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केदारनाथ में खच्चरों के गोबर से तैयार होंगे फ्यूल पैलेट्स:होटलों में कोयले की जगह इस्तेमाल होगा-गंदगी कम होगी; पिरूल मिलाकर बनाने का प्लान

केदारनाथ में खच्चरों के गोबर से तैयार होंगे फ्यूल पैलेट्स:होटलों में कोयले की जगह इस्तेमाल होगा-गंदगी कम होगी; पिरूल मिलाकर बनाने का प्लान

केदारनाथ में खच्चरों के गोबर से अब चूल्हा जलेगा। गैस संकट के बीच उत्तराखंड सरकार ने ऐसा मास्टरस्ट्रोक चलाया है, जिससे एक साथ चार बड़ी समस्याओं एलपीजी की किल्लत, प्रदूषण, गंदगी और जंगल की आग का समाधान किया जाएगा।
चारधाम यात्रा शुरू होते ही केदारनाथ में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी से होटल-ढाबा संचालक परेशान हैं और मजबूरी में डीजल-कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस स्थिति से राहत देने के लिए सरकार ने केदारनाथ ट्रेक रूट पर खच्चरों के गोबर और चीड़ की पत्तियों से ‘फ्यूल पेलेट्स’ बनाने की योजना चलाने जा रही है। इन पेलेट्स से चलने वाले चूल्हे दिए जाएंगे, जिससे गैस पर निर्भरता घटेगी और साथ ही प्रदूषण, गंदगी व जंगल की आग जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। 3 पॉइंट्स में जानिए ‘पूप पावर’ मॉडल 1. गोबर का कलेक्शन और वैज्ञानिक ट्रीटमेंट
केदारनाथ ट्रेक रूट पर चलने वाले 8 से 12 हजार खच्चरों के गोबर को व्यवस्थित तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। इसके बाद मशीनों से इसका तरल हिस्सा अलग कर वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट किया जाएगा, ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान न हो और सुरक्षित रूप से इसका उपयोग किया जा सके। 2. पिरुल के साथ 50:50 अनुपात में प्रोसेसिंग
ट्रीटमेंट के बाद सूखे गोबर को जंगलों से लाई गई चीड़ की सूखी पत्तियों (पिरुल) के साथ 50:50 अनुपात में मिलाया जाएगा। इससे ईंधन की गुणवत्ता और उसकी जलने की क्षमता बढ़ेगी। 3. फ्यूल पेलेट्स बनेंगे, चूल्हे-बॉयलर में इस्तेमाल
तैयार मिश्रण को मशीनों के जरिए प्रोसेस कर ‘फ्यूल पेलेट्स’ बनाए जाएंगे। इन पेलेट्स का इस्तेमाल खास डिजाइन वाले चूल्हों और बॉयलरों में होगा, जिससे खाना पकाने और पानी गर्म करने जैसी जरूरतें पूरी होंगी। अब जानिए प्रोजेक्ट के चार बड़े फायदे 1. नदियां होंगी साफ, प्रदूषण पर लगेगा ब्रेक
अब तक खच्चरों का गोबर सीधे मंदाकिनी समेत अन्य नदियों में बह जाता था, जिस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) भी सख्त आपत्ति जता चुका है। इस प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद गोबर का 100% निस्तारण प्लांट में ही होगा, जिससे नदियों में जाने वाला कचरा रुकेगा और जल प्रदूषण में बड़ी कमी आएगी। 2. यात्रियों को मिलेगा साफ और आरामदायक ट्रेक
केदारनाथ ट्रेक रूट पर गोबर के कारण बदबू, गंदगी और फिसलन आम समस्या रही है। बारिश के दौरान यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ता है। गोबर हटने से ट्रेक साफ होगा, फिसलन कम होगी और यात्रियों के लिए सफर ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगा। 3. जंगल में लगने वाली आग पर मिलेगा कंट्रोल
उत्तराखंड में गर्मियों में लगने वाली जंगल की आग का बड़ा कारण चीड़ की सूखी पत्तियां यानी पिरुल हैं। इस प्रोजेक्ट में पिरुल की बड़ी मात्रा में खपत होगी, जिससे जंगलों में ज्वलनशील कचरा कम होगा और आग लगने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण मिल सकेगा। 4. कड़ाके की ठंड में भी मिलेगा 24 घंटे गर्म पानी
केदारनाथ में तापमान अक्सर शून्य के आसपास रहता है, जिससे यात्रियों को काफी दिक्कत होती है। अब इसी ‘फ्यूल पेलेट’ से बॉयलर चलाए जाएंगे, जिससे पीने और हाथ-मुंह धोने के लिए 24 घंटे गर्म पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा। महिलाओं के लिए कमाई का बड़ा मौका इस योजना का सबसे मजबूत पहलू इसका आर्थिक मॉडल है, जो स्थानीय लोगों खासकर महिलाओं के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनकर सामने आ रहा है। पिरुल (चीड़ की सूखी पत्तियां) इकट्ठा करने वाले लोगों को सरकार पहले से 10 रुपए प्रति किलो देती है, वहीं अब इस योजना के तहत उन्हें 2 रुपए प्रति किलो का अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा, जिससे उनकी आय बढ़ेगी। पूरे प्रोजेक्ट के संचालन में स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका होगी। ये समूह गोबर इकट्ठा करने से लेकर फ्यूल पेलेट्स बनाने तक की प्रक्रिया को संभालेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस मॉडल की सफलता का उदाहरण पौड़ी जिले के नैनी डांडा में पहले से देखा जा चुका है, जहां महिलाओं द्वारा संचालित एक प्लांट का सालाना टर्नओवर करीब 1.5 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अब इसी मॉडल को जखोली और सोनप्रयाग जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है, जिससे रुद्रप्रयाग और आसपास के इलाकों में महिलाओं और युवाओं के लिए स्थायी आय के नए रास्ते खुलेंगे। देश में पहली बार ऐसा प्रयोग हालांकि वैष्णो देवी में कुछ प्रयोग हुए हैं, लेकिन खच्चर के गोबर और पिरुल का 50:50 फॉर्मूला देश में पहली बार उत्तराखंड में लागू हो रहा है। कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। अगर यह पायलट सफल रहा, तो अगले साल इसे यमुनोत्री समेत अन्य तीर्थ मार्गों पर भी लागू किया जाएगा। ——————- ये खबर भी पढ़ें : चारधाम यात्रा रूट पर 16 सुविधा केंद्र बने खंडहर:खिड़कियों के कांच टूटे, गेट पर झाड़ियां उगी; स्टे नहीं, कूड़ा डंप करने पहुंच रहे लोग उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए 2000-2005 के बीच चारधाम रूट पर बनाए गए पर्यटन सूचना और सुविधा केंद्रों की हालत खराब है। गढ़वाल मंडल में बने 21 केंद्रों में से 16 पूरी तरह बंद हैं और कई जगहों पर अब इन भवनों में कूड़ा, झाड़ियां और आवारा कुत्ते नजर आ रहे हैं। (पढ़ें पूरी खबर)

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