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40 की उम्र में महिलाओं का कोलेस्ट्रॉल लेवल क्यों होने लगता है गड़बड़? कार्डियोलॉजिस्ट ने बताई वजह

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Menopause and Heart Health: महिलाओं में अक्सर 40 की उम्र के बाद कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या हो जाती है. इसकी वजह हमेशा खराब खान-पान नहीं होती, बल्कि हार्मोनल बदलाव होता है. महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन की कमी होने से कई तरह की समस्याएं पैदा होने लगती हैं. यह हार्मोन हार्ट की सुरक्षा करता है और इसके घटने से रिस्क बढ़ जाता है.

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एस्ट्रोजन हार्मोन में गिरावट के कारण 40 की उम्र के बाद महिलाओं की हार्ट हेल्थ बिगड़ने लगती है.

Cholesterol Spike in Women: महिलाओं की जिंदगी में 40 की उम्र के बाद कई बायोलॉजिकल बदलाव होते हैं. इस समय को पेरिमेनोपॉज कहा जाता है और कुछ साल बाद मेनोपॉज की कंडीशन आ जाती है. मेनोपॉड के बाद महिलाओं की सेहत पूरी तरह बदल जाती है. आमतौर पर इसे केवल रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन असल में इस दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं. मेनोपॉज के बाद मेटाबॉलिज्म, ब्रेन और हार्ट हेल्थ बुरी तरह प्रभावित होती है. यही कारण है कि कई महिलाओं में बिना किसी स्पष्ट वजह के कोलेस्ट्रॉल स्तर में बदलाव देखने को मिलता है.

HT की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और फंक्शनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. संजय भोजराज ने एक हालिया पॉडकास्ट में बताया कि 40 की उम्र के आसपास महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का अचानक बढ़ना अक्सर केवल खान-पान या लाइफस्टाइल की वजह से नहीं होता. कई बार इसके पीछे हार्मोनल बदलाव और विशेष रूप से एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट होती है. यह एक ऐसा पहलू है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. अक्सर देखा जाता है कि जिन महिलाओं का बैड कोलेस्ट्रॉल पहले सामान्य रहता था, उनमें अचानक हल्की बढ़ोतरी हो जाती है. ऐसे में अक्सर इसे लाइफस्टाइल से जोड़ देते हैं और मान लेते हैं कि खान-पान या दिनचर्या में बदलाव हुआ होगा. हालांकि हकीकत हार्मोन्स से जुड़ी होती है.
सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

दरअसल पेरिमेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है. यह हार्मोन लंबे समय तक महिलाओं के हार्ट और धमनियों की रक्षा करता है. जैसे-जैसे इसका स्तर घटता है, यह प्राकृतिक सुरक्षा भी कम होने लगती है. इससे हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. यह प्रक्रिया बिना किसी बाहरी संकेत के भी हो सकती है, इसलिए इसे समझना जरूरी है. जब एस्ट्रोजन का सुरक्षात्मक कवर कम होता है, तो हार्ट और ब्लड वेसल्स ज्यादा जोखिम में आ जाती हैं. यही कारण है कि इस उम्र में कोलेस्ट्रॉल और कार्डियोवैस्कुलर रिस्क बढ़ सकता है, भले ही आपकी जीवनशैली पहले जैसी ही क्यों न हो.

ऐसे में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में सामने आती है. डॉ. भोजराज का मानना है कि मेनोपॉज को केवल हॉट फ्लैश या बाल झड़ने जैसे लक्षणों तक सीमित नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे हार्ट हेल्थ के संदर्भ में भी देखना जरूरी है. सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेकर HRT पर विचार करना महिलाओं के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह न केवल हार्मोनल संतुलन को सुधारने में मदद करता है, बल्कि दिल की सुरक्षा में भी भूमिका निभा सकता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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एस्ट्रोजन हार्मोन में गिरावट के कारण 40 की उम्र के बाद महिलाओं की हार्ट हेल्थ बिगड़ने लगती है.

Cholesterol Spike in Women: महिलाओं की जिंदगी में 40 की उम्र के बाद कई बायोलॉजिकल बदलाव होते हैं. इस समय को पेरिमेनोपॉज कहा जाता है और कुछ साल बाद मेनोपॉज की कंडीशन आ जाती है. मेनोपॉड के बाद महिलाओं की सेहत पूरी तरह बदल जाती है. आमतौर पर इसे केवल रिप्रोडक्टिव हेल्थ से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन असल में इस दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं. मेनोपॉज के बाद मेटाबॉलिज्म, ब्रेन और हार्ट हेल्थ बुरी तरह प्रभावित होती है. यही कारण है कि कई महिलाओं में बिना किसी स्पष्ट वजह के कोलेस्ट्रॉल स्तर में बदलाव देखने को मिलता है.

HT की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और फंक्शनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. संजय भोजराज ने एक हालिया पॉडकास्ट में बताया कि 40 की उम्र के आसपास महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का अचानक बढ़ना अक्सर केवल खान-पान या लाइफस्टाइल की वजह से नहीं होता. कई बार इसके पीछे हार्मोनल बदलाव और विशेष रूप से एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट होती है. यह एक ऐसा पहलू है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. अक्सर देखा जाता है कि जिन महिलाओं का बैड कोलेस्ट्रॉल पहले सामान्य रहता था, उनमें अचानक हल्की बढ़ोतरी हो जाती है. ऐसे में अक्सर इसे लाइफस्टाइल से जोड़ देते हैं और मान लेते हैं कि खान-पान या दिनचर्या में बदलाव हुआ होगा. हालांकि हकीकत हार्मोन्स से जुड़ी होती है.
सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

दरअसल पेरिमेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है. यह हार्मोन लंबे समय तक महिलाओं के हार्ट और धमनियों की रक्षा करता है. जैसे-जैसे इसका स्तर घटता है, यह प्राकृतिक सुरक्षा भी कम होने लगती है. इससे हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है. यह प्रक्रिया बिना किसी बाहरी संकेत के भी हो सकती है, इसलिए इसे समझना जरूरी है. जब एस्ट्रोजन का सुरक्षात्मक कवर कम होता है, तो हार्ट और ब्लड वेसल्स ज्यादा जोखिम में आ जाती हैं. यही कारण है कि इस उम्र में कोलेस्ट्रॉल और कार्डियोवैस्कुलर रिस्क बढ़ सकता है, भले ही आपकी जीवनशैली पहले जैसी ही क्यों न हो.

ऐसे में हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में सामने आती है. डॉ. भोजराज का मानना है कि मेनोपॉज को केवल हॉट फ्लैश या बाल झड़ने जैसे लक्षणों तक सीमित नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे हार्ट हेल्थ के संदर्भ में भी देखना जरूरी है. सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेकर HRT पर विचार करना महिलाओं के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि यह न केवल हार्मोनल संतुलन को सुधारने में मदद करता है, बल्कि दिल की सुरक्षा में भी भूमिका निभा सकता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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