मंडला में सोशल मीडिया पोस्ट पर सियासी घमासान:प्रियंका गांधी की तस्वीर पर आपत्तिजनक टिप्पणी पर भड़की कांग्रेस; FIR की मांगी

मंडला जिले में एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने अपनी राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद प्रियंका वाड्रा की तस्वीर के साथ महिला बिल के संदर्भ में की गई एक पोस्ट पर कड़ी आपत्ति जताई है। बताया जा रहा है कि यह पोस्ट भाजपा के मंडला नगर मंडल महामंत्री सौरभ गुप्ता द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई थी। कांग्रेस ने इस पोस्ट को अमर्यादित, अशोभनीय और आपत्तिजनक बताते हुए इसकी निंदा की है। महिला बिल पर बात करने वालों की अशोभनीय टिप्पणी कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. अशोक मर्सकोले ने कहा कि भाजपा पदाधिकारी द्वारा प्रियंका गांधी पर अभद्र टिप्पणी की गई है। उन्होंने जोर दिया कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत और भद्दी टिप्पणियां स्वीकार्य नहीं हैं। मर्सकोले ने सवाल उठाया कि एक ओर महिला बिल की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं पर इस तरह की टिप्पणी की जा रही है, ऐसे में संबंधित संगठन को स्वयं आगे आकर कार्रवाई करनी चाहिए। शिकायत दर्ज कराने के लिए शहर कांग्रेस और जिला कांग्रेस ने कोतवाली थाने का रुख किया। कांग्रेस के अनुसार, सुबह से शाम तक कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। गलत टिप्पणी पर पार्टी लेगी एक्शन भाजपा जिलाध्यक्ष प्रफुल्ल मिश्रा ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि वे शहर से बाहर थे और अब पूरे मामले की जानकारी ली जा रही है। मिश्रा ने आश्वासन दिया कि तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, संबंधित पोस्ट अब सौरभ गुप्ता की सोशल मीडिया टाइमलाइन पर दिखाई नहीं दे रही है। कांग्रेस का दावा है कि विवाद बढ़ने के बाद पोस्ट को हटा दिया गया है। पोस्ट में प्रियंका वाड्रा की तस्वीर के साथ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था, जिसने सियासी माहौल को गरमा दिया है। जांच के बाद करेंगे कार्रवाई मंडला कोतवाली थाना प्रभारी शफीक खान ने बताया है कि थाने में उन्हें कांग्रेस पार्टी की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है और जांच के बाद वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
मनी लॉन्ड्रिंग केस में जैकलीन के अप्रूवर बनने पर विवाद:ED ने आपत्ति जताई, कोर्ट ने जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है

200 करोड़ रुपए के हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग केस में नया कानूनी मोड़ आया है। बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में अर्जी देकर खुद को अप्रूवर यानी सरकारी गवाह बनाने की मांग की है। यह मामला कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा है, जिस पर करोड़ों की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार जैकलीन की अर्जी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अदालत में आपत्ति जताई है। ED ने कोर्ट से कहा कि याचिका अस्पष्ट और अधूरी है, इसलिए जवाब के लिए समय दिया जाए। कोर्ट ने ED की बात मानते हुए उसे जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैकलीन ने कोर्ट में कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना चाहती हैं और सच्चाई सामने लाने में मदद करना चाहती हैं। अप्रूवर का दर्जा मिलने पर वह आरोपी से अलग होकर जांच में गवाह बन सकती हैं। यह प्रक्रिया अदालत की मंजूरी और ED की सहमति पर निर्भर करती है। यह मामला करीब 200 करोड़ रुपए की कथित ठगी से जुड़ा है। इसमें सुकेश चंद्रशेखर पर हाई-प्रोफाइल लोगों को निशाना बनाने और अवैध तरीके से धन जुटाने के आरोप हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि मामले में बड़े लेन-देन और महंगे गिफ्ट्स का इस्तेमाल हुआ है। जैकलीन फर्नांडिस लंबे समय से इस केस में पूछताछ का सामना कर रही हैं। वह पहले भी दावा कर चुकी हैं कि उन्हें सुकेश के आपराधिक बैकग्राउंड की जानकारी नहीं थी और गलत जानकारी देकर फंसाया गया। अब अदालत में ED का जवाब और अगली सुनवाई केस की दिशा तय करेगी।
भीषण गर्मी में पशुओं की देखभाल जरूरी! वरना हो सकता है हीट स्ट्रोक का खतरा, जानिए आसान टिप्स

Last Updated:April 20, 2026, 18:13 IST अप्रैल का महीना शुरू होते ही धौलपुर समेत कई इलाकों में गर्मी का असर तेज हो गया है, जिसका सीधा प्रभाव इंसानों के साथ-साथ पशुओं पर भी पड़ रहा है. बढ़ते तापमान के कारण पशुओं में थकान, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं. ऐसे में पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे अपने पशुओं की विशेष देखभाल करें ताकि उनकी सेहत और उत्पादन दोनों सुरक्षित रह सकें. अप्रैल का महीना आते ही धौलपुर में गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है. तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंच चुका है और आने वाले दिनों में इसके और बढ़ने की संभावना है. इस भीषण गर्मी का असर सिर्फ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि पशुओं पर भी पड़ रहा है. तेज तापमान के कारण पशु थकान, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं का शिकार हो सकते हैं. ऐसे में पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे अपने पशुओं की खास देखभाल करें. गर्मी के मौसम में सबसे जरूरी है कि पशुओं को ज्यादा देर तक धूप में न रखा जाए. तेज धूप उनके शरीर का तापमान बढ़ा देती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए उन्हें हमेशा छायादार और हवादार जगह पर रखें, ताकि उन्हें ठंडक मिलती रहे. खान-पान का भी गर्मी के मौसम में विशेष ध्यान रखना जरूरी है. गर्मी में हरे चारे की कमी हो जाती है, ऐसे में पशुओं को संतुलित आहार देना चाहिए. खली, भूसा, मिनरल मिक्सचर और पोषक तत्वों से भरपूर आहार देने से पशु स्वस्थ रहते हैं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनी रहती है. Add News18 as Preferred Source on Google पानी की पर्याप्त मात्रा भी बेहद जरूरी है. गर्मी में पशुओं को दिन में कई बार साफ और ठंडा पानी पिलाना चाहिए. पानी की कमी होने पर पशु डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं, जिससे उनकी सेहत बिगड़ सकती है और उत्पादन पर भी असर पड़ता है. पशुशाला की साफ-सफाई का भी खास ध्यान रखना चाहिए. गंदगी के कारण गर्मी में बीमारियां तेजी से फैलती हैं. इसलिए नियमित सफाई करें और कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव करते रहें, ताकि संक्रमण से बचाव हो सके. इसके अलावा, समय-समय पर पशुओं का टीकाकरण कराना भी जरूरी है. गर्मी के मौसम में कई बीमारियां तेजी से फैलती हैं, और टीकाकरण से पशु इनसे सुरक्षित रह सकते हैं. अगर कोई पशु ज्यादा सुस्त दिखाई दे, कम खाना खाए, ज्यादा पसीना आए या सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे नजरअंदाज न करें. हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. पशुपालन विभाग भी गर्मी के मौसम में विशेष शिविर लगाकर पशुओं की मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा देता है. पशुपालकों को इन शिविरों का लाभ उठाना चाहिए, ताकि उनके पशु स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें. First Published : April 20, 2026, 18:13 IST
अफगानी पेसर शापूर जादरान ICU में भर्ती:दिल्ली अस्पताल में दुर्लभ HLH बीमारी का इलाज चल रहा; 80 इंटरनेशनल मैच खेले

अफगानिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान दिल्ली के एक अस्पताल के ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। उन्हें हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) नाम की दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है। ESPNcricinfo के मुताबिक, बीमारी स्टेज चार में पहुंच चुकी है और हालत गंभीर है। जनवरी में भारत आए 39 साल के होने जा रहे शापूर जनवरी में इलाज के लिए भारत आए थे। शुरुआत में हालत में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन बाद में संक्रमण फिर बढ़ गया। फिलहाल वे बहुत कम बोल पा रहे हैं और ज्यादा समय सोते हैं। डॉक्टरों के अनुसार HLH में इम्यून सिस्टम शरीर पर हमला करने लगता है। इससे बोन मैरो, लीवर, स्प्लीन और लिम्फ नोड्स प्रभावित होते हैं। यह बीमारी आमतौर पर बच्चों में होती है, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले वयस्कों में भी हो सकती है। 2009 में पहला मैच खेला शापूर जादरान ने 2009 से 2020 के बीच अफगानिस्तान के लिए 80 इंटरनेशनल मैच खेले, जिनमें 44 वनडे और 36 टी20 शामिल हैं। उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में पहली बार तबीयत खराब होने की शिकायत की थी। इसके बाद अफगानिस्तान के डॉक्टरों ने उन्हें भारत जाकर इलाज कराने की सलाह दी। वीजा के लिए राशिद ने मदद की भारत आने के लिए उनका वीजा जल्दी मंजूर हुआ। इसमें राशिद खान और ACB चेयरमैन मिरवाइस अशरफ ने मदद की। अशरफ ने ICC चेयरमैन जय शाह से संपर्क किया, जबकि राशिद ने IPL और अन्य लीग्स के संपर्कों से मदद ली। ठीक होने के बाद छुट्टी मिली थी 18 जनवरी को शापूर दिल्ली पहुंचे और अस्पताल में भर्ती हुए। उनके साथ पत्नी और पूर्व साथी खिलाड़ी असगर अफगान भी थे। उनके भाई गमाई जादरान, जो कनाडा में रहते हैं, 26 जनवरी को जुड़ गए। गमाई जादरान के मुताबिक, शुरुआत में शापूर के पूरे शरीर में गंभीर संक्रमण था, जिसमें टीबी भी शामिल थी। MRI और CT स्कैन में संक्रमण दिमाग तक पहुंचने की बात सामने आई। इलाज के बाद उन्हें कुछ समय के लिए छुट्टी मिली और वे होटल में रहने लगे थे। 20 दिन बाद संक्रमण दोबारा बढ़ गया करीब 20 दिन बाद संक्रमण दोबारा बढ़ गया और उन्हें फिर अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। इसके बाद उन्हें डेंगू हो गया, जिससे हालत और बिगड़ गई। उनकी रेड ब्लड सेल काउंट काफी कम हो गई थी और इम्यूनिटी बेहद कमजोर हो गई थी। करीब 26 मार्च को रमजान के दौरान उनका बोन मैरो टेस्ट हुआ, जिसमें पता चला कि वे HLH के स्टेज चार में हैं। इस दौरान अफगानिस्तान क्रिकेट समुदाय ने उनका पूरा साथ दिया है। असगर अफगान दुबई और दिल्ली के बीच आ-जा रहे हैं और अस्पताल में उनके साथ समय बिता रहे हैं। राशिद खान भी डॉक्टरों से संपर्क में हैं और मिलने आए थे। शाहिद अफरीदी ने भी जानकारी ली स्पिनर एएम गजनफर, कप्तान हश्मतुल्लाह शाहिदी और ACB चेयरमैन मिरवाइस अशरफ समेत कई लोगों ने शापूर का हालचाल लिया है। पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी शाहिद अफरीदी ने भी फोन कर जानकारी ली। पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई भी उनसे मिलने या बात करने वाले हैं। 14 किलो वजन घटा शापूर का वजन करीब 14 किलो घट चुका है। दूसरी बार भर्ती होने के समय वजन 98 किलो था, जो अब करीब 84 किलो रह गया है। उनके भाई के मुताबिक, हाल में दिए गए स्टेरॉयड का असर दिख रहा है और इससे उम्मीद है कि हालत में सुधार हो सकता है। HLH क्या है? हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) बहुत ही दुर्लभ लेकिन खतरनाक बीमारी है। इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाती है और गलती से शरीर की अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इसके कारण मरीज को लगातार तेज बुखार आता है और खून की कोशिकाएं कम होने लगती हैं (जिसे साइटोपेनिया कहते हैं)। यह बीमारी ज्यादा तर बच्चों में देखी जाती है, लेकिन किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है।
RBI ने रुपए के ट्रेड पर लगी पाबंदियां हटाईं:अब फॉरेक्स डीलर्स NDF मार्केट में पोजीशन ले सकेंगे; मार्च में लगी थी रोक

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने 20 अप्रैल को रुपए की अस्थिरता को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा डीलरों (फॉरेक्स डीलर्स) पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को वापस ले लिया है। अब डीलर्स ऑफशोर नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड मार्केट (NDF) में फिर से पोजीशन ले सकेंगे। RBI के यह कदम उठाने से कुछ दिन पहले ही गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया था कि ये पाबंदियां अनिश्चित काल के लिए लागू नहीं रहेंगी। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि अधिकृत डीलरों (ऑथोराइज्ड डीलर्स) को अब रेजिडेंट या नॉन-रेजिडेंट यूजर्स को रुपए से जुड़े नॉन-डेलिवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स ऑफर करने से रोकने की जरूरत नहीं होगी। कॉन्ट्रैक्ट रीबुक करने की भी अनुमति मिली नए नियमों के अनुसार, बैंक अब यूजर्स को रुपए से जुड़े किसी भी फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को रीबुक करने की अनुमति भी दे सकते हैं। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। हालांकि, RBI ने स्पष्ट किया है कि अधिकृत डीलरों को संबंधित पक्षों के साथ रुपए में फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट करने की अनुमति नहीं होगी। पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए कुछ छूट बरकरार रिलेटेड पार्टीज के मामले में छूट केवल मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स को रद्द करने या रोलओवर करने और नॉन-रिलेटेड, नॉन-रेजिडेंट यूजर्स के साथ किए गए बैक-टू-बैक ट्रांजैक्शन तक ही सीमित है। इसके साथ ही, बैंकों को प्रत्येक कारोबारी दिन के अंत में ऑनशोर डेलिवरेबल रुपए मार्केट में अपनी नेट ओपन पोजीशन को 10 करोड़ डॉलर (100 मिलियन डॉलर) तक सीमित रखना होगा। मार्च में क्यों लगाई गई थी पाबंदी? मार्च के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध के बिगड़ने के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। इसके चलते रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर की ओर गिर रहा था, जिसे रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने कई सख्त कदम उठाए थे। 10 अप्रैल तक बैंकों ने ऑफशोर NDF मार्केट में लगभग 40 बिलियन डॉलर के सट्टा ट्रेड को खत्म कर दिया था। रुपए की स्थिति और भविष्य की रणनीति RBI के इन कड़े कदमों के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले 95.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर से वापस संभला है। गवर्नर मल्होत्रा ने अपने बाय-मंथली पॉलिसी रिव्यू में कहा था कि ये उपाय अस्थायी थे। उन्होंने बताया कि मार्च में आर्बिट्राज मार्केट में सट्टा पोजीशन बनते देखी गई थी, जिस पर अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए लगाम लगाना जरूरी था। NDF मार्केट क्या है? नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) एक फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है, जो उन करेंसी के लिए यूज किया जाता है, जिनका इंटरनेशनल लेवल पर पूरी तरह से ट्रेड नहीं होता है। इसमें आखिरी में सिर्फ नकद (कैश) का निपटान होता है। RBI का टारगेट: इन पाबंदियों को हटाना भारतीय करेंसी के इंटरनेशनलाइजेशन और बाजारों को और गहरा करने की दिशा में RBI के कमिटमेंट को दर्शाता है। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 27 अंक चढ़कर 78,520 पर बंद: निफ्टी में 11 अंक की बढ़त रही, बैंकिंग और ऑटो शेयर्स में खरीदारी शेयर बाजार में आज यानी सोमवार, 20 अप्रैल को मामूली बढ़त रही। सेंसेक्स 27 अंक की तेजी के साथ 78,520 पर बंद हुआ। निफ्टी में 11 अंक की बढ़त रही, ये 24,365 के स्तर पर बंद हुआ। आज बैंकिंग, मीडिया और ऑटो शेयर्स में खरीदारी रही। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 में गिरावट और 12 में बढ़त रही। पूरी खबर पढ़ें…
RBI ने रुपए के ट्रेड पर लगी पाबंदियां हटाईं:अब फॉरेक्स डीलर्स NDF मार्केट में पोजीशन ले सकेंगे; मार्च में लगी थी रोक

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI ने 20 अप्रैल को रुपए की अस्थिरता को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा डीलरों (फॉरेक्स डीलर्स) पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को वापस ले लिया है। अब डीलर्स ऑफशोर नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड मार्केट (NDF) में फिर से पोजीशन ले सकेंगे। RBI के यह कदम उठाने से कुछ दिन पहले ही गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया था कि ये पाबंदियां अनिश्चित काल के लिए लागू नहीं रहेंगी। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि अधिकृत डीलरों (ऑथोराइज्ड डीलर्स) को अब रेजिडेंट या नॉन-रेजिडेंट यूजर्स को रुपए से जुड़े नॉन-डेलिवरेबल डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स ऑफर करने से रोकने की जरूरत नहीं होगी। कॉन्ट्रैक्ट रीबुक करने की भी अनुमति मिली नए नियमों के अनुसार, बैंक अब यूजर्स को रुपए से जुड़े किसी भी फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को रीबुक करने की अनुमति भी दे सकते हैं। यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। हालांकि, RBI ने स्पष्ट किया है कि अधिकृत डीलरों को संबंधित पक्षों के साथ रुपए में फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट करने की अनुमति नहीं होगी। पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए कुछ छूट बरकरार रिलेटेड पार्टीज के मामले में छूट केवल मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स को रद्द करने या रोलओवर करने और नॉन-रिलेटेड, नॉन-रेजिडेंट यूजर्स के साथ किए गए बैक-टू-बैक ट्रांजैक्शन तक ही सीमित है। इसके साथ ही, बैंकों को प्रत्येक कारोबारी दिन के अंत में ऑनशोर डेलिवरेबल रुपए मार्केट में अपनी नेट ओपन पोजीशन को 10 करोड़ डॉलर (100 मिलियन डॉलर) तक सीमित रखना होगा। मार्च में क्यों लगाई गई थी पाबंदी? मार्च के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध के बिगड़ने के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं। इसके चलते रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर की ओर गिर रहा था, जिसे रोकने के लिए केंद्रीय बैंक ने कई सख्त कदम उठाए थे। 10 अप्रैल तक बैंकों ने ऑफशोर NDF मार्केट में लगभग 40 बिलियन डॉलर के सट्टा ट्रेड को खत्म कर दिया था। रुपए की स्थिति और भविष्य की रणनीति RBI के इन कड़े कदमों के बाद रुपया डॉलर के मुकाबले 95.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर से वापस संभला है। गवर्नर मल्होत्रा ने अपने बाय-मंथली पॉलिसी रिव्यू में कहा था कि ये उपाय अस्थायी थे। उन्होंने बताया कि मार्च में आर्बिट्राज मार्केट में सट्टा पोजीशन बनते देखी गई थी, जिस पर अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए लगाम लगाना जरूरी था। NDF मार्केट क्या है? नॉन-डेलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) एक फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट है, जो उन करेंसी के लिए यूज किया जाता है, जिनका इंटरनेशनल लेवल पर पूरी तरह से ट्रेड नहीं होता है। इसमें आखिरी में सिर्फ नकद (कैश) का निपटान होता है। RBI का टारगेट: इन पाबंदियों को हटाना भारतीय करेंसी के इंटरनेशनलाइजेशन और बाजारों को और गहरा करने की दिशा में RBI के कमिटमेंट को दर्शाता है। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 27 अंक चढ़कर 78,520 पर बंद: निफ्टी में 11 अंक की बढ़त रही, बैंकिंग और ऑटो शेयर्स में खरीदारी शेयर बाजार में आज यानी सोमवार, 20 अप्रैल को मामूली बढ़त रही। सेंसेक्स 27 अंक की तेजी के साथ 78,520 पर बंद हुआ। निफ्टी में 11 अंक की बढ़त रही, ये 24,365 के स्तर पर बंद हुआ। आज बैंकिंग, मीडिया और ऑटो शेयर्स में खरीदारी रही। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 में गिरावट और 12 में बढ़त रही। पूरी खबर पढ़ें…
बंगाल में मातृ शक्ति का तय करेगी किसकी सरकार! टीएमसी की महिला सेना के सामने बीजेपी का महिला आरक्षण कार्ड क्या खेलाएगा?

विधानसभा चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार मुकाबला सिर्फ राजनीतिक विचारधारा के बीच नहीं, बल्कि महिला वोट बैंक को लेकर भी बेहद दिलचस्प हो गया है। एक तरफ जहां ममता बनर्जी की उम्मीदवारी ने बड़ी संख्या में महिला टीमें बनाईं, साथ ही शशि पांजा और सायोनी घोष जैश नेताओं ने प्रचार में आगे कर महिला ब्रिगेड को मजबूत बनाया, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने महिला टीमों की बड़ी संख्या में हिस्सेदारी बनाई। चुनाव प्रचार घोटाले की मान्यताममता बनर्जी ने महिला गैंग को साधे रखा और बीजेपी को काउंटर करने के लिए अपनी मजबूत महिला ब्रिगेड को मैदान में उतारा है। इस सूची में चंद्रिमा भट्टाचार्य, सेंचुरी रॉय, सयोनी घोष, जून मालिया, आदर्श मंडल, असीता मुंशी, सायंतिका बनर्जी और रचनाकार जैसे नाम शामिल हैं। पार्टी ने सिर्फ अनुभवी नेताओं को ही नहीं, बल्कि ग्लैमर और युवा शैलाडा को भी उभारकर मौलाना मराठा को धार दी है। सयोनी घोष अपनी रैली में ‘मां, माटी, मानुष’ का नारा लगा कर युवाओं और महिलाओं को जोड़ रही हैं, जबकि रचना बनर्जी, शताब्दी रॉय और जून मालिया ग्रामीण क्षेत्र में सीधे महिलाओं से संवाद कर रही हैं। इसके जवाब में बीजेपी ने पार्टी की अल्पसंख्यक और दिग्गज अभिनेत्री कंगना रनौत को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम में बीजेपी उम्मीदवार सुभेंदु अधिकारी के समर्थन में एक ग्रैंड रोड शो कर दिया। खुली जीप में सवार रावण ने जब नंदीग्राम की सड़कों पर हाथ हिलाकर लोगों का सिर झुकाया, तो फैंसी और सॉसेज का हुजूम धमाका हो गया। लक्ष्मी भंडार बनाम मातृ शक्ति वंदन‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का भी जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है. इन महिलाओं में टीएमसी के प्रति भरोसेमंद मजबूत बनने की कोशिश है। महिला नेता घर-घर संवाद कर रही हैं। राज्य सरकार की अधिसूचना- जैसे महिला सुरक्षा, आर्थिक सहायता और सामाजिक कल्याण- तक सीधे पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। पार्टी का मानना है कि महिलाओं के साथ यह स्ट्रेट कॉन्टैक्ट्स इलिनोइस में फ़्लोरिडा भूमिका निभा सकता है। महिलाओं को 3 हजार रुपये देने का वादा बीजेपी ने कियाइसके अलावा बीजेपी ने ‘मातृ शक्ति वंदन’ योजना के तहत 3000 रुपये देने का वादा किया है। महिलाओं को केंद्र में वेल्डिंग ने बड़ा दांव खेला है। भाजपा सरकार बनी हर महिला को ₹36,000 देने का वादा किया गया। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा में असफल रहने और वाहनों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया गया। हालाँकि, ममता की ‘बंगाल की बेटी’ वाली छवि को तोड़ना बीजेपी के लिए कठिन चुनौती है। पार्टी के पास नामांकित ममता बनर्जी का कोई स्थानीय चेहरा नहीं है। महिला नटखट की ओट में बीजेपीवहीं, बीजेपी की बोलती पार्टी पर हमला जारी है. पार्टी का आरोप है कि महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व अभी भी नहीं मिला है और इसे डेमोक्रेट्स लिमिटेड तक सीमित रखा गया है। भाजपा इस मुद्दे के तहत शहरी और उच्च शिक्षा प्राप्त महिला मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रही है। महिलाओं पर किसको विश्वास हैपश्चिम बंगाल में बंदूकधारियों ने 52 महिलाओं को टिकटें दी हैं। ममता बनर्जी की इस रणनीति के पीछे सोच यह है कि वे चुनाव में महिला मतदाताओं को आकर्षित करें। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने 33 महिलाओं को टिकटें दी हैं। यह कुल हिस्सेदारी का करीब 11.22 प्रतिशत है. हालांकि पिछले चुनाव में बीजेपी में 13% महिला वोटें शामिल थीं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (23 और 29 अप्रैल) से पहले एब्लॉग के विश्लेषण में साफ दिखता है कि राजनीति में महिलाओं की हवेली अभी भी सीमित है। इस बार कुल मिलाकर महिलाओं की भागीदारी सिर्फ 11% के करीब है। हालाँकि, टीएमसी इस मामले में रेस्ट अरेस्ट से काफी आगे है- पार्टी ने 291 में से 52 महिला उम्मीदवार उतारी हैं, जो लगभग 27.2% हैं। वहीं, वाम वामपंथियों और सीपीआई (एम) के गठबंधन ने 253 से 34 (13.43%) महिलाओं को मौका दिया है। कांग्रेस ने 294 में से 35 (11.9%) और बीजेपी ने 294 में से 33 (11.2%) महिला उम्मीदवार उतारी हैं, जो सबसे कम अनुपात है। राज्य की पिछली विधानसभा में 41 महिला विधायक हैं, जिनका राष्ट्रीय औसत 8% से ज्यादा है, लेकिन वैश्विक औसत 24% से अभी भी काफी पीछे है। महिला प्राकृतिक कानून के बावजूद, जमीनी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि की चुनौती अब भी बनी हुई है। यह भी पढ़ें: बंगाल में पीएम मोदी की रैली के बाद बोले भाजपा समर्थक- हमारी जीत पक्की है, टीएमसी की विदाई तय
अवैध रेत खनन कर रहा युवक नर्मदा में कूदा, मौत:जबलपुर में प्रशासन-खनिज विभाग की टीम पहुंची दबिश देने, डर के चलते लगाई नदी में छलांग

जबलपुर के खिरैनी घाट पर अवैध खनन की दबिश के बीच एक युवक की डूबने से मौत हो गई। कलेक्टर के निर्देश पर पुलिस,प्रशासन और खनिज विभाग की टीम सोमवार दोपहर 2 बजे कार्रवाई करने पहुंची थी। टीम जैसे ही वहां पहुंची अवैध रेत खनन कर रहे लोग भागने लगे। इस बीच एक युवक बचने के लिए नर्मदा नदी में कूद गया जिससे उसकी मौत हो गई। डर के चलते नर्मदा में कूदा बरेला अंतर्गत जमतरा अंतर्गत खिरैनी घाट पर गांव के कुछ लड़कों द्वारा रेत उत्खनन किया जा रहा था। इसी दौरान मौके पर एसडीएम एवं माइनिंग विभाग की टीम द्वारा दबिश दी गई। चार से पांच लड़के तो भाग गए, लेकिन एक युवक मानक वर्मा (25 वर्ष) निवासी ग्राम जमतरा को पुलिस ने घेर लिया। दहशत में आकर वह नर्मदा में कूद गया था। कुछ देर बाद घाट किनारे उसका शव मिला। ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन घटना की जानकारी जैसे ही ग्रामीणों को लगी तो बड़ी संख्या में लोग घाट पहुंचे, जहां उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े-बड़े खनन माफियाओं को पुलिस-प्रशासन संरक्षण देती है, पर वो लोग जो बोरी से रेत निकालते हैं तो उन्हें आए दिन पकड़ने के लिए आती है। इसके बाद ग्रामीणों ने विरोध-प्रदर्शन किया। बरेला सहित रांझी, गोराबाजार,खमरिया थाना पुलिस बल मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों को शांत करवाने में जुटे। ग्रामीणों ने टीम की गाड़ियों की हवा भी निकाल दी और लाठी बरसाने का आरोप भी लगाया। कार्रवाई का आश्वासन दिया तब माने ग्रामीण पुलिस ने बमुश्किल ग्रामीणों को समझाया और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब जाकर लोग माने और शव को पीएम के लिए मेडिकल कालेज रवाना किया।
अचार भंडारण युक्तियाँ: अचार में लागती है स्वाद? जानिए इसे स्टोर करने का सही तरीका, महीनों तक बुरा नहीं होगा

अचार में नमक रहना, साफ-सफाई का ध्यान न रखना, तेल या नमक की मात्रा कम होना या नमक से अचार बनाना। इन अध्ययनों से पता चला है कि इन अध्ययनों से पता चलता है कि ये उत्पाद जल्दी खराब हो जाते हैं। छवि: एआई पूरी तरह से पढ़ें: अचार बनाने से पहले सभी सामग्री जैसे आम, नींबू, मिर्च आदि को अच्छे से धोकर पूरी तरह सुखा लें। वैलिडिटी सी किताब का कारण भी बन सकता है। छवि: फ्रीपिक साफ और बिकवाली का उपयोग करें: हमेशा कांच या फैब्रिक-ग्रेड प्लास्टिक के टुकड़े और साफ जार का ही उपयोग करें। स्टील के से चुनें। छवि: फ्रीपिक तेल की सही मात्रा: अचार में इतने तेल की सारी सामग्री डालकर डुबा दिया जाए। तेल एक परत कलाकार आचार्य को हवा और रिचर्ड से मिला है। छवि: फ्रीपिक नमक और मूल सही मात्रा में स्थान: नमक एक प्राकृतिक संरक्षण है। अगर नमक कम हो जाए तो अचार जल्दी खराब हो सकता है। छवि: फ्रीपिक अन्यत्र और अन्य स्थान पर: आचार्य को हमेशा के लिए नामांकित किया गया और जगह-जगह पर रखा गया। ज्यादा गर्मी या होटल वाली जगह से बचें। छवि: फ्रीपिक हमेशा सूखा उत्पाद का उपयोग करें: अचार का मिश्रण या उपयोग किया गया मिश्रण बिल्कुल नहीं दिया गया। इस तरह के आचार्य में लाइब्रेरी बनी हुई है और लेबल लग सकते हैं। छवि: एआई धूप दिखाना नहीं: कभी-कभी आचार्य को धूप में रखना बहुत कमाल का होता है। इससे उसकी फर्मी शेल्फ़ हल्दी और स्वाद भी बेहतर होता है। छवि: एआई यदि फ़िल्में बहुत कम हैं, तो ऊपर की परतें नारियल के बाकी हिस्सों को धूप में रख सकते हैं। लेकिन अगर ज्यादातर हिस्सा खराब हो गया है, तो उसका इस्तेमाल न करें। छवि: एआई
अमेरिका में ट्रम्प टैरिफ का सबसे बड़ा रिफंड शुरू:ब्याज समेत 90 दिन में पैसा वापस मिलेगा, ₹13.8 लाख करोड़ लौटाने हैं

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में लगाए गए टैरिफ को अवैध ठहराने के बाद रिफंड की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अमेरिकी कंपनियां सोमवार से नए ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकती हैं। इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा टैरिफ रिफंड माना जा रहा है, जिसमें 166 अरब डॉलर (करीब 13.8 लाख करोड़ रुपए) लौटाए जाने हैं। रिफंड लौटाने का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लागू हुआ है। कोर्ट ने कहा था कि ट्रम्प प्रशासन ने आपातकालीन शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर टैरिफ लगाए थे। इसके बाद कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने इंपोर्टर्स को उनकी जमा राशि और ब्याज लौटाने के निर्देश दिए थे। इस फैसले के तहत करीब 3.3 लाख इंपोर्टर्स को राहत मिलेगी, जिन्होंने पिछले साल कार पार्ट्स से लेकर स्मार्टफोन तक पर भारी टैक्स चुकाया था CAPE पोर्टल से होगा आवेदन US कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने CAPE (Consolidated Administration and Processing of Entries) नाम का नया पोर्टल लॉन्च किया है। यह ACE (Automated Commercial Environment) सिस्टम का हिस्सा है। इसके जरिए इंपोर्टर्स “CAPE डिक्लेरेशन” दाखिल कर अपने क्लेम सबमिट कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया को तेज और सरल बनाने का दावा किया गया है। 60-90 दिनों में मिलेगा पैसा रिफंड पाने के लिए “इंपोर्टर ऑफ रिकॉर्ड” और अधिकृत कस्टम ब्रोकर्स को ACE पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा और बैंक अकाउंट डिटेल्स देनी होंगी। CBP के मुताबिक, सही और पूरी जानकारी वाले आवेदन पर 60-90 दिनों में भुगतान किया जा सकता है। दस्तावेजों में कमी या जांच की जरूरत होने पर देरी संभव है। पहले चरण में सीमित इंपोर्टर्स को राहत CBP ने साफ किया है कि पहले चरण में सभी इंपोर्टर्स को रिफंड नहीं मिलेगा। फिलहाल केवल “अनलिक्विडेटेड एंट्रीज” (जिनका टैक्स आकलन अभी पूरा नहीं हुआ) और 80 दिनों के भीतर की एंट्रीज को शामिल किया गया है। बाकी मामलों को आगे के चरणों में लिया जाएगा। 56 हजार इंपोर्टर्स ने रजिस्ट्रेशन कराए कोर्ट में पेश आंकड़ों के अनुसार, करीब 3.3 लाख इंपोर्टर्स ने कुल 166 अरब डॉलर का टैरिफ भुगतान किया था। 9 अप्रैल तक इनमें से केवल 56,500 इंपोर्टर्स ने ही इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम में रजिस्ट्रेशन कराया है, जो रिफंड पाने के लिए जरूरी है। उपभोक्ताओं को कितना फायदा? न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के मुताबिक, टैरिफ का लगभग 90% बोझ कंपनियों और उपभोक्ताओं ने मिलकर उठाया था। कुछ कंपनियों जैसे लॉजिस्टिक्स और रिटेल सेक्टर ने ग्राहकों को राहत देने का संकेत दिया है, लेकिन आम उपभोक्ताओं तक इसका कितना लाभ पहुंचेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। कानूनी लड़ाई अभी जारी टैरिफ को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कॉस्टको जैसी कंपनियों ने पहले ही टैरिफ के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। ट्रेड कोर्ट ने संकेत दिया है कि कई मामलों को एक साथ सुनवाई के लिए जोड़ा जाएगा। वहीं, सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील भी कर सकती है, जिससे प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है। 10% ग्लोबल टैरिफ पर भी उठे सवाल इस बीच, कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जजों ने ट्रंप द्वारा लगाए गए 10% ग्लोबल टैरिफ की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। 24 राज्यों (ज्यादातर डेमोक्रेट शासित) और छोटे व्यवसायों ने इसके खिलाफ याचिका दायर की है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या केवल व्यापार घाटा इतना बड़ा कदम उठाने के लिए पर्याप्त आधार हो सकता है।







