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अशोक ने 150 की रफ्तार से IPL में गेंद फेंकी:गांव में सड़क नहीं, भाई बोले-किसी को घर बुलाने में शर्म आती है

अशोक ने 150 की रफ्तार से IPL में गेंद फेंकी:गांव में सड़क नहीं, भाई बोले-किसी को घर बुलाने में शर्म आती है

IPL में अपनी 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बल्लेबाजों के पसीने छुड़ाने वाले अशोक शर्मा इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। लेकिन, राजस्थान की राजधानी जयपुर से महज 35 किलोमीटर दूर स्थित उनके गांव रामपुरा पहुंचने का रास्ता आज भी बेहद उबड़-खाबड़ है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से उतरने के बाद गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। गांव बुलाने में झिझक, पर जड़ों से गहरा लगाव अशोक के बड़े भाई अक्षय शर्मा मायूसी से कहते हैं, ‘हमें लोगों को यहां बुलाने में शर्म आती है, क्योंकि यहां कोई ढंग का रास्ता ही नहीं है।’ इन मुश्किलों के बावजूद, शर्मा परिवार को अपनी जड़ों और गांव से बेहद प्यार है। अक्षय बताते हैं कि करोड़ों रुपए की लीग का हिस्सा बनने के बाद भी अशोक सादगी पसंद करते हैं। वह अक्सर कहते हैं, ‘कुछ भी हो जाए, अपना गांव नहीं छोड़ेंगे।’ वे सुबह 5 बजे उठते हैं, मैदान पर दौड़ने जाते हैं, ट्रेनिंग करते हैं और घर का बना सादा खाना और छाछ उनकी डाइट का मुख्य हिस्सा है। अशोक ने पिता को इलेक्ट्रिक स्कूटर गिफ्ट दी अशोक के पिता नाथूलाल शर्मा आज भी खेतों में काम करते हैं। वे फटे हुए कपड़ों और मिट्टी से सने पैंट में ही अपने छोटे बेटे द्वारा गिफ्ट किए गए इलेक्ट्रिक स्कूटर से खेत से लौटते हैं। अशोक की मां लाली देवी मुस्कुराकर बताती हैं कि अशोक बचपन में बहुत शरारती था। वह घर का खूब सामान तोड़ता था, जिसकी वजह से अक्सर बड़े भाई अक्षय को मार खानी पड़ती थी। परिवार के सबसे चहेते अशोक ने पिछले साल केकेआर टीम में रहते हुए अपने जन्मदिन पर जिद करके ‘थार’ गाड़ी मांगी थी। अब यह एसयूवी गांव के बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र है और गांव के रास्तों को देखते हुए यह एक सही चुनाव भी साबित हुई है। तेज गेंदबाजी का शौक दोनों भाइयों को बचपन से था। अक्षय बताते हैं कि उन्हें अपनी रफ्तार से बल्लेबाजों को डराने में मजा आता था। इस जुनून के पीछे उनके चाचा रामदयाल शर्मा की प्रेरणा है, जो अपने समय में गांव के खूंखार तेज गेंदबाज माने जाते थे और एमएस धोनी की तरह लंबे बाल रखते थे। गुजरात टाइटंस ने 90 लाख में खरीदा पिछले साल गुजरात टाइटंस ने अशोक को 90 लाख रुपए में खरीदा और इस साल उन्होंने अपना डेब्यू किया। परिवार उन्हें पहली बार लाइव खेलते देखने के लिए 450 किलोमीटर दूर चंडीगढ़ गया। इसके बाद अहमदाबाद में अगले मैच के लिए अशोक ने परिवार को बुलाया, तो उन्होंने फ्लाइट की जगह जयपुर से 10 घंटे की ट्रेन यात्रा चुनी। जब अशोक के पिता नाथूलाल से पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी फ्लाइट में सफर किया है, तो उन्होंने धीरे से सिर हिलाते हुए कहा, ‘नहीं।’ इस पर बड़े भाई अक्षय ने चुटकी लेते हुए कहा कि पापा को प्लेन में बैठने से डर लगता है। पास ही चुपचाप बैठीं मां लाली देवी ने बातचीत में शामिल होते हुए बड़े भरोसे के साथ कहा कि एक दिन हम प्लेन में जरूर जाएंगे। वहीं, भाई अक्षय को उम्मीद है कि अशोक की इस शानदार सफलता की चमक से शायद अब रामपुरा गांव के नसीब में एक पक्की सड़क जरूर आ जाएगी।

न्यू चंडीगढ़ में IPL मैच की टिकट बिक्री शुरू:युवराज स्टैंड की सबसे सस्ती, सबसे महंगी ₹6500 की; इस सीजन का यहां आखिरी मुकाबला

न्यू चंडीगढ़ में IPL मैच की टिकट बिक्री शुरू:युवराज स्टैंड की सबसे सस्ती, सबसे महंगी ₹6500 की; इस सीजन का यहां आखिरी मुकाबला

मोहाली के न्यू चंडीगढ़ स्थित महाराजा यादवेंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में 28 अप्रैल को पंजाब और राजस्थान की टीम का मुकाबला होगा। PBKS और RR के मुकाबले के लिए टिकटों की ऑनलाइन बिक्री शुरू हो गई है। यहां सबसे सस्ती टिकट युवराज स्टैंड की मिलेगी, जिसकी कीमत 2500 रुपए है। इसके अलावा सबसे महंगी टिकट जियो नॉर्थ पवेलियन की 6500 रुपए की है। ऑफलाइन टिकट खरीदने के लिए फैंस को अभी इंतजार करना होगा। इसकी शुरूआत 24 अप्रैल से होगी। न्यू चंडीगढ़ में यह IPL के इस सीजन का आखिरी मुकाबला होगा। यहां हुए अब तक 3 मैचों में PBKS की टीम ही जीती है। फैंस के पास यहां मैच देखने का यह आखिरी मौका होगा। कहां से खरीदे टिकट, रेट में अंतर क्यों ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए डिस्ट्रिक्ट ऐप या वेबसाइट https://www.district.in/events/ipl-ticket-booking पर जाना होगा। वहां पर टाटा आईपीएल 2026 का मैच नंबर 40, पंजाब किंग्स वर्सेस राजस्थान रॉयल्स सिलेक्ट करना होगा। इसके बाद टिकट कैटेगरी सिलेक्ट करनी होगी। एक व्यक्ति एक समय में सिर्फ एक ही टिकट बुक कर सकता है। वेबसाइट की तरफ से एक ऑनलाइन सिस्टम बनाया गया है, जिसमें 9 से 10 मिनट के अंदर टिकट बुकिंग पूरी करनी होगी, अन्यथा दोबारा से साइट पर विजिट करना होगा। ऑफलाइन टिकट के लिए स्टेडियम के बाहर बने बॉक्स ऑफिस पर अपना आईडी प्रूफ साथ में लेकर जाना होगा, उसके बाद टिकट खरीद सकते हैं। ₹2500 रुपए वाली टिकट ग्राउंड से सबसे दूर है। ₹2750 वाली टिकट पिच के बिल्कुल सामने वाली टिकट है, जबकि ₹3500 में ग्राउंड की साइड में सबसे करीब वाली टिकट है। वहीं ₹6500 में ग्राउंड के सबसे करीब और पिच के सामने वाली टिकट मिलती है। पंजाब टॉप पर, राजस्थान चौथे नंबर पर IPL टूर्नामेंट में दोनों टीमों की परफॉर्मेंस देखें को पंजाब की टीम अब तक 6 मैच खेली है। जिसमें से 5 मैच जीते हैं। एक मैच बारिश की वजह से नहीं हो सका। 11 पाइंट के साथ पंजाब की टीम टेबल में टॉप पर है। पंजाब टीम इस सीजन की सबसे कंसिस्टेंट टीम और IPL टाइटल की सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रही है। राजस्थान की टीम फिलहाल चौथे नंबर पर है। 6 मैचों में राजस्थान ने 4 मुकाबले जीते, जबकि 2 में उसे हार मिली। राजस्थान के 8 पॉइंट हैं। राजस्थान की टीम भी बढ़िया खेल रही है। उन्हें प्लेऑफ का बड़ा दावेदार माना जा रहा है। दूसरे नंबर पर RCB है, जिसने 4 में से 2 मैच जीते और उसके भी 8 पॉइंट हैं लेकिन नेट रन रेट की वजह से वह राजस्थान से एक नंबर ऊपर है। दोनों टीमों के टॉप 4 प्लेयर जानिए… पंजाब किंग्स: राजस्थान रॉयल्स 21 अप्रैल तक के हिसाब से टूर्नामेंट के टॉप प्लेयर्स… 38 हजार की केपिसिटी, पहला मुकाबला IPL का ही हुआ न्यू चंडीगढ़ क्रिकेट स्टेडियम में 38 हजार दर्शकों के बैठने की केपिसिटी है। यह स्टेडियम साल 2021 में बनकर तैयार हुआ था। यहां पहला बड़ा मुकाबला मार्च 2024 में खेला गया था। तब भी यहां IPL का ही मुकाबला हुआ था। इसके बाद पिछले साल सितंबर 2025 में इस ग्राउंड पर पहला इंटरनेशनल मुकाबला खेला गया। यह वन डे मैच था, जो इंडिया और ऑस्ट्रेलिया की विमेन टीम के बीच हुआ था।

मीठा खरबूजा: गर्मियों में भूलकर भी न खाएं दूध और खरबूजा, सेहत को हो सकता है नुकसान; जानिए इसके साइड इफेक्ट्स

मीठा खरबूजा: गर्मियों में भूलकर भी न खाएं दूध और खरबूजा, सेहत को हो सकता है नुकसान; जानिए इसके साइड इफेक्ट्स

मीठा खरबूजा: गर्मियों में ठंडक पाने के लिए लोग खरबूजा और दूध खाना पसंद करते हैं। लेकिन इन दोनों का एक साथ मेल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आयुर्वेद के अनुसार, अलग-अलग नेचर के इन खाद्य पदार्थों का संयोजन पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डाला जा सकता है। आइए जानते हैं इस संयोजन से क्या-क्या हो सकता है नुकसान। खरबूजा पाउडर और जल्दी पचने वाला फल होता है, जबकि दूध को पचने में सबसे ज्यादा समय लगता है। जब इन दोनों को एक साथ लिया जाता है, तो पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे गैस, अपच और ब्लोटिंग जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इस कॉम्बिनेशन को लेने के बाद कई लोगों के शरीर में भारीपन और आलस महसूस होता है। मूल, दोनों खाद्य पदार्थ पदार्थ समूह डी नमूने को धीमी कर देते हैं, जिससे मूल टिकाऊ बनी रह सकती है। आयुर्वेद के अनुसार, अलग-अलग तासीर वाले खाद्य पदार्थ एक साथ खाने से शरीर में टॉक्सिन बन जाते हैं। खरबूजा और दूध का मिश्रण भी इसी तरह आता है, जो लंबे समय तक शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। एलर्जी और पेट से जुड़ी परेशानियाँ कुछ लोगों को इस संयोजन से एलर्जी, एलर्जी-खांसी या त्वचा संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके अलावा पेट दर्द और दस्त संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं, खासकर लोगों में पाचन तंत्र खराब हो जाता है। खरबूजा को सही तरीके से खाने का तरीका विशेषज्ञों की सलाह है कि खरबुजे को अकेले ही खाना सबसे अच्छा माना जाता है। अगर आप दूध पिलाना चाहते हैं, तो दोनों के बीच कम से कम 30 से 60 मिनट का अंतर रखना जरूरी है, ताकि सही तरीके से पाचन किया जा सके और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी तरह के खतरे का पता लगाया जा सके।

लू के थपेड़ों में भी रखेगा ठंडा! ये देसी सुपर ड्रिंक बन गई नेचुरल कूलर, एक बार पिएं तो भूल जाएंगे AC

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Last Updated:April 22, 2026, 07:02 IST Bikaner Hindi News: तेज गर्मी और लू के बीच शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी होता है. ऐसे में यह देसी सुपर ड्रिंक प्राकृतिक कूलर का काम करती है. पारंपरिक सामग्री से तैयार यह पेय न केवल शरीर का तापमान नियंत्रित करता है, बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व लू से बचाव में मदद करते हैं और पाचन को भी बेहतर बनाते हैं. इसका स्वाद इतना ताज़गीभरा होता है कि एक बार पीने के बाद इसे बार-बार बनाने का मन करता है. यह ड्रिंक गर्मियों में सेहत और स्वाद दोनों का बेहतरीन संयोजन है. ख़बरें फटाफट बीकानेर. भीषण गर्मी, तेज लू और तपती धूप के बीच जहां लोग राहत के उपाय तलाशते हैं, वहीं बीकानेर की परंपराएं सदियों से इसका सरल और देसी समाधान देती आई हैं. आखातीज यानी अक्षय तृतीया और आखाबीज के अवसर पर यहां हर घर में बनने वाली ‘इमलाणी’ (इमली का पानी) न केवल एक पेय है, बल्कि संस्कृति, परंपरा और सेहत का अद्भुत संगम भी है. बीकानेर में आखातीज का पर्व शहर के स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. इस दिन घर-घर में इमली का पानी बनाकर पीने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. तपती गर्मी में यह पेय लोगों को ठंडक, ताजगी और ऊर्जा प्रदान करता है, इसलिए इसे प्राकृतिक कूलर भी कहा जाता है. लू के असर को कम करतास्थानीय महिला सुनीता श्रीमाली बताती हैं कि इमलाणी बनाना जितना आसान है, उतना ही लाभकारी भी. सबसे पहले इमली को कुछ घंटों तक पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद उसे मसलकर छान लिया जाता है, जिससे उसका खट्टा रस पानी में घुल जाता है. फिर इसमें गुड़ या चीनी मिलाई जाती है और स्वाद बढ़ाने के लिए भुना हुआ जीरा, इलायची पाउडर और काली मिर्च डाली जाती है. ठंडा करके परोसा गया यह पेय शरीर को तुरंत राहत देता है और लू के असर को कम करता है. गर्मी से होने वाली थकान को दूर करतेबीकानेर में इस पारंपरिक पेय को ‘अमलवानी’ के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि आखातीज के दिन इसका सेवन करने से लू नहीं लगती और शरीर हाइड्रेट रहता है. तेज गर्मी में जब डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ जाती है, तब यह पेय शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में बेहद कारगर साबित होता है.इमलाणी सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं. इमली पाचन तंत्र को मजबूत करती है और गैस व अपच जैसी समस्याओं से राहत देती है. गुड़ शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है, वहीं मसालों में मौजूद गुण इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं. यह पेय शुगर और कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखने में भी सहायक माना जाता है. साथ ही, इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को तरोताजा बनाए रखते हैं और गर्मी से होने वाली थकान को दूर करते हैं. सबसे खास बात यह है कि इमलाणी एक सस्ता, सुलभ और घरेलू पेय है, जिसे हर कोई आसानी से बना सकता है. किसी महंगे उपकरण या विशेष सामग्री की जरूरत नहीं होती, इसलिए यह आमजन के बीच बेहद लोकप्रिय है. हालांकि, विशेषज्ञ संतुलित मात्रा में सेवन की सलाह देते हैं, ताकि इसके फायदे सही तरीके से मिल सकें. About the Author Jagriti Dubey With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18 in Rajasthan Team. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Bikaner,Rajasthan First Published : April 22, 2026, 07:02 IST

गर्मी में पसीने से आती है भयंकर बदबू, नहाते समय अपनाएं 5 गजब की ट्रिक्स, दिनभर रहेंगे फ्रेश

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Last Updated:April 22, 2026, 06:31 IST Simple Tricks for Body Odor: गर्मी में पसीना बहुत आता है और इसकी वजह से बदबू आने लगती है. गर्मियों में पसीने की बदबू से बचने के लिए नहाते समय नीम, फिटकरी, नींबू और एंटी बैक्टीरियल साबुन का उपयोग करना फायदेमंद होता है. ये उपाय बैक्टीरिया को खत्म कर दिनभर ताजगी बनाए रखने में मदद करते हैं. नहाते वक्त एंटी-बैक्टीरियल साबुन यूज करने से पसीने में बदबू नहीं आएगी. Tips To Get Rid of Body Odor: गर्मियों का मौसम आते ही पसीना बढ़ना कॉमन बात है, लेकिन इसके साथ आने वाली बदबू कई बार शर्मिंदगी का कारण बन जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो पसीने में बदबू नहीं होती है, लेकिन स्किन पर मौजूद बैक्टीरिया पसीने के साथ मिलते हैं, तब बदबू पैदा होती है. ऐसे में सिर्फ नहाना ही काफी नहीं होता, बल्कि नहाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि आप दिनभर फ्रेश और आत्मविश्वासी महसूस कर सकें पसीने की बदबू से कैसे पाएं छुटकारा | Tips To Get Rid of Body Odor एंटी-बैक्टीरियल साबुन का इस्तेमाल पसीने की बदबू से निजात पाने का सबसे आसान तरीका है. एंटी-बैक्टीरियल साबुन त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने में मदद करता है, जिससे बदबू की समस्या घटती है. खासकर अंडरआर्म्स, गर्दन और पैरों जैसे हिस्सों को अच्छे से साफ करना जरूरी है, क्योंकि यहीं सबसे ज्यादा पसीना और बैक्टीरिया जमा होते हैं. नीम के पानी से नहाने से भी पसीने की दुर्गंध कम हो सकती है. नीम में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण होते हैं, जो त्वचा को साफ रखते हैं और बदबू पैदा करने वाले कीटाणुओं को खत्म करते हैं. आप नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर ठंडा कर लें और फिर उस पानी से नहाएं. यह तरीका काफी कारगर साबित होता है. फिटकरी का उपयोग करने से भी आपको पसीने की बदबू से राहत मिल सकती है. फिटकरी पसीने की दुर्गंध को कंट्रोल करने में बेहद मददगार होती है. नहाने के बाद हल्की गीली त्वचा पर फिटकरी को रगड़ने से यह पसीने के बैक्टीरिया को खत्म करती है और दिनभर फ्रेशनेस बनाए रखती है. यह एक पुराना लेकिन बेहद असरदार घरेलू नुस्खा है. नींबू का इस्तेमाल करने से पसीने से छुटकारा मिल सकता है. नींबू में मौजूद साइट्रिक एसिड त्वचा के pH स्तर को संतुलित करता है और बदबू पैदा करने वाले बैक्टीरिया को खत्म करता है. नहाने से पहले या बाद में नींबू का रस अंडरआर्म्स पर लगाने से पसीने की बदबू काफी हद तक कम हो जाती है. नींबू यूज करने से कई समस्याओं से निजात मिल सकती है. पसीने की बदबू से बचने के लिए सही तरीके से शरीर को सुखाना और साफ कपड़े पहनना जरूरी है. नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखा लें, क्योंकि नमी बैक्टीरिया के बढ़ने का कारण बनती है. साथ ही सूती कपड़े पहनें, जो पसीना सोखते हैं और त्वचा को सांस लेने देते हैं, जिससे बदबू की समस्या कम होती है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 22, 2026, 06:31 IST

अमेरिका ने पाकिस्तान की अपील पर सीजफायर बढ़ाया:ट्रम्प बोले- ईरान में एकजुटता नहीं इसलिए वक्त लग रहा, अभी वहां हमले नहीं करेंगे

अमेरिका ने पाकिस्तान की अपील पर सीजफायर बढ़ाया:ट्रम्प बोले- ईरान में एकजुटता नहीं इसलिए वक्त लग रहा, अभी वहां हमले नहीं करेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका, पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ा रहा है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान के अंदर इस समय नेतृत्व और सरकार में एकजुटता नहीं है। ऐसे वक्त में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ ने उनसे ईराम पर कुछ समय तक हमले रोकने की अपील की, ताकि ईरान को साझा प्रस्ताव तैयार करने का वक्त मिल सके। ट्रम्प ने कहा कि इस अपील को मानते हुए उन्होंने अमेरिकी सेना को फिलहाल हमला रोकने का आदेश दिया है। हालांकि, सेना को पूरी तरह तैयार रहने को भी कहा गया है और ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए नाकेबंदी (ब्लॉकेड) जारी रहेगी। उन्होंने साफ किया कि सीजफायर तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान अपनी ओर से एक ठोस और एकजुट प्रस्ताव नहीं दे देता और बातचीत पूरी नहीं हो जाती, चाहे उसका नतीजा कुछ भी निकले। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग गुजर जाइए…

दूल्हा-दुल्हन से बोले मंत्री- अपने पार्टनर के साथ ही जाना:लेडी टीआई और महापौर में तू-तू मैं-मैं; पूर्व मंत्री बोले- मंत्री मनमानी कर रहीं

दूल्हा-दुल्हन से बोले मंत्री- अपने पार्टनर के साथ ही जाना:लेडी टीआई और महापौर में तू-तू मैं-मैं; पूर्व मंत्री बोले- मंत्री मनमानी कर रहीं

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। नवविवाहित जोड़ों को मंत्री की अनोखी सलाह नरसिंहपुर जिले के करेली में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में पहुंचे मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने नवविवाहित जोड़ों को एक अलग ही अंदाज में सलाह दे डाली। मंच से उन्होंने कहा कि यहां करीब 200 शादियां हुई हैं, ऐसे में पहचान का संकट हो सकता है। विदाई के समय अपने-अपने जोड़े के साथ ही जाएं। कहीं ऐसा न हो कि भूलवश अगल-बगल वाले के साथ ही निकल पड़ें। मंत्री ने यह बात भले ही मजाकिया लहजे में कही, लेकिन अब उनके इस बयान पर लोग खूब चटकारे ले रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि मंत्री जी ने पहले ही चेतावनी दे दी है, अब कोई गड़बड़ी न हो। अपने-अपने पार्टनर के साथ ही जाएं। बाद में ये मत कहना कि बताया नहीं। उधर, जैसे ही बात आगे बढ़ी, सियासत भी गर्मा गई। विपक्ष ने मंत्री के बयान को हाथों-हाथ लेते हुए इसे मंच की गरिमा के खिलाफ और आपत्तिजनक बताया। साथ ही इसे नवविवाहित जोड़ों का अपमान भी करार दिया। महापौर और महिला टीआई के बीच नोकझोंक मुरैना में महापौर शारदा सोलंकी और एक महिला टीआई के बीच हुई बहस का मामला चर्चा में है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें महापौर नाराजगी जताते हुए पुलिसकर्मियों से बहस करती दिखाई दे रही हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुरैना में कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के घर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देने पहुंचे थे। इसी दौरान महापौर शारदा सोलंकी भी वहां पहुंचीं। हालांकि, मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इस बात पर उनकी सबलगढ़ थाना प्रभारी (टीआई) राजकुमारी परमार से कहासुनी हो गई। टीआई ने महापौर से कहा कि ये किसी का घर है, मैडम। इस पर महापौर ने आपत्ति जताते हुए कहा- ये मेरा भी घर है। मैं नगर की प्रथम नागरिक हूं, भाजपा की वरिष्ठ नेता हूं। मंत्री से मेरे पारिवारिक संबंध हैं और प्रदेश के मुखिया आए हैं, ऐसे में प्रोटोकॉल के तहत मुझे वहां होना चाहिए। बाद में अन्य नेताओं के हस्तक्षेप के बाद महापौर को अंदर जाने की अनुमति दे दी गई। हालांकि, इस दौरान महापौर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- मजाक बना रखा है इन लोगों ने, मैं एक घंटे से खड़ी हूं। वहीं, टीआई राजकुमारी परमार ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी के साथ अभद्रता या बहस नहीं की, बल्कि सिर्फ अपनी ड्यूटी निभाई। महापौर के एक घंटे इंतजार वाले बयान पर उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा- एक घंटा तो मुख्यमंत्री जिले में भी नहीं रुके। पूर्व मंत्री का मंच से निशाना, भाजपा में खींचतान मंडला जिले की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिली है। पूर्व मंत्री देव सिंह सैयाम ने बिना नाम लिए मंत्री संपतिया उईके पर तीखा हमला बोल दिया। उनके बयान से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। दरअसल, सैयाम नैनपुर में आयोजित एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मंच से ही मंत्री और स्थानीय विधायक पर मनमानी करने का आरोप लगाया। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर उन्होंने नाराजगी जताई। पूर्व मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा और भेदभाव किसी भी सरकारी कार्यक्रम में ठीक नहीं है। सभी को सम्मान मिलना चाहिए और इस तरह का रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उन्होंने एक साल पहले हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय मुख्यमंत्री भी मौजूद थे, लेकिन उन्हें मंच पर जगह नहीं दी गई। सैयाम ने कहा कि मंत्री रहते हुए उन्होंने ही इस योजना की शुरुआत की थी, इसके बावजूद उन्हें मंच से दूर रखा गया, जो अनुचित है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उस कार्यक्रम में सरपंच तक मंच पर मौजूद थे, लेकिन पूर्व मंत्री होने के बावजूद उन्हें मंच पर नहीं जाने दिया गया। गौरतलब है कि जिस सरपंच का जिक्र किया जा रहा है, वह मंत्री संपतिया उईके की बेटी हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम को लोग भाजपा के अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि कम से कम मंडला में तो ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ का भाजपा का नारा पूरी तरह से जमीन पर उतरता नजर नहीं आ रहा। जब भाजपा पार्षद को खुद उठाना पड़ा कचरा भोपाल में एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। हैरानी की बात यह रही कि यहां भाजपा पार्षद को ही खुद कचरा उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। दरअसल, एक शादी समारोह के बाद इलाके में कचरे का बड़ा ढेर लग गया था, जिससे लोगों का वहां से गुजरना मुश्किल हो रहा था। स्थानीय लोगों ने भी परेशानी जताई। इस पर भाजपा पार्षद अरविंद वर्मा ने स्वास्थ्य अधिकारी और सफाई दरोगा को कई बार फोन कर कचरा उठाने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि वे सुबह से लगातार संपर्क करने की कोशिश करते रहे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। जब दोपहर तक भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्षद ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया और कचरा उठाना शुरू कर दिया। इसी दौरान नगर निगम का कचरा वाहन मौके पर पहुंच गया, जिसके बाद पार्षद ने कचरा उसमें डाल दिया। यह घटना न सिर्फ सफाई व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कभी-कभी जनप्रतिनिधियों को खुद ही मैदान में उतरना पड़ता है। इनपुट सहयोग – आकाश कौरव (नरसिंहपुर), दुष्यंत सिकरवार (मुरैना), विवेक अग्निहोत्री (मंडला), ईश्वर परमार (भोपाल) ये भी पढ़ें – भाजपा विधायक की धमकी- SDOP का बंगला गोबर से भर दूंगा: मंत्री के लिए महिला नेताओं को छोड़नी पड़ी कुर्सी शिवपुरी के पिछोर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने एक्टर सनी देओल को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि मेरा मुक्का पहले ढाई किलो का था, अब यह ढाई सौ किलो

चंडीगढ़ पुलिस के सामने पेश नहीं हुईं मधु किश्वर:मिसलीडिंग VIDEO केस में होनी थी पूछताछ, घर जाकर थमाया गया था नोटिस

चंडीगढ़ पुलिस के सामने पेश नहीं हुईं मधु किश्वर:मिसलीडिंग VIDEO केस में होनी थी पूछताछ, घर जाकर थमाया गया था नोटिस

फेमस राइटर मधु किश्वर आज चंडीगढ़ पुलिस के सामने पेश नहीं हुई। चंडीगढ़ पुलिस ने मंगलवार को दिल्ली में राइटर घर जाकर जांच में शामिल होने के लिए नोटिस दिया था। राइटर मधु किश्वर के मुताबिक, पुलिस टीम ने 20 अप्रैल की रात उनको नोटिस दिया। दो महिला पुलिसकर्मी समेत पांच पुलिसकर्मी उनके आवास स्थित ऑफिस पहुंचे थे। राइटर ने कहा- मैं उस समय एक वीडियो रिकॉर्ड कर रही थी, इसलिए मैंने उन्हें कुछ देर इंतजार करने को कहा। हालांकि, इतनी रात को पुलिस का आना अच्छे संकेत नहीं देता। दरअसल, मधु किश्वर समेत अन्य लोगों पर चंडीगढ़ के सेक्टर-26 थाने में 20 अप्रैल को ही एक शिकायत पर FIR दर्ज की गई। शिकायत में कहा गया कि कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने एक वीडियो को गलत पहचान के साथ वायरल किया और उसमें अश्लील व भ्रामक शब्द जोड़कर पेश किया। इससे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की छवि खराब करने की कोशिश की गई और समाज में भ्रम फैलाया गया। चंडीगढ़ पुलिस रात में दिल्ली पहुंची दिल्ली में मधु किश्वर के दफ्तर में उनके और पुलिस अधिकारियों के बीच बात हुई। इस दौरान मधु किश्वर ने कहा कि न उनकी तरफ से कोई दुर्भावना थी और न दूसरी तरफ से। उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस से पूछा कि क्या वह स्थानीय पुलिस के साथ नहीं आए हैं? इस पर चंडीगढ़ से आई महिला पुलिस अधिकारी ने बताया कि उनकी टीम साथ आई है। मधु किश्वर ने इस टीम को कानून का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं के घर पर सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले पुलिस न तो आ सकती है और न ही उन्हें अरेस्ट कर सकती है। उन्होंने इस मुद्दे पर पुलिस टीम के सीनियर अधिकारी से भी बात की तो उसने बताया कि ये टीम चंडीगढ़ में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में सिर्फ नोटिस देने आई है। इस पर उन्होंने कहा कि कानून का पालन करते हुए दिन में आना चाहिए। मधु किश्वर के मुताबिक, दोनों पक्षों ने शालीनता और शिष्टाचार बनाए रखा। जैसे ही उन्हें एफआईआर की कॉपी मिलेगी, वह चंडीगढ़ में दर्ज इस केस में शामिल होंगी। 3 पॉइंट में जानिए पूरा मामला

पंजाबी महिला अमेरिका की जेल में कैद:35 साल बाद अचानक गिरफ्तार, एयरपोर्ट पर हथकड़ी लगाई; बेटा US आर्मी में अफसर

पंजाबी महिला अमेरिका की जेल में कैद:35 साल बाद अचानक गिरफ्तार, एयरपोर्ट पर हथकड़ी लगाई; बेटा US आर्मी में अफसर

अमेरिका के टेक्सास में रहने वाली पंजाबी मूल की कोर्ट इंटरप्रेटर मीनू बत्रा को 35 साल बाद अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। अमेरिकन इमिग्रेशन एजेंसी ने उन्हें एयरपोर्ट पर हथकड़ी लगाकर हिरासत में लिया और जेल भेज दिया। मीनू पर इमिग्रेशन कानून का उल्लंघन कर अमेरिका में रहने का आरोप है, जिसके चलते अब उनके डिपोर्टेशन की तैयारी की जा रही है। हालांकि उनके वकीलों का दावा है कि मीनू को ‘विदहोल्डिंग ऑफ रिमूवल’ की कानूनी सुरक्षा मिली हुई है और कोर्ट पहले ही उन्हें भारत न भेजने की बात स्पष्ट कर चुका है। हालांकि कोर्ट ने अभी तक उनके डिपोर्टेशन को लेकर कोई अंतिम आदेश जारी नहीं किया है। मीनू टेक्सास कोर्ट में पंजाबी, हिंदी और उर्दू की इंटरप्रेटर हैं और उनका बड़ा बेटा अमेरिकी सेना में अधिकारी है। कब क्या हुआ और क्यों फंसीं मीनू, सिलसिलेवार जानिए… सोशल मीडिया के लिए खिंचवाई फोटो मीनू बत्रा के वकील दीपक आहलूवालिया ने कहा कि अधिकारियों ने उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया। उन्होंने जबरन मीनू के हाथ पीछे करवाकर फोटो खिंचवाई ताकि वह अपराधी लगें और कहा कि यह सोशल मीडिया के लिए है। जेल के अंदर मीनू अब अन्य महिलाओं की मदद कर रही हैं, जो अंग्रेजी नहीं जानतीं। वे बताती हैं कि वहां लोग डिप्रेशन में हैं और कई ने आत्महत्या की कोशिश भी की है। सरकार का तर्क, मीनू के पास नहीं है नागरिकता कोर्ट में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) का कहना है कि मीनू के पास 2000 का फाइनल रिमूवल ऑर्डर है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्क परमिट होने का मतलब यह नहीं है कि कोई अमेरिका में कानूनी रूप से हमेशा रह सकता है। सरकार अब प्रवासियों को सेल्फ डिपोर्ट के लिए कह रही है। कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया दीपक आहलूवालिया का कहना है कि विदहोल्डिंग ऑफ रिमूवल मिलने के बाद इसे दो तरीकों से ही वापस लिया जा सकता है। यदि किसी ने अपराध किया हो तो आईसीई यह मोशन फाइल कर सकती है कि इसे वापस लिया जाए। दूसरा है ‘कंट्री कंडीशन’ फाइल किया जाना, जिसमें कहा जाता है कि हालात अब बदल गए हैं और मीनू को अपने मूल देश में कोई खतरा नहीं है। उनका कहना है कि इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा ऐसा कोई भी मोशन फाइल नहीं किया गया और न ही 26 वर्षों के दौरान आईसीई द्वारा उन्हें कोई नोटिस भेजा गया। मीनू बत्रा के पक्ष में आए ये लोग अमेरिकन ट्रांसलेटर्स एसोसिएशन पर मौजूद मीनू बत्रा की प्रोफाइल के मुताबिक उनके पास टेक्सास स्टेट से मास्टर लेवल कोर्ट इंटरप्रेटर का लाइसेंस मौजूद है। स्थानीय राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अनुवादकों के संगठनों ने भी मीनू को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ आवाज उठाई है। मीनू बत्रा टेक्सास एसोसिएशन ऑफ ज्यूडिशियरी इंटरप्रेटर्स एंड ट्रांसलेटर्स’ (TAJIT) की बोर्ड मेंबर भी रह चुकी हैं।

केदारनाथ में खच्चरों के गोबर से तैयार होंगे फ्यूल पैलेट्स:होटलों में कोयले की जगह इस्तेमाल होगा-गंदगी कम होगी; पिरूल मिलाकर बनाने का प्लान

केदारनाथ में खच्चरों के गोबर से तैयार होंगे फ्यूल पैलेट्स:होटलों में कोयले की जगह इस्तेमाल होगा-गंदगी कम होगी; पिरूल मिलाकर बनाने का प्लान

केदारनाथ में खच्चरों के गोबर से अब चूल्हा जलेगा। गैस संकट के बीच उत्तराखंड सरकार ने ऐसा मास्टरस्ट्रोक चलाया है, जिससे एक साथ चार बड़ी समस्याओं एलपीजी की किल्लत, प्रदूषण, गंदगी और जंगल की आग का समाधान किया जाएगा। चारधाम यात्रा शुरू होते ही केदारनाथ में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी से होटल-ढाबा संचालक परेशान हैं और मजबूरी में डीजल-कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस स्थिति से राहत देने के लिए सरकार ने केदारनाथ ट्रेक रूट पर खच्चरों के गोबर और चीड़ की पत्तियों से ‘फ्यूल पेलेट्स’ बनाने की योजना चलाने जा रही है। इन पेलेट्स से चलने वाले चूल्हे दिए जाएंगे, जिससे गैस पर निर्भरता घटेगी और साथ ही प्रदूषण, गंदगी व जंगल की आग जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। 3 पॉइंट्स में जानिए ‘पूप पावर’ मॉडल 1. गोबर का कलेक्शन और वैज्ञानिक ट्रीटमेंट केदारनाथ ट्रेक रूट पर चलने वाले 8 से 12 हजार खच्चरों के गोबर को व्यवस्थित तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। इसके बाद मशीनों से इसका तरल हिस्सा अलग कर वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट किया जाएगा, ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान न हो और सुरक्षित रूप से इसका उपयोग किया जा सके। 2. पिरुल के साथ 50:50 अनुपात में प्रोसेसिंग ट्रीटमेंट के बाद सूखे गोबर को जंगलों से लाई गई चीड़ की सूखी पत्तियों (पिरुल) के साथ 50:50 अनुपात में मिलाया जाएगा। इससे ईंधन की गुणवत्ता और उसकी जलने की क्षमता बढ़ेगी। 3. फ्यूल पेलेट्स बनेंगे, चूल्हे-बॉयलर में इस्तेमाल तैयार मिश्रण को मशीनों के जरिए प्रोसेस कर ‘फ्यूल पेलेट्स’ बनाए जाएंगे। इन पेलेट्स का इस्तेमाल खास डिजाइन वाले चूल्हों और बॉयलरों में होगा, जिससे खाना पकाने और पानी गर्म करने जैसी जरूरतें पूरी होंगी। अब जानिए प्रोजेक्ट के चार बड़े फायदे 1. नदियां होंगी साफ, प्रदूषण पर लगेगा ब्रेक अब तक खच्चरों का गोबर सीधे मंदाकिनी समेत अन्य नदियों में बह जाता था, जिस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) भी सख्त आपत्ति जता चुका है। इस प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद गोबर का 100% निस्तारण प्लांट में ही होगा, जिससे नदियों में जाने वाला कचरा रुकेगा और जल प्रदूषण में बड़ी कमी आएगी। 2. यात्रियों को मिलेगा साफ और आरामदायक ट्रेक केदारनाथ ट्रेक रूट पर गोबर के कारण बदबू, गंदगी और फिसलन आम समस्या रही है। बारिश के दौरान यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ता है। गोबर हटने से ट्रेक साफ होगा, फिसलन कम होगी और यात्रियों के लिए सफर ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगा। 3. जंगल में लगने वाली आग पर मिलेगा कंट्रोल उत्तराखंड में गर्मियों में लगने वाली जंगल की आग का बड़ा कारण चीड़ की सूखी पत्तियां यानी पिरुल हैं। इस प्रोजेक्ट में पिरुल की बड़ी मात्रा में खपत होगी, जिससे जंगलों में ज्वलनशील कचरा कम होगा और आग लगने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण मिल सकेगा। 4. कड़ाके की ठंड में भी मिलेगा 24 घंटे गर्म पानी केदारनाथ में तापमान अक्सर शून्य के आसपास रहता है, जिससे यात्रियों को काफी दिक्कत होती है। अब इसी ‘फ्यूल पेलेट’ से बॉयलर चलाए जाएंगे, जिससे पीने और हाथ-मुंह धोने के लिए 24 घंटे गर्म पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। महिलाओं के लिए कमाई का बड़ा मौका इस योजना का सबसे मजबूत पहलू इसका आर्थिक मॉडल है, जो स्थानीय लोगों खासकर महिलाओं के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनकर सामने आ रहा है। पिरुल (चीड़ की सूखी पत्तियां) इकट्ठा करने वाले लोगों को सरकार पहले से 10 रुपए प्रति किलो देती है, वहीं अब इस योजना के तहत उन्हें 2 रुपए प्रति किलो का अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ेगी। पूरे प्रोजेक्ट के संचालन में स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका होगी। ये समूह गोबर इकट्ठा करने से लेकर फ्यूल पेलेट्स बनाने तक की प्रक्रिया को संभालेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस मॉडल की सफलता का उदाहरण पौड़ी जिले के नैनी डांडा में पहले से देखा जा चुका है, जहां महिलाओं द्वारा संचालित एक प्लांट का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अब इसी मॉडल को जखोली और सोनप्रयाग जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है, जिससे रुद्रप्रयाग और आसपास के इलाकों में महिलाओं और युवाओं के लिए स्थायी आय के नए रास्ते खुलेंगे। देश में पहली बार ऐसा प्रयोग हालांकि वैष्णो देवी में कुछ प्रयोग हुए हैं, लेकिन खच्चर के गोबर और पिरुल का 50:50 फॉर्मूला देश में पहली बार उत्तराखंड में लागू हो रहा है। कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। अगर यह पायलट सफल रहा, तो अगले साल इसे यमुनोत्री समेत अन्य तीर्थ मार्गों पर भी लागू किया जाएगा। ——————- ये खबर भी पढ़ें : चारधाम यात्रा रूट पर 16 सुविधा केंद्र बने खंडहर:खिड़कियों के कांच टूटे, गेट पर झाड़ियां उगी; स्टे नहीं, कूड़ा डंप करने पहुंच रहे लोग उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए 2000-2005 के बीच चारधाम रूट पर बनाए गए पर्यटन सूचना और सुविधा केंद्रों की हालत खराब है। गढ़वाल मंडल में बने 21 केंद्रों में से 16 पूरी तरह बंद हैं और कई जगहों पर अब इन भवनों में कूड़ा, झाड़ियां और आवारा कुत्ते नजर आ रहे हैं। (पढ़ें पूरी खबर)