उमरिया में मौसम बदला, फसलों पर संकट:चना, सरसों और आम की बौर प्रभावित, किसानों की चिंता बढ़ी

उमरिया जिले में मौसम ने अचानक करवट ली है। लगातार बादल छाए रहने से रबी फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। शनिवार सुबह से आसमान बादलों से ढका रहा और सुबह 9 बजे तक धूप नहीं निकली। इससे दिन के तापमान में वृद्धि और रात के तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, जिले में 15 फरवरी से मौसम का मिजाज बदला है। 15 फरवरी को अधिकतम तापमान 23°C और न्यूनतम 11.4°C था। इसके बाद 16 फरवरी को अधिकतम तापमान बढ़कर 30.01°C हो गया। 17 फरवरी को 29.02°C, 18 फरवरी को 29.5°C, 19 फरवरी को 29.5°C और 20 फरवरी को 30°C अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। 21 फरवरी को न्यूनतम तापमान 17.5°C रिकॉर्ड हुआ। लगातार बादल छाए रहने से फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका बढ़ गई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. धनंजय सिंह ने बताया कि ऐसे मौसम में चना और सरसों की फसल में कीट-रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा, आम की बौर भी प्रभावित होती है और काली पड़ने लगती है। उन्होंने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और आवश्यक दवाइयों का छिड़काव करने की सलाह दी है। किसान रामभजन ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बादल छाने से फसलों को नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने स्वीकार किया कि मौसम पर किसी का नियंत्रण नहीं है, इसलिए बचाव ही एकमात्र उपाय है। मौसम विभाग के अधिकारी रजनीश यादव के अनुसार, जिले में अगले कुछ दिनों तक आंशिक बादल छाए रहने की संभावना है।
पीएम मोदी से आज मिलेंगे ब्राजीलियन प्रेसिडेंट डी सिल्वा:भारत-ब्राजील के बीच ट्रेड डील पर मुहर संभव, लूला बोले थे- हमारी एयरोस्पेस कंपनी यहां प्लांट खोलेगी

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान भारत-ब्राजील के बीच ट्रेड डील पर मुहर लग सकती है। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते (ट्रेड डील) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जिसमें क्रिटिकल मिनरल्स, रेयर अर्थ्स, डिफेंस, एनर्जी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे क्षेत्रों पर खास फोकस है। इसमें ट्रेड डील समेत कई समझौतों को फाइनल करने की संभावना जताई जा रही है। लूला प्रधानमंत्री मोदी के न्योते पर भारत आए हैं। वे 18-22 फरवरी तक भारत के राजकीय दौरे पर हैं। लूला अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे। मोदी से मुलाकात के बाद 22 फरवरी को वे सियोल (दक्षिण कोरिया) रवाना होंगे। भारत-ब्राजील संबंधों पर लुला ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार सिर्फ 15 अरब डॉलर है, जिसे 30-40 अरब तक बढ़ाना चाहिए। वे 260 ब्राजीलियाई व्यवसायियों के साथ आए हैं ताकि अंतरिक्ष, रक्षा, फार्मा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी हो। एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर भारत में प्लांट खोलेगी। दोनों देश ग्लोबल साउथ के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और उदाहरण पेश कर सकते हैं। लुला ने यह बात शुक्रवार को इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कही। सिल्वा ने इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात की। यह इंटरव्यू भारत में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुआ, जहां लुला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मित्रता की सराहना की और कहा कि दोनों देश मिलकर भारत और ब्राजील के इतिहास को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ब्रिक्स (BRICS) पर बात करते हुए लुला ने इसे पिछले तीन दशकों की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ब्रिक्स ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें भारत और चीन अकेले दुनिया की आधी आबादी रखते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स से नई व्यापार नीति, सांस्कृतिक संबंध और राज्य स्तर के रिश्ते विकसित हो सकते हैं। लुला ने बहुपक्षवाद की वकालत की और कहा कि ब्राजील किसी नए शीत युद्ध नहीं चाहता, न अमेरिका-चीन के बीच। ब्राजील सभी देशों के साथ व्यापार करना चाहता है। उन्होंने ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक की तारीफ की, जो आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक से अलग तरीके से काम करता है। लुला ने ब्रिक्स के जरिए संयुक्त बयान जारी करने के उदाहरण दिए, जैसे ट्रंप के टैरिफ पर और गाजा, यूक्रेन जैसे मुद्दों पर। डॉलर से मुक्ति पर लुला ने कहा कि ब्रिक्स में कोई नई साझा मुद्रा बनाने का प्रस्ताव नहीं है। बल्कि वे अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार की संभावना तलाश रहे हैं, जैसे ब्राजील और भारत डॉलर के बजाय अपनी मुद्राओं का इस्तेमाल करें। यह रातोंरात नहीं हो सकता, लेकिन इसे आजमाना चाहिए ताकि लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो। क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ पर डील संभव आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा के बीच होने वाली द्विपक्षीय मुलाकात में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स पर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख हिस्सा है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन की निर्भरता कम करने, ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन को सपोर्ट करने और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने पर केंद्रित है। यह समझौता दोनों देशों को कच्चे माल के निर्यातक से आगे बढ़ाकर प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन और रिसाइक्लिंग में भागीदार बनाने पर जोर देता है। ब्राजील के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ रिजर्व ब्राजील दुनिया के दूसरे सबसे बड़े रेयर अर्थ रिजर्व वाला देश है। जिसके पास लगभग 21 मिलियन मीट्रिक टन का विशाल भंडार है। इसके अलावा लिथियम, निकल, नियोबियम, ग्रेफाइट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स प्रचुर मात्रा में हैं। ब्राजील का लक्ष्य सिर्फ रॉ मटेरियल एक्सपोर्टर न रहकर वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स (प्रोसेस्ड मिनरल्स) बनाना। भारत का लक्ष्य EV, बैटरी, सोलर और हाई-टेक इंडस्ट्री के लिए डाइवर्सिफाइड सप्लाई चेन बनाना। भारत पहले से ही KABIL के जरिए अर्जेंटीना, चिली आदि में सक्रिय है, और अब ब्राजील को प्राथमिकता दे रहा है। यह समझौता BRICS और ग्लोबल साउथ की रणनीति का हिस्सा है, जहां दोनों देश अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा के बीच मिडिल पावर के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं। लूला ने एक इंटरव्यू में कहा “ब्राजील में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स की बहुतायत है, लेकिन हम इसे सिर्फ रॉ मटेरियल सैंक्चुअरी नहीं बनाना चाहते।” वे भारत के साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर जोर दे रहे हैं। दोनों देश AI में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं, जहां क्रिटिकल मिनरल्स AI हार्डवेयर (चिप्स, सर्वर्स) के लिए जरूरी हैं। द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भारत और ब्राजील ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार 15.21 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। इसमें 25% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। भारत का निर्यात 8.35 अरब डॉलर और ब्राजील से आयात 6.85 अरब डॉलर रहा। ब्राजील में भारतीय निवेश 15 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। ब्राजील का बिजनेस डेलीगेशन ऊर्जा, कृषि, फार्मा, मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है। उम्मीद है कि इस दौरे के दौरान कई निवेश प्रस्तावों और साझेदारी समझौतों पर चर्चा होगी। राष्ट्रपति लूला का छठा भारत दौरा यह राष्ट्रपति लूला का छठा भारत दौरा है। वे पहली बार 2004 में गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आए थे। आखिरी बार वे सितंबर 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे। प्रधानमंत्री मोदी जुलाई 2025 में ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया के राजकीय दौरे पर गए थे, जो 57 साल में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली राजकीय यात्रा थी। नवंबर 2025 में दोनों नेता जोहान्सबर्ग में जी20 बैठक के दौरान भी मिले थे। मोदी को 2025 में ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ से सम्मानित किया था। भारत-ब्राजील UN और BRICS जैसे मंचों पर मिलकर काम करते हैं भारत और ब्राजील के रिश्ते बहुत अच्छे रहे हैं। साल 2006 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक
सतना जिला अस्पताल का अंतिम मूल्यांकन:टीम ने बिस्तरों पर साफ चादरें पाईं, अतिक्रमण पर जताई नाराजगी

सतना में कायाकल्प अभियान के तहत शुक्रवार को सरदार वल्लभभाई पटेल शासकीय जिला चिकित्सालय का अंतिम मूल्यांकन किया गया। इस दौरान अस्पताल की व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त नजर आईं।मूल्यांकन टीम में एनएचएम भोपाल के क्वॉलिटी एनालिस्ट डॉ. पंकज बुधौलिया, शिवपुरी जिला अस्पताल के डॉ. रामकुमार चौधरी और अकीला अंसारी शामिल थे। टीम ने निर्धारित चेकलिस्ट के अनुसार अस्पताल के सभी विभागों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बिस्तरों पर साफ-सुथरी चादरें बिछी मिलीं। वार्डों में बेहतर साफ-सफाई दिखी और नर्सिंग ऑफिसर सहित पूरा स्टाफ प्रोटोकॉल का पालन करता पाया गया। सफाईकर्मी लगातार अपना कार्य कर रहे थे। हालांकि, टीम ने अस्पताल के मेन गेट के आसपास अतिक्रमण और गंदगी पर नाराजगी व्यक्त की। करीब 70 वर्ष पुराने अस्पताल भवन की दीवारों पर जमी धूल और जर्जर स्थिति को लेकर भी सुधार की आवश्यकता बताई गई। टीम के सदस्यों ने वार्डों के निरीक्षण के दौरान किसी अधिकारी या कर्मचारी से सीधे बातचीत नहीं की, बल्कि केवल व्यवस्थाओं का अवलोकन कर मूल्यांकन किया। वार्डों में पदस्थ पैरामेडिकल स्टाफ से विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं के संचालन का प्रदर्शन (डेमो) कराया गया। कुछ स्थानों पर स्टाफ अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सका। निरीक्षण के अंतिम चरण में 8 प्रमुख क्षेत्रों से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया गया। अधिकारियों के अनुसार, पहले के मूल्यांकन में चिन्हित किए गए गैप इस बार पूरे कर लिए गए थे। इस मूल्यांकन का अंतिम स्कोर लगभग 15 दिन बाद जारी किया जाएगा। मूल्यांकन के दौरान सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला, सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह, डीपीएम राकेश कर्ष, आरएमओ डॉ. शरद दुबे, क्वालिटी नोडल अधिकारी डॉ. विजेता राजपूत, सहायक प्रबंधक डॉ. धीरेन्द्र वर्मा, स्टूवर्ड जीएस तिवारी, मेट्रन किरण सिंह, लक्ष्मी गुप्ता, शांति प्रजापति और विनोद दहायत मौजूद रहे।
नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर ट्रक में लगी आग:एक-एक कर फटे टायर, ड्राइवर ने कूद कर बचाई जान

सेमरी हरचंद में नर्मदापुरम-पिपरिया स्टेट हाईवे पर अनाज मंडी के पास खड़ा एक ट्रक शुक्रवार रात करीब 9 बजे अचानक आग की चपेट में आ गया। ट्रक में सीमेंट भरी थी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और 8 से 10 फीट ऊंची लपटें उठने लगीं। ड्राइवर ने समय रहते ट्रक से कूदकर अपनी जान बचाई। आग बढ़ने के साथ एक-एक कर टायर फटने लगे, जिससे मौके पर दहशत का माहौल बन गया। पुलिस ने रोकी आवाजाही सूचना मिलते ही सेमरी हरचंद पुलिस चौकी प्रभारी आकाशदीप पचाया बल के साथ मौके पर पहुंचे। सुरक्षा की दृष्टि से हाईवे पर कुछ देर के लिए वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई। दो जगहों से बुलाई गई दमकल आग बुझाने के लिए माखननगर और सोहागपुर से फायर ब्रिगेड बुलाई गई। दमकल टीम ने करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक ट्रक पूरी तरह जल चुका था। एसडीओपी संजू चौहान ने बताया कि 12 चक्कों वाले ट्रक की केबिन में अचानक आग लगने की सूचना मिली है। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल सका है। ड्राइवर की तलाश कर पूछताछ की जाएगी। आग के चलते स्टेट हाईवे-22 पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा और सड़क पर भीड़ जमा हो गई। एसडीओपी संजू चौहान ने बताया 12 चक्कों वाले ट्रक में सीमेंट भरी थी। मंडी के पास ट्रक खड़ा था। कैबिन में अचानक से आग लगने की सूचना है। आग किस वजह से लगी। इसका पता नहीं चल पाया है। ट्रक ड्राइवर की तलाश कर पूछताछ करेंगे। आग की वजह से स्टेट हाइवे 22 पर यातायात प्रभावित हुआ। स्टेट हाईवे-22 पर भीड़ जमा हो गई और कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। देखें हादसे की तीन तस्वीरें
खजुराहो महोत्सव- मंत्री के भाषण पर पर्यटकों की हूटिंग:नाराज इटालियन कपल बोला-हम डांस देखने के आए थे, न कि लंबे भाषण सुनने

विश्व प्रसिद्ध खजुराहो नृत्य महोत्सव का आगाज हो चुका है, लेकिन शुक्रवार को पहले ही दिन मंच पर ऐसी स्थिति बनी जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया। यह महोत्सव 20 से 26 फरवरी तक चलने वाला है और शुभारंभ समारोह में प्रदेश के संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी भाषण देने के लिए मंच पर पहुंचे। निर्धारित समय शाम 6:30 बजे था, लेकिन मुख्य अतिथि और अन्य मंत्री देर से पहुंचे। कार्यक्रम देरी से शुरु होने से दर्शक में नाराजगी इस वजह से दर्शक दीर्घा में बैठे देसी और विदेशी पर्यटक लंबे समय तक इंतजार करते रहे। समारोह लगभग दो घंटे की देरी से शुरू हुआ, जिससे कई लोगों का धैर्य जवाब दे गया। मंत्रालय ने बताया कि देरी मुख्य अतिथि की यात्रा और सुरक्षा इंतजाम के कारण हुई। इसके बावजूद मंच पर कलाकारों ने प्रस्तुति देकर महोत्सव की भव्यता बनाए रखी। दर्शकों ने रंग-बिरंगे नृत्यों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया और उत्सव का स्वागत उत्साहपूर्वक किया। मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के भाषण के बीच ‘गो बैक’ के नारे लगे इस बीच मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने करीब 16 मिनट तक अपना संबोधन दिया और सांसद विष्णु दत्त शर्मा ने भी 3 मिनट तक अपनी बात रखी। लेकिन जब संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी का भाषण शुरू हुआ, तो दर्शक बुरी तरह भड़क गए। पर्यटकों को कला और नृत्य का इंतजार था, लेकिन नेताओं के लंबे भाषणों ने उनके सब्र का बांध तोड़दिया। देखते ही देखते सामने बैठी भीड़ ‘गो बैक’ के नारे लगाने लगी और चारों तरफ से ‘हो-हो’ का शोर सुनाई देने लगा। भारी हूटिंग के बावजूद मंत्री जी भाषण देते रहे हैरानी की बात यह रही कि इतनी भारी हूटिंग के बावजूद मंत्री जी अपना भाषण देते रहे। वे करीब 6 मिनट तक बोले और अंत में जब शोर और बढ़ा, तो वे चार पंक्तियां सुनाने की जिद पर अड़ गए। दर्शकों की पीड़ा समझते हुए उन्होंने मंच से यह तो स्वीकार किया कि लोग कार्यक्रम देखने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन फिर भी बिना अपनी कविता सुनाए और जयकारे लगवाए वे मंच से नीचे नहीं उतरे। विदेशी बोले-हम नृत्य देखने के आए थे, न कि लंबे भाषण सुनने इस पूरे घटनाक्रम पर वहां मौजूद विदेशी सैलानियों ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। इटली के फ्लोरेंस से आए एलेसांद्रो ने कहा कि “हम इटली में माहौल को महसूस करने और नृत्य देखने के आदी हैं, न कि लंबे भाषण सुनने के। हम अनुभव को जीना चाहते थे।” वहीं उनकी साथी जूलिया ने बताया कि “यह जगह और माहौल बेहद शानदार है, लेकिन मंत्री जी ने शायद कुछ ज्यादा ही बातें कर दीं। हम वास्तव में केवल नृत्य देखना चाहते थे।” खजुराहो के इस भव्य आयोजन में पहले ही दिन हुए इस घटनाक्रम ने व्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि दूर-दराज से आए पर्यटक कला देखने के लिए घंटों इंतजार कर रहे थे, जबकि मंच से सियासी भाषणों का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा था।
धीरेंद्र शास्त्री का गांव अब प्रॉपर्टी हब:बागेश्वर धाम की आड़ में खेती की जमीन पर बना रहे कॉलोनी, भोपाल-इंदौर से ऊंचे दाम

‘हीरे जैसी रिटर्न’, ‘6 महीने में 50% मुनाफा’, ‘धाम के सबसे नजदीक प्लॉट’ जैसे दावे हर दीवार पर चिपके हैं। ये दीवारें मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में बसे गढ़ा गांव की हैं। इसकी पहचान अब पूरी दुनिया में बागेश्वर धाम के नाम से है। हाल ही में यहां धीरेंद्र शास्त्री ने 305 गरीब, दलित और जरूरतमंद लड़कियों का सामूहिक विवाह कराया। दावा है कि कार्यक्रम में 10 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे और 200 एकड़ में पांडाल सजा। इस भव्य आयोजन के बीच एक और तस्वीर उभरकर सामने आई- समूचे गांव में धार्मिक कार्यक्रम के पोस्टरों से ज्यादा कॉलोनियों, प्लॉट्स और लैंड प्रोजेक्ट्स के बैनर लगे मिले। दैनिक भास्कर की टीम ने जब इन प्रोजेक्ट्स की जमीनी हकीकत जानने के लिए गढ़ा गांव में पड़ताल की, तो सामने आया खेती की जमीन पर अवैध प्लॉटिंग का बड़ा नेटवर्क फल-फूल रहा है। गांव में बागेश्वर धाम के कारण जमीनों की कीमतें भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों के बराबर या उनसे भी ज्यादा हो गई है, इसी का फायदा उठाने के लिए आज गढ़ा गांव में दर्जनभर से ज्यादा कॉलोनाइजर खेतों में प्लॉट बेच रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पड़ताल में ये बातें सामने आईं – दर्जनभर कॉलोनाइजर ½-2 एकड़ में बिना प्लानिंग के कॉलोनियां काट रहे। – गांववालों से सस्ते में खरीदी खेती की जमीन को आवासीय/कमर्शियल प्लॉट्स के रूप में बेचा जा रहा (बिना लैंड यूज चेंज)। – खरीदने वालों को लालच: बागेश्वर धाम से 6 महीने में 50-60% मुनाफा। – न कोई अनुभव, न प्लानिंग; नाली, पानी, बिजली, सड़क जैसी सुविधाएं लगभग नदारद। – प्रशासनिक हस्तक्षेप पर धमकी: ‘हम यहां बैठे हैं, कोई दिक्कत नहीं होगी।’ जानिए भास्कर ने कैसे एक्सपोज किया ये फर्जीवाड़ा दैनिक भास्कर के रिपोर्टर कुछ कॉलोनाइजर्स के पास जमीन खरीदने के बहाने मिले और यह जानने की कोशिश की कि बागेश्वर धाम की आढ़ में कैसे लोगों को ठगने की कोशिश हो रही है… इन कॉलोनियों की गड़बड़ी समझिए… क्या हो रहा– खेती की जमीन पर बिना डायवर्जन के कॉलोनियां काट दी गई हैं। इस कॉलोनी में न तो सड़क बनी और न ही स्ट्रीट लाइट के पोल हैं, लेकिन यहां रेसिडेंशियल और कमर्शियल एक्टिविटीज चल रही है। सारा प्रोजेक्ट अवैध है। धीरेंद्र शास्त्री के बड़े पापा के बेटे की दो कॉलोनियां बागेश्वर धाम स्थित बागेश्वर बालाजी मंदिर के रास्ते पर एक बिल्डिंग पर बागेश्वर धाम प्रॉपर्टीज का पोस्टर लगा था। जिस पर राघवपुरम कॉलोनी, बागेश्वर धाम, गढ़ा लिखा हुआ था। कॉलोनी का नक्शा भी बना था। हमने इस पोस्टर पर लिखे नंबर पर कॉल कर प्रॉपर्टी देखने की बात कही। फोन अखिलेश गर्ग नाम के व्यक्ति ने उठाया था। हमें ऑफिस में बैठने को कहा गया। उन्होंने कहा कि वे एक लड़के को भेज रहे हैं जो हमें साइट पर ले आएगा। ऑफिस में अखिलेश गर्ग के बारे में पूछने पर बताया कि वे दादा गुरु हैं। दादा गुरु धीरेंद्र शास्त्री के बड़े पापा के लड़के हैं। बागेश्वर धाम और गांव गढ़ा में इनका प्रॉपर्टी का बड़ा काम है। हमने ऑफिस में बैठकर इस प्रोजेक्ट का नक्शा देखा। पता चला कि अभी दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं। एक राघवपुरम और दूसरा सनातन धाम के नाम से। दोनों जगह मिलाकर करीब 100 से ज्यादा प्लॉट है। ये दोनों ही बागेश्वर धाम मंदिर से 500 मीटर और गुरुजी निवास से 300 मीटर दूर है। दोनों प्रोजेक्ट 3-4 माह पहले शुरू, धड़ल्ले से बिक रहे प्लॉट हमें साइट दिखाने आए शख्स ने ऑफिस में पूरे प्रोजेक्ट की डिटेल बताई। यहां जमीन खरीदने के लिए कम से कम आपको 25 से 30 लाख रुपए प्रति हजार स्क्वायर फीट खर्च करने पड़ेंगे। इससे कम पर कोई सौदा नहीं हो पाएगा। राघवपुरम कैंपस में जमीन की कीमत 2500 से लेकर 4000 रुपए प्रति स्क्वायर फीट है। और ये कीमतें आप जो प्लॉट पसंद करेंगे उसकी लोकेशन के हिसाब से तय होगी। आगे बताया कि दोनों प्रोजेक्ट्स 3-4 महीने पहले शुरू हुए हैं। इसके अलावा पहले से भी कुछ प्रोजेक्ट हैं जिनके लगभग सभी प्लॉट बिक चुके हैं। राघवपुरम में भी ज्यादा से ज्यादा 2 से 3 महीने में सारे प्लॉट बुक हो जाएंगे। यहां सबसे बड़ी बात है कि 2027 में कैंसर हॉस्पिटल बनकर तैयार हो जाएगा तब तक यहां जमीन की कीमतें हीरे से भी ज्यादा हो जाएंगी। जमीन सुरक्षा की पूरी गारंटी दे रहे भास्कर रिपोर्टर ने प्रॉपर्टी डीलर से पूछा कि मेरी जमीन क्या यहां सुरक्षित रहेगी? हमें यहां सिर्फ इन्वेस्टमेंट के हिसाब से जमीन लेनी है। डीलर ने कहा, आप अपने जमीन पर चार पिलर खड़े कर दीजिए। उसके बाद आप भूल जाइए आपकी जमीन 1 इंच भी कोई इधर से उधर नहीं कर सकता। जब हमने पूछा कि जमीनों के भाव पिछले 1 साल में कितने बढ़े हैं, तो उन्होंने बताया कि 1500 रुपए प्रति वर्ग फीट वाले प्लॉट अब 2500 रुपए प्रति वर्ग फीट के हो गए और 3000- 3500 रुपए प्रति वर्ग फीट वाले प्लॉट की कीमत आज 5000 रुपए स्क्वायर फीट हो गई है। हमारे यहां लोन का कोई सिस्टम नहीं है। वो आप अपने हिसाब से देखो। यहां से हम राघव पुरम में पहुंचे।यहां टेंट लगाकर तीन- चार लोग बैठे हुए थे। हमें यहां अखिलेश गर्ग मिले। जिन्हें यहां लोग बड़े दादा कह रहे थे। कॉलोनाइजर अखिलेश गर्ग से भास्कर रिपोर्टर की बातचीत… रिपोर्टर– इस कॉलोनी को किस ने डेवलप किया है? अखिलेश- मैं ही इस जमींन का मालिक हूं। मैंने अभी दो प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं। इसके अलावा सनातन धाम प्रोजेक्ट भी है। इस कॉलोनी से महाराज जी का नया आवास पास ही है। कॉलोनी में डामर रोड डलवा कर देंगे, नाली बनवा कर देंगे। (फिलहाल कच्ची सड़क है। न नाली बनी है और न ही स्ट्रीट लाइट के पोल लगे हैं।) रिपोर्टर– यहां निर्माण कब शुरू कर सकते हैं? अखिलेश– यहां आप होटल बनाएं, दुकान बनाएं या फिर घर या आश्रम बनाएं। जिस दिन रजिस्ट्री हो जाए उसी दिन से आपको जाे बनाना है, बनाइए। जब हमने उनसे पूछा कि पैसे कैसे देने हैं तो उसके लिए उन्होंने बताया की 10 दिन के अंदर पूरी राशि एकमुश्त देनी है। रिपोर्टर– किसी तरह का फ्रॉड तो नहीं होगा? अखिलेश– आप भरोसा कर के देखिए। हमने कह दिया वह
'ओ रोमियो’ में छोटू बन छाए हुसैन दलाल:विशाल भारद्वाज को भेजा मैसेज और मिल गया रोल, शाहिद कपूर संग काम करने का सपना पूरा

फिल्म ओ रोमियो हाल ही में रिलीज हुई है और दर्शकों के बीच काफी पसंद की जा रही है। फिल्म में हुसैन दलाल ने ‘छोटू’ का किरदार निभाया है, जिसमें उन्होंने अपनी सहज अभिनय क्षमता दिखाई है। हुसैन अक्सर शर्मीले और शांत स्वभाव के हैं, लेकिन इस फिल्म के लिए उन्होंने अपने डर को पार किया और डायरेक्टर विशाल भारद्वाज को सीधे मैसेज भेजा, जिसके बाद उन्हें मौका मिला। फिल्म में शाहिद कपूर के साथ काम करना उनके लिए सपनों के सच होने जैसा अनुभव था। दैनिक भास्कर ने हुसैन दलाल से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने अपनी फिल्म यात्रा, सेट पर अनुभव और निजी संघर्षों के बारे में खुलकर बताया की हैं। आपकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर रही है। सबसे पहले जानना चाहेंगे कि आप इस स्क्रिप्ट तक कैसे पहुंचे? सुजात सौदागर, जो कि डायरेक्टर हैं, उन्होंने The Underbug नाम की एक फेस्टिवल फिल्म बनाई थी, जिसमें अली फजल और मैं मुख्य भूमिका में थे। यह फिल्म उन्होंने कुछ साल पहले तैयार की थी और उसे विभिन्न फेस्टिवल में दिखाया गया। विशाल भारद्वाज सर ने यह फिल्म तीन-चार साल पहले देखी और उन्हें यह बहुत पसंद आई। उनकी तारीफ और फिल्म के बारे में उनका संदेश मेरे पास आया। मैं आम तौर पर किसी को काम के लिए डायरेक्ट मैसेज नहीं करता, लेकिन इस बार मैंने हिम्मत जुटाई और उन्हें मैसेज किया। सर ने बहुत ही शालीनता और आदर के साथ मुझे जवाब दिया। इसके बाद मुझे टेस्ट के लिए बुलाया गया। मैंने टेस्ट दिया और कुछ महीने तक परिणाम का इंतजार किया। फिर अचानक मुझे कॉल आया और बताया गया कि मैं फिल्म में चुना गया हूं। यह मेरे लिए एक बड़ा मौका और सपने के सच होने जैसा अनुभव था। जब आपको स्क्रिप्ट मिली, तो आपके मन में क्या ख्याल आया? आपने कहा कि यह कहानी आपको करनी है, आपकी अपेक्षाएं पूरी हुईं? मैं बस विशाल भारद्वाज की फिल्म में काम करना चाहता था। अगर वे कहते कि तुम बस एक गाड़ी का रोल करोगे, मैं उसे भी पूरे विश्वास के साथ करता। यह अनुभव मेरे लिए बेहद खास था। शूटिंग के दौरान सेट पर आपका अनुभव कैसा रहा? विशाल भारद्वाज सर के साथ काम करना और अपने सपनों की फिल्म में शामिल होना आपके लिए कैसा अनुभव था? जब मैंने मकबूल फिल्म देखी थी, मैं केवल 15-16 साल का था और उस फिल्म ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मैंने सोचा कि क्या कभी मेरे साथ भी ऐसा होगा। 20 साल बाद, 2024 में मैं विशाल भारद्वाज सर के साथ काम कर रहा था। यह मेरे लिए बिल्कुल सपनों के सच होने जैसा अनुभव था। सेट पर हर पल सीखने और उत्कृष्टता को नजदीक से महसूस करने का अवसर मिला। शूटिंग के दौरान कोई ऐसा सीन जो आपके लिए चुनौतीपूर्ण और यादगार दोनों रहा? एक सीन है जिसमें शाहिद कपूर सड़क पर गुंडों से लड़ते हैं और फिर मैं आता हूं। उसके बाद हम नाचते हैं। इसमें पांच भावनाएं थीं गुस्सा, रोना, हंसना और फिर डांस करना। यह एक ही दिन और रात में शूट हुआ। मेरे लिए यह सबसे मुश्किल और सबसे यादगार सीन रहा। शाहिद कपूर के साथ काम करने का अनुभव आपके लिए कैसा रहा? उन्होंने आपको कैसे मार्गदर्शन किया और आपकी तैयारी में मदद की? शाहिद कपूर एक शानदार अभिनेता हैं और पूरी तरह टीम प्लेयर भी। उन्होंने मुझे कई तरीकों से मार्गदर्शन किया चाहे वह कैरेक्टर ग्राफ समझना हो, अलग-अलग ट्रायल्स करना हो, या रिहर्सल में सुधार करना। शाहिद हमेशा धैर्य और सहायक तरीके से मेरी मदद करते रहे। उनके साथ काम करना मेरे लिए बिल्कुल मास्टर क्लास जैसा अनुभव था, जहाँ मैंने एक्टिंग की बारीकियों और टीम वर्क को करीब से महसूस किया। शाहिद के लिए सफलता या स्टारडम किसी तरह की प्राथमिकता नहीं है। वह हमेशा एक्सीलेंस और क्वालिटी पर ध्यान देते हैं, और बस अपने काम में पूरी मेहनत लगाते हैं। यह देखकर मुझे भी प्रेरणा मिली कि असली कला सिर्फ नाम या सफलता से नहीं बल्कि मेहनत और लगन से नापी जाती है। फिल्म में कटिंग और सीबीएफसी के बदलावों पर आपका क्या विचार हमें अपने हिस्से की पूरी फिल्म पब्लिक को दिखाई नहीं गई। पब्लिक ने अनकट वर्जन नहीं देखा। इसलिए ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। आपकी फिल्म और एक्टिंग की यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? बचपन से लेकर इंडस्ट्री में कदम रखने तक का सफर कैसा रहा? मेरी शुरुआत बहुत ही बचपन में हुई थी। मैं केवल 15 साल का था जब मैंने स्कूल खत्म किया और थिएटर में कदम रखा। थिएटर ने मेरे लिए कला का पहला अनुभव और मार्गदर्शन दिया। इसके बाद लगातार 20 साल से मैं थिएटर में काम कर रहा हूँ। धीरे-धीरे, थिएटर के अनुभव और मेहनत के जरिए मैं फिल्म इंडस्ट्री में भी प्रवेश करने में सफल हुआ। रास्ता आसान नहीं था कई बार कठिन समय आया, चुनौतियां थीं, लेकिन लगातार मेहनत और समय के साथ सब कुछ ठीक हो गया। यही मेरी यात्रा का आधार है संघर्ष, धैर्य और कला के प्रति समर्पण।
सभी केस हाईकोर्ट लौटे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा-MP में OBC आरक्षण पर फैसला हाईकोर्ट करे

मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित मामलों को मप्र हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है। जस्टिस पी. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले से जुड़ी अपीलें, विशेष अनुमति याचिकाएं (एसएलपी) और हाईकोर्ट से ट्रांसफर हुए सभी केसों पर अब हाईकोर्ट को ही सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि आरक्षण मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष पीठ (स्पेशल बेंच) गठित की जाए। यह पीठ तीन माह के भीतर सभी विवादों का अंतिम निपटारा करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति की वैधता की जांच संबंधित राज्य की सामाजिक संरचना के आधार पर होनी चाहिए और इसके लिए हाईकोर्ट ही उपयुक्त मंच है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट ने यह अधिकार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की विशेष पीठ को दिया है कि वह विभिन्न पक्षों द्वारा दायर अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई कर निर्णय ले। यानी भर्ती प्रक्रियाओं पर लगी रोक हटेगी या नहीं, इसका फैसला अब हाईकोर्ट की नई स्पेशल बेंच करेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास लंबित सभी याचिकाओं और कार्यवाहियों का निपटारा कर दिया। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने का तर्क देते हुए नियुक्तियों की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने कहा- राज्य की सामाजिक संरचना पर हाईकोर्ट ही करे परीक्षण सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आरक्षण नीति राज्य की सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों पर आधारित होती है। इसलिए छत्तीसगढ़ की स्थिति मप्र के लिए बाध्यकारी नहीं हो सकती। बिना हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में परीक्षण उचित नहीं है। अभी कहां-कितना आरक्षण क्या है मुख्य विवाद
इंदौर में दूषित पानी से मौतों पर बहस:कैलाश बोले- भागीरथपुरा मुंबई के धारावी जैसा, लोग अशिक्षित

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों पर शुक्रवार को विधानसभा में तीखी बहस हुई। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पहली बार सदन में बयान देते हुए भागीरथपुरा की तुलना मुंबई की धारावी से की। उन्होंने कहा कि यह 80-90 साल पुरानी बस्ती है और मिनी धारावी जैसी परिस्थितियां हैं। वहां कुछ अशिक्षित लोग रहते हैं, जिससे नगर निगम के लिए हर दृष्टि से व्यवस्थित काम करना कठिन हो जाता है। इन हालात में कर्मचारी भी प्रॉपर काम नहीं कर पाते थे। मंत्री ने घटना को इंदौर के लिए कलंक और व्यक्तिगत आत्मग्लानि का विषय बताया। उन्होंने माना कि भागीरथपुरा के लोगों और स्थानीय पार्षद ने दूषित पानी की शिकायत की थी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम शुरू होने में देरी हुई। कांग्रेस द्वारा किए गए धरना-प्रदर्शन को उन्होंने अशोभनीय बताते हुए कहा कि जहां मरहम की जरूरत थी, वहां “लाशों पर राजनीतिक रोटियां सेंकी गईं।” उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की गई है और इसमें किसी जाति को नहीं देखा गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा- मंत्री जी, गिनती मत करिए, लेकिन गिल्टी तो फील करिए नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वे संवेदना व्यक्त करने गए थे, राजनीति करने नहीं। इंदौर में घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं, एक रात में 5 करोड़ की सीवर लाइन डल जाती है। हाईकोर्ट ने हालात को हेल्थ इमरजेंसी जैसा बताया और दखल देना पड़ा। 35 से ज्यादा मौतें हुईं, सरकार 22 पर अटकी है। गिनती मत करिए, लेकिन गिल्टी तो फील करिए। आरोप लगाया कि कार्रवाई जाति देखकर की गई। दलित-आदिवासी अधिकारियों को हटाया गया, बाकी को सिर्फ ट्रांसफर किया गया। पार्षद द्वारा एक साल से गंदे पानी पर लिखे पत्रों की अनदेखी का भी मुद्दा उठाया गया। लखन घनघोरिया ने जबलपुर के गंदे पानी के सैंपल दिखाए, जबकि जयवर्धन सिंह ने कहा कि अवॉर्ड लेने में नेता आगे रहते हैं, तो विफलता पर जिम्मेदारी भी लें।
टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की कमजोरी ऑफ-स्पिन:13 टीमों में भारत का स्कोरिंग रेट सबसे खराब; सूर्या नंबर-3 पर कर सकते हैं बल्लेबाजी

टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन एक बड़ी कमजोरी भी सामने आई है। भारतीय टॉप ऑर्डर के पहले आठ बल्लेबाजों में से छह बाएं हाथ के हैं। टीमें इसी का फायदा उठाते हुए भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ लगातार ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोश्चेज ने भी माना है कि टीम को टर्निंग पिचों और बड़े मैदानों के लिए बेहतर रणनीति बनाने की जरूरत है। भारत का स्कोरिंग रेट बेहद कम टूर्नामेंट में भारत ने ऑफ स्पिन के खिलाफ सबसे ज्यादा 102 गेंदें खेलीं। 6 से ज्यादा ओवर ऑफ स्पिन खेलने वाली 13 टीमों में भारत का रन रेट केवल 6.23 रहा है। इस मामले में भारत से खराब प्रदर्शन सिर्फ नेपाल और ओमान का रहा। बाकी सभी टीमों ने ऑफ स्पिन के खिलाफ 8 या उससे ज्यादा के रन रेट से बल्लेबाजी की। क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर में 3 लेफ्ट हैंडर्स हैं। ऑफ स्पिन को टैकल करने के लिए नंबर-3 पर तिलक वर्मा की जगह कप्तान सूर्यकुमार यादव को बैटिंग करनी चाहिए। लेफ्टी बैटर्स के खिलाफ ऑफ स्पिन हथियार भारतीय टीम में ईशान किशन, तिलक वर्मा और अभिषेक शर्मा जैसे लेफ्टी बैटर्स ने विपक्षी कप्तानों का काम आसान कर दिया है। नीदरलैंड के आर्यन दत्त ने 4 ओवर में 19 रन देकर 2 विकेट लिए। उन्होंने अभिषेक शर्मा और ईशान किशन को पवेलियन पर भेजकर टीम इंडिया को शुरुआत में ही मुश्किल में डाल दिया था। अभिषेक बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए थे, जबकि ईशान किशन 7 गेंदों में 18 रन बना कर आउट हुए। वहीं नामीबिया के जेरार्ड इरास्मस ने भी भारतीय टॉप ऑर्डर को काफी परेशान किया। भारत का ऑफ स्पिन के खिलाफ औसत भी मात्र 13.25 का रहा है। यानी टीम इंडिया ऑफ स्पिनर्स के खिलाफ 14 रन बनाने में एक विकेट गंवा दे रही है। अभिषेक शर्मा की खराब शुरुआत अभिषेक शर्मा ने अपने वर्ल्ड कप करियर की शुरुआत बेहद खराब की। वे लगातार तीन पारियों में जीरो पर आउट हुए। इनमें से दो बार वे ऑफ स्पिनर के खिलाफ अटैकिंग शॉट खेलने के चक्कर में विकेट गंवा बैठे। वहीं, नंबर-3 पर खेलने वाले तिलक वर्मा ने अब तक सबसे ज्यादा 31 गेंदें ऑफ स्पिनर की खेली हैं, लेकिन वे केवल 26 रन ही बना पाए। सूर्या और तिलक के बैटिंग ऑर्डर में बदलाव पर चर्चा पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा का मानना है कि ऑफ स्पिन के खतरे से बचने के लिए भारत को नंबर-3 पर तिलक वर्मा की जगह सूर्यकुमार यादव को भेजना चाहिए। टीम इंडिया में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज होने की वजह से टीमें शुरुआती ओवरों में ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। टीमों की प्लानिंग रहती है कि पावरप्ले के शुरुआती 4 ओवर ऑफ स्पिन से कराए जाएं। अगर तीसरे नंबर पर सूर्यकुमार यादव बल्लेबाजी के लिए आते हैं, तो टीमों को अपनी स्ट्रैटजी बदलनी पड़ेगी। इससे भारत काफी हद तक ऑफ स्पिन के दबाव से बाहर निकल सकता है। सूर्या ने भी संघर्ष किया सूर्यकुमार यादव भी इस टूर्नामेंट में ऑफ स्पिन के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए। उन्होंने 27 गेंदों में सिर्फ 28 रन बनाए। टीम मैनेजमेंट फिलहाल तिलक को नंबर-3 पर इसलिए बनाए हुए है, क्योंकि वे पावरप्ले में तेज गेंदबाजों के खिलाफ तेजी से रन बना रहे हैं। वहीं, सूर्यकुमार का प्रदर्शन डेथ ओवरों में ज्यादा प्रभावी रहा है, जहां वे लगभग 150 के स्ट्राइक रेट से रन बना रहे हैं। अभिषेक शर्मा को लेकर भी सलाह आकाश चोपड़ा का मानना है कि अभिषेक को ऑफ स्पिन के खिलाफ सीधे शॉट खेलने पर ध्यान देना चाहिए। अगर अभिषेक शुरुआत में एक-दो रन बनाकर खाता खोल लेते हैं, तो उनका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और वे जल्द ही अपनी लय हासिल कर लेंगे। पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और पूर्व तेज गेंदबाज इरफान पठान की भी यही राय है। उनका मानना है कि अभिषेक को अपने मेंटर युवराज सिंह से बात करनी चाहिए और ऑफ स्पिन के खिलाफ सीधे शॉट खेलने की स्ट्रैटजी अपनानी चाहिए, जिससे वे इस चुनौती के सामने बेहतर तरीके से निपट सकें। टेन डोश्चेट ने कहा कि अभिषेक अपनी काबिलियत जानते हैं। मैच से पहले उन्होंने नेट्स पर 90 मिनट तक पसीना बहाया और अपनी लय हासिल की। उन्हें बस थोड़े आत्मविश्वास की जरूरत है, उनका पिछला रिकॉर्ड ही उनकी ताकत है। सुपर-8 में चुनौती और बढ़ेगी भारत के ग्रुप की अन्य टीमें इस कमजोरी को भांप चुकी हैं। सुपर-8 में साउथ अफ्रीका के पास ऐडन मार्करम, जिम्बाब्वे के पास सिकंदर रजा और वेस्टइंडीज के पास रोस्टन चेज जैसे अनुभवी ऑफ स्पिनर्स हैं। ये टीमें भारत के खिलाफ नई गेंद से भी ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर सकती हैं।







