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फिल्म से जुड़ीं तो लौटीं बंटवारे की यादें:अंजना सुखानी बोलीं- धूप में खड़ी थी, अमिताभ बच्चन ने कुर्सी और छाता भिजवाया

फिल्म से जुड़ीं तो लौटीं बंटवारे की यादें:अंजना सुखानी बोलीं- धूप में खड़ी थी, अमिताभ बच्चन ने कुर्सी और छाता भिजवाया

इम्तियाज अली की फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ में मेहर का किरदार निभा रहीं अंजना सुखानी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में फिल्म, करियर और जिंदगी से जुड़े किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके परिवार का पार्टीशन से गहरा जुड़ाव रहा और इस दौर की कहानियों ने फिल्म को उनके लिए निजी बना दिया। बातचीत में उन्होंने अमिताभ बच्चन की विनम्रता और शाहरुख खान की इंसानियत से जुड़े अनुभव भी साझा किए। सवाल: आपकी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ रिलीज हो चुकी है। आपके किरदार और फिल्म को कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? जवाब: बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से फिल्म को प्यार मिल रहा है। आखिर यह इम्तियाज अली की फिल्म है, तो उम्मीद भी यही थी। मेरे किरदार ‘मेहर’ को भी लोग पसंद कर रहे हैं। फिल्म की कहानी काफी इंटेंस है। उसमें प्यार, बंटवारे का दर्द और ट्रॉमा है। ऐसे माहौल में मेरा किरदार हल्कापन और ह्यूमर लेकर आता है। मेहर बहुत मुंहफट है और मन में आता है, वह बोल देती है। लोग कह रहे हैं कि उसका किरदार फिल्म में ताजगी जैसा महसूस होता है। यह सुनकर खुशी होती है। सवाल: आपके किरदार को लेकर सबसे खूबसूरत कॉम्प्लिमेंट क्या मिला? जवाब: काफी अच्छे कॉम्प्लिमेंट मिले, लेकिन बार-बार सुनने को मिला कि मेहर का किरदार कहीं न कहीं ‘जब वी मेट’ की गीत जैसा लगता है। गीत भी बेफिक्र थी और बिना सोचे अपनी बात कह देती थी। यह तुलना मेरे लिए बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट है। सवाल: इम्तियाज अली अपने किरदारों पर बहुत काम करते हैं। आपने मेहर के किरदार के लिए अलग से क्या तैयारी की? जवाब: इम्तियाज खुद इतनी तैयारी करके आते हैं कि कलाकारों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। मेरा किरदार भी सॉफ्ट और हल्का था, इसलिए तैयारी ज्यादा नहीं करनी पड़ी। मैंने सिर्फ समझने की कोशिश की कि इस किरदार का बैकग्राउंड क्या है और उसकी सोच कैसी है। मैं नहीं चाहती थी कि यह किरदार नकारात्मक लगे। मेहर जो भी बोलती है, वह मासूमियत में बोलती है, किसी को चोट पहुंचाने के इरादे से नहीं। मैं हमेशा स्क्रिप्ट मिलने के बाद अपने हिसाब से कैरेक्टर स्केच लिखती हूं और फिर डायरेक्टर से उस पर चर्चा करती हूं। उसके बाद चीजें आसान हो जाती हैं। सवाल: फिल्म पार्टीशन के दौर की कहानी है। उस समय को समझने के लिए आपने क्या किया? जवाब: मेरे नाना-नानी और दादा-दादी दोनों ही बंटवारे के समय भारत आए थे। मेरी नानी कराची से थीं। मैंने उनसे उस दौर की कई कहानियां सुनी हैं। कुछ साल पहले मैंने गूगल मैप पर उन्हें उनका पुराना इलाका दिखाया था। वह भावुक हो गई थीं। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि जिस जगह को छोड़कर आई थीं, उसे कभी फिर देख पाएंगी। मेरे लिए वह खास पल था। सवाल: आपकी नानी उस दौर के बारे में और क्या बताती थीं? जवाब: वह बताती थीं कि उनका परिवार काफी संपन्न था। वहां उनके बड़े घर थे, लेकिन यहां आना पड़ा तो सब कुछ पीछे छोड़ना पड़ा। उन्होंने बताया था कि वे सिर्फ कुछ निजी चीजें ही बचाकर ला पाईं। सोचिए, एक दिन अचानक कोई कह दे कि यह शहर अब आपका नहीं है और आपको सब छोड़कर जाना होगा। यह बहुत दर्दनाक होता होगा। जब मैंने फिल्म देखी तो मुझे बार-बार उनकी बातें याद आईं और महसूस हुआ कि उस दौर से गुजरने वाले लोगों ने कितना कुछ सहा होगा। सवाल: शूटिंग के दौरान सबसे यादगार अनुभव क्या रहा? पंजाब में शूटिंग का माहौल कैसा था? जवाब: हमारे ज्यादातर हिस्से मुंबई के सेट पर शूट हुए और कुछ शूटिंग चंडीगढ़ में हुई। माहौल बहुत अच्छा था। सबसे पहले पंजाब का खाना, सुबह गरमागरम कुलचे और छोले मिलते थे। नवंबर का मौसम था, हल्की ठंड थी, इसलिए शूटिंग और मजेदार रही। मेरे ज्यादातर सीन नसीर साहब, दिलजीत और रजत सर के साथ थे, इसलिए सेट पर परिवार जैसा माहौल महसूस होता था। सवाल: नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मैंने उनसे ज्यादा बातें नहीं कीं क्योंकि उनका किरदार इंटेंस था। जब कोई कलाकार इतने गहरे किरदार में होता है, तो उसे स्पेस देना जरूरी होता है। वह सेट पर अपने में रहते थे, लेकिन उन्हें काम करते देखना सीखने जैसा था। किसी भी कलाकार के लिए उनके साथ स्क्रीन शेयर करना बड़ी बात है। सवाल: दिलजीत दोसांझ आज ग्लोबल स्टार बन चुके हैं। उनके साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: मुझे लगता है कि दिलजीत ग्लोबल स्टार बनने के लिए ही बने हैं। उनका म्यूजिक हर पीढ़ी पसंद करती है। एक कलाकार के तौर पर मुझे उनकी सबसे खास बात उनकी आंखों की सच्चाई लगती है। जब वो परफॉर्म करते हैं तो लगता है कि पूरी ईमानदारी से किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में भी उन्होंने ठहराव और सादगी के साथ काम किया है। सवाल: आपकी जर्नी काफी खूबसूरत रही है। सबसे बड़ी सफलता आप किसे मानती हैं? जवाब: मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता यही है कि मुझे इतने बड़े और बेहतरीन लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। आज कितने लोग कह सकते हैं कि उनकी फिल्म थिएटर में रिलीज हुई, वो भी ऐसे फिल्ममेकर्स और कलाकारों के साथ। मेरे लिए यही सफलता है। बॉक्स ऑफिस कोई तय नहीं कर सकता। हम सिर्फ अपना काम और मेहनत कंट्रोल कर सकते हैं। सवाल: आपने कई बड़े डायरेक्टर्स और दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया है। अब तक की जर्नी में सबसे खूबसूरत बात क्या रही है? जवाब: मेरे लिए सबसे खूबसूरत बात यही है कि मुझे देश के बेहतरीन फिल्ममेकर्स के साथ काम करने का मौका मिला। जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि निखिल आडवाणी, रोहित शेट्टी, राम गोपाल वर्मा, राज मेहता और इम्तियाज अली जैसे निर्देशकों के साथ काम करना बड़ी बात है। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं। सवाल: इतने बड़े नामों के साथ काम करने की बात आई, तो अमिताभ बच्चन के साथ आपका अनुभव कैसा रहा? उनसे क्या सीखने को मिला? जवाब: मैंने उनके साथ एक कैडबरी विज्ञापन और बाद में फिल्म डिपार्टमेंट में काम किया। उनसे मैंने सबसे बड़ी चीज विनम्रता सीखी। मेरी नानी कहा करती थीं कि जिस पेड़ पर जितने ज्यादा फल होते हैं, वह उतना ही झुकता है। अमिताभ बच्चन इसकी सबसे अच्छी मिसाल हैं। मुझे आज भी याद है, कैडबरी विज्ञापन की शूटिंग के दौरान मैं धूप में खड़ी थी। मैं नई थी, लेकिन उन्होंने अपने स्टाफ से कहा कि मुझे कुर्सी और छाता दिया जाए। शायद उनके लिए वह छोटी बात रही होगी, लेकिन मेरे लिए वह बड़ा पल था। इतने बड़े कलाकार का इतना ध्यान रखना मुझे हमेशा याद रहेगा। सवाल: क्या किसी और कलाकार के साथ भी ऐसा कोई अनुभव रहा, जिसने आपको प्रभावित किया हो? जवाब: हां, शाहरुख खान के साथ। एक अवॉर्ड शो में मुझे तुरंत वॉशरूम जाना था और पास में सिर्फ उनकी वैन थी। मैंने पूछा कि क्या मैं इस्तेमाल कर सकती हूं। उन्होंने सहजता से दरवाजा खोला, अंदर ले गए और बाद में बाहर तक छोड़ने आए। इतने बड़े स्टार होने के बाद भी उनमें अहंकार नहीं है। शायद यही वजह है कि लोग उन्हें इतना प्यार करते हैं। सवाल: कोई ऐसा किरदार जो आपके दिल के करीब रहा हो? जवाब: एक फिल्म थी जश्न। भट्ट साहब ने फिल्म प्रोड्यूस की थी। वह बड़ी हिट नहीं हुई, लेकिन उसका किरदार मेरे दिल के करीब था। मुझे उस किरदार से खुद को जोड़ना आसान लगा। इसके अलावा सलाम-ए-इश्क भी मेरे लिए खास रही क्योंकि वह मेरी शुरुआती बड़ी फिल्मों में से थी। सवाल: करियर का सबसे मुश्किल दौर क्या रहा? जवाब: हर कलाकार की जिंदगी में ऐसा समय आता है जब उसे मनचाहा काम नहीं मिलता। वह समय भावनात्मक रूप से मुश्किल होता है। लेकिन वही दौर आपको मजबूत बनाता है। यह आपके ऊपर है कि आप उससे टूटते हैं या मजबूत होकर निकलते हैं। सवाल: आगे किस तरह के किरदार करना चाहती हैं? जवाब: मैं एक मैच्योर लव स्टोरी करना चाहूंगी। साथ ही मुझे लगता है कि मैं कॉमेडी अच्छी कर सकती हूं। पहले अभिनेत्रियों के लिए कॉमिक किरदार ज्यादा लिखे जाते थे, लेकिन अब ऐसे मौके कम हैं। मैं चाहूंगी कि महिलाओं के लिए अच्छी कॉमेडी लिखी जाए।

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जवाब: काफी अच्छे कॉम्प्लिमेंट मिले, लेकिन बार-बार सुनने को मिला कि मेहर का किरदार कहीं न कहीं ‘जब वी मेट’ की गीत जैसा लगता है। गीत भी बेफिक्र थी और बिना सोचे अपनी बात कह देती थी। यह तुलना मेरे लिए बहुत बड़ा कॉम्प्लिमेंट है। सवाल: इम्तियाज अली अपने किरदारों पर बहुत काम करते हैं। आपने मेहर के किरदार के लिए अलग से क्या तैयारी की? जवाब: इम्तियाज खुद इतनी तैयारी करके आते हैं कि कलाकारों को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। मेरा किरदार भी सॉफ्ट और हल्का था, इसलिए तैयारी ज्यादा नहीं करनी पड़ी। मैंने सिर्फ समझने की कोशिश की कि इस किरदार का बैकग्राउंड क्या है और उसकी सोच कैसी है। मैं नहीं चाहती थी कि यह किरदार नकारात्मक लगे। मेहर जो भी बोलती है, वह मासूमियत में बोलती है, किसी को चोट पहुंचाने के इरादे से नहीं। मैं हमेशा स्क्रिप्ट मिलने के बाद अपने हिसाब से कैरेक्टर स्केच लिखती हूं और फिर डायरेक्टर से उस पर चर्चा करती हूं। उसके बाद चीजें आसान हो जाती हैं। सवाल: फिल्म पार्टीशन के दौर की कहानी है। उस समय को समझने के लिए आपने क्या किया? जवाब: मेरे नाना-नानी और दादा-दादी दोनों ही बंटवारे के समय भारत आए थे। मेरी नानी कराची से थीं। मैंने उनसे उस दौर की कई कहानियां सुनी हैं। कुछ साल पहले मैंने गूगल मैप पर उन्हें उनका पुराना इलाका दिखाया था। वह भावुक हो गई थीं। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि जिस जगह को छोड़कर आई थीं, उसे कभी फिर देख पाएंगी। मेरे लिए वह खास पल था। सवाल: आपकी नानी उस दौर के बारे में और क्या बताती थीं? 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जवाब: मुझे लगता है कि दिलजीत ग्लोबल स्टार बनने के लिए ही बने हैं। उनका म्यूजिक हर पीढ़ी पसंद करती है। एक कलाकार के तौर पर मुझे उनकी सबसे खास बात उनकी आंखों की सच्चाई लगती है। जब वो परफॉर्म करते हैं तो लगता है कि पूरी ईमानदारी से किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में भी उन्होंने ठहराव और सादगी के साथ काम किया है। सवाल: आपकी जर्नी काफी खूबसूरत रही है। सबसे बड़ी सफलता आप किसे मानती हैं? जवाब: मेरे लिए सबसे बड़ी सफलता यही है कि मुझे इतने बड़े और बेहतरीन लोगों के साथ काम करने का मौका मिला। आज कितने लोग कह सकते हैं कि उनकी फिल्म थिएटर में रिलीज हुई, वो भी ऐसे फिल्ममेकर्स और कलाकारों के साथ। मेरे लिए यही सफलता है। बॉक्स ऑफिस कोई तय नहीं कर सकता। हम सिर्फ अपना काम और मेहनत कंट्रोल कर सकते हैं। सवाल: आपने कई बड़े डायरेक्टर्स और दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया है। अब तक की जर्नी में सबसे खूबसूरत बात क्या रही है? जवाब: मेरे लिए सबसे खूबसूरत बात यही है कि मुझे देश के बेहतरीन फिल्ममेकर्स के साथ काम करने का मौका मिला। जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो लगता है कि निखिल आडवाणी, रोहित शेट्टी, राम गोपाल वर्मा, राज मेहता और इम्तियाज अली जैसे निर्देशकों के साथ काम करना बड़ी बात है। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं। सवाल: इतने बड़े नामों के साथ काम करने की बात आई, तो अमिताभ बच्चन के साथ आपका अनुभव कैसा रहा? उनसे क्या सीखने को मिला? जवाब: मैंने उनके साथ एक कैडबरी विज्ञापन और बाद में फिल्म डिपार्टमेंट में काम किया। उनसे मैंने सबसे बड़ी चीज विनम्रता सीखी। मेरी नानी कहा करती थीं कि जिस पेड़ पर जितने ज्यादा फल होते हैं, वह उतना ही झुकता है। अमिताभ बच्चन इसकी सबसे अच्छी मिसाल हैं। मुझे आज भी याद है, कैडबरी विज्ञापन की शूटिंग के दौरान मैं धूप में खड़ी थी। मैं नई थी, लेकिन उन्होंने अपने स्टाफ से कहा कि मुझे कुर्सी और छाता दिया जाए। शायद उनके लिए वह छोटी बात रही होगी, लेकिन मेरे लिए वह बड़ा पल था। इतने बड़े कलाकार का इतना ध्यान रखना मुझे हमेशा याद रहेगा। सवाल: क्या किसी और कलाकार के साथ भी ऐसा कोई अनुभव रहा, जिसने आपको प्रभावित किया हो? जवाब: हां, शाहरुख खान के साथ। एक अवॉर्ड शो में मुझे तुरंत वॉशरूम जाना था और पास में सिर्फ उनकी वैन थी। मैंने पूछा कि क्या मैं इस्तेमाल कर सकती हूं। उन्होंने सहजता से दरवाजा खोला, अंदर ले गए और बाद में बाहर तक छोड़ने आए। इतने बड़े स्टार होने के बाद भी उनमें अहंकार नहीं है। शायद यही वजह है कि लोग उन्हें इतना प्यार करते हैं। सवाल: कोई ऐसा किरदार जो आपके दिल के करीब रहा हो? जवाब: एक फिल्म थी जश्न। भट्ट साहब ने फिल्म प्रोड्यूस की थी। वह बड़ी हिट नहीं हुई, लेकिन उसका किरदार मेरे दिल के करीब था। मुझे उस किरदार से खुद को जोड़ना आसान लगा। इसके अलावा सलाम-ए-इश्क भी मेरे लिए खास रही क्योंकि वह मेरी शुरुआती बड़ी फिल्मों में से थी। सवाल: करियर का सबसे मुश्किल दौर क्या रहा? जवाब: हर कलाकार की जिंदगी में ऐसा समय आता है जब उसे मनचाहा काम नहीं मिलता। वह समय भावनात्मक रूप से मुश्किल होता है। लेकिन वही दौर आपको मजबूत बनाता है। यह आपके ऊपर है कि आप उससे टूटते हैं या मजबूत होकर निकलते हैं। सवाल: आगे किस तरह के किरदार करना चाहती हैं? जवाब: मैं एक मैच्योर लव स्टोरी करना चाहूंगी। साथ ही मुझे लगता है कि मैं कॉमेडी अच्छी कर सकती हूं। पहले अभिनेत्रियों के लिए कॉमिक किरदार ज्यादा लिखे जाते थे, लेकिन अब ऐसे मौके कम हैं। मैं चाहूंगी कि महिलाओं के लिए अच्छी कॉमेडी लिखी जाए।

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