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अगर बात-बात में आप भी देते हैं बच्चों को मोबाइल, तो हो जाएं सावधान बढ़ सकते हैं हेल्थ इश्यूज..यहां जानिए डॉक्टर की सलाह

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फरीदाबाद: हरियाणा एक ऐसा राज्य जो अपने खिलाड़ियों और मेडल्स के लिए पूरे देश में जाना जाता है, लेकिन आज उसी हरियाणा के फरीदाबाद जैसे शहरों में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है. जहां पहले बच्चे मैदानों में खेलते नजर आते थे अब वहीं छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में मोबाइल फोन दिखाई देता है. धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या बदल रही है और यह बदलाव कहीं न कहीं हमारी खेल संस्कृति पर भी असर डाल सकता है. हालांकि, यह भी सच है कि मोबाइल आज पढ़ाई का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल चिंता की वजह बनता जा रहा है.

मोबाइल से बच्चों के ओवरऑल डेवलपमेंट पर असर

Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की डॉ. धीरजा बब्बर Group Head – Physiotherapy ने बताया आजकल बच्चे पढ़ाई, गेम्स और स्क्रीन टाइम के कारण लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उनका पोस्चर बैठने और खड़े होने का तरीका खराब हो रहा है. लगातार झुककर फोन चलाने से टेक्स्ट नेक सिंड्रोम जैसी समस्या होने लगती है जिससे गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर पड़ता है और बच्चों के ओवरऑल डेवलपमेंट पर भी असर देखने को मिलता है.

हो सकती हैं कई हेल्थ इश्यूज

डॉ. धीरजा ने बताया आजकल कई बच्चे फोन देखते हुए खाना खाते हैं जो बिल्कुल गलत आदत है. बचपन से ही अगर पोस्चर खराब हो जाए, तो आगे चलकर सर्वाइकल पेन, सिर दर्द, कंधों में दर्द, हाथों में झुनझुनाहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

माता-पिता को भी सतर्क होने की जरूरत

डॉ. धीरजा ने बताया ज्यादातर बच्चे झुके हुए नजर आते हैं. एक तरफ घर पर घंटों मोबाइल, और दूसरी तरफ स्कूल में भारी बैग और झुककर पढ़ाई. यह आदत धीरे-धीरे शरीर पर बुरा असर डालती है. ऐसे में माता-पिता को अभी से सतर्क होने की जरूरत है. बड़े लोग जहां 7 से 8 घंटे स्क्रीन पर काम करते हैं वहीं बच्चों के लिए जितना कम मोबाइल इस्तेमाल हो उतना बेहतर है. लगातार एक ही पोजीशन में बैठने से मसल्स पर असर पड़ता है और आगे चलकर कई दिक्कतें हो सकती हैं. इसके अलावा आंखों में दर्द, भारीपन, सांस लेने में दिक्कत और घबराहट जैसी समस्याएं भी गलत पोस्टर की वजह से सामने आती हैं.

बच्चों को मोबाइल की आदत लगाना बिल्कुल गलत

डॉ. धीरजा ने बताया आजकल बच्चे ज्यादा समय मोबाइल गेम्स में बिताते हैं जिनमें अक्सर मारपीट और आक्रामकता होती है. इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं जो बच्चों की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं और उनका व्यवहार भी आक्रामक हो सकता है. बच्चों को मोबाइल की आदत लगाना बिल्कुल गलत है. इसकी बजाय माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, उनसे बात करनी चाहिए और उन्हें फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रेरित करना चाहिए.

ब्राइटनेस न ज्यादा तेज हो और न बहुत

डॉ. धीरजा ने बताया अगर मोबाइल इस्तेमाल करना भी हो, तो उसकी ब्राइटनेस न ज्यादा तेज हो और न बहुत कम, मिड लेवल पर रखनी चाहिए. साथ ही मोबाइल को आंखों से थोड़ा दूर रखकर इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आंखों पर कम असर पड़े और भविष्य में रेटिना से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सके.

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फरीदाबाद: हरियाणा एक ऐसा राज्य जो अपने खिलाड़ियों और मेडल्स के लिए पूरे देश में जाना जाता है, लेकिन आज उसी हरियाणा के फरीदाबाद जैसे शहरों में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है. जहां पहले बच्चे मैदानों में खेलते नजर आते थे अब वहीं छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में मोबाइल फोन दिखाई देता है. धीरे-धीरे उनकी दिनचर्या बदल रही है और यह बदलाव कहीं न कहीं हमारी खेल संस्कृति पर भी असर डाल सकता है. हालांकि, यह भी सच है कि मोबाइल आज पढ़ाई का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल चिंता की वजह बनता जा रहा है.

मोबाइल से बच्चों के ओवरऑल डेवलपमेंट पर असर

Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की डॉ. धीरजा बब्बर Group Head – Physiotherapy ने बताया आजकल बच्चे पढ़ाई, गेम्स और स्क्रीन टाइम के कारण लंबे समय तक मोबाइल इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उनका पोस्चर बैठने और खड़े होने का तरीका खराब हो रहा है. लगातार झुककर फोन चलाने से टेक्स्ट नेक सिंड्रोम जैसी समस्या होने लगती है जिससे गर्दन और रीढ़ की हड्डी पर बुरा असर पड़ता है और बच्चों के ओवरऑल डेवलपमेंट पर भी असर देखने को मिलता है.

हो सकती हैं कई हेल्थ इश्यूज

डॉ. धीरजा ने बताया आजकल कई बच्चे फोन देखते हुए खाना खाते हैं जो बिल्कुल गलत आदत है. बचपन से ही अगर पोस्चर खराब हो जाए, तो आगे चलकर सर्वाइकल पेन, सिर दर्द, कंधों में दर्द, हाथों में झुनझुनाहट जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

माता-पिता को भी सतर्क होने की जरूरत

डॉ. धीरजा ने बताया ज्यादातर बच्चे झुके हुए नजर आते हैं. एक तरफ घर पर घंटों मोबाइल, और दूसरी तरफ स्कूल में भारी बैग और झुककर पढ़ाई. यह आदत धीरे-धीरे शरीर पर बुरा असर डालती है. ऐसे में माता-पिता को अभी से सतर्क होने की जरूरत है. बड़े लोग जहां 7 से 8 घंटे स्क्रीन पर काम करते हैं वहीं बच्चों के लिए जितना कम मोबाइल इस्तेमाल हो उतना बेहतर है. लगातार एक ही पोजीशन में बैठने से मसल्स पर असर पड़ता है और आगे चलकर कई दिक्कतें हो सकती हैं. इसके अलावा आंखों में दर्द, भारीपन, सांस लेने में दिक्कत और घबराहट जैसी समस्याएं भी गलत पोस्टर की वजह से सामने आती हैं.

बच्चों को मोबाइल की आदत लगाना बिल्कुल गलत

डॉ. धीरजा ने बताया आजकल बच्चे ज्यादा समय मोबाइल गेम्स में बिताते हैं जिनमें अक्सर मारपीट और आक्रामकता होती है. इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं जो बच्चों की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं और उनका व्यवहार भी आक्रामक हो सकता है. बच्चों को मोबाइल की आदत लगाना बिल्कुल गलत है. इसकी बजाय माता-पिता को बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, उनसे बात करनी चाहिए और उन्हें फिजिकल एक्टिविटी के लिए प्रेरित करना चाहिए.

ब्राइटनेस न ज्यादा तेज हो और न बहुत

डॉ. धीरजा ने बताया अगर मोबाइल इस्तेमाल करना भी हो, तो उसकी ब्राइटनेस न ज्यादा तेज हो और न बहुत कम, मिड लेवल पर रखनी चाहिए. साथ ही मोबाइल को आंखों से थोड़ा दूर रखकर इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि आंखों पर कम असर पड़े और भविष्य में रेटिना से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सके.

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