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न पानी दें, न कपड़ों में लपेटें…तपती गर्मी में न्यूबॉर्न बेबी का ऐसे रखें ध्यान, ब्रेस्ट फीडिंग सबसे जरूरी

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पलामू. पलामू जिले में गर्मी हर साल लोगों की परेशानी बढ़ा देती है. राज्य के सबसे गर्म जिलों में शामिल पलामू में तापमान ज्यादा रहता है. ऐसे मौसम में सबसे ज्यादा खतरा नवजात शिशुओं को होता है, क्योंकि उनका शरीर तेजी से बढ़ते तापमान को नहीं झेल पाता. डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के दिनों में नवजात की देखभाल में जरा सी लापरवाही भी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है. इसलिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है.

कपड़ों की लेयरिंग न करें
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वीकृति ने लोकल18 को बताया कि पलामू में गर्मी के दौरान अक्सर ऐसे मामले आते हैं, जिनमें नवजात को तेज बुखार हो जाता है. ऐसे में नवजात शिशु को हमेशा आरामदायक कमरे के तापमान में रखना चाहिए. अक्सर लोग गर्मी में भी बच्चों को कंबल में लपेट देते हैं या कई लेयर वाले कपड़े पहना देते हैं, लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है.

गर्मी में बच्चों को केवल हल्के और मुलायम कॉटन के कपड़े पहनाने चाहिए. कोशिश करें कि बच्चे का शरीर ढका रहे, लेकिन कपड़े ज्यादा भारी न हों. जिस कमरे में बच्चा हो, वहां पंखा, कूलर या अच्छी हवा की व्यवस्था होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि कई बार गर्मी में भी नवजात शिशुओं का शरीर अचानक ठंडा पड़ने लगता है. ऐसे में समय-समय पर बच्चे के पैर और हाथ चेक करते रहना चाहिए. पैर गर्म या सामान्य और हल्के गुलाबी यानी पिंक दिखने चाहिए. अगर शरीर ज्यादा ठंडा या सुस्त लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. पैर के तलवे सफेद नहीं दिखने चाहिए.

हर दो घंटे पर कराएं ब्रेस्ट फीडिंग
नवजात के लिए मां का दूध सबसे ज्यादा जरूरी और फायदेमंद माना जाता है. आजकल कई माताएं जन्म के तुरंत बाद बच्चों को डिब्बे वाला दूध देने लगती हैं, लेकिन डॉक्टर इसके खिलाफ हैं. मां का पहला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और उसे कई तरह के संक्रमण से बचाता है. शुरुआती छह महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए.

गर्मी के मौसम में हर दो घंटे पर ब्रेस्ट फीडिंग कराने से बच्चे के शरीर में पानी और पोषण दोनों की कमी नहीं होती. इसके बाद फीडिंग ऑन डिमांड होनी चाहिए. कई बार महिलाओं को खासकर गांव की महिलाओं को लगता है कि गर्मी बहुत है तो बच्चे को पानी देना चाहिए लेकिन इसकी जरूरत नहीं होती. मां का दूध, पानी, पोषण, सब पहुंचाता है. कितनी भी गर्मी हो बच्चे को 6 महीने तक केवल मां का दूध ही देना चाहिए.

6 महीने बाद दें लिक्विड डाइट
उन्होंने बताया कि टॉप फीडिंग यानी बाहर का दूध देने से बच्चों में इन्फेक्शन, पेट की समस्या और बुखार जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं. वहीं, छह महीने के बाद धीरे-धीरे लिक्विड और हल्का घरेलू आहार शुरू किया जा सकता है. वहीं बड़े बच्चों को पर्याप्त पानी, दही, छाछ और लिक्विड बेस्ड खाना देना चाहिए. ज्यादा मसालेदार, ऑयली और बाहर का खाना देने से बचना चाहिए.

उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में बच्चों को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है. पलामू में हर साल हीट स्ट्रोक और तेज बुखार से पीड़ित बच्चों के मामले सामने आते हैं. ऐसे में सावधानी और सही देखभाल ही नवजात और थोड़े बड़े बच्चों को सुरक्षित रख सकती है.

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कपड़ों की लेयरिंग न करें
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वीकृति ने लोकल18 को बताया कि पलामू में गर्मी के दौरान अक्सर ऐसे मामले आते हैं, जिनमें नवजात को तेज बुखार हो जाता है. ऐसे में नवजात शिशु को हमेशा आरामदायक कमरे के तापमान में रखना चाहिए. अक्सर लोग गर्मी में भी बच्चों को कंबल में लपेट देते हैं या कई लेयर वाले कपड़े पहना देते हैं, लेकिन ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है.

गर्मी में बच्चों को केवल हल्के और मुलायम कॉटन के कपड़े पहनाने चाहिए. कोशिश करें कि बच्चे का शरीर ढका रहे, लेकिन कपड़े ज्यादा भारी न हों. जिस कमरे में बच्चा हो, वहां पंखा, कूलर या अच्छी हवा की व्यवस्था होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि कई बार गर्मी में भी नवजात शिशुओं का शरीर अचानक ठंडा पड़ने लगता है. ऐसे में समय-समय पर बच्चे के पैर और हाथ चेक करते रहना चाहिए. पैर गर्म या सामान्य और हल्के गुलाबी यानी पिंक दिखने चाहिए. अगर शरीर ज्यादा ठंडा या सुस्त लगे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. पैर के तलवे सफेद नहीं दिखने चाहिए.

हर दो घंटे पर कराएं ब्रेस्ट फीडिंग
नवजात के लिए मां का दूध सबसे ज्यादा जरूरी और फायदेमंद माना जाता है. आजकल कई माताएं जन्म के तुरंत बाद बच्चों को डिब्बे वाला दूध देने लगती हैं, लेकिन डॉक्टर इसके खिलाफ हैं. मां का पहला दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और उसे कई तरह के संक्रमण से बचाता है. शुरुआती छह महीने तक बच्चे को केवल मां का दूध ही देना चाहिए.

गर्मी के मौसम में हर दो घंटे पर ब्रेस्ट फीडिंग कराने से बच्चे के शरीर में पानी और पोषण दोनों की कमी नहीं होती. इसके बाद फीडिंग ऑन डिमांड होनी चाहिए. कई बार महिलाओं को खासकर गांव की महिलाओं को लगता है कि गर्मी बहुत है तो बच्चे को पानी देना चाहिए लेकिन इसकी जरूरत नहीं होती. मां का दूध, पानी, पोषण, सब पहुंचाता है. कितनी भी गर्मी हो बच्चे को 6 महीने तक केवल मां का दूध ही देना चाहिए.

6 महीने बाद दें लिक्विड डाइट
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उन्होंने कहा कि गर्मी के दिनों में बच्चों को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी है. पलामू में हर साल हीट स्ट्रोक और तेज बुखार से पीड़ित बच्चों के मामले सामने आते हैं. ऐसे में सावधानी और सही देखभाल ही नवजात और थोड़े बड़े बच्चों को सुरक्षित रख सकती है.

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