‘कांग्रेस यहां चुनाव लड़ने आई थी, आदिवासियों के बारे में कभी नहीं बोली’: असम में अमित शाह का ताजा हमला | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 14:04 IST केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत पर भरोसा जताया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (छवि क्रेडिट: एक्स/@अमितशाह) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कांग्रेस पार्टी पर आदिवासी मुद्दों को दरकिनार करने का आरोप लगाते हुए ताजा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कांग्रेस यहां चुनाव लड़ने आती है, लेकिन आदिवासियों के बारे में कभी बात नहीं करती। पीएम मोदी ने द्रौपदी मुर्मू जी को भारत का राष्ट्रपति बनाया।” शाह असम के गोलपारा में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित कर रहे थे, क्योंकि राज्य 2026 के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों में प्रवेश कर रहा है। “घुसपैठिए गांव की भोली-भाली महिलाओं को फंसाते हैं, उनसे शादी करते हैं और ये घुसपैठिए परिषद चुनावों पर कब्जा करना चाहते हैं। कांग्रेस ने असम को घुसपैठियों के हवाले कर दिया। अगर उनकी सरकार दोबारा आई तो वे घुसपैठियों को आने देंगे।” शाह ने संकल्प लिया, “अब तीसरी बार फिर से भाजपा सरकार बनाएं। अगली बार जब मैं आऊंगा तो घुसपैठियों को वापस भेजूंगा।” उन्होंने असम विधानसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की जीत पर विश्वास जताते हुए कहा कि राज्य ने अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए सरकार को फिर से चुनने का फैसला किया है। अमित शाह ने कहा, “हमने असम में दो बार सरकार बनाई और घुसपैठियों की पहचान की। हालांकि, हमारे पास इतना समय नहीं है। हमें और पांच साल दीजिए, हम पहचाने गए घुसपैठियों को असम से बाहर फेंक देंगे।” उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी ने असम के युवाओं की मौत का राजनीतिकरण किया। हमने असम में कई समझौते किए और हथियार डालकर 10,000 युवाओं को मुख्यधारा में लाने का काम किया।” गोलपाड़ा पूर्व विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र राज्य के 126 निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है। 2021 में, कांग्रेस पार्टी के अबुल कलाम रशीद आलम ने असम गण परिषद (एजीपी) के ज्योतिष दास को हराकर सीट हासिल की। 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए, कांग्रेस नेता अबुल कलाम रशीद आलम, असम गण परिषद (एएसपी) के अब्दुर रहीम जिब्रान और राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल (आरयूसी) के शेख मोहम्मद जियाउल हक गोलपारा पूर्व निर्वाचन क्षेत्र में मैदान में हैं। असम में मतदान 9 अप्रैल को एक ही चरण में होगा, और वोटों की गिनती 4 मई को होगी। जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार कार्यकाल की उम्मीद कर रही है, वहीं कांग्रेस राज्य में अपनी खोई हुई जमीन वापस हासिल करना चाहती है। जगह : गुवाहाटी (गौहाटी), भारत, भारत पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 13:46 IST समाचार राजनीति ‘कांग्रेस यहां चुनाव लड़ने आई थी, कभी आदिवासियों के बारे में नहीं बोली’: असम में अमित शाह का ताज़ा हमला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव(टी)अमित शाह(टी)बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए(टी)असम चुनाव(टी)सरकार को दोबारा चुनें(टी)संस्कृति की रक्षा करें(टी)कांग्रेस की आलोचना(टी)आदिवासी मुद्दे
शिवपुरी के बदरवास में दो दुकानों में लगी आग:जेसीबी से शटर-दीवार तोड़ी, ढाई घंटे में पाया काबू, डिफ्रीजर, माइक्रोवेव समेत लाखों का सामान जला

शिवपुरी जिले के बदरवास कस्बे में गुरुवार देर रात दो दुकानों में आग लग गई। किराना और बेकरी की इन दुकानों में लगी आग पर करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद दो फायर ब्रिगेड की मदद से काबू पाया जा सका। इस घटना में लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है। जानकारी के अनुसार, बदरवास निवासी विष्णु सिंघल अपने मकान के नीचे किराने की थोक दुकान चलाते हैं और परिवार के साथ ऊपर रहते हैं। उनकी एक दुकान नंद किशोर यादव को किराए पर दी गई थी, जिसमें बेकरी का संचालन होता था। शटर तोड़कर आग पर पाया काबू नंद किशोर यादव ने बताया कि गुरुवार रात करीब 12 बजे उन्होंने दुकान बंद की थी और उस समय सब सामान्य था। वहीं, रात करीब 2 बजे विष्णु सिंघल के बेटे ने दुकान से धुआं उठते देखा। नीचे पहुंचने पर शटर के अंदर से आग की लपटें निकलती दिखाई दीं। आग लगने की सूचना मिलते ही बदरवास थाना पुलिस मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने के लिए जेसीबी बुलाई गई, जिसकी मदद से दोनों दुकानों के शटर तोड़े गए। आग परचून के गोदाम तक तेजी से फैल चुकी थी, जिसके कारण एक दीवार भी तोड़नी पड़ी। बदरवास और कोलारस नगर परिषद की फायर ब्रिगेड ने लगभग ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई। फ्रिज, माइक्रोवेव,ओवन समेत अन्य सामान जला नंद किशोर यादव ने बताया कि उनकी बेकरी में रखे डिफ्रीजर, माइक्रोवेव, फ्रिज और ओवन सहित अन्य सभी सामान जलकर राख हो गए। विष्णु सिंघल के अनुसार, उनकी परचून की थोक दुकान का लाखों रुपये का सामान आग की भेंट चढ़ गया। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आग सबसे पहले किस दुकान में लगी थी।
पंचकूला AJL केस में पूर्व सीएम हुड्डा को राहत:₹65 करोड़ का प्लॉट ₹69 लाख में देने के आरोप से हुए मुक्त; CBI कोर्ट ने सुनाया फैसला

पंचकूला में प्रकाशन समूह एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को प्लॉट आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा को पंचकूला में CBI की विशेष कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को कोर्ट ने हुड्डा और AJL के चेयरमैन रहे मोतीलाल वोरा को आरोप मुक्त कर दिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे वोरा का 6 साल पहले निधन हो चुका है, जबकि 78 वर्षीय हुड्डा खुद कोर्ट में पेश हुए। इससे पहले CBI की स्पेशल कोर्ट द्वारा आरोप तय किए जाने के खिलाफ हुड्डा ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिसमें स्पेशल कोर्ट की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। करीब एक माह पहले जस्टिस त्रिभुवन दहिया की एकल पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा था कि बिना पर्याप्त आधार के आपराधिक मुकदमा जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। HC ने कहा था- प्रथम दृष्टया आरोप साबित नहीं हो रहे। अब शुक्रवार को इस मामले में CBI की विशेष कोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई। हुड्डा के वकील एसपीएस परमार ने उनका पक्ष रखा। यह मामला पंचकूला के सेक्टर-6 में करीब 3,360 वर्ग मीटर के सरकारी भूखंड आवंटित करने से संबंधित है। सीबीआई ने हुड्डा समेत एचएसवीपी के 4 वरिष्ठ अधिकारियों को आरोपी बनाया था। हुड्डा पर आरोप है कि 64.93 करोड़ रुपए का प्लॉट एजेएल को 69 लाख 39 हजार रुपए में दिया। जानिए क्या है जमीन आवंटन मामला… विजिलेंस ने हुड्डा के अलावा 4 अफसरों को आरोपी बनाया हरियाणा विजिलेंस ने पूर्व सीएम भूपेंद्र हड्डा समेत हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के 4 वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। बाद में ईडी ने इसी एफआईआर को संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की। इनके खिलाफ भूखंड के पुनः आवंटन में अनियमितता बरतने का आरोप है। हुड्डा उस समय मुख्यमंत्री के रूप में हुडा (हरियाणा अर्बन डवलेपमेंट अथॉरिटी) के पदेन अध्यक्ष थे। उधर, जब जमीन वापस ली गई, तब तर्क दिया गया कि उस पर निर्माण नहीं हुआ था। साल 2005 में फिर से उसी माप के साथ उसी कीमत पर (पुराने रेटों पर) आवंटित कर दी गई थी।
छिंदवाड़ा में टाइगर अटैक के बाद दहशत में ग्रामीण:महुआ बीनने जाने पर जान का खतरा, अब भी बाघ का बना हुआ मूवमेंट

छिंदवाड़ा के पेंच नेशनल पार्क के कुंभपानी वन परिक्षेत्र के बीट रमपुरी के पास टाइगर अटैक में युवक की मौत के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। जिस स्थान पर बाघ ने हमला किया था, उसी इलाके में अब भी उसकी मूवमेंट बनी हुई है। इससे आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। वन विभाग की टीम लगातार गश्त कर रही है। साथ ही ग्रामीणों के बीच पहुंचकर “बाघ चौपाल” के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है। अधिकारियों ने खासतौर पर महुआ तोड़ने जाने वाले ग्रामीणों को अकेले जंगल न जाने, छोटे बच्चों को साथ न ले जाने और समूह में शोर करते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है। इन क्षेत्रों में ज्यादा खतरा जानकारी के मुताबिक सफेद पाठा, घुरलाह टेकरी और आसपास के जंगलों में बाघ की लगातार मूवमेंट देखी जा रही है। इसके अलावा खमरा और जमतरा क्षेत्र में भी बाघ के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। इन इलाकों में ग्रामीणों का रोजाना आना-जाना रहता है, जिससे वन विभाग के सामने घटनाओं को रोकना बड़ी चुनौती बन गई है। वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है, लेकिन बाघ की मौजूदगी से इलाके में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ग्रामीणों को सतर्क रहने और जंगल में जाते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
13 महीने बाद रिंग में लौट रहीं चैम्पियन लॉरेन प्राइस:कहा- पैसा कमाना, बॉक्सिंग में विरासत बनाना लक्ष्य; ओलिंपिक चैम्पियन शनिवार को स्टेफनी के खिलाफ उतरेंगी

आईबीएफ और डब्ल्यूबीसी वेल्टरवेट चैम्पियन वेल्स की लॉरेन प्राइस 13 महीनों के इंतजार के बाद बॉक्सिंग रिंग में वापसी कर रही हैं। टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली लॉरेन ने पिछले साल मार्च में नताशा जोनस को हराकर अपनी बादशाहत साबित की थी। लेकिन उसके बाद से उन्हें रिंग में उतरने का मौका नहीं मिला। अब शनिवार को वे प्यूर्टो रिको की अजेय बॉक्सर स्टेफनी पिनेइरो एक्विनो के खिलाफ अपने खिताब का बचाव करने उतरेंगी। इतने लंबे समय तक रिंग से दूर रहने के पीछे के कारणों पर लॉरेन ने बॉक्सिंग के अंदरूनी खेल और राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, ‘बाहर के लोगों को यह आसानी से समझ नहीं आता। लेकिन अक्सर यह आपके प्रमोटर, पैसों और कॉन्ट्रैक्ट की उलझनों पर निर्भर करता है। जब आप चैम्पियन बन जाते हैं, तो सामने वाले बॉक्सर बहुत ज्यादा पैसों की मांग करते हैं, जिससे मैच तय होने में समय लगता है।’ लॉरेन का सफर उनके प्रमोटर ‘बॉक्सर’ की वित्तीय परेशानियों और कॉन्ट्रैक्ट के मुद्दों के कारण अटका हुआ था। इस दौरान उनके ट्रेनर रॉब मैक्रैकन ने उन्हें संभाला। लॉरेन का साफ कहना है कि वह बॉक्सिंग से जितना हो सके उतना पैसा कमाना चाहती हैं और अपने देश वेल्स में खास विरासत बनाना चाहती हैं। 31 वर्षीय लॉरेन की निजी जिंदगी में भी खुशियां दस्तक देने वाली हैं। 4 अप्रैल के इस मैच के बाद, वे 30 मई को बचपन की दोस्त कार्ला से शादी करेंगी। उन्होंने पिछले साल ही सगाई की थी। कार्ला बुजुर्गों की देखभाल से जुड़ा अपना एक बिजनेस चलाती हैं और बॉक्सिंग की दुनिया से उनका कोई लेना-देना नहीं है। लॉरेन कहती हैं कि इससे उन्हें बहुत सुकून मिलता है क्योंकि घर लौटने पर हर वक्त सिर्फ बॉक्सिंग की बातें नहीं होतीं। लॉरेन की सफलता का सफर आसान नहीं रहा है। जब वह सिर्फ तीन दिन की थीं, तब शराब की लत के शिकार उनके माता-पिता ने उन्हें छोड़ दिया था। उन्हें उनके दादा-दादी ने गोद लिया। लॉरेन कहती हैं, ‘मुझे अपने माता-पिता की याद नहीं आती। मैं बस अपने दादा-दादी की शुक्रगुजार हूं जिन्होंने मुझे हमेशा प्यार दिया और सिखाया कि कोई भी सपना छोटा या अजीब नहीं होता।’
₹1500 करोड़ कमाने वाली चौथी फिल्म बनी धुरंधर 2:वर्ल्डवाइड कलेक्शन ₹1501 करोड़ हुआ, भारत में नेट कमाई भी ₹1000 करोड़ के करीब

रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 ने भारत में 961 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन कर लिया है। फिल्म अब 1000 करोड़ रुपए नेट क्लब के करीब पहुंच गई है। गुरुवार को फिल्म का 19 करोड़ रुपए का नेट कलेक्शन हुआ। जियो स्टूडियोज के मुताबिक, भारत में फिल्म का ग्रॉस बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 1134 करोड़ रुपए पहुंच चुका है, जबकि ओवरसीज में फिल्म का 367 करोड़ रुपए का कलेक्शन हुआ है, जिसके बाद इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 1501 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। दंगल, बाहुबली 2 और पुष्पा 2 के बाद धुरंधर 2, 1500 करोड़ रुपए कमाने वाली चौथी भारतीय फिल्म बन गई है। वहीं, आमिर खान की ‘दंगल’ के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली बॉलीवुड की यह दूसरी फिल्म है। धुरंधर को शानदार रिस्पॉन्स मिला था धुरंधर के पहले पार्ट ने भारत और अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और दुनियाभर में करीब 1,307 करोड़ रुपए कमाए। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 1,005.85 करोड़ रुपए रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग 840 करोड़ रुपए हुआ। वहीं, 894.49 करोड़ रुपए की कमाई के साथ ही यह हिंदी भाषा में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। विदेशी बाजारों में भी फिल्म को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब 299.5 करोड़ रुपए कमाए। अमेरिका और कनाडा में 193.06 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई कर बाहुबली 2 का रिकॉर्ड भी तोड़ा। दिलचस्प बात यह थी कि फिल्म को खाड़ी देशों में रिलीज की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद शानदार सफलता मिली। साथ ही यह भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ‘A’ रेटेड फिल्म बनी। ……..……..……..…….. धुरंधर 2 से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… धुरंधर 2 रिव्यू; रणवीर की फिर दमदार परफॉर्मेंस: नोटबंदी और राजनीतिक कड़ियों से जुड़ी कहानी, जानिए कैसी है फिल्म रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ यानी धुरंधर 2 पहले पार्ट की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद बड़े स्केल पर लौटी है। इस बार फिल्म सिर्फ गैंगवार या बदले की कहानी नहीं रहती, बल्कि नोटबंदी से लेकर देश की कई बड़ी घटनाओं को जोड़ते हुए एक बड़ा नैरेटिव पेश करती है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
जंग के बीच ट्रम्प सरकार में उथल-पुथल:24 घंटे में निकाले गए आर्मी चीफ और अटॉर्नी जनरल; काश पटेल-तुलसी गबार्ड को भी हटाने की चर्चा

अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी को हटाए जाने के बाद अब ट्रम्प सरकार में कुछ और बड़े अफसरों को निकाले जाने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी वेबसाइट द अटलांटिक की रिपोर्ट के मुताबिक अगला नंबर FBI चीफ काश पटेल और नेशनल इंटेलिजेंस चीफ तुलसी गबार्ड का हो सकता है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को आर्मी चीफ जनरल रैंडी जॉर्ज को तुरंत रिटायर होने का आदेश दिया। व्हाइट हाउस के प्लान से जुड़े कई लोगों ने बताया कि और भी अधिकारियों को हटाने पर चर्चा चल रही है। इसमें आर्मी सेक्रेटरी डेनियल ड्रिस्कॉल और लेबर सेक्रेटरी लोरी चावेज-डीरेमर का नाम भी शामिल है। ट्रम्प अपने दूसरे कार्यकाल में बड़े अधिकारियों को हटाने से बचते रहे थे। उन्हें लगता था कि ऐसा करना डेमोक्रेट्स और मीडिया के सामने झुकना होगा। पिछले कुछ महीनों तक यह आदेश था कि मिडटर्म चुनाव से पहले किसी कैबिनेट अधिकारी को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन ईरान युद्ध के बाद ट्रम्प की लोकप्रियता घटने से स्थिति बदल गई है। क्रिस्टी नोएम- बर्खास्त होने वाली पहली अधिकारी ईरान से जंग के बीच अमेरिकी सरकार में तेजी से प्रशासनिक बदलाव हो रहे हैं। सबसे पहले होमलैंड सिक्योरिटी चीफ क्रिस्टी नोएम को बेदखल किए जाने से इसकी शुरुआत हुई। उन्हें किस वजह से हटाया गया इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई वजह नहीं बताई गई है। कुछ समय से उनकी काम करने की शैली और फैसलों पर सवाल उठ रहे थे। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की जिम्मेदारी होती है कि देश को अंदर और बाहर से आने वाले खतरों से सुरक्षित रखा जाए। उनकी राजनीतिक छवि भी विवादों में रही, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ रहा था। आलोचकों का कहना था कि वे ज्यादा राजनीतिक बयानबाजी कर रही हैं। पैम बॉन्डी- एपस्टीन फाइल्स की भेंट चढ़ीं व्हाइट हाउस के एक करीबी ने द अटलांटिक से कहा कि क्रिस्टी नोएम को हटाने पर जो प्रतिक्रिया मिली, उससे ट्रम्प को हिम्मत मिली और उन्होंने बॉन्डी को हटाने का फैसला आगे बढ़ाया। माना जा रहा है कि पैम बॉन्डी ने एपस्टीन मामले को ठीक से नहीं संभाला। दरअसल, एपस्टीन मामले से जुड़ी सच्चाई सामने लाने की मांग लंबे समय से हो रही थी, खासकर ‘क्लाइंट लिस्ट’ को लेकर, जिसमें यह बताया जाता है कि किन-किन प्रभावशाली लोगों का उससे संबंध था। एपस्टीन पर आरोप था कि वह नाबालिग लड़कियों का शोषण करता था और एक बड़ा नेटवर्क चलाता था, जिसमें ताकतवर और अमीर लोग शामिल हो सकते थे। इसी वजह से लोग यह जानना चाहते हैं कि उस नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था। इसी दबाव में बॉन्डी ने कुछ लोगों को व्हाइट हाउस बुलाया और उन्हें एपस्टीन फाइल्स फेज 1 नाम का फोल्डर दिया। फोल्डर देने के बाद मामला उल्टा बॉन्डी के लिए परेशानी बन गया। दरअसल उम्मीद थी कि कोई बड़ी जानकारी या खुलासा सामने आएगा। लेकिन जब लोगों ने उन्हें देखा, तो पता चला कि उनमें कोई नई या चौंकाने वाली जानकारी नहीं थी। इससे एपस्टीन का मामला फिर से सुर्खियों में आ गया। फिर ऐसी स्थिति बन गई कि खुद ट्रम्प को इसे जारी करने वाले बिल पर साइन करना पड़ा। रैंडी जॉर्ज- समय से एक साल पहले जबरिया निकाले गए अमेरिकी सेना के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को भी तुरंत रिटायर होने का आदेश दिया गया है। CNN ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यह आदेश दिया। रैंडी का पद साल 2027 में समाप्त होने वाला था। उनके जाने के बाद वाइस चीफ ऑफ स्टाफ जनरल क्रिस्टोफर ला नेव कार्यवाहक आर्मी चीफ की जिम्मेदारी संभालेंगे। ला नेव पहले हेगसेथ के सहायक रह चुके हैं। इस पूरे मामले में आधिकारिक तौर पर कोई वजह नहीं दी गई है। पेंटागन ने सिर्फ इतना कहा कि वह रिटायर हो रहे हैं और उनकी सेवा के लिए धन्यवाद दिया। लेकिन जो संकेत मिलते हैं, उनसे लगता है कि यह फैसला व्यक्तिगत गलती की वजह से नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर हो रहे बदलाव का हिस्सा है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ अपने पद संभालने के बाद कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटा या बदल चुके हैं। यानी सेना के टॉप लेवल पर नई टीम बनाई जा रही है। एक और बात यह है कि रैंडी जॉर्ज को पिछली सरकार के समय नियुक्त किया गया था। नई सरकार अक्सर अपने भरोसे के लोगों को लाना चाहती है, इसलिए पुराने अधिकारियों को हटाया जाता है। काश पटेल- सरकारी पैसे पर अय्याशी करने का आरोप क्रिस्टी और बॉन्डी के हटने के बाद अगर किसी को हटाए जाने की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वे ट्रम्प के खास माने जाने वाले FBI चीफ काश पटेल हैं। वे ट्रम्प सरकार के सबसे ज्यादा नजर में रहने वाले अधिकारियों में रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने FBI के सरकारी जेट का इस्तेमाल निजी काम के लिए किया। कहा गया कि वे खेल देखने जैसे निजी कार्यक्रमों में जाने के लिए सरकारी विमान का उपयोग कर रहे थे। उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अपनी गर्लफ्रेंड एलेक्सिस विल्किंस को SWAT कमांडो (स्पेशल वेपन एंड टेक्टिस) सुरक्षा दी और सरकारी रिसोर्स का गलत इस्तेमाल किया। इससे यह सवाल उठा कि क्या वे अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरा बड़ा विवाद उनके फैसलों को लेकर है। आरोप है कि उनके नेतृत्व में FBI से कई अधिकारियों को हटा दिया गया। खासकर वे अधिकारी, जो ट्रम्प से जुड़े मामलों की जांच में शामिल थे या जिन्हें ट्रम्प के प्रति पूरी तरह वफादार नहीं माना जाता था। इससे यह आरोप लगा कि एजेंसी को राजनीतिक तरीके से चलाया जा रहा है। तीसरा मामला अदालत तक पहुंच गया है। कुछ बर्खास्त FBI एजेंटों ने केस किया है और कहा है कि उन्हें गलत तरीके से नौकरी से निकाला गया। उनका आरोप है कि यह उनके खिलाफ बदले की कार्रवाई थी, क्योंकि वे ट्रम्प से जुड़े मामलों की जांच कर रहे थे। पूर्व FBI एजेंट काइल सेराफिन ने एक रेडियो शो में दावा किया कि ट्रम्प जल्द ही काश पटेल को हटाने का फैसला ले सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हो सकता है कि आज ही काश पटेल को हटा दिया जाए। तुलसी गबार्ड-
मासूम शर्मा ने हनुमान जन्मोत्सव पर गाया बैन सॉन्ग ‘खटोला’:बहादुरगढ़ में सपना संग ठुमके लगाए; आर्यन मान के प्रोग्राम में कई मंत्री-विधायक आए

झज्जर में स्टेज पर परफॉर्म करते सिंगर मासूम शर्मा और सपना चौधरी। हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने बहादुरगढ़ में हनुमान जयंती पर हुए एक प्रोग्राम में मंत्री, विधायकों की प्रेजेंस में ही बैन सॉन्ग ‘खटोला’ गाया। स्टेज पर मासूम ने कलाकार सपना चौधरी के साथ ठुमके भी लगाए। . प्रोग्राम का आयोजन दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट आर्यन मान के परिवार ने किया था। इस प्रोग्राम से जुड़ी एक वीडियो भी सामने आई है, जिसमें मासूम शर्मा और सपना चौधरी एक साथ परफॉर्म कर रहे हैं। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, अरविंद शर्मा, मनजिंद्र सिंह सिरसा, विधायक राजेंद्र जून, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली और दिग्विजय चौटाला समेत कई नेता और फिल्मी हस्तियां शामिल हुईं। दरअसल, जींद के शो में हुए सरपंच विवाद के बाद मासूम शर्मा पहली बार झज्जर में किसी स्टेज शो में पहुंचे थे। सरपंच विवाद के बाद झज्जर की सरपंच एसोसिएशन ने मासूम का कड़ा विरोध किया था। देखिए, सपना चौधरी के डांस के PHOTOS… मासूम शर्मा के सॉन्ग पर डांस करतीं सपना चौधरी। सपना के डांस करने के बाद मासूम भी थिरकने लगे। इंग्लिश मीडियम डांस पर ठुमके लगाते मासूम शर्मा और सपना चौधरी। आर्यन मान के परिवार का प्रोग्राम बहादुरगढ़ के सिदीपुर गांव में गुरुवार को मान फार्म हाउस में हनुमान जयंती पर एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। ये फार्म हाउस दिल्ली यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष आर्यन मान के परिवार का है। आर्यन ने ही प्रोग्राम की तैयारियां की। परिवार का कहना है कि वे कई सालों से हनुमान जयंती पर कार्यक्रम का आयोजन करते हैं, जिसमें बड़ी संख्या में आसपास के गांव के लोग शामिल होते हैं। सपना के साथ इंग्लिश मीडियम सॉन्ग पर डांस कार्यक्रम में सिंगर मासूम शर्मा और सपना चौधरी की स्टेज परफॉर्मेंस रखी गई थी। सपना चौधरी ने स्टेज पर ही मासूम शर्मा के साथ डांस भी किया। मासूम ने जैसे ही इंग्लिश मीडियम सॉन्ग गाया, सपना तुरंत डांस करने लगी। सपना का डांस देखने के लिए स्टेज के पास युवाओं की भीड़ लग गई। इस दौरान मासूम ने बैन सॉन्ग खटोला भी गाया। सपना बोलीं- यहां कई शो किए मंच से ही सपना चौधरी ने कहा कि मैंने झज्जर एरिया में कई शो किए हैं। इस शो में कई ऐसे युवा हैं, जो 9-10 साल से उनके प्रोग्राम में आ रहे हैं। प्रोग्राम में युवाओं के साथ आसपास के गांव की महिलाएं भी शामिल हुईं। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिन्द्र सिंह सिरसा और दिग्विजय चौटाला एक-दूसरे से मिलकर मुस्कराते हुए दिखे। कई प्रोग्राम में बैन सॉन्ग गाए सिंगर मासूम शर्मा इन दिनों लगातार बैन सॉन्ग खटोला और चंबल के डाकू को प्रमोट कर रहे हैं। सिंगर पर लाइव शो और फिल्म में भी इसके मिलते-जुलते लिरिक्स व ट्यून के इस्तेमाल का आरोप लग चुका है। मासूम शर्मा सिरसा में लाइव शो के दौरान खटोला सॉन्ग गाया था, जिसके भीड़ बेकाबू होकर सिंगर से मिलने के लिए स्टेज तक जा पहुंची थी। इसके साथ ही मासूम ने हिसार, चंडीगढ़, अलीगढ़ (यूपी) में ये सॉन्ग गाया है। इसके बाद अब झज्जर में भी धार्मिक कार्यक्रम में ये बैन सॉन्ग गाया। पहले जानिए…क्या है सरपंच विवाद 18 फरवरी को जींद में मासूम शर्मा की बहन कविता और बहनोई धर्मवीर आर्य की 25वीं मैरिज एनिवर्सिरी कार्यक्रम में सिंगर और पूर्व सरपंच में विवाद हो गया था। शो के दौरान भीड़ बढ़ने पर मासूम शर्मा ने मंच से जींद के पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा को नीचे उतरने के लिए कहा। सिंगर ने कहा था- मेरे प्रोग्राम में कोई सरपंच, एमएलए या मंत्री हो, मैं किसी को नहीं मानता। इसके बाद पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मासूम शर्मा को पंच का चुनाव लड़ने तक की चुनौती दी थी। जींद में मासूम शर्मा ने 70 सरपंच हांडै वाली बात कही थी। (फाइल) मासूम के झज्जर आने पर क्या बोले सरपंच प्रतिनिधि.. अब विवाद जैसा कुछ नहीं झज्जर जिले के गांव सिदीपुर से सरपंच प्रतिनिधि तिलक राज ने बताया कि प्रोग्राम में भी कई सरपंच आए हुए थे। अब विवाद जैसा कुछ नहीं है। मान परिवार हर साल हनुमान जयंती ऐसा प्रोग्राम आयोजित करता है, जिसमें आसपास के लोग भी बड़ी संख्या में आते हैं। कार्यक्रम का पता नहीं चला झज्जर से सरपंच एसोसिएशन के जिला प्रधान एवं हसनपुर के सरपंच बलवान सिंह ने बताया कि मासूम शर्मा ने सरपंचों से माफी मांग ली थी, तब मामला निपट गया था। इस कार्यक्रम के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। मासूम शर्मा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में आर्यन मान का इलेक्शन कैंपेन किया था। (फाइल फोटो) दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में आर्यन का प्रचार किया मासूम शर्मा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में आर्यन मान का चुनाव प्रचार किया था। मासूम आर्यन के साथ लग्जरी गाड़ियों में बैठे नजर आए थे। हालांकि मासूम के कैंपेन कराने को लेकर NSUI ने इसका विरोध किया था। जिसके बाद मासूम ने कहा था- आर्यन को वह बचपन से ही जानते हैं, उनके घर जैसे रिश्ते हैं। ————— ये खबरें भी पढ़ें…. दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव में मासूम शर्मा के प्रचार पर विवाद: NSUI ने खर्च पर सवाल उठाए; सिंगर बोले-एक रुपए नहीं लिए, रिश्तेदार थे इसलिए आए दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (डूसू) चुनाव में हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा के प्रचार करने पर विवाद हो गया है। कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई ने इसका विरोध किया। एनएसयूआई के पूर्व अध्यक्ष रौनक खत्री ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर एबीवीपी पर आरोप लगाया कि मासूम शर्मा के जरिए चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। (पूरी खबर पढ़ें) ———— मासूम शर्मा की नई फिल्म कन्ट्रोवर्सी में घिरी: दावा- बैन सॉन्ग ‘खटोला’ जैसे लिरिक्स-ट्यून इस्तेमाल किए, टीजर में पिस्टल थामे नजर आए सिंगर हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा फिर एक नई कन्ट्रोवर्सी में घिर गए हैं। दावा किया जा रहा है कि उनकी रिलीज को तैयार फिल्म ‘लाइसेंस’ में उनका बैन सॉन्ग खटोला फिल्माया गया है। फिल्म के टीजर में भी ‘खटोला’ से मिलते- जुलते लिरिक्स और ट्यून हैं। (पूरी खबर पढ़ें)
50 से पहले ही क्यों खत्म हो रहे हैं पीरियड्स? क्या भारतीय महिलाओं में जल्दी आ रहा मेनोपॉज? जानें वजह और इसका खतरा

Health Risks of Early Menopause : आजकल कई रिपोर्ट्स और सर्वे यह इशारा कर रहे हैं कि भारत में महिलाएं दुनिया की बाकी महिलाओं के मुकाबले जल्दी मेनोपॉज के दौर में पहुंच रही हैं. जहाँ विदेशों में इसकी औसत उम्र 51 साल है, वहीं हमारे देश में यह 46 से 47 साल के आसपास देखी जा रही है. सुनने में यह सिर्फ कुछ सालों का अंतर लग सकता है, लेकिन यह हमारी सेहत, हड्डियों और दिल की मजबूती के लिए एक बड़ी चेतावनी है. आखिर क्यों भारतीय महिलाओं का शरीर समय से पहले बदल रहा है? क्या यह हमारी भागदौड़ भरी जिंदगी का नतीजा है या इसके पीछे कुछ और गहरे कारण हैं? आइए, समझते हैं कि भारत में जल्दी आते मेनोपॉज की असली वजह क्या है और यह हमारी सेहत को कैसे प्रभावित कर रहा है. क्या है मेनोपॉज विदेशों में इसकी औसत उम्र 51 साल है, वहीं हमारे देश में यह 46 से 47 साल के आसपास देखी जा रही है. मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति हर महिला के जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा है. यह वह समय होता है जब महिला के प्रजनन वर्ष समाप्त हो जाते हैं. तकनीकी रूप से, जब किसी महिला को लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते, तो उसे मेनोपॉज माना जाता है. यह इस बात का संकेत है कि ओवरीज (अंडाशय) ने एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन बनाना कम कर दिया है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. दुनिया बनाम भारत: क्या कहते हैं आंकड़े?आमतौर पर दुनिया भर में महिलाएं 50 से 51 वर्ष की आयु के बीच मेनोपॉज तक पहुंचती हैं. लेकिन भारत की तस्वीर थोड़ी अलग है. हैदराबाद स्थित इंदिरा आईवीएफ अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. तृप्ति गणपति के अनुसार, “भारत में औसत आयु 46 से 47 वर्ष के आसपास देखी जा रही है. भले ही यह अंतर सिर्फ 3-4 साल का लगे, लेकिन महिला के दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर इसके गहरे प्रभाव पड़ते हैं.” नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के आंकड़े बताते हैं कि 15-39 आयु वर्ग की 2.2% महिलाएं पहले ही मेनोपॉज तक पहुंच चुकी थीं. वहीं, 40-44 की उम्र वाली 16.2% महिलाओं में यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी. ये आंकड़े चेतावनी देते हैं कि भारत में ‘प्रीमैच्योर मेनोपॉज’ की समस्या वैश्विक औसत (1-2%) से कहीं अधिक है. जल्दी मेनोपॉज होने की वजह क्या है?विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि कई बायोलॉजिकल और लाइफस्टाइल से जुड़े कारक हैं: पोषण और स्वास्थ्य: किशोरावस्था में पोषण की कमी और खराब स्वास्थ्य स्थिति प्रजनन अंगों की उम्र बढ़ा सकती है. तनाव और जीवनशैली: अत्यधिक मानसिक तनाव, धूम्रपान और मेटाबॉलिक बीमारियां जैसे डायबिटीज या थायराइड भी समय से पहले मेनोपॉज का कारण बनते हैं. प्रजनन इतिहास: कम उम्र में शादी, जल्दी गर्भधारण और बार-बार मां बनने जैसे कारक भी ओवरी के रिजर्व (अंडों की संख्या) को समय से पहले प्रभावित कर सकते हैं. समय से पहले मेनोपॉज क्यों है चिंता का विषय?एस्ट्रोजन हार्मोन केवल प्रजनन के लिए नहीं, बल्कि हड्डियों की मजबूती और दिल की सेहत के लिए भी ‘कवच’ का काम करता है. जल्दी मेनोपॉज होने का मतलब है कि महिला का शरीर लंबे समय तक एस्ट्रोजन की कमी से जूझेगा. डॉ. गणपति कहती हैं कि आज महिलाएं अपनी प्रोफेशनल लाइफ में बहुत सक्रिय हैं, ऐसे में जीवन का एक बड़ा हिस्सा पोस्ट-मेनोपॉज (प्रजनन के बाद के चरण) में बीतता है. इसके बारे में सही जानकारी होना अब एक लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत है. चुप्पी तोड़ना ही पहला कदमइंडियन मेनोपॉज सोसाइटी का अनुमान है कि 2026 तक लगभग 14 करोड़ भारतीय महिलाएं मेनोपॉज के चरण में होंगी. इसके बावजूद, हमारे समाज में इस पर बात करना आज भी एक ‘टैबू’ यानी वर्जित माना जाता है. एक सर्वे के मुताबिक, 79% भारतीय महिलाएं अपने परिवार या सहकर्मियों से इस विषय पर बात करने में असहज महसूस करती हैं. अक्सर बातचीत केवल गर्भावस्था या मातृत्व तक सिमट कर रह जाती है, और मेनोपॉज के बाद की स्वास्थ्य जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया जाता है. मेनोपॉज केवल प्रजनन क्षमता का अंत नहीं, बल्कि जीवन का एक नया अध्याय है. अगर हम समय रहते इस पर खुलकर बात करें, समय पर डॉक्टरी सलाह लें और कार्यस्थलों व परिवारों में सहायक वातावरण बनाएं, तो लाखों महिलाएं इस बदलाव को अनिश्चितता के बजाय आत्मविश्वास के साथ जी सकेंगी.
कार्टियर घड़ियों से 300% तक लाभ, रोलेक्स पिछड़ी:निवेश में अब सिर्फ शेयर या सोना ही मुनाफे की गारंटी नहीं; लग्जरी घड़ियां भी एसेट क्लास

क्या आपकी कलाई पर बंधी घड़ी आपके बैंक एफडी, शेयर या रियल एस्टेट से बेहतर रिटर्न दे सकती है? लग्जरी वॉच मार्केट के ताजा आंकड़े कुछ इसी ओर इशारा कर रहे हैं। ऑनलाइन वॉच मार्केटप्लेस ‘क्रोनो24’ की रिपोर्ट से एक दिसचस्प ट्रेंड निकलकर सामने आया है। वो ट्रेंड यह है कि महंगे और हाई-एंड वॉच मॉडल रोलेक्स, पाटेक फिलिप की तुलना में कार्टियर जैसी मिड रेंज के लग्जरी ब्रांड्स ने बेहतर मुनाफा दिया। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2018 से लेकर 2026 के दौरान पेरिस स्थित ज्वेलर कंपनी कार्टियर की ‘टैंक वर्मील’ घड़ी की कीमत में करीब 300% की वृद्धि देखी गई। दिलचस्प है कि सबसे ज्यादा मुनाफा देने वाली टॉप-20 घड़ियों की लिस्ट में रोलेक्स का कोई भी मॉडल जगह नहीं बना पाया। रोलेक्स की सबसे ज्यादा बिकने वाली डेटजस्ट 41 की वैल्यू साल 2018 से अब तक केवल 59 फीसदी ही बढ़ी है। इस लिस्ट में कार्टियर के 10, ओमेगा के 5 और जेगर-लेकोल्ट्रे के 2 मॉडल हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक जिन घड़ियों की कीमत लंबी अवधि (2018-2026) में बढ़ी, वे 2022 के बाद बाजार में आई गिरावट के बावजूद मजबूत बनी रहीं और उनकी वैल्यू में लगातार इजाफा होता रहा। बहरहाल, एक्सपर्ट्स का कहना है कि रोलेक्स के मॉडल्स 2018 तक पहले से ही अपनी पीक वैल्यू पर थे। कोविड महामारी के दौरान कीमतों में जो उछाल आया, उसके बाद अब बाजार स्थिर हो रहा है। वहीं, कार्टियर जैसी घड़ियां, जो कुछ साल पहले तक काफी कम कीमत पर उपलब्ध थीं, अब आइकोनिक डिजाइन की वजह से कलेक्टर्स की पहली पसंद बन गई हैं। मिड रेंज घड़ियों की कीमतों में इजाफे की वजह ‘लो बेस इफेक्ट’ और ‘ऑर्गेनिक डिमांड’ है। यानी कुछ साल पहले की तुलना में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इसके अलावा, कोरोनाकाल में कुछ लोगों ने घड़ियों को शौक से नहीं, बल्कि सिर्फ मुनाफा कमाने के लिए खरीदा और महंगे दामों पर बेचना शुरू कर दिया। इसके उलट, किफायती और आइकॉनिक डिजाइन वाली घड़ियों की मांग कलेक्टर्स के बीच बनी रही। इससे उनकी वैल्यू में 200% तक स्थिर इजाफा देखा गया। इस बदलते ट्रेंड पर स्टडी से जुड़े बालाज फेरेन्जी कहते हैं, ‘घड़ियों की खास बात उनके दाम नहीं, बल्कि उनका क्लासिक डिजाइन और स्थायी मांग है, जो किसी वेटिंग लिस्ट नहीं बल्कि वास्तविक कलेक्टर वैल्यू पर आधारित है।’ कार्टियर टैंक वर्मील सबसे सस्ती और सफल निवेश के तौर पर उभरी घड़ी का मॉडल 8 साल में बढ़त खासियत कार्टियर टैंक वर्मील, 299%, सबसे सस्ता व सफल निवेश कार्टियर पैंथेर (गोल्ड), 218% , क्लासिक डिजाइन, भारी डिमांड ओमेगा स्पीडमास्टर, 119% , ओमेगा का भरोसेमंद मॉडल रोलेक्स डेटजस्ट, 41 59%, डिमांड ज्यादा, रिटर्न सीमित







