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ग्वालियर में तेज रफ्तार कार ने बाइक सवारों को रौंदा:2 दिन चले उपचार के बाद एक की मौत; हादसे के वक्त सैलरी लेकर लौट रहा था घर

ग्वालियर में तेज रफ्तार कार ने बाइक सवारों को रौंदा:2 दिन चले उपचार के बाद एक की मौत; हादसे के वक्त सैलरी लेकर लौट रहा था घर

ग्वालियर में दोस्तों के साथ सैलरी लेकर घर लौट रहे बाइक सवारों को तेज रफ्तार कार ने रौंद दिया। घटना मुरार थाना क्षेत्र के त्यागी नगर पुलिया के पास शुक्रवार रात 9 बजे की है। घटना का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद घायलों को उपचार के लिए पहुंचाया। जहां पर एक युवक ने सोमवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। जबकि दो की हालत स्थिर बनी हुई है। पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। प्राइवेट जॉब करता था अंशु काल्पीब्रिज कॉलोनी निवासी 22 वर्षीय अंशु राजे पिता महावीर राजौरिया प्राइवेट जॉब करता था। शुक्रवार शाम वह अपने दोस्तों पवन व सूरज के साथ जॉब से सैलरी लेने के बाद वापस आ रहा था, अभी वह त्यागी नगर पुलिया के पास पहुंचा ही था कि सामने से आ रही बलेनो कार (एमपी 04 सीयू 9284) के चालक ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। कार की टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक पर सवार अंशु, पवन व सूरज हवा में उछले और सड़क पर गिरे। जिससे अंशु को गंभीर चोट लगी और सूूरज व पवन को कुछ कम चोट आई। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को उपचार के लिए पहुंचा दिया। दो दिन लड़ी जिंदगी की जंग अंशु को बचाने के लिए 2 दिन डॉक्टरों की टीम लगी रही और दो दिन जिंदगी से जंग लड़ने के बाद सोमवार सुबह अंशु ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उसकी मौत का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और उसके शव को पीएम हाउस पहुंचा कर आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अभी पवन और सूरज का उपचार चल रहा है।

ग्वालियर में केंद्रीय मंत्री सिंधिया की समीक्षा बैठक:नहीं पहुंचे सांसद भरत सिंह कुशवाहा; सड़कों की हालत पर अधिकारियों को लगाई फटकार

ग्वालियर में केंद्रीय मंत्री सिंधिया की समीक्षा बैठक:नहीं पहुंचे सांसद भरत सिंह कुशवाहा; सड़कों की हालत पर अधिकारियों को लगाई फटकार

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में विकास कार्यों की समीक्षा बैठक की। इस दौरान सांसद भरत सिंह कुशवाहा की अनुपस्थिति चर्चा का विषय रही। कलेक्ट्रेट में आयोजित इस बैठक में सिंधिया ने करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट्स का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई और ग्वालियर को विकासशील नगर बनाने पर जोर दिया। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने विशेष रूप से ग्वालियर की सड़कों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि सड़कों के लिए एक बड़ी योजना है, जिसमें कुल 294 सड़कों को लाल, पीली और हरी श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था। इन 294 सड़कों में से 109 सड़कें डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड में आती हैं। इनमें से लगभग 53 सड़कें (31 और 22) डिफेक्ट श्रेणी में थीं। यह आंकड़ा 3 अक्टूबर 2025 का था, जिसे अधिकारियों को जांचने के लिए दिया गया था। सिंधिया ने कहा कि 6 अप्रैल 2026 तक, यानी लगभग छह महीने बाद, 31 बदतर सड़कों में से 30 ठीक हो चुकी हैं, जबकि एक सड़क अभी बाकी है। सीवर लाइन डालने से क्षतिग्रस्त हुई 22 सड़कों में से 14 ठीक हो गई हैं और 8 अभी शेष हैं। कुल मिलाकर, 53 डिफेक्टेड सड़कों में से 44 ठीक हो चुकी हैं और केवल 9 सड़कें बची हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह 294 सड़कों की योजना का पहला चरण है। ग्वालियर में सीवर लाइन बनी बड़ी समस्या आखिरी मुद्दा सीवर लाइन का रहा, जो ग्वालियर के लिए बड़ी समस्या बन गई है। इस पर प्रभारी मंत्री और ऊर्जा मंत्री ने निर्णय लिया है कि ऊर्जा मंत्री की अध्यक्षता में सभी वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों, कलेक्टर और कमिश्नर के साथ बैठक कर एक स्पष्ट नीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और सभी जनप्रतिनिधि ग्वालियर के विकास और प्रगति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। शहर को आने वाले समय में विकासशील, प्रगतिशील और औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा सांसद भरत सिंह कुशवाहा के बैठक में शामिल न होने को लेकर रही, जिसे लेकर सियासी हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।

इंदौर जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई:टिगरिया बादशाह क्षेत्र में अवैध गोदाम पर छापा, 22 हजार लीटर सॉल्वेंट जब्त

इंदौर जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई:टिगरिया बादशाह क्षेत्र में अवैध गोदाम पर छापा, 22 हजार लीटर सॉल्वेंट जब्त

इंदौर जिला प्रशासन ने टिगरिया बादशाह क्षेत्र के समीप एक गोदाम पर सोमवार को बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर एसडीएम निधि वर्मा के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने छापा मारकर भारी मात्रा में बिना लाइसेंस के संग्रहित सॉल्वेंट बरामद किया। कार्रवाई के दौरान गोदाम में करीब 22,000 लीटर डिस्टिल्ड सॉल्वेंट अवैध रूप से रखा पाया गया। इसके अलावा मौके से ऑयल पेंट मिक्सर और पेंट रिमूवर भी मिले। जांच में सामने आया कि गोदाम संचालक के पास इन ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस नहीं था। सबसे गंभीर बात यह रही कि गोदाम में किसी प्रकार का फायर सेफ्टी सिस्टम मौजूद नहीं था। ऐसे में किसी भी दुर्घटना की स्थिति में आसपास के क्षेत्र में बड़ा हादसा हो सकता था और जनहानि की आशंका बनी हुई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार नारायण नांदेडा ने मौके पर ही गोदाम को सील करने की कार्रवाई की। इस दौरान तहसीलदार ओंकार मनाग्रे, सहायक खाद्य अधिकारी अविनाश जैन तथा बाणगंगा थाने का पुलिस बल भी मौजूद था। यह गोदाम खातीवाला टैंक निवासी अब्दुल कादिर पिता फखरुद्दीन का है। कलेक्टर ने कहा कि अवैध रूप से ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

लौकी दही तड़का: समय की है कमी? चावल-रोटी के साथ मिनटों में बनाएं लें लौकी दही तड़का, जानें आसान रेसिपी

लौकी दही तड़का: समय की है कमी? चावल-रोटी के साथ मिनटों में बनाएं लें लौकी दही तड़का, जानें आसान रेसिपी

लौकी दही तड़का: अगर आपके पास चावल या रोटी तैयार है और खाने में कुछ नया और टेस्टी चाहिए तो लोकी दही तड़का सबसे जल्दी बनने वाला सबसे अच्छा पद हो सकता है। खास बात ये है कि ये डिश सिर्फ 5 मिनट में बन जाती है. यह रेसिपी गुप्तचरों, ऑफिस वालों और बिजी लाइफस्टाइल वाले लोगों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है। साथ ही लोकी स्वास्थ्य भी अच्छा है। दही ताजगी और प्रोटीन देता है। इसे और भी लाजवाब बनाया जाता है। लौकी दही तड़का कैसे बनाएं? तेल- 1.5 मी राई (सरसों के दानें) 1 बड़ा चम्मच जीरा- 1 मात्रा सौंफ- 1 परिमाण कैरी पत्ते हरी मिर्च- 2, कटी हुई लहसुन- 4 कलियां, कटी हुई पेज- 1 मध्यम, कटा हुआ लोकी- आधा कप, कद्दू की हुई लाल मिर्च पाउडर- 2मि हल्दी पाउडर- आधा नमक दही- तीन चौथाई कप, फेंटी हुई हरा धनिया- गहनों के लिए सबसे पहले एक पैन में तेल गरम करें। मशीनरी मशीनरी चटकने। फिर जीरा और सौफ डालें। अब कारी पत्ता, हरी मिर्च और स्टालिन स्मारक कुछ सेकंड। इसके बाद कटा हुआ पैगलैबोलैण्ड मैट्रिक्स सूरजमुखी होने तक भून लें। अब कद्दूकस की हुई लोकी स्टूडियो 4-5 मिनट तक महान से महानतम। फिर हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्टैमिनल नमक अच्छी तरह मिला लें। बस एक मिनट और पराक्रम। बंद कर दें। मिक्स को थोड़ा ठंडा होने दें। फिर फेंटा हुआ दही फेंटे नहीं। ऊपर से हरा धनिए की सजा। तैयार है आपका स्वादिष्ट लौकी दही तड़का। • दही से पहले मिश्रण को ठंडा कर लें, डेयरी दही फैट हो सकता है।• सौंफ प्लांट का स्थान है, इसलिए इसे जरूर लगाएं।• अपनी पसंद के हिसाब से लाल मिर्च की मात्रा कम या ज्यादा कर सकते हैं। बिना ज्यादा मेहनत के घर का खाना बनाने की यह रेसिपी मजेदार इंटरनेट पर बनी है। अगर आप भी कम समय में कुछ अच्छा बनाना चाहते हैं तो आज ही ट्राई करें।

भोपाल में रिटायर्ड कर्नल के बंगले में घुसा नकाबपोश:पढ़ाई कर रहे बेटे ने पकड़ा, मारपीट कर भागा आरोपी; पुलिस जांच में जुटी

भोपाल में रिटायर्ड कर्नल के बंगले में घुसा नकाबपोश:पढ़ाई कर रहे बेटे ने पकड़ा, मारपीट कर भागा आरोपी; पुलिस जांच में जुटी

भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र के ई-4 अरेरा कॉलोनी में सोमवार तड़के पांच बजे एक नकाबपोश रिटायर्ड कर्नल के बंगले में दाखिल हो गया। वह चोरी का प्रयास कर रहा था। तभी अपने रूम में पढ़ाई कर रहे कर्नल के बेटे की नजर आरोपी पर पड़ी। बेटे ने आरोपी को पकड़ लिया, हालांकि आरोपी ने मारपीट की और मौके से भाग निकला। हमले में कर्नल के बेटे के सिर पर चोट आई है। पुलिस ने अज्ञात बदमाश के खिलाफ चोरी की नियत से बंगले में घुसने और मारपीट की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, ई-4 अरेरा कॉलोनी निवासी कान्हा समर्थ बोधिसत्व पुत्र मुकेश कुमार (29) प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनके पिता मुकेश कुमार सेना से रिटायर्ड कर्नल हैं। भारी चीज से सिर में वार किया मुकेश ने पुलिस को बताया कि सोमवार सुबह वह अपने कमरे में पढ़ाई कर रहा था। सुबह करीब चार बजे आहट हुई। बाहर देखा तो बंगले में एक नकाबपोश दबे पैर चलता हुआ नजर आया। लिहाजा कान्हा समर्थ ने नकाबपोश को पकड़ लिया और शोर मचाने लगा। पकड़ ढीली होते ही भाग निकला बदमाश इसी बीच छूटने के प्रयास में आरोपी ने कान्हा समर्थ के साथ मारपीट की और उसके सिर पर पास ही पड़ा सामान उठाकर मार दिया। मुंह पर चोट लगने के कारण कान्हा की पकड़ ढीली हो गई। लिहाजा आरोपी छूटकर भाग निकला। पुलिस हुलिया के आधार पर आरोपी की तलाश कर रही है।

मझगवां में 11 माह की बच्ची की मौत:श्वास नली में दूध फंसना बताया गया कारण, कुपोषण से मौत की जताई गई थी आशंका

मझगवां में 11 माह की बच्ची की मौत:श्वास नली में दूध फंसना बताया गया कारण, कुपोषण से मौत की जताई गई थी आशंका

सतना जिले के आदिवासी बहुल मझगवां क्षेत्र में 11 माह की एक बच्ची की मौत के बाद महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर बच्ची की मौत का कारण कुपोषण बताया जा रहा था, लेकिन प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में श्वास नली में दूध फंसने को मौत की वजह बताया गया है। जानकारी के अनुसार, मझगवां ब्लॉक की महतैन ग्राम पंचायत के कैमहा गांव में राजललन की 11 माह 20 दिन की बेटी भारती मवासी की रविवार-सोमवार की दरमियानी रात मौत हो गई। भारती को तीन दिन से बुखार था, जिसका इलाज परिजन गांव के कथित डॉक्टर लालबहादुर से करा रहे थे। बच्ची की मौत की खबर मिलते ही सोमवार को प्रशासनिक, स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम कैमहा गांव पहुंची। टीम ने प्रारंभिक जांच में पाया कि इलाज के बाद बच्ची को आराम मिल रहा था। कुपोषण से मौत की आशंका को जांच टीम ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। श्वसन नली में दूध जाने की आशंका जांच के दौरान सामने आया कि रविवार रात बच्ची अपनी मां के साथ सो रही थी। मां ने उसे लेटकर दूध पिलाया। रात करीब 12 बजे मां ने देखा तो भारती के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। शिशुरोग विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों को लेटकर दूध पिलाने के बाद उन्हें उठाकर थपकी देना आवश्यक होता है, अन्यथा दूध श्वसन नली में फंस सकता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनोज शुक्ला ने बताया कि प्रथम दृष्टया श्वसन नली में दूध जाने की वजह से ही मौत की आशंका है। हालांकि, मौत की स्पष्ट वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम जरूरी होता है, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही परिजनों ने भारती को दफना दिया था। टीम में मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर, सीएमएचओ डॉ मनोज शुक्ला, डीपीओ राजीव सिंह, बीएमओ डॉ रूपेश सोनी, सीडीपीओ अभय द्विवेदी आदि शामिल रहे। इससे पहले डीआईओ डॉ सुचित्रा अग्रवाल ने भी गांव पहुंचकर जांच की। डीआईओ ने बताया आधार कार्ड नहीं होने की वजह से परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। तो क्या कुपोषित थी भारती? भारती की मौत के बाद उसके कुपोषित होने का सवाल दिन भर चर्चा में रहा। विशेषज्ञ बताते हैं कि 11 माह की लड़कियों का वजन 8 से 10 किलोग्राम होना चाहिए, लेकिन 10 मार्च को आखिरी जांच में भारती का वजन 7 किलो 208 ग्राम था जो सामान्य से थोड़ा कम था। जांच टीम के मुताबिक भारती का वजन जरूर कम था, लेकिन इससे किसी की मौत नहीं होती। मौत की वजह जानने के लिए पीएम जरूरी थी, जो नहीं हुआ। जांच में यह भी सामने आया है कि 21 वर्ष की उम्र भूरी मवासी ने भारती को जन्म दिया था। अभी वह पांचवी दफा गर्भवती है, इससे बच्चों की बेहतर केयर नहीं हो पाती। मामले में कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने बताया कि बच्ची की मौत की खबर मिलते ही मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम भेजी गई थी जिससे वास्तविक स्थित पता चल सके, टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गर्भावस्था में कब्ज होने की वजह क्या है? जानें, इस समस्या से छुटकारा पाने के उपाय

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Last Updated:April 06, 2026, 23:12 IST प्रेग्नेंसी में कब्ज की समस्या कॉमन है. कई महिलाएं इस समस्या से ग्रस्त रहती हैं. इसके कई कारण होते हैं जैसे गर्भावस्था के दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाता है, जो आंतों की मांसपेशियों को ढीला कर देता है. इसके कारण भोजन को पचाने और मल को निकालने में समय ज्यादा लगता है. इसके अलावा, बढ़ते हुए गर्भाशय का पेट पर दबाव भी आंतों की गति को धीमा कर देता है. आप कुछ उपायों को आजमाकर कब्ज की समस्या को प्रेग्नेंसी में दूर कर सकती हैं. प्रेग्नेंसी में कब्ज होने की वजह क्या है? गर्भावस्था में कब्ज होना आम बात है, लेकिन कुछ महिलाओं को इससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसा ज्यादातर हार्मोनल बदलावों और शारीरिक दबाव की वजह से होता है. ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से इस समस्या से राहत मिल सकती है. गर्भावस्था के दौरान शरीर में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ जाता है, जो आंतों की मांसपेशियों को ढीला कर देता है. इसके कारण भोजन को पचाने और मल को निकालने में समय ज्यादा लगता है. इसके अलावा, बढ़ते हुए गर्भाशय का पेट पर दबाव भी आंतों की गति को धीमा कर देता है. कुछ महिलाओं में लो-फाइबर डाइट, पर्याप्त पानी न पीना या बहुत ज्यादा कैफीन (कॉफी और चाय) लेना भी कब्ज की वजह बन सकता है. कई बार डॉक्टर द्वारा दिए जाने वाले आयरन टेबलेट भी कब्ज बढ़ा देते हैं. अगर आहार में बदलाव किया जाए और पर्याप्त पानी पीया जाए, तो यह मदद कर सकता है. कोशिश करें कि दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीएं. अत्यधिक चाय या कॉफी से बचें, क्योंकि यह शरीर को डीहाइड्रेट कर सकती है और कब्ज बढ़ा सकती है. खाने में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना शामिल करें, जैसे साबुत अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल और ताजा सब्जियां. खाने को हमेशा ताजा और गर्म ही खाएं. हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या थोड़ी वॉक भी आंतों की गति को बढ़ाने में मदद कर सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. इसके साथ ही शौचालय का समय नियमित करने की कोशिश करें. सुबह उठकर या खाने के बाद शौचालय जाना चाहिए. हालांकि आंतरिक दबाव डालने या जोर लगाने से बचें. अगर घरेलू उपायों से आराम नहीं मिलता है, तो कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे भी मददगार हो सकते हैं. जैसे त्रिफला चूर्ण या अविपत्तिकर चूर्ण. 2 ग्राम त्रिफला चूर्ण को गर्म पानी के साथ रात में सोने से पहले लिया जा सकता है. अविपत्तिकर चूर्ण भी दिन में दो बार 2 ग्राम की मात्रा में लिया जा सकता है. ये नुस्खे पाचन को सुधारते हैं और कब्ज से राहत दिलाने में कारगर हैं. अगर मल त्याग के दौरान तेज दर्द हो, खून निकलने लगे या समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए. कभी-कभी ये गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 23:12 IST

Cleaning Hacks: घर में कांच की बोतलें और ऐसे करें साफ, 5 आसान तरीके 10 मिनट में छूट जाएं

Cleaning Hacks: घर में कांच की बोतलें और ऐसे करें साफ, 5 आसान तरीके 10 मिनट में छूट जाएं

साफ कांच की बोतलें: घर में उदाहरण के लिए कांच के जार और बोतलें भंडारण के साथ-साथ सजावट का हिस्सा बन जाते हैं, क्योंकि घर की चमक को स्टाइलिश लुक मिलता है। लेकिन रोजाना इस्तेमाल से इनमें सफेद धुंधली परत, पानी के निशान और जिद्दी दाग ​​जम जाते हैं। साधारण से साबुन धोने पर भी ये दाग छूटता नहीं है और कांच मैला दिखता है। अगर आप भी अपने घर की बोतलों को फिर से चमकाना चाहते हैं तो चिंता न करें। हम यहां कुछ घरेलू सरल उपाय बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप बिना मोटरसाइकिल के नया-सा चमकदार बना सकते हैं। ये तरीका पूरी तरह से सुरक्षित है। पीसी: एआई कांच की बोलत साफ करने के 5 तरीके 1.लेबम और सब्सट्रेट सोडा गहनों के दागों के लिए नींबू का रस और सुपरमार्केट सोडा का पेस्ट। प्रभावित स्थान पर रुकें 10 मिनट छोड़ें। फिर से प्रोटोटाइप से राँची धो लें। दोनों सामग्री समुच्चय सफाई एजेंट की तरह काम करती हैं और चमकती रहती हैं। 2. डिस्प्लेवॉश और चावल बोतल के अंदर छोटी डिशवॉश मिसाल, एक बड़ा कच्चा चावल और पानी के सिद्धांत महान से हिलाएं। चावल परावर्तक का काम करते हैं और अंदर की सतह से आसानी से निकल जाते हैं। पीसी: एआई 3. टूथपेस्ट से सफाई लिटिल टूथपेस्ट एरिया पर दाग वाली जगह। भव्य कारखानों से लेकर प्यारे हाथों से राँगें और धो लें। टूथपेस्ट का माइल्ड एब्रेसिव दाग हटाने में मदद करता है। पीसी: एआई 4. नमक और बर्फ के टुकड़े जिन बोतलों को ब्रूस से साफ नहीं कर पाते, उनमें दो-तीन बर्फ के टुकड़े और चुटकी भर नमक डाल देते हैं। अच्छे से हिलाएँ। नमक की तरह काम करता है और जिद्दी दाग ​​छूट मिलती है। 5. गुणगुना पानी और सिरका एक पोएशियान में गुनगुना पानी लें, आधा कप सफेद सिरका सिरप। जार या बोतल को 15-20 मिनट तक विलंबित करें। फिर ब्रून्स से पंखा राँघकर साफ करें। यह पुरानी और सबसे शानदार फैक्ट्री है। इन किताबों से आपकी कांच की वस्तुएं बिना कुचले के चमकीली हो सकती हैं। हर हफ्ते इस तरीके से कांच की बोतलें बिल्कुल चमकदार हो जाएंगी और उम्र से भी मुक्ति मिल जाएगी। यह भी पढ़ें: बड़ी खबर, 10 अप्रैल से टोल प्लाजा पर कैश प्लाजा बंद, जानें स्थिति…

गर्मियों में पिएं गुड़ का शरबत, डिहाइड्रेशन से होगा बचाव, दिनभर मिलेगी एनर्जी, दूर होगी थकान

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Last Updated:April 06, 2026, 22:51 IST Gud ka Sharbat peene ke fayde: आयुर्वेद में गुड़ को अमृत के समान माना गया है. यह प्राकृतिक मिठास का सबसे अच्छा स्रोत है और चीनी से कहीं बेहतर विकल्प है. गुड़ में आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन बी6 और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. गर्मियों में जब लोग थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, तब गुड़ तुरंत ऊर्जा देता है. आप डिहाइड्रेशन से बचने के लिए गुड़ का शरबत भी पी सकते हैं. जानिए, गर्मियों में गुड़ का शरबत पीने के लाभ. गुड़ का शरबत पीने के फायदे. Gud ka Sharbat peene ke fayde: गर्मी के मौसम में थकान, कमजोरी, सिरदर्द और डिहाइड्रेशन की समस्या आम हो जाती है. ऐसे में प्राकृतिक और पौष्टिक पेय की जरूरत पड़ती है. गुड़ का शर्बत गर्मियों के लिए एक बेहद फायदेमंद, रिफ्रेशिंग और एनर्जी देने वाला ड्रिंक है. गुड़ का शर्बत शरीर को तुरंत ठंडक और ऊर्जा देता है साथ ही गर्मी से होने वाली कई समस्याओं से राहत भी दिलाता है. गुड़ का शर्बत बनाना भी बहुत आसान है. आधा कप गुड़ को दो कप पानी में अच्छी तरह भिगो लें. इसमें एक बड़ा चम्मच नींबू का रस, आधा छोटा चम्मच भुना जीरा, कुछ पुदीना के पत्ते और स्वादानुसार काला नमक मिलाकर अच्छे से फेंट लें. यह शर्बत गर्मी में रोजाना पीने के लिए एकदम सही और स्वादिष्ट है. आयुर्वेद में गुड़ को अमृत के समान माना गया है. यह प्राकृतिक मिठास का सबसे अच्छा स्रोत है और चीनी से कहीं बेहतर विकल्प है. गुड़ में आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन बी6 और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. गर्मियों में जब लोग थकान और कमजोरी महसूस करते हैं, तब गुड़ तुरंत ऊर्जा देता है और खून की कमी (एनीमिया) को दूर करने में मदद करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. गुड़ पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, कब्ज की समस्या को दूर करता है और आंतों को साफ रखता है. गर्मी के मौसम में गुड़ को पानी या छाछ के साथ मिलाकर पीने से शरीर को ठंडक मिलती है, प्यास नहीं लगती और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. यह पेट की गैस, एसिडिटी और जलन को भी कम करता है. आयुर्वेद के अनुसार, गुड़ में मौजूद प्राकृतिक खनिज शरीर का तापमान संतुलित रखते हैं, जिससे गर्मी में भी कमजोरी नहीं होती. गुड़ का सेवन ग्लूकोज भी प्रदान करता है जो शरीर को तुरंत एनर्जी देता है. गर्मियों में अक्सर पसीना आने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है. गुड़ का शर्बत इनकी पूर्ति करके शरीर को हाइड्रेट रखता है. साथ ही यह इम्युनिटी बढ़ाने और थकान कम करने में भी सहायक है. विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में गुड़ का शर्बत पीना बहुत फायदेमंद है, क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से ठंडक पहुंचाता है और शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है. हालांकि, गर्मी में गुड़ की मात्रा ज्यादा न लें. दिन में एक या दो गिलास पर्याप्त है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है, उन्हें डॉक्टर की सलाह से ही गुड़ का सेवन करना चाहिए. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : April 06, 2026, 22:51 IST

प्रोटीन पाउडर रोज पी रहे हैं? कहीं मस्कुलर बॉडी बनाने के चक्कर में न हो जाए नुकसान, जान लें सच

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Last Updated:April 06, 2026, 22:50 IST प्रोटीन पाउडर आजकल फिटनेस और हेल्थ के लिए काफी इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन इन्हें लेने से पहले इसके फायदे के साथ-साथ संभावित जोखिमों को समझना भी जरूरी है. सही जानकारी के बिना इसका अधिक सेवन सेहत पर असर डाल सकता है. दूध या स्मूदी में प्रोटीन पाउडर मिलाना एक आसान और हेल्दी तरीका लग सकता है, क्योंकि प्रोटीन मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों के स्वास्थ्य और पूरे शरीर के सही कामकाज के लिए जरूरी होता है. खासकर वे लोग, जिनकी भूख कम होती है, जैसे कि बुजुर्ग, वे अपनी रोजाना की प्रोटीन जरूरत पूरी करने के लिए प्रोटीन पाउडर का सहारा लेते हैं, क्योंकि यह जल्दी और सुविधाजनक तरीका होता है. प्रोटीन पाउडर प्रोटीन का एक कंसंट्रेटेड स्रोत होता है, जो आमतौर पर पौधों, अंडे या दूध से तैयार किया जाता है. इसमें कई बार स्वाद बढ़ाने के लिए चीनी, फ्लेवर, गाढ़ापन देने वाले तत्व, विटामिन और मिनरल्स भी मिलाए जाते हैं. हालांकि यह सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसके सेवन से जुड़े कुछ छिपे हुए स्वास्थ्य जोखिम भी हो सकते हैं, जिनके बारे में जानना जरूरी है. प्रोटीन पाउडर के एक स्कूप में प्रोटीन की मात्रा काफी अलग-अलग हो सकती है. यह 10 ग्राम से लेकर 30 ग्राम तक हो सकती है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि वह मसल्स बढ़ाने के लिए बना है या वजन घटाने के लिए. Add News18 as Preferred Source on Google प्रोटीन पाउडर डाइटरी सप्लीमेंट्स की कैटेगरी में आते हैं, इसलिए इनके निर्माण और लेबलिंग की जिम्मेदारी कंपनियों पर ही होती है. ऐसे में कई बार यह जानना मुश्किल हो जाता है कि इसमें वास्तव में क्या-क्या मिलाया गया है. पाचन से जुड़ी समस्याएं: दूध से बने प्रोटीन पाउडर कुछ लोगों में पेट फूलना, गैस या असहजता पैदा कर सकते हैं. खासकर जिन्हें लैक्टोज इनटॉलरेंस या डेयरी से एलर्जी होती है, उन्हें इससे ज्यादा दिक्कत हो सकती है. छिपी हुई शुगर और ज्यादा कैलोरी- कई प्रोटीन पाउडर में अतिरिक्त शुगर और कैलोरी होती है, जो नियमित सेवन करने पर वजन बढ़ाने और ब्लड शुगर लेवल बढ़ाने का कारण बन सकती है. लंबे समय के असर स्पष्ट नहीं- प्रोटीन सप्लीमेंट्स का लंबे समय तक ज्यादा मात्रा में सेवन करने के असर पर अभी पर्याप्त शोध उपलब्ध नहीं है. इसलिए इसे रोजाना लंबे समय तक लेने को लेकर कुछ चिंताएं बनी रहती हैं. हालांकि प्रोटीन पाउडर इस्तेमाल में आसान होते हैं, लेकिन ये पूरी तरह जोखिम से मुक्त नहीं हैं. बेहतर और सुरक्षित तरीका यह है कि आप प्रोटीन प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से लें और सप्लीमेंट्स का उपयोग समझदारी और सीमित मात्रा में करें. First Published : April 06, 2026, 22:50 IST