई जमीन वापस पाने और उत्तर प्रदेश की जटिल जाति-संचालित राजनीति में एक निर्णायक खिलाड़ी के रूप में खुद को फिर से स्थापित करने का प्रयास कर रही है। पहले प्रकाशित: 27 फरवरी, 2026, 12:41 IST समाचार राजनीति मायावती की बसपा ने 2027 यूपी चुनाव के लिए चार उम्मीदवारों की घोषणा की, जातिगत अंकगणित पर ध्यान केंद्रित किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027(टी)बीएसपी उम्मीदवार सूची 2027(टी)मायावती सोशल 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मृणाल ठाकुर ने अल्लू अर्जुन को भेजा फूलों का बुके:‘पुष्पा 2’ के लिए अवॉर्ड मिलने पर दी बधाई; एक्टर बोले- कभी साथ काम करेंगे

70वें फिल्मफेयर साउथ अवॉर्ड्स में एक्टर अल्लू अर्जुन को फिल्म ‘पुष्पा 2’ के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला। एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर ने अल्लू अर्जुन को फूलों का बुके भेजा और एक नोट भी लिखा। उन्होंने लिखा, “सर, फिल्मफेयर में बेस्ट एक्टर अवॉर्ड जीतने पर दिल से बधाई। यह सम्मान आपके लिए पूरी तरह सही है। आपकी मेहनत, गहराई और हर परफॉर्मेंस में दिखने वाली एनर्जी प्रेरित करती है।” अल्लू अर्जुन ने इस बुके की तस्वीर इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर की। उन्होंने जवाब में लिखा, “बहुत-बहुत धन्यवाद मृणाल। आपका मैसेज बहुत प्यारा है। उम्मीद है किसी दिन आपके साथ काम करने का मौका मिलेगा।” इससे पहले उन्होंने अवॉर्ड सेरेमनी की भी झलक सोशल मीडिया पर शेयर की थी। उन्होंने लिखा, “फिल्मफेयर का धन्यवाद इस सम्मान के लिए। यह मेरे लिए खास है। मैं यह अवॉर्ड अपने फैंस को समर्पित करता हूं, जिनका प्यार हमेशा मेरे साथ है।” फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में ‘पुष्पा 2’ ने कई अवॉर्ड जीते बता दें कि फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ 2026 में ‘पुष्पा 2’ ने 5 अवॉर्ड जीते। सुकुमार को बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला। नवीन यरनेनी और वाई रवि शंकर को बेस्ट फिल्म का सम्मान मिला। देवी श्री प्रसाद को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर और रामकृष्ण और मोनिका को बेस्ट प्रोडक्शन डिजाइन का अवॉर्ड मिला। बता दें कि यह फिल्म 2024 में रिलीज हुई थी और बॉक्स ऑफिस पर सफल रही। यह 2021 की फिल्म ‘पुष्पा: द राइज’ का सीक्वल है। फिल्म में अल्लू अर्जुन के साथ रश्मिका मंदाना, फहाद फासिल, जगपति बाबू, सुनील और राव रमेश नजर आए थे। टीम अब ‘पुष्पा’ के तीसरे पार्ट की तैयारी में है।
शराब नीति घोटाला केस,CBI मामले में अरविंद केजरीवाल-मनीष सिसोदिया बरी:दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा- पूरे मामले में पर्याप्त सबूत नहीं

शराब घोटाला केस में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को AAP नेता अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को CBI केस में सभी आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा- बिना सबूत के आरोप साबित नहीं होता है। अरविंद केजरीवाल शराब घोटाला केस में जमानत पर थे। वे 13 जुलाई, 2024 को जेल से बाहर आए थे। इसी दिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इसी मामले से जुड़े CBI केस में जमानत दी थी। शराब घोटाला मामले में केजरीवाल के खिलाफ ED और CBI दोनों जांच एजेंसियों ने केस दर्ज किया था। ED ने उन्हें 21 मार्च, 2024 को अरेस्ट किया था। इसके बाद 26 जून को CBI ने जेल से ही उन्हें हिरासत में ले लिया था। ED मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से 12 जुलाई को जमानत मिली थी। CAG की रिपोर्ट में दावा- शराब नीति में गड़बड़ियां थीं पिछले साल दिल्ली शराब नीति को लेकर CAG (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट लीक हुई थी। इसमें सरकार को 2026 करोड़ रुपए का रेवेन्यू लॉस होने की बात कही गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि शराब नीति में काफी गड़बड़ियां थीं, जिनमें लाइसेंस देने में खामी भी शामिल है। इसके साथ ही AAP लीडर्स को कथित तौर पर घूस के जरिए फायदा पहुंचाया गया। रिपोर्ट में बताया गया है कि डिप्टी चीफ मिनिस्टर जिस ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की अगुआई कर रहे थे, उसने एक्सपर्ट पैनल के सुझावों को खारिज कर दिया था। कैबिनेट ने नीति को मंजूरी दे दी थी और कई अहम फैसलों पर तब के उपराज्यपाल की मंजूरी भी नहीं ली गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतों के बावजूद सभी को नीलामी की बोली लगाने की मंजूरी दे दी गई थी। जिन्हें घाटा हुआ था, उन्हें भी लाइसेंस दे दिए गए या रीन्यू कर दिए गए थे।






