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कलेक्टर ने सेमली-बोकराटा में किया श्रमदान:जल गंगा संवर्धन के तहत नए तालाबों का निरीक्षण, कहा- जल बचाना चाहिए

कलेक्टर ने सेमली-बोकराटा में किया श्रमदान:जल गंगा संवर्धन के तहत नए तालाबों का निरीक्षण, कहा- जल बचाना चाहिए

बड़वानी में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ चलाया जा रहा है। कलेक्टर जयति सिंह ने बुधवार को पाटी विकासखंड के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर जल संरक्षण कार्यों में सहभागिता की और निर्माणाधीन परियोजनाओं का निरीक्षण किया। कलेक्टर सिंह ने पाटी विकासखंड के ग्राम सेमली पहुंचकर स्थानीय सरपंच, ग्राम पटेल और ग्रामीणों के साथ मिलकर ‘बोरी बंधान’ का कार्य किया। उन्होंने स्वयं श्रमदान कर ग्रामीणों का उत्साहवर्धन किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्थानीय संसाधनों के माध्यम से छोटे-छोटे अवरोध बनाकर वर्षा जल को सहेजना और भू-जल स्तर को बढ़ाना है। इसके पश्चात, कलेक्टर ने ग्राम बोकराटा में भी चल रहे बोरी बंधान कार्यों का जायजा लिया और श्रमदान कर ग्रामीणों को जल सहेजने का संदेश दिया। उन्होंने जनपद पाटी के ग्राम चारपटिया और सावरियापानी का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने निर्माणाधीन नवीन तालाबों की प्रगति और कार्य की गुणवत्ता का सूक्ष्म निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि समस्त निर्माण कार्य मानसूनी वर्षा से पूर्व समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं, ताकि आगामी वर्षा ऋतु में जल संग्रहण का अधिकतम लाभ मिल सके। कलेक्टर ने उपस्थित ग्रामीणों से चर्चा करते हुए कहा कि जल संरक्षण केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन है। तालाबों और बोरी बंधान के माध्यम से एकत्रित पानी न केवल सिंचाई में सहायक होगा, बल्कि इससे क्षेत्र के कुओं और हैंडपंपों का जल स्तर भी बना रहेगा।

इंदौर में शराब दुकान हटने पर मना जश्न:रहवासियों के साथ थिरके एमआईसी मेंबर, लोगों को बांटी मिठाई

इंदौर में शराब दुकान हटने पर मना जश्न:रहवासियों के साथ थिरके एमआईसी मेंबर, लोगों को बांटी मिठाई

इंदौर में एक शराब दुकान हटने पर जमकर जश्न मनाया गया। ढोलक की थाप पर रहवासियों के साथ एमआईसी मेंबर भी जमकर थिरकते दिखे। मिठाई से मुंह मीठा कराया गया। लंबे समय से इस शराब दुकान का विरोध चल रहा था। इसे लेकर एमआईसी मेंबर मनीष शर्मा ने कलेक्टर व आबकारी विभाग को भी लेटर लिख चुके थे। आखिरकार जब उनकी मांग पूरी हो गई, तो बुधवार को दुकान के बाहर ही जश्न मनाया गया। महिलाएं कई बार कर चुकी थी शिकायत बता दें कि साजन नगर स्थित देशी और अंग्रेजी शराब दुकान सघन रहवासी क्षेत्र में स्थित थी। खुल्ले में शराब पीने वालों की वजह से महिलाओं को सड़क से निकलने में काफी परेशानी होती थी। इलाके में काफी भीड़भाड़ और शराबियों की जमघट की वजह से परेशानी उठाना पड़ रही थी। इस संबंध में एमआईसी मेंबर मनीष मामा ने कलेक्टर शिवम वर्मा को लेटर लिखकर दुकान हटाने की आग्रह किया था। नए वित्तीय वर्ष में अब यह शराब दुकान साजन नगर से चितावद क्षेत्र में ट्रांसफर कर दी है। जमकर की आतिशबाजी, ढोलक की थाप पर थिरके शराब दुकान हटाने के इस फैसले के बाद बुधवार को एमआईसी मेंबर की अगुवाई में साजन नगर पुरानी शराब दुकान के बाहर मिठाई वितरण और आतिशबाजी कर जश्न मनाया। इस मौके पर बड़ी संख्या में महिलाएं, रहवासी और स्टूडेंट मौजूद थे।

ग्वालियर में युवक लापता, मां ने एसएसपी से गुहार लगाई:मारपीट के बाद गायब हुआ किशोर, फायरिंग का वीडियो भी सौंपा

ग्वालियर में युवक लापता, मां ने एसएसपी से गुहार लगाई:मारपीट के बाद गायब हुआ किशोर, फायरिंग का वीडियो भी सौंपा

ग्वालियर में एक किशोर की मारपीट के बाद लापता होने का मामला सामने आया है। शहर के लाइन नंबर 8 क्षेत्र में रहने वाली प्रीति रजक ने अपने बेटे की तलाश के लिए पुलिस अधीक्षक से मदद की गुहार लगाई है। पुलिस को दिए आवेदन के अनुसार, प्रीति रजक अपने दो नाबालिग बेटों के साथ रहती हैं। उनका बड़ा बेटा चुन्नू उर्फ कृष्णा 26-27 तारीख की दरमियानी रात करीब 2 बजे मारपीट का शिकार हुआ था। काम से लौटते समय युवक ने रोका आवेदन में बताया गया कि कृष्णा क्रोकरी का काम करके घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में आयुष खटीक नाम का युवक मिला, जिसने उसे रोक लिया। परिजनों के अनुसार, आयुष ने किशोर को गलत काम करने के लिए उकसाया। मना करने पर उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। घटना के बाद से घर से गायब मारपीट की घटना के बाद से कृष्णा भयभीत हो गया और अगले दिन से ही घर से लापता है। परिजन उसकी तलाश में जुटे हैं, लेकिन अब तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। पीड़ित मां ने एसएसपी से मुलाकात कर घटना की जानकारी दी और फायरिंग से जुड़ा एक वीडियो भी सौंपा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने संबंधित थाना पुलिस को तत्काल कार्रवाई करने और किशोर की तलाश तेज करने के निर्देश दिए हैं। जांच जारी, आरोपी की तलाश पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी की तलाश की जा रही है। किशोर का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है।

अंडकोष में क्यों भर जाता है पानी? क्या होती है इसकी वजह, डॉक्टर अमरेंद्र पाठक से जानें सटीक इलाज

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  Hydrocele Causes and Treatment: अंडकोष में पानी भरने की समस्या को हाइड्रोसील कहा जाता है, जो आमतौर पर संक्रमण, चोट या जन्मजात कारणों से होती है. इसमें अंडकोष में सूजन और भारीपन महसूस होता है. सही समय पर डॉक्टर से जांच और उपचार करवाने से इस समस्या को आसानी से ठीक किया जा सकता है. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमरेंद्र पाठक ने अपने एक यूट्यूब वीडियो में बताया है कि यह परेशानी क्यों होती है, इसका इलाज क्या है और इससे किस तरह बचाव किया जा सकता है. इससे जुड़े कई मिथकों की सच्चाई भी डॉक्टर ने बताई है.

दतिया विधायक राजेंद्र भारती दोषी करार:सुप्रीम कोर्ट ने भूमि विकास बैंक मामले में धारा 420 के तहत दोषी ठहराया

दतिया विधायक राजेंद्र भारती दोषी करार:सुप्रीम कोर्ट ने भूमि विकास बैंक मामले में धारा 420 के तहत दोषी ठहराया

दतिया विधायक राजेंद्र भारती को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भूमि विकास बैंक से जुड़े एक मामले में धारा 420 के तहत दोषी करार दिया है। न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें गिरफ्तार कर दिल्ली की जेल भेज दिया गया है।

पंजाबी सिंगर करण औजला जयपुर में करेंगे परफॉर्म:5 अप्रैल को JECC ग्राउंड में कॉन्सर्ट; 1999 से लेकर 5.90 लाख तक के टिकट

पंजाबी सिंगर करण औजला जयपुर में करेंगे परफॉर्म:5 अप्रैल को JECC ग्राउंड में कॉन्सर्ट; 1999 से लेकर 5.90 लाख तक के टिकट

पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के सिंगर करण औजला का 5 अप्रैल को कॉन्सर्ट होगा। इसका आयोजन सीतापुरा स्थित जेईसीसी ग्राउंड में किया जा रहा है। पंजाबी बीट्स, हिप-हॉप और पॉप म्यूजिक के मिश्रण से तैयार उनके गाने युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। सिंगर करण औजला इन दिनों अपने ‘पी-पॉप कल्चर इंडिया टूर’ पर हैं। करीब एक साल पहले भी करण औजला ने जयपुर में लाइव परफॉर्मेंस दी थी, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने हिस्सा लिया था। उस कॉन्सर्ट में भी उनके हिट गानों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे थे। उसी जबरदस्त रिस्पॉन्स को देखते हुए इस बार फिर जयपुर में उनका कॉन्सर्ट आयोजित किया जा रहा है। 1999 से लेकर 5.90 लाख रुपए तक टिकट यादगार म्यूजिक नाइट की तैयारी आयोजकों का कहना है कि यह सिर्फ एक कॉन्सर्ट नहीं बल्कि पंजाबी पॉप म्यूजिक के नए दौर का जश्न है। शानदार साउंड, भव्य स्टेज प्रोडक्शन और करण औजला की दमदार प्रस्तुति के साथ यह शो जयपुर के संगीत प्रेमियों के लिए एक यादगार रात साबित होने वाला है। गीतों की मशीन के नाम मशहूर करण औजला कंटेंम्परेरी पंजाबी म्यूजिक के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में गिने जाते हैं। पंजाब में जन्मे और भारत-कनाडा के बीच सक्रिय रहने वाले औजला ने अपने दमदार गीतों, अलग अंदाज और मंच पर जबरदस्त प्रस्तुति के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। फैंस उन्हें “गीतों की मशीन” के नाम से भी जानते हैं, क्योंकि उन्होंने बतौर गीतकार और गायक कई सुपरहिट गाने दिए हैं। उनकी खासियत यह है कि वे पारंपरिक पंजाबी संगीत को आधुनिक हिप-हॉप और आर-एंड-बी के साथ जोड़कर नया संगीत तैयार करते हैं। सुपरहिट गाने करेंगे परफॉर्म जयपुर कॉन्सर्ट में करण औजला अपने कई चर्चित और हिट गानों पर लाइव परफॉर्म करेंगे। इनमें प्रमुख रूप से सॉफ्टली, एडमायरिंग यू, विनिंग स्पीच, चिट्टा कुर्ता, डोंट लुक, मेकिंग मेमोरीज एल्बम जैसे कई गाने शामिल हैं। उनके गीतों को दुनिया भर में करोड़ों बार ऑनलाइन सुना जा चुका है और उनके लाइव शो को लेकर युवाओं में खासा उत्साह रहता है।

दिमाग में सुसाइड करने के विचार किस वजह से आते हैं? यह कौन सा मेंटल डिसऑर्डर, एक्सपर्ट से समझिए

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Reasons Behind Suicidal Thoughts: मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन अधिकतर लोग अब भी इस बारे में बात करने से झिझकते हैं. कई लोगों की मेंटल हेल्थ इतनी खराब हो जाती है कि वे सुसाइड करने का विचार करने लगते हैं. कई लोग सुसाइड करके अपनी जान भी गंवा देते हैं. अक्सर लोग सोचते हैं कि दिमाग में सुसाइडल थॉट्स आना कोई कमजोरी है, लेकिन यह ब्रेन से जुड़ी जटिल समस्या है. जब किसी व्यक्ति को लगने लगता है कि उसका दर्द उसकी सहने की क्षमता से बाहर हो गया है और उसे भविष्य में कोई उम्मीद नजर नहीं आती, तब दिमाग इस तरह के आत्मघाती विकल्पों की ओर झुकने लगता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स इसे एक गंभीर चेतावनी मानते हैं, जिसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि हमारे दिमाग में सेरोटोनिन नामक एक न्यूरोट्रांसमीटर होता है, जो हमारे मूड, खुशी और व्यवहार को नियंत्रित करता है. जब ब्रेन में सेरोटोनिन का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो व्यक्ति को अत्यधिक निराशा और अकेलापन महसूस होने लगता है. आत्मघाती विचार रखने वाले व्यक्तियों के मस्तिष्क में न केवल सेरोटोनिन की कमी होती है, बल्कि तनाव को नियंत्रित करने वाला HPA एक्सिस भी ठीक से काम नहीं करता, जिससे व्यक्ति छोटी परेशानियों में भी आत्मघाती कदम के बारे में सोचने लगता है. डॉक्टर कुकरेती ने बताया कि सुसाइडल विचारों के पीछे सबसे बड़ा कारण मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर होता है. इसमें व्यक्ति को हर समय उदासी महसूस होती है और वह उन गतिविधियों में भी रुचि खो देता है जो उसे कभी पसंद थीं. इसके अलावा बाइपोलर डिसऑर्डर में मूड के अत्यधिक उतार-चढ़ाव, बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर और स्किजोफ्रेनिया जैसी स्थितियां भी इन विचारों को जन्म दे सकती हैं. इन डिसऑर्डर्स में व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और उसे मौत ही एकमात्र समाधान लगने लगती है. इन डिसऑर्डर का समय रहते इलाज कराया जाए, तो लोगों की कंडीशन में सुधार हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एक्सपर्ट के मुताबिक अक्सर पुराने दर्दनाक अनुभव या पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर सुसाइडल टेंडेंसी की वजह बनते हैं. बचपन में हुआ कोई दुर्व्यवहार, किसी प्रियजन की अचानक मृत्यु, या कोई बड़ा एक्सीडेंट दिमाग पर गहरा घाव छोड़ देता है. जब व्यक्ति बार-बार उन यादों को जीता है, तो उसका दिमाग अत्यधिक तनाव के कारण थक जाता है. इस मानसिक थकान और इमोशनल पेन से बचने के लिए मस्तिष्क अक्सर आत्महत्या को एक एस्केप रूट यानी बचने के रास्ते के रूप में देखने लगता है. शराब या नशीली दवाओं का सेवन आत्महत्या के विचारों को क्रियान्वित करने में उत्प्रेरक का काम करता है. नशा व्यक्ति के इम्पल्स कंट्रोल को खत्म कर देता है. कई लोग अपने मानसिक दर्द को दबाने के लिए नशे का सहारा लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह डिप्रेशन को और गहरा कर देता है. विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की हालत में व्यक्ति बिना सोचे-समझे उन विचारों पर अमल कर बैठता है, जिन्हें वह होश में शायद टाल देता. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आत्महत्या के विचार पूरी तरह से उपचार योग्य हैं. मनोचिकित्सक दवाओं के जरिए न्यूरोकेमिकल असंतुलन को ठीक कर सकते हैं, जबकि मनोवैज्ञानिक कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और DBT जैसी थैरेपी के माध्यम से व्यक्ति की सोच के पैटर्न को बदलते हैं. अगर आपके मन में या आपके किसी परिचित के मन में ऐसे विचार आते हैं, तो तुरंत प्रोफेशनल मदद लेना जीवन रक्षक साबित हो सकता है. यह याद रखना जरूरी है कि यह मन की एक अस्थायी स्थिति है, जिसका स्थायी इलाज संभव है.

हर घर में मिलने वाला यह छोटा सा पौधा जिसकी सूखी लकड़ी में छुपा है सेहत का राज, फायदे जान आप भी हो जाएंगे फैंन

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X हर घर में मिलने वाला यह छोटा सा पौधा जिसकी सूखी लकड़ी में छुपा है सेहत का राज   तुलसी का पौधा लगभग हर घर में पाया जाता है, जिसकी पत्तियां पूजा-पाठ से लेकर चाय तक में उपयोग की जाती हैं. वहीं इसकी सूखी टहनियों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन टहनियों का भी उपयोग बेहद लाभकारी हो सकता है. खासकर बदलते मौसम में, जब सर्दी-खांसी और गले की समस्याएं बढ़ जाती हैं, तब तुलसी की सूखी टहनियों से तैयार किया गया घरेलू काढ़ा-मसाला काफी मददगार साबित हो सकता है. यह न केवल स्वाद में बदलाव लाता है, बल्कि शरीर को गर्माहट और सुकून भी देता है.

विलियम्स ने टीम इंडिया के लिए छोड़ी ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता:कहा- दिल जहां, घर वहां; नाना ने 1956 में बंगाल को हराया था

विलियम्स ने टीम इंडिया के लिए छोड़ी ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता:कहा- दिल जहां, घर वहां; नाना ने 1956 में बंगाल को हराया था

भारतीय फुटबॉल के लिए एएफसी एशियन कप 2027 क्वालीफायर का हॉन्गकॉन्ग के खिलाफ मैच एक खास पल का गवाह बना। भारत ने मैच 2-1 से जीतकर टूर्नामेंट में अपना सफर खत्म किया। यह भारत की प्रतियोगिता में पहली और कोच्चि के मैदान पर भी पहली जीत रही। भारत की ओर से रयान विलियम्स (4’) और आकाश मिश्रा (50’) ने गोल किए। ऑस्ट्रेलियाई मूल के 32 वर्षीय रयान इस मैच में भारत के लिए डेब्यू कर रहे थे। 2014 में अराता इजुमी के बाद वह भारत के लिए खेलने वाले पहले विदेशी मूल के खिलाड़ी बने। रयान का पोर्ट्समाउथ और फुलहम जैसे इंग्लिश क्लबों से होते हुए कोच्चि तक का सफर अपनी जड़ों की ओर लौटने की कहानी है। रयान का जन्म ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में हुआ था और 2019 में वह ऑस्ट्रेलिया के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेल चुके थे। भारत से उनका नाता उनकी मां ऑड्रे से जुड़ता है, जो मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) के एक एंग्लो-इंडियन परिवार से ताल्लुक रखती हैं। रयान की रगों में भारतीय फुटबॉल का पुराना इतिहास दौड़ता है। उनके सगे नाना, लिंकी ग्रोस्टेट ने 1956 की प्रतिष्ठित संतोष ट्रॉफी के सेमीफाइनल में बॉम्बे की तरफ से खेलते हुए मजबूत बंगाल के खिलाफ विजयी गोल दागा था। अपनी जड़ों की इसी पुकार ने रयान को 2022 में भारत खींचा, जब वह इंडियन सुपर लीग में बेंगलुरु एफसी से जुड़े। यहीं खेलते हुए भारतीय दिग्गज सुनील छेत्री ने उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने के लिए प्रेरित किया। चूंकि भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है, इसलिए नीली जर्सी पहनने के लिए रयान को अपना ऑस्ट्रेलियाई पासपोर्ट हमेशा के लिए छोड़ना पड़ा। यह एक बहुत बड़ा फैसला था। उन्हें भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के इस थका देने वाले सफर में तीन साल का वक्त लग गया। नियमों के मुताबिक, उन्हें लगातार 365 दिनों तक भारत में ही रहना था। इसके लिए उन्होंने अपने ऑफ-सीजन में भी परिवार से दूर भारत में ही रुकने का त्याग किया। एक समय ऐसा भी आया जब कागजी अड़चनों को देखकर कई लोगों ने उन्हें यह विचार छोड़ने की सलाह दी। ऐसे मुश्किल वक्त में उनकी पत्नी ने उनका हौसला बढ़ाया और तय किया कि वे भारत में ही रुकेंगे और इस सपने को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। इस लंबे इंतजार में रयान को निराशा भी झेलनी पड़ी। पिछले साल नवंबर में बांग्लादेश दौरे पर गई टीम के कैंप में वह मौजूद थे। रात 12 बजे की डेडलाइन निकल जाने के बाद, देर रात करीब 2 बजे उन्हें कागजी मंजूरी (एनओसी) मिल पाई, जिसके चलते वह अपना पहला मैच खेलने से चूक गए। भारत को अब अपना स्थायी घर मान चुके रयान का कहना है ‘घर वहीं है, जहां आपका दिल है।’ भविष्य में उनका सपना कोचिंग के जरिए भारत के युवा खिलाड़ियों को तराशना है।

ब्रेन के लिए बेस्ट हैं ये 8 फूड्स, मेमोरी बूस्ट करने में कारगर, कई बीमारियों से बचाने में भी मददगार

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Last Updated:April 01, 2026, 15:26 IST Best Foods for Brain Health: ब्रेन को हेल्दी रखने के लिए अच्छा खानपान जरूरी होता है. फैटी फिश, अखरोट, हल्दी और हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे खाद्य पदार्थ न केवल एकाग्रता में सुधार करते हैं, बल्कि अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम कर सकते हैं. अच्छी डाइट से मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है. अखरोट : अखरोट न केवल दिखने में दिमाग जैसा है, बल्कि इसमें मौजूद DHA सीधे तौर पर ब्रेन फंक्शन को बूस्ट करते हैं. हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक अखरोट में बड़ी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से लड़ते हैं. यह न्यूरॉन्स के बीच सिग्नल भेजने की गति को बढ़ाता है, जिससे आपकी प्रोसेसिंग स्पीड तेज होती है और आप चीजों को जल्दी समझ पाते हैं. हल्दी : हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन एक ऐसा कंपाउंड है, जो खून से सीधे ब्रेन तक पहुंचने की क्षमता रखता है. यह दिमाग में मौजूद उन हानिकारक प्लाक को साफ करने में मदद कर सकता है, जो अल्जाइमर डिजीज का मुख्य कारण बनते हैं. इसके अलावा यह सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे हैप्पी हार्मोन्स को बढ़ाता है, जिससे मूड बेहतर रहता है. कद्दू के बीज : ये छोटे बीज मैग्नीशियम, आयरन, जिंक और कॉपर के शक्तिशाली स्रोत हैं. जिंक की कमी को अक्सर याददाश्त की कमी से जोड़ा जाता है, जबकि मैग्नीशियम सीखने और गहरी नींद में मदद करता है. कद्दू के बीज मस्तिष्क को फ्री रेडिकल डैमेज से बचाते हैं, जिससे बुढ़ापे में भी दिमाग जवान बना रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google डार्क चॉकलेट : ब्रेन के लिए डार्क चॉकलेट को फायदेमंद माना जाता है. इसमें फ्लेवोनोइड्स नामक तत्व होते हैं, जो ब्रेन के उस हिस्से में जमा होते हैं, जो याददाश्त से जुड़ा है. यह ब्रेन में ब्लड फ्लो को तुरंत बढ़ा देता है, जिससे एकाग्रता में सुधार होता है. यह न केवल दिमाग तेज करती है, बल्कि इसमें मौजूद कैफीन की हल्की मात्रा मानसिक थकान को भी कम करती है. हरी पत्तेदार सब्जियां : पालक और मेथी जैसी सब्जियों में विटामिन E, विटामिन K और फोलेट प्रचुर मात्रा में होते हैं. फोलेट शरीर में होमोसिस्टीन के स्तर को कम करता है, जिसका बढ़ा हुआ स्तर ब्रेन की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है. ये सब्जियां ब्रेन की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं. एक स्टडी के अनुसार लोग रोज एक सर्विंग हरी सब्जियां खाते हैं, उनका दिमाग उन लोगों की तुलना में 11 साल जवान व्यवहार करता है, जो ऐसा नहीं करते हैं. ब्रोकली : ब्रोकली विटामिन K का बेहतरीन सोर्स है. यह विटामिन ब्रेन सेल्स के भीतर स्फिंगोलिपिड्स के निर्माण के लिए जरूरी है. रिसर्च बताती हैं कि विटामिन-K का अधिक सेवन बुजुर्गों में बेहतर याददाश्त से जुड़ा है. इसमें कोलिन भी होता है, जो न्यूरोट्रांसमीटर के विकास में मदद करता है, जिससे ब्रेन का कम्युनिकेशन सिस्टम बेहतर होता है. ब्लूबेरी : ब्लूबेरी में एन्थोसायनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो इसे गहरा रंग देता है. यह तत्व ब्रेन की कोशिकाओं के बीच संचार में सुधार करता है. यह उम्र के साथ बढ़ने वाली याददाश्त की कमी को रोकने में सबसे प्रभावी फल माना जाता है. यह न्यूरॉन्स को फिर से सक्रिय करता है और शॉर्ट-टर्म मेमोरी को लॉन्ग-टर्म मेमोरी में बदलने की प्रक्रिया को तेज करता है. फैटी फिश : हमारा मस्तिष्क लगभग 60% फैट से बना है, जिसमें से आधा हिस्सा ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है. सैल्मन और सार्डिन जैसी मछलियों में मिलने वाला ओमेगा-3 मस्तिष्क की नई कोशिकाओं के निर्माण के लिए ईंट-पत्थर का काम करता है. यह सीखने की क्षमता को बढ़ाता है और डिप्रेशन जैसे मानसिक विकारों को दूर रखने में मदद करता है. First Published : April 01, 2026, 15:26 IST