खतरों के खिलाड़ी में नजर आएंगे गौरव खन्ना:बोले- फेल होने का डर नहीं, बिना गॉडफादर के कॉर्पोरेट जॉब छोड़ एक्टर बना

अभिनेता गौरव खन्ना इन दिनों स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में गौरव ने अपनी जिंदगी के संघर्षों, मुंबई आने के सफर और बिना गॉडफादर के मुकाम हासिल करने पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि 22 साल पहले जब वे बिना किसी प्लान के कानपुर से पुष्पक एक्सप्रेस पकड़कर मुंबई आए थे, तब से लेकर अब तक उनमें क्या बदलाव आए हैं। इसके साथ ही गौरव ने नए शो को लेकर परिवार के रिएक्शन, रोहित शेट्टी के साथ काम करने के अनुभव और जिंदगी में जोखिम लेने की अपनी आदत पर भी चर्चा की। सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ में हिस्सा लेने जा रहे हैं, फैंस को आपसे काफी उम्मीदें हैं? जवाब: बड़ा अच्छा लगता है जब दर्शक इतना भरोसा दिखाते हैं। पिछले रियलिटी शो (बिग बॉस) में लोगों ने मुझे मेरे असली रूप में देखा। अभी तक वे मुझे सिर्फ किरदारों से जानते थे, लेकिन अब वे असली गौरव (जीके) को जानते हैं। मेरी यही कोशिश रहेगी कि मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरूं और उन्हें एंटरटेन करता रहूं। सवाल: इस शो में जीके (गौरव खन्ना) क्या खास करने वाले हैं? जवाब: जीके इस शो में स्टंट करेगा। जीके जिस भी शो में जाता है, वहां जो भी रिक्वायरमेंट होती है, वो जरूर पूरी करता है। सवाल: शो के लिए आपकी क्या तैयारी है? जवाब: मैं कभी कुछ सोचकर नहीं जाता। मैं खुद को उस परिस्थिति में डालता हूं और रिक्वायरमेंट के हिसाब से परफॉर्म करने की कोशिश करता हूं। मुझे स्टंट्स का कोई एक्सपीरियंस नहीं है, मैं पहली बार यह सब कर रहा हूं। सवाल: शो का ऑफर आने पर घर वालों का कैसा रिएक्शन था? जवाब: मेरे माता-पिता कानपुर में रहते हैं और बहुत साधारण लोग हैं। जब मेरी मां को पता चला तो वे चिंतित हो गईं। उन्होंने कहा- “तुम क्यों जा रहे हो? तुम्हें क्या जरूरत है, करियर तो अच्छा खासा चल रहा है।” उन्होंने ऐसा ही मास्टरशेफ और बिग बॉस के टाइम भी कहा था। मैंने उन्हें इस बार भी नहीं बताया था। सच कहूं तो शो का कॉन्ट्रैक्ट साइन करने वाला मैं सबसे आखिरी इंसान था। सवाल: फिर आपने शो करने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मेरे पिता ने मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि तुम्हें यह करना चाहिए। मुझे लगा कि एक-दो शो जीतने के बाद हम अक्सर अपने कंफर्ट जोन में चले जाते हैं। लेकिन मजा तो इसी में है कि खुद को परखा जाए। मैं कॉर्पोरेट लाइन से एक्टर बना और फिर रियलिटी शोज में आया। जब तक कुछ नया करने का जज्बा है, लाइफ में ग्रोथ होती रहेगी। पत्नी आकांक्षा का रिएक्शन भी बिंदास था, उसने तुरंत कहा- “करो!” सवाल: लाइफ में आपने अब तक का सबसे बड़ा जोखिम क्या लिया है? जवाब: अपने कंफर्ट जोन को छोड़ना। सबसे पहले अपने घर को छोड़कर इतने बड़े शहर (मुंबई) में आना, वह भी बिना किसी प्लान के। मुझे कोई इल्म नहीं था कि मैं एक्टिंग करूंगा। ना किसी को जानता था, ना कोई परिवार था, ना ही कोई गाइडेंस या गॉडफादर था। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है कि लाइफ में काफी रिस्क लिए हैं। सवाल: उस गौरव को क्या कहेंगे जो सालों पहले बिना किसी जुगाड़ के मुंबई आया था? जवाब: मैं उसे बस यही कहूंगा कि “खुद पर विश्वास रख।” आज भी मुझे वही चीज काम आती है जो 20 साल पहले आई थी। अगर मैं उस समय अपने विश्वास से डगमगा जाता, तो शायद मैं इस लाइन में कभी नहीं आता और कॉर्पोरेट में ही रह जाता। मुझे लाइफ में रिग्रेट नहीं करना है, बस कुछ आउट ऑफ द बॉक्स करना है। सवाल: रोहित शेट्टी के साथ काम करने को लेकर क्या सोच रहे हैं? जवाब: मैं उनसे बिग बॉस के एक वीकेंड का वार में मिला था। उनकी वाइब एक बड़े भाई जैसी है, जो मजाक-मजाक में बड़ी बातें समझा देते हैं। उनकी गाइडेंस में स्टंट सीखना इस शो को करने की एक बड़ी वजह है। वाट तो लगेगी, ऐसा नहीं है कि मैं पत्थर का बना हूं और मुझे डर नहीं लगता। डर सबको लगता है, बस उसे ही ओवरकम करना है। सवाल: शो में पुराने दोस्त और को-कंटेस्टेंट्स भी मिलेंगे, उनके साथ कैसा समीकरण रहेगा? जवाब: फराहना के साथ मेरी अच्छी बॉन्डिंग है। ऋत्विक, रुबीना, जैस्मीन और विशाल को भी जानता हूं। इसके अलावा हर्ष भी कानपुर से हैं, तो इस बार शो में दो कानपुरी होंगे। मुझे उम्मीद है कि हर्ष के साथ अच्छी बॉन्डिंग बनेगी, वो हंसाएगा तो मेंटली हम थोड़े रिलैक्स रहेंगे। सवाल: हाइट, पानी या कीड़े… आपको सबसे ज्यादा डर किससे लगता है? जवाब: पता नहीं, मुझे लगता है कि ये हर स्टंट में डराएंगे। मैंने सुना है कि इस बार शो का लेवल बहुत बड़ा होने वाला है। अगर मेरी वाट लगेगी तो सबकी लगेगी। मैं बस यह सोचकर शांत रहूंगा कि मैदान सबके लिए बराबर है।
खतरों के खिलाड़ी में नजर आएंगे गौरव खन्ना:बोले- फेल होने का डर नहीं, बिना गॉडफादर के कॉर्पोरेट जॉब छोड़ एक्टर बना

अभिनेता गौरव खन्ना इन दिनों स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में गौरव ने अपनी जिंदगी के संघर्षों, मुंबई आने के सफर और बिना गॉडफादर के मुकाम हासिल करने पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि 22 साल पहले जब वे बिना किसी प्लान के कानपुर से पुष्पक एक्सप्रेस पकड़कर मुंबई आए थे, तब से लेकर अब तक उनमें क्या बदलाव आए हैं। इसके साथ ही गौरव ने नए शो को लेकर परिवार के रिएक्शन, रोहित शेट्टी के साथ काम करने के अनुभव और जिंदगी में जोखिम लेने की अपनी आदत पर भी चर्चा की। सवाल: ‘खतरों के खिलाड़ी’ में हिस्सा लेने जा रहे हैं, फैंस को आपसे काफी उम्मीदें हैं? जवाब: बड़ा अच्छा लगता है जब दर्शक इतना भरोसा दिखाते हैं। पिछले रियलिटी शो (बिग बॉस) में लोगों ने मुझे मेरे असली रूप में देखा। अभी तक वे मुझे सिर्फ किरदारों से जानते थे, लेकिन अब वे असली गौरव (जीके) को जानते हैं। मेरी यही कोशिश रहेगी कि मैं उनकी उम्मीदों पर खरा उतरूं और उन्हें एंटरटेन करता रहूं। सवाल: इस शो में जीके (गौरव खन्ना) क्या खास करने वाले हैं? जवाब: जीके इस शो में स्टंट करेगा। जीके जिस भी शो में जाता है, वहां जो भी रिक्वायरमेंट होती है, वो जरूर पूरी करता है। सवाल: शो के लिए आपकी क्या तैयारी है? जवाब: मैं कभी कुछ सोचकर नहीं जाता। मैं खुद को उस परिस्थिति में डालता हूं और रिक्वायरमेंट के हिसाब से परफॉर्म करने की कोशिश करता हूं। मुझे स्टंट्स का कोई एक्सपीरियंस नहीं है, मैं पहली बार यह सब कर रहा हूं। सवाल: शो का ऑफर आने पर घर वालों का कैसा रिएक्शन था? जवाब: मेरे माता-पिता कानपुर में रहते हैं और बहुत साधारण लोग हैं। जब मेरी मां को पता चला तो वे चिंतित हो गईं। उन्होंने कहा- “तुम क्यों जा रहे हो? तुम्हें क्या जरूरत है, करियर तो अच्छा खासा चल रहा है।” उन्होंने ऐसा ही मास्टरशेफ और बिग बॉस के टाइम भी कहा था। मैंने उन्हें इस बार भी नहीं बताया था। सच कहूं तो शो का कॉन्ट्रैक्ट साइन करने वाला मैं सबसे आखिरी इंसान था। सवाल: फिर आपने शो करने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मेरे पिता ने मेरा हौसला बढ़ाया और कहा कि तुम्हें यह करना चाहिए। मुझे लगा कि एक-दो शो जीतने के बाद हम अक्सर अपने कंफर्ट जोन में चले जाते हैं। लेकिन मजा तो इसी में है कि खुद को परखा जाए। मैं कॉर्पोरेट लाइन से एक्टर बना और फिर रियलिटी शोज में आया। जब तक कुछ नया करने का जज्बा है, लाइफ में ग्रोथ होती रहेगी। पत्नी आकांक्षा का रिएक्शन भी बिंदास था, उसने तुरंत कहा- “करो!” सवाल: लाइफ में आपने अब तक का सबसे बड़ा जोखिम क्या लिया है? जवाब: अपने कंफर्ट जोन को छोड़ना। सबसे पहले अपने घर को छोड़कर इतने बड़े शहर (मुंबई) में आना, वह भी बिना किसी प्लान के। मुझे कोई इल्म नहीं था कि मैं एक्टिंग करूंगा। ना किसी को जानता था, ना कोई परिवार था, ना ही कोई गाइडेंस या गॉडफादर था। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है कि लाइफ में काफी रिस्क लिए हैं। सवाल: उस गौरव को क्या कहेंगे जो सालों पहले बिना किसी जुगाड़ के मुंबई आया था? जवाब: मैं उसे बस यही कहूंगा कि “खुद पर विश्वास रख।” आज भी मुझे वही चीज काम आती है जो 20 साल पहले आई थी। अगर मैं उस समय अपने विश्वास से डगमगा जाता, तो शायद मैं इस लाइन में कभी नहीं आता और कॉर्पोरेट में ही रह जाता। मुझे लाइफ में रिग्रेट नहीं करना है, बस कुछ आउट ऑफ द बॉक्स करना है। सवाल: रोहित शेट्टी के साथ काम करने को लेकर क्या सोच रहे हैं? जवाब: मैं उनसे बिग बॉस के एक वीकेंड का वार में मिला था। उनकी वाइब एक बड़े भाई जैसी है, जो मजाक-मजाक में बड़ी बातें समझा देते हैं। उनकी गाइडेंस में स्टंट सीखना इस शो को करने की एक बड़ी वजह है। वाट तो लगेगी, ऐसा नहीं है कि मैं पत्थर का बना हूं और मुझे डर नहीं लगता। डर सबको लगता है, बस उसे ही ओवरकम करना है। सवाल: शो में पुराने दोस्त और को-कंटेस्टेंट्स भी मिलेंगे, उनके साथ कैसा समीकरण रहेगा? जवाब: फराहना के साथ मेरी अच्छी बॉन्डिंग है। ऋत्विक, रुबीना, जैस्मीन और विशाल को भी जानता हूं। इसके अलावा हर्ष भी कानपुर से हैं, तो इस बार शो में दो कानपुरी होंगे। मुझे उम्मीद है कि हर्ष के साथ अच्छी बॉन्डिंग बनेगी, वो हंसाएगा तो मेंटली हम थोड़े रिलैक्स रहेंगे। सवाल: हाइट, पानी या कीड़े… आपको सबसे ज्यादा डर किससे लगता है? जवाब: पता नहीं, मुझे लगता है कि ये हर स्टंट में डराएंगे। मैंने सुना है कि इस बार शो का लेवल बहुत बड़ा होने वाला है। अगर मेरी वाट लगेगी तो सबकी लगेगी। मैं बस यह सोचकर शांत रहूंगा कि मैदान सबके लिए बराबर है।
जीरा VS सौंफ पानी: गर्मी में सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद क्या?

जीरा पानी और सौंफ पानी दोनों ही आयुर्वेद में बहुत उपयोगी माने जाते हैं और सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. खासकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में इन दोनों का महत्वपूर्ण योगदान होता है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इन दोनों में से कौन ज्यादा बेहतर है. आइए इसे आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं. जीरा पानी क्या करता है?जीरा पानी शरीर के लिए एक प्राकृतिक डिटॉक्स ड्रिंक की तरह काम करता है. जीरा पेट के अंदर बनने वाले एसिड को संतुलित करने में मदद करता है. जब पेट में एसिड ज्यादा हो जाता है, तो एसिडिटी, जलन और भारीपन जैसी समस्याएं होने लगती हैं. ऐसे में जीरा पानी इन समस्याओं को कम करने में मदद करता है. इसके अलावा, जीरा पानी पाचन शक्ति को सुधारता है और खाना जल्दी पचाने में मदद करता है. अगर किसी को अपच या गैस की समस्या होती है, तो जीरा पानी राहत दे सकता है. यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को भी तेज करता है, जिससे शरीर ज्यादा कैलोरी बर्न कर पाता है. इसी वजह से वजन कम करने वालों के लिए जीरा पानी काफी फायदेमंद माना जाता है. जीरा पानी शरीर से विषैले तत्वों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने में भी मदद करता है, जिससे शरीर हल्का और एनर्जेटिक महसूस करता है. सौंफ पानी के फायदेसौंफ पानी भी पाचन के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, लेकिन इसके फायदे थोड़े अलग हैं. सौंफ में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराती है. इससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है और अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाव होता है. सौंफ पानी पेट को ठंडक देने का काम करता है. गर्मी के मौसम में यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है और जलन या गर्मी से होने वाली समस्याओं को कम करता है. इसके अलावा, यह इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी पेट की समस्याओं में भी राहत दे सकता है. सौंफ पानी दिल की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में मदद करता है. इससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. जीरा पानी बनाम सौंफ पानीअगर तुलना करें, तो दोनों ही पानी सेहत के लिए अच्छे हैं, लेकिन इनके फायदे अलग-अलग हैं. जीरा पानी ज्यादा तर एसिडिटी, गैस, अपच और वजन घटाने जैसी समस्याओं के लिए बेहतर माना जाता है. यह जल्दी असर दिखाने वाला घरेलू उपाय है. वहीं दूसरी तरफ, सौंफ पानी पेट को ठंडा रखने, भूख को कंट्रोल करने और दिल की सेहत सुधारने में ज्यादा मददगार होता है. यह लंबे समय तक शरीर को संतुलित रखने में सहायक होता है. कौन सा ज्यादा बेहतर है?इसका सीधा जवाब यह है कि दोनों में से कोई एक “बेहतर” नहीं है, बल्कि यह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. अगर आपको अक्सर एसिडिटी या गैस की समस्या रहती है, तो जीरा पानी आपके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. लेकिन अगर आपको भूख ज्यादा लगती है, पेट में गर्मी रहती है या आप दिल की सेहत का ध्यान रखना चाहते हैं, तो सौंफ पानी बेहतर विकल्प है. कैसे करें सेवन?जीरा पानी बनाने के लिए जीरे को रातभर पानी में भिगोकर सुबह उबालकर या सीधे भी पीया जा सकता है. सौंफ पानी के लिए सौंफ को रातभर पानी में भिगोकर सुबह छानकर पिया जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
बच्चे को चोट लगे या खून निकले… घर के गमले में उगाएं ये पौधे, पत्ते लगाते ही मिलेगा तुरंत आराम!

Last Updated:May 05, 2026, 23:08 IST घर में छोटे बच्चे हों तो हल्की-फुल्की चोट लगना आम बात है. ऐसे में हर बार दवा ढूंढने के बजाय अगर घर में ही कुछ औषधीय पौधे हों, तो तुरंत राहत मिल सकती है. कई ऐसे पौधे हैं जिन्हें आप अपने गमले में आसानी से उगा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उनके पत्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं. ख़बरें फटाफट घर के गमले में उगाएं ये पौधा. घर में छोटे बच्चे हों तो खेलते-कूदते वक्त चोट लगना आम बात है. ऐसे समय पर तुरंत राहत के लिए अगर घर में ही कुछ औषधीय पौधे मौजूद हों, तो भागदौड़ कम हो सकती है. कई ऐसे पौधे हैं जिनके पत्ते हल्की खरोंच, सूजन या जलन में आराम देने में मदद कर सकते हैं. इसलिए घर के गमले में कुछ काम के मेडिसिनल प्लांट उगाना एक समझदारी भरा और उपयोगी विकल्प साबित हो सकता है. एलोवेरा को सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले औषधीय पौधों में गिना जाता है. इसके पत्तों के अंदर मौजूद जेल ठंडक देने वाला होता है, जो जलने, कटने या हल्की चोट में आराम पहुंचा सकता है. अगर बच्चे को हल्की खरोंच आ जाए, तो एलोवेरा जेल को साफ करके सीधे त्वचा पर लगाया जा सकता है. यह स्किन को मॉइश्चराइज करने के साथ ही निशान पड़ने की संभावना भी कम कर सकता है. तुलसी को एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर माना जाता है.तुलसी लगभग हर भारतीय घर में पाई जाती है. इसके पत्तों में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं. हल्की चोट या कट लगने पर इसके पत्तों को पीसकर लगाया जाए, तो यह संक्रमण से बचाव में मदद कर सकता है और घाव जल्दी भरने में सहायक हो सकता है. पुदीना को ठंडक और सूजन में राहत के लिए माना जाता है. पुदीना सिर्फ खाने के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा के लिए भी फायदेमंद है. इसके पत्तों में ठंडक देने वाले गुण होते हैं, जो सूजन और जलन को कम करने में मदद कर सकते हैं. हल्की चोट या कीड़े के काटने पर इसका पेस्ट लगाने से आराम मिल सकता है. अजवाइन का पौधा भी दर्द में दे राहत देता है. इसके पत्ते भी कई घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल होते हैं. इनके पत्तों को हल्का गर्म करके लगाने से दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है. खासकर छोटे-मोटे दर्द या मांसपेशियों की अकड़न में यह मददगार हो सकता है. गिलोय भी इम्युनिटी के साथ हीलिंग में मदद करता है. गिलोय को आयुर्वेद में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. यह शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के साथ-साथ रिकवरी प्रोसेस को सपोर्ट करता है. हालांकि इसे सीधे घाव पर लगाने से ज्यादा इसका सेवन फायदेमंद माना जाता है, लेकिन घर में इसका पौधा होना कई तरह से उपयोगी हो सकता है और सबसे जरूरी बात कि घरेलू नुस्खे छोटे-मोटे घाव या हल्की चोट तक ही सीमित रखने चाहिए. अगर चोट गहरी हो, ज्यादा खून बह रहा हो या संक्रमण का खतरा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है. साथ ही किसी भी पत्ते को लगाने से पहले उसे अच्छी तरह साफ करना बेहद जरूरी है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
पेठे का मुरब्बा रेसिपी: मसालेदार गर्मी में बाजार से नहीं, घर पर बचे पेठे का मुरब्बा, नहीं दोस्त लू और पेट भी रहेगा ठंडा; विधि नोट करें

पेठे का मुरब्बा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री: 1 छोटा टुकड़ा यानी सफेद कद्दू, 700-800 ग्राम चीनी, 1 छोटा टुकड़ा कद्दू, 1 छोटा टुकड़ा केवड़ा जल, 1 छोटा टुकड़ा केवड़ा जल, पानी चाहिए छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले पेठे को छीलें और उसके बीज निकालें। अब इसे छोटे-छोटे व्यायाम में काट लें। एक पॉश्चर में पानी लेकर फिटकरी ग्लासें और पेथे के मिश्रण को 3-4 घंटे के लिए इसमें शामिल किया जाता है। छवि: एआई इससे पेठा कुरकुरा बनेगा। अब पे थे को साफ पानी से अच्छे तरह धो लें और लम्बाई सा सामान लें। ध्यान दें कि अधिकतम नरभक्षी न हो। एक कढ़ाही में चीनी और पानी की चाशनी तैयार करें। छवि: एआई जब चाशनी लकड़ी गाढ़ी होने लगे, तब पेठे केट के टुकड़े डाल दें। माप पर पेठे को चाशनी में तब तक आदर्श, जब तक वह स्थिर यानी पारदर्शी न हो जाए। चाशनी बहुत अधिक सरल या अधिक गाढ़ी न हो। छवि: फ्रीपिक अब इसमें इलायची पाउडर और केवड़ा जल संरचना अच्छी तरह से बनी हुई है। मुरब्बे को कूल डेज़ और फिर साका, कृप्या कांच होने के ज़ार में विज्ञापन रख लें। यह शरीर को ठंडक देता है। छवि: एआई लू से बचने में मदद मिलती है। पाचन तंत्र में सुधार होता है। इसके अलावा कमजोरी और थकान भी दूर होती है। मुरब्बा हमेशा साफ और आकर्षक जार में रहते हैं। फ़िरोज़ में स्टोर करने के लिए सबसे अधिक समय। छवि: एआई गर्मी में अगर कुछ मीठे, ठंडे और मसाले वाले खाने का मन हो, तो पेठे का मुरब्बा जरूर बना सकते हैं। घर पर बनाएं यह मुरब्बा स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी मूलमंत्र है। छवि: एआई
कितने दिनों में खराब हो जाता है आटा, क्या इसकी भी कोई एक्सपायरी डेट, अधिकतर लोग नहीं जानते होंगे

Last Updated:May 05, 2026, 22:04 IST Wheat Flour Expiry Date: आटा ज्यादा दिनों तक रखा रहे, तो वह खराब हो जाता है. खासकर गर्मियों में आटा जल्दी खराब होता है. आटे को लंबे समय तक सही बनाए रखने के लिए प्रॉपर तरीके से स्टोर करना चाहिए. इसे एयरटाइट कंटेनर में रखना चाहिए और ताजा आटे का उपयोग करना चाहिए. आटा खराब होने लगे, तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. खुला हुआ आटा 15 से 30 दिनों तक सुरक्षित रहता है. Atta Expiry Date and Storage Tips: आटे का इस्तेमाल रोटियां बनाने के लिए लगभग रोज किया जाता है. रोटी हमारी थाली का जरूरी हिस्सा हैं और कई लोगों का पेट बिना रोटी के भरता ही नहीं है. आमतौर पर लोग रोटी बनाने के लिए गेहूं का आटा इस्तेमाल करते हैं. अक्सर लोग आटा पिसवाकर रख लेते हैं और उसे महीनों तक इस्तेमाल करते हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि यह कितने दिनों में खराब हो सकता है? अक्सर लोग समझते हैं कि आटा लंबे समय तक सुरक्षित रहता है, लेकिन इसकी भी एक शेल्फ लाइफ होती है. अगर इसे सही तरीके से स्टोर न किया जाए, तो खराब हो सकता है और नुकसानदायक भी बन सकता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो पैक्ड गेहूं का आटा 1 से 3 महीने तक ठीक रहता है. अगर आटा खुला हुआ है या घर में पिसवाया गया है, तो इसकी ताजगी लगभग 15 से 30 दिनों तक ही रहती है. खासकर गर्मियों में नमी और गर्मी के कारण आटा जल्दी खराब हो सकता है. इसलिए मौसम के हिसाब से इसकी स्टोरेज पर ध्यान देना जरूरी है. आटा खराब होने के कुछ संकेत भी होते हैं, जिन्हें पहचानना जरूरी है. अगर आटे से अजीब सी गंध आने लगे, उसमें छोटे-छोटे कीड़े दिखें या उसका रंग बदल जाए, तो समझ लें कि वह खराब हो चुका है. अगर आटा छूने पर चिपचिपा या ज्यादा नम लगे, तो भी यह खराब होने का संकेत हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार आटे को हमेशा एयरटाइट कंटेनर में रखना चाहिए और उसे ठंडी व सूखी जगह पर स्टोर करना चाहिए. अगर संभव हो, तो गर्मियों में आटे को फ्रिज में भी रखा जा सकता है. इससे उसमें नमी और कीड़े लगने की संभावना कम हो जाती है और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है. आटे की क्वालिटी बनाए रखने के लिए एक और जरूरी बात है कि उसे जरूरत के हिसाब से ही खरीदें या पिसवाएं. बहुत ज्यादा मात्रा में आटा रखने से खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. ताजा आटा न सिर्फ स्वाद में बेहतर होता है, बल्कि सेहत के लिए भी ज्यादा फायदेमंद होता है. खराब आटा सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है और कई परेशानियां पैदा कर सकता है. सभी के लिए यह समझना जरूरी है कि आटे की भी एक एक्सपायरी होती है, भले ही वह पैकेट पर साफ न लिखी हो. सही स्टोरेज और सावधानी से आप इसे लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं. इसलिए अगली बार आटा इस्तेमाल करने से पहले उसकी क्वालिटी जरूर जांच लें, ताकि आप और आपका परिवार सेफ रहे. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
बंगाल-असम में आकर्षण के पक्ष में क्यों उठी इतनी जबरदस्त वोटिंग? हिमंता विश्व सरमा ने बताई ये बड़ी वजह

विधानसभा चुनाव परिणाम 2026: हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार के “आदिग रुख” और विकास कार्यों के खिलाफ बांग्लादेशी मूल के आदिवासियों ने असम विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को दो-तिहाई बहुमत गठबंधन में अहम भूमिका निभाई है। मंगलवार को पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने कहा कि यह असम के “मूल निवासियों की जीत” है और राज्य में विकास की किताब आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने “डबल इंजन” सरकार और पिछले पांच वर्षों में विकास को जीत का बड़ा कारण बताया। अवलोकन के पक्ष में बढ़ा विश्वास शर्मा के अनुसार, उनकी सरकार ने असमिया “जाति” (समुदाय) की सुरक्षा का जो वादा किया था, उसे पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए, जिससे सांस्कृतिक और आर्थिक प्रगति हुई। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेशी मूल के नृत्यांगना के अंक में उनके कठोर रुख का प्रभाव प्रभावित हुआ। 126 कोलोराडो विधानसभा में राजग ने 102 कलाकारों की टुकड़ी को तीसरी बार सत्ता हासिल की, जिसमें भारतीय जनता पार्टी को 82 अवशेष मिले, जबकि सहयोगी ऑर्केस्ट्रा ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। सभी दोस्तों का दल समर्थन करता है मुख्यमंत्री ने दावा किया कि “जेन जेड” ने सभी कलाकारों के साथ मिलकर बीजेपी का समर्थन किया है, जो युवा पार्टी की जीत से स्पष्ट है। उन्होंने साथ ही कहा कि असम की पहचान विविधता से बनी है और लोगों की पहचान को लेकर विवाद खड़ा होना गलत है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर भी जोरदार कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्टी में ऐसे नेता कम हैं जो असम की जनता के प्रति भावना रखते हैं, यही उनके खराब प्रदर्शन का कारण बन रहे हैं। भाजपा को वोट शेयर में विभाजित करें इलेक्ट्रॉनिक्स आयोग के आंकड़ों के विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि असम विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशत में छोटे-छोटे बदलाव करके विधानसभा के नतीजों पर बड़ा असर डाला गया है। भारतीय जनता पार्टी को इस बार 37.81 प्रतिशत वोट मिले, जो 2021 के 33.21 प्रतिशत की तुलना में 4.6 प्रतिशत अधिक है। इस किराने का सामान विक्रय पैकेज में देखने को मिला और पार्टी ने 60 ली से 82 पुस्तकालय जीते, यानि 22 पुस्तकालय का खंड हुआ। इसके विपरीत, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थिति दिलचस्प रही। उनका वोट शेयर मामूली रूप से 29.67 प्रतिशत से बढ़कर 29.84 प्रतिशत हो गया, लेकिन इसके बावजूद उनकी बढ़त 29 से बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई। इसमें बताया गया है कि केवल वोट प्रतिशत ही नहीं, बल्कि वोटों का वितरण और क्षेत्रीय प्रभाव भी वोटों में अंतिम भूमिका बताया गया है। वहीं, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने कुल 102 लास्केट 126 लाकेसी विधानसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है, जो अब तक अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुका है और बहुमत के 64 नतीजों के आंकड़ों से काफी आगे है। यह चुनाव इस बात का उदाहरण है कि लगातार वोटों से भी पार्टी में बड़े बदलाव हो सकते हैं, खासकर तब जब मुकाबला कई हिस्सों में हो। ये भी पढ़ें: बोलीं सीएम पद से नहीं निकलीं तो संबित पात्रा ने टॉम की याद दिला दी क्या कहा?
पाचन से लेकर सर्दी-खांसी तक, कई समस्याओं में कारगर औषधि, जानिए हरसिंगार के चमत्कारी फायदे!

Last Updated:May 05, 2026, 21:43 IST गोंडा में पाया जाने वाला हरसिंगार (पारिजात) एक ऐसा औषधीय पौधा है, जो अपने अद्भुत गुणों के लिए जाना जाता है. आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन से लेकर बुखार, जोड़ों के दर्द, त्वचा और सर्दी-खांसी जैसी कई समस्याओं में किया जाता रहा है. गोंडा: हरसिंगार, जिसे पारिजात या रातरानी भी कहा जाता है, एक ऐसा औषधीय पौधा है जो अपने सुंदर फूलों और अद्भुत गुणों के लिए जाना जाता है. यह पौधा रात में खिलता है और सुबह तक इसके फूल जमीन पर गिर जाते हैं, जिससे इसकी खूबसूरती और भी बढ़ जाती है. लेकिन हरसिंगार सिर्फ सुंदरता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह कई प्रकार की बीमारियों में बेहद लाभकारी माना जाता है. आयुर्वेद में इसे एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में उपयोग किया जाता रहा है. बुखार में फायदेमंद: नंदू प्रसाद बताते हैं कि हरसिंगार की पत्तियों से तैयार किया गया काढ़ा बुखार में राहत देने में मददगार माना जाता है. खासकर मौसमी वायरल बुखार में यह शरीर को अंदर से मजबूत करता है और कमजोरी कम करने में सहायक होता है. पारंपरिक तौर पर इसका उपयोग मलेरिया जैसे बुखार में भी किया जाता रहा है. इसके औषधीय गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे शरीर जल्दी ठीक होने में सक्षम होता है. हालांकि, तेज बुखार या लंबे समय तक बुखार रहने की स्थिति में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें, बल्कि डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है. हरसिंगार का सेवन पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है. इसकी पत्तियों या फूलों से तैयार काढ़ा गैस, कब्ज और अपच जैसी आम समस्याओं में राहत देने में मदद कर सकता है. यह पेट की सफाई में सहायक होता है, जिससे पाचन क्रिया सुचारु रूप से चलती है. इसके नियमित और सीमित मात्रा में सेवन से पेट हल्का महसूस होता है और भूख भी सही लगती है. साथ ही, यह आंतों की कार्यक्षमता को सुधारने में मदद करता है, जिससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व अच्छे से मिल पाते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google नींद और मानसिक तनाव में मददगार: आज के भागदौड़ भरे जीवन में तनाव और नींद की समस्या आम हो गई है. ऐसे में हरसिंगार के फूल एक प्राकृतिक उपाय के रूप में मददगार साबित हो सकते हैं. इसके फूलों की हल्की और सुगंधित खुशबू मन को शांत करती है, जिससे तनाव कम होता है और मन को सुकून मिलता है. रात के समय इसकी खुशबू के आसपास रहने से नींद बेहतर आने में मदद मिल सकती है. यह मानसिक थकान को कम करता है और दिमाग को रिलैक्स करता है. नियमित रूप से इसके संपर्क में रहने से मन शांत और संतुलित बना रहता है. हालांकि, यदि नींद की समस्या लंबे समय तक बनी रहे या ज्यादा गंभीर हो, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. जोड़ों के दर्द में राहत: आजकल बदलती जीवनशैली और बढ़ती उम्र के कारण बहुत से लोग जोड़ों के दर्द और गठिया की समस्या से परेशान हैं. ऐसे में हरसिंगार की पत्तियां एक प्राकृतिक उपाय के रूप में फायदेमंद मानी जाती हैं. इसकी पत्तियों का काढ़ा या रस नियमित रूप से लेने से जोड़ों में होने वाला दर्द और सूजन कम हो सकती है. हरसिंगार में पाए जाने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) गुण शरीर को अंदर से राहत पहुंचाते हैं. यह जोड़ों की जकड़न को कम करने में मदद करता है और चलने-फिरने में आसानी देता है. साथ ही, इसके सेवन से हड्डियां भी मजबूत होती हैं, जिससे भविष्य में होने वाली समस्याओं का खतरा कम हो सकता है. अगर दर्द लंबे समय तक बना रहे या बहुत ज्यादा हो, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें और इसे सहायक उपाय के रूप में ही अपनाएं. कैसे करें उपयोग: हरसिंगार का उपयोग कई तरीकों से किया जा सकता है. पत्तियों का काढ़ा बनाकर पी सकते हैं, फूलों का पेस्ट बनाकर त्वचा पर लगा सकते हैं, पत्तियों का रस निकालकर सेवन कर सकते हैं, या सूखे फूलों का चूर्ण बनाकर इस्तेमाल कर सकते हैं. सावधानियां: नंदू प्रसाद बताते हैं कि हरसिंगार एक प्राकृतिक औषधि है, लेकिन इसका अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायक हो सकता है. गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोगों को इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए. त्वचा के लिए फायदेमंद: नंदू प्रसाद बताते हैं कि हरसिंगार के फूल और पत्तियां त्वचा की देखभाल के लिए काफी लाभकारी मानी जाती हैं. इनके पेस्ट को चेहरे या प्रभावित हिस्से पर लगाने से दाग-धब्बों में कमी आ सकती है और त्वचा साफ व निखरी हुई दिखती है. इसमें मौजूद एंटीबैक्टीरियल और एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं. नियमित उपयोग से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और मुंहासों जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है. हालांकि, किसी भी नई चीज़ को त्वचा पर लगाने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें, ताकि किसी तरह की एलर्जी से बचा जा सके. सर्दी-खांसी में राहत: हरसिंगार का काढ़ा सर्दी और खांसी की समस्या में काफी लाभकारी माना जाता है. इसके सेवन से गले की खराश कम होती है और कफ ढीला होकर बाहर निकलने में मदद मिलती है. यह शरीर को अंदर से गर्म रखने में सहायक होता है, जिससे बदलते मौसम में होने वाली परेशानियों से राहत मिलती है. इसके औषधीय गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करते हैं, जिससे बार-बार सर्दी-खांसी होने की संभावना कम हो सकती है. हालांकि, अगर खांसी या सर्दी लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
गर्मियों में फूड पॉइजनिंग का खतरा क्यों बढ़ जाता है? क्या यह जानलेवा कंडीशन, डॉक्टर से समझिए

Last Updated:May 05, 2026, 20:50 IST Food Poisoning Causes: गर्मियों में फूड पॉइजनिंग की समस्या बढ़ जाती है. फूड पॉइजनिंग दूषित या खराब खाने से होती है, जिसमें पेट दर्द, उल्टी और दस्त जैसे लक्षण दिखते हैं. फूड पॉइजनिंग का सही समय पर इलाज कराना जरूरी है, वरना यह जानलेवा हो सकता है. साफ-सफाई, ताजा खाना और सही स्टोरेज अपनाकर इस समस्या से आसानी से बचा जा सकता है. फूड पॉइजनिंग का सही समय पर इलाज न हो, तो कंडीशन गंभीर हो सकती है. Reasons Behind Food Poisoning: गर्मियों का मौसम अपने साथ कई समस्याएं लेकर आता है. गर्मी में फूड पॉइजनिंग के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो जाती है. फूड पॉइजनिंग खतरनाक कंडीशन है, जो हर उम्र के लोगों को शिकार बनाती है. यह समस्या तब होती है, जब हम बैक्टीरिया, वायरस, पैरासाइट या जहरीले पदार्थों से दूषित खाने या पानी का सेवन कर लेते हैं. गर्मियों में यह समस्या ज्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि गर्म और नमी वाला मौसम सूक्ष्मजीवों के पनपने के लिए अनुकूल होता है. कई बार लोग बाहर का खाना खाते हैं या घर में रखा बासी खाना खा लेते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता ने News18 को बताया गर्मी में तापमान ज्यादा होने के कारण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस बहुत तेजी से पनपते हैं. यही सूक्ष्मजीव खाने को जल्दी खराब कर देते हैं. अगर खाना लंबे समय तक बाहर रखा रहे या ठीक से स्टोर न किया जाए, तो उसमें हानिकारक बैक्टीरिया विकसित हो सकते हैं. यही दूषित खाना शरीर में पहुंचकर फूड पॉइजनिंग का कारण बनता है. गर्मियों में लोग बाहर का खाना और ठंडी ड्रिंक्स ज्यादा लेते हैं, जो कई बार साफ-सफाई के मानकों पर खरे नहीं उतरते. गंदे पानी से बने जूस, कटे हुए फल या सड़क किनारे मिलने वाले खाद्य पदार्थों में संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है. यही वजह है कि इस मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं. क्या होते हैं फूड पॉइजनिंग के लक्षण? डॉक्टर ने बताया फूड पॉइजनिंग के लक्षणों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त, बुखार और कमजोरी शामिल हैं. अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो इससे शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन हो सकता है. इससे कंडीशन गंभीर हो सकती है. छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह समस्या जल्दी बिगड़ सकती है. ज्यादातर मामलों में फूड पॉइजनिंग हल्की होती है और सही ट्रीटमेंट से ठीक हो जाती है. कुछ गंभीर मामलों में यह खतरनाक भी बन सकती है. खासकर जब शरीर में पानी की कमी बहुत ज्यादा हो जाए या संक्रमण फैल जाए, तब अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है. फूड पॉइजनिंग होने पर क्या करना चाहिए? डॉक्टर गुप्ता के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति को फूड पॉइजनिंग हो जाए, तो सबसे पहले शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है. ORS, नारियल पानी, नींबू पानी और हल्का भोजन लेने से शरीर को राहत मिलती है. मसालेदार और भारी भोजन से बचना चाहिए, ताकि पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव न पड़े. अगर उल्टी, दस्त या बुखार ज्यादा समय तक बना रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि सही समय पर इलाज न होने पर यह समस्या गंभीर हो सकती है. फूड पॉइजनिंग एक ऐसी समस्या है, जिसे थोड़ी सी सावधानी से आसानी से रोका जा सकता है. साफ-सफाई और ताजा भोजन से इस बीमारी से बच सकते हैं. फूड पॉइजनिंग से कैसे करें बचाव? एक्सपर्ट का मानना है कि फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए सबसे जरूरी है साफ-सफाई और सही खान-पान की आदतें अपनाना. हमेशा ताजा और अच्छी तरह पका हुआ खाना ही खाना चाहिए. फलों और सब्जियों को अच्छे से धोना चाहिए और पीने के पानी को उबालकर या फिल्टर करके इस्तेमाल करना चाहिए. बाहर का खाना खाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वह साफ-सुथरी जगह से हो और लंबे समय से खुला न रखा गया हो. अगर किसी भी तरह की दिक्कत हो, तो डॉक्टर से मिलकर अपना ट्रीटमेंट कराएं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
कैबिनेट बैठक में बोले मोदी, बंगाल में जीत का लंबे समय से था इंतजार, सत्य के साथ आती है बड़ी जिम्मेदारी

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम 2026: प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि बताई। उन्होंने कैबिनेट बैठक के दौरान कहा कि इस जीत का लंबे समय से इंतजार था और यह केवल पार्टी की जीत नहीं है, बल्कि जनता की जीत है। काफी समय से इसका इंतजार है प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सभी प्रौद्योगिकी और उद्योगपतियों के प्रयासों को उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और परिश्रम के बारे में बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता ने बदलाव के लिए मतदान किया है और इस प्रतिष्ठा का सम्मान करना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, मोदी ने अपने सहयोगियों को भी सत्य की याद दिलाते हुए बड़ी जिम्मेदारी दी है। उन्होंने कहा कि अब सभी को मिलकर पश्चिम बंगाल के विकास, सुशासन और एक खजाने के लिए काम करना चाहिए, ताकि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरा जा सके। बंगाल चुनाव की बड़ी उपलब्धि एक दिन पहले यानि सोमवार को बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद मोदी ने कहा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी जीत के बाद पार्टी के कलाकारों ने कहा कि “आज से बंगाल भयमुक्त हुआ है” और अब राज्य में बदलाव का समय है, बदलाव का नहीं। उन्होंने राजनीतिक शास्त्रा से अपील की कि वे हिंसा की राजनीति को खत्म करें, राज्य के भविष्य और विकास पर ध्यान दें। मोदी ने कहा कि पिछले कई दशकों से पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा, डर और जानमाल के नुकसान के लिए जा रहे थे, लेकिन इस बार शांतिपूर्ण मतदान हुआ और यह एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। प्रधानमंत्री ने अपने लगभग 50 मिनट के भाषण में यह भी कहा कि बंगाल अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां “भय नहीं, भविष्य की बात होनी चाहिए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में बदलाव की भावना नहीं, बल्कि विकास और सुशासन की भावना मिलनी चाहिए। इसके अलावा, मोदी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, कांग्रेस और अन्य शैले पर हॉलीवुड की ओर से कहा गया कि नारी शक्ति वंदन (संशोधन) का विरोध करने की वजह से उन्हें “कड़ी की सजा” मिली है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समाजवादी पार्टी भविष्य में भी महिलाओं के विनाश का सामना करना पड़ सकता है। ये भी पढ़ें: बोलीं सीएम पद से नहीं निकलीं तो संबित पात्रा ने टॉम की याद दिला दी क्या कहा?








