Saturday, 19 Sep 2026 | 05:12 AM

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अमेरिका 32 साल बाद फुटबॉल वर्ल्डकप के नॉकआउट में पहुंचा:ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया; साइबारी का सबसे तेज गोल, मोरक्को ग्रुप-सी के टॉप पर

अमेरिका 32 साल बाद फुटबॉल वर्ल्डकप के नॉकआउट में पहुंचा:ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया; साइबारी का सबसे तेज गोल, मोरक्को ग्रुप-सी के टॉप पर

मेजबान अमेरिका ने फुटबॉल वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 32 में प्रवेश कर लिया है। उसने शनिवार के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया। अमेरिकी टीम ने 32 साल बाद नॉकआउट राउंड में जगह बनाई है। सिएटल स्टेडियम में ग्रुप-डी के मैच में स्टार फॉरवर्ड क्रिश्चियन पुलिसिक की गैरमौजूदगी में उतरी अमेरिकी टीम ने इस एडिशन में लगातार दूसरी जीत दर्ज की है। पुलिसिक पिंडली की चोट के कारण इस मुकाबले में नहीं खेल सके। लेकिन, टीम को उनकी कमी नहीं खली। अमेरिका ने इससे पहले अपने पहले मुकाबले में पराग्वे को 4-1 से हराया था। टीम ग्रुप-डी में 6 अंक के साथ पहले स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया दूसरे नंबर पर है। तुर्किए और पराग्वे एक-एक अंक के साथ तीसरे और चौके नंबर पर हैं। बर्गेस का आत्मघाती गोल, अमेरिका को बढ़त मैच के 11वें मिनट में अमेरिका को बढ़त मिली, जब फोलारिन बालोगुन के क्रॉस को रोकने की कोशिश में ऑस्ट्रेलियाई डिफेंडर कैमरून बर्गेस ने आत्मघाती गोल कर दिया। फ्रीमैन ने हेडर से गोल दागा पहले हाफ के 43वें मिनट में अमेरिका ने अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। सिर्जिनो डेस्ट के डिफ्लेक्टेड प्रयास को एलेक्स फ्रीमैन ने हेडर से गोल में बदल दिया। वीडियो रिव्यू के बाद गोल को मंजूरी मिली। यह 21 साल फ्रीमैन का विश्व कप में पहला गोल था। मैच 30: स्कॉटलैंड Vs मोरक्को; 0-1 साइबारी का लगातार दूसरे मैच में गोल, मोरक्को जीता मोरक्को ने फुटबॉल वर्ल्ड कप के ग्रुप-सी मैच में स्कॉटलैंड को 1-0 से हराया। टीम 4 अंक के साथ ग्रुप सी के टॉप पर है। उसने पहले मैच में ब्राजील को ड्रॉ पर रोका था। बूस्टन स्टेडियम में खेले गए इस मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल स्ट्राइकर इस्माइल साइबारी ने किया, जो विश्व कप 2026 का अब तक का सबसे तेज गोल और विश्व कप इतिहास में मोरक्को का सबसे तेज गोल भी बन गया। ब्राहिम डियाज के सटीक पास पर साइबारी स्कॉटलैंड के डिफेंस को भेदते हुए आगे बढ़े और गोलकीपर एंगस गन को छकाकर गेंद को गोल पोस्ट में डाल दिया। वे वर्ल्ड कप में अपने शुरुआती दो मुकाबलों में गोल करने वाले केवल दूसरे अफ्रीकी खिलाड़ी बने हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि मिस्र के मोहम्मद सलाह ने 2018 विश्व कप में हासिल की थी।

अमेरिका 32 साल बाद फुटबॉल वर्ल्डकप के नॉकआउट में पहुंचा:ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया; साइबारी का सबसे तेज गोल, मोरक्को ग्रुप-सी के टॉप पर

अमेरिका 32 साल बाद फुटबॉल वर्ल्डकप के नॉकआउट में पहुंचा:ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया; साइबारी का सबसे तेज गोल, मोरक्को ग्रुप-सी के टॉप पर

मेजबान अमेरिका ने फुटबॉल वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 32 में प्रवेश कर लिया है। उसने शनिवार के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया को 2-0 से हराया। अमेरिकी टीम ने 32 साल बाद नॉकआउट राउंड में जगह बनाई है। सिएटल स्टेडियम में ग्रुप-डी के मैच में स्टार फॉरवर्ड क्रिश्चियन पुलिसिक की गैरमौजूदगी में उतरी अमेरिकी टीम ने इस एडिशन में लगातार दूसरी जीत दर्ज की है। पुलिसिक पिंडली की चोट के कारण इस मुकाबले में नहीं खेल सके। लेकिन, टीम को उनकी कमी नहीं खली। अमेरिका ने इससे पहले अपने पहले मुकाबले में पराग्वे को 4-1 से हराया था। टीम ग्रुप-डी में 6 अंक के साथ पहले स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया दूसरे नंबर पर है। तुर्किए और पराग्वे एक-एक अंक के साथ तीसरे और चौके नंबर पर हैं। बर्गेस का आत्मघाती गोल, अमेरिका को बढ़त मैच के 11वें मिनट में अमेरिका को बढ़त मिली, जब फोलारिन बालोगुन के क्रॉस को रोकने की कोशिश में ऑस्ट्रेलियाई डिफेंडर कैमरून बर्गेस ने आत्मघाती गोल कर दिया। फ्रीमैन ने हेडर से गोल दागा पहले हाफ के 43वें मिनट में अमेरिका ने अपनी बढ़त दोगुनी कर दी। सिर्जिनो डेस्ट के डिफ्लेक्टेड प्रयास को एलेक्स फ्रीमैन ने हेडर से गोल में बदल दिया। वीडियो रिव्यू के बाद गोल को मंजूरी मिली। यह 21 साल फ्रीमैन का विश्व कप में पहला गोल था। मैच 30: स्कॉटलैंड Vs मोरक्को; 0-1 साइबारी का लगातार दूसरे मैच में गोल, मोरक्को जीता मोरक्को ने फुटबॉल वर्ल्ड कप के ग्रुप-सी मैच में स्कॉटलैंड को 1-0 से हराया। टीम 4 अंक के साथ ग्रुप सी के टॉप पर है। उसने पहले मैच में ब्राजील को ड्रॉ पर रोका था। बूस्टन स्टेडियम में खेले गए इस मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल स्ट्राइकर इस्माइल साइबारी ने किया, जो विश्व कप 2026 का अब तक का सबसे तेज गोल और विश्व कप इतिहास में मोरक्को का सबसे तेज गोल भी बन गया। ब्राहिम डियाज के सटीक पास पर साइबारी स्कॉटलैंड के डिफेंस को भेदते हुए आगे बढ़े और गोलकीपर एंगस गन को छकाकर गेंद को गोल पोस्ट में डाल दिया। वे वर्ल्ड कप में अपने शुरुआती दो मुकाबलों में गोल करने वाले केवल दूसरे अफ्रीकी खिलाड़ी बने हैं। उनसे पहले यह उपलब्धि मिस्र के मोहम्मद सलाह ने 2018 विश्व कप में हासिल की थी।

फिल्म से जुड़ीं तो लौटीं बंटवारे की यादें:अंजना सुखानी बोलीं- धूप में खड़ी थी, अमिताभ बच्चन ने कुर्सी और छाता भिजवाया

फिल्म से जुड़ीं तो लौटीं बंटवारे की यादें:अंजना सुखानी बोलीं- धूप में खड़ी थी, अमिताभ बच्चन ने कुर्सी और छाता भिजवाया

इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में मेहर का किरदार निभा रहीं अंजना सुखानी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में फिल्म, करियर और जिंदगी से जुड़े किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके परिवार का पार्टीशन से गहरा जुड़ाव रहा और इस दौर की कहानियों ने फिल्म को उनके लिए निजी बना दिया। बातचीत में उन्होंने अमिताभ बच्चन की विनम्रता और शाहरुख खान की इंसानियत से जुड़े अनुभव भी साझा किए। सवाल: आपकी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ रिलीज हो चुकी है। आपके किरदार और फिल्म को कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? जवाब: बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से फिल्म को प्यार मिल रहा है। आखिर यह इम्तियाज अली की फिल्म है, तो उम्मीद भी यही थी। मेरे किरदार ‘मेहर’ को भी लोग पसंद कर रहे हैं। फिल्म की कहानी काफी इंटेंस है। उसमें प्यार, बंटवारे का दर्द और ट्रॉमा है। ऐसे माहौल में मेरा किरदार हल्कापन और ह्यूमर लेकर आता है। मेहर बहुत मुंहफट है और मन में आता है, वह बोल देती है। लोग कह रहे हैं कि उसका किरदार फिल्म में ताजगी जैसा महसूस होता है। यह सुनकर खुशी होती है। सवाल: आपके किरदार को लेकर सबसे खूबसूरत कॉम्प्लिमेंट क्या मिला? जवाब: काफी अच्छे कॉम्प्लिमेंट मिले, लेकिन बार-बार सुनने को मिला कि मेहर का किरदार कहीं न कहीं ‘जब वी मेट’ की गीत जैसा लगता है। गीत भी बेफिक्र थी और बिना सोचे अपनी बात कह देती थी। यह तुलना मेरे लिए बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट है। सवाल: इम्तियाज अली अपने किरदारों पर बहुत काम करते हैं। आपने मेहर के किरदार के लिए अलग से क्या तैयारी की? जवाब: इम्तियाज खुद इतनी तैयारी करके आते हैं कि कलाकारों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। मेरा किरदार भी सॉफ्ट और हल्का था, इसलिए तैयारी ज्यादा नहीं करनी पड़ी। मैंने सिर्फ समझने की कोशिश की कि इस किरदार का बैकग्राउंड क्या है और उसकी सोच कैसी है। मैं नहीं चाहती थी कि यह किरदार नकारात्मक लगे। मेहर जो भी बोलती है, वह मासूमियत में बोलती है, किसी को चोट पहुंचाने के इरादे से नहीं। मैं हमेशा स्क्रिप्ट मिलने के बाद अपने हिसाब से कैरेक्टर स्केच लिखती हूं और फिर डायरेक्टर से उस पर चर्चा करती हूं। उसके बाद चीजें आसान हो जाती हैं। सवाल: फिल्म पार्टीशन के दौर की कहानी है। उस समय को समझने के लिए आपने क्या किया? जवाब: मेरे नाना-नानी और दादा-दादी दोनों ही बंटवारे के समय भारत आए थे। मेरी नानी कराची से थीं। मैंने उनसे उस दौर की कई कहानियां सुनी हैं। कुछ साल पहले मैंने गूगल मैप पर उन्हें उनका पुराना इलाका दिखाया था। वह भावुक हो गई थीं। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि जिस जगह को छोड़कर आई थीं, उसे कभी फिर देख पाएंगी। मेरे लिए वह खास पल था। सवाल: आपकी नानी उस दौर के बारे में और क्या बताती थीं? जवाब: वह बताती थीं कि उनका परिवार काफी संपन्न था। वहां उनके बड़े घर थे, लेकिन यहां आना पड़ा तो सब कुछ पीछे छोड़ना पड़ा। उन्होंने बताया था कि वे सिर्फ कुछ निजी चीजें ही बचाकर ला पाईं। सोचिए, एक दिन अचानक कोई कह दे कि यह शहर अब आपका नहीं है और आपको सब छोड़कर जाना होगा। यह बहुत दर्दनाक होता होगा। जब मैंने फिल्म देखी तो मुझे बार-बार उनकी बातें याद आईं और महसूस हुआ कि उस दौर से गुजरने वाले लोगों ने कितना कुछ सहा होगा। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे यादगार अनुभव क्या रहा? पंजाब में शूटिंग का माहौल कैसा था? जवाब: हमारे ज्यादातर हिस्से मुंबई के सेट पर शूट हुए और कुछ शूटिंग चंडीगढ़ में हुई। माहौल बहुत अच्छा था। सबसे पहले पंजाब का खाना, सुबह गरमागरम कुलचे और छोले मिलते थे। नवंबर का मौसम था, हल्की ठंड थी, इसलिए शूटिंग और मजेदार रही। मेरे ज्यादातर सीन नसीर साहब, दिलजीत और रजत सर के साथ थे, इसलिए सेट पर परिवार जैसा माहौल महसूस होता था। सवाल: नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैंने उनसे ज्यादा बातें नहीं कीं क्योंकि उनका किरदार इंटेंस था। जब कोई कलाकार इतने गहरे किरदार में होता है, तो उसे स्पेस देना जरूरी होता है। वह सेट पर अपने में रहते थे, लेकिन उन्हें काम करते देखना सीखने जैसा था। किसी भी कलाकार के लिए उनके साथ स्क्रीन शेयर करना बड़ी बात है। सवाल: दिलजीत दोसांझ आज ग्लोबल स्टार बन चुके हैं। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मुझे लगता है कि दिलजीत ग्लोबल स्टार बनने के लिए ही बने हैं। उनका म्यूजिक हर पीढ़ी पसंद करती है। एक कलाकार के तौर पर मुझे उनकी सबसे खास बात उनकी आंखों की सच्चाई लगती है। जब वो परफॉर्म करते हैं तो लगता है कि पूरी ईमानदारी से किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में भी उन्होंने ठहराव और सादगी के साथ काम किया है। सवाल: आपकी जर्नी काफी खूबसूरत रही है। सबसे बड़ी सफलता आप किसे मानती हैं? जवाब: मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता यही है कि मुझे इतने बड़े और बेहतरीन लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। आज कितने लोग कह सकते हैं कि उनकी फिल्म थिएटर में रिलीज हुई, वो भी ऐसे फिल्ममेकर्स और कलाकारों के साथ। मेरे लिए यही सफलता है। बॉक्स ऑफिस कोई तय नहीं कर सकता। हम सिर्फ अपना काम और मेहनत कंट्रोल कर सकते हैं। सवाल: आपने कई बड़े डायरेक्टर्स और दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया है। अब तक की जर्नी में सबसे खूबसूरत बात क्या रही है? जवाब: मेरे लिए सबसे खूबसूरत बात यही है कि मुझे देश के बेहतरीन फिल्ममेकर्स के साथ काम करने का मौका मिला। जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि निखिल आडवाणी, रोहित शेट्टी, राम गोपाल वर्मा, राज मेहता और इम्तियाज अली जैसे निर्देशकों के साथ काम करना बड़ी बात है। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं। सवाल: इतने बड़े नामों के साथ काम करने की बात आई, तो अमिताभ बच्चन के साथ आपका अनुभव कैसा रहा? उनसे क्या सीखने को मिला? जवाब: मैंने उनके साथ एक कैडबरी विज्ञापन और बाद में फिल्म डिपार्टमेंट में काम किया। उनसे मैंने सबसे बड़ी चीज विनम्रता सीखी। मेरी नानी कहा करती थीं कि

फिल्म से जुड़ीं तो लौटीं बंटवारे की यादें:अंजना सुखानी बोलीं- धूप में खड़ी थी, अमिताभ बच्चन ने कुर्सी और छाता भिजवाया

फिल्म से जुड़ीं तो लौटीं बंटवारे की यादें:अंजना सुखानी बोलीं- धूप में खड़ी थी, अमिताभ बच्चन ने कुर्सी और छाता भिजवाया

इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में मेहर का किरदार निभा रहीं अंजना सुखानी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में फिल्म, करियर और जिंदगी से जुड़े किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके परिवार का पार्टीशन से गहरा जुड़ाव रहा और इस दौर की कहानियों ने फिल्म को उनके लिए निजी बना दिया। बातचीत में उन्होंने अमिताभ बच्चन की विनम्रता और शाहरुख खान की इंसानियत से जुड़े अनुभव भी साझा किए। सवाल: आपकी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ रिलीज हो चुकी है। आपके किरदार और फिल्म को कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? जवाब: बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से फिल्म को प्यार मिल रहा है। आखिर यह इम्तियाज अली की फिल्म है, तो उम्मीद भी यही थी। मेरे किरदार ‘मेहर’ को भी लोग पसंद कर रहे हैं। फिल्म की कहानी काफी इंटेंस है। उसमें प्यार, बंटवारे का दर्द और ट्रॉमा है। ऐसे माहौल में मेरा किरदार हल्कापन और ह्यूमर लेकर आता है। मेहर बहुत मुंहफट है और मन में आता है, वह बोल देती है। लोग कह रहे हैं कि उसका किरदार फिल्म में ताजगी जैसा महसूस होता है। यह सुनकर खुशी होती है। सवाल: आपके किरदार को लेकर सबसे खूबसूरत कॉम्प्लिमेंट क्या मिला? जवाब: काफी अच्छे कॉम्प्लिमेंट मिले, लेकिन बार-बार सुनने को मिला कि मेहर का किरदार कहीं न कहीं ‘जब वी मेट’ की गीत जैसा लगता है। गीत भी बेफिक्र थी और बिना सोचे अपनी बात कह देती थी। यह तुलना मेरे लिए बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट है। सवाल: इम्तियाज अली अपने किरदारों पर बहुत काम करते हैं। आपने मेहर के किरदार के लिए अलग से क्या तैयारी की? जवाब: इम्तियाज खुद इतनी तैयारी करके आते हैं कि कलाकारों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। मेरा किरदार भी सॉफ्ट और हल्का था, इसलिए तैयारी ज्यादा नहीं करनी पड़ी। मैंने सिर्फ समझने की कोशिश की कि इस किरदार का बैकग्राउंड क्या है और उसकी सोच कैसी है। मैं नहीं चाहती थी कि यह किरदार नकारात्मक लगे। मेहर जो भी बोलती है, वह मासूमियत में बोलती है, किसी को चोट पहुंचाने के इरादे से नहीं। मैं हमेशा स्क्रिप्ट मिलने के बाद अपने हिसाब से कैरेक्टर स्केच लिखती हूं और फिर डायरेक्टर से उस पर चर्चा करती हूं। उसके बाद चीजें आसान हो जाती हैं। सवाल: फिल्म पार्टीशन के दौर की कहानी है। उस समय को समझने के लिए आपने क्या किया? जवाब: मेरे नाना-नानी और दादा-दादी दोनों ही बंटवारे के समय भारत आए थे। मेरी नानी कराची से थीं। मैंने उनसे उस दौर की कई कहानियां सुनी हैं। कुछ साल पहले मैंने गूगल मैप पर उन्हें उनका पुराना इलाका दिखाया था। वह भावुक हो गई थीं। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि जिस जगह को छोड़कर आई थीं, उसे कभी फिर देख पाएंगी। मेरे लिए वह खास पल था। सवाल: आपकी नानी उस दौर के बारे में और क्या बताती थीं? जवाब: वह बताती थीं कि उनका परिवार काफी संपन्न था। वहां उनके बड़े घर थे, लेकिन यहां आना पड़ा तो सब कुछ पीछे छोड़ना पड़ा। उन्होंने बताया था कि वे सिर्फ कुछ निजी चीजें ही बचाकर ला पाईं। सोचिए, एक दिन अचानक कोई कह दे कि यह शहर अब आपका नहीं है और आपको सब छोड़कर जाना होगा। यह बहुत दर्दनाक होता होगा। जब मैंने फिल्म देखी तो मुझे बार-बार उनकी बातें याद आईं और महसूस हुआ कि उस दौर से गुजरने वाले लोगों ने कितना कुछ सहा होगा। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे यादगार अनुभव क्या रहा? पंजाब में शूटिंग का माहौल कैसा था? जवाब: हमारे ज्यादातर हिस्से मुंबई के सेट पर शूट हुए और कुछ शूटिंग चंडीगढ़ में हुई। माहौल बहुत अच्छा था। सबसे पहले पंजाब का खाना, सुबह गरमागरम कुलचे और छोले मिलते थे। नवंबर का मौसम था, हल्की ठंड थी, इसलिए शूटिंग और मजेदार रही। मेरे ज्यादातर सीन नसीर साहब, दिलजीत और रजत सर के साथ थे, इसलिए सेट पर परिवार जैसा माहौल महसूस होता था। सवाल: नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैंने उनसे ज्यादा बातें नहीं कीं क्योंकि उनका किरदार इंटेंस था। जब कोई कलाकार इतने गहरे किरदार में होता है, तो उसे स्पेस देना जरूरी होता है। वह सेट पर अपने में रहते थे, लेकिन उन्हें काम करते देखना सीखने जैसा था। किसी भी कलाकार के लिए उनके साथ स्क्रीन शेयर करना बड़ी बात है। सवाल: दिलजीत दोसांझ आज ग्लोबल स्टार बन चुके हैं। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मुझे लगता है कि दिलजीत ग्लोबल स्टार बनने के लिए ही बने हैं। उनका म्यूजिक हर पीढ़ी पसंद करती है। एक कलाकार के तौर पर मुझे उनकी सबसे खास बात उनकी आंखों की सच्चाई लगती है। जब वो परफॉर्म करते हैं तो लगता है कि पूरी ईमानदारी से किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में भी उन्होंने ठहराव और सादगी के साथ काम किया है। सवाल: आपकी जर्नी काफी खूबसूरत रही है। सबसे बड़ी सफलता आप किसे मानती हैं? जवाब: मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता यही है कि मुझे इतने बड़े और बेहतरीन लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। आज कितने लोग कह सकते हैं कि उनकी फिल्म थिएटर में रिलीज हुई, वो भी ऐसे फिल्ममेकर्स और कलाकारों के साथ। मेरे लिए यही सफलता है। बॉक्स ऑफिस कोई तय नहीं कर सकता। हम सिर्फ अपना काम और मेहनत कंट्रोल कर सकते हैं। सवाल: आपने कई बड़े डायरेक्टर्स और दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया है। अब तक की जर्नी में सबसे खूबसूरत बात क्या रही है? जवाब: मेरे लिए सबसे खूबसूरत बात यही है कि मुझे देश के बेहतरीन फिल्ममेकर्स के साथ काम करने का मौका मिला। जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि निखिल आडवाणी, रोहित शेट्टी, राम गोपाल वर्मा, राज मेहता और इम्तियाज अली जैसे निर्देशकों के साथ काम करना बड़ी बात है। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं। सवाल: इतने बड़े नामों के साथ काम करने की बात आई, तो अमिताभ बच्चन के साथ आपका अनुभव कैसा रहा? उनसे क्या सीखने को मिला? जवाब: मैंने उनके साथ एक कैडबरी विज्ञापन और बाद में फिल्म डिपार्टमेंट में काम किया। उनसे मैंने सबसे बड़ी चीज विनम्रता सीखी। मेरी नानी कहा करती थीं कि

FIFA वर्ल्ड कप में जर्मनी और आइवरी-कोस्ट का मुकाबला:जीतने वाली टीम ग्रुप में टॉप पर पहुंचेगी; आज रात स्वीडन और नीदरलैंड की भिड़ंत

FIFA वर्ल्ड कप में जर्मनी और आइवरी-कोस्ट का मुकाबला:जीतने वाली टीम ग्रुप में टॉप पर पहुंचेगी; आज रात स्वीडन और नीदरलैंड की भिड़ंत

FIFA वर्ल्ड कप 2026 में आज रात स्वीडन और नीदरलैंड का मुकाबला होगा। यह मैच आज रात 10:30 बजे से ह्यूस्टन स्टेडियम में खेला जाएगा। इसके बाद रात 1:30 बजे से जर्मनी और आइवरी कोस्ट की भिड़ंत टोरंटो स्टेडियम में होगी। दोनों टीमों ने अपने पहले मुकाबले जीते थे। यह मैच जीतने वाली टीम ग्रुप-E के टॉप पर पहुंच जाएगी। सुबह 5:30 बजे से इक्वाडोर और कुरासाओ की भिड़ंत कैनसस सिटी स्टेडियम में होगी। वहीं दिन का आखिरी मुकाबला ट्यूनिशिया और जापान के बीच सुबह 9:30 बजे से मोंटेरे स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच-33: स्वीडन के खिलाफ नीदरलैंड का पलड़ा भारी ग्रुप-F में शामिल नीदरलैंड और स्वीडन वर्ल्ड कप में पहली बार आमने-सामने होंगे। फुटबॉल इंटरनेशनल में दोनों के बीच अब तक 2 मैच हुए हैं। इनमें नीदरलैंड ने 1 मैच जीता, जबकि 1 मुकाबला ड्रॉ रहा। इससे पहले आखिरी बार दोनों टीमें 2018 वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स में टकराई थीं। इस मैच में नीदरलैंड ने स्वीडन को 2-0 से हराया था। नीदरलैंड को स्टार डिफेंडर वर्जिल वैन डिक और मिडफील्डर फ्रेंकी डी योंग केका के अनुभव का फायदा मिलेगा। वहीं स्वीडिश टीम इन-फॉर्म स्ट्राइकर विक्टर ग्योकेरेस और अलेक्जेंडर इसाक के अटैकिंग खेल के भरोसे मैदान पर उतरेगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: नीदरलैंड: वर्ब्रूगेन, डमफ्रीज, डी लिग्ट, वैन डिक, आके, शोटेन, रीजेंडर्स, डी योंग, सिमंस, ग्याकपो, डेपे। स्वीडन: ओल्सन, वाहक्विस्ट, हिएन, लिंडेलोफ, ऑगस्टिनसन, काजुस्ते, लार्सन, कुलुसेव्स्की, फोर्सबर्ग, इसाक, ग्योकेरेस। मैच-34: जर्मनी और आइवरी कोस्ट के बीच ग्रुप टॉपर की लड़ाई ग्रुप-E में शामिल जर्मनी और आइवरी कोस्ट के बीच 1 इंटरनेशनल मुकाबला खेला गया है। यह मैच ड्रॉ रहा था। वर्ल्ड कप में दोनों टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। दोनों टीमें अपना पहला मुकाबला जीतकर 3-3 पॉइंट्स पर हैं। जर्मनी ने अपने पहले मैच में कुरासाओ को 7-1 से शिकस्त दी थी, जबकि आइवरी कोस्ट ने इक्वाडोर को 1-0 से मात दी थी। यह मैच जीतने वाली टीम ग्रुप में टॉप पर पहुंचेगी। साथ ही अगले राउंड में जाने की राह भी आसान हो जाएगी। पिछले मैच में गोल करने वाले जर्मनी के जमाल मुसियाला, फ्लोरियन विर्ट्ज और काई हावर्ट्ज पर फिर से नजरें रहेंगी। वहीं आइवरी कोस्ट को अपने स्टार मिडफील्डर फ्रैंक केसी और अटैकिंग विंगर निकोलस पेपे से उलटफेर की उम्मीद होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: जर्मनी: टेर स्टेगन, किमिच, रुडिगर, टाह, मितलस्टेड, एंड्रीच, क्रूस, मुसियाला, गुंडोगन, विर्ट्ज, हावर्ट्ज। आइवरी कोस्ट: फोफाना, सिंगो, डियोमंडे, एनडिका, कोनान, केसी, सेरी, मिकी, पेपे, हालेर, एडिंग्रा। मैच-35: इक्वाडोर और कुरासाओ के लिए करो या मरो का मुकाबला इक्वाडोर और कुरासाओ ग्रुप-E में शामिल हैं। यह दोनों के बीच पहला इंटरनेशनल मैच होगा। दोनों ही टीमें अपने शुरुआती मुकाबले हार चुकी हैं। इक्वाडोर को आइवरी कोस्ट, जबकि कुरासाओ को जर्मनी से हार मिली थी। ऐसे में यह दोनों के लिए करो या मरो का मुकाबला होगा। इक्वाडोर को अनुभवी कप्तान और स्ट्राइकर एनर वैलेंसिया और मिडफील्डर मोइसेस कैसिडो से गोल की उम्मीद होगी। वहीं कुरासाओ के गोलकीपर एलॉय रूम और स्ट्राइकर जूनिन्हो बकुना की जोड़ी पिछले मैच से उबरकर वापसी करना चाहेंगे। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: इक्वाडोर: डोमिंग्वेज, प्रेसिआडो, टोरेस, पाचो, हिनकापी, फ्रेंको, कैसिडो, ओर्टिज, पापेज, वैलेंसिया, रॉड्रिगेज। कुरासाओ: रूम, गाउारी, मार्टिना, जेकोबस, लाटौश, बकुना, आनीता, जोंगा, फेलिसिआनो, जे. बकुना, कस्तूनीर। मैच-36: जापान और ट्यूनिशिया वर्ल्ड कप में पहली बार आमने-सामने ट्यूनिशिया और जापान ग्रुप-F में हैं। वर्ल्ड कप में दोनों टीमों के बीच यह पहली भिड़ंत होगी। इससे पहले दोनों के बीच 1 इंटरनेशनल मैच खेला गया है। 2023 के उस फ्रेंडली मैच में जापान ने ट्यूनिशिया को 2-0 से हराया था। ट्यूनिशिया को टीम के मुख्य फॉरवर्ड यूसुफ म्साकनी और मिडफील्डर एलिज स्कीरी से अच्चे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। वहीं जापान को अपने स्टार खिलाड़ी ताकेफुसा कुबो, कौरू मितोमा और कप्तान वातारू एंडो से बेहतरीन खेल की उम्मीद होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: ट्यूनिशिया: बेन सईद, वालरी, मरैया, ताल्बी, अब्दी, स्कीरी, लैदौनी, रफ्फिया, बेन सुलेमान, म्साकनी, अचौरी। जापान: सुजुकी, सुगावारा, इटकुरा, माचिदा, इटो, एंडो, मोरीता, कुबो, मिनामिनो, मितोमा, उएदा।

FIFA वर्ल्ड कप में जर्मनी और आइवरी-कोस्ट का मुकाबला:जीतने वाली टीम ग्रुप में टॉप पर पहुंचेगी; आज रात स्वीडन और नीदरलैंड की भिड़ंत

FIFA वर्ल्ड कप में जर्मनी और आइवरी-कोस्ट का मुकाबला:जीतने वाली टीम ग्रुप में टॉप पर पहुंचेगी; आज रात स्वीडन और नीदरलैंड की भिड़ंत

FIFA वर्ल्ड कप 2026 में आज रात स्वीडन और नीदरलैंड का मुकाबला होगा। यह मैच आज रात 10:30 बजे से ह्यूस्टन स्टेडियम में खेला जाएगा। इसके बाद रात 1:30 बजे से जर्मनी और आइवरी कोस्ट की भिड़ंत टोरंटो स्टेडियम में होगी। दोनों टीमों ने अपने पहले मुकाबले जीते थे। यह मैच जीतने वाली टीम ग्रुप-E के टॉप पर पहुंच जाएगी। सुबह 5:30 बजे से इक्वाडोर और कुरासाओ की भिड़ंत कैनसस सिटी स्टेडियम में होगी। वहीं दिन का आखिरी मुकाबला ट्यूनिशिया और जापान के बीच सुबह 9:30 बजे से मोंटेरे स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच-33: स्वीडन के खिलाफ नीदरलैंड का पलड़ा भारी ग्रुप-F में शामिल नीदरलैंड और स्वीडन वर्ल्ड कप में पहली बार आमने-सामने होंगे। फुटबॉल इंटरनेशनल में दोनों के बीच अब तक 2 मैच हुए हैं। इनमें नीदरलैंड ने 1 मैच जीता, जबकि 1 मुकाबला ड्रॉ रहा। इससे पहले आखिरी बार दोनों टीमें 2018 वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स में टकराई थीं। इस मैच में नीदरलैंड ने स्वीडन को 2-0 से हराया था। नीदरलैंड को स्टार डिफेंडर वर्जिल वैन डिक और मिडफील्डर फ्रेंकी डी योंग केका के अनुभव का फायदा मिलेगा। वहीं स्वीडिश टीम इन-फॉर्म स्ट्राइकर विक्टर ग्योकेरेस और अलेक्जेंडर इसाक के अटैकिंग खेल के भरोसे मैदान पर उतरेगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: नीदरलैंड: वर्ब्रूगेन, डमफ्रीज, डी लिग्ट, वैन डिक, आके, शोटेन, रीजेंडर्स, डी योंग, सिमंस, ग्याकपो, डेपे। स्वीडन: ओल्सन, वाहक्विस्ट, हिएन, लिंडेलोफ, ऑगस्टिनसन, काजुस्ते, लार्सन, कुलुसेव्स्की, फोर्सबर्ग, इसाक, ग्योकेरेस। मैच-34: जर्मनी और आइवरी कोस्ट के बीच ग्रुप टॉपर की लड़ाई ग्रुप-E में शामिल जर्मनी और आइवरी कोस्ट के बीच 1 इंटरनेशनल मुकाबला खेला गया है। यह मैच ड्रॉ रहा था। वर्ल्ड कप में दोनों टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। दोनों टीमें अपना पहला मुकाबला जीतकर 3-3 पॉइंट्स पर हैं। जर्मनी ने अपने पहले मैच में कुरासाओ को 7-1 से शिकस्त दी थी, जबकि आइवरी कोस्ट ने इक्वाडोर को 1-0 से मात दी थी। यह मैच जीतने वाली टीम ग्रुप में टॉप पर पहुंचेगी। साथ ही अगले राउंड में जाने की राह भी आसान हो जाएगी। पिछले मैच में गोल करने वाले जर्मनी के जमाल मुसियाला, फ्लोरियन विर्ट्ज और काई हावर्ट्ज पर फिर से नजरें रहेंगी। वहीं आइवरी कोस्ट को अपने स्टार मिडफील्डर फ्रैंक केसी और अटैकिंग विंगर निकोलस पेपे से उलटफेर की उम्मीद होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: जर्मनी: टेर स्टेगन, किमिच, रुडिगर, टाह, मितलस्टेड, एंड्रीच, क्रूस, मुसियाला, गुंडोगन, विर्ट्ज, हावर्ट्ज। आइवरी कोस्ट: फोफाना, सिंगो, डियोमंडे, एनडिका, कोनान, केसी, सेरी, मिकी, पेपे, हालेर, एडिंग्रा। मैच-35: इक्वाडोर और कुरासाओ के लिए करो या मरो का मुकाबला इक्वाडोर और कुरासाओ ग्रुप-E में शामिल हैं। यह दोनों के बीच पहला इंटरनेशनल मैच होगा। दोनों ही टीमें अपने शुरुआती मुकाबले हार चुकी हैं। इक्वाडोर को आइवरी कोस्ट, जबकि कुरासाओ को जर्मनी से हार मिली थी। ऐसे में यह दोनों के लिए करो या मरो का मुकाबला होगा। इक्वाडोर को अनुभवी कप्तान और स्ट्राइकर एनर वैलेंसिया और मिडफील्डर मोइसेस कैसिडो से गोल की उम्मीद होगी। वहीं कुरासाओ के गोलकीपर एलॉय रूम और स्ट्राइकर जूनिन्हो बकुना की जोड़ी पिछले मैच से उबरकर वापसी करना चाहेंगे। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: इक्वाडोर: डोमिंग्वेज, प्रेसिआडो, टोरेस, पाचो, हिनकापी, फ्रेंको, कैसिडो, ओर्टिज, पापेज, वैलेंसिया, रॉड्रिगेज। कुरासाओ: रूम, गाउारी, मार्टिना, जेकोबस, लाटौश, बकुना, आनीता, जोंगा, फेलिसिआनो, जे. बकुना, कस्तूनीर। मैच-36: जापान और ट्यूनिशिया वर्ल्ड कप में पहली बार आमने-सामने ट्यूनिशिया और जापान ग्रुप-F में हैं। वर्ल्ड कप में दोनों टीमों के बीच यह पहली भिड़ंत होगी। इससे पहले दोनों के बीच 1 इंटरनेशनल मैच खेला गया है। 2023 के उस फ्रेंडली मैच में जापान ने ट्यूनिशिया को 2-0 से हराया था। ट्यूनिशिया को टीम के मुख्य फॉरवर्ड यूसुफ म्साकनी और मिडफील्डर एलिज स्कीरी से अच्चे प्रदर्शन की उम्मीद होगी। वहीं जापान को अपने स्टार खिलाड़ी ताकेफुसा कुबो, कौरू मितोमा और कप्तान वातारू एंडो से बेहतरीन खेल की उम्मीद होगी। दोनों टीमों की पॉसिबल स्टार्टिंग इलेवन: ट्यूनिशिया: बेन सईद, वालरी, मरैया, ताल्बी, अब्दी, स्कीरी, लैदौनी, रफ्फिया, बेन सुलेमान, म्साकनी, अचौरी। जापान: सुजुकी, सुगावारा, इटकुरा, माचिदा, इटो, एंडो, मोरीता, कुबो, मिनामिनो, मितोमा, उएदा।

मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा रेसिपी: बेसन नहीं, घर में कम तेल में ऐसे बनाएं हाई प्रोटीन वाला मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा; जानिए विधि

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 कप ढीली मूंग दाल, 6 से 8 काली मिर्च पाउडर, 2 हरी मिर्च, 1 इंच बड़ा मसाला अदरक, 1 छोटा चम्मच अदरक, 1/4 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, हरा धनिया, नमक, 2 से 3 बड़ा मसाला तेल छवि: सोशल मीडिया भरवाँ के लिए: 2 आलू, 1 तरबूज़, 1/2 छोटा मसाला, 1/2 छोटा मसाला, स्वादानुसार नमक, हरा धनियां छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले मूंग दाल को 3 से 4 घंटे तक पानी में डूबो दें। इसके बाद पानी की स्वादिष्ट दाल को हरी मिर्च और अदरक के साथ पीस लें। ध्यान रखें कि बैटर सबसे ज्यादा पतला न हो। छवि: सोशल मीडिया अब बैटर में जीरा, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और हरा धनिया का मिश्रण अच्छी तरह मिला लें। दूसरी तरफ जमे हुए आलू को मैश करें और इसमें प्याज, चाट मसाला, नमक और हरा धनियां मिलाकर तैयार कर लें। छवि: फ्रीपिक आलू की स्टफिंग पर एक बेकार योजना फैली हुई है और दूसरी योजना से बनी हुई है। मित्र तो इसे तिकोना काट सकते हैं। इसके बाद तैयार ब्रेड को मूंग दाल के बैटर में अच्छी तरह से डुबोएं, ताकि सभी तरफ बैटर की परत लग जाए। छवि: एआई एक नॉन-स्टिक तवा या पैन गर्म करें और उस पर थोड़ा सा तेल डालें। अब ब्रेड पकौड़े को दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंक लें। तैयार है आपका परमाणु ऊर्जा संयंत्र और हाई प्रोटीन मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा। छवि: एआई इसे हरी चटनी या टमाटर सॉस के साथ गर्मागर्म सर्व करें। दाल को ज्यादा महीन न पीसें, इससे पकौड़े ज्यादा कुरकुरे। अगर आलू की जगह पनीर की स्टफिंग का इस्तेमाल किया जाएगा तो प्रोटीन की मात्रा और बढ़ जाएगी। छवि: एआई डीप फ्राई करने की बजाय टीवी पर कम तेल बनाने से यह सबसे ज्यादा बनती है। स्वाद बढ़ाने के लिए बैटर में थोड़ा सा गरम मसाला भी मिला सकते हैं. छवि: एआई अगर आप स्वाद के साथ सेहत का भी ध्यान रखना चाहते हैं, तो यह मूंग दाल ब्रेड पकौड़ा रेसिपी जरूर आजमाएं। यह बच्चा और बड़ा सभी को बेहद पसंद आएगा। छवि: सोशल मीडिया

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

हाल ही में टीजर रिलीज के बाद चर्चा में आई फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ का नया पोस्टर सामने आया है। पोस्टर फिल्म की अनोखी दुनिया और अलग अंदाज की झलक देता है। इसके जरिए मेकर्स ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाने की कोशिश की है। पोस्टर में अभिनेता अन्नू कपूर अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। वह एक बड़े वास्तु-प्रेरित चक्र के ऊपर रखी कमोड सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। फिल्म की तरह पोस्टर का विजुअल भी हटकर और व्यंग्यात्मक है। इसमें भाग्य, दिशा और रोजमर्रा की उलझनों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाया गया है। फिल्म की टैगलाइन ‘करम बड़े या किस्मत?’ कहानी के मूल विचार को सामने लाती है। यह सवाल उठाती है कि इंसान की जिंदगी फैसले और कर्म तय करते हैं या किस्मत उसकी दिशा बदलती है। पोस्टर में मौजूद बाकी किरदार भी कहानी के दिलचस्प मोड़ों की झलक देते हैं। फिल्म में अन्नू कपूर के साथ रुखसार रहमान, बृजेंद्र काला, पवन मल्होत्रा, इश्तियाक खान, जीवेशु अहलूवालिया, राजेंद्र सेठी, सुमित गुलाटी और नितिन अरोड़ा अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण संदीप कपूर और प्रिया कपूर ने प्रोमोडोम मोशन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। कहानी संदीप कपूर ने लिखी है, जबकि निर्देशन रविंदर सिवाच ने किया है। पोस्टर को लेकर निर्माता संदीप कपूर ने कहा, “हम चाहते थे कि पोस्टर फिल्म की असली पहचान को सामने लाए। यह मजेदार, थोड़ा अलग और दर्शकों में जिज्ञासा पैदा करने वाला है। फिल्म दिखाती है कि लोग अक्सर अपने सवालों के जवाब बाहर ढूंढ़ते हैं, जबकि जिंदगी उन्हें अपने तरीके से नई सीख देती रहती है।”

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' का नया पोस्टर रिलीज:अन्नू कपूर की फिल्म में किस्मत या कर्म? हल्के-फुल्के अंदाज में बड़ा सवाल उठाया

हाल ही में टीजर रिलीज के बाद चर्चा में आई फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ का नया पोस्टर सामने आया है। पोस्टर फिल्म की अनोखी दुनिया और अलग अंदाज की झलक देता है। इसके जरिए मेकर्स ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाने की कोशिश की है। पोस्टर में अभिनेता अन्नू कपूर अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। वह एक बड़े वास्तु-प्रेरित चक्र के ऊपर रखी कमोड सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। फिल्म की तरह पोस्टर का विजुअल भी हटकर और व्यंग्यात्मक है। इसमें भाग्य, दिशा और रोजमर्रा की उलझनों को हल्के-फुल्के अंदाज में दिखाया गया है। फिल्म की टैगलाइन ‘करम बड़े या किस्मत?’ कहानी के मूल विचार को सामने लाती है। यह सवाल उठाती है कि इंसान की जिंदगी फैसले और कर्म तय करते हैं या किस्मत उसकी दिशा बदलती है। पोस्टर में मौजूद बाकी किरदार भी कहानी के दिलचस्प मोड़ों की झलक देते हैं। फिल्म में अन्नू कपूर के साथ रुखसार रहमान, बृजेंद्र काला, पवन मल्होत्रा, इश्तियाक खान, जीवेशु अहलूवालिया, राजेंद्र सेठी, सुमित गुलाटी और नितिन अरोड़ा अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण संदीप कपूर और प्रिया कपूर ने प्रोमोडोम मोशन पिक्चर्स के बैनर तले किया है। कहानी संदीप कपूर ने लिखी है, जबकि निर्देशन रविंदर सिवाच ने किया है। पोस्टर को लेकर निर्माता संदीप कपूर ने कहा, “हम चाहते थे कि पोस्टर फिल्म की असली पहचान को सामने लाए। यह मजेदार, थोड़ा अलग और दर्शकों में जिज्ञासा पैदा करने वाला है। फिल्म दिखाती है कि लोग अक्सर अपने सवालों के जवाब बाहर ढूंढ़ते हैं, जबकि जिंदगी उन्हें अपने तरीके से नई सीख देती रहती है।”

'भारत भाग्य विधाता’ में आतंक नहीं, नर्सों का साहस दिखाया:मनोज तापड़िया बोले- स्क्रिप्ट सुनते ही कंगना ने हामी भरी; विज्ञापन का सफर छोड़ बनाई फिल्म

'भारत भाग्य विधाता’ में आतंक नहीं, नर्सों का साहस दिखाया:मनोज तापड़िया बोले- स्क्रिप्ट सुनते ही कंगना ने हामी भरी; विज्ञापन का सफर छोड़ बनाई फिल्म

विज्ञापन जगत में 27 साल का लंबा सफर तय करने के बाद निर्देशक मनोज तापड़िया ने फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ से सिनेमाई पर्दे पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। यह फिल्म 26/11 मुंबई हमले के दौरान कामा अस्पताल में नर्सों और स्टाफ द्वारा दिखाए गए अभूतपूर्व साहस की उस अनकही कहानी को बयां करती है, जो अब तक आम जनता के सामने नहीं आ पाई थी। फिल्म की रिलीज के बाद मनोज तापड़िया ने इसके निर्माण, कंगना रनोट के साथ काम करने और फिल्म की गहरी रिसर्च से जुड़े कई दिलचस्प अनुभव साझा किए। न्यूज आर्टिकल से मिला आइडिया, पर्दे पर उतारा साहस मनोज तापड़िया खुद को यथार्थवाद (रियलिज्म) का फिल्मकार मानते हैं। उनका कहना है कि इस फिल्म का विचार किसी काल्पनिक कहानी से नहीं, बल्कि एक वास्तविक घटना से आया था। 26/11 हमले के दौरान वे खुद मुंबई में ही थे। हमले के कुछ समय बाद उन्होंने कामा अस्पताल से जुड़ी एक छोटी सी खबर पढ़ी, जिसने उनके दिल को छू लिया। फिल्म में आतंक के खौफ से ज्यादा इंसानी जज्बे को प्राथमिकता दी गई है। मनोज बताते हैं: “मेरा मकसद सिर्फ आतंकवादी हमला या गोलियों की गूंज दिखाना नहीं था, बल्कि मैं उस रात अस्पताल के भीतर मौजूद लोगों का मानसिक तनाव और उनका अनुभव दिखाना चाहता था। अगर सिर्फ हमला दिखाता तो वह एक घटना बनकर रह जाती, लेकिन जब दर्शक किरदारों के दर्द से जुड़ते हैं, तो फिल्म सीधे दिल पर असर करती है।” इस पूरी घटना में मनोज को जिस बात ने सबसे ज्यादा झकझोरा, वह था नर्सों का निहत्था साहस। जिन महिलाओं के पास आत्मरक्षा के लिए एक लाठी तक नहीं थी, उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सैकड़ों मरीजों को सुरक्षित बचाया। वे चाहते तो पिछले दरवाजे से भाग सकते थे, लेकिन वे डटे रहे। यही इस फिल्म की असली आत्मा है, जिसे नर्सों के दृष्टिकोण से पर्दे पर उतारा गया है। बिना स्टार को सोचे लिखी कहानी, कंगना का शार्प स्क्रिप्ट सेंस फिल्मों के लेखन को लेकर मनोज का एक सख्त नियम है वे कभी भी किसी स्टार को ध्यान में रखकर स्क्रिप्ट नहीं लिखते। उनका मानना है कि पहले कहानी और संवाद पूरी तरह तैयार होने चाहिए, उसके बाद ही किरदारों के लिए सही कलाकारों का चयन होना चाहिए। अगर किसी स्टार को सोचकर लिखा जाए और वह मना कर दे, तो पूरी कहानी प्रभावित होती है। ‘भारत भाग्य विधाता’ लिखते समय भी उनके दिमाग में कोई नाम नहीं था। जब स्क्रिप्ट पूरी हुई, तब कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा के जरिए यह कहानी कंगना रनोट तक पहुंची। मनोज के मुताबिक, उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वे इतनी आसानी से कंगना तक पहुंच पाएंगे। लेकिन कंगना का स्क्रिप्ट सेंस बेहद तेज है; उन्होंने कहानी सुनते ही इसके विजन को समझा और तुरंत फिल्म के लिए हामी भर दी। कंगना के आने के बाद फिल्म का स्केल बड़ा हुआ और निर्माता शैलेश सिंह व जयंतीलाल गड़ा भी इस प्रोजेक्ट से जुड़े। सेट पर सभी को सुझाव देने की आजादी थी, जिससे दृश्यों को और बेहतर बनाने में मदद मिली। 5 घंटे के इंटरव्यू और कोर्ट दस्तावेजों पर टिकी प्रामाणिकता एक वास्तविक और संवेदनशील ऐतिहासिक घटना पर फिल्म बनाना बड़ी चुनौती थी, जिसके लिए विस्तृत रिसर्च की गई। दिलचस्प बात यह है कि मनोज ने खुद सीधे तौर पर पीड़ितों से मुलाकात नहीं की। इसके बजाय, उनकी टीम ने पत्रकारिता बैकग्राउंड के लोगों की मदद से वास्तविक किरदारों के इंटरव्यू रिकॉर्ड किए। राइटिंग टीम ने करीब 5 घंटे का वीडियो और ऑडियो मटेरियल महीनों तक बारीकी से देखा। रिसर्च का मकसद सिर्फ सूखे आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि पीड़ितों के हावभाव और उनके मानवीय पक्ष को समझना था।प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए पुलिस रिकॉर्ड, अदालती दस्तावेज और अस्पताल के मूल लेआउट का बारीकी से अध्ययन किया गया। इसी गहरी रिसर्च का नतीजा है कि फिल्म में इस्तेमाल की गई स्थानीय शब्दावली और नर्सों का व्यवहार पूरी तरह वास्तविक नजर आता है। 100 ड्राफ्ट्स की मेहनत और समीक्षकों को जवाब फिल्म की स्क्रिप्टिंग प्रक्रिया बेहद सघन रही। शुरुआती लेखन भले ही दो महीने में पूरा हो गया था, लेकिन मनोज फिल्म की डबिंग खत्म होने तक इसमें बदलाव करते रहे। इसी वजह से फाइनल होने तक स्क्रिप्ट के लगभग 100 ड्राफ्ट तैयार किए गए। तकनीकी रूप से यह फिल्म जितनी सरल दिखती है, इसे शूट करना उतना ही जटिल था। अस्पताल के सीमित स्पेस में लगभग 70 मुख्य और सहायक कलाकारों के साथ समन्वय बिठाना चुनौतीपूर्ण था। बजट और सीमित संसाधनों के कारण पूरी टीम ने महज 35 दिनों के कड़े शेड्यूल में शूटिंग पूरी की। फिल्म रिलीज होने के बाद कुछ समीक्षकों का कहना था कि यह पूरी मुंबई के 26/11 के व्यापक माहौल को नहीं दिखा पाती। इस पर मनोज ने बहुत स्पष्टता से अपना नजरिया रखा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी पूरी मुंबई का हमला दिखाना था ही नहीं; उनका फोकस सिर्फ कामा अस्पताल के भीतर मौजूद नर्सों की मानसिक स्थिति और उस रात के तनाव को दर्शकों तक हूबहू पहुंचाना था। आगे के विजन पर बात करते हुए मनोज ने कहा कि वे भविष्य में भी ऐसी फिल्में बनाना चाहते हैं जो दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ कुछ सोचने पर भी मजबूर करें।