फिल्म बंदर का टीजर रिलीज:रेट्रो लुक में दिखे बॉबी देओल, असल घटना पर आधारित, अनुराग कश्यप ने की डायरेक्ट; 5 जून को आएगी

बॉबी देओल की अपकमिंग फिल्म बंदर का टीजर जारी हो चुका है। 1 मिनट 29 सेकंड के टीजर में बॉबी देओल समर नाम के पहचान खो रहे एक्टर के किरदार में नजर आ रहे हैं, जिसकी जिंदगी एक केस से हमेशा के लिए बदल जाती है। कैसा है फिल्म का टीजर टीजर की शुरुआत 70 के दशक के डिस्को अवतार से रिमैजिन रेट्रो स्टाइल सॉन्ग ‘कम ऑन बेबी, दिल किसको देगी’ से होती है। इसके बाद बॉबी देओल के किरदार का परिचय होता है। बॉबी ने समर नाम के एक ऐसे एक्टर का किरदार निभाया है, जो किसी जमाने में स्टार था और अब पहचान बनाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। बदलते दौर में अब समर शादियों में परफॉर्म करता है, जिसके बाद एक-एक कर फिल्म के दूसरें किरदारों का परिचय होता है। सबा आजाद ने फिल्म में बॉबी देओल की डेट का रोल निभाया है। सपना पब्बी उनकी एक्स के रोल में है। टीजर में ट्विस्ट तब आता है जब एक रोज अचानक समर की गिरफ्तारी होती है। टीजर में कुछ जेल सीन और कोर्ट के सीन भी शामिल किए गए हैं। फिल्म की कहानी समर के इर्द-गिर्द है, जो संगीन आरोप लगने के बाद खुद को बेगुनाह साबित करने की मशक्कत करता है। यहां से जो सामने आता है, वो उस कहानी की झलक है जो शुरुआत में दिखने वाली चीजों से कहीं ज्यादा बड़ी और उलझी हुई है। इस फिल्म को देव डी, ब्लैक फ्राइडे, अगली और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में बना चुके अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया है। ये बॉबी और अनुराग की पहली फिल्म है। फिल्म में बॉबी देओल, सपना पब्बी, सबा आजाद के अलावा सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी और रिद्धी सेन जैसे एक्टर्स भी हैं। असल घटना पर आधारित है फिल्म बंदर फिल्म बंदर भारत में हुई एक असल घटना पर आधारित है। फिल्म का लेखन सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने मिलकर किया है, जो पाताल लोक, कोहरा और उड़ता पंजाब जैसी बेहतरीन कहानियों के पीछे की मशहूर जोड़ी है। अनुराग कश्यप के डायरेक्शन और निखिल द्विवेदी की ‘सैफरन मैजिकवर्क्स’ के प्रोडक्शन में बनी यह फिल्म जी स्टूडियोज के सपोर्ट के साथ 5 जून 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
egg embryo eating effects on health: मिड डे मील के अंडे में चूजे का भ्रूण: अगर खा लें तो क्या नुकसान हो सकता है? डॉक्टर ने बता दिया

Last Updated:May 07, 2026, 13:53 IST Mid Day Meal embryo in Egg: झारखंड में गोड्डा के सरकारी स्कूल में मिड डे मील के उबले अंडे में चूजे का भ्रूण मिलने से हंगामा मच गया है. पेरेंट्स ने इसे लेकर अस्पताल में बवाल मचाया और बच्चों की सेहत को होने वाले नुकसान डॉ रमन कुमार ने कहा पकने पर इससे सेहत को नुकसान नहीं होता झारखंड में मिड डे मील के अंडे में निकला भ्रूण, अगर कोई खा ले तो क्या नुकसान हो सकते हैं.. सांकेतिक तस्वीर.. Mid Day Meal Chick embryo: झारखंड के गोड्डा जिले के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को बांटे गए मिड डे मील में चूजे का भ्रूण निकलने से हंगामा मच गया. दर्जनों पेरेंट्स स्कूल में आकर प्रदर्शन करने लगे और बच्चों को खराब खाना परोसने का आरोप लगाया. दरअसल बच्चों को खाने में उबला अंडा दिया गया था. जब एक बच्चे ने अंडा फोड़ा तो उसमें चूजे का हिस्सा जैसा दिखाई दिया.पेरेंट्स का कहना था कि सिर्फ एक ही नहीं बल्कि बच्चों को दिए गए कई अंडों में भ्रूण बन रहा था. मिड डे मील की गुणवत्ता पर सवाल पहली बार नहीं उठा है, लेकिन अंडे में भ्रूण निकलने का यह पहला और अजीबोगरीब मामला सामने आया है. पेरेंट्स इस भ्रूण वाले अंडे से बच्चों की सेहत को खतरा होने का आरोप लगा रहे हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई चूजे का भ्रूण अगर बच्चे खा लेते तो उनकी सेहत को नुकसान हो सकता था? क्या इससे कोई गंभीर बीमारी हो सकती थी? यह कितना खतरनाक है? इसे लेकर आइए फैमिली फिजिशियन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. रमन कुमार से जानते हैं… डॉ. रमन कुमार ने बताया कि आमतौर पर जो अंड़े खाए जाते हैं, उनमें जीव पैदा करने की क्षमता नहीं होती है, लेकिन यह अंडा कैसे फर्टाइल हुआ और इसमें कैसे भ्रूण पनपा, या यह अंडा मिड डे मील में कैसे आया यह तो प्रशासनिक जांच का विषय है, लेकिन अगर मेडिकल नजरिए से देखें तो अगर यह भ्रूण पक गया था और इसे बच्चे खा लेते तो इससे हेल्थ को कोई नुकसान नहीं होता. डॉ. रमन कहते हैं कि यह अपने आप में पहला मामला है लेकिन जो बच्चे घरों में अंडा और चिकन खाते हैं, अगर वे इसे भी खाते तो स्वास्थ्य पर तो कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन इसे न खाने या इसका विरोध करने के अन्य पहलू हो सकते हैं. वहीं इस भ्रूण से संक्रमण होने के सवाल पर डॉक्टर कहते हैं कि मिड डे मील हो या कहीं और मिलने वाला भोजन हो, अगर उसे बनाने के दौरान सही नियमों का पालन नहीं किया गया है और साफ-सफाई व अन्य चीजों का ध्यान नहीं रखा गया है, पानी ठीक इस्तेमाल नहीं किया गया है तो उससे भी संक्रमण फैल सकता है. जो लोग चिकन नहीं सिर्फ अंडा खाते हैं… कुछ लोग सिर्फ अंडा खाते हैं लेकिन मीट या चिकन नहीं खाते हैं तो ऐसी स्थिति में अगर किसी के उबले अंडे में भ्रूण निकलता है तो वह बर्दाश्त करना मुश्किल होता है. ये भी एक वजह हो सकती है कि पेरेंट्स विरोध कर रहे हों. या हो सकता है कि उस अंडे की क्ववालिटी ही खराब हो. विदेशों में खाते हैं बलूत और भ्रूण बता दें कि चीन, इंडोनेशिया और कोरियाई देशों में लोग मुर्गी या बत्तख के अंडों में पनपे भ्रूण को खाते हैं. भ्रूण पनप चुके अंडों को बलूत बोला जाता है. वहां लोग अंडों को बिना छीले भी खा जाते हैं. हालांकि भारत में ऐसा नहीं पाया जाता है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
टाटा संस की लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद:नोएल टाटा IPO के खिलाफ, दो ट्रस्टी लिस्टिंग के पक्ष में; 8 मई को हो सकता है फैसला

टाटा ग्रुप की पेरेंट कंपनी ‘टाटा संस’ को शेयर बाजार में लिस्ट करने के मुद्दे पर ग्रुप के टॉप मैनेजमेंट में मतभेद गहरे हो गए हैं। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस लिस्टिंग के खिलाफ हैं, जबकि ट्रस्ट के दो बड़े सदस्य आरबीआई के नियमों का हवाला देते हुए आईपीओ लाने के पक्ष में हैं। इस पूरे विवाद और इसके असर को समझने के लिए पढ़ें यह QA: 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 4. 8 मई की बोर्ड मीटिंग में क्या होने की उम्मीद है? 8 मई को टाटा ट्रस्ट्स की एक अहम मीटिंग होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह इस मीटिंग में आधिकारिक तौर पर लिस्टिंग की तैयारी शुरू करने का प्रस्ताव रख सकते हैं। इसके अलावा, टाटा संस के बोर्ड में नए ट्रस्टी नॉमिनी चुनने पर भी चर्चा होगी। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। 8. अगर टाटा संस का IPO आता है, तो सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा? इसका सबसे बड़ा फायदा ‘शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप’ को होगा। मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस की 18.4% हिस्सेदारी है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप भारी कर्ज में है और उन्होंने अपनी यह हिस्सेदारी गिरवी रखी है। लिस्टिंग होने से उनके हिस्से की वैल्यू अनलॉक होगी और वे अपना कर्ज चुका पाएंगे। 9. शापूर मिस्त्री परिवार की नेटवर्थ पर इसका क्या असर पड़ेगा? ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, SP ग्रूप को चलाने वाले शापूर मिस्त्री की नेटवर्थ करीब 32 अरब डॉलर है। खास बात यह है कि उनकी इस दौलत का 75% हिस्सा टाटा संस की हिस्सेदारी में फंसा हुआ है, जिसे वे अभी बेच नहीं सकते। लिस्टिंग उनके लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। 10. आगे क्या होने वाला है? अगले दो महीनों में तस्वीर साफ हो जाएगी। टाटा संस फिलहाल रेगुलेटर से अनौपचारिक सलाह ले रहा है और समय सीमा बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। अगर 8 मई की मीटिंग में ट्रस्टी हावी रहते हैं, तो भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा IPO देखने को मिल सकता है। नॉलेज पार्ट:
टाटा संस की लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स में मतभेद:नोएल टाटा IPO के खिलाफ, दो ट्रस्टी लिस्टिंग के पक्ष में; 8 मई को हो सकता है फैसला

टाटा ग्रुप की पेरेंट कंपनी ‘टाटा संस’ को शेयर बाजार में लिस्ट करने के मुद्दे पर ग्रुप के टॉप मैनेजमेंट में मतभेद गहरे हो गए हैं। टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा इस लिस्टिंग के खिलाफ हैं, जबकि ट्रस्ट के दो बड़े सदस्य आरबीआई के नियमों का हवाला देते हुए आईपीओ लाने के पक्ष में हैं। इस पूरे विवाद और इसके असर को समझने के लिए पढ़ें यह QA: 1. टाटा ग्रुप में विवाद की मुख्य वजह क्या है? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। विवाद की जड़ ‘टाटा संस’ का IPO है। टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह चाहते हैं कि टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए। उनका मानना है कि इससे कंपनी में पारदर्शिता आएगी। वहीं, नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को ‘क्लोजली हेल्ड’ यानी निजी कंपनी ही बनाए रखना चाहते हैं। 2. लिस्टिंग को लेकर RBI का नया नियम क्या कहता है? RBI के नए नियमों के मुताबिक, 1 जुलाई 2026 से टाटा संस को एक ‘सिस्टमैटिकली इम्पोर्टेन्ट’ शैडो बैंक (NBFC) माना जाएगा। नियम यह है कि अगर किसी शैडो बैंक की एसेट साइज 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो उसे शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। टाटा संस इस दायरे में आती है। 3. क्या टाटा ग्रुप ने पहले भी लिस्टिंग से बचने की कोशिश की है? हां, यह पहली बार नहीं है। 2022 में भी RBI ने टाटा संस को ‘अपर-लेयर’ NBFC की श्रेणी में रखा था और तीन साल का समय दिया था। तब ग्रुप ने अपना कर्ज रीस्ट्रक्चर करके और खुद को ‘नॉन-सिस्टमैटिक’ बताकर लिस्टिंग टाल दी थी। लेकिन अब RBI ने वे रास्ते बंद कर दिए हैं। 4. 8 मई की बोर्ड मीटिंग में क्या होने की उम्मीद है? 8 मई को टाटा ट्रस्ट्स की एक अहम मीटिंग होने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह इस मीटिंग में आधिकारिक तौर पर लिस्टिंग की तैयारी शुरू करने का प्रस्ताव रख सकते हैं। इसके अलावा, टाटा संस के बोर्ड में नए ट्रस्टी नॉमिनी चुनने पर भी चर्चा होगी। 5. नोएल टाटा लिस्टिंग का विरोध क्यों कर रहे हैं? टाटा ट्रस्ट के पास टाटा संस की दो-तिहाई हिस्सेदारी है। नोएल टाटा को डर है कि लिस्टिंग होने से ग्रुप की कंपनियों पर टाटा ट्रस्ट्स का कंट्रोल कम हो सकता है। वह चाहते हैं कि टाटा संस पर ट्रस्ट की पकड़ पहले जैसी ही मजबूत बनी रहे। फरवरी में ऐसी खबरें भी आई थीं कि उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन से इस बात की गारंटी मांगी थी कि कंपनी लिस्ट नहीं होगी। 6. चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस पर क्या स्टैंड है? रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन से लिस्टिंग न होने की गारंटी मांगी, तो उन्होंने ऐसा वादा करने से इनकार कर दिया। उनका तर्क था कि यह रेगुलेटरी मामला है। इसी वजह से चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के री-अपॉइंटमेंट पर वोटिंग भी टल गई थी। 7. क्या RBI टाटा ग्रुप को कोई खास छूट दे सकता है? इसकी संभावना बहुत कम है। RBI ने अनौपचारिक रूप से संकेत दिए हैं कि वह टाटा ग्रुप के लिए नियमों में कोई अपवाद नहीं बनाएगा। रेगुलेटर का मानना है कि अगर टाटा को छूट दी गई, तो दूसरी कंपनियां भी ऐसी ही मांग करेंगी, जिससे बैंकिंग नियम कमजोर पड़ेंगे। 8. अगर टाटा संस का IPO आता है, तो सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा? इसका सबसे बड़ा फायदा ‘शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप’ को होगा। मिस्त्री परिवार के पास टाटा संस की 18.4% हिस्सेदारी है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप भारी कर्ज में है और उन्होंने अपनी यह हिस्सेदारी गिरवी रखी है। लिस्टिंग होने से उनके हिस्से की वैल्यू अनलॉक होगी और वे अपना कर्ज चुका पाएंगे। 9. शापूर मिस्त्री परिवार की नेटवर्थ पर इसका क्या असर पड़ेगा? ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, SP ग्रूप को चलाने वाले शापूर मिस्त्री की नेटवर्थ करीब 32 अरब डॉलर है। खास बात यह है कि उनकी इस दौलत का 75% हिस्सा टाटा संस की हिस्सेदारी में फंसा हुआ है, जिसे वे अभी बेच नहीं सकते। लिस्टिंग उनके लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगी। 10. आगे क्या होने वाला है? अगले दो महीनों में तस्वीर साफ हो जाएगी। टाटा संस फिलहाल रेगुलेटर से अनौपचारिक सलाह ले रहा है और समय सीमा बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। अगर 8 मई की मीटिंग में ट्रस्टी हावी रहते हैं, तो भारत के कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा IPO देखने को मिल सकता है। नॉलेज पार्ट:
लुधियाना में मलाइका अरोड़ा का ग्लैमरस अंदाज:पार्टी में बिखेरे जलवे, 'छैया-छैया' और 'नाच पंजाबन' पर थिरके मेहमान; सेल्फी के लिए मची होड़

लुधियाना के पॉश इलाके फिरोजपुर रोड स्थित महाराजा मेंशन में बुधवार की रात बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा के नाम रही। मौका था शहर के एक नामी टेक्सटाइल कारोबारी की 25वीं सिल्वर जुबली एनिवर्सरी का, जहां मलाइका अरोड़ा ने अपनी कातिलाना अदाओं और डांस मूव्स से समां बांध दिया। मलाइका अरोड़ा को अपने बीच पाकर मेहमान उनके साथ सेल्फी लेने के लिए बेकाबू हो रहे थे। बाउंसरों ने बड़ी मुश्किल से भीड़ को संभाला। इसके बाद लोगों ने मलाइका के साथ डांस किया। मलाइका ने ‘चल छैया-छैया’, ‘अनारकली डिस्को चली’ और ‘मुन्नी बदनाम हुई’ (संभावित सही गाना) जैसे गानों पर डांस कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। पार्टी में मलाइका के डांस के PHOTOS… 500 मेहमानों के बीच आकर्षण का केंद्र बनीं मलाइका इस ग्रैंड सेलिब्रेशन में शहर की करीब 500 नामी हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत डीजे पार्टी से हुई, जिसके बाद मलाइका अरोड़ा ने परफॉरमेंस दी और सागर भाटिया ने अपनी गायकी से माहौल बनाया। जैसे ही मलाइका ने स्टेज पर एंट्री ली, पूरा हॉल तालियों और शोर से गूंज उठा। मलाइका ने अपने सिग्नेचर स्टेप्स और मनमोहक स्टेज प्रेजेंस से हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया। सेल्फी लेने के लिए बेताब दिखे फैंस परफॉरमेंस के दौरान वहां मौजूद मेहमान और बच्चे उनके साथ सेल्फी लेने के लिए बेताब दिखे। हर कोई इस पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करना चाहता था। हालांकि, सुरक्षा कारणों और व्यस्त शेड्यूल की वजह से मलाइका अरोड़ा ने केवल अपनी तय परफॉरमेंस दी और उसके तुरंत बाद वहां से रवाना हो गईं। वह फंक्शन में करीब 1 घंटे तक रुकी थीं।
पहले गेंदबाजी करने वाली टीम का साथ देगा मौसम:इकाना में आज RCB vs LSG; दिन में छिटपुट बारिश, क्या हो पाएगा मैच?

लखनऊ में आज तड़के ही मौसम खराब हो गया। आंधी के साथ करीब डेढ़ घंटे तक झमाझम बारिश हुई। इसका असर शाम को इकाना में होने वाले बेंगलुरु बनाम लखनऊ मैच पर भी दिखेगा। मौसम विभाग के अनुसार, शाम को मौसम साफ रहेगा लेकिन दिनभर बादलों की आवाजाही, गरज-चमक के साथ सतही हवा चलती रहेगी। ऐसे मौसम का इकाना के ग्राउंड पर असर बना रहेगा। हल्की नमी शुरुआती ओवर्स में तेज गेंदबाजों के लिए मददगार होगी। यानी टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना चाहेगी। मैच रोमांचक हो सकता है क्योंकि लगातार 6 मैच हार चुकी LSG जीतकर अपनी साख बचाना चाहेगी। वहीं, RCB भी जीतकर प्लेऑफ की रेस में बनी रहना चाहेगी। मौसम कितना प्रभावित करेगा, स्टेडियम में व्यवस्था… तेज बारिश का दौर खत्म, शाम को मौसम साफ रहेगा लखनऊ में तड़के आंधी के साथ हुई बारिश ने क्रिकेट फैंस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि शाम को मौसम साफ रहेगा, जिससे मैच में बाधा नहीं आएगी। वैज्ञानिक मोहम्मद दानिश ने बताया कि फिलहाल तेज बारिश का दौर खत्म हो गया है। हालांकि, दोपहर 1 बजे तक रह-रहकर बारिश की संभावना है। दोपहर बाद से शाम और रात के समय बारिश का प्रभाव नहीं रहेगा। इकाना स्टेडियम के आसपास भी मौसम साफ रहेगा। खेल के दौरान तापमान 23 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा। इकाना में जरूरी उपाय, ड्रेनेज सिस्टम शानदार इकाना स्टेडियम में देश के सबसे उन्नत और तेज़ हेयरिंगबोन ड्रेनेज सिस्टम का उपयोग किया गया है। यह प्रणाली पूरे मैदान के नीचे पाइपों का जाल बिछाकर बारिश के पानी को तुरंत बाहर निकालती है, जिससे भारी बारिश के बाद भी मैच जल्दी शुरू हो सकता है। इस सुविधा के चलते भारी बारिश के बाद भी स्टेडियम में मैच आधे घंटे में शुरू हो सकता है। फिलहाल आज स्टेडियम में मिक्स विकेट (काली लाल) मिट्टी के पिच को पूरी तरह से ढका गया है। ताकि पिच को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जा सके। इस बीच मैच से एक दिन पहले दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने मैदान पर जमकर पसीना बहाया था। इसमें विराट कोहली और ऋषभ पंत प्रैक्टिस के दौरान नजर नहीं आए थे। इकाना में बेंगलुरु को नहीं हरा सकी है लखनऊ अभी तक दोनों टीमों के बीच IPL में 7 मुकाबले हुए हैं। लखनऊ सुपर जायंट्स ने 2 और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 5 मैच जीते हैं। इस सीजन में दोनों के बीच यह दूसरा मुकाबला है। बेंगलुरु में खेले गए पहले मैच में RCB ने लखनऊ को 5 विकेट से हराया था। पिछले सीजन में दोनों के बीच एक मैच हुआ था, जिसे बेंगलुरु ने जीता था। दोनों टीमें इकाना में दो बार भिड़ी हैं और दोनों बार बेंगलुरु जीती है। दूसरे नंबर पर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, लेकिन 4 टीमें बराबरी पर RCB 12 अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल में दूसरे स्थान पर है। हालांकि, तीन अन्य टीमों के भी 12-12 अंक हैं। गुजरात टाइटंस से मिली हार के बाद बेंगलुरु का नेट रन रेट प्रभावित हुआ है, जिसे टीम सुधारना चाहेगी। दूसरी ओर, लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए टूर्नामेंट लगभग खत्म हो चुका है, लेकिन ऋषभपंत की कप्तानी वाली टीम बेंगलुरु का खेल बिगाड़ सकती है। पिछले 6 मैच से नहीं जीती लखनऊ लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए यह सीजन निराशाजनक रहा है। मिचेल मार्श, एडन मार्करम और निकोलस पूरन लगातार संघर्ष कर रहे हैं। कप्तान ऋषभपंत की फॉर्म पर भी सवाल हैं। बैटिंग ऑर्डर में लगातार बदलाव की रणनीति टीम पर भारी पड़ी है। अब उनका सामना भुवनेश्वर कुमार और जोश हेजलवुड जैसे अनुभवी गेंदबाजों से होगा, जिन्होंने दिल्ली कैपिटल्स को 75 रन पर समेट दिया था। लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए गेंदबाजी में प्रिंस यादव (13 विकेट) और मोहसिन खान (10 विकेट) ही सफल रहे हैं। मोहम्मद शमी की खराब फॉर्म और डेथ ओवर्स में रन रोकने में नाकामी टीम की सबसे बड़ी कमजोरी रही है। विराट कोहली फॉर्म में, लेकिन सॉल्ट चोटिल RCB की बल्लेबाजी इस सीजन में आक्रामक रही है। विराट कोहली 379 रन के साथ टीम के टॉप रन स्कोरर हैं। पिछले मैच में टीम की बल्लेबाजी बिखर गई थी। स्कोर 79/2 से 96/6 हो गया और पूरी टीम 155 रन पर सिमट गई। टीम के लिए ओपनर फिल सॉल्ट की उंगली की चोट बड़ा झटका है। उनकी गैरमौजूदगी में जैकब बेथेल पर विराट कोहली के साथ तेज शुरुआत दिलाने की जिम्मेदारी होगी। कप्तान रजत पाटीदार और देवदत्त पडिक्कल से भी मध्यक्रम में बड़े स्कोर की उम्मीद है। वहीं, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के पास अनुभवी तेज गेंदबाजी आक्रमण है। भुवनेश्वर कुमार नई गेंद से विकेट निकाल रहे हैं, जबकि जोश हेजलवुड का सटीक स्पेल बल्लेबाजों को बांधे रखता है। स्पिन में क्रुणाल पंड्या 9 विकेट लेकर प्रभावशाली रहे हैं। इकाना में अब तक 26 मैच खेले गए लखनऊ के इकाना स्टेडियम की पिच पर स्पिनर्स को मदद मिलने की उम्मीद है। यहां अब तक कुल 26 IPL मैच खेले गए। 10 मैच में पहले बैटिंग और 14 में चेज करने वाली टीमों को जीत मिली। एक मैच बेनतीजा भी रहा। जबकि एक मैच का फैसला सुपर ओवर में हुआ है। यहां IPL का सबसे बड़ा स्कोर कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के नाम है, जिन्होंने 2024 में लखनऊ के खिलाफ 235/6 रन बनाए थे। वहीं, सबसे छोटा स्कोर लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के नाम दर्ज है, जब वे 2023 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाफ महज 108 रन पर सिमट गए थे। दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग-XI रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु: रजत पाटीदार (कप्तान), विराट कोहली, देवदत्त पडिक्कल, जैकब बेथेल, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), टिम डेविड, क्रुणाल पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, जोश हेजलवुड, सुयश शर्मा, रोमारियो शेफर्ड। लखनऊ सुपर जाइंट्स: ऋषभ पंत (कप्तान और विकेटकीपर), निकोलस पूरन, मिचेल मार्श, एडन मार्करम, आयुष बडोनी, मोहम्मद शमी, मोहसिन खान, प्रिंस यादव, आवेश खान, शाहबाज अहमद, अब्दुल समद। ——————– इसे भी पढ़िए… इकाना में विराट की 15 फीट ऊंची तस्वीर लगी : बिहार से पोस्टर लेकर पहुंचे फैंस; बोले- कोहली राजा है, एग्जाम की तैयारी छोड़ देखने आए लखनऊ के इकाना स्टेडियम में 7 मई को LSG और RCB के बीच IPL का मैच खेला जाएगा। मैच को लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं। सबसे
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले भारत दौरे पर आएगी ऑस्ट्रेलिया-A टीम:सितंबर-अक्टूबर में पुडुचेरी में होंगे 5 मैच; महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी

अगले साल जनवरी में होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की तैयारियों के लिए ऑस्ट्रेलिया की ‘A’ टीम भारत का दौरा करेगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बुधवार को शेड्यूल जारी किया, जिसके मुताबिक ऑस्ट्रेलिया-A की टीम सितंबर और अक्टूबर में भारत के खिलाफ दो 4-दिवसीय मैच और तीन 50-ओवर के मैच खेलेगी। ये सभी मुकाबले पुडुचेरी में आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया की महिला ‘A’ टीम और पुरुषों की अंडर-19 टीम भी अलग-अलग सीरीज के लिए भारत आएगी। टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के पास खुद को साबित करने का मौका अगले साल 21 जनवरी से नागपुर में शुरू होने वाली 5 टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले यह दौरा ऑस्ट्रेलिया के लिए काफी अहम है। पिछले साल भी ऑस्ट्रेलिया-A ने भारत का दौरा किया था, जहां सैम कोंस्टास, नाथन मैकस्वीनी और टॉड मर्फी जैसे खिलाड़ियों को भारतीय परिस्थितियों में खेलने का मौका मिला था। कोंस्टास ने पिछले दौरे के पहले मैच में शतक लगाया था, वहीं मैकस्वीनी ने 74 और नाबाद 85 रनों की पारियां खेली थीं। इस बार भी कई युवा खिलाड़ी मुख्य टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए यहां अपना दावा पेश करेंगे। पुडुचेरी में होंगे मेंस टीम के सभी मुकाबले ऑस्ट्रेलिया-A की मेंस टीम अपने अभियान की शुरुआत 22 सितंबर से पुडुचेरी में करेगी। पहला 4-दिवसीय मैच 22 से 25 सितंबर तक चलेगा, जबकि दूसरा मुकाबला 29 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच होगा। इसके बाद 6, 9 और 11 अक्टूबर को तीन वनडे मैच (50-ओवर) खेले जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के सेलेक्टर्स की नजरें विशेष रूप से स्पिनरों और उन बल्लेबाजों पर होंगी जो भारतीय पिचों पर अच्छा खेल दिखा सकें। महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी सीरीज BCCI ने सिर्फ मेंस टीम ही नहीं, बल्कि महिला ‘A’ और अंडर-19 टीमों के दौरे की भी पुष्टि की है। ऑस्ट्रेलिया ए महिला टीम 2018 के बाद भारत आएगी महिला टीम: ऑस्ट्रेलिया-A की महिला टीम 2018 के बाद पहली बार भारत में मल्टी-फॉर्मेट सीरीज खेलेगी। वे मोहाली में 2 टी20 और धर्मशाला में तीन वनडे और एक 4-दिवसीय मैच खेलेंगी। अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में खेलेंगे मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन भारत की अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलेगी। इसमें भारत के 15 साल के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी पर सबकी नजरें होंगी, जिन्होंने 13 साल की उम्र में चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 62 गेंदों में शतक जड़ा था। एक ही समय पर साउथ अफ्रीका में होगी मुख्य टीम दिलचस्प बात यह है कि जब ऑस्ट्रेलिया-A की टीम भारत में होगी, उसी समय ऑस्ट्रेलिया की मुख्य टेस्ट टीम साउथ अफ्रीका के दौरे पर रहेगी। साउथ अफ्रीका में पहला टेस्ट 9 अक्टूबर को शुरू होना है। ऐसे में कुछ टेस्ट स्पेशलिस्ट खिलाड़ी भारत में पहला 4-दिवसीय मैच खेलकर साउथ अफ्रीका रवाना हो सकते हैं, लेकिन दूसरे मैच में उनका खेलना मुश्किल लग रहा है
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले भारत दौरे पर आएगी ऑस्ट्रेलिया-A टीम:सितंबर-अक्टूबर में पुडुचेरी में होंगे 5 मैच; महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी

अगले साल जनवरी में होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की तैयारियों के लिए ऑस्ट्रेलिया की ‘A’ टीम भारत का दौरा करेगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बुधवार को शेड्यूल जारी किया, जिसके मुताबिक ऑस्ट्रेलिया-A की टीम सितंबर और अक्टूबर में भारत के खिलाफ दो 4-दिवसीय मैच और तीन 50-ओवर के मैच खेलेगी। ये सभी मुकाबले पुडुचेरी में आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया की महिला ‘A’ टीम और पुरुषों की अंडर-19 टीम भी अलग-अलग सीरीज के लिए भारत आएगी। टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के पास खुद को साबित करने का मौका अगले साल 21 जनवरी से नागपुर में शुरू होने वाली 5 टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले यह दौरा ऑस्ट्रेलिया के लिए काफी अहम है। पिछले साल भी ऑस्ट्रेलिया-A ने भारत का दौरा किया था, जहां सैम कोंस्टास, नाथन मैकस्वीनी और टॉड मर्फी जैसे खिलाड़ियों को भारतीय परिस्थितियों में खेलने का मौका मिला था। कोंस्टास ने पिछले दौरे के पहले मैच में शतक लगाया था, वहीं मैकस्वीनी ने 74 और नाबाद 85 रनों की पारियां खेली थीं। इस बार भी कई युवा खिलाड़ी मुख्य टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए यहां अपना दावा पेश करेंगे। पुडुचेरी में होंगे मेंस टीम के सभी मुकाबले ऑस्ट्रेलिया-A की मेंस टीम अपने अभियान की शुरुआत 22 सितंबर से पुडुचेरी में करेगी। पहला 4-दिवसीय मैच 22 से 25 सितंबर तक चलेगा, जबकि दूसरा मुकाबला 29 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच होगा। इसके बाद 6, 9 और 11 अक्टूबर को तीन वनडे मैच (50-ओवर) खेले जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के सेलेक्टर्स की नजरें विशेष रूप से स्पिनरों और उन बल्लेबाजों पर होंगी जो भारतीय पिचों पर अच्छा खेल दिखा सकें। महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी सीरीज BCCI ने सिर्फ मेंस टीम ही नहीं, बल्कि महिला ‘A’ और अंडर-19 टीमों के दौरे की भी पुष्टि की है। ऑस्ट्रेलिया ए महिला टीम 2018 के बाद भारत आएगी महिला टीम: ऑस्ट्रेलिया-A की महिला टीम 2018 के बाद पहली बार भारत में मल्टी-फॉर्मेट सीरीज खेलेगी। वे मोहाली में 2 टी20 और धर्मशाला में तीन वनडे और एक 4-दिवसीय मैच खेलेंगी। अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में खेलेंगे मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन भारत की अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलेगी। इसमें भारत के 15 साल के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी पर सबकी नजरें होंगी, जिन्होंने 13 साल की उम्र में चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 62 गेंदों में शतक जड़ा था। एक ही समय पर साउथ अफ्रीका में होगी मुख्य टीम दिलचस्प बात यह है कि जब ऑस्ट्रेलिया-A की टीम भारत में होगी, उसी समय ऑस्ट्रेलिया की मुख्य टेस्ट टीम साउथ अफ्रीका के दौरे पर रहेगी। साउथ अफ्रीका में पहला टेस्ट 9 अक्टूबर को शुरू होना है। ऐसे में कुछ टेस्ट स्पेशलिस्ट खिलाड़ी भारत में पहला 4-दिवसीय मैच खेलकर साउथ अफ्रीका रवाना हो सकते हैं, लेकिन दूसरे मैच में उनका खेलना मुश्किल लग रहा है
कनाडा को छोड़ अलग देश बन सकता है अल्बर्टा:अक्टूबर में वोटिंग संभव, अलगाववादियों ने 3 लाख हस्ताक्षर जुटाए

कनाडा के पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा को अलग देश बनने की मांग और ज्यादा तेज हो गई है। अलगाववादियों ने बुधवार को दावा किया है कि उन्होंने इतना समर्थन जुटा लिया है कि अब स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराया जा सकता है। अलगाववादी नेताओं के मुताबिक, उन्होंने करीब 3 लाख हस्ताक्षर चुनाव अधिकारियों को सौंपे हैं, जबकि इसके लिए 1.78 लाख दस्तखत की जरूरत थी। आंदोलन के नेता मिच सिलवेस्ट्रे ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि अब यह लड़ाई अगले चरण में पहुंच गई है। हालांकि इतना समर्थन जुटा लेने का मतलब यह नहीं है कि रेफरेंडम पक्का हो गया है। चुनाव आयोग को पहले इन हस्ताक्षरों की जांच करनी होगी। इस प्रक्रिया पर फिलहाल अदालत के आदेश की वजह से रोक भी लगी हुई है। अगर वोटिंग अलबर्टा के पक्ष में गई तो यह प्रांत कनाडा को छोड़ अलग देश बन सकता है। अल जजीरा के मुताबिक, अगर सभी कानूनी अड़चनें दूर हो जाती हैं, तो प्रांत में 19 अक्टूबर को प्रस्तावित बड़े जनमत संग्रह के साथ अलगाव पर भी वोटिंग कराई जा सकती है। उसी दिन संविधान और इमिग्रेशन जैसे दूसरे मुद्दों पर भी मतदान की योजना है। सर्वे में 30% लोग ही अलग देश के पक्ष में अगर यह प्रस्ताव वोटिंग तक पहुंचता है, तो लोगों से सीधा सवाल पूछा जाएगा कि क्या अल्बर्टा कनाडा से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बनना चाहिए। लेकिन सर्वे बताते हैं कि अभी सिर्फ करीब 30 प्रतिशत लोग ही इसके समर्थन में हैं, यानी जनमत संग्रह पास होना भी आसान नहीं है। हालांकि अलगाववादियों का मानना है कि यह आंकड़ा वोटिंग के दौरान बढ़ने वाला है। अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने कहा है कि अगर जरूरी हस्ताक्षर पूरे होते हैं तो वह वोटिंग आगे बढ़ाएंगी, लेकिन वह खुद कनाडा से अलग होने के पक्ष में नहीं हैं। इस अलगाववादी आंदोलन की जड़ें काफी पुरानी हैं। अल्बर्टा, जहां करीब 50 लाख लोग रहते हैं, लंबे समय से खुद को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग मानता है। यहां के लोग मानते हैं कि उनकी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और राजनीति अलग है, लेकिन फैसले ओटावा में बैठकर लिए जाते हैं। कनाडा से अलग क्यों होना चाहता है अल्बर्टा कनाडा के अल्बर्टा में अलग देश बनने की मांग अचानक नहीं उठी है। इसके पीछे कई सालों से चल रही नाराजगी और अलग पहचान की भावना काम कर रही है। सबसे बड़ा कारण आर्थिक है। अल्बर्टा तेल और गैस से भरपूर राज्य है। यहां कनाडा के कुल तेल उत्पादन का लगभग 84% हिस्सा निकलता है। यहां के लोगों को लगता है कि वे ज्यादा कमाते हैं, लेकिन फायदा बाकी कनाडा को ज्यादा मिलता है। उन्हें शिकायत है कि टैक्स का पैसा ओटावा जाकर खर्च होता है, जबकि फैसले लेते समय उनकी आवाज कम सुनी जाती है। दूसरा बड़ा मुद्दा केंद्र सरकार से टकराव है। ओटावा में बैठी सरकार के फैसलों को लेकर अल्बर्टा में नाराजगी रहती है। खासकर पर्यावरण और जलवायु से जुड़े नियमों को लेकर। यहां के लोग मानते हैं कि ये नियम उनके तेल और गैस उद्योग को नुकसान पहुंचाते हैं और बिना समझे बनाए जाते हैं। तीसरा कारण पहचान और राजनीति है। अल्बर्टा को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग माना जाता है। यहां की राजनीति ज्यादा कंजर्वेटिव (रूढ़िवादी) है, जबकि केंद्र में लंबे समय से लिबरल विचारधारा हावी रही है। इसके अलावा यहां यह भी भावना है कि केंद्र सरकार उनके संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण रखती है। पाइपलाइन, ऊर्जा परियोजनाएं और निर्यात जैसे मुद्दों पर कई बार फैसले अटकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ता है। ट्रम्प सरकार पर अलगाववादियों को बढ़ावा देने का आरोप इसी बीच ट्रम्प सरकार पर अलग देश की मांग कर रहे लोगों को बढ़ावा देने का आरोप है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका के अधिकारी अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से मिलते हैं और उनकी मदद करते हैं। इन खबरों से कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी नाराज हो गए थे। उन्होंने इसी साल फरवरी में राष्ट्रपति ट्रम्प को फोन कर कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करने को कहा था। कार्नी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी सरकार कनाडा के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगी। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प की सत्ता में वापसी को अलगाववादी अल्बर्टा को अलग करने के लिए सही समय मान रहे हैं। कुछ अलगाववादी अल्बर्टा को स्वतंत्र देश बनाने की बजाय अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कर रहे हैं। फरवरी में कैलगरी और एडमॉन्टन के बीच हाईवे पर एक बिलबोर्ड भी लगा, जिसमें अल्बर्टा को USA में मिलाने की अपील की गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बैसेंट ने भी हाल में कहा था कि अल्बर्टा अमेरिका का नेचुरल पार्टनर है और वहां के लोग बहुत स्वतंत्र सोच वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि अल्बर्टा के पास प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है और अमेरिका एक स्वतंत्र अल्बर्टा के साथ काम कर सकता है। क्यूबेक ने दो बार कनाडा से अलग होने की कोशिश की कनाडा में क्यूबेक का अलगाववाद अल्बर्टा से ज्यादा पुराना है। यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पहचान से जुड़ा मुद्दा है। क्यूबेक की सबसे बड़ी खासियत उसकी फ्रेंच भाषा और अलग संस्कृति है। यहां के लोग खुद को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग मानते हैं। उनका मानना रहा है कि उनकी भाषा और पहचान को बचाने के लिए ज्यादा स्वायत्तता या अलग देश बनना जरूरी है। यही वजह है कि क्यूबेक में दो बार जनमत संग्रह भी हो चुका है। पहला 1980 में हुआ, जिसमें लोगों ने अलग होने के खिलाफ वोट दिया। दूसरा 1995 में हुआ और वह बहुत ही करीबी मुकाबला था। उस समय करीब 50.6 प्रतिशत लोगों ने कनाडा के साथ रहने के पक्ष में वोट दिया, जबकि 49.4 प्रतिशत लोग अलग होना चाहते थे। यानी क्यूबेक लगभग अलग होने ही वाला था। कनाडा में अलग होना मुश्किल हुआ इस नतीजे के बाद कनाडा सरकार ने साफ कर दिया कि अब अलग होने की राह आसान नहीं रहने वाली। 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया। कहा गया कि कोई भी प्रांत अपने दम पर देश से अलग नहीं हो सकता। इसके लिए साफ सवाल
सिंगर ने उठाया थलापति विजय की पार्टी पर सवाल:कार्यकर्ता की सेक्शुअल हैरेसमेंट मामले में गिरफ्तारी हुई, चिनमई श्रिपदा बोलीं- सब एक जैसे हैं

थलापति विजय की पार्टी TVK (तमिल वेट्री कड़गम) ने तमिलनाडु चुनाव में 108 सीट जीती हैं। चुनाव के नतीजे सामने आने के ठीक बाद उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता की एक नाबालिक से दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तारी हुई है। खबर सामने आने के बाद साउथ की पॉपुलर सिंगर चिनमई श्रीपदा ने विजय की पार्टी पर सवाल उठाते हुए उनकी आलोचना की है। चिनमई श्रीपदा ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर थलापति विजय की पार्टी के कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर रिएक्ट कर लिखा है, ‘जो आदमी यौन अपराध करते हैं, वे अक्सर वहां पहुंचने की कोशिश करते हैं जहां उन्हें ताकत और बच निकलने का मौका दिखाई देता है। TVK (तमिल वेट्री कड़गम) में एक ऐसे व्यक्ति पर नाबालिग के साथ यौन शोषण का आरोप है। पार्टी को पहले उसका सही बैकग्राउंड चेक करना चाहिए था।’ आगे चिनमई श्रीपदा ने लिखा, ‘अगर बदलाव का वादा करने वाले लोग भी ऐसी गलतियां करें, तो फिर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उम्मीद कम हो जाती है। बार-बार यह कहना अच्छा नहीं लगता कि “सब एक जैसे हैं”, लेकिन ऐसी घटनाएं लोगों को यही सोचने पर मजबूर कर देती हैं।’ क्यों विवादों में आई विजय की पार्टी एक्टर से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी की हाल ही में गिरफ्तारी हुई है। उन पर 10 साल की बच्ची का यौन शोषण करने का आरोप है। आरोपी की पहचान दिनेश उर्फ पांबू दिनेश के रूप में हुई है। उसके खिलाफ पीड़िता के परिवार ने इसी हफ्ते शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। चुनाव में एकतरफा जीते, बहुमत मिली तो सीएम बनेंगे विजय विजय ने 2 साल पहले तमिल वेट्री कड़गम पार्टी बनाई। उनकी पार्टी ने तमिलनाडु चुनाव में सभी 234 सीटों से चुनाव लड़ा, जिसमें से पार्टी 108 सीटों पर विजयी रही। हालांकि बहुमत के लिए 118 सीटों की जरुरत है। विजय ने खुद दो सीटों पेराम्बुर और तिरुचिरापल्ली से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। अगर विजय की पार्टी को बहुमत मिलती है, तो वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। बता दें कि विजय इन दिनों चुनाव जीतने के अलावा तृषा कृष्णन से नाम जुड़ने से भी चर्चा में हैं। तमिलनाडु चुनाव के नतीजे तृषा कृष्णन के जन्मदिन यानी 4 मई को आए थे। इसी दिन तृषा ने पहले तिरुपति मंदिर में दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंची थीं।







