एक किलोमीटर दूर से ला रहे पीने का पानी:पन्ना के रहुनियां गांव में नल-जल योजना फेल, पाइप बिछाए, लेकिन सप्लाई नहीं

पन्ना के ग्राम पंचायत रहुनियां में ग्रामीण जल संकट का सामना कर रहे हैं। यहां के हैंडपंपों से सफेद पानी की जगह लाल रंग का पानी निकल रहा है, जो पीने या कपड़े धोने लायक नहीं है। ग्रामवासी कमल सिंह ने बताया कि पीएचई विभाग द्वारा गांव में पांच हैंडपंप लगाए गए हैं, लेकिन वे ग्रामीणों की प्यास बुझाने में असमर्थ हैं। इन हैंडपंपों से निकलने वाला पानी कुछ ही देर में लाल हो जाता है। सपना बाई नामक ग्रामीण ने बताया कि यह पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और कपड़ों को भी खराब कर रहा है। सरकारी हैंडपंपों के अनुपयोगी होने के कारण ग्रामीणों को निजी खेतों में बने कुओं का सहारा लेना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में महिलाएं सिर पर बर्तन रखकर लगभग एक किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाने को विवश हैं। ग्रामवासी पप्पू सिंह के अनुसार माध्यमिक शाला में भी पानी की गंभीर समस्या है। यहां लगा हैंडपंप कई साल से खराब है। जल जीवन मिशन के तहत बिछाई गई पाइपलाइन की मोटर भी खराब हो चुकी है, जिससे स्कूल में पानी की आपूर्ति बाधित है। गांव में एक जल टंकी का निर्माण किया गया है, लेकिन यह केवल ढांचा बनकर रह गई है। इसमें न तो पाइपलाइन बिछाई गई है, न नल कनेक्शन दिए गए हैं और न ही पानी के मुख्य स्रोत से इसे जोड़ा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन की योजनाएं रहुनियां में प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाई हैं। मामले में जगदीश आदिवासी, पंचायत सहायक सचिव, रहुनियां से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पंचायत का एक सार्वजनिक कुआं है पर पानी कम है। हैंडपंपों के लाल पानी की जांच पीएचई से कराई जाएगी। टंकी बन चुकी है, जल्द ही योजना पूरी होगी और समस्या खत्म हो जाएगी।
बिजली कटौती से पानी सप्लाई ठप:सीहोर में लोगों की मुश्किल बढ़ी, दो दिन बाद भी नहीं मिला पेयजल

सीहोर में रविवार को अवकाश के दिन सुबह से ही बिजली कटौती कर दी गई, जिसका सीधा असर पेयजल सप्लाई पर पड़ा। दो दिन के अंतराल के बाद आज ही पानी सप्लाई का दिन था, लेकिन बिजली नहीं होने के कारण कई क्षेत्रों में पानी नहीं पहुंच पाया। कई इलाकों में पानी की किल्लत रविवार को 11 केवीए लूनिया, सुभाष और तहसील फीडर बंद किए गए। इससे लूनिया मोहल्ला, पुराना बस स्टैंड, वाल्मीकि मोहल्ला, भोपाली फाटक, पीडब्ल्यूडी, तहसील चौराहा, श्रीराम कॉलोनी, नेहरू कॉलोनी और मछली पूल क्षेत्र में सुबह से बिजली आपूर्ति ठप रही। इन इलाकों में पेयजल सप्लाई होनी थी, लेकिन बिजली कटौती के कारण पानी नहीं पहुंच सका। नगर पालिका की मांग भी नहीं मानी पेयजल सप्लाई का दिन होने के कारण नगर पालिका ने बिजली कंपनी से कटौती का समय बदलने की मांग की थी, लेकिन कंपनी ने उल्टा नगर पालिका को ही पानी सप्लाई का समय बदलने की सलाह दे दी। लोगों में बढ़ रहा आक्रोश सीहोर नगर सहित पूरे जिले में लोग विद्युत वितरण कंपनी की कार्यप्रणाली से नाराज हैं। घोषित और अघोषित बिजली कटौती लगातार बढ़ रही है, खासकर छुट्टी के दिनों में। भीषण गर्मी में पानी और बिजली दोनों की किल्लत से लोग परेशान हैं। पहले भी हो चुका है विरोध पिछले दिनों अघोषित बिजली कटौती से नाराज लोगों ने मंडी क्षेत्र में चक्का जाम भी किया था, लेकिन इसके बावजूद कंपनी के रवैये में कोई सुधार नहीं हुआ है। बिजली कंपनी के सहायक अभियंता (एई) अतुलेश सिंह के अनुसार, कई स्थानों पर पेड़ों की डालियां बिजली लाइनों से टकरा रही थीं। इन्हें हटाने के लिए बिजली कटौती की गई।
दावा- सलमान की 'मातृभूमि' में चीन का नाम नहीं होगा:रक्षा मंत्रालय की आपत्ति के बाद कंटेंट में बदलाव, 40% फिल्म रीशूट

सलमान खान की अपकमिंग फिल्म मातृभूमि को लेकर नई खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म में कई बदलाव किए गए हैं ताकि भारत-चीन के बेहतर होते कूटनीतिक संबंधों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। गौरतलब है कि फिल्म का नाम पहले बैटल ऑफ गलवान रखा गया था, जिसे इस साल बदलकर मातृभूमि कर दिया गया। यह फिल्म 2020 में भारत और चीन के बीच हुए संघर्ष पर आधारित थी। हाल ही में दोनों देशों के रिश्ते बेहतर हुए हैं, इसलिए रक्षा मंत्रालय को फिल्म के कंटेंट को लेकर कुछ आपत्ति थी। बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट में बताया गया है कि मंत्रालय के निर्देश के अनुसार फिल्म में चीन का नाम नहीं लिया जाएगा। करीब 40% फिल्म दोबारा शूट की गई रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया, “पहले यह फिल्म एक सच्ची घटना से प्रेरित थी, लेकिन रक्षा मंत्रालय के कहने पर सलमान खान और डायरेक्टर अपूर्व लाखिया ने फिल्म को दोबारा शूट किया और कहानी में थोड़ा फिक्शन एंगल जोड़ दिया। लगभग 40% फिल्म दोबारा शूट की गई, जिसमें रोमांटिक सीन और बैकस्टोरी भी जोड़ी गई। मेकर्स ने नई फिल्म मंत्रालय को भेजी ताकि उन्हें NOC मिल सके, लेकिन मंत्रालय को अभी भी कुछ चिंताएं हैं।” सूत्र ने आगे बताया, “सलमान खान से यह भी कहा गया कि फिल्म में चीन का नाम बिल्कुल नहीं होना चाहिए। यह बात पहले ही मेकर्स को बता दी गई थी। इस महीने जो नया वर्जन जमा किया गया है, उसमें चीन का कहीं जिक्र नहीं है।” फिल्म 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन शूटिंग और कंटेंट में बदलाव के कारण इसे टाल दिया गया। वहीं दूसरी तरफ, सलमान खान जल्द ही दिल राजू के साथ अपनी अगली फिल्म की शूटिंग शुरू कर सकते हैं। इस फिल्म में नयनतारा भी नजर आएंगी और इसका डायरेक्शन वामशी पेडिपल्ली करेंगे।
अगर बात-बात में आप भी देते हैं बच्चों को मोबाइल, तो हो जाएं सावधान बढ़ सकते हैं हेल्थ इश्यूज..यहां जानिए डॉक्टर की सलाह

फरीदाबाद: हरियाणा एक ऐसा राज्य जो अपने खिलाड़ियों और मेडल्स के लिए पूरे देश में जाना जाता है, लेकिन आज उसी हरियाणा के फरीदाबाद जैसे शहरों में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है. जहां पहले बच्चे मैदानों में खेलते नजर आते थे अब वहीं छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में मोबाइल फोन दिखाई देता है. धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या बदल रही है और यह बदलाव कहीं न कहीं हमारी खेल संस्कृति पर भी असर डाल सकता है. हालांकि, यह भी सच है कि मोबाइल आज पढ़ाई का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल चिंता की वजह बनता जा रहा है. मोबाइल से बच्चों के ओवरऑल डेवलपमेंट पर असर Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की डॉ. धीरजा बब्बर Group Head – Physiotherapy ने बताया आजकल बच्चे पढ़ाई, गेम्स और स्क्रीन टाइम के कारण लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उनका पोस्चर बैठने और खड़े होने का तरीका खराब हो रहा है. लगातार झुककर फोन चलाने से टेक्स्ट नेक सिंड्रोम जैसी समस्या होने लगती है जिससे गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर पड़ता है और बच्चों के ओवरऑल डेवलपमेंट पर भी असर देखने को मिलता है. हो सकती हैं कई हेल्थ इश्यूज डॉ. धीरजा ने बताया आजकल कई बच्चे फोन देखते हुए खाना खाते हैं जो बिल्कुल गलत आदत है. बचपन से ही अगर पोस्चर खराब हो जाए, तो आगे चलकर सर्वाइकल पेन, सिर दर्द, कंधों में दर्द, हाथों में झुनझुनाहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं. माता-पिता को भी सतर्क होने की जरूरत डॉ. धीरजा ने बताया ज्यादातर बच्चे झुके हुए नजर आते हैं. एक तरफ घर पर घंटों मोबाइल, और दूसरी तरफ स्कूल में भारी बैग और झुककर पढ़ाई. यह आदत धीरे-धीरे शरीर पर बुरा असर डालती है. ऐसे में माता-पिता को अभी से सतर्क होने की जरूरत है. बड़े लोग जहां 7 से 8 घंटे स्क्रीन पर काम करते हैं वहीं बच्चों के लिए जितना कम मोबाइल इस्तेमाल हो उतना बेहतर है. लगातार एक ही पोजीशन में बैठने से मसल्स पर असर पड़ता है और आगे चलकर कई दिक्कतें हो सकती हैं. इसके अलावा आंखों में दर्द, भारीपन, सांस लेने में दिक्कत और घबराहट जैसी समस्याएं भी गलत पोस्टर की वजह से सामने आती हैं. बच्चों को मोबाइल की आदत लगाना बिल्कुल गलत डॉ. धीरजा ने बताया आजकल बच्चे ज्यादा समय मोबाइल गेम्स में बिताते हैं जिनमें अक्सर मारपीट और आक्रामकता होती है. इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं जो बच्चों की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं और उनका व्यवहार भी आक्रामक हो सकता है. बच्चों को मोबाइल की आदत लगाना बिल्कुल गलत है. इसकी बजाय माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, उनसे बात करनी चाहिए और उन्हें फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रेरित करना चाहिए. ब्राइटनेस न ज्यादा तेज हो और न बहुत डॉ. धीरजा ने बताया अगर मोबाइल इस्तेमाल करना भी हो, तो उसकी ब्राइटनेस न ज्यादा तेज हो और न बहुत कम, मिड लेवल पर रखनी चाहिए. साथ ही मोबाइल को आंखों से थोड़ा दूर रखकर इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आंखों पर कम असर पड़े और भविष्य में रेटिना से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सके.
मक्सी में सड़क हादसा, दो युवक घायल:तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित हुई, सड़क की दरार में फंसी

शाजापुर जिले के मक्सी क्षेत्र में शनिवार रात करीब 9 बजे एक तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल शाजापुर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद एक युवक को इंदौर रेफर कर दिया गया। दूसरे युवक का इलाज शाजापुर में ही चल रहा है। दोनों घायल युवक शाजापुर के निवासी हैं। वे शनिवार को मोबाइल खरीदने के लिए इंदौर गए थे और वापस लौट रहे थे। मक्सी के पास लौटते समय, सड़क के बीच बनी एक दरार में उनकी बाइक का पहिया फंस गया। इसके कारण बाइक अनियंत्रित हो गई और दोनों युवक सड़क पर गिरकर घायल हो गए। हादसे में बाइक चला रहे बलराम को सिर में गंभीर चोटें आई हैं, जिसके कारण उन्हें इंदौर रेफर किया गया है। दूसरे युवक गणेश को अपेक्षाकृत कम चोटें आई हैं और उनका इलाज शाजापुर जिला अस्पताल में जारी है। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत घायलों की मदद की और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। इस दुर्घटना के बाद सड़क की खराब स्थिति को लेकर क्षेत्रवासियों में नाराजगी भी देखी जा रही है।
ऐसे लोगों के लिए कटहल खाना नुकसानदायक ! स्वाद के चक्कर में हो जाएगा बुरा हाल, तुरंत बरतें सावधानी

Who Should Avoid Jackfruit: कटहल का स्वाद अनोखा होता है और इस वजह से अधिकतर लोग इसे खाना पसंद करते हैं. कटहल की सब्जी बनाकर खाई जाती है और गर्मियों में यह बाजार में खूब मिलता है. कटहल एक फल है, लेकिन अधिकतर लोग इसे सब्जी के तौर पर खाते हैं. कटहल एक स्वादिष्ट और पोषक तत्वों से भरपूर फल है, जिसे कच्चा और पका—दोनों रूपों में खाया जाता है. इसमें फाइबर, विटामिन C, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद हैं. हालांकि हर हेल्दी चीज हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है. कुछ लोगों को कटहस से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोगों के लिए कटहल का सेवन नुकसानदायक हो सकता है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया कि डायबिटीज के मरीजों को कटहल अवॉइड करना चाहिए. कटहल में नेचुरल शुगर होती है, जो शरीर में जल्दी अवशोषित होकर ब्लड शुगर लेवल बढ़ा सकती है. अगर डायबिटीज के मरीज इसे अधिक मात्रा में खाते हैं, तो उनका ग्लूकोज लेवल अचानक बढ़ सकता है, जिससे स्थिति बिगड़ सकती है. जिन मरीजों का शुगर लेवल अनकंट्रोल रहता है, वे कटहल पूरी तरह अवॉइड करें. एक्सपर्ट के मुताबिक कुछ लोगों में कटहल एलर्जिक रिएक्शन पैदा कर सकता है. जिन लोगों को किसी फल या लेटेक्स से एलर्जी होती है, उन्हें कटहल नहीं खाना चाहिए. ऐसे लोगों को कटहल खाने के बाद त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. अगर पहली बार कटहल खा रहे हैं, तो कम मात्रा से शुरुआत करें और शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डाइटिशियन ने बताया कि कटहल में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो सामान्य स्थिति में पाचन के लिए अच्छी होती है. हालांकि अगर इसे ज्यादा खा लिया जाए, तो यही फाइबर पेट में भारीपन, गैस, सूजन और अपच का कारण बन सकता है. जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर है या जिन्हें पहले से गैस, एसिडिटी या कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें कटहल सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. अधिक सेवन से इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम जैसी समस्या बढ़ सकती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो कटहल ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों को प्रभावित कर सकता है, जो सर्जरी के दौरान और बाद में समस्या पैदा कर सकता है. सर्जरी के समय शरीर को स्थिर स्थिति में रखना जरूरी होता है, लेकिन कटहल का सेवन इस संतुलन को बिगाड़ सकता है. इसलिए ऑपरेशन से पहले और बाद में डॉक्टर की सलाह के बिना कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए, ताकि रिकवरी प्रक्रिया प्रभावित न हो. डाइटिशियन कामिनी ने बताया कि प्रेग्नेंसी और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को भी कटहल से परहेज करना चाहिए. दरअसल इस दौरान महिला के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव होते हैं. ऐसे समय में कटहल का अधिक सेवन कुछ मामलों में असहजता या पाचन संबंधी समस्या पैदा कर सकता है. हालांकि यह पूरी तरह से प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता. ऐसे में डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही कटहल खाना बेहतर होता है.
'घर में गैस नहीं, सिलेंडर बेचकर IPL देखने आए हैं':बैनर लेकर इकाना पहुंचे फैंस, मैच देखने दुबई से लखनऊ आया नन्हा फैन

लखनऊ के इकाना स्टेडियम में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और गुजरात टाइटंस (GT) के बीच IPL मैच खेला जा रहा है। यह मैच काली और लाल मिट्टी की पिच पर खेला जा रहा है। कुछ फैंस ‘घर में गैस नहीं, सिलेंडर बेचकर आईपीएल देखने आए हैं’ लिखा बैनर लेकर पहुंचे हैं। मैच शुरू होने से पहले इकाना स्टेडियम के बाहर फैंस का सैलाब उमड़ा। 36 डिग्री सेल्सियस की गर्मी और चिलचिलाती धूप फैंस के जोश के आगे बेअसर नजर आ रही है। स्कूली बच्चे क्रिकेटर ऋषभ पंत और शुभमन गिल के पोस्टर लेकर पहुंचे हैं। फैंस अपनी पसंदीदी टीम की कैप और टीशर्ट पहनकर आए हैं। अपने चेहरे पर पसंदीदा टीम की पेंटिंग बनवाई है। कुछ फैंस रोहित शर्मा, एमएस धोनी और विराट कोहली का नाम लिखी टीशर्ट पहनकर पहुंचे हैं। इकाना स्टेडियम पंत, पूरन, शमी, मयंक यादव, मिचेल मार्श जैसे स्टार खिलाड़ियों के होर्डिंग-पोस्टर से सजा हुआ है। फैंस ने टीम बसों को घेरकर अपने पसंदीदा क्रिकेटरों को चीयर किया। हूटिंग कर उनका हौसला बढ़ाया। दुबई से 10 साल फैन आयुष मैच देखने आया है। उसने कहा- मैं LSG और GT दोनों टीमों को सपोर्ट करूंगा, क्योंकि दोनों कैप्टन इंडियन क्रिकेटर हैं। आयुष ने दोनों गालों पर दोनों टीमों का नाम पेंट कराया है। 5 तस्वीरें देखिए- LSG vs GT मैच की पल-पल की एक्टिविटी देखने के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए-
मंदसौर में यू-टर्न लेते समय पलटी कार, चालक सुरक्षित:रास्ता भटकने के बाद वापस मोड़ते समय हादसा, लोगों ने मिलकर वाहन को सीधा किया

मंदसौर शहर के वायडी नगर थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात एक कार अनियंत्रित होकर पलट गई। यह हादसा महू-नीमच हाईवे स्थित जैन कॉलेज के सामने रात करीब 12:00 बजे हुआ, जब एक टोयोटा ग्लांजा कार (क्रमांक RJ 17 CB 6995) अचानक संतुलन खो बैठी। जानकारी के अनुसार, कार में केवल एक व्यक्ति सवार था, जिसकी पहचान लोकेश राठौर निवासी भवानी मंडी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि लोकेश भवानी मंडी से मंदसौर आए थे और उन्हें रामटेकरी की ओर जाना था, लेकिन रास्ता भटक जाने के कारण वे आगे निकल गए। जब लोकेश को अपनी गलती का अहसास हुआ, तो उन्होंने कार को यू-टर्न करने का प्रयास किया। इसी दौरान तेज रफ्तार के कारण वाहन अनियंत्रित हो गया और डिवाइडर से टकराकर सड़क के बीचों-बीच पलट गया। घटना के तुरंत बाद वायडी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से पलटी हुई कार को सीधा कर साइड में किया गया, जिससे यातायात बाधित नहीं हुआ। पुलिस ने चालक लोकेश को थाने लाकर कागज़ी कार्रवाई शुरू की है। शराब के नशे में होने की आशंका हादसे में चालक को कोई गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वह शराब के नशे में प्रतीत हो रहा था। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और चालक के मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
रिश्वतखोर PWD यंत्री को 4 साल की सजा:15 लाख के बिल पास करने के लिए ली थी 20 हजार रिश्वत; 2022 में हुआ था ट्रैप

सागर में 15 लाख रुपए के बिलों का भुगतान कराने के एवज में 20 हजार रुपए की रिश्वत लेने वाले लोक निर्माण विभाग (PWD) पीआईयू के तत्कालीन परियोजना यंत्री मुलायम प्रसाद अहिरवार (64) को अदालत ने 4 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मकरोनिया के गौरनगर निवासी आरोपी यंत्री को 10 जनवरी 2022 को लोकायुक्त ने रंगेहाथों पकड़ा था। वर्तमान में विशेष न्यायाधीश शहाबुद्दीन हाशमी की कोर्ट ने अभियोजन के साक्ष्यों को सही मानते हुए आरोपी पर 40 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। 90 लाख का था टेंडर, बिल निकालने के मांगे थे 1.5% अभियोजन के अनुसार, ठेकेदार और फरियादी नीलेश कुमार दीक्षित ने लोकायुक्त एसपी कार्यालय सागर में शिकायत दर्ज कराई थी। नीलेश ने बताया था कि उसने पीआईयू सागर द्वारा जारी निविदा के माध्यम से वर्ष 2016-17 में 90 लाख रुपए की लागत से इंडोर स्टेडियम खुरई का ठेका लिया था। इस कार्य के चल देयक भुगतान के करीब 15 लाख रुपए के बिलों को निकालने के एवज में तत्कालीन परियोजना यंत्री मुलायम प्रसाद 1.5 प्रतिशत कमीशन की मांग कर रहा था। लोकायुक्त ने 20 हजार रुपए लेते रंगेहाथों किया था ट्रैप फरियादी की शिकायत के बाद लोकायुक्त टीम ने मामले की जांच की, जो सही पाई गई। इसके बाद योजना बनाकर 10 जनवरी 2022 को फरियादी को 20 हजार रुपए रिश्वत लेकर भेजा गया। जैसे ही फरियादी ने तत्कालीन यंत्री मुलायम प्रसाद को रिश्वत की राशि दी, तभी लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगेहाथों पकड़ लिया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच पूरी होने के बाद कोर्ट में चालान पेश किया गया था। साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला इस प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी एडीपीओ एलपी कुर्मी ने की। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने मामले से जुड़े सभी साक्ष्य और दस्तावेज कोर्ट में पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पेश किए गए ठोस साक्ष्यों के आधार पर विशेष कोर्ट ने आरोपी मुलायम प्रसाद अहिरवार को दोषी माना और सजा सुनाई।
एनजीटी में पेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से खुलासा:मप्र में 1640 अस्पताल-लैब बिना अनुमति… इनमें 530 ग्वालियर में संचालित, भोपाल-जबलपुर में 0

मध्य प्रदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के बिना संचालित अस्पताल, क्लीनिक और पैथोलॉजी लैब की संख्या 1640 है। इनमें ग्वालियर में सबसे ज्यादा 530 हेल्थ फैसिलिटी बिना अनुमति संचालित हो रही हैं। जबकि भोपाल और जबलपुर में एक भी ऐसा अस्पताल या क्लीनिक नहीं है, जिसके पास बोर्ड की अनुमति न हो। प्रदेश में सबसे ज्यादा हेल्थ केयर फैसिलिटी इंदौर में हैं। यहां 44 संस्थान बिना अनुमति संचालित हो रहे हैं। यह जानकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पेश की है। नोट: ये आंकड़ा 2024 का है। इसमें प्रदेश की कुल हेल्थ केयर फैसिलिटी की संख्या 12261 बताई गई है। कार्रवाई के दावे, पर समस्या बरकरार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी में दो तरह का डेटा पेश किया है। एक डेटा 2024 का है, जिसमें बिना अनुमति (ऑथोराइजेशन) संचालित फैसिलिटी की संख्या 1640 बताई है। जबकि दूसरा डेटा 2016 का है, जिसमें फरवरी महीने इनकी संख्या 1196 पहुंची और वर्तमान में घटकर 845 पर पहुंच गई है। प्रभावी कार्रवाई के दावे के बावजूद बोर्ड ने एनजीटी से अनुरोध किया है कि सीएमएचओ को निर्देश दें, ताकि बिना अनुमति चल रहे संस्थाओं के रजिस्ट्रेशन निरस्त करें। दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर पर एनजीटी ने लिया था संज्ञान ग्वालियर क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से बताया गया है कि 9 फैसिलिटी को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि 391 को नोटिस जारी किया गया है। एनजीटी ने दैनिक भास्कर की उस खबर पर संज्ञान लिया था, जिसमें मेडिकल वेस्ट खुले में फेंके जाने का खुलासा हुआ था। इसके बाद से मामला एनजीटी में विचाराधीन है।







