दमोह का आधा नूरी नगर निकला बिजली चोर:75 घरों की जांच में 35 में हो रही थी चोरी, पहचान के लिए कंपनी ने कराई वीडियोग्राफी

दमोह शहर के नूरी नगर में शनिवार दोपहर बिजली विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान 35 उपभोक्ताओं को बिजली चोरी करते पकड़ा। इन सभी उपभोक्ताओं पर बिजली चोरी का मामला दर्ज किया गया है और 7 लाख रुपए से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के दक्षिण संभाग दमोह द्वारा शहर में बढ़ते लाइन लॉस को रोकने के लिए यह विशेष जांच अभियान चलाया गया था। कार्यपालन अभियंता मोतीलाल साहू के निर्देशन में कुल 6 टीमों ने नूरी नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में सघन चेकिंग की। अभियान के दौरान कुल 75 घरों की जांच की गई, जिसमें से 35 घरों में बिजली चोरी पकड़ी गई। बिजली चोरी में उपयोग किए जा रहे सभी 35 अवैध तारों को जब्त कर न्यायिक कार्यवाही के लिए कब्जे में लिया गया। विभाग ने इस दौरान वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई, जिससे चोरी करने वालों की पहचान की जा सके। कार्रवाई के दौरान कई बिजली चोर मौके से अपने मकानों में ताला लगाकर फरार हो गए। विभाग उनके खिलाफ भी कार्रवाई कर रहा है। जांच में सामने आया कि कई उपभोक्ता खपत नियंत्रित करने के लिए अलग से केबल डाले हुए थे, जबकि कुछ तारों में कट लगाकर या पोल से अवैध कनेक्शन जोड़कर बिजली का उपयोग कर रहे थे। इन उपभोक्ताओं के खिलाफ विद्युत अधिनियम की धारा 135 और 138 के तहत कार्रवाई की गई है। विभाग द्वारा इन सभी उपभोक्ताओं से कुल 7 लाख रुपये से अधिक की रिकवरी निर्धारित की गई है। इस सघन चैकिंग अभियान में कायर्पालन अभियंता मोतीलाल साहू , सहायक अभियंता राघवेंद्र इडिपाचे, कनिष्ठ अभियंता अजीत पटेल , शिवानी गुप्ता और पूजा खोब्रागड़े सहित विभागीय स्टाफ लाइनमेन और आउटसोर्स कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यपालन अभियंता मोतीलाल साहू ने बताया कि लाइन लॉस कम करने और राजस्व हानि रोकने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जिन 35 घरों में चोरी की बिजली पकड़ी गई है। सभी पर मामला दर्ज कर उनसे जुर्माना भी वसूला जा रहा है।
क्या तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना हर किसी के लिए होता है फायदेमंद? ये बीमारियां हैं तो बिल्कुल ना पिएं ताम्रजल

Last Updated:April 04, 2026, 16:08 IST Tamra jal benefits in hindi: कोई शीशे के बॉटल में पानी पीता है तो कोई प्लास्टिक के बोतल में पानी रखता है. घर पर होते हैं तो लोग स्टील के ग्लास, कांच के गिलास में पानी अधिक पीते हैं, लेकिन काफी लोग ऐसे भी होते हैं, जो तांबे के बर्तन में रखकर पानी पीना हेल्दी मानते हैं. तो क्या ताम्रजल हर किसी के लिए फायदा पहुंचाता है? जानिए यहां ताम्रजल किसके लिए होता है फायदेमंद और किसे पहुंचा सकता है नुकसान. क्या ताम्रजल पीना सभी के लिए है हेल्दी? Tamra jal benefits in hindi: पानी, एक ऐसा पेय पदार्थ है, जिसके सेवन से आधी से ज्यादा बीमारियां खुद-ब-खुद कम हो जाती हैं. आयुर्वेद से लेकर विज्ञान तक में 2 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है, हालांकि पानी तभी पीना लाभकारी है जब शरीर को प्राकृतिक तरीके से प्यास लगती है. पानी को स्वास्थ्यवर्धक बनाने के लिए तांबे के जल के सेवन को शरीर के लिए लाभकारी बताया गया है, लेकिन क्या सबके लिए तांबे के जल का सेवन लाभकारी है? ताम्रजल भारतीय परंपरा का हिस्सा है, लेकिन आयुर्वेद कभी भी किसी चीज को बिना शरीर की प्रवृत्ति को पहचाने थोपता नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि हर द्रव्य का प्रभाव व्यक्ति की प्रकृति, अवस्था, और समय पर निर्भर करता है. आधुनिक विज्ञान भी यही संकेत देता है कि कुछ स्थितियों में अधिक कॉपर शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है. तांबे का जल उष्ण और तीक्ष्ण स्वभाव वाला होता है और पाचन को बढ़ाने में सहायक है, लेकिन पित्त की वृद्धि भी शरीर में करता है. इसलिए, जरूरी नहीं है कि तांबे का जल हर किसी के लिए लाभकारी हो. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. अब सवाल है कि किन लोगों को तांबे का जल नहीं पीना चाहिए. तांबे का जल मधुमेह से पीड़ित लोगों को नहीं पीना चाहिए. इन लोगों के शरीर की प्रवृत्ति पित्त है; उन्हें भी तांबे के जल से परहेज करना चाहिए. पित्त की प्रवृत्ति बढ़ने से शरीर में गर्मी बढ़ती है और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अगर आप लिवर और किडनी से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तब भी तांबे के जल का सेवन करना लाभकारी नहीं रहेगा. तांबे का जल लिवर और किडनी के काम को प्रभावित करता है, जिससे फिल्टर करने की प्रक्रिया भी बाधित हो सकती है. इसके अलावा, छोटे बच्चों को भी तांबे का पानी नहीं पीना चाहिए. सुबह खाली पेट तांबे के पानी को पचाने में बहुत मेहनत लगती है और बच्चों की पाचन अग्नि इतनी तेज नहीं होती. विज्ञान और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि शरीर में कॉपर की अधिकता से रक्त में शर्करा की मात्रा असंतुलित हो जाती है और रक्त वाहिकाओं पर भी अत्याधिक जोर पड़ता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : April 04, 2026, 16:08 IST
यौन उत्पीड़न मामले में मलयालम फिल्म निर्देशक हिरासत में:एक्ट्रेस ने रंजीत बालकृष्णन पर आरोप लगाए, पुलिस जांच में जुटी

मशहूर मलयालम फिल्म निर्देशक रंजीत बालकृष्णन को यौन उत्पीड़न के आरोपों में तीन दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। यह आदेश शनिवार को कोच्चि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस की याचिका मानते हुए जारी किया। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) अब मामले की और गहन जांच करेगी। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला तब उजागर हुआ जब एक अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि रंजीत ने फिल्म शूट के दौरान एक कैरवैन (वैन) के अंदर उनके साथ यौन उत्पीड़न का प्रयास किया। शिकायत के आधार पर 28 मार्च को FIR दर्ज की गई और कोच्चि पुलिस ने उस पर गंभीर आरोपों का मामला बनाया। पुलिस ने दावा किया कि शुरुआती जांच में आरोप और साक्ष्य पर्याप्त पाए गए, जिसके बाद ही रंजीत को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस की दलीलों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सोमवार शाम तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि पूछताछ और सबूत एकत्रण का काम जारी रखा जा सके। रंजीत का स्वास्थ्य भी अब चर्चा का विषय बन गया है। उनकी वकील टीम ने कोर्ट में दलील दी कि गिरफ्तार करते समय उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और उनके गंभीर स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों (जैसे लीवर ट्रांसप्लांट और पिछले स्पाइनल सर्जरी) के कारण हिरासत में स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस हिरासत की अनुमति दी, साथ ही निर्देश दिए कि हर 24 घंटे में उनकी मेडिकल जांच की जाए। रंजीत पहले ही एर्नाकुलम सब जेल में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं और उनका बेल आवेदन अगली सुनवाई के लिए सोमवार/मंगलवार को पेश किया जाएगा। उनके वकील का कहना है कि वे इस मामले में निर्दोष हैं और आरोपों को झूठा और साजिश बताया है। पुलिस की SIT अब सेट पर मौजूद कर्मियों, गवाहों और उपकरणों के सबूतों की पड़ताल कर रही है, ताकि स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके। इसके अलावा फिल्म जगत के संगठनों ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है और उद्योग में सुरक्षा तथा शिकायत तंत्र के कार्यान्वयन पर जोर दिया जा रहा है।
यौन उत्पीड़न मामले में मलयालम फिल्म निर्देशक हिरासत में:एक्ट्रेस ने रंजीत बालकृष्णन पर आरोप लगाए, पुलिस जांच में जुटी

मशहूर मलयालम फिल्म निर्देशक रंजीत बालकृष्णन को यौन उत्पीड़न के आरोपों में तीन दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। यह आदेश शनिवार को कोच्चि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस की याचिका मानते हुए जारी किया। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) अब मामले की और गहन जांच करेगी। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला तब उजागर हुआ जब एक अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि रंजीत ने फिल्म शूट के दौरान एक कैरवैन (वैन) के अंदर उनके साथ यौन उत्पीड़न का प्रयास किया। शिकायत के आधार पर 28 मार्च को FIR दर्ज की गई और कोच्चि पुलिस ने उस पर गंभीर आरोपों का मामला बनाया। पुलिस ने दावा किया कि शुरुआती जांच में आरोप और साक्ष्य पर्याप्त पाए गए, जिसके बाद ही रंजीत को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस की दलीलों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सोमवार शाम तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है, ताकि पूछताछ और सबूत एकत्रण का काम जारी रखा जा सके। रंजीत का स्वास्थ्य भी अब चर्चा का विषय बन गया है। उनकी वकील टीम ने कोर्ट में दलील दी कि गिरफ्तार करते समय उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और उनके गंभीर स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों (जैसे लीवर ट्रांसप्लांट और पिछले स्पाइनल सर्जरी) के कारण हिरासत में स्वास्थ्य जोखिम हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस हिरासत की अनुमति दी, साथ ही निर्देश दिए कि हर 24 घंटे में उनकी मेडिकल जांच की जाए। रंजीत पहले ही एर्नाकुलम सब जेल में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में हैं और उनका बेल आवेदन अगली सुनवाई के लिए सोमवार/मंगलवार को पेश किया जाएगा। उनके वकील का कहना है कि वे इस मामले में निर्दोष हैं और आरोपों को झूठा और साजिश बताया है। पुलिस की SIT अब सेट पर मौजूद कर्मियों, गवाहों और उपकरणों के सबूतों की पड़ताल कर रही है, ताकि स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके। इसके अलावा फिल्म जगत के संगठनों ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है और उद्योग में सुरक्षा तथा शिकायत तंत्र के कार्यान्वयन पर जोर दिया जा रहा है।
कीमती लकड़ी ही नहीं, संजीवनी भी हैं सागवान के पत्ते, एक्जिमा से लेकर बवासीर तक में रामबाण!

Last Updated:April 04, 2026, 15:45 IST Teak Leaves Health Benefits: अक्सर हम सागवान को केवल फर्नीचर के लिए इस्तेमाल होने वाली मजबूत लकड़ी के रूप में जानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद में इसके पत्ते किसी ‘सुपरफूड’ या औषधि से कम नहीं हैं? त्वचा की गंभीर बीमारियों जैसे एक्जिमा और एलर्जी से लेकर, बवासीर और पाचन संबंधी विकारों तक, सागवान के पत्ते सेहत का एक बड़ा खजाना समेटे हुए हैं. एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर ये पत्ते न केवल घाव भरने में सक्षम हैं, बल्कि शरीर के भीतर छिपे टॉक्सिंस को बाहर निकालकर आपको एक सेहतमंद जीवन प्रदान कर सकते हैं. सागवान के पत्ते त्वचा रोगों (एक्जिमा, एलर्जी), सूजन, घाव भरने, दस्त, बवासीर और बुखार जैसी समस्याओं में औषधीय रूप से बहुत फायदेमंद होते हैं. इनमें प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुण पाए जाते हैं. इसके पत्तों का उपयोग आयुर्वेद में मुख्य रूप से घाव सुखाने, त्वचा में निखार लाने और शरीर में मौजूद टॉक्सिंस को कम करने के लिए सदियों से किया जाता रहा है. विशेषज्ञ डॉक्टर विनीत शर्मा के अनुसार, सागवान के पत्ते त्वचा के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध होते हैं. इनमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) गुण मुँहासे, खुजली, एलर्जी और घावों को तेजी से ठीक करने में मदद करते हैं. यह न केवल त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करते हैं, बल्कि प्राकृतिक चमक लाने में भी सहायक होते हैं. सागवान के पत्ते घाव भरने और त्वचा संबंधी विभिन्न समस्याओं के लिए बहुत फायदेमंद माने जाते हैं. इनमें सूजन को कम करने और घाव को जल्दी भरने के प्राकृतिक गुण होते हैं. यदि आपको छोटे घाव, जलन, खुजली या त्वचा का कोई संक्रमण है, तो सागवान के पत्तों का अर्क या लेप इन समस्याओं को कम करने में जादुई भूमिका निभा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google सागवान के पत्ते पाचन में सहायक होते हैं और पेट संबंधी समस्याओं जैसे दस्त, पेचिश और कब्ज के लिए पारंपरिक रूप से फायदेमंद माने जाते हैं. इसमें विशेष कसैले गुण होते हैं जो मल को बांधने में मदद करते हैं, जिससे दस्त जैसी समस्या में तुरंत आराम मिलता है. इसके अतिरिक्त, इनका उपयोग आंतरिक रक्तस्राव को रोकने में भी किया जाता है. सागवान के पत्ते सूजन और दर्द में कमी लाने के लिए बहुत प्रभावी हैं. इनके पत्तों का लेप मांसपेशियों के दर्द और जोड़ों की सूजन में राहत देता है. पुराने घावों या एलर्जी के कारण होने वाली परेशानी में इनके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण राहत प्रदान करते हैं. यह शरीर के किसी भी हिस्से में होने वाली पुरानी चोटों के दर्द को कम करने के लिए एक सटीक घरेलू उपचार है. सागवान के पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं और त्वचा संबंधी समस्याओं, घाव भरने, सूजन कम करने, और पाचन विकारों (दस्त/पेचिश) के उपचार में बहुत फायदेमंद हैं. इनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं. और इनके अर्क का उपयोग बाहरी रक्तस्राव को रोकने व एलर्जी कम करने के लिए किया जा सकता है. सागवान के पत्ते दाग-धब्बे और मुंहासे के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. इनमें एंटी-बैक्टीरियल और सूजनरोधी गुण होते हैं. जो मुंहासों को कम करने और त्वचा की सूजन को शांत करने में मदद करते हैं. इन्हें पीसकर लेप लगाने से त्वचा संबंधी समस्याओं (जैसे खुजली, घाव) में आराम मिलता है. First Published : April 04, 2026, 15:45 IST
Machar Bhagane Ka Tarika: मच्छरों से परेशान? घर में लगाएं ये पौधा, दूर-दूर तक नहीं भटकेंगे

Last Updated:April 04, 2026, 15:28 IST गर्मियों में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से लोग काफी परेशान रहते हैं और उनसे बचने के लिए केमिकल वाले उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अब आप मरुआ के पौधे की मदद से इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं. यह पौधा न सिर्फ मच्छरों को दूर रखता है, बल्कि औषधीय गुणों के कारण सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. इसे आप आसानी से अपने किचन गार्डन या गमले में उगा सकते हैं. गर्मियों की शुरुआत होते ही जहां लोग तेज धूप और गर्मी से परेशान रहते हैं, वहीं मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ जाता है. दिन में चिलचिलाती धूप और गर्म हवाएं परेशान करती हैं, तो शाम होते ही मच्छरों का आतंक बढ़ जाता है. ग्रामीण हो या शहरी क्षेत्र, हर जगह लोग मच्छरों से काफी परेशान हैं. अप्रैल में गर्म हवाओं के कारण घरों के आसपास जमा पानी सूख जाता है, लेकिन नालियों और कूलरों में मच्छरों का लार्वा तेजी से पनपता है. यही मच्छर मौका मिलते ही घरों में घुसकर लोगों की परेशानी बढ़ा देते हैं. मच्छरों से बचने के लिए लोग अक्सर केमिकल वाली अगरबत्ती या कॉइल का इस्तेमाल करते हैं, जिससे कई बार सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में मच्छरों को भगाने के देसी उपाय ज्यादा फायदेमंद होते हैं. एक ऐसा पौधा है जिसे गमले में लगाकर आसानी से मच्छरों से छुटकारा पाया जा सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google दरअसल, मरुआ का पौधा एक प्राकृतिक मॉस्किटो रिपेलेंट है. तुलसी जैसा दिखने वाला यह पौधा औषधीय गुणों से भरपूर होता है और इसे किचन गार्डन में आसानी से उगाया जा सकता है. एसबीवीपी इंटर कॉलेज, रायबरेली के गृह विज्ञान प्रवक्ता अरुण कुमार सिंह के अनुसार, मरुआ पुदीना और तुलसी की प्रजाति का पौधा है, जो बच्चों के लिए लाभकारी है, लेकिन मच्छरों और कीट-पतंगों को दूर रखता है. इसकी तेज खुशबू के कारण मच्छर और अन्य कीड़े आसपास नहीं आते. अरुण कुमार सिंह के अनुसार, मरुआ की तेज खुशबू मच्छरों को भले ही दूर रखती हो, लेकिन यह बच्चों के लिए फायदेमंद होता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं. इसके पत्तों को चाय में उबालकर पीने से नजला, जुकाम और खांसी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. मरुआ मुंह की दुर्गंध दूर करने में कारगर है और मसूड़ों की बीमारियों में भी राहत देता है. यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और पेट के कीड़ों को खत्म करने में मदद करता है. इसके अलावा, यह माइग्रेन के दर्द में भी राहत देने में उपयोगी माना जाता है. अरुण कुमार सिंह के अनुसार, मरुआ को किचन गार्डन या गमले में आसानी से उगाया जा सकता है. इसकी पत्तियों का उपयोग चटनी, सलाद और सब्जी में किया जा सकता है. हालांकि, इसका सेवन हमेशा उचित मात्रा में ही करना चाहिए, वरना इसका स्वाद कड़वा लग सकता है. First Published : April 04, 2026, 15:28 IST
सरसो का तेल और बादाम से घर पर बनाए केमिकल फ्री आर्गेनिक काजल, 15 मिनट में होगा तैयार, आंखों के सेहत के लिए वरदान

Last Updated:April 04, 2026, 15:00 IST घर पर ऑर्गेनिक काजल बनाना आसान और सुरक्षित है. एक दीये में घी या सरसों का तेल डालकर बाती जलाएं और ऊपर प्लेट रख दें. 10–15 मिनट में कालिख जमा हो जाएगी. इसे निकालकर थोड़ा नारियल या बादाम तेल मिलाएं. यह काजल आंखों को ठंडक देता है, केमिकल-फ्री होता है और रोज़ाना इस्तेमाल के लिए अच्छा माना जाता है. आजकल बाजार में मिलने वाले काजल में कई तरह के केमिकल्स मिलाए जाते हैं, जो आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे में पुराने घरेलू नुस्खों से बना ऑर्गेनिक काजल एक सुरक्षित और असरदार विकल्प है. खास बात यह है कि इसे बनाना बहुत आसान है और इसके लिए ज्यादा चीजों की भी जरूरत नहीं पड़ती. घर पर ऑर्गेनिक काजल बनाने के लिए आपको कुछ सामान्य चीजों की जरूरत होती है. एक छोटा दीया, सरसों का तेल या देसी घी रूई की बाती, 1 बादाम एक साफ स्टील या पीतल की प्लेट और थोड़ा सा नारियल तेल या बादाम तेल. ये सारी चीजें आमतौर पर हर घर में आसानी से मिल जाती हैं. सबसे पहले दीये में सरसों का तेल या घी डालें और उसमें रूई की बाती लगाएं. अब उस बाती में एक बादाम भी डाल दें. बादाम डालने से काजल और भी पोषक बनता है. अब दीये को जलाएं और उसके ऊपर एक साफ प्लेट उल्टी करके रख दें. ध्यान रखें कि प्लेट दीये के ऊपर इस तरह रखें कि दीये की लौ सीधे प्लेट को छूती रहे. इससे धीरे-धीरे प्लेट के नीचे कालिख (काजल) जमा होने लगेगी. लगभग 10 से 15 मिनट तक दीया जलने दें. जब पर्याप्त कालिख जमा हो जाए, तो प्लेट को धीरे से हटाएं. Add News18 as Preferred Source on Google अब प्लेट पर जमा हुई कालिख को एक साफ चम्मच या उंगली की मदद से निकाल लें. इसमें थोड़ा सा नारियल तेल या बादाम तेल मिलाएं. इसे अच्छे से मिलाकर एक स्मूद पेस्ट बना लें. बस आपका केमिकल-फ्री, ऑर्गेनिक काजल तैयार है. इसे आप एक छोटे डिब्बे में स्टोर करके रख सकते हैं. घर पर बना यह काजल कई तरह से फायदेमंद होता है. यह पूरी तरह केमिकल-फ्री होता है आंखों को ठंडक देता है, आंखों में जलन या एलर्जी नहीं करता, नियमित इस्तेमाल से आंखों की सफाई में मदद करता है, और बच्चों से लेकर बड़े तक सभी इस्तेमाल कर सकते हैं. 65 साल की नंदी देवी, जो पिछले कई सालों से खुद घर पर काजल बनाकर इस्तेमाल कर रही हैं, वो लोकल 18 से बात करते हुए बताती हैं कि मैं बचपन से अपनी मां को ऐसे ही काजल बनाते हुए देखती आई हूं. आज भी मैं यही तरीका अपनाती हूं. इस काजल से आंखों में ठंडक मिलती है और कभी कोई जलन नहीं होती. मैंने अपने बच्चों और अब पोते-पोतियों को भी यही काजल लगाया है. बाजार के काजल से अच्छा तो अपना घर का बना काजल ही होता है. काजल लगाने से पहले हाथ साफ रखें, काजल को हमेशा साफ डिब्बे में रखें, अगर आंखों में कोई समस्या हो तो इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह लें और बहुत ज्यादा मात्रा में न लगाएं. First Published : April 04, 2026, 15:00 IST
खरबूजा ख़रीदने के टिप्स: खरबूजा मीठा है या नहीं? बिना काटे एक मिनट में पता लगाने के लिए काम आएंगे ये आसान टिप्स

खरबूजा कैसे खरीदें: फल हम सभी को खाना पसंद करते हैं। वहीं गर्मियों में खरबूजा खाना हर किसी को पसंद होता है। यह न सिर्फ स्वादिष्ट होता है, बल्कि शरीर को ठंडक भी देता है। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि हम बाजार से खरबूजा तो ले आते हैं, पर वह मीठा नहीं होता। ऐसे में पैसा और मूड दोनों ख़राब हो जाते हैं। ऐसे में अगर आप भी बिना काटे मीठा खरबूजा पहचानना चाहते हैं तो ये आसान टिप्स आपके बहुत काम आएंगे। आख़िर से पहचानें पका और मीठा खरबूजा फल, मिठाइयाँ देता है। इसके लिए खरबूजे के विभिन्न भागों को सुंघें। अगर वहां से मित्रता आ रही है, तो समझिए खरबूजा अच्छा है। अगर कोई साबुत नहीं है या अजीब सी गंध है, तो उसे न लें। रंग पर ध्यान खरबूजे का रंग बहुत कुछ बताता है। इसके लिए पका हुआ खरबूजा पीला या फिर सुनहरा होता है। बहुत ज्यादा हरा रंग कच्चा होने का संकेत है। वहीं बहुत ज्यादा दाग-धब्बे या काले निशान खराब होने का संकेत भी हो सकता है। ख़ज़ाने की मजबूती देखें खरबूजे का छिलका जैसा जाल होता है और ध्यान रहे कि यह जाल साफ और आकर्षक होना चाहिए। पतला या बहुत मजबूत कठोर छिलका कच्चा फल का संकेत हो सकता है। वजन से पहचानें हमेशा वही खरबूजा चुनें जो आपके आकार के खाते से भारी लगे। भारी खरबूजा का अर्थ है पानी और रस का मिश्रण, अर्थात वह मीठा हो सकता है। थैला देखें खरबूजे के नीचे वाले भागों को चित्रित किया गया है। अगर वह थोड़ा सा दबता है, तो फल पका हुआ है। वहीं अगर बहुत सख्त है तो कच्चा है, और बहुत ज्यादा नंगा है तो ज्यादा पका या बुरा हो सकता है। आवाज से पहचानें खरबूजे को मंत्र से थपथपाएं। अगर हल्की “थप-थप” की गूंजती आवाज आती है, तो वह अच्छा है। भारी और आवाज का मतलब होता है फल ज्यादा पका हुआ या अंदर से बुरा हो सकता है। देखें अगर आसानी से अलग हो गया लुक, तो फल पका हुआ है। वहीं अगर जबरदस्ती फोर्सेज लागे, तो वह रॉ हो सकता है। मीठा और स्वादिष्ट खरबूजा बनाना मुश्किल नहीं है, बस थोड़ा सा ध्यान देने की जरूरत है। कुछ बातों पर ध्यान देने से आपको सही दाम में शानदार क्वालिटी का खरबूजा मिल सकता है। यह अवश्य पढ़ें: सत्तू पराठा रेसिपी: विशेष रूप से हाई प्रोटीन वाला सत्तू का पराठा, पति से लेकर बच्चों के टिफिन तक सभी के लिए परफेक्ट रेसिपी
एक घर बंट गया? सुनेत्रा पवार के ईसीआई को लिखे पत्र से एनसीपी में फूट की अटकलें तेज | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:04 अप्रैल, 2026, 14:37 IST हालांकि हाल के घटनाक्रमों ने राकांपा के भीतर दरार की चर्चा को हवा दे दी है, अजित पवार के बेटे पार्थ ने इस चर्चा को कम करने की कोशिश की है और जोर देकर कहा है कि पार्टी एकजुट रहेगी। महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार. (फाइल फोटो) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एपी) की ओर से सुनेत्रा पवार द्वारा सौंपा गया पत्र सार्वजनिक होने के बाद भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी में शीर्ष नेता एक-दूसरे से सहमत नहीं हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राकांपा प्रमुख सुनेत्रा पवार द्वारा हस्ताक्षरित और भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) को भेजे गए पत्र में पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के पदनाम शामिल नहीं थे। इससे सुनेत्रा पवार, सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के बीच दरार की अटकलें लगने लगी हैं। उधर, सुनेत्रा पवार के दिल्ली में रहने के दौरान प्रफुल्ल पटेल ने उनसे मुलाकात नहीं की. हालांकि, सुनेत्रा पवार और उनके बेटे ने पटेल से उनके दिल्ली स्थित आवास पर शिष्टाचार मुलाकात की। पत्र युद्ध किस बारे में है? महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की मृत्यु के बाद, प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि कार्यकारी अध्यक्ष के पास राष्ट्रपति के बराबर शक्तियां होती हैं और इसलिए, वह पार्टी की कमान संभालेंगे। यह पत्र अजित पवार की मृत्यु के 24 घंटे के भीतर भेजा गया था, जिसके बाद 26 फरवरी को सुनेत्रा पवार को पार्टी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। राष्ट्रपति पद संभालने पर, सुनेत्रा पवार ने पार्टी के संविधान में संशोधन करने और कार्यकारी अध्यक्ष-प्रफुल्ल पटेल को अतिरिक्त शक्तियां देने के प्रस्तावों को खारिज करने के निर्देश जारी किए। इससे प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे में नाराजगी फैल गई. बाद में सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को दूसरा पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने खुद को राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ-साथ कोषाध्यक्ष पद पर भी बताया। हालाँकि इस पत्र में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नामों का उल्लेख था, लेकिन इसमें स्पष्ट रूप से पार्टी के भीतर उनके विशिष्ट पदों का कोई उल्लेख नहीं किया गया था। इन घटनाक्रमों के बीच, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने दावा किया कि अजीत पवार की पार्टी विभाजन के कगार पर है, और उसके 25 से 30 विधायक जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने आगे सुझाव दिया कि शिवसेना (शिंदे गुट) को भी इसी तरह के भाग्य का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच, एनसीपी (शरद पवार गुट) की नेता विद्या चव्हाण ने कहा कि अजीत पवार की मृत्यु के बाद से पार्टी के भीतर चीजें सुचारू नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पार्टी पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच, अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार ने स्पष्टीकरण जारी करने के लिए एक्स, पूर्व में ट्विटर का सहारा लिया, और सभी को आश्वस्त किया कि पार्टी के भीतर सब कुछ वास्तव में ठीक है। प्रफुल्ल पटेल जी और सुनील तटकरे जी को निशाना बनाने वाली आधारहीन रिपोर्टें और काल्पनिक कथाएँ कल्पना के अलावा और कुछ नहीं हैं। उनकी दशकों की अटूट प्रतिबद्धता और नेतृत्व हम सभी का मार्गदर्शन करता रहता है। ऐसे वरिष्ठ नेताओं को मनगढ़ंत विवादों में घसीटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है… – पार्थ सुनेत्रा अजित पवार (@parthagitpawar) 2 अप्रैल 2026 उन्होंने कहा कि पार्टी सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर काम कर रही है और सभी अटकलें निराधार हैं। पहले प्रकाशित: 04 अप्रैल, 2026, 14:37 IST समाचार राजनीति एक घर बंट गया? सुनेत्रा पवार के ईसीआई को लिखे पत्र से एनसीपी में फूट की अटकलें तेज हो गई हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सुनेत्रा पवार एनसीपी पत्र विवाद(टी)एनसीपी नेतृत्व दरार(टी)सुनेत्रा पवार प्रफुल्ल पटेल(टी)सुनील तटकरे भूमिका(टी)अजित पवार की मृत्यु प्रभाव(टी)एनसीपी चुनाव आयोग पत्र(टी)महाराष्ट्र राजनीतिक संकट(टी)एनसीपी विभाजन अटकलें
बैतूल में महिला का शव फंदे पर मिला:पानी पीने उठे पति ने देखा शव, 5 बच्चों की थी मां

बैतूल जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत खेड़ी पुलिस चौकी के ग्राम कनारा में शुक्रवार देर रात 46 वर्षीय महिला ने घर के अंदर साड़ी का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली। महिला का शव रात करीब 11 से 12 बजे के बीच पानी पीने उठे पति ने फंदे से लटका देखा। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई की। शनिवार को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। फिलहाल महिला द्वारा यह आत्मघाती कदम उठाने के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है और पुलिस मर्ग कायम कर मामले की जांच कर रही है। रात में पानी पीने उठा था पति, बल्ली से लटक रहा था शव मृतक महिला की पहचान ग्राम कनारा निवासी मिटीया (46) पत्नी फतेह सिंह कवडे के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 11 से 12 बजे के बीच मृतका के पति फतेह सिंह पानी पीने के लिए उठे थे। जब वह घर के अंदर पहुंचे तो उन्होंने अपनी पत्नी को साड़ी के फंदे के सहारे बल्ली से लटका हुआ पाया। घटना के समय घर में अन्य परिजन सो रहे थे। परिजनों ने फंदे से उतारा, पुलिस ने कराया PM पत्नी का शव फंदे पर लटका देख पति ने तत्काल परिजनों को सूचित किया। परिजनों ने मौके पर पहुंचकर महिला को फंदे से नीचे उतारा और खेड़ी पुलिस चौकी को सूचना दी। सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी राकेश सरेआम अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और पंचनामा कार्रवाई पूरी की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल बैतूल भेजा गया। मजदूरी करती थी मृतका, 5 बच्चों की है मां शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। परिजनों ने बताया कि महिला मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करती थी। उसके पांच बच्चे हैं, जिनमें चार बेटे और एक बेटी शामिल हैं। बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि चारों बेटे बाहर मजदूरी करते हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और आत्महत्या के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए सभी संभावित पहलुओं पर जांच कर रही है।








