Saturday, 07 Nov 2026 | 01:56 PM

Trending :

दिमाग में सुसाइड करने के विचार किस वजह से आते हैं? यह कौन सा मेंटल डिसऑर्डर, एक्सपर्ट से समझिए

authorimg

Reasons Behind Suicidal Thoughts: मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन अधिकतर लोग अब भी इस बारे में बात करने से झिझकते हैं. कई लोगों की मेंटल हेल्थ इतनी खराब हो जाती है कि वे सुसाइड करने का विचार करने लगते हैं. कई लोग सुसाइड करके अपनी जान भी गंवा देते हैं. अक्सर लोग सोचते हैं कि दिमाग में सुसाइडल थॉट्स आना कोई कमजोरी है, लेकिन यह ब्रेन से जुड़ी जटिल समस्या है. जब किसी व्यक्ति को लगने लगता है कि उसका दर्द उसकी सहने की क्षमता से बाहर हो गया है और उसे भविष्य में कोई उम्मीद नजर नहीं आती, तब दिमाग इस तरह के आत्मघाती विकल्पों की ओर झुकने लगता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स इसे एक गंभीर चेतावनी मानते हैं, जिसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि हमारे दिमाग में सेरोटोनिन नामक एक न्यूरोट्रांसमीटर होता है, जो हमारे मूड, खुशी और व्यवहार को नियंत्रित करता है. जब ब्रेन में सेरोटोनिन का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो व्यक्ति को अत्यधिक निराशा और अकेलापन महसूस होने लगता है. आत्मघाती विचार रखने वाले व्यक्तियों के मस्तिष्क में न केवल सेरोटोनिन की कमी होती है, बल्कि तनाव को नियंत्रित करने वाला HPA एक्सिस भी ठीक से काम नहीं करता, जिससे व्यक्ति छोटी परेशानियों में भी आत्मघाती कदम के बारे में सोचने लगता है.

डॉक्टर कुकरेती ने बताया कि सुसाइडल विचारों के पीछे सबसे बड़ा कारण मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर होता है. इसमें व्यक्ति को हर समय उदासी महसूस होती है और वह उन गतिविधियों में भी रुचि खो देता है जो उसे कभी पसंद थीं. इसके अलावा बाइपोलर डिसऑर्डर में मूड के अत्यधिक उतार-चढ़ाव, बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर और स्किजोफ्रेनिया जैसी स्थितियां भी इन विचारों को जन्म दे सकती हैं. इन डिसऑर्डर्स में व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और उसे मौत ही एकमात्र समाधान लगने लगती है. इन डिसऑर्डर का समय रहते इलाज कराया जाए, तो लोगों की कंडीशन में सुधार हो सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

एक्सपर्ट के मुताबिक अक्सर पुराने दर्दनाक अनुभव या पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर सुसाइडल टेंडेंसी की वजह बनते हैं. बचपन में हुआ कोई दुर्व्यवहार, किसी प्रियजन की अचानक मृत्यु, या कोई बड़ा एक्सीडेंट दिमाग पर गहरा घाव छोड़ देता है. जब व्यक्ति बार-बार उन यादों को जीता है, तो उसका दिमाग अत्यधिक तनाव के कारण थक जाता है. इस मानसिक थकान और इमोशनल पेन से बचने के लिए मस्तिष्क अक्सर आत्महत्या को एक एस्केप रूट यानी बचने के रास्ते के रूप में देखने लगता है.

शराब या नशीली दवाओं का सेवन आत्महत्या के विचारों को क्रियान्वित करने में उत्प्रेरक का काम करता है. नशा व्यक्ति के इम्पल्स कंट्रोल को खत्म कर देता है. कई लोग अपने मानसिक दर्द को दबाने के लिए नशे का सहारा लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह डिप्रेशन को और गहरा कर देता है. विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की हालत में व्यक्ति बिना सोचे-समझे उन विचारों पर अमल कर बैठता है, जिन्हें वह होश में शायद टाल देता.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आत्महत्या के विचार पूरी तरह से उपचार योग्य हैं. मनोचिकित्सक दवाओं के जरिए न्यूरोकेमिकल असंतुलन को ठीक कर सकते हैं, जबकि मनोवैज्ञानिक कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और DBT जैसी थैरेपी के माध्यम से व्यक्ति की सोच के पैटर्न को बदलते हैं. अगर आपके मन में या आपके किसी परिचित के मन में ऐसे विचार आते हैं, तो तुरंत प्रोफेशनल मदद लेना जीवन रक्षक साबित हो सकता है. यह याद रखना जरूरी है कि यह मन की एक अस्थायी स्थिति है, जिसका स्थायी इलाज संभव है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Manoj Bajpayee on Latecomers & Stardom

June 6, 2026/
6:30 am

48 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी कॉपी लिंक मनोज बाजपेयी अपनी दमदार एक्टिंग और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं।...

केरल विधानसभा चुनाव: CM विजयन को बुजुगों से बड़ी आस:राज्य में इन पर सबसे ज्यादा खर्च; इस चुनाव में 'कैश' स्कीम्स की भूमिका भी अहम

March 15, 2026/
11:04 am

चुनावों में विचारधारा और कोर वोट बैंक बिना किसी तनाव के कैसे काम करते हैं, इसे गहराई से समझने के...

महिला बोली- मैं जिंदा हूं कागज में मार दिया:योजनाओं का नहीं मिल पा रहा लाभ; सरपंच के बेटे और सचिव पर आरोप

April 25, 2026/
10:11 pm

छतरपुर जिले में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जीवित लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया...

Gold & Silver Prices Surge in India

April 15, 2026/
12:40 pm

नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक सोना-चांदी के दाम में आज 15 अप्रैल को तेजी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स...

BRICS 2026 New Delhi Summit

September 12, 2026/
8:29 am

Hindi News Career BRICS 2026 New Delhi Summit | India France Space Technology Partnership 5 मिनट पहले कॉपी लिंक आज...

हम लोग डरने वाले नहीं हैं:भाई पर कुल्हाड़ी से हुए जानलेवा हमले पर बोले पंकज त्रिपाठी, कहा- संसार में किसी के साथ गलत नहीं किया

July 23, 2026/
11:41 am

जून में पंकज त्रिपाठी के बड़े भाई विजेंद्र नाथ पर कुल्हाड़ी से हमला किया गया था। घटना के बाद वो...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

दिमाग में सुसाइड करने के विचार किस वजह से आते हैं? यह कौन सा मेंटल डिसऑर्डर, एक्सपर्ट से समझिए

authorimg

Reasons Behind Suicidal Thoughts: मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन अधिकतर लोग अब भी इस बारे में बात करने से झिझकते हैं. कई लोगों की मेंटल हेल्थ इतनी खराब हो जाती है कि वे सुसाइड करने का विचार करने लगते हैं. कई लोग सुसाइड करके अपनी जान भी गंवा देते हैं. अक्सर लोग सोचते हैं कि दिमाग में सुसाइडल थॉट्स आना कोई कमजोरी है, लेकिन यह ब्रेन से जुड़ी जटिल समस्या है. जब किसी व्यक्ति को लगने लगता है कि उसका दर्द उसकी सहने की क्षमता से बाहर हो गया है और उसे भविष्य में कोई उम्मीद नजर नहीं आती, तब दिमाग इस तरह के आत्मघाती विकल्पों की ओर झुकने लगता है. मेडिकल एक्सपर्ट्स इसे एक गंभीर चेतावनी मानते हैं, जिसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि हमारे दिमाग में सेरोटोनिन नामक एक न्यूरोट्रांसमीटर होता है, जो हमारे मूड, खुशी और व्यवहार को नियंत्रित करता है. जब ब्रेन में सेरोटोनिन का स्तर बहुत कम हो जाता है, तो व्यक्ति को अत्यधिक निराशा और अकेलापन महसूस होने लगता है. आत्मघाती विचार रखने वाले व्यक्तियों के मस्तिष्क में न केवल सेरोटोनिन की कमी होती है, बल्कि तनाव को नियंत्रित करने वाला HPA एक्सिस भी ठीक से काम नहीं करता, जिससे व्यक्ति छोटी परेशानियों में भी आत्मघाती कदम के बारे में सोचने लगता है.

डॉक्टर कुकरेती ने बताया कि सुसाइडल विचारों के पीछे सबसे बड़ा कारण मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर होता है. इसमें व्यक्ति को हर समय उदासी महसूस होती है और वह उन गतिविधियों में भी रुचि खो देता है जो उसे कभी पसंद थीं. इसके अलावा बाइपोलर डिसऑर्डर में मूड के अत्यधिक उतार-चढ़ाव, बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर और स्किजोफ्रेनिया जैसी स्थितियां भी इन विचारों को जन्म दे सकती हैं. इन डिसऑर्डर्स में व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और उसे मौत ही एकमात्र समाधान लगने लगती है. इन डिसऑर्डर का समय रहते इलाज कराया जाए, तो लोगों की कंडीशन में सुधार हो सकता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

एक्सपर्ट के मुताबिक अक्सर पुराने दर्दनाक अनुभव या पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर सुसाइडल टेंडेंसी की वजह बनते हैं. बचपन में हुआ कोई दुर्व्यवहार, किसी प्रियजन की अचानक मृत्यु, या कोई बड़ा एक्सीडेंट दिमाग पर गहरा घाव छोड़ देता है. जब व्यक्ति बार-बार उन यादों को जीता है, तो उसका दिमाग अत्यधिक तनाव के कारण थक जाता है. इस मानसिक थकान और इमोशनल पेन से बचने के लिए मस्तिष्क अक्सर आत्महत्या को एक एस्केप रूट यानी बचने के रास्ते के रूप में देखने लगता है.

शराब या नशीली दवाओं का सेवन आत्महत्या के विचारों को क्रियान्वित करने में उत्प्रेरक का काम करता है. नशा व्यक्ति के इम्पल्स कंट्रोल को खत्म कर देता है. कई लोग अपने मानसिक दर्द को दबाने के लिए नशे का सहारा लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह डिप्रेशन को और गहरा कर देता है. विशेषज्ञों का मानना है कि नशे की हालत में व्यक्ति बिना सोचे-समझे उन विचारों पर अमल कर बैठता है, जिन्हें वह होश में शायद टाल देता.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आत्महत्या के विचार पूरी तरह से उपचार योग्य हैं. मनोचिकित्सक दवाओं के जरिए न्यूरोकेमिकल असंतुलन को ठीक कर सकते हैं, जबकि मनोवैज्ञानिक कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और DBT जैसी थैरेपी के माध्यम से व्यक्ति की सोच के पैटर्न को बदलते हैं. अगर आपके मन में या आपके किसी परिचित के मन में ऐसे विचार आते हैं, तो तुरंत प्रोफेशनल मदद लेना जीवन रक्षक साबित हो सकता है. यह याद रखना जरूरी है कि यह मन की एक अस्थायी स्थिति है, जिसका स्थायी इलाज संभव है.

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.