Wednesday, 14 Oct 2026 | 12:53 PM

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असम में कांग्रेस ने जारी की 5वीं सूची, सातवीं सूची का खुलासा किया

असम में कांग्रेस ने जारी की 5वीं सूची, सातवीं सूची का खुलासा किया

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने 5वीं लिस्ट जारी की है। इस सूची में सात द्वीप के कारखाने का विमोचन किया गया है। कांग्रेस पार्टी ने असम विधानसभा चुनाव के लिए जिन 7 सीटों पर अपने उम्मीदवार बनाए हैं, उनमें गोसाईंगांव विधानसभा सीट से जोसेफ हासदा, दोतमा की एसटी आरक्षित सीट से बिरखांग बोरा, बिजनी से रजत कांति साहा, भेरगांव से आंचुला गुआरा दैमारी, मजबत से नारायण अधिकारी, हाफलॉन्ग की एसटी रिजर्व सीट से निर्मल लंगथासा और कटिगोरा विधानसभा सीट से अमर चंद जैन कोयर को उम्मीदवार बनाया गया है। घटक कांग्रेस के घटकों की चार सूची होल जारी पार्टी कांग्रेस इससे पहले असम विधानसभा चुनाव के लिए जंगल के जंगलों की चार लिस्ट पहले जारी कर चुकी है। इसके बाद पार्टी ने आज रविवार (22 मार्च, 2026) को 7 असेंबली रिजॉर्ट्स की घोषणा की। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर कहा कि कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति ने असम में अगले महीने 9 अप्रैल, 2026 को होने वाले चुनाव के लिए 7 समर्थकों को चिन्हित किया है। कांग्रेस के सीईसी ने असम विधान सभा के आगामी चुनावों के लिए निम्नलिखित व्यक्तियों को कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुना है 👇 pic.twitter.com/lBHoGujobe – कांग्रेस (@INCIndia) 22 मार्च 2026 वामपंथियों को कांग्रेस ने दी उपाधि कांग्रेस ने राज्य में अपनी पार्टी के लिए विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिए असम में अपने सहयोगी वामपंथी समर्थकों के साथ नामांकन करने की भी घोषणा की है। कांग्रेस ने दो दिन पहले शुक्रवार (20 मार्च, 2026) को अपनी चौथी सूची जारी की थी। लिस्ट में पार्टी ने अपने 7 जंगलों के जंगलों की घोषणा की। इसके साथ कांग्रेस ने लेफ्ट को लीज वाली 11 के बारे में जानकारी सार्वजनिक की। कांग्रेस ने असम के मानस, दलगांव, धींग, कालियाबोर, तेजपुर, सिसिबारगांव, मार्गेरिटा, दिगबोई, सिबसागर, मारियानी और बोकाखाट विधानसभा सीटों पर वामपंथी दल को चुनावी मैदान में उतारा है। जबकि असम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और अल्पसंख्यक गौरव गोगोई खुद राज्य के जोरहाट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले हैं। यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को बताया गद्दार तो भड़के शुभेंदु अधिकारी, कहा- ‘वह खुद सांप्रदायिकता’ (टैग्सटूट्रांसलेट)असम(टी)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)असम(टी)असम चुनाव 2026(टी)कांग्रेस(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026

Health Tips : आप भी एक झटके में गटक जाते हैं पानी की बोतल? खराब हो जाएगी किडनी, ये वाला काम भी घातक

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Last Updated:March 22, 2026, 20:29 IST Kidney disease : देश में किडनी मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. अक्सर भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल और काम की धुन में हम अपनी सेहत को पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते. आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवा और घंटों पढ़ाई में जुटे छात्रों में ये आदत ज्यादा देखी जाती है. वे एक ऐसी आदत के शिकार हो रहे हैं, जो धीरे-धीरे उनके शरीर के मुख्य अंगों को खोखला कर रही है. लोकल 18 ने पीलीभीत के आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडे से इन छिपे हुए खतरों के बारे में पूछा. पीलीभीत. आजकल की भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल में हम अक्सर काम की धुन में अपनी सेहत को पीछे छोड़ देते हैं. खासकर आईटी सेक्टर में काम करने वाले युवा और घंटों पढ़ाई में जुटे छात्र एक ऐसी आदत के शिकार हो रहे हैं, जो धीरे-धीरे उनके शरीर के मुख्य अंगों को खोखला कर रही है. पीलीभीत के वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. आदित्य पांडे ने लोकल 18 से उन छिपे हुए खतरों के प्रति आगाह किया है, जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी में नजरअंदाज कर देते हैं. रोकना घातक डॉ. पांडे बताते हैं कि लगातार 12 से 16 घंटे तक एक ही जगह बैठकर काम करना केवल थकान का कारण नहीं है, बल्कि यह शरीर के भीतर एक गंभीर संकट खड़ा कर रहा है. अक्सर काम के दबाव में युवा अपने शरीर के नेचुरल वेग, जैसे पेशाब को लंबे समय तक रोक लेते हैं. आयुर्वेद में इसे अधारणीय वेग कहा गया है. इस वेग को रोकने से शरीर के अंदर इंफेक्शन बढ़ने लगता है, जो सीधा आपकी किडनी (गुर्दों) पर हमला करता है. लंबे समय में यह आदत किडनी फेलियर जैसी नौबत भी ला सकती है. खतरा सिर्फ किडनी तक ही सीमित नहीं है. घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहने से शरीर के निचले हिस्सों की नसों पर भारी दबाव पड़ता है. सभी करते हैं ये गलती डॉ. पांडे का कहना है कि इसी कारण आजकल के युवाओं में बवासीर (पाइल्स) और फिशर जैसी बीमारियां बहुत तेजी से फैल रही हैं. शरीर को जरूरी मूवमेंट न मिलने और गलत तरीके से बैठने के कारण पाचन तंत्र और आंतों की कार्यक्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है. डॉ. पांडे ने पानी पीने की एक ऐसी आम गलती के बारे में भी बताया है, जो लगभग हर दूसरा व्यक्ति करता है. लोग घंटों काम में डूबे रहते हैं और पानी पीना भूल जाते हैं, फिर अचानक याद आने पर एक साथ पूरी बोतल खाली कर देते हैं. अचानक लोड खतरनाक डॉ. पांडे के मुताबिक, यह तरीका किडनी के लिए बहुत खतरनाक है. जैसे किसी थके हुए आदमी पर अचानक भारी बोझ डाल दिया जाए तो वह ढह जाता है, वैसे ही प्यासी किडनी पर अचानक पानी का भारी लोड पड़ने से उसके ‘नेफ्रॉन्स’ डैमेज होने लगते हैं. डॉ. पांडे की सलाह है कि इस डिजिटल युग में अपनी सेहत को दांव पर न लगाएं. काम के बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेना और शरीर के संकेतों को समझना बहुत जरूरी है. पानी को एक साथ पीने के बजाय घूंट-घूंट करके और थोड़े-थोड़े अंतराल पर पिएं. अगर समय रहते इन छोटी आदतों को नहीं सुधारा गया, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Pilibhit,Uttar Pradesh First Published : March 22, 2026, 20:29 IST

MP में LPG संकट…12 दिन से होटल-रेस्टोरेंट को गैस नहीं:छुट्‌टी वाले दिन अपर प्रमुख सचिव ने सुनी संचालकों की बात; कल कोई ठोस निर्णय लेने की उम्मीद

MP में LPG संकट...12 दिन से होटल-रेस्टोरेंट को गैस नहीं:छुट्‌टी वाले दिन अपर प्रमुख सचिव ने सुनी संचालकों की बात; कल कोई ठोस निर्णय लेने की उम्मीद

मध्य प्रदेश में LPG संकट बरकरार है। होटल और रेस्टोरेंट को लगातार 12 दिन से कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई नहीं हुई है। इसे लेकर रविवार को नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया मध्य प्रदेश चैप्टर और फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर प्रमुख सचिव रश्मि शमी से मुलाकात की। प्रमुख सचिव शमी ने छुट्‌टी वाले दिन संचालकों से बात और ऑयल कंपनियों के साथ बैठक भी की। बता दें कि ऑयल कंपनियों की नई गाइडलाइन में 10% कमर्शियल सिलेंडर देने की बात कही गई है, लेकिन सप्लाई के आदेश नहीं आए हैं। इस कारण प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट पर संकट के बादल छाए हुए हैं। वे बंद होने की कगार पर है। भोपाल होटल एवं रेस्तरां संघ के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने बताया कि कमर्शियल गैस आपूर्ति पर सख्त पाबंदी के कारण होटल व्यवसाय ठप होने की कगार पर है। जिसके समाधान पर चर्चा की। गैस की निर्बाध आपूर्ति बहाल करने की मांग की और ज्ञापन सौंपा गया है। NRAI प्रतिनिधि अभिषेक बाहेती ने बताया कि कमर्शियल गैस नहीं मिलने की बात से मुश्किलें बढ़ गई हैं। गैस के अभाव में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों पर बड़ा संकट खड़ा हुआ है। इसे दूर करने की मांग की गई है। भोपाल के 2 हजार होटल में परेशानी एसोसिएशन के अध्यक्ष पाली ने बताया कि भोपाल के होटल, रेस्तरा, ढाबों, खान-पान सेवा आदि रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर के अभाव में संचालन व्यवस्था में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि भोपाल के पंजीकृत होटलों और रेस्तरांओं को उनकी वास्तविक परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों का एक सीमित कोटा आवंटित किया जाए। प्रत्येक प्रतिष्ठान को आवश्यक रसोई संचालन बनाए रखने और खाद्य सेवाओं में व्यवधान से बचने के लिए वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर प्रदाय किए जाए। भोपाल में 2 हजार होटल और रेस्टोरेंट है। जहां हालात गंभीर हो गए हैं। केंद्र सरकार के आदेश पर भी नहीं हो रहा अमल मध्य प्रदेश होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने बताया कि प्रदेश भर के होटल संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्र के आपूर्ति के आदेश के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं। जिससे स्थानीय स्तर पर वितरण व्यवस्था ठप पड़ी है। सूरी ने कहा कि हमने सरकार के सामने अपनी मांगे रखी हैं और हमें उम्मीद है कि जल्द से जल्द हमें मदद मिलेगी। होटल और रेस्टोरेंट एसोसिशन से लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा हुआ है। सभी के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सभी होटलों के लिए एक जैसे नियम सही नहीं अध्यक्ष सूरी के अनुसार, संगठन की प्रमुख मांग है कि वर्तमान 20 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए ताकि व्यवसायों का संचालन सुचारू रूप से हो सके। इसके अलावा उन्होंने एक नया प्रस्ताव भी रखा है कि सभी संस्थानों के लिए आपूर्ति का एक समान नियम नहीं होना चाहिए। होटलों की श्रेणी और उनकी मांग के आधार पर गैस का कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए। बड़े संस्थानों को उनकी खपत के अनुसार अधिक और छोटे संस्थानों को उनके अनुपात में गैस उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही पीएनजी सप्लाई को भी मांग के अनुरूप बढ़ाने की मांग रखी गई है। ये पदाधिकारी रहे मौजूद एनआरएआई के प्रतिनिधि बाहेती ने बताया कि प्रमुख सचिव ने होटल और रेस्टोरेंट को गैस उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया है। सोमवार तक कोई उचित निर्णय लेने का आश्वासन भी दिया है। प्रतिनिधिमंडल में सचिन अग्रवाल, दीपेश मोटवानी, श्रीकांत सिंह, अमित बाहेती, गर्वित अग्रवाल, सागर गैरे, विष्णु शर्मा, कुश मनोहर, सपन अरोड़ा, दिनेश डावर, जस्तेज पाली आदि भी मौजूद थे।

डॉक्टर सिर्फ बात करेंगे, पर्चा लिखेगा AI! तीन दोस्तों का कमाल, हेल्थकेयर सेक्टर में मचेगा तहलका – News18 हिंदी

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X डॉक्टर सिर्फ बात करेंगे, पर्चा लिखेगा AI! हेल्थकेयर सेक्टर में मचेगा तहलका   Ashwin AI App: भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में एक बड़ा डिजिटल बदलाव आने वाला है. आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर और उनके दो दोस्तों ने मिलकर Ashwin AI विकसित किया है. जो डॉक्टरों और मरीजों के बीच होने वाली बातचीत को रीयल-टाइम में सटीक डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड में तब्दील कर देता है. इस स्वदेशी AI टूल की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान AIIMS दिल्ली में इसे लागू करने की तैयारी है. एनआईसी (NIC) के साथ मिलकर टीम इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है. AI समिट 2026 में इस तकनीक को जबरदस्त सराहना मिली है. प्रभु राजगोपाल, अनिरुद्ध वर्ना और विजयराजा द्वारा बनाया गया यह प्लेटफॉर्म कई भारतीय भाषाओं को समझने में सक्षम है. अब डॉक्टरों को लंबे पर्चे लिखने या कंप्यूटर पर डेटा एंट्री करने की जरूरत नहीं होगी. सारा रिकॉर्ड सुरक्षित क्लाउड पर रहेगा. जिसे मरीज कहीं भी और कभी भी किसी भी डॉक्टर को अपनी मेडिकल हिस्ट्री के तौर पर दिखा सकेंगे. इससे डॉक्टर कागजी कार्रवाई के बजाय मरीज के इलाज पर अधिक ध्यान दे पाएंगे. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

किचन में रखी इस चीज में भरे करोड़ों बैक्टीरिया, आप रोज करते हैं इस्तेमाल, 90% लोगों को कुछ पता ही नहीं !

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Last Updated:March 22, 2026, 19:57 IST Kitchen Sponges Danger: रसोई में इस्तेमाल होने वाला स्पंज आपको बीमार कर सकता है, क्योंकि इसमें लाखों बैक्टीरिया हो सकते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार स्पंज में मौजूद नमी और खाने के कण इसे कीटाणुओं के पनपने के लिए एक अनुकूल जगह बनाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. स्पंज को नियमित रूप से डिसइन्फेक्ट करना बेहद जरूरी होता है. किचन के स्पंज में लाखों की संख्या में बैक्टीरिया इकट्ठा हो सकते हैं. Is Your Sponge Making You Sick: किचन और बर्तनों की साफ-सफाई में स्पंज सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. यह छोटा सा स्पंज बड़े काम की चीज है. अधिकतर लोग बर्तन या किचन साफ करने के लिए स्पंज को धोकर रख देते हैं और कई महीनों तक इसे इस्तेमाल करते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यही छोटा सा स्पंज हमारे स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा भी बन सकता है. हाल ही में न्यूट्रिशन कोच रयान फर्नांडो ने सोशल मीडिया पर किचन स्पंज को साइलेंट किलर करार दिया है. उनका दावा है कि बर्तनों को चमकाने वाला यह उपकरण असल में लाखों खतरनाक बैक्टीरिया का ठिकाना हो सकता है, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. इससे हमारी सेहत के लिए गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं. रयान फर्नांडो के अनुसार किचन स्पंज की बनावट ऐसी होती है कि वह तरल पदार्थों और सूक्ष्म कणों को आसानी से सोख लेता है. जब हम कच्चा चिकन या कच्ची सब्जियों के संपर्क में आए बर्तनों को साफ करते हैं, तो उन पर मौजूद पैथोजन्स स्पंज के छिद्रों में फंस जाते हैं. अगर इसे ठीक से डिसइन्फेक्ट न किया जाए, तो वही स्पंज अगले बर्तन को साफ करने के बजाय उसे और भी ज्यादा संक्रमित कर देता है, जिससे किचन की अन्य सतहों पर भी बीमारियां फैलने का डर रहता है. ISIC मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विनीता सिंह टंडन ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि स्पंज में बैक्टीरिया का पनपना एक गंभीर समस्या है. स्पंज अधिकांश समय गीला रहता है और इसमें भोजन के छोटे-छोटे कण फंसे रह जाते हैं, इसलिए यह कीटाणुओं के विकास के लिए एक आदर्श वातावरण प्रदान करता है. नमी और रसोई की गर्माहट मिलकर बैक्टीरिया की संख्या को कुछ ही घंटों में लाखों तक पहुंचा सकती है, जो फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याओं का कारण बनते हैं. ऐसे में लोगों को स्पंज को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉ. टंडन का कहना है कि समस्या केवल स्पंज का गंदा होना नहीं है, बल्कि हमारी आदतें भी हैं. हम दिन भर में कई बार स्पंज का उपयोग तो करते हैं, लेकिन उसे उतनी बार गहराई से साफ नहीं करते. लंबे समय तक एक ही पुराने स्पंज का इस्तेमाल करना उसे गंदगी फैलाने का एक जरिया बना देता है. उचित रख-रखाव के अभाव में यह बर्तनों के माध्यम से हमारे हाथों और आखिरकार हमारे खाने तक पहुंचकर इंफेक्शन का चक्र पूरा करता है. किचन को सुरक्षित रखने के लिए केवल बर्तनों को धोना काफी नहीं है, बल्कि सफाई के उपकरणों को भी साफ रखना अनिवार्य है. एक्सपर्ट्स की सलाह है कि स्पंज को इस्तेमाल के बाद गर्म पानी या एंटीबैक्टीरियल सॉल्यूशन से धोएं और उसे पूरी तरह सूखने दें. इसके अलावा हर एक से दो सप्ताह में पुराना स्पंज बदलकर नया इस्तेमाल करना स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे बेहतर है. सफाई का यह छोटा सा बदलाव आपके परिवार को कई गंभीर संक्रमणों से सुरक्षित रख सकता है. अगर आप भी महीनों से एक ही स्पंज इस्तेमाल कर रहे हैं, तो जल्द से जल्द उसे फेंककर नया स्पंज लें और उसकी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 22, 2026, 19:57 IST

सत्तू बनाम छाछ बनाम निम्बू पानी: सत्तू, छाछ या फिर नींबू पानी…चिलचिलाती गर्मी में कौन सा सा पीना सबसे अच्छा है?

सत्तू बनाम छाछ बनाम निम्बू पानी: सत्तू, छाछ या फिर नींबू पानी...चिलचिलाती गर्मी में कौन सा सा पीना सबसे अच्छा है?

सत्तू बनाम छाछ बनाम निम्बू पानी: मार्च का महीना अब ख़त्म होने वाला है। ऐसे में शरीर को डॉक्टरी सलाह देना अत्यंत आवश्यक है। जब प्यास गले को लगती है, तो अक्सर हमारा हैंड कोल्ड ड्रिंक्स की ओर जाना जाता है, लेकिन क्या आप सत्तू, छाछ और पानी के बाजार में मिल रहे कोल्ड ड्रिंक और सोडा से ज्यादा खराब हैं। आइए आपको इस लेख में विस्तार से बताते हैं कि गर्मी में सत्तू, छाछ या फिर नींबू का पानी क्या है? सत्तू सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि एक पूरा भोजन है। उत्तर भारत, खासकर बिहार और यूपी में इसे बड़े ही शौक से खाया-पिया जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और हरा होता है। यह पेट लंबे समय तक बना रहता है। जो लोग धूप में बाहर काम करते हैं या जिनमें तुरंत एनर्जी की जरूरत होती है। यह रामबाण में लू से बच गया है। अगर आपको गैस या ब्लोटिंग की समस्या है तो सत्तू का सेवन सीमित मात्रा में करें। दो के खाने के बाद एक टैंकर छाछ अमृत के समान है। यह न केवल शरीर को ठंडा करता है, बल्कि पाचन तंत्र को भी मापता है। लैक्टिक एसिड और प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो पेट की जलन को शांत करते हैं। यह कैल्शियम और विटामिन का भी अच्छा स्रोत है। जिसमें एसिडिटी, अपच या भारी भोजन के बाद बुरा महसूस होता है। उनके लिए यह सबसे बड़ा कमाल है। साथ ही वजन के लिए भी प्रभावशाली है। गर्म में थर्मल पानी पीने के फायदे नींबू पानी सबसे आसान ड्रिंक है। इसमें विटामिन सी से भरपूर पेय पदार्थ आपकी को मिनटों में पिलाया जा सकता है। यह शरीर के इलेक्ट्रोलाइट्स को बनाए रखता है। अगर आप इसमें काला नमक और इसके अलावा जीरा मिलाते हैं, तो यह और भी गुणकारी हो जाता है। यह शरीर को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है।

40 की उम्र में महिलाओं का कोलेस्ट्रॉल लेवल क्यों होने लगता है गड़बड़? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताई वजह

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Last Updated:March 22, 2026, 19:05 IST Menopause and Heart Health: महिलाओं में अक्सर 40 की उम्र के बाद कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या हो जाती है. इसकी वजह हमेशा खराब खान-पान नहीं होती, बल्कि हार्मोनल बदलाव होता है. महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन की कमी होने से कई तरह की समस्याएं पैदा होने लगती हैं. यह हार्मोन हार्ट की सुरक्षा करता है और इसके घटने से रिस्क बढ़ जाता है. एस्ट्रोजन हार्मोन में गिरावट के कारण 40 की उम्र के बाद महिलाओं की हार्ट हेल्थ बिगड़ने लगती है. Cholesterol Spike in Women: महिलाओं की जिंदगी में 40 की उम्र के बाद कई बायोलॉजिकल बदलाव होते हैं. इस समय को पेरिमेनोपॉज कहा जाता है और कुछ साल बाद मेनोपॉज की कंडीशन आ जाती है. मेनोपॉड के बाद महिलाओं की सेहत पूरी तरह बदल जाती है. आमतौर पर इसे केवल रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन असल में इस दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं. मेनोपॉज के बाद मेटाबॉलिज्म, ब्रेन और हार्ट हेल्थ बुरी तरह प्रभावित होती है. यही कारण है कि कई महिलाओं में बिना किसी स्पष्ट वजह के कोलेस्ट्रॉल स्तर में बदलाव देखने को मिलता है. HT की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और फंक्शनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. संजय भोजराज ने एक हालिया पॉडकास्ट में बताया कि 40 की उम्र के आसपास महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का अचानक बढ़ना अक्सर केवल खान-पान या लाइफस्टाइल की वजह से नहीं होता. कई बार इसके पीछे हार्मोनल बदलाव और विशेष रूप से एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट होती है. यह एक ऐसा पहलू है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. अक्सर देखा जाता है कि जिन महिलाओं का बैड कोलेस्ट्रॉल पहले सामान्य रहता था, उनमें अचानक हल्की बढ़ोतरी हो जाती है. ऐसे में अक्सर इसे लाइफस्टाइल से जोड़ देते हैं और मान लेते हैं कि खान-पान या दिनचर्या में बदलाव हुआ होगा. हालांकि हकीकत हार्मोन्स से जुड़ी होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. दरअसल पेरिमेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है. यह हार्मोन लंबे समय तक महिलाओं के हार्ट और धमनियों की रक्षा करता है. जैसे-जैसे इसका स्तर घटता है, यह प्राकृतिक सुरक्षा भी कम होने लगती है. इससे हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. यह प्रक्रिया बिना किसी बाहरी संकेत के भी हो सकती है, इसलिए इसे समझना जरूरी है. जब एस्ट्रोजन का सुरक्षात्मक कवर कम होता है, तो हार्ट और ब्लड वेसल्स ज्यादा जोखिम में आ जाती हैं. यही कारण है कि इस उम्र में कोलेस्ट्रॉल और कार्डियोवैस्कुलर रिस्क बढ़ सकता है, भले ही आपकी जीवनशैली पहले जैसी ही क्यों न हो. ऐसे में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में सामने आती है. डॉ. भोजराज का मानना है कि मेनोपॉज को केवल हॉट फ्लैश या बाल झड़ने जैसे लक्षणों तक सीमित नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे हार्ट हेल्थ के संदर्भ में भी देखना जरूरी है. सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेकर HRT पर विचार करना महिलाओं के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह न केवल हार्मोनल संतुलन को सुधारने में मदद करता है, बल्कि दिल की सुरक्षा में भी भूमिका निभा सकता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 22, 2026, 19:05 IST

नाबालिग से दुष्कर्म करने वाला ममेरा भाई वृंदावन में गिरफ्तार:शिवपुरी से बहला-फुसलाकर यूपी ले गया था आरोपी; 5 दिन बाद मिली लड़की

नाबालिग से दुष्कर्म करने वाला ममेरा भाई वृंदावन में गिरफ्तार:शिवपुरी से बहला-फुसलाकर यूपी ले गया था आरोपी; 5 दिन बाद मिली लड़की

शिवपुरी जिले के करैरा थाना क्षेत्र से लापता हुई एक 15 वर्षीय नाबालिग को वृंदावन से बरामद कर लिया गया है। नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप में उसके 26 वर्षीय ममेरे भाई को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने 21 मार्च को यह कार्रवाई की। करैरा थाना प्रभारी विनोद छावई ने बताया कि पीड़िता के परिजनों ने 17 मार्च को पुलिस को सूचना दी थी कि उनकी नाबालिग बेटी 16 मार्च से लापता है। इसके बाद पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर नाबालिग की तलाश शुरू कर दी थी। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि नाबालिग का ममेरा भाई भी उसी दिन से लापता था। सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन की जांच के बाद पुलिस को उनकी वृंदावन में होने की जानकारी मिली। तत्काल एक पुलिस टीम वृंदावन रवाना की गई। वृंदावन पहुंचने पर पुलिस ने नाबालिग को बरामद कर आरोपी ममेरे भाई को गिरफ्तार कर लिया। नाबालिग ने अपने बयानों में बताया कि उसे बहला-फुसलाकर वृंदावन लाया गया और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में बढ़ोतरी की है।

केरल में बीजेपी ने जारी की चौथी लिस्ट, सिर्फ एक जिओबोल का ऐलान, जानिए कौन है वो?

केरल में बीजेपी ने जारी की चौथी लिस्ट, सिर्फ एक जिओबोल का ऐलान, जानिए कौन है वो?

केरल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने चौथी सूची जारी की है। इसमें एक अभ्यर्थी का नाम जारी किया गया है। भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने आगामी केरल विधानसभा चुनाव के लिए एडवोकेट एस. स्मिता को असुविधा बनी है. घरेलू वर्कशॉप सीट से वेबसाइट ने टिकट दिए हैं। कौन हैं एस. स्मिता? वकील एस स्मिता केरल में कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) में रह चुके हैं। हाल ही में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था. अब बीजेपी ने आगामी केरल विधानसभा चुनाव में एडवोकेट एस.एस. स्मिता ने अप्रैल में वर्कशॉप सीट से अपना कैंडिडेट बनाया है, जो 2026 में होने वाले हैं। तीसरी सूची में 11 केश का विनाश इससे पहले 21 मार्च को बीजेपी ने केरल विधानसभा चुनाव के लिए 11 क्यूबिक की अपनी तीसरी लिस्ट जारी की थी। पार्टी ने तिरुवंतपुरम से कर्मना जैन को उम्मीदवार बनाया है। पुथुपल्ली से रवींद्रनाथ वकथानम को, चवारा से के आर राजेश को, चदायमंगलम से आरएस अरुण राज को और पीरुमाडे सीट से वी रतीश चुनाव मैदान में उतरेंगे। विवेक गोपन को अरुविक्करा सीट, टी एन सुरेश को कोवलम और एसशेखरन नायर को नैयट्टिनकारा सीट से राज उम्मीदवार बनाया गया है। पार्टी ने मावेलिकरा सीट से अजिमोन, चिरयिनकीझू से बी एस एस अनूप और अदूर सीट से अनंतम प्रतापन को प्रतियोगी बनाया है। केरल में कब होगा विधानसभा चुनाव? केरल में 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में वोटिंग होगी, जबकि 140 विधानसभा वाले राज्य में किस दल की सरकार होगी, इसका फैसला वहां के कुल 2.71 करोड़ होंगे। चुनाव 20 फरवरी को तैयार और जारी किया जाएगा, अंतिम मतदाता सूची के आधार पर, जिसमें विशेष गहन संशोधन के बाद तैयारी की गई है। चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक आश्रमों ने नामांकन तेज कर दिया है। अत्यंत कठिन प्रतियोगिता होने की संभावना है।

हर वक्त थकान से हो जाता है बुरा हाल? शरीर में बिगड़ गया हार्मोन्स का बैलेंस, ये संकेत न करें नजरअंदाज

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Hormones Disrupt Energy and Sleep: जब आप रात में अच्छी तरह नहीं सो पाते हैं, तब अगले दिन थकान महसूस होती है. यह एक कॉमन बात है और पर्याप्त नींद लेने के बाद समस्या दूर हो जाती है. कई बार लोग रात में 7-8 घंटे की पूरी नींद और अच्छी डाइट लेने के बावजूद दिनभर थकान की शिकायत करते हैं. कई बार एनर्जी लेवल स्तर इतना कम रहता है कि छोटे-छोटे काम भी मुश्किल लगने लगते हैं. यह कंडीशन अक्सर आलस या अनुशासन की कमी नहीं होती, बल्कि शरीर के भीतर चल रहे किसी बायोलॉजिकल असंतुलन का संकेत हो सकती है. खासतौर पर हार्मोनल असंतुलन लगातार थकान का बड़ा कारण है. नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल के एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. सप्तर्षि भट्टाचार्य ने TOI की रिपोर्ट में बताया हमारे शरीर में कोर्टिसोल, थायराइड, इंसुलिन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन एनर्जी बैलेंस को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. ये हार्मोन संदेशवाहकों की तरह काम करते हैं और दिनभर शरीर की एनर्जी जरूरतों को कंट्रोल करते हैं. शरीर में जब इनका संतुलन बिगड़ जाता है, तो शरीर का एनर्जी सिस्टम अनस्टेबल हो जाता है. इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति पूरी नींद लेने के बाद भी थका हुआ महसूस करता है और दिन के दौरान एनर्जी अचानक गिरने लगती है. हार्मोनल असंतुलन का एक कॉमन लक्षण वायर्ड बट टायर्ड की स्थिति है. इसमें दिमाग सक्रिय रहता है, लेकिन शरीर पूरी तरह थका हुआ महसूस करता है. यह समस्या मुख्य रूप से कोर्टिसोल हार्मोन के असंतुलन से जुड़ी होती है. कोर्टिसोल सुबह अधिक और रात में कम होना चाहिए, लेकिन जब इसका चक्र बिगड़ जाता है, तो शरीर लगातार तनाव की स्थिति में बना रहता है. इससे रात में नींद प्रभावित होती है और सुबह उठने पर भी शरीर तरोताजा महसूस नहीं करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. यह थकान केवल शारीरिक नहीं होती, बल्कि मानसिक स्तर पर भी असर डालती है. इससे ब्रेन फॉग की कंडीशन पैदा हो जाती है. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है, सोचने की गति धीमी हो जाती है और सामान्य कार्यों में भी भ्रम महसूस होता है. इसमें थायराइड हार्मोन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. जब थायराइड का स्तर असंतुलित होता है, तो ब्रेन फंक्शन प्रभावित होता है. इसे लोग अक्सर सामान्य थकान या ध्यान की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. इंसुलिन हार्मोन के असंतुलन से भूख और खाने की आदतों में भी बदलाव आता है. अचानक मीठा या जंक फूड खाने की तीव्र इच्छा होना, फिर ऊर्जा का तेजी से बढ़ना और गिरना, इस असंतुलन के संकेत हो सकते हैं. इसके अलावा बिना वजह के वजन बढ़ना या प्रयास के बावजूद वजन कम न होना भी हार्मोनल गड़बड़ी का संकेत है. ऐसी स्थिति में शरीर एनर्जी को खर्च करने के बजाय उसे फैट के रूप में जमा करने लगता है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है. हार्मोनल बदलावों का असर हमारे मूड और भावनाओं पर भी पड़ता है. कोर्टिसोल और एस्ट्रोजन के इंबैलेंस से चिड़चिड़ापन, चिंता और प्रेरणा की कमी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं. ऐसी थकान को केवल आराम या अधिक मेहनत से ठीक नहीं किया जा सकता. जरूरी है कि हम अपने शरीर के संकेतों को समझें और उन्हें नजरअंदाज न करें. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो किसी डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है, ताकि सही कारण का पता लगाकर ट्रीटमेंट किया जा सके.