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'ओ रोमियो’ में छोटू बन छाए हुसैन दलाल:विशाल भारद्वाज को भेजा मैसेज और मिल गया रोल, शाहिद कपूर संग काम करने का सपना पूरा

'ओ रोमियो’ में छोटू बन छाए हुसैन दलाल:विशाल भारद्वाज को भेजा मैसेज और मिल गया रोल, शाहिद कपूर संग काम करने का सपना पूरा

फिल्म ओ रोमियो हाल ही में रिलीज हुई है और दर्शकों के बीच काफी पसंद की जा रही है। फिल्म में हुसैन दलाल ने ‘छोटू’ का किरदार निभाया है, जिसमें उन्होंने अपनी सहज अभिनय क्षमता दिखाई है। हुसैन अक्सर शर्मीले और शांत स्वभाव के हैं, लेकिन इस फिल्म के लिए उन्होंने अपने डर को पार किया और डायरेक्टर विशाल भारद्वाज को सीधे मैसेज भेजा, जिसके बाद उन्हें मौका मिला। फिल्म में शाहिद कपूर के साथ काम करना उनके लिए सपनों के सच होने जैसा अनुभव था। दैनिक भास्कर ने हुसैन दलाल से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने अपनी फिल्म यात्रा, सेट पर अनुभव और निजी संघर्षों के बारे में खुलकर बताया की हैं। आपकी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर रही है। सबसे पहले जानना चाहेंगे कि आप इस स्क्रिप्ट तक कैसे पहुंचे? सुजात सौदागर, जो कि डायरेक्टर हैं, उन्होंने The Underbug नाम की एक फेस्टिवल फिल्म बनाई थी, जिसमें अली फजल और मैं मुख्य भूमिका में थे। यह फिल्म उन्होंने कुछ साल पहले तैयार की थी और उसे विभिन्न फेस्टिवल में दिखाया गया। विशाल भारद्वाज सर ने यह फिल्म तीन-चार साल पहले देखी और उन्हें यह बहुत पसंद आई। उनकी तारीफ और फिल्म के बारे में उनका संदेश मेरे पास आया। मैं आम तौर पर किसी को काम के लिए डायरेक्ट मैसेज नहीं करता, लेकिन इस बार मैंने हिम्मत जुटाई और उन्हें मैसेज किया। सर ने बहुत ही शालीनता और आदर के साथ मुझे जवाब दिया। इसके बाद मुझे टेस्ट के लिए बुलाया गया। मैंने टेस्ट दिया और कुछ महीने तक परिणाम का इंतजार किया। फिर अचानक मुझे कॉल आया और बताया गया कि मैं फिल्म में चुना गया हूं। यह मेरे लिए एक बड़ा मौका और सपने के सच होने जैसा अनुभव था। जब आपको स्क्रिप्ट मिली, तो आपके मन में क्या ख्याल आया? आपने कहा कि यह कहानी आपको करनी है, आपकी अपेक्षाएं पूरी हुईं? मैं बस विशाल भारद्वाज की फिल्म में काम करना चाहता था। अगर वे कहते कि तुम बस एक गाड़ी का रोल करोगे, मैं उसे भी पूरे विश्वास के साथ करता। यह अनुभव मेरे लिए बेहद खास था। शूटिंग के दौरान सेट पर आपका अनुभव कैसा रहा? विशाल भारद्वाज सर के साथ काम करना और अपने सपनों की फिल्म में शामिल होना आपके लिए कैसा अनुभव था? जब मैंने मकबूल फिल्म देखी थी, मैं केवल 15-16 साल का था और उस फिल्म ने मुझे बहुत प्रभावित किया। मैंने सोचा कि क्या कभी मेरे साथ भी ऐसा होगा। 20 साल बाद, 2024 में मैं विशाल भारद्वाज सर के साथ काम कर रहा था। यह मेरे लिए बिल्कुल सपनों के सच होने जैसा अनुभव था। सेट पर हर पल सीखने और उत्कृष्टता को नजदीक से महसूस करने का अवसर मिला। शूटिंग के दौरान कोई ऐसा सीन जो आपके लिए चुनौतीपूर्ण और यादगार दोनों रहा? एक सीन है जिसमें शाहिद कपूर सड़क पर गुंडों से लड़ते हैं और फिर मैं आता हूं। उसके बाद हम नाचते हैं। इसमें पांच भावनाएं थीं गुस्सा, रोना, हंसना और फिर डांस करना। यह एक ही दिन और रात में शूट हुआ। मेरे लिए यह सबसे मुश्किल और सबसे यादगार सीन रहा। शाहिद कपूर के साथ काम करने का अनुभव आपके लिए कैसा रहा? उन्होंने आपको कैसे मार्गदर्शन किया और आपकी तैयारी में मदद की? शाहिद कपूर एक शानदार अभिनेता हैं और पूरी तरह टीम प्लेयर भी। उन्होंने मुझे कई तरीकों से मार्गदर्शन किया चाहे वह कैरेक्टर ग्राफ समझना हो, अलग-अलग ट्रायल्स करना हो, या रिहर्सल में सुधार करना। शाहिद हमेशा धैर्य और सहायक तरीके से मेरी मदद करते रहे। उनके साथ काम करना मेरे लिए बिल्कुल मास्टर क्लास जैसा अनुभव था, जहाँ मैंने एक्टिंग की बारीकियों और टीम वर्क को करीब से महसूस किया। शाहिद के लिए सफलता या स्टारडम किसी तरह की प्राथमिकता नहीं है। वह हमेशा एक्सीलेंस और क्वालिटी पर ध्यान देते हैं, और बस अपने काम में पूरी मेहनत लगाते हैं। यह देखकर मुझे भी प्रेरणा मिली कि असली कला सिर्फ नाम या सफलता से नहीं बल्कि मेहनत और लगन से नापी जाती है। फिल्म में कटिंग और सीबीएफसी के बदलावों पर आपका क्या विचार हमें अपने हिस्से की पूरी फिल्म पब्लिक को दिखाई नहीं गई। पब्लिक ने अनकट वर्जन नहीं देखा। इसलिए ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। आपकी फिल्म और एक्टिंग की यात्रा की शुरुआत कैसे हुई? बचपन से लेकर इंडस्ट्री में कदम रखने तक का सफर कैसा रहा? मेरी शुरुआत बहुत ही बचपन में हुई थी। मैं केवल 15 साल का था जब मैंने स्कूल खत्म किया और थिएटर में कदम रखा। थिएटर ने मेरे लिए कला का पहला अनुभव और मार्गदर्शन दिया। इसके बाद लगातार 20 साल से मैं थिएटर में काम कर रहा हूँ। धीरे-धीरे, थिएटर के अनुभव और मेहनत के जरिए मैं फिल्म इंडस्ट्री में भी प्रवेश करने में सफल हुआ। रास्ता आसान नहीं था कई बार कठिन समय आया, चुनौतियां थीं, लेकिन लगातार मेहनत और समय के साथ सब कुछ ठीक हो गया। यही मेरी यात्रा का आधार है संघर्ष, धैर्य और कला के प्रति समर्पण।

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