Wednesday, 16 Sep 2026 | 09:12 PM

Trending :

EXCLUSIVE

स्टूडेंट प्रोटेस्ट के सवाल पर भड़के सोनू निगम:रूपाली गांगुली बोलीं- कानून हाथ में लेने वाले स्टूडेंट नहीं, शशि थरूर ने अमिताभ बच्चन की चुप्पी का मजाक उड़ाया

स्टूडेंट प्रोटेस्ट के सवाल पर भड़के सोनू निगम:रूपाली गांगुली बोलीं- कानून हाथ में लेने वाले स्टूडेंट नहीं, शशि थरूर ने अमिताभ बच्चन की चुप्पी का मजाक उड़ाया

बॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स लगातार जंतर मंतर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ स्टार्स ऐसे भी हैं, जो स्टूडेंट के विरोध में बयान दे रहे हैं, तो कुछ इस मुद्दे पर बात करने से भी झिझक रहे हैं। हाल ही में एक इवेंट में पहुंचे सिंगर सोनू निगम से प्रोटेस्ट पर सवाल किया गया, जिस पर वो भड़क गए। वहीं रूपाली गांगुली ने प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने पर सवाल खड़े किए हैं। सोनू निगम मंगलवार को एक इवेंट में शामिल हुए। इस समय एक रिपोर्टर ने देश में जारी प्रोटेस्ट पर पूछा- देश में जो सिचुएशन चल रही है, स्टूडेंट का प्रोटेस्ट चल रहा। इसी बीच सोनू निगम हंसते हुए चिढ़ गए और तुरंत सवाल काटते हुए कहा- मैं यहां किस लिए आया हूं। आगे उन्होंने चुप करवाते हुए कहा-‘बस, बस।’ रिपोर्टर तब भी शांत नहीं हुआ तो सिंगर ने कहा- ‘अभी हो गया, हो गया।’ वीडियो वायरल होने के बाद सोनू निगम ट्रोलर्स के निशाने पर आ चुके हैं। कई फैंस ने वीडियो पर कमेंट कर लिखा है कि वो उनके कॉन्सर्ट के टिकट कैंसिल करवा रहे हैं। रूपाली गांगुली बोलीं- पुलिस पर हमला करने वालों को स्टूडेंट नहीं कह सकते अनुपमा एक्ट्रेस रूपाली गांगुली ने प्रोटेस्ट पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा, ‘जो लोग कानून अपने हाथ में लेते हैं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं और पुलिस पर हमला करते हैं, उन्हें छात्र नहीं कहा जा सकता। ऐसे कृत्य किसी भी जायज आंदोलन को कमजोर ही करते हैं।’ भाजपा से जुड़ी हुईं रूपाली ने छात्रों की मांगो को जायज कहा, लेकिन साथ ही कहा कि प्रोटेस्ट हिंसक नहीं होना चाहिए। उन्होंने लिखा है, ‘दुर्भाग्य से जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसा का रूप ले लेता है, तो छात्रों की वास्तविक चिंताएं पीछे छूट जाती हैं। अगर देशविरोधी या राजनीतिक स्वार्थ रखने वाले तत्व छात्र आंदोलनों का इस्तेमाल अपने एजेंडे के लिए करते हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों का होता है जो न्याय की मांग कर रहे हैं।’ ‘भारत अपने छात्रों के साथ है। भारत अपने नागरिकों के साथ है। यह लड़ाई पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर सुधारों के लिए होनी चाहिए, न कि हिंसा और तोड़फोड़ के लिए।’ शशि थरूर ने बिग बी की चुप्पी पर ली फिरकी कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अमिताभ बच्चन का प्रोटेस्ट से जुड़ा 14 साल पुराना पोस्ट शेयर कर फिरकी ली है। री-शेयर की गई पोस्ट में अमिताभ बच्चन ने दिल्ली गैंगरेप से जुड़े विरोध में आंसू गैस के इस्तेमाल का विरोध किया था, जबकि इस प्रोटेस्ट में हिंसा होने के बावजूद उन्होंने चुप्पी साधी हुई है। विवेक ऑबेरॉय ने भी टाला था प्रोटेस्ट से जुड़ा सवाल कुछ समय पहले ही विवेक ऑबेरॉय से सोनम वांगचुक और उनके अनशन पर सवाल किया गया, तो एक्टर ने मुद्दे पर राय रखने की बजाए कहा, ‘मैं अभिनेता हूं, नेता नहीं हूं, मैं पॉलिटिकल चीजों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता।’ विवेक का ये बयान सामने आने के बाद कई लोग उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं।

स्टूडेंट प्रोटेस्ट के सवाल पर भड़के सोनू निगम:रूपाली गांगुली बोलीं- कानून हाथ में लेने वाले स्टूडेंट नहीं, शशि थरूर ने अमिताभ बच्चन की चुप्पी का मजाक उड़ाया

स्टूडेंट प्रोटेस्ट के सवाल पर भड़के सोनू निगम:रूपाली गांगुली बोलीं- कानून हाथ में लेने वाले स्टूडेंट नहीं, शशि थरूर ने अमिताभ बच्चन की चुप्पी का मजाक उड़ाया

बॉलीवुड के कई बड़े सेलेब्स लगातार जंतर मंतर में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ स्टार्स ऐसे भी हैं, जो स्टूडेंट के विरोध में बयान दे रहे हैं, तो कुछ इस मुद्दे पर बात करने से भी झिझक रहे हैं। हाल ही में एक इवेंट में पहुंचे सिंगर सोनू निगम से प्रोटेस्ट पर सवाल किया गया, जिस पर वो भड़क गए। वहीं रूपाली गांगुली ने प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने पर सवाल खड़े किए हैं। सोनू निगम मंगलवार को एक इवेंट में शामिल हुए। इस समय एक रिपोर्टर ने देश में जारी प्रोटेस्ट पर पूछा- देश में जो सिचुएशन चल रही है, स्टूडेंट का प्रोटेस्ट चल रहा। इसी बीच सोनू निगम हंसते हुए चिढ़ गए और तुरंत सवाल काटते हुए कहा- मैं यहां किस लिए आया हूं। आगे उन्होंने चुप करवाते हुए कहा-‘बस, बस।’ रिपोर्टर तब भी शांत नहीं हुआ तो सिंगर ने कहा- ‘अभी हो गया, हो गया।’ वीडियो वायरल होने के बाद सोनू निगम ट्रोलर्स के निशाने पर आ चुके हैं। कई फैंस ने वीडियो पर कमेंट कर लिखा है कि वो उनके कॉन्सर्ट के टिकट कैंसिल करवा रहे हैं। रूपाली गांगुली बोलीं- पुलिस पर हमला करने वालों को स्टूडेंट नहीं कह सकते अनुपमा एक्ट्रेस रूपाली गांगुली ने प्रोटेस्ट पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने लिखा, ‘जो लोग कानून अपने हाथ में लेते हैं, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं और पुलिस पर हमला करते हैं, उन्हें छात्र नहीं कहा जा सकता। ऐसे कृत्य किसी भी जायज आंदोलन को कमजोर ही करते हैं।’ भाजपा से जुड़ी हुईं रूपाली ने छात्रों की मांगो को जायज कहा, लेकिन साथ ही कहा कि प्रोटेस्ट हिंसक नहीं होना चाहिए। उन्होंने लिखा है, ‘दुर्भाग्य से जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसा का रूप ले लेता है, तो छात्रों की वास्तविक चिंताएं पीछे छूट जाती हैं। अगर देशविरोधी या राजनीतिक स्वार्थ रखने वाले तत्व छात्र आंदोलनों का इस्तेमाल अपने एजेंडे के लिए करते हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान उन छात्रों का होता है जो न्याय की मांग कर रहे हैं।’ ‘भारत अपने छात्रों के साथ है। भारत अपने नागरिकों के साथ है। यह लड़ाई पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर सुधारों के लिए होनी चाहिए, न कि हिंसा और तोड़फोड़ के लिए।’ शशि थरूर ने बिग बी की चुप्पी पर ली फिरकी कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अमिताभ बच्चन का प्रोटेस्ट से जुड़ा 14 साल पुराना पोस्ट शेयर कर फिरकी ली है। री-शेयर की गई पोस्ट में अमिताभ बच्चन ने दिल्ली गैंगरेप से जुड़े विरोध में आंसू गैस के इस्तेमाल का विरोध किया था, जबकि इस प्रोटेस्ट में हिंसा होने के बावजूद उन्होंने चुप्पी साधी हुई है। विवेक ऑबेरॉय ने भी टाला था प्रोटेस्ट से जुड़ा सवाल कुछ समय पहले ही विवेक ऑबेरॉय से सोनम वांगचुक और उनके अनशन पर सवाल किया गया, तो एक्टर ने मुद्दे पर राय रखने की बजाए कहा, ‘मैं अभिनेता हूं, नेता नहीं हूं, मैं पॉलिटिकल चीजों पर ज्यादा ध्यान नहीं देता।’ विवेक का ये बयान सामने आने के बाद कई लोग उनकी जमकर आलोचना कर रहे हैं।

सेंसेक्स में 300 अंक से ज्यादा की गिरावट:76,400 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक टूटा; IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली

सेंसेक्स में 300 अंक से ज्यादा की गिरावट:76,400 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक टूटा; IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली

शेयर बाजार में आज यानी 23 जुलाई को गिरावट है। सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 76,400 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी करीब 100 अंक की गिरावट है, ये 23,900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली है। 96 डॉलर पर पहुंचा कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड में आज करीब 2% की तेजी है। ये 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव और बढ़ा, तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जो सकती हैं। इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल पर दिख सकता है। एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला कारोबार रहा 22 जुलाई को अमेरिकी बाजार में गिरावट रही थी 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹4,660 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी 22 जुलाई को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 715 अंक की गिरावट के साथ 76,755 के स्तर पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 191 अंक की गिरावट रही, ये 23,996 पर बंद हुआ था।

सेंसेक्स में 300 अंक से ज्यादा की गिरावट:76,400 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक टूटा; IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली

सेंसेक्स में 300 अंक से ज्यादा की गिरावट:76,400 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक टूटा; IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली

शेयर बाजार में आज यानी 23 जुलाई को गिरावट है। सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 76,400 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी में भी करीब 100 अंक की गिरावट है, ये 23,900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली है। 96 डॉलर पर पहुंचा कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड में आज करीब 2% की तेजी है। ये 96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। जानकारों का मानना है कि अगर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव और बढ़ा, तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जो सकती हैं। इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल पर दिख सकता है। एशियाई बाजारों में आज मिला-जुला कारोबार रहा 22 जुलाई को अमेरिकी बाजार में गिरावट रही थी 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹4,660 करोड़ के शेयर खरीदे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले कल यानी 22 जुलाई को शेयर बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 715 अंक की गिरावट के साथ 76,755 के स्तर पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 191 अंक की गिरावट रही, ये 23,996 पर बंद हुआ था।

ओट्स ढोकला रेसिपी: बनाना है कुछ नया स्वाद? बेसन की जगह घर में सिर्फ 5 मिनट में तैयार करें सॉफ्ट ओट्स ढोकला, नोट करें विधि

तस्वीर का विवरण

अन्य ढोलकला सामग्री बनाने के लिए: 1 कप ओट्स, ½ कप दही, ¼ कप पानी, 1 छोटा मोटा अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट, ½ छोटा मोटा नमक, ½ छोटा काला हल्दी, 1 छोटा मोटा चीनी, 1 छोटा ईनो छवि: फ्रीपिक धन्यवाद के लिए: 1 बड़ा मूंगा तेल, 1 बड़ा तिल छवि: एआई ओट्स ढोलकला बनाने की विधि: सबसे पहले ओटीएस को पीसकर स्टोन पाउडर बनाया लें। अब एक बड़ा बाउल में ओट्स पाउडर, दही, नमक, हल्दी, अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट और थोड़ा-सा पानी के टुकड़े अच्छी तरह से मिलाए जाते हैं। छवि: फ्रीपिक इस बैटर को 5 मिनट के लिए बढ़ा कर रख दें ताकि ओट्स अच्छे तरह से फूल जाएं। अब अंतिम रूप से सॉल्ट और इसमें ऊपर से एक राक्षसी पानी यांत्रिकी हाथ से फिलिंग शामिल है। इंस्टेंट इस बैटर को ग्रीक किए गए पोएशिया में डाला गया। छवि: एआई इसे 12-15 मिनट तक स्टीम करें। टूथपिक मैकेनिकल चेक करें, अगर साफा बाहर आ जाए तो ढोलकला तैयार है। थोड़ा ठंडा होने के बाद इसे आकार में काट लें। ये चित्र और नाममात्र का है। छवि: एआई एक छोटा पैन में तेल गर्म करें। इसमें राय, तिल, कारी पत्ते और हरी मिर्च के प्लास्टर भून लें। अब इस दामाद को ढोलकले के ऊपर डाल दे और ऊपर से हरा धनिया छिड़क दे। छवि: एआई ढोलकले को हरी धनिया की चटनी, नारियल या टमाटर की चटनी के साथ बेचें। क्रूज़ तो एक कप गर्म चाय या कॉफ़ी के साथ इसका आनंद भी ले सकते हैं। बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए स्वादिष्ट और रेगिस्तानी जंगल हैं। छवि: एआई कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होने के कारण पाचन के लिए अच्छा होता है। लंबे समय तक पेट भरना, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती। वज़न नियंत्रण की कोशिश कर रहे लोगों के लिए भी अच्छा विकल्प हो सकता है। छवि: एआई अगर आप इस बार अनाउंसमेंट में कुछ नया, झटपट और डॉक्यूमेंट्री बनाना चाहते हैं, तो ओट्स ढोलकला की यह आसान रेसिपी जरूर ट्राई करें। इसका स्वाद और स्पाइसी टेक्स्टचर हर किसी को पसंद आएगा। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)ओट्स ढोकला रेसिपी(टी)ओट्स ढोकला रेसिपी(टी)हेल्दी स्नैक रेसिपी(टी)ढोकला रेसिपी(टी)हेल्दी रेसिपी(टी)ओट्स ढोकला कैसे बनाएं

फ्रांस में कृषि कानून का विरोध, पर्यावरण मंत्री का इस्तीफा:कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी से मंत्री नाराज, बोलीं- यह मधुमक्खियों के लिए नुकसानहेद

फ्रांस में कृषि कानून का विरोध, पर्यावरण मंत्री का इस्तीफा:कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी से मंत्री नाराज, बोलीं- यह मधुमक्खियों के लिए नुकसानहेद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने इस्तीफा देने का ऐलान किया है। उन्होंने यह फैसला उन्होंने विवादित कृषि बिल के विरोध में लिया है, जिसमें दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के इस्तेमाल की मंजूरी दी गई है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक वैज्ञानिकों का कहना है कि ये कीटनाशक मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए नुकसानदायक हैं। पर्यावरण मंत्री बनीं बारबू आज राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। फ्रांस की संसद ने मंगलवार को यह बिल पारित किया था। सरकार ने दावा किया कि वह ये कानून किसानों की मदद के लिए लाया जा रहा है। उसका कहना है कि किसानों को घटती कमाई और खेती की बढ़ती लागत जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिल के दो प्रावधानों से सबसे ज्यादा विवाद 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन के इस्तेमाल की अस्थायी मंजूरी देना। इसका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी की खेती में किया जा सकेगा। 2. अगले 10 वर्षों में किसानों के लिए पानी के भंडारण (वॉटर स्टोरेज) की अनुमति की सीमा दोगुनी करना। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पर्यावरणविदों और सरकार के भीतर भी विरोध बढ़ गया। इसके विरोध में पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने पद छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनसे किए गए वादे के विपरीत इस प्रावधान को हटाने पर कोई चर्चा ही नहीं होने दी। बारबू ने सोशल मीडिया पर लिखा, पिछले नौ महीनों में मैंने जंगलों, साफ पानी, स्वच्छ हवा, उपजाऊ मिट्टी और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया। लेकिन विरोधी ताकतें इतनी मजबूत हो गई हैं कि मैं अपने मकसद पूरे नहीं कर पा रही। राजनीति मेरी दुनिया नहीं है और अगर राजनीति ऐसी ही होती है, तो यह कभी मेरी दुनिया नहीं बन सकती। वहीं, सरकार का कहना है कि नए प्रावधान लाने का फैसला उन किसानों की मदद के लिए लिया गया है, जो मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। पहले भी विवाद में रहा है यह कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन रसायन नियोनिकोटिनॉइड नाम के कीटनाशकों के समूह में आते हैं। यूरोपीय संघ (EU) के नियमों के तहत इनका इस्तेमाल कुछ शर्तों के साथ किया जा सकता है, लेकिन फ्रांस में इन पर फिलहाल प्रतिबंध है। एसेटामिप्रिड पर फ्रांस ने 2018 में प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि इसे मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले कीड़ों के लिए हानिकारक माना गया था। एक साल पहले भी इस रसायन पर बैन हटाने की कोशिशें हुई थीं लेकिन फ्रांस की सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह फैसला पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा के अनुरूप नहीं है।

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता

चीन बोला- भारत ने हमारे 12 नाविकों को बचाया:ये एहसान कभी नहीं भूलेंगे; 1 साल पहले केरल के पास जहाज में आग लगी थी

चीन बोला- भारत ने हमारे 12 नाविकों को बचाया:ये एहसान कभी नहीं भूलेंगे; 1 साल पहले केरल के पास जहाज में आग लगी थी

भारत में चीन के नए मिलिट्री डिप्लोमैट यू जियान ने भारतीय सेना का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने केरल तट के पास आग लगने वाले मालवाहक जहाज से 12 चीनी नागरिकों को बचाया था। चीन यह एहसान कभी नहीं भूलेगा। यू जियान ने यह बात मंगलवार को नई दिल्ली में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नेताओं की कोशिशों से भारत-चीन संबंध फिर से सुधार की राह पर लौटे हैं। दरअसल, 9 जून 2025 को सिंगापुर के झंडे वाला कंटेनर जहाज एमवी वान हाई 503 केरल के अझिक्कल तट से करीब 44 समुद्री मील दूर आग लगने के बाद विस्फोट का शिकार हो गया था। यह जहाज कोलंबो से न्हावा शेवा जा रहा था और उस पर 22 चालक दल के सदस्य सवार थे। जहाज में आग लगने और बचाव से जुड़ी 5 तस्वीरें कोलंबो से मुंबई जा रहा था जहाज जहाज श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से मुंबई जा रहा था। रास्ते में जहाज के एक कंटेनर में विस्फोट हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई। जहाज पर कुल 22 क्रू मेंबर्स सवार थे। भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए 18 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था। बचाए गए लोगों में से 5 लोग घायल हुए थे, जिनमें 2 गंभीर रूप से झुलसे थे। 4 लोग लापता हो गए थे, जिन्हें मृत मान लिया गया। जहाज पर चीन और ताइवान के कुल 14 लोग सवार थे। इनमें 8 चीन के और 6 ताइवान के थे। बचाव कार्य के लिए कोस्ट गार्ड के 5 जहाज, 2 विमान और 1 हेलिकॉप्टर तैनात किए गए थे।

CJP के प्रदर्शन में पिटे टीवी एक्टर सेहबान:कहा- हाथ सूज गया है, पुलिस ने कई लाठियां मारीं; 2 लड़कियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे

CJP के प्रदर्शन में पिटे टीवी एक्टर सेहबान:कहा- हाथ सूज गया है, पुलिस ने कई लाठियां मारीं; 2 लड़कियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे

बेपनाह, दिल मिल गए और तुझसे है राब्ता जैसे पॉपुलर टीवी शोज में नजर आ चुके एक्टर सेहबान अजीम लाठीचार्ज में घायल हो गए। एक्टर 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन में जंतर मंतर पहुंचे थे, जहां दो लड़कियों को लाठीचार्ज से बचाते हुए एक्टर के हाथ और शरीर के कई हिस्सों पर लाठी पड़ गई। एक्टर ने दावा है कि पुलिस जानबूझ कर लाठियां चला रही थी। मिड डे को दिए इंटरव्यू में एक्टर सेहबान ने कहा, “वह मंजर बेहद दिल तोड़ देने वाला था। मैं छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होने गया था। मेरी मुंबई से आई दो महिला दोस्त भी वहां मौजूद थीं। उन्हें लाठीचार्ज से बचाने की कोशिश में मुझे चोट लग गई। मेरा हाथ सूज गया है। पुलिस ने मेरे हाथ, पैरों और शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी कई बार लाठियां मारीं।” आगे एक्टर ने कहा, “हम जंतर-मंतर के अंदर तक भी नहीं पहुंच पाए, जहां असल में प्रदर्शन हो रहा था। पुलिस ने चारों तरफ बैरिकेडिंग कर रखी थी। हमें बीच में घेर लिया और फिर लाठीचार्ज शुरू कर दिया। उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं थी कि वे किस पर लाठी चला रहे हैं। वहां बच्चे थे, महिलाएं थीं, लेकिन किसी को नहीं बख्शा गया।” आगे अभिनेता ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह सुनियोजित लग रही थी और उसका मकसद बलपूर्वक भीड़ को वहां से हटाना था। उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि यह लाठीचार्ज जानबूझकर किया गया था। वे बस चाहते थे कि हम सभी वहां से चले जाएं। मेरा दिल उन बच्चों के लिए दुखता है, जो इस प्रदर्शन में शामिल होने आए थे। कई छात्र ट्रेन और बसों से कई दिनों का सफर तय करके पहुंचे थे। सेहबान ने दावा किया कि प्रदर्शन में शामिल कई लोग घायल हुए। उन्होंने कहा, “पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से पीटा। कई लोगों के शरीर से खून बह रहा था। ये युवा छात्र वहीं डटे रहे और उन्होंने यह सारी मार झेली।” सेहबान अजीम के साथ प्रोटेस्ट में शामिल हुईं दोस्तों ने उनके वीडियो भी पोस्ट किए हैं, जिसमें वो लगातार इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। पोस्ट में उनकी दोस्त ने लिखा है कि लाठीचार्ज के समय एक्टर अपनी दो दोस्तों को बचाने की कोशिश कर रहे थे। इन टीवी शोज में नजर आए सेहबान अजीम सेहबान अजीम, दिल मिल गए, एक हजारों में मेरी बहना है, हमसफर्स, थपकी प्यार की, बेपनाह और तुझसे है राब्ता जैसे शोज का हिस्सा रहे हैं। इसके अलावा वो टाइम्स मोस्ट डिजायरेबल मैन की लिस्ट में लगातार तीन सालों तक शामिल हुए हैं। सेहबान को आखिरी बार स्पाय बहू टीवी शो में देखा गया था। शबाना आजमी प्रोटेस्ट में पहुंचीं, अस्थमा अटैक आया 20 जुलाई को सीनियर एक्ट्रेस शबाना आजमी, प्रकाश राज जैसे बड़े चेहरे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट में शामिल हुए थे। इस दौरान शबाना आजमी की तबीयत बिगड़ गई। अब एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि आंसू गैस के गोले छोड़े जाने से उन्हें अस्थमा अटैक आया। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई, लेकिन उनका पंप उनके पास था। पास की बिल्डिंग में ले जाकर उन्हें शुरुआत उपचार दिया गया। कुछ देर बाद तबीयत ठीक होने पर उन्होंने दोबारा प्रोटेस्ट जॉइन किया। बाकी कलाकारों के शामिल न होने पर शबाना का जवाब बॉलीवुड सेलिब्रिटीज के न आने पर सवाल पूछा गया, तो शबाना ने कहा कि लोग सिर्फ फिल्मी सितारों की अनुपस्थिति पर बात करते हैं। कोई भी बड़े बिजनेसमैन या उद्योगपतियों के शामिल न होने पर सवाल नहीं उठाता। ऐसे सवाल पूछकर मुख्य मुद्दे को भटकाया जाता है और गैर-जरूरी विवाद खड़ा किया जाता है। दिलजीत दोसांझ बोले- छात्रों के साथ गलत हुआ दिलजीत दोसांझ ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, आज जो हुआ, बहुत गलत हुआ। छात्रों के साथ ऐसा बर्ताव नहीं होना चाहिए था। मैं अधिकारियों से अपील करता हूं कि वे छात्रों की मांगें सुनें। लोगों की आवाज ही भगवान की आवाज होती है। मुझे पहले भी कई बार ‘एंटी-नेशनल’ कहा गया है। अब भी शायद मुझे यही कहा जाएगा। किसान आंदोलन के बाद मुझे काफी विरोध और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ा, जिनके बारे में मैं खुलकर बात भी नहीं कर सकता। बाकी सब भगवान देख रहे हैं। भगवान सबका भला करें। कंगना ने आंदोलन को बताया दबाव बनाने की कोशिश सोमवार को कंगना रनोट ने कहा था कि मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए संसद सही जगह है, न कि सड़कें। उन्होंने कहा कि जनता ने एक सरकार चुनी है और सरकार चलाने का फैसला उसी का होना चाहिए। कंगना ने कहा की ये सब जंतर-मंतर पर हुड़दंग कर रहे हैं, उत्पात मचा रहे हैं। जिस तरह से आंदोलन चल रहा है वो ठीक नहीं है। प्रदर्शन के जरिए सरकार को यह तय करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि किसे पद पर रखना है और किसे हटाना है। हेमा मालिनी बोलीं- छात्रों को गुमराह न करें बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने भी न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में इस प्रदर्शन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आंदोलन से कुछ हासिल नहीं होने वाला है। मोदी सरकार देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के विकास के लिए लगातार काम कर रही है। हेमा मालिनी ने कहा कि इस मामले को बातचीत से हल किया जाना चाहिए और इसमें शामिल छात्रों को गुमराह नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इन बड़े सेलेब्रिटीज ने भी किया आंदोलन का समर्थन जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में शबाना आजमी और प्रकाश राज के अलावा कुणाल कामरा और स्वरा भास्कर भी जमीनी स्तर पर शामिल हुए हैं। वहीं सोनी राजदान, जीनत अमान, अभय देओल, नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, ओमी वैद्य और सोनाक्षी सिन्हा ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुहिम का समर्थन किया है। गीतकार जावेद अख्तर ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला खत लिखकर इस मामले पर बातचीत शुरू करने की मांग की है। इनके अलावा विशाल ददलानी, दीया मिर्जा और फिल्म मेकर ओनिर ने भी प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता जताई है।