Monday, 25 May 2026 | 06:46 AM

Trending :

EXCLUSIVE

रोज घंटों ट्रैफिक में फंसकर पहुंचते हैं ऑफिस, अरे कोई जुगाड़ निकालिए, वरना हार्ट के पेशेंट बन जाएंगे !

authorimg

Last Updated:

Health Risks of Long Commutes: रोज घर से ऑफिस जाना और वापस आना कॉमन बात लगती है, लेकिन इसका हमारी सेहत पर काफी गहरा असर पड़ता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो रोज 2-3 घंटे तक ट्रैफिक में फंसकर ऑफिस पहुंचना और शाम को घर वापस लौटना सेहत के लिए नुकसानदायक है. इससे हार्ट, ब्रेन और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

Zoom

रोज घंटों ट्रैफिक में फंसकर ऑफिस जाना और वापस लौटना सेहत के लिए खतरनाक है.

Traffic Stress Health Risks: दिल्ली-एनसीआर में लाखों लोग रोज 2-3 घंटों का सफर करके ऑफिस पहुंचते हैं और फिर शाम को ट्रैफिक में फंसकर वापस लौटते हैं. अधिकतर बड़े शहरों में यह लोगों का डेली रुटीन बन गया है. मेट्रो सिटीज में लोगों के लिए दिन की शुरुआत ऑफिस से नहीं, बल्कि ट्रैफिक से होती है. लोग इस सफर को सामान्य मानते हैं, लेकिन इसका सेहत पर बहुत बुरा असर होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो रोज ट्रैफिक में फंसकर 2-3 घंटे का सफर करना हमारे हार्ट, ब्रेन और लंग्स के लिए खतरनाक है. इस ट्रैवलिंग को शरीर कभी भी सामान्य नहीं मानता है. यह समय शरीर के लिए एक लगातार चलने वाला तनाव बन जाता है. ट्रैफिक का शोर, प्रदूषित हवा, भीड़भाड़ और लंबे समय तक बैठे रहना सेहत के लिए खतरनाक है.

बेंगलुरु के मनिपाल हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. केशव आर ने TOI को बताया कि ट्रैफिक जाम में फंसे रहना, हर पल सतर्क रहना, लगातार हॉर्न और शोर सुनना और हवा की खराब क्वालिटी जैसे फैक्टर्स शरीर को अंदर ही अंदर तनावग्रस्त बनाए रखते हैं. भले ही शरीर स्थिर हो, लेकिन नर्वस सिस्टम लगातार एक्टिव रहता है. यह कंडीशन हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है. हार्ट पर इसका असर सबसे पहले और सबसे तेजी से दिखाई देता है. हल्का तनाव भी हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है. जब ऐसा रोज होने लगता है, तो इसका असर शरीर पर ज्यादा गहराई से होता है.

कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कि लंबे समय तक ट्रैफिक में रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, हार्ट रेट लगातार हाई रह सकता है और भविष्य में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. बड़े शहरों में एयर क्वालिटी खराब होती है और इस दौरान पॉल्यूशन के कण ब्लड स्ट्रीम में जाकर शरीर में सूजन पैदा करते हैं. इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव आ जाता है. इस दौरान फेफड़े भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं, क्योंकि प्रदूषण का सीधा असर इन्हीं पर पड़ता है. खासकर दोपहिया वाहन चलाने वाले या बिना एसी वाले वाहनों में सफर करने वाले लोग ज्यादा प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं. इससे धीरे-धीरे फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है, खांसी या सांस फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं और अस्थमा जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. शाम के समय यह स्थिति और खराब हो जाती है, क्योंकि दिनभर के प्रदूषण का स्तर उस समय ज्यादा होता है.

रोज की इस भागदौड़ का असर हमारे दिमाग पर भी पड़ता है. हमारा ब्रेन ट्रैफिक को एक खतरे वाली स्थिति के रूप में देखता है, जहां हर समय सतर्क रहना पड़ता है. इससे शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ा रहता है. लंबे समय तक ऐसा होने से मूड, ध्यान और याददाश्त पर असर पड़ता है और नींद की क्वालिटी भी खराब हो सकती है. यही कारण है कि कई लोग ऑफिस पहुंचने से पहले ही मानसिक रूप से थकान महसूस करने लगते हैं. शाम को लौटते वक्त लोग थके हुए होते हैं और ट्रैफिक जाम उन्हें मानसिक रूप से और ज्यादा परेशान कर देता है.

डॉक्टर की मानें तो इस समस्या को पूरी तरह टाला नहीं जा सकता, लेकिन कुछ छोटे बदलाव करके इसके असर को कम जरूर किया जा सकता है. अगर आप बाइक, ई-रिक्शा या ऑटो से ऑफिस जाते हैं, तो कोशिश करें कि मेट्रो से सफर किया जाए. अगर संभव हो, तो एसी वाहन का इस्तेमाल करें और पीक ट्रैफिक से बचने के लिए घर से थोड़ा पहले निकलें. सफर के दौरान हल्का म्यूजिक सुनें और ट्रैफिक में फंसे समय गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं. इसके अलावा थोड़ी दूरी पैदल चलना भी फायदेमंद हो सकता है. छोटे-छोटे ये बदलाव रोज के छिपे हुए तनाव को कम कर सकते हैं और लंबे समय में आपकी सेहत की रक्षा कर सकते हैं. अगर परेशानी ज्यादा हो, तो डॉक्टर से मिलकर अपनी जांच कराएं.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
8 साल की बच्ची का हत्यारोपी किराएदार एनकाउंटर में ढेर:आगरा में मकान मालिक से बदला लेने के लिए वारदात की, लाश कनस्तर में ठूंसी थी

March 28, 2026/
4:58 am

आगरा में कारोबारी मकान मालिक की 8 साल की बच्ची की हत्या का आरोपी किराएदार शनिवार तड़के 3 बजे एनकाउंटर...

रामनगर में 15-16 मई को आदि उत्सव:तैयारियों की सांसद ने की समीक्षा; राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति को भेजा आंमत्रण

April 23, 2026/
8:16 am

मंडला जिले के रामनगर में 15 और 16 मई को दो दिवसीय ‘आदि उत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। इस वार्षिक...

गुजरात दौरे पर जाएंगे राहुल गांधी:वडोदरा में आदिवासी अधिकार संवाद कार्यक्रम में शामिल होकर सरकार की नीतियों पर करेंगे चर्चा

March 23, 2026/
6:00 am

राहुल गांधी सोमवार को वडोदरा में ‘आदिवासी अधिकार संवाद’ कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस सम्मेलन में आदिवासी क्षेत्रों से संबंधित...

Pakistan Army Vs BLA; PAK Soldier Hostage Video Update

February 20, 2026/
12:36 pm

इस्लामाबाद7 घंटे पहले कॉपी लिंक कैमरे पर रोते हुए असलियत बताते पाकिस्तानी सैनिक। यह वीडियो हक्काल मीडिया ने जारी किया...

IPL 2026 Playoff Scenarios Update; RCB SRH PBKS

May 6, 2026/
5:16 am

46 मिनट पहले कॉपी लिंक चेन्नई सुपर किंग्स ने IPL में मंगलवार को मंगलवार को दिल्ली कैपिटल्स को 8 विकेट...

राजनीति

रोज घंटों ट्रैफिक में फंसकर पहुंचते हैं ऑफिस, अरे कोई जुगाड़ निकालिए, वरना हार्ट के पेशेंट बन जाएंगे !

authorimg

Last Updated:

Health Risks of Long Commutes: रोज घर से ऑफिस जाना और वापस आना कॉमन बात लगती है, लेकिन इसका हमारी सेहत पर काफी गहरा असर पड़ता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो रोज 2-3 घंटे तक ट्रैफिक में फंसकर ऑफिस पहुंचना और शाम को घर वापस लौटना सेहत के लिए नुकसानदायक है. इससे हार्ट, ब्रेन और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

Zoom

रोज घंटों ट्रैफिक में फंसकर ऑफिस जाना और वापस लौटना सेहत के लिए खतरनाक है.

Traffic Stress Health Risks: दिल्ली-एनसीआर में लाखों लोग रोज 2-3 घंटों का सफर करके ऑफिस पहुंचते हैं और फिर शाम को ट्रैफिक में फंसकर वापस लौटते हैं. अधिकतर बड़े शहरों में यह लोगों का डेली रुटीन बन गया है. मेट्रो सिटीज में लोगों के लिए दिन की शुरुआत ऑफिस से नहीं, बल्कि ट्रैफिक से होती है. लोग इस सफर को सामान्य मानते हैं, लेकिन इसका सेहत पर बहुत बुरा असर होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो रोज ट्रैफिक में फंसकर 2-3 घंटे का सफर करना हमारे हार्ट, ब्रेन और लंग्स के लिए खतरनाक है. इस ट्रैवलिंग को शरीर कभी भी सामान्य नहीं मानता है. यह समय शरीर के लिए एक लगातार चलने वाला तनाव बन जाता है. ट्रैफिक का शोर, प्रदूषित हवा, भीड़भाड़ और लंबे समय तक बैठे रहना सेहत के लिए खतरनाक है.

बेंगलुरु के मनिपाल हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. केशव आर ने TOI को बताया कि ट्रैफिक जाम में फंसे रहना, हर पल सतर्क रहना, लगातार हॉर्न और शोर सुनना और हवा की खराब क्वालिटी जैसे फैक्टर्स शरीर को अंदर ही अंदर तनावग्रस्त बनाए रखते हैं. भले ही शरीर स्थिर हो, लेकिन नर्वस सिस्टम लगातार एक्टिव रहता है. यह कंडीशन हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकती है. हार्ट पर इसका असर सबसे पहले और सबसे तेजी से दिखाई देता है. हल्का तनाव भी हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर को बढ़ा सकता है. जब ऐसा रोज होने लगता है, तो इसका असर शरीर पर ज्यादा गहराई से होता है.

कार्डियोलॉजिस्ट ने बताया कि लंबे समय तक ट्रैफिक में रहने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, हार्ट रेट लगातार हाई रह सकता है और भविष्य में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. बड़े शहरों में एयर क्वालिटी खराब होती है और इस दौरान पॉल्यूशन के कण ब्लड स्ट्रीम में जाकर शरीर में सूजन पैदा करते हैं. इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव आ जाता है. इस दौरान फेफड़े भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं, क्योंकि प्रदूषण का सीधा असर इन्हीं पर पड़ता है. खासकर दोपहिया वाहन चलाने वाले या बिना एसी वाले वाहनों में सफर करने वाले लोग ज्यादा प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं. इससे धीरे-धीरे फेफड़ों की कार्यक्षमता कम हो सकती है, खांसी या सांस फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं और अस्थमा जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है. शाम के समय यह स्थिति और खराब हो जाती है, क्योंकि दिनभर के प्रदूषण का स्तर उस समय ज्यादा होता है.

रोज की इस भागदौड़ का असर हमारे दिमाग पर भी पड़ता है. हमारा ब्रेन ट्रैफिक को एक खतरे वाली स्थिति के रूप में देखता है, जहां हर समय सतर्क रहना पड़ता है. इससे शरीर में तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर बढ़ा रहता है. लंबे समय तक ऐसा होने से मूड, ध्यान और याददाश्त पर असर पड़ता है और नींद की क्वालिटी भी खराब हो सकती है. यही कारण है कि कई लोग ऑफिस पहुंचने से पहले ही मानसिक रूप से थकान महसूस करने लगते हैं. शाम को लौटते वक्त लोग थके हुए होते हैं और ट्रैफिक जाम उन्हें मानसिक रूप से और ज्यादा परेशान कर देता है.

डॉक्टर की मानें तो इस समस्या को पूरी तरह टाला नहीं जा सकता, लेकिन कुछ छोटे बदलाव करके इसके असर को कम जरूर किया जा सकता है. अगर आप बाइक, ई-रिक्शा या ऑटो से ऑफिस जाते हैं, तो कोशिश करें कि मेट्रो से सफर किया जाए. अगर संभव हो, तो एसी वाहन का इस्तेमाल करें और पीक ट्रैफिक से बचने के लिए घर से थोड़ा पहले निकलें. सफर के दौरान हल्का म्यूजिक सुनें और ट्रैफिक में फंसे समय गहरी सांस लेने की तकनीक अपनाएं. इसके अलावा थोड़ी दूरी पैदल चलना भी फायदेमंद हो सकता है. छोटे-छोटे ये बदलाव रोज के छिपे हुए तनाव को कम कर सकते हैं और लंबे समय में आपकी सेहत की रक्षा कर सकते हैं. अगर परेशानी ज्यादा हो, तो डॉक्टर से मिलकर अपनी जांच कराएं.

About the Author

authorimg

अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

जॉब - शिक्षा

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.