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अफगानी पेसर शापूर जादरान ICU में भर्ती:दिल्ली अस्पताल में दुर्लभ HLH बीमारी का इलाज चल रहा; 80 इंटरनेशनल मैच खेले

अफगानी पेसर शापूर जादरान ICU में भर्ती:दिल्ली अस्पताल में दुर्लभ HLH बीमारी का इलाज चल रहा; 80 इंटरनेशनल मैच खेले

अफगानिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान दिल्ली के एक अस्पताल के ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। उन्हें हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) नाम की दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है। ESPNcricinfo के मुताबिक, बीमारी स्टेज चार में पहुंच चुकी है और हालत गंभीर है। जनवरी में भारत आए 39 साल के होने जा रहे शापूर जनवरी में इलाज के लिए भारत आए थे। शुरुआत में हालत में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन बाद में संक्रमण फिर बढ़ गया। फिलहाल वे बहुत कम बोल पा रहे हैं और ज्यादा समय सोते हैं। डॉक्टरों के अनुसार HLH में इम्यून सिस्टम शरीर पर हमला करने लगता है। इससे बोन मैरो, लीवर, स्प्लीन और लिम्फ नोड्स प्रभावित होते हैं। यह बीमारी आमतौर पर बच्चों में होती है, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले वयस्कों में भी हो सकती है। 2009 में पहला मैच खेला शापूर जादरान ने 2009 से 2020 के बीच अफगानिस्तान के लिए 80 इंटरनेशनल मैच खेले, जिनमें 44 वनडे और 36 टी20 शामिल हैं। उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में पहली बार तबीयत खराब होने की शिकायत की थी। इसके बाद अफगानिस्तान के डॉक्टरों ने उन्हें भारत जाकर इलाज कराने की सलाह दी। वीजा के लिए राशिद ने मदद की भारत आने के लिए उनका वीजा जल्दी मंजूर हुआ। इसमें राशिद खान और ACB चेयरमैन मिरवाइस अशरफ ने मदद की। अशरफ ने ICC चेयरमैन जय शाह से संपर्क किया, जबकि राशिद ने IPL और अन्य लीग्स के संपर्कों से मदद ली। ठीक होने के बाद छुट्टी मिली थी 18 जनवरी को शापूर दिल्ली पहुंचे और अस्पताल में भर्ती हुए। उनके साथ पत्नी और पूर्व साथी खिलाड़ी असगर अफगान भी थे। उनके भाई गमाई जादरान, जो कनाडा में रहते हैं, 26 जनवरी को जुड़ गए। गमाई जादरान के मुताबिक, शुरुआत में शापूर के पूरे शरीर में गंभीर संक्रमण था, जिसमें टीबी भी शामिल थी। MRI और CT स्कैन में संक्रमण दिमाग तक पहुंचने की बात सामने आई। इलाज के बाद उन्हें कुछ समय के लिए छुट्टी मिली और वे होटल में रहने लगे थे। 20 दिन बाद संक्रमण दोबारा बढ़ गया करीब 20 दिन बाद संक्रमण दोबारा बढ़ गया और उन्हें फिर अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। इसके बाद उन्हें डेंगू हो गया, जिससे हालत और बिगड़ गई। उनकी रेड ब्लड सेल काउंट काफी कम हो गई थी और इम्यूनिटी बेहद कमजोर हो गई थी। करीब 26 मार्च को रमजान के दौरान उनका बोन मैरो टेस्ट हुआ, जिसमें पता चला कि वे HLH के स्टेज चार में हैं। इस दौरान अफगानिस्तान क्रिकेट समुदाय ने उनका पूरा साथ दिया है। असगर अफगान दुबई और दिल्ली के बीच आ-जा रहे हैं और अस्पताल में उनके साथ समय बिता रहे हैं। राशिद खान भी डॉक्टरों से संपर्क में हैं और मिलने आए थे। शाहिद अफरीदी ने भी जानकारी ली स्पिनर एएम गजनफर, कप्तान हश्मतुल्लाह शाहिदी और ACB चेयरमैन मिरवाइस अशरफ समेत कई लोगों ने शापूर का हालचाल लिया है। पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी शाहिद अफरीदी ने भी फोन कर जानकारी ली। पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई भी उनसे मिलने या बात करने वाले हैं। 14 किलो वजन घटा शापूर का वजन करीब 14 किलो घट चुका है। दूसरी बार भर्ती होने के समय वजन 98 किलो था, जो अब करीब 84 किलो रह गया है। उनके भाई के मुताबिक, हाल में दिए गए स्टेरॉयड का असर दिख रहा है और इससे उम्मीद है कि हालत में सुधार हो सकता है। HLH क्या है? हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) बहुत ही दुर्लभ लेकिन खतरनाक बीमारी है। इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाती है और गलती से शरीर की अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इसके कारण मरीज को लगातार तेज बुखार आता है और खून की कोशिकाएं कम होने लगती हैं (जिसे साइटोपेनिया कहते हैं)। यह बीमारी ज्यादा तर बच्चों में देखी जाती है, लेकिन किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है।

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अफगानी पेसर शापूर जादरान ICU में भर्ती:दिल्ली अस्पताल में दुर्लभ HLH बीमारी का इलाज चल रहा; 80 इंटरनेशनल मैच खेले

अफगानिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शापूर जादरान दिल्ली के एक अस्पताल के ICU में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। उन्हें हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) नाम की दुर्लभ और जानलेवा बीमारी है। ESPNcricinfo के मुताबिक, बीमारी स्टेज चार में पहुंच चुकी है और हालत गंभीर है। जनवरी में भारत आए 39 साल के होने जा रहे शापूर जनवरी में इलाज के लिए भारत आए थे। शुरुआत में हालत में थोड़ा सुधार हुआ, लेकिन बाद में संक्रमण फिर बढ़ गया। फिलहाल वे बहुत कम बोल पा रहे हैं और ज्यादा समय सोते हैं। डॉक्टरों के अनुसार HLH में इम्यून सिस्टम शरीर पर हमला करने लगता है। इससे बोन मैरो, लीवर, स्प्लीन और लिम्फ नोड्स प्रभावित होते हैं। यह बीमारी आमतौर पर बच्चों में होती है, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले वयस्कों में भी हो सकती है। 2009 में पहला मैच खेला शापूर जादरान ने 2009 से 2020 के बीच अफगानिस्तान के लिए 80 इंटरनेशनल मैच खेले, जिनमें 44 वनडे और 36 टी20 शामिल हैं। उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में पहली बार तबीयत खराब होने की शिकायत की थी। इसके बाद अफगानिस्तान के डॉक्टरों ने उन्हें भारत जाकर इलाज कराने की सलाह दी। वीजा के लिए राशिद ने मदद की भारत आने के लिए उनका वीजा जल्दी मंजूर हुआ। इसमें राशिद खान और ACB चेयरमैन मिरवाइस अशरफ ने मदद की। अशरफ ने ICC चेयरमैन जय शाह से संपर्क किया, जबकि राशिद ने IPL और अन्य लीग्स के संपर्कों से मदद ली। ठीक होने के बाद छुट्टी मिली थी 18 जनवरी को शापूर दिल्ली पहुंचे और अस्पताल में भर्ती हुए। उनके साथ पत्नी और पूर्व साथी खिलाड़ी असगर अफगान भी थे। उनके भाई गमाई जादरान, जो कनाडा में रहते हैं, 26 जनवरी को जुड़ गए। गमाई जादरान के मुताबिक, शुरुआत में शापूर के पूरे शरीर में गंभीर संक्रमण था, जिसमें टीबी भी शामिल थी। MRI और CT स्कैन में संक्रमण दिमाग तक पहुंचने की बात सामने आई। इलाज के बाद उन्हें कुछ समय के लिए छुट्टी मिली और वे होटल में रहने लगे थे। 20 दिन बाद संक्रमण दोबारा बढ़ गया करीब 20 दिन बाद संक्रमण दोबारा बढ़ गया और उन्हें फिर अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। इसके बाद उन्हें डेंगू हो गया, जिससे हालत और बिगड़ गई। उनकी रेड ब्लड सेल काउंट काफी कम हो गई थी और इम्यूनिटी बेहद कमजोर हो गई थी। करीब 26 मार्च को रमजान के दौरान उनका बोन मैरो टेस्ट हुआ, जिसमें पता चला कि वे HLH के स्टेज चार में हैं। इस दौरान अफगानिस्तान क्रिकेट समुदाय ने उनका पूरा साथ दिया है। असगर अफगान दुबई और दिल्ली के बीच आ-जा रहे हैं और अस्पताल में उनके साथ समय बिता रहे हैं। राशिद खान भी डॉक्टरों से संपर्क में हैं और मिलने आए थे। शाहिद अफरीदी ने भी जानकारी ली स्पिनर एएम गजनफर, कप्तान हश्मतुल्लाह शाहिदी और ACB चेयरमैन मिरवाइस अशरफ समेत कई लोगों ने शापूर का हालचाल लिया है। पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ी शाहिद अफरीदी ने भी फोन कर जानकारी ली। पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई भी उनसे मिलने या बात करने वाले हैं। 14 किलो वजन घटा शापूर का वजन करीब 14 किलो घट चुका है। दूसरी बार भर्ती होने के समय वजन 98 किलो था, जो अब करीब 84 किलो रह गया है। उनके भाई के मुताबिक, हाल में दिए गए स्टेरॉयड का असर दिख रहा है और इससे उम्मीद है कि हालत में सुधार हो सकता है। HLH क्या है? हेमोफैगोसाइटिक लिम्फोहिस्टियोसाइटोसिस (HLH) बहुत ही दुर्लभ लेकिन खतरनाक बीमारी है। इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाती है और गलती से शरीर की अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इसके कारण मरीज को लगातार तेज बुखार आता है और खून की कोशिकाएं कम होने लगती हैं (जिसे साइटोपेनिया कहते हैं)। यह बीमारी ज्यादा तर बच्चों में देखी जाती है, लेकिन किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है।

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