Wednesday, 14 Oct 2026 | 09:16 AM

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प्रयागराज में पूर्व मंत्री का कोल्ड स्टोरेज ढहा,4 की मौत:मलबे से 17 लोगों को बाहर निकाला गया; प्रत्यक्षदर्शी बोले- धमाका हुआ था

प्रयागराज में पूर्व मंत्री का कोल्ड स्टोरेज ढहा,4 की मौत:मलबे से 17 लोगों को बाहर निकाला गया; प्रत्यक्षदर्शी बोले- धमाका हुआ था

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे तेज धमाके के बाद कोल्ड स्टोरेज की एक बिल्डिंग ढह गई। मलबे में करीब 20 मजदूर दब गए। हादसे में 4 मजदूरों की मौत हुई है। मरने वालों में पिलत चौधरी, मशींदर, ज्योतिष और जगदीश शामिल हैं। जगदीश प्रयागराज और बाकी तीनों बिहार के रहने वाले थे। हालांकि, प्रशासन ने अभी मौतों की पुष्टि नहीं की है। प्रशासन 7 जेसीबी से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है। अब तक 17 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम मौके पर हैं। यह कोल्ड स्टोरेज सपा नेता और पूर्व मंत्री अंसार अहमद का है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है, पहले अमोनिया गैस स्टोरेज टैंक में विस्फोट हुआ। इससे आरसीसी पिलर स्ट्रक्चर ढह गया। फिर बिल्डिंग भरभराकर गिर गई। अमोनिया गैस की बदबू करीब 1 किलोमीटर तक फैल चुकी है। ज्यादातर लोग मुंह पर कपड़ा (रुमाल, गमछा) बांधे हुए हैं। घटना को लेकर लोग गुस्से में हैं। पुलिस को भी विरोध का सामना करना पड़ा। हादसे की तस्वीरें देखिए- कोल्ड स्टोरेज 5 हजार स्क्वायर फीट जमीन पर बना आदर्श कोल्ड स्टोरेज नाम से यह बिल्डिंग हादसा फाफामऊ इलाके में थी। इसके मालिक सपा नेता और पूर्व मंत्री अंसार अहमद है। 27 साल पुराना कोल्ड स्टोरेज करीब 5 हजार स्क्वायर फीट जमीन पर बना है। इसमें तीन बिल्डिंग हैं। करीब 1500 स्क्वायर फीट एक बिल्डिंग ढही है। यहां 100 से ज्यादा लोग काम करते हैं। पुलिस ने कोल्ड स्टोरेज के मैनेजर और अंसार अहमद के परिवार के कई सदस्यों को हिरासत में लिया है। सीएम योगी ने मृतकों को 2-2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपए देने का ऐलान किया है। उन्होंने घटना पर दुख जाहिर किया है। घटना से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…

धुरंधर 2 में आर माधवन के सीन पर विवाद:शिवसेना नेता ने गुरबाणी के अपमान पर उठाया सवाल, फिल्म मेकर्स से सार्वजनिक माफी की मांग की

धुरंधर 2 में आर माधवन के सीन पर विवाद:शिवसेना नेता ने गुरबाणी के अपमान पर उठाया सवाल, फिल्म मेकर्स से सार्वजनिक माफी की मांग की

फिल्म धुरंधर 2 को लेकर नया विवाद सामने आया है। फिल्म के एक सीन में गुरबाणी के कथित अपमान को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। शिव सेना गुरजोत सिंह कीर ने ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए फिल्म मेकर्स से सार्वजनिक माफी की मांग की है। रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद उस सीन को लेकर है जिसमें आर माधवन का किरदार गुरबाणी का उच्चारण करता नजर आता है। आरोप है कि इस दौरान उनके हाथ में सिगरेट दिखाई गई है। सिख समुदाय और नेताओं का कहना है कि यह प्रस्तुति धार्मिक मर्यादाओं के खिलाफ है और इससे उनकी भावनाएं आहत हुई हैं। यही इस पूरे विवाद का मुख्य कारण बन गया है। शिवसेना नेता गुरजोत सिंह कीर ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी इस सीन को बेहद आहत करने वाला और अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि गुरबाणी सिख धर्म की पवित्र वाणी है और इसे इस तरह दिखाना किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने फिल्म निर्माताओं से तुरंत माफी मांगने और विवादित सीन को हटाने की मांग की है। नेता ने चेतावनी भी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन हो सकता है। उनका कहना है कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतना जरूरी है, खासकर जब बात किसी समुदाय की आस्था की हो। यह मामला अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। खबर के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर शिकायत भी दर्ज कराई गई है। शिकायत में फिल्म से जुड़े लोगों पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। फिलहाल, फिल्म के मेकर्स या कलाकारों की तरफ से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि बढ़ते विरोध के बीच मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गौरतलब है कि धुरंधर 2 पहले भी अलग-अलग कारणों से चर्चा में रही है, लेकिन गुरबाणी से जुड़े इस विवाद ने इसे फिर सुर्खियों में ला दिया है।

भूत बंगला का 'तू ही दिसदा' सॉन्ग टीजर रिलीज:अक्षय-वामिका की रोमांटिक केमिस्ट्री दिखी; अरिजीत सिंह की आवाज में फिल्म का दूसरा ट्रैक

भूत बंगला का 'तू ही दिसदा' सॉन्ग टीजर रिलीज:अक्षय-वामिका की रोमांटिक केमिस्ट्री दिखी; अरिजीत सिंह की आवाज में फिल्म का दूसरा ट्रैक

अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की फिल्म ‘भूत बंगला’ के नए लव ट्रैक ‘तू ही दिसदा’ का टीजर रिलीज कर दिया गया है। टीजर में अक्षय कुमार और वामिका गब्बी की रोमांटिक केमिस्ट्री नजर आ रही है। गाने में अरिजीत सिंह और निकिता गांधी की आवाज वाले इस गाने में खूबसूरत लोकेशन्स और प्यारी लव स्टोरी की झलक दिखाई गई है। अरिजीत सिंह की आवाज में रोमांटिक ट्रैक फिल्म के पहले गाने ‘राम जी आके भला करेंगे’ की सफलता के बाद मेकर्स ने अब फिल्म का रोमांटिक पहलू पेश किया है। ‘तू ही दिसदा’ गाने के विजुअल्स में झरने, घने जंगल और खूबसूरत पहाड़ों के नजारे दिखाए गए हैं। वामिका गब्बीअक्षय कुमार के साथ पहली बार स्क्रीन शेयर करती नजर आएंगी और उनकी जोड़ी काफी ‘नेचुरल’ लग रही है। गाने में अरिजीत सिंह की सुकून देने वाली आवाज इस गाने को और खूबसूरत बना रही है। 14 साल बाद साथ आए अक्षय-प्रियदर्शन ‘भूत बंगला’ साल 2026 की बड़ी फिल्मों में से एक मानी जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह अक्षय कुमार और डायरेक्टर प्रियदर्शन का 14 साल बाद साथ आना है। इस जोड़ी ने पहले ‘हेरा फेरी’, ‘भूल भुलैया’ और ‘गरम मसाला’ जैसी कल्ट क्लासिक कॉमेडी फिल्में दी हैं। फैंस एक बार फिर बड़े पर्दे पर उसी पुराने स्टाइल का ह्यूमर और एंटरटेनमेंट देखने का इंतजार कर रहे हैं। पुरानी कॉमेडी कास्ट की वापसी फिल्म में सिर्फ अक्षय ही नहीं, बल्कि प्रियदर्शन की पसंदीदा कॉमेडी टीम भी वापस लौट रही है। फिल्म में परेश रावल, राजपाल यादव और असरानी जैसे दिग्गज कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं। इन एक्टर्स की मौजूदगी ने फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पुरानी यादें ताजा कर दी हैं। फिल्म में इनके साथ तब्बू भी नजर आएंगी, जिससे स्टार कास्ट और भी मजबूत हो गई है। अप्रैल में रिलीज होगी फिल्म ‘भूत बंगला’ का निर्माण बालाजी मोशन पिक्चर्स और केप ऑफ गुड फिल्म्स के बैनर तले किया जा रहा है। एकता कपूर और अक्षय कुमार इसके प्रोड्यूसर हैं। यह फिल्म 10 अप्रैल, 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी।

समर दही तड़का रेसिपी: 5 मिनट में सादा दही में डालें ये 4 तरह का तड़का, देखते ही हो जाएंगे फैन; बढ़ जाएगी खाने का स्वाद

गर्मियों में स्वस्थ आहार युक्तियों के लिए 5 मिनट की दही तड़का रेसिपी, स्वादिष्ट मसालेदार दही रेसिपी

दही तड़का रेसिपी | छवि: सोशल मीडिया Tadke Wali Dahi Kaise Banaye: गर्मियों में दही खाना स्वास्थ्य के लिए बहुत स्वादिष्ट माना जाता है। यह शरीर को ठंडक देता है और पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाता है। लेकिन अगर आप रोज-रोज सादा दही खात पैदा हो गए हैं, तो अब यह बेकार बेकार भुगतान का समय है। आज हम आपको बताएंगे 4 आसान और झटपट बनने वाले दही तड़का रेसिपी, जिसे आप सिर्फ 5 मिनट में तैयार कर सकते हैं। ये स्वाद में लाजवाब हैं और आपके साधारण दही को बना देंगे सुपर टेस्टी। जीरा-हींग तड़का दही यह सबसे आसान और क्लासिक तड़का है। इसका स्वाद, सुगंधदार और पेट के लिए बेहद अच्छा होता है। कैसे?: एक पैन में थोड़ी सी घी या तेल गरम कर लीजिये. इसमें जीरा और एक चुटकी हींग शामिल हैं। प्रभाव भूनने के बाद इसे दही में डाल दें। ऊपर से नमक और थोड़ा काला नमक। लहसुन-लाल मिर्च तड़का दही अगर आपको लिटिल सिम्पसी पसंद है, तो ये आपके लिए है। इसका स्वाद तीखा, चटपटा और खाने का मजा डबल कर देगा। कैसे?: तेल गर्म करें, जिसमें थर्मोस्टैटिक लहसुन शामिल है और सुगंध होने तक। फिर साबुत लाल मिर्च डालें और तुरंत बनाएं दही की दाल। कारी पत्ता-सरसोन तड़का दही दक्षिण भारतीय स्वाद का मजा घर पर लें। कैसे देखें: तेल में राई डालें, जब चटकने लगें तो करी पत्ते और हरी मिर्च डालें। इसे दही में रखें। इसका स्वाद फ्लेवर तीखा और बिल्कुल अलग टेस्ट होता है। धनिया-पुदीना तड़का दही समरसमान के लिए ताजातरीन होटल रहेंगे। इसका स्वाद ठंडा, ताजगी भरा और बहुत ही स्वादिष्ट होता है। कैसे देखें: धनिया और पुदीना को डेमोक्रेट पीस लें। प्रभाव सा जीरा तड़का रोके, पकौड़े और दही की दाल में। अन्य जरूरी टिप्स दही हमेशा अन्वेषित और ताजी लें। तड़का ज्यादा गरम न रखें, अन्य दही फैट हो सकता है स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से जीरा पाउडर भी डाला जा सकता है। अब आपको सादा दही खाने की जरूरत नहीं है। इन आसान तडकों से आप हर दिन दही को नया स्वाद दे सकते हैं। ये रेसिपी ना सिर्फ स्वाद मसाला, बल्कि गर्मियों में आपको ठंडक भी देगी। यह अवश्य पढ़ें: पनीर बनाम टोफू: सेहत के लिए टोफू और पनीर में से कौन सा है स्वादिष्ट? जानें अंतर्ज्ञान और का सही तरीका

सुप्रीम कोर्ट जज बोले-ज्यूडिशियरी हद से ज्यादा सख्त हो रही:इसलिए लोग जेलों में सड़ रहे; यह विकसित भारत का आदर्श नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट जज बोले-ज्यूडिशियरी हद से ज्यादा सख्त हो रही:इसलिए लोग जेलों में सड़ रहे; यह विकसित भारत का आदर्श नहीं हो सकता

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि ज्यूडिशियरी के कुछ हिस्से ‘मोर लॉयल देन द किंग सिंड्रोम’ से ग्रस्त हैं। यानी ये हिस्से राजा से भी ज्यादा वफादार होने की प्रवृत्ति अपना चुके हैं। इसके कारण ही लोग महीनों तक जेलों में सड़ते रहते हैं। जस्टिस भुइयां ने यह बात रविवार को बेंगलुरु में हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पहली नेशनल समिट के दौरान कही। ‘विकसित भारत में न्यायपालिका की भूमिका’ विषय पर पैनल डिस्कशन के दौरान जस्टिस भुइयां ने कहा- कुछ मामलों में सिस्टम इतना ज्यादा सख्त हो रहा है कि जरूरत से ज्यादा केस दर्ज हो रहे हैं। बार एंड बेंच की एक खबर के मुताबिक जस्टिस भुइयां ने सरकार और न्यायपालिका के संबंधों, PMLA, UAPA कानूनों के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया एक्टिविटी जैसे छोटे मुद्दों पर मनमाने ढंग से क्रिमिनल केस दर्ज किए जाने की निंदा की। UAPA और PMLA एक्ट का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल उनकी वैल्यू घटा रहा अपनी स्पीच के दौरान जस्टिस भुइयां ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) जैसे कानूनों के तहत आरोपियों को लंबे समय तक हिरासत में रखे जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा- PMLA प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, ऐसे मामलों से निपटने का एक बड़ा साधन है, लेकिन कानून का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल इसके असर को कमजोर करता है। वहीं, UAPA को लेकर कहा कि जब दोषसिद्धि की दर लगभग 5% से भी कम है, तो आरोपी को सालों तक जेल में क्यों रखा जाए। जस्टिस भुइयां ने कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े कुछ विवादों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट को SIT बनानी पड़ी हैं, जिससे सिर्फ समय की बर्बादी हुई है। विकसित भारत राजनीतिक नारा, अदालतें इससे अलग रहें जस्टिस भुइयां ने न्यायपालिका को विकसित भारत जैसे राजनीतिक नारों से बहुत ज्यादा जोड़ने के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा- ‘विकसित भारत’ का विचार एक राजनीतिक लक्ष्य है और अदालतों को अपने कामकाज में स्वतंत्र रहना चाहिए। जब हम विकसित भारत की बात करते हैं, तो बहस और असहमति के लिए गुंजाइश होनी चाहिए। असहमति को अपराध नहीं माना जाना चाहिए। दलित से भेदभाव होता रहा, तो विकास सार्थक नहीं हो सकता पैनल डिस्कशन के दौरान जस्टिस भुइयां बोले- “भारत में दलितों से भेदभाव जैसी सामाजिक दरारें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। माता-पिता यह जिद नहीं कर सकते कि बच्चे दलित महिला के हाथ का बना खाना नहीं खाएंगे। हम ऐसी स्थिति बर्दाश्त नहीं कर सकते जहां दलित पुरुषों, अनुसूचित जाति के पुरुषों को गलियारों में खड़ा किया जाए और लोग उन पर पेशाब करें। यह विकास का मॉडल नहीं हो सकता। व्यक्ति के सम्मान की रक्षा की जानी चाहिए।”

क्या फ्रिज में रखा हुआ खाना बार-बार गर्म करना सही है? जानिए सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है और स्टोरेज का सही तरीका

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Last Updated:March 23, 2026, 13:03 IST Food Storage Tips: फ्रिज में रखा खाना बार-बार गर्म करना आसान जरूर लगता है, लेकिन यह सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे खाने के पोषक तत्व कम हो जाते हैं और बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं. कुछ फूड जैसे चावल, चिकन और हरी सब्जियां बार-बार गर्म करने से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं. सही तरीका यही है कि खाना एक बार ही गर्म करें और सही तरीके से स्टोर करें. छोटी सावधानियां अपनाकर आप खुद को फूड पॉयजनिंग और पेट की समस्याओं से बचा सकते हैं. Food Storage Tips: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर एक बार में ज्यादा खाना बना लेते हैं और फिर उसे फ्रिज में रखकर कई बार गर्म करके खाते हैं. यह आदत देखने में बहुत आसान और टाइम सेविंग लगती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही आदत आपकी सेहत के लिए धीरे-धीरे नुकसानदायक बन सकती है. बार-बार गर्म किया हुआ खाना न केवल अपने पोषक तत्व खो देता है, बल्कि उसमें बैक्टीरिया बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है. खासकर जब खाना सही तरीके से स्टोर न किया गया हो या बार-बार बाहर निकालकर फिर फ्रिज में रखा गया हो, तो उसमें हानिकारक तत्व पैदा हो सकते हैं. कई लोग यह मानते हैं कि गर्म करने से खाना सुरक्षित हो जाता है, लेकिन सच यह है कि हर बार गर्म करने से उसकी क्वालिटी और सेफ्टी दोनों कम होती जाती हैं. इसलिए जरूरी है कि हम इस आदत को समझें और सही तरीका अपनाएं ताकि सेहत पर इसका गलत असर न पड़े. बार-बार गर्म करने से खाने में क्या बदलाव आते हैं: जब आप किसी खाने को बार-बार गर्म करते हैं, तो उसमें मौजूद जरूरी पोषक तत्व धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं. खासकर प्रोटीन और विटामिन जैसे तत्व गर्मी से जल्दी टूट जाते हैं. इसके अलावा, कुछ खाने जैसे चावल, आलू और दाल को बार-बार गर्म करने पर उनमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं. यह बैक्टीरिया खाने को खराब बना देते हैं और पेट से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. बार-बार गर्म करने से खाने का स्वाद भी बदल जाता है और उसका टेक्सचर भी खराब हो जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google किन खाने को बार-बार गर्म करना ज्यादा नुकसानदायक होता है: कुछ ऐसे फूड आइटम होते हैं जिन्हें बार-बार गर्म करना ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है. जैसे चावल में बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं अगर उसे सही तरीके से स्टोर न किया जाए. चिकन और अंडे जैसे प्रोटीन वाले फूड को बार-बार गर्म करने से उनमें हानिकारक कंपाउंड बन सकते हैं. हरी सब्जियां भी बार-बार गर्म करने पर अपने पोषक तत्व खो देती हैं और उनका स्वाद भी खराब हो जाता है. इसलिए ऐसे खाने को खास सावधानी के साथ इस्तेमाल करना चाहिए. बार-बार गर्म करने से सेहत पर क्या असर पड़ता है: बार-बार गर्म किया हुआ खाना खाने से पेट दर्द, गैस, उल्टी और फूड पॉयजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसा खाना खाने से पाचन तंत्र कमजोर हो सकता है और शरीर को सही पोषण नहीं मिल पाता. इससे इम्यूनिटी पर भी असर पड़ सकता है. कई बार लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह छोटी-छोटी समस्याएं आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकती हैं. फ्रिज में खाना रखने और गर्म करने का सही तरीका: अगर आप बचा हुआ खाना इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो उसे सही तरीके से स्टोर करना बहुत जरूरी है. खाना ठंडा होने के बाद तुरंत फ्रिज में रख दें और एयर टाइट कंटेनर का इस्तेमाल करें. खाने को जितना खाना हो उतना ही बाहर निकालें और एक बार ही गर्म करें. कोशिश करें कि खाना बार-बार फ्रिज से बाहर निकालकर वापस न रखें. माइक्रोवेव या गैस पर खाना अच्छी तरह से गर्म करें ताकि उसमें मौजूद बैक्टीरिया खत्म हो सकें. साथ ही 24 घंटे के अंदर खाना खा लेना बेहतर रहता है. किन बातों का ध्यान रखना चाहिए: खाना हमेशा साफ बर्तनों में रखें और फ्रिज का तापमान सही बनाए रखें. ज्यादा दिनों तक रखा हुआ खाना खाने से बचें. अगर खाने में बदबू या स्वाद में बदलाव लगे तो उसे तुरंत फेंक दें. यह छोटी-छोटी सावधानियां आपको बड़ी बीमारियों से बचा सकती हैं. First Published : March 23, 2026, 13:03 IST

टीवीके एग्जिट, लेफ्ट पुशबैक, मनाप्पराई टसल: तमिलनाडु चुनाव में डीएमके गठबंधन की बातचीत अशांत हो गई | चुनाव समाचार

Several people are feared to have been injured after an incoming Air Canada Express CRJ-900 flight and a fire engine collided on runway 4 of the airport.

आखरी अपडेट:मार्च 23, 2026, 12:38 IST सबसे प्रमुख टूट तब हुई जब टी वेलमुरुगन की तमिलागा वाझ्वुरिमई काची (टीवीके) उपेक्षा और असंतोष का हवाला देते हुए गठबंधन से बाहर हो गई। तमिलनाडु चुनाव: कांग्रेस नेता राहुल गांधी एमके स्टालिन के साथ तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनावों की ओर अग्रसर होने के साथ, सीट-बंटवारे की बातचीत द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर स्पष्ट तनाव को उजागर कर रही है। निर्वाचन क्षेत्र के आवंटन पर बातचीत से साझेदारों के बीच मनमुटाव पैदा हो गया है, जो सत्ताधारी दल द्वारा सीटों का बड़ा हिस्सा बरकरार रखने की कोशिश के कारण खुद को निचोड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं। तनाव ज़मीनी स्तर पर भी दिख रहा है, कई सहयोगी दल एक ही निर्वाचन क्षेत्र के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, जबकि द्रमुक गढ़ छोड़ने के लिए अनिच्छुक है। यह स्थिति पिछले चुनाव चक्र में गठबंधन के अपेक्षाकृत सहज समन्वय से बदलाव का संकेत देती है और नामांकन के करीब आने पर सौदेबाजी के कठिन चरण का संकेत देती है। सीट आवंटन पर उपेक्षा और असंतोष का हवाला देते हुए टी वेलमुरुगन की तमिलागा वाझ्वुरिमई काची (टीवीके) के गठबंधन से बाहर होने के बाद सबसे प्रमुख टूटन हुई। इस बीच, वामपंथी दल – विशेष रूप से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) – प्रस्तावित सीट कटौती का विरोध कर रहे हैं, और विदुथलाई चिरुथिगल काची अपने बढ़ते चुनावी आधार का तर्क देते हुए एक बड़े हिस्से पर जोर दे रही है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ बातचीत भी नाजुक है, जो गुट के भीतर व्यापक सत्ता-साझाकरण तनाव को दर्शाती है। 2021 के चुनावों में DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन की स्थिति कैसी रही? 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में, DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 234 में से 159 सीटें जीतीं, पिछली AIADMK सरकार को हटा दिया। द्रमुक ने स्वयं 133 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि प्रमुख सहयोगियों ने भी गठबंधन की संख्या में योगदान दिया। कांग्रेस ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा और 18 सीटें जीतीं, विदुथलाई चिरुथिगल काची ने 4 सीटें जीतीं, और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने 2 सीटें हासिल कीं। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और मनिथानेया मक्कल काची जैसे अन्य छोटे सहयोगियों को गठबंधन रणनीति के हिस्से के रूप में कुछ सीटें आवंटित की गईं। कुल मिलाकर, इस सीट आवंटन ने एसपीए को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और उसके सहयोगियों के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पर एक आरामदायक अंतर हासिल करने में मदद की। सीपीआई और सीपीआई (एम) जैसी छोटी पार्टियों ने शुरू में अधिक सीटें मांगी थीं, हालांकि, 2026 के विपरीत, ये असहमति ज्यादातर बंद दरवाजों के पीछे रही और चुनाव से पहले सार्वजनिक निकास या खुले विवादों का कारण नहीं बनी। इस चुनाव में DMK को सहयोगियों के साथ किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है? टीवीके ने डीएमके गठबंधन छोड़ दिया टी वेलमुरुगन की तमिलागा वाझ्वुरिमई काची (टीवीके) ने गठबंधन के आवंटन वार्ता में एक से अधिक सीट पाने में विफल रहने के बाद डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन से अपना नाम वापस ले लिया है – शुरू में अधिक मांगने के बावजूद। वेलमुरुगन की पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल नहीं होने का फैसला किया और स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ेगी या कहीं और गठबंधन करेगी। वेलमुरुगन ने कहा कि उनकी पार्टी की अधिकांश मांगों को सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार द्वारा संबोधित नहीं किए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया। इस चुनाव में डीएमके गठबंधन के भीतर यह पहला और सबसे अधिक दिखाई देने वाला विभाजन है। मनाप्पराई झगड़ा तिरुचिरापल्ली जिले में मनाप्पराई को अपने मिश्रित ग्रामीण-अर्ध-शहरी मतदाता आधार और प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिताओं के इतिहास के कारण राजनीतिक रूप से रणनीतिक सीट माना जाता है। द्रमुक के नेतृत्व वाले मोर्चे में एक से अधिक सहयोगियों ने यहां दावा पेश किया है। कथित तौर पर कांग्रेस इस सीट को अपने स्थानीय कैडर की ताकत और पिछले वोट शेयर के आधार पर जीतने योग्य मानती है, जबकि मरुमलारची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) भी निर्वाचन क्षेत्र के कुछ हिस्सों में ऐतिहासिक उपस्थिति और जमीनी स्तर के नेटवर्क का तर्क देते हुए इस पर जोर दे रही है। हालाँकि, द्रमुक स्वयं मनाप्पराई को छोड़ने के लिए अनिच्छुक है, इसे एक महत्वपूर्ण गढ़ के रूप में देखते हुए वह इसे अपने प्रतीक के तहत बनाए रखना पसंद करेगी। वाम दलों ने की अधिक सीटों की मांग कम्युनिस्ट पार्टियाँ कम सीटों की पेशकश या सीमित प्रभाव के रूप में जो कुछ भी देखती हैं, उसका विरोध कर रही हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि सीपीआई (एम) कटौती का विरोध कर रही है और द्रमुक की मौजूदा पेशकश से अधिक सीटों की मांग कर रही है – दो अंकों की हिस्सेदारी पर जोर दे रही है। सीपीआई ने इस बार पांच सीटों पर समझौता किया है – 2021 की तुलना में एक कम – और अपनी पसंद के निर्वाचन क्षेत्रों की एक इच्छा सूची प्रस्तुत की है। वीसीके, एक अन्य प्रमुख सहयोगी, काफी बड़ी हिस्सेदारी की मांग कर रही है – दावा कर रही है कि उसकी ताकत बढ़ी है और वह पुडुचेरी सहित दो अंकों की सीटों के लिए दबाव डाल रही है – लेकिन बातचीत अभी तक हल नहीं हुई है। इन साझेदारों की देरी और धक्का-मुक्की गठबंधन के भीतर तनाव दिखाती है, और अंतिम समाधान के बिना बातचीत अभी भी जारी है। पुडुचेरी में डीएमके-कांग्रेस के बीच बातचीत पुडुचेरी के चुनाव में अलग-अलग, डीएमके और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस बात को लेकर गतिरोध में हैं कि प्रत्येक को 30 में से कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहिए – कांग्रेस बड़ी हिस्सेदारी के लिए जोर दे रही है और डीएमके ताकत के आधार पर संतुलित आवंटन पर जोर दे रही है। विपक्ष ने डीएमके पर साधा निशाना अन्नाद्रमुक नेताओं ने द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन, विशेषकर द्रमुक और कांग्रेस के बीच दिखाई देने वाली दरार का मज़ाक उड़ाया है, यह सुझाव देते हुए कि सीट बंटवारे पर असहमति से पता चलता है कि गठबंधन संकट में है। तमिलनाडु में विपक्ष के नेता एडप्पादी के पलानीस्वामी ने कहा कि अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन सुसंगत है और सुचारू रूप से आगे बढ़ रहा है, जबकि

जारा ने चीन में आधी दुकानें बंद की:फास्ट फैशन की जंग में चीनी ब्रांड शीन-टेमू को दी मात, प्रीमियम कस्टमर पर फोकस, रिकॉर्ड 4.3 लाख करोड़ की बिक्री

जारा ने चीन में आधी दुकानें बंद की:फास्ट फैशन की जंग में चीनी ब्रांड शीन-टेमू को दी मात, प्रीमियम कस्टमर पर फोकस, रिकॉर्ड 4.3 लाख करोड़ की बिक्री

फैशन जगत में जब शीन और टेमू जैसे चीनी ब्रांड्स ने ‘अल्ट्रा-चीप’ मॉडल से तहलका मचाया, तो माना गया कि जारा को टिके रहने के लिए कीमतें घटानी होंगी। लेकिन स्पेनिश दिग्गज इंडिटेक्स ने इसके उलट ‘प्रीमियम रणनीति’ अपनाई। ये स्पेनिश क्लॉदिंग ग्रुप है, जिसकी कुल बिक्री का दो-तिहाई हिस्सा जारा से आता है। नतीजा? साल 2025 में कंपनी की सालाना बिक्री 4.3 लाख करोड़ और शुद्ध कमाई रिकॉर्ड 67 हजार करोड़ रुपए पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6% अधिक है। जारा का ऑपरेटिंग प्रॉफिट प्रतिद्वंद्वी एचएंडएम से पांच गुना ज्यादा है। रोथ्सचाइल्ड बैंक के जेफ लोअरी के अनुसार, फास्ट-फैशन को ‘लग्जरी लुक’ के साथ बेचना अब रंग ला रहा है। इंडिटेक्स ने कीमत के बजाय स्टाइल पर फोकस किया। कंपनी ने 50वीं वर्षगांठ पर नामी फोटोग्राफर स्टीवन मेसेल और टॉप मॉडल्स के साथ ‘लग्जरी कैंपेन’ चलाया, जिसने ब्रांड की छवि बदल दी। मेसेल लग्जरी ब्रांड्स के साथ काम करने के लिए जाने जाते हैं। इस शूट के हेयर स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट भी उसी आला दर्जे के थे। इन विज्ञापनों में बीते 30 वर्षों की हर टॉप-पेड मॉडल को डोना समर के गाने ‘आई फील लव’ पर थिरकते हुए दिखाया गया। यह ग्लैमर इंडिटेक्स के लिए एक सफल रणनीति का प्रतीक है। आज इंस्टाग्राम पर जारा के विज्ञापन किसी महंगे लग्जरी हाउस जैसे दिखते हैं। ग्रुप के फाउंडर अमानसियो ओर्टेगा ने जारा को एक फुर्तीले लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर खड़ा किया है, जो हर हफ्ते नया स्टॉक पेश करता है। इससे डेड-स्टॉक का जोखिम कम होता है और ब्रांड को ऊंची कीमतें रखने की ताकत मिलती है। बर्नस्टीन के विलियम वुड्स कहते हैं कि जारा उन 30-40 साल के खरीदारों को टार्गेट करता है जो एचएंडएम के ग्राहकों से अधिक समृद्ध हैं। शीन और टेमू जैसे चीनी ‘इवन-फास्टर-फैशन’ रिटेलर्स की प्रतिस्पर्धा ने एचएंडएम समेत कई प्रतिद्वंद्वियों को कीमतें घटाने पर मजबूर किया। फुर्तीला बिजनेस मॉडल, हर हफ्ते नए आइटम उतार रहे इंडिटेक्स के प्रमुख ऑस्कर गार्सिया मसेइरास इस सफलता का श्रेय कंपनी के आधे दशक पुराने बिजनेस मॉडल को देते हैं। संस्थापक अमानसियो ओर्टेगा ने इस व्यवसाय को एक फुर्तीले लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के इर्द-गिर्द भुना है, जो ग्राहकों की पसंद के आधार पर माल को तुरंत बदलने की अनुमति देता है। जारा और उसके सहयोगी ब्रांड हर हफ्ते, और कभी-कभी हफ्ते में दो बार नए आइटम पेश करने का लक्ष्य रखते हैं। इससे यह जोखिम कम हो जाता है कि ब्रांड ऐसे कपड़े बनाए जिन्हें कोई नहीं चाहता और फिर उन्हें भारी छूट पर बेचना पड़े। यह जारा को ऊंची कीमतें निर्धारित करने की छूट भी देता है, क्योंकि इसके कपड़े लोकप्रिय शैलियों को तुरंत अपना लेते हैं। 2021 में मार्टा ओर्टेगा के प्रेसिडेंट बनने के बाद जारा और अधिक ‘प्रीमियम’ हुआ है। ब्रांड ने हाल ही में जॉन गैलियानो और स्टेफानो पिलाती जैसे दिग्गज डिजाइनरों के साथ साझेदारी की है। सुपर बाउल में गायक ‘बैड बनी’ की स्टाइलिंग भी इसी रणनीति का हिस्सा है। पर्सनल शॉपर्स, लग्जरी बुटीक के आइडिया से बड़ा बदलाव लाई इंडिटेक्स प्रमुख ऑस्कर गार्सिया मसेइरास कहते हैं, ‘ग्राहक अब कपड़ों की खरीद से परे कुछ और (अनुभव) तलाश रहे हैं।’ जारा ने चीन में अपनी लोकेशन आधी कर दी है, लेकिन बाकी बची दुकानों को बड़ा और आलीशान बनाया। इसका असर यह हुआ कि डॉयचे बैंक के अनुसार, 2022-25 के बीच प्रति वर्ग मीटर बिक्री 46% बढ़ी है। ब्रांड अब ‘फास्ट फैशन’ की छवि छोड़ ‘किफायती लक्जरी’ की ओर बढ़ रहा है, जहां ग्राहकों को हाई-एंड बुटीक जैसा अहसास मिलता है। अब स्टोर में हैंडबैग-जूतों के लिए अलग बुटीक एरिया और ग्राहकों की मदद के लिए ‘पर्सनल शॉपर्स’ मौजूद हैं। जारा का यह ‘लग्जरी टच’ अब मुनाफे की नई इबारत लिख रहा है।

रोज घंटों ट्रैफिक में फंसकर पहुंचते हैं ऑफिस, अरे कोई जुगाड़ निकालिए, वरना हार्ट के पेशेंट बन जाएंगे !

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Last Updated:March 23, 2026, 11:42 IST Health Risks of Long Commutes: रोज घर से ऑफिस जाना और वापस आना कॉमन बात लगती है, लेकिन इसका हमारी सेहत पर काफी गहरा असर पड़ता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो रोज 2-3 घंटे तक ट्रैफिक में फंसकर ऑफिस पहुंचना और शाम को घर वापस लौटना सेहत के लिए नुकसानदायक है. इससे हार्ट, ब्रेन और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. रोज घंटों ट्रैफिक में फंसकर ऑफिस जाना और वापस लौटना सेहत के लिए खतरनाक है. Traffic Stress Health Risks: दिल्ली-एनसीआर में लाखों लोग रोज 2-3 घंटों का सफर करके ऑफिस पहुंचते हैं और फिर शाम को ट्रैफिक में फंसकर वापस लौटते हैं. अधिकतर बड़े शहरों में यह लोगों का डेली रुटीन बन गया है. मेट्रो सिटीज में लोगों के लिए दिन की शुरुआत ऑफिस से नहीं, बल्कि ट्रैफिक से होती है. लोग इस सफर को सामान्य मानते हैं, लेकिन इसका सेहत पर बहुत बुरा असर होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो रोज ट्रैफिक में फंसकर 2-3 घंटे का सफर करना हमारे हार्ट, ब्रेन और लंग्स के लिए खतरनाक है. इस ट्रैवलिंग को शरीर कभी भी सामान्य नहीं मानता है. यह समय शरीर के लिए एक लगातार चलने वाला तनाव बन जाता है. ट्रैफिक का शोर, प्रदूषित हवा, भीड़भाड़ और लंबे समय तक बैठे रहना सेहत के लिए खतरनाक है. बेंगलुरु के मनिपाल हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. केशव आर ने TOI को बताया कि ट्रैफिक जाम में फंसे रहना, हर पल सतर्क रहना, लगातार हॉर्न और शोर सुनना और हवा की खराब क्वालिटी जैसे फैक्टर्स शरीर को अंदर ही अंदर तनावग्रस्त बनाए रखते हैं. भले ही शरीर स्थिर हो, लेकिन नर्वस सिस्टम लगातार एक्टिव रहता है. यह कंडीशन हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है. हार्ट पर इसका असर सबसे पहले और सबसे तेजी से दिखाई देता है. हल्का तनाव भी हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है. जब ऐसा रोज होने लगता है, तो इसका असर शरीर पर ज्यादा गहराई से होता है. कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कि लंबे समय तक ट्रैफिक में रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, हार्ट रेट लगातार हाई रह सकता है और भविष्य में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. बड़े शहरों में एयर क्वालिटी खराब होती है और इस दौरान पॉल्यूशन के कण ब्लड स्ट्रीम में जाकर शरीर में सूजन पैदा करते हैं. इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव आ जाता है. इस दौरान फेफड़े भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं, क्योंकि प्रदूषण का सीधा असर इन्हीं पर पड़ता है. खासकर दोपहिया वाहन चलाने वाले या बिना एसी वाले वाहनों में सफर करने वाले लोग ज्यादा प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं. इससे धीरे-धीरे फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है, खांसी या सांस फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं और अस्थमा जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. शाम के समय यह स्थिति और खराब हो जाती है, क्योंकि दिनभर के प्रदूषण का स्तर उस समय ज्यादा होता है. रोज की इस भागदौड़ का असर हमारे दिमाग पर भी पड़ता है. हमारा ब्रेन ट्रैफिक को एक खतरे वाली स्थिति के रूप में देखता है, जहां हर समय सतर्क रहना पड़ता है. इससे शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ा रहता है. लंबे समय तक ऐसा होने से मूड, ध्यान और याददाश्त पर असर पड़ता है और नींद की क्वालिटी भी खराब हो सकती है. यही कारण है कि कई लोग ऑफिस पहुंचने से पहले ही मानसिक रूप से थकान महसूस करने लगते हैं. शाम को लौटते वक्त लोग थके हुए होते हैं और ट्रैफिक जाम उन्हें मानसिक रूप से और ज्यादा परेशान कर देता है. डॉक्टर की मानें तो इस समस्या को पूरी तरह टाला नहीं जा सकता, लेकिन कुछ छोटे बदलाव करके इसके असर को कम जरूर किया जा सकता है. अगर आप बाइक, ई-रिक्शा या ऑटो से ऑफिस जाते हैं, तो कोशिश करें कि मेट्रो से सफर किया जाए. अगर संभव हो, तो एसी वाहन का इस्तेमाल करें और पीक ट्रैफिक से बचने के लिए घर से थोड़ा पहले निकलें. सफर के दौरान हल्का म्यूजिक सुनें और ट्रैफिक में फंसे समय गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं. इसके अलावा थोड़ी दूरी पैदल चलना भी फायदेमंद हो सकता है. छोटे-छोटे ये बदलाव रोज के छिपे हुए तनाव को कम कर सकते हैं और लंबे समय में आपकी सेहत की रक्षा कर सकते हैं. अगर परेशानी ज्यादा हो, तो डॉक्टर से मिलकर अपनी जांच कराएं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 23, 2026, 11:42 IST

‘मेरी मां ने मुझे यह घर कहा था…’, ममता बनर्जी के लिए क्यों है इतना खास भवानीपुर, जानें क्या है इस सीट का इतिहास

'मेरी मां ने मुझे यह घर कहा था...', ममता बनर्जी के लिए क्यों है इतना खास भवानीपुर, जानें क्या है इस सीट का इतिहास

पश्चिम बंगाल की राजनीति में कुछ ऐसे ही इलेक्ट्रोनिक क्षेत्र हैं, ऐतिहासिक महत्व के भवानीपुर के बारे में बताया गया है। इस सीट का नामांकन यात्रा राज्य में कांग्रेस के प्रभुत्व से लेकर उद्यम के उदय तक के बदलावों को शामिल किया गया है। ममता बनर्जी का राजनीतिक गढ़ माना जाने वाला भवानीपुर से हमेशा के लिए समाजवादी मजबूत गढ़ नहीं था। भवानीपुर को लेकर क्या बोलीं ममतासुप्रीमो और सीएम ममता बनर्जी ने हाल ही में पार्टी की बैठक में नेताओं से वोट बनाए रखने को कहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि हमारे हाथ में कुछ नहीं है. 3 दिन में 50 लोगों को निकाला गया भुगतान। इसके अलावा उन्होंने कई मूर्तिकारों की भूमिका भी निभाई। अपने क्षेत्र टेलीकॉम भवानीपुर के बारे में बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, ”भवानीपुर में हर कोई मुझे बताता है. भवानीपुर विधानसभा सीट का इतिहासपीटीआई का कहना है कि देश की आजादी के बाद दशकों तक दक्षिण कोलकाता की ये सीट कांग्रेस का गढ़ और राज्य की कुछ सबसे प्रभावशाली राजनीतिक समाप्ति का गृह क्षेत्र रही। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में इस सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। मीरा गुट गुप्ता और रथिन तालुकदार जैसे अन्य कांग्रेसी दिग्गजों ने भी इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, जिससे भवानीपुर की प्रतिष्ठा पार्टी के प्रमुख शहरी गढ़ों में एक के रूप में मजबूत हुई। भवानीपुर तक कई प्राचीन कांग्रेस के प्रभाव में जगह बनाई जा रही है। केवल 1969 में ही इस सीट पर कब्ज़ा कर लिया गया था। जब इस सीट का नाम मोती कालीघाट इलेक्ट्रोरेटर क्षेत्र रखा गया। सी क्रूज़ (एम) नेता साधन गुप्ता 1953 में इसी सीट से भारत के पहले दृष्टिबाधित न्यूनतम बने। भवानीपुर की राजनीतिक यात्रा ने 1972 में एक क्रांतिकारी मोड़ लिया, जब परिसीमन के बाद यह इलेक्ट्रोलाइट क्षेत्र रेखाचित्र से गायब हो गया। लगभग 4 दशकों तक यह सीट केवल राजनीतिक स्मृति में ही विद्यमान रही। 2011 के परिसीमन में इसे फिर से जीवित किया गया। उस दौरान बंगाल की राजनीति में नाटकीय उतार-चढ़ाव मची थी। उसी वर्ष वाममोर्चा के 34 वर्ष के शासन का अंत हुआ और ममता बनर्जी युग की शुरुआत हुई। ये भी पढ़ें अमेरिका ईरान युद्ध: भारत में 95 तो पाकिस्तान में कितने रुपए प्रति लीटर बिका पेट्रोल, डीजल कितने का? (टैग्सटूट्रांसलेट)भवानीपुर(टी)ममता बनर्जी(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)ममता बनर्जी(टी)भवानीपुर(टी)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)कोलकाता(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव