बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले भारत दौरे पर आएगी ऑस्ट्रेलिया-A टीम:सितंबर-अक्टूबर में पुडुचेरी में होंगे 5 मैच; महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी

अगले साल जनवरी में होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की तैयारियों के लिए ऑस्ट्रेलिया की ‘A’ टीम भारत का दौरा करेगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बुधवार को शेड्यूल जारी किया, जिसके मुताबिक ऑस्ट्रेलिया-A की टीम सितंबर और अक्टूबर में भारत के खिलाफ दो 4-दिवसीय मैच और तीन 50-ओवर के मैच खेलेगी। ये सभी मुकाबले पुडुचेरी में आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया की महिला ‘A’ टीम और पुरुषों की अंडर-19 टीम भी अलग-अलग सीरीज के लिए भारत आएगी। टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के पास खुद को साबित करने का मौका अगले साल 21 जनवरी से नागपुर में शुरू होने वाली 5 टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले यह दौरा ऑस्ट्रेलिया के लिए काफी अहम है। पिछले साल भी ऑस्ट्रेलिया-A ने भारत का दौरा किया था, जहां सैम कोंस्टास, नाथन मैकस्वीनी और टॉड मर्फी जैसे खिलाड़ियों को भारतीय परिस्थितियों में खेलने का मौका मिला था। कोंस्टास ने पिछले दौरे के पहले मैच में शतक लगाया था, वहीं मैकस्वीनी ने 74 और नाबाद 85 रनों की पारियां खेली थीं। इस बार भी कई युवा खिलाड़ी मुख्य टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए यहां अपना दावा पेश करेंगे। पुडुचेरी में होंगे मेंस टीम के सभी मुकाबले ऑस्ट्रेलिया-A की मेंस टीम अपने अभियान की शुरुआत 22 सितंबर से पुडुचेरी में करेगी। पहला 4-दिवसीय मैच 22 से 25 सितंबर तक चलेगा, जबकि दूसरा मुकाबला 29 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच होगा। इसके बाद 6, 9 और 11 अक्टूबर को तीन वनडे मैच (50-ओवर) खेले जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के सेलेक्टर्स की नजरें विशेष रूप से स्पिनरों और उन बल्लेबाजों पर होंगी जो भारतीय पिचों पर अच्छा खेल दिखा सकें। महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी सीरीज BCCI ने सिर्फ मेंस टीम ही नहीं, बल्कि महिला ‘A’ और अंडर-19 टीमों के दौरे की भी पुष्टि की है। ऑस्ट्रेलिया ए महिला टीम 2018 के बाद भारत आएगी महिला टीम: ऑस्ट्रेलिया-A की महिला टीम 2018 के बाद पहली बार भारत में मल्टी-फॉर्मेट सीरीज खेलेगी। वे मोहाली में 2 टी20 और धर्मशाला में तीन वनडे और एक 4-दिवसीय मैच खेलेंगी। अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में खेलेंगे मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन भारत की अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलेगी। इसमें भारत के 15 साल के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी पर सबकी नजरें होंगी, जिन्होंने 13 साल की उम्र में चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 62 गेंदों में शतक जड़ा था। एक ही समय पर साउथ अफ्रीका में होगी मुख्य टीम दिलचस्प बात यह है कि जब ऑस्ट्रेलिया-A की टीम भारत में होगी, उसी समय ऑस्ट्रेलिया की मुख्य टेस्ट टीम साउथ अफ्रीका के दौरे पर रहेगी। साउथ अफ्रीका में पहला टेस्ट 9 अक्टूबर को शुरू होना है। ऐसे में कुछ टेस्ट स्पेशलिस्ट खिलाड़ी भारत में पहला 4-दिवसीय मैच खेलकर साउथ अफ्रीका रवाना हो सकते हैं, लेकिन दूसरे मैच में उनका खेलना मुश्किल लग रहा है
बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले भारत दौरे पर आएगी ऑस्ट्रेलिया-A टीम:सितंबर-अक्टूबर में पुडुचेरी में होंगे 5 मैच; महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी

अगले साल जनवरी में होने वाली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी की तैयारियों के लिए ऑस्ट्रेलिया की ‘A’ टीम भारत का दौरा करेगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बुधवार को शेड्यूल जारी किया, जिसके मुताबिक ऑस्ट्रेलिया-A की टीम सितंबर और अक्टूबर में भारत के खिलाफ दो 4-दिवसीय मैच और तीन 50-ओवर के मैच खेलेगी। ये सभी मुकाबले पुडुचेरी में आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया की महिला ‘A’ टीम और पुरुषों की अंडर-19 टीम भी अलग-अलग सीरीज के लिए भारत आएगी। टेस्ट सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के पास खुद को साबित करने का मौका अगले साल 21 जनवरी से नागपुर में शुरू होने वाली 5 टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले यह दौरा ऑस्ट्रेलिया के लिए काफी अहम है। पिछले साल भी ऑस्ट्रेलिया-A ने भारत का दौरा किया था, जहां सैम कोंस्टास, नाथन मैकस्वीनी और टॉड मर्फी जैसे खिलाड़ियों को भारतीय परिस्थितियों में खेलने का मौका मिला था। कोंस्टास ने पिछले दौरे के पहले मैच में शतक लगाया था, वहीं मैकस्वीनी ने 74 और नाबाद 85 रनों की पारियां खेली थीं। इस बार भी कई युवा खिलाड़ी मुख्य टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए यहां अपना दावा पेश करेंगे। पुडुचेरी में होंगे मेंस टीम के सभी मुकाबले ऑस्ट्रेलिया-A की मेंस टीम अपने अभियान की शुरुआत 22 सितंबर से पुडुचेरी में करेगी। पहला 4-दिवसीय मैच 22 से 25 सितंबर तक चलेगा, जबकि दूसरा मुकाबला 29 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच होगा। इसके बाद 6, 9 और 11 अक्टूबर को तीन वनडे मैच (50-ओवर) खेले जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया के सेलेक्टर्स की नजरें विशेष रूप से स्पिनरों और उन बल्लेबाजों पर होंगी जो भारतीय पिचों पर अच्छा खेल दिखा सकें। महिला और अंडर-19 टीमें भी खेलेंगी सीरीज BCCI ने सिर्फ मेंस टीम ही नहीं, बल्कि महिला ‘A’ और अंडर-19 टीमों के दौरे की भी पुष्टि की है। ऑस्ट्रेलिया ए महिला टीम 2018 के बाद भारत आएगी महिला टीम: ऑस्ट्रेलिया-A की महिला टीम 2018 के बाद पहली बार भारत में मल्टी-फॉर्मेट सीरीज खेलेगी। वे मोहाली में 2 टी20 और धर्मशाला में तीन वनडे और एक 4-दिवसीय मैच खेलेंगी। अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में खेलेंगे मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन भारत की अंडर-19 टीम राजकोट और अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलेगी। इसमें भारत के 15 साल के उभरते सितारे वैभव सूर्यवंशी पर सबकी नजरें होंगी, जिन्होंने 13 साल की उम्र में चेन्नई में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 62 गेंदों में शतक जड़ा था। एक ही समय पर साउथ अफ्रीका में होगी मुख्य टीम दिलचस्प बात यह है कि जब ऑस्ट्रेलिया-A की टीम भारत में होगी, उसी समय ऑस्ट्रेलिया की मुख्य टेस्ट टीम साउथ अफ्रीका के दौरे पर रहेगी। साउथ अफ्रीका में पहला टेस्ट 9 अक्टूबर को शुरू होना है। ऐसे में कुछ टेस्ट स्पेशलिस्ट खिलाड़ी भारत में पहला 4-दिवसीय मैच खेलकर साउथ अफ्रीका रवाना हो सकते हैं, लेकिन दूसरे मैच में उनका खेलना मुश्किल लग रहा है
कनाडा को छोड़ अलग देश बन सकता है अल्बर्टा:अक्टूबर में वोटिंग संभव, अलगाववादियों ने 3 लाख हस्ताक्षर जुटाए

कनाडा के पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा को अलग देश बनने की मांग और ज्यादा तेज हो गई है। अलगाववादियों ने बुधवार को दावा किया है कि उन्होंने इतना समर्थन जुटा लिया है कि अब स्वतंत्रता पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराया जा सकता है। अलगाववादी नेताओं के मुताबिक, उन्होंने करीब 3 लाख हस्ताक्षर चुनाव अधिकारियों को सौंपे हैं, जबकि इसके लिए 1.78 लाख दस्तखत की जरूरत थी। आंदोलन के नेता मिच सिलवेस्ट्रे ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया और कहा कि अब यह लड़ाई अगले चरण में पहुंच गई है। हालांकि इतना समर्थन जुटा लेने का मतलब यह नहीं है कि रेफरेंडम पक्का हो गया है। चुनाव आयोग को पहले इन हस्ताक्षरों की जांच करनी होगी। इस प्रक्रिया पर फिलहाल अदालत के आदेश की वजह से रोक भी लगी हुई है। अगर वोटिंग अलबर्टा के पक्ष में गई तो यह प्रांत कनाडा को छोड़ अलग देश बन सकता है। अल जजीरा के मुताबिक, अगर सभी कानूनी अड़चनें दूर हो जाती हैं, तो प्रांत में 19 अक्टूबर को प्रस्तावित बड़े जनमत संग्रह के साथ अलगाव पर भी वोटिंग कराई जा सकती है। उसी दिन संविधान और इमिग्रेशन जैसे दूसरे मुद्दों पर भी मतदान की योजना है। सर्वे में 30% लोग ही अलग देश के पक्ष में अगर यह प्रस्ताव वोटिंग तक पहुंचता है, तो लोगों से सीधा सवाल पूछा जाएगा कि क्या अल्बर्टा कनाडा से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बनना चाहिए। लेकिन सर्वे बताते हैं कि अभी सिर्फ करीब 30 प्रतिशत लोग ही इसके समर्थन में हैं, यानी जनमत संग्रह पास होना भी आसान नहीं है। हालांकि अलगाववादियों का मानना है कि यह आंकड़ा वोटिंग के दौरान बढ़ने वाला है। अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने कहा है कि अगर जरूरी हस्ताक्षर पूरे होते हैं तो वह वोटिंग आगे बढ़ाएंगी, लेकिन वह खुद कनाडा से अलग होने के पक्ष में नहीं हैं। इस अलगाववादी आंदोलन की जड़ें काफी पुरानी हैं। अल्बर्टा, जहां करीब 50 लाख लोग रहते हैं, लंबे समय से खुद को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग मानता है। यहां के लोग मानते हैं कि उनकी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और राजनीति अलग है, लेकिन फैसले ओटावा में बैठकर लिए जाते हैं। कनाडा से अलग क्यों होना चाहता है अल्बर्टा कनाडा के अल्बर्टा में अलग देश बनने की मांग अचानक नहीं उठी है। इसके पीछे कई सालों से चल रही नाराजगी और अलग पहचान की भावना काम कर रही है। सबसे बड़ा कारण आर्थिक है। अल्बर्टा तेल और गैस से भरपूर राज्य है। यहां कनाडा के कुल तेल उत्पादन का लगभग 84% हिस्सा निकलता है। यहां के लोगों को लगता है कि वे ज्यादा कमाते हैं, लेकिन फायदा बाकी कनाडा को ज्यादा मिलता है। उन्हें शिकायत है कि टैक्स का पैसा ओटावा जाकर खर्च होता है, जबकि फैसले लेते समय उनकी आवाज कम सुनी जाती है। दूसरा बड़ा मुद्दा केंद्र सरकार से टकराव है। ओटावा में बैठी सरकार के फैसलों को लेकर अल्बर्टा में नाराजगी रहती है। खासकर पर्यावरण और जलवायु से जुड़े नियमों को लेकर। यहां के लोग मानते हैं कि ये नियम उनके तेल और गैस उद्योग को नुकसान पहुंचाते हैं और बिना समझे बनाए जाते हैं। तीसरा कारण पहचान और राजनीति है। अल्बर्टा को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग माना जाता है। यहां की राजनीति ज्यादा कंजर्वेटिव (रूढ़िवादी) है, जबकि केंद्र में लंबे समय से लिबरल विचारधारा हावी रही है। इसके अलावा यहां यह भी भावना है कि केंद्र सरकार उनके संसाधनों पर ज्यादा नियंत्रण रखती है। पाइपलाइन, ऊर्जा परियोजनाएं और निर्यात जैसे मुद्दों पर कई बार फैसले अटकते हैं, जिससे स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ता है। ट्रम्प सरकार पर अलगाववादियों को बढ़ावा देने का आरोप इसी बीच ट्रम्प सरकार पर अलग देश की मांग कर रहे लोगों को बढ़ावा देने का आरोप है। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका के अधिकारी अल्बर्टा के अलगाववादी नेताओं से मिलते हैं और उनकी मदद करते हैं। इन खबरों से कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी नाराज हो गए थे। उन्होंने इसी साल फरवरी में राष्ट्रपति ट्रम्प को फोन कर कनाडा की संप्रभुता का सम्मान करने को कहा था। कार्नी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिकी सरकार कनाडा के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगी। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प की सत्ता में वापसी को अलगाववादी अल्बर्टा को अलग करने के लिए सही समय मान रहे हैं। कुछ अलगाववादी अल्बर्टा को स्वतंत्र देश बनाने की बजाय अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात भी कर रहे हैं। फरवरी में कैलगरी और एडमॉन्टन के बीच हाईवे पर एक बिलबोर्ड भी लगा, जिसमें अल्बर्टा को USA में मिलाने की अपील की गई थी। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बैसेंट ने भी हाल में कहा था कि अल्बर्टा अमेरिका का नेचुरल पार्टनर है और वहां के लोग बहुत स्वतंत्र सोच वाले हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि अल्बर्टा के पास प्राकृतिक संसाधनों की भरमार है और अमेरिका एक स्वतंत्र अल्बर्टा के साथ काम कर सकता है। क्यूबेक ने दो बार कनाडा से अलग होने की कोशिश की कनाडा में क्यूबेक का अलगाववाद अल्बर्टा से ज्यादा पुराना है। यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पहचान से जुड़ा मुद्दा है। क्यूबेक की सबसे बड़ी खासियत उसकी फ्रेंच भाषा और अलग संस्कृति है। यहां के लोग खुद को कनाडा के बाकी हिस्सों से अलग मानते हैं। उनका मानना रहा है कि उनकी भाषा और पहचान को बचाने के लिए ज्यादा स्वायत्तता या अलग देश बनना जरूरी है। यही वजह है कि क्यूबेक में दो बार जनमत संग्रह भी हो चुका है। पहला 1980 में हुआ, जिसमें लोगों ने अलग होने के खिलाफ वोट दिया। दूसरा 1995 में हुआ और वह बहुत ही करीबी मुकाबला था। उस समय करीब 50.6 प्रतिशत लोगों ने कनाडा के साथ रहने के पक्ष में वोट दिया, जबकि 49.4 प्रतिशत लोग अलग होना चाहते थे। यानी क्यूबेक लगभग अलग होने ही वाला था। कनाडा में अलग होना मुश्किल हुआ इस नतीजे के बाद कनाडा सरकार ने साफ कर दिया कि अब अलग होने की राह आसान नहीं रहने वाली। 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया। कहा गया कि कोई भी प्रांत अपने दम पर देश से अलग नहीं हो सकता। इसके लिए साफ सवाल
सिंगर ने उठाया थलापति विजय की पार्टी पर सवाल:कार्यकर्ता की सेक्शुअल हैरेसमेंट मामले में गिरफ्तारी हुई, चिनमई श्रिपदा बोलीं- सब एक जैसे हैं

थलापति विजय की पार्टी TVK (तमिल वेट्री कड़गम) ने तमिलनाडु चुनाव में 108 सीट जीती हैं। चुनाव के नतीजे सामने आने के ठीक बाद उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता की एक नाबालिक से दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तारी हुई है। खबर सामने आने के बाद साउथ की पॉपुलर सिंगर चिनमई श्रीपदा ने विजय की पार्टी पर सवाल उठाते हुए उनकी आलोचना की है। चिनमई श्रीपदा ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर थलापति विजय की पार्टी के कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर रिएक्ट कर लिखा है, ‘जो आदमी यौन अपराध करते हैं, वे अक्सर वहां पहुंचने की कोशिश करते हैं जहां उन्हें ताकत और बच निकलने का मौका दिखाई देता है। TVK (तमिल वेट्री कड़गम) में एक ऐसे व्यक्ति पर नाबालिग के साथ यौन शोषण का आरोप है। पार्टी को पहले उसका सही बैकग्राउंड चेक करना चाहिए था।’ आगे चिनमई श्रीपदा ने लिखा, ‘अगर बदलाव का वादा करने वाले लोग भी ऐसी गलतियां करें, तो फिर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उम्मीद कम हो जाती है। बार-बार यह कहना अच्छा नहीं लगता कि “सब एक जैसे हैं”, लेकिन ऐसी घटनाएं लोगों को यही सोचने पर मजबूर कर देती हैं।’ क्यों विवादों में आई विजय की पार्टी एक्टर से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी की हाल ही में गिरफ्तारी हुई है। उन पर 10 साल की बच्ची का यौन शोषण करने का आरोप है। आरोपी की पहचान दिनेश उर्फ पांबू दिनेश के रूप में हुई है। उसके खिलाफ पीड़िता के परिवार ने इसी हफ्ते शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। चुनाव में एकतरफा जीते, बहुमत मिली तो सीएम बनेंगे विजय विजय ने 2 साल पहले तमिल वेट्री कड़गम पार्टी बनाई। उनकी पार्टी ने तमिलनाडु चुनाव में सभी 234 सीटों से चुनाव लड़ा, जिसमें से पार्टी 108 सीटों पर विजयी रही। हालांकि बहुमत के लिए 118 सीटों की जरुरत है। विजय ने खुद दो सीटों पेराम्बुर और तिरुचिरापल्ली से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। अगर विजय की पार्टी को बहुमत मिलती है, तो वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। बता दें कि विजय इन दिनों चुनाव जीतने के अलावा तृषा कृष्णन से नाम जुड़ने से भी चर्चा में हैं। तमिलनाडु चुनाव के नतीजे तृषा कृष्णन के जन्मदिन यानी 4 मई को आए थे। इसी दिन तृषा ने पहले तिरुपति मंदिर में दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंची थीं।
सिंगर ने उठाया थलापति विजय की पार्टी पर सवाल:कार्यकर्ता की सेक्शुअल हैरेसमेंट मामले में गिरफ्तारी हुई, चिनमई श्रिपदा बोलीं- सब एक जैसे हैं

थलापति विजय की पार्टी TVK (तमिल वेट्री कड़गम) ने तमिलनाडु चुनाव में 108 सीट जीती हैं। चुनाव के नतीजे सामने आने के ठीक बाद उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता की एक नाबालिक से दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तारी हुई है। खबर सामने आने के बाद साउथ की पॉपुलर सिंगर चिनमई श्रीपदा ने विजय की पार्टी पर सवाल उठाते हुए उनकी आलोचना की है। चिनमई श्रीपदा ने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर थलापति विजय की पार्टी के कार्यकर्ता की गिरफ्तारी पर रिएक्ट कर लिखा है, ‘जो आदमी यौन अपराध करते हैं, वे अक्सर वहां पहुंचने की कोशिश करते हैं जहां उन्हें ताकत और बच निकलने का मौका दिखाई देता है। TVK (तमिल वेट्री कड़गम) में एक ऐसे व्यक्ति पर नाबालिग के साथ यौन शोषण का आरोप है। पार्टी को पहले उसका सही बैकग्राउंड चेक करना चाहिए था।’ आगे चिनमई श्रीपदा ने लिखा, ‘अगर बदलाव का वादा करने वाले लोग भी ऐसी गलतियां करें, तो फिर बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उम्मीद कम हो जाती है। बार-बार यह कहना अच्छा नहीं लगता कि “सब एक जैसे हैं”, लेकिन ऐसी घटनाएं लोगों को यही सोचने पर मजबूर कर देती हैं।’ क्यों विवादों में आई विजय की पार्टी एक्टर से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी की हाल ही में गिरफ्तारी हुई है। उन पर 10 साल की बच्ची का यौन शोषण करने का आरोप है। आरोपी की पहचान दिनेश उर्फ पांबू दिनेश के रूप में हुई है। उसके खिलाफ पीड़िता के परिवार ने इसी हफ्ते शिकायत दर्ज करवाई थी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया है। चुनाव में एकतरफा जीते, बहुमत मिली तो सीएम बनेंगे विजय विजय ने 2 साल पहले तमिल वेट्री कड़गम पार्टी बनाई। उनकी पार्टी ने तमिलनाडु चुनाव में सभी 234 सीटों से चुनाव लड़ा, जिसमें से पार्टी 108 सीटों पर विजयी रही। हालांकि बहुमत के लिए 118 सीटों की जरुरत है। विजय ने खुद दो सीटों पेराम्बुर और तिरुचिरापल्ली से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। अगर विजय की पार्टी को बहुमत मिलती है, तो वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। बता दें कि विजय इन दिनों चुनाव जीतने के अलावा तृषा कृष्णन से नाम जुड़ने से भी चर्चा में हैं। तमिलनाडु चुनाव के नतीजे तृषा कृष्णन के जन्मदिन यानी 4 मई को आए थे। इसी दिन तृषा ने पहले तिरुपति मंदिर में दर्शन किए और फिर विजय के घर पहुंची थीं।
टीवीके प्रमुख विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले आधिकारिक काफिले को लेने से इनकार कर दिया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 मई, 2026, 11:04 IST टीवीके द्वारा विधानसभा चुनाव में 108 सीटें हासिल करने के बाद 4 मई को विजय को सौंपे गए चार काफिले वाहनों को उनके अनुरोध के बाद उनके आवास से वापस भेज दिया गया था। टीवीके प्रमुख विजय. तमिलनाडु चुनाव: पार्टी ने गुरुवार को कहा कि तमिलागा वेट्री कज़गम (टीवीके) प्रमुख विजय ने प्रोटोकॉल के अनुसार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को उनके शपथ ग्रहण तक प्रदान किए गए पुलिस काफिले के वाहनों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। टीवीके के अनुसार, विजय ने व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया कि उन्हें सौंपे गए काफिले के वाहनों को वापस कर दिया जाए, उन्होंने कहा कि वह औपचारिक रूप से “निर्णायक जनादेश” के साथ सरकार बनाने के बाद ही आधिकारिक मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा स्वीकार करेंगे। लाइव अपडेट्स का पालन करें टीवीके द्वारा विधानसभा चुनाव में 108 सीटें हासिल करने के बाद 4 मई को विजय को सौंपे गए चार काफिले वाहनों को उनके अनुरोध के बाद उनके आवास से वापस भेज दिया गया था। इसके अतिरिक्त, एक पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद “प्रोटोकॉल के अनुसार” सीएम काफिले के वाहन उन्हें वापस कर दिए गए थे और वापस नहीं लिए गए हैं। अधिकारी ने यह भी कहा कि शपथ ग्रहण समारोह के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 6 मई को भी, जब विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की थी, तब पुलिस ने उनके पनियूर आवास के पास और यहां लोक भवन के सामने सुरक्षा तैनात की थी। विजय ने राज्यपाल से मिलने के लिए सरकारी वाहन का इस्तेमाल नहीं किया. तमिलनाडु में क्या हो रहा है? इस बीच, टीवीके प्रमुख ने सरकार बनाने के पार्टी के अनुरोध पर पुनर्विचार करने के लिए गुरुवार को फिर से राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर से मुलाकात की। राज्यपाल से सरकार बनाने के उनके अनुरोध पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए टीवीके ने कहा है कि सबसे बड़ी पार्टी द्वारा बहुमत के बिना सरकार बनाने का दावा पेश करने की एक मिसाल रही है। इससे पहले बुधवार को उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया. हालाँकि, अर्लेकर अभी भी आश्वस्त नहीं हैं कि टीवीके के पास आवश्यक संख्याएँ हैं। लोक भवन के सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल ने अभिनेता से नेता बने अभिनेता की पार्टी की ताकत पर स्पष्टता मांगी थी, जिसने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद सरकार बनाने का दावा किया है। टीवीके के पास वर्तमान में 108 विधायक हैं, साथ ही कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन भी है। इसके साथ, विजय द्वारा जीती गई दो सीटों में से एक को छोड़कर, संख्या बढ़कर 112 हो गई। हालाँकि, यह अभी भी 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के आंकड़े 118 से कम है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले टीवीके प्रमुख विजय ने आधिकारिक काफिले को मना कर दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु चुनाव(टी)तमिलगा वेट्री कड़गम(टी)टीवीके विजय(टी)तमिलनाडु के मुख्यमंत्री(टी)सरकार गठन तमिलनाडु(टी)एकल सबसे बड़ी पार्टी(टी)गवर्नर राजेंद्र आर्लेकर(टी)विधानसभा चुनाव परिणाम
बिहार कैबिनेट विस्तार: नीतीश कुमार के बेटे, 30 अन्य के आज सरकार में शामिल होने की संभावना, पीएम मोदी भी होंगे शामिल | भारत समाचार

आखरी अपडेट:07 मई, 2026, 10:35 IST विस्तारित मंत्रिमंडल में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के भी मंत्रिमंडल में शामिल होने की उम्मीद है. बिहार मंत्रिमंडल विस्तार: सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार गुरुवार को अपने पहले कैबिनेट विस्तार के लिए तैयार है, जिसमें 31 सदस्यों के मंत्री पद की शपथ लेने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा प्रमुख नितिन नबीन और अन्य लोग इस मेगा कार्यक्रम में भाग लेंगे। यह मंत्रिमंडल विस्तार महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीयू के दिग्गज नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के भी बिहार सरकार में शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने औपचारिक रूप से राजनीति में प्रवेश किया और बिहार विधानसभा से अपने पिता के इस्तीफे के बाद जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो गए। समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि निशांत को सरकार में देखना जेडीयू नेताओं और कार्यकर्ताओं की इच्छा थी, लेकिन उन्होंने पार्टी कार्यकर्ता के रूप में अपनी प्रेरणा अर्जित करने की इच्छा रखते हुए शुरू में किसी भी पद को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन नेताओं को कैबिनेट में शामिल किए जाने की उम्मीद है, उन्हें पहले ही फोन किया जा चुका है। बीजेपी और जेडीयू दोनों ने बुधवार को पटना में बैठकों के बाद अपने-अपने मंत्रियों का कोटा फाइनल कर लिया. विस्तारित मंत्रिमंडल में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। किन-किन लोगों के शपथ लेने की उम्मीद है? बीजेपी से- राम कृपाल यादव केदार गुप्ता नीतीश मिश्रा मिथलेश तिवारी रमा निषाद विजय कुमार सिन्हा दिलीप जयसवाल प्रमोद चंद्रवंशी लखविंदर पासवान संजय टाइगर, इंजीनियर कुमार शलेन्द्र नंदकिशोर राम रामचन्द्र प्रसाद अरुण प्रसाद जदयू से- निशांत कुमार श्रवण कुमार मदन सहनी लेसी सिंह श्वेता गुप्ता भगवान सिंह कुशवाह दामोदर रावत बुलो मंडल सुनील कुमार शीला मंडल रत्नेश सदा जामा खान अशोक चौधरी एलजेपी से- संजय पासवान संजय सिंह HAM से आरएलएम से – समारोह में कौन शामिल होगा? कैबिनेट विस्तार गुरुवार को पटना के गांधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन के अलावा अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी में होने वाला है. शाह बुधवार शाम को पटना पहुंचे और हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनका स्वागत किया। शाह ने बाद में भाजपा और एनडीए नेताओं के साथ बैठक के लिए एक होटल जाने से पहले राजबंसी नगर में पंचरूपी हनुमान मंदिर का दौरा किया। गुरुवार के समारोह के लिए शहर पहुंचने वाले अन्य लोगों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी शामिल हैं, जो संयोग से, पिछले साल दिसंबर में पार्टी के शीर्ष पद पर नियुक्त होने तक राज्य कैबिनेट में मंत्री थे। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और राजनाथ सिंह, दोनों पूर्व भाजपा अध्यक्ष, पार्टी शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान जैसे गठबंधन सहयोगियों के इस कार्यक्रम में शामिल होने की उम्मीद है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया बिहार कैबिनेट विस्तार: नीतीश कुमार के बेटे, 30 अन्य के आज सरकार में शामिल होने की संभावना, पीएम मोदी भी होंगे शामिल अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)बिहार कैबिनेट विस्तार(टी)सम्राट चौधरी सरकार(टी)बिहार के मंत्रियों की सूची(टी)निशांत कुमार जेडीयू(टी)नीतीश कुमार पुत्र राजनीति(टी)बीजेपी जेडीयू गठबंधन बिहार(टी)चिराग पासवान एलजेपी(टी)गांधी मैदान पटना कार्यक्रम
मोहाली में IT कारोबारी पर ED की रेड:9वीं मंजिल से कैश भरे बैग फेंके, एक को ड्राइवर उठाकर भाग गया, दूसरा जब्त

मोहाली के खरड़ में वेस्टर्न टावर्स सोसाइटी में आज इनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) की टीम ने आईटी सेक्टर में काम करने वाले एक व्यक्ति के घर पर दबिश दी। टीम को आता देख किसी ने रिहायशी टावर की नौवीं मंजिल से कैश से भरे बैग नीचे फेंक दिए। इनमें से एक बैग नीचे गिरते ही फट गया और उससे नोट निकलकर बाहर फैल गए। हालांकि, दूसरा बैग ठीक रहा, जिसे वहां पहले से गाड़ी के साथ खड़ा एक व्यक्ति मौका देखकर बैग को उठाकर भाग गया। टीम ने उसका पीछा किया, लेकिन उसे पकड़ नहीं पाई। दूसरा बैग टीम ने जब्त कर लिया, जिसमें लगभग 21 लाख रुपये कैश मिला। टीम को बैग से 500-500 के नोटों की गड्डियां मिली हैं। फ्लैट में मौजूद व्यक्ति ने इन्हें लाल रंग के बैग में भरा और उस बैग को सफेद रंग के एक बैग में भरा और नीचे फेंका। इसके बाद भी बैग नीचे गिरते ही फट गया और नोटों की गडि्डयां जमीन पर बिखर गईं। मामले की जांच चल रही है। अभी तक अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। जिस टावर पर रेड चल रही है। वहां अब पुलिस ने लोगों की एंट्री रोक दी है। केंद्रीय एजेंसी के जवान मौके पर तैनात हैं। सीढ़ियों से लेकर टॉप तक फोर्स तैनात की गई है। कार लेकर भागा ड्राइवर पता चला है कि ED के पहुंचने की जानकारी कारोबारी को पहले से ही हो गई थी। इसलिए, उसने नौवीं मंजिल स्थित फ्लैट से कथित तौर पर नोटों से भरे बैग नीचे फेंके थे। नीचे पहले से ही उसका ड्राइवर खड़ा था जो तुरंत एक सफेद रंग की कार में सवार होकर एक बैग उठा ले गया। हालांकि, मौके पर मौजूद टीम ने उसका पीछा किया, फिर भी वह हाथ नहीं आया। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस इस घटना को देखकर सोसाइटी में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। इससे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही खरड़ के DSP ईशांत सिंगला के निर्देश पर स्थानीय पुलिस को मौके पर भेजा गया। खरड़ सिटी थाने के SHO अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू की। टावर में रहने वाला 4 महीने पहले आया प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह कार्रवाई सोसाइटी के फ्लैट नंबर 906 में रेड हुई है। यहां रहने वाले व्यक्ति की पहचान नितिन कुमार गोहिल के रूप में हुई है, जो IT सेक्टर में कार्यरत बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, नितिन कुमार गोहिल के कुछ राजनीतिक संपर्क होने की भी चर्चा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोसाइटी के लोगों ने बताया कि नितिन कुमार करीब 4 महीने पहले ही यहां रहने आया था। इसलिए, लोगों को भी उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। रोजाना कूरियर आते थे सोसाइटी के लोगों के अनुसार, नितिन कुमार के फ्लैट पर रोजाना बड़ी संख्या में कूरियर आते थे, जिन्हें अधिकतर उसका ड्राइवर ही रिसीव करता था। जांच एजेंसियों ने बरामद कैश से भरे बैग को कब्जे में ले लिया है। फिलहाल, उसके फ्लैट में रेड जारी है। मोहाली-चंडीगढ़ में 12 स्थानों पर रेड चल रही मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ED ने सनटेक सिटी प्रोजेक्ट में कथित धोखाधड़ी के सिलसिले में मोहाली और चंडीगढ़ में 12 जगहों पर दबिश दी है। ABS टाउनशिप, ऑल्टस बिल्डर्स और धीर कंस्ट्रक्शन्स समेत बिल्डर्स पर जनता को धोखा देने और GMADA से मिले CLU लाइसेंस का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है। नितिन गोहिल पर भी कथित राजनीतिक लिंक और फाइनेंशियल गड़बड़ियों के लिए जांच चल रही है। रेड के वीडियो देखने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुमायूँ कबीर इलाके में कलकत्ता के खिलाफ हिंसा हुई, बोले-सोसायटी के घरों में हुई बस्तियाँ

आम जनता पार्टी के अध्यक्ष हुमायूँ कबीर ने बुधवार (6 मई, 2026) को पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा पर रोक लगाने की मांग करते हुए कोलकाता उच्च न्यायालय का रुख अपनाया। ह्यूमनयू कबीर ने आरोप लगाया कि 4 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद मुर्शिदाबाद जिले में बड़े पैमाने पर राजनीतिक रूप से प्रेरित और सुनियोजित हिंसा हुई है। उन्होंने अदालत में फाइल फाइल में कहा कि उनकी पार्टियों के घरों में दुकानें बंद कर दी गईं और उनकी दुकानें तोड़ दी गईं। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन के खिलाफ़ विवादित कार्रवाई की मांग की है। आम जनता पार्टी के नेताओं की याचिका में अदालत से साक्षियों की जांच सुनिश्चित करने, पार्टी की ओर से सुरक्षा और क्षेत्र में शांति और व्यवस्था बनाए रखने की मांग की गई है। हुमायूँ कबीर के वकील ने बताया कि पहले चरण के चुनाव (23 अप्रैल) में कबीर पर भी असामाजिक तत्वों ने हमला किया था और उनकी कार में दुश्मनों की हत्या कर दी गई थी। साथ ही उनकी पार्टी की कार्यप्रणाली पर भी आपत्ति जताई गई, लेकिन पुलिस ने इन मामलों में कोई शिकायत दर्ज नहीं की। यह भी पढ़ें:- ‘बरखास्त करो, नहीं दी मिसालें’, जिद पर अदिं नमी नए कयासों से बोलीं- कपड़े पहने काले कपड़े उन्होंने कहा कि परमाणु विफलता के कारण उन्होंने शांतिपूर्ण शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाने की मांग की है और कर्मचारियों की जांच की पेशकश की है। बता दें कि 4 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित किये गये थे. इस चुनाव में मुर्शिदाबाद जिले के दो हिस्सों में हुमायूँ कबीर को जीत हासिल हुई। यह भी पढ़ें:- विक्ट्री के पास 112 विधायकों का समर्थन, गवर्नर बोले- 118 के आंकड़े इस चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में सत्ता हासिल की और कांग्रेस का 15 साल का शासन खत्म हो गया। कुल 207 प्रोटोटाइप बीजेपी को मिलीं, जबकि 80वें वर्जिन कांग्रेस को आउट किया गया। इसी बीच, परिणाम घोषित के बाद दक्षिण 24 परगना सहित राज्य के कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। कैथोलिक कांग्रेस पर लगे हमले और पार्टी में आस्था के आरोप हैं। पुलिस ने कहा है कि ऐसे इलाके में लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. (टैग्सटूट्रांसलेट)बंगाल हिंसा(टी)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)टीएमसी(टी)हुमायूं कबीर
वर्ल्ड अपडेट्स:बंगाल चुनाव में जीत पर नॉर्वे के पूर्व मंत्री बोले- क्या शानदार बदला लिया है, PM मोदी की तारीफ की

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद नॉर्वे के पूर्व मंत्री और राजनयिक एरिक सोल्हेम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि क्या शानदार बदला लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सोलहेम ने 2024 लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि तब पश्चिमी मीडिया ने BJP के बहुमत से नीचे रहने को मोदी युग के अंत की शुरुआत बताया था। लेकिन उसके बाद पार्टी ने ओडिशा, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, असम और अब पश्चिम बंगाल में जीत दर्ज की, क्या शानदार बदला है। उन्होंने ये भी कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे 10 करोड़ की आबादी वाले राज्य में 90% से ज्यादा वोटिंग होना बताता है कि भारत में लोकतंत्र कितना मजबूत है। यूरोप और अमेरिका के कई चुनावों में इतनी भागीदारी देखने को नहीं मिलती। भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए मिसाल है और पश्चिमी देशों को इसे समझने की जरूरत है। तमिलनाडु चुनाव पर भी सोलहेम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK के प्रदर्शन को राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव बताया।








