शाजापुर में पत्नी ने की पति की हत्या:पेवर ब्लॉक से हमला, पेट में चाकू मारा; आरोपी महिला गिरफ्तार

शाजापुर जिले के मक्सी थाना इलाके में पत्नी को ही कत्ल के इल्जाम में गिरफ्तार किया गया है। 19 मार्च को खबर मिली थी कि मक्सी के झोंकर रोड पर रहने वाले राकेश कुंभकार की इंदौर के एमवाय अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। शुरुआती जांच में पता चला कि राकेश के शरीर पर गंभीर चोटें थीं, जिसके बाद मक्सी थाने में कातिल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की गई। शराब और झगड़ा बनी वजह थाना प्रभारी संजय वर्मा की टीम ने जब मामले की पड़ताल की, तो पता चला कि राकेश और उसकी पत्नी आरती के बीच अक्सर झगड़े होते थे। दोनों महावीर ब्रिक्स कंपनी के एक कमरे में रहते थे, जहां राकेश शराब पीकर आरती के साथ मारपीट और विवाद करता था। सोते हुए पति पर हमला वारदात 18 मार्च की रात की है। गुस्से में आकर आरती ने सोते हुए राकेश के सिर पर सीमेंट के पेवर ब्लॉक से हमला कर दिया और उसके पेट में चाकू मार दिया। पुलिस की पूछताछ में आरती ने अपना जुर्म मान लिया है। पुलिस ने कत्ल में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिए हैं।
बड़वानी के मंडवाड़ा में तखत कार्यक्रम:युवाओं ने महिलाओं के वेश में किया डांस; गणगौर पर्व पर 50 गांवों के ग्रामीण पहुंचे

निमाड़ अंचल के प्रसिद्ध गणगौर पर्व के अवसर पर शनिवार को बड़वानी जिले के मंडवाड़ा में पारंपरिक ‘तखत’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस परंपरा को देखने के लिए आसपास के लगभग 50 गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए। सुबह से दोपहर तक चले इस कार्यक्रम में लोक संस्कृति और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिला। ट्रैक्टर-ट्रॉली बने चलते-फिरते स्टेज, युवाओं का अनूठा नृत्य तखत कार्यक्रम की मुख्य विशेषता युवाओं द्वारा महिलाओं के वेश में दी जाने वाली नृत्य प्रस्तुतियां रहीं। तकियापुर, मोहीपुरा, पानिया और मुंडियापुरा सहित विभिन्न गांवों से आई टीमों ने चलते हुए ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बनाए गए ‘तखत’ (स्टेज) पर आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। क्षेत्रीय निमाड़ी गीतों और फिल्मी गानों पर युवाओं ने महिलाओं का स्वांग रचकर मनमोहक नृत्य किया, जिसे देखने के लिए दर्शकों में भारी उत्साह रहा। निमाड़ की प्राचीन परंपरा और गणगौर का उल्लास मंडवाड़ा में हर साल गणगौर पर्व के दौरान यह आयोजन किया जाता है, जिसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हैं। इस दौरान पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्सव के माहौल में डूबा रहा। श्रद्धालुओं ने माता रणुबाई की अगवानी की और मन्नतें पूरी होने पर विशेष पूजन-अर्चन किया। गणगौर घाटों पर हाेगा प्रतिमाओं का विसर्जन गणगौर पर्व के तहत श्रद्धालु माता रणुबाई की प्रतिमाओं को अपने घर ले जाते हैं, जहां रात भर भजन-कीर्तन और पारंपरिक अनुष्ठान किए जाते हैं। मन्नत पूरी होने पर भक्त माता को घर पर रोकते हैं और उत्सव मनाते हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व का समापन आगामी दिनों में गणगौर घाटों पर प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा।
‘इनकार किया लेकिन हारा नहीं’: क्या केरल में कांग्रेस की ‘महिला समस्या’ की कीमत चुकानी पड़ेगी? | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 21, 2026, 18:09 IST कांग्रेस द्वारा राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद और केरल में अन्य संभावित महिला उम्मीदवारों को ‘टिकट देने से इनकार’ करने पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। शमा का सार्वजनिक आरोप भाजपा को कांग्रेस की महिला समर्थक छवि को चुनौती देने के लिए सही हथियार प्रदान करता है। फ़ाइल चित्र/पीटीआई केरल कांग्रेस के पास चबाने के लिए बहुत कुछ है, और “विचार के लिए भोजन” पूर्व दंत चिकित्सक और राष्ट्रीय प्रवक्ता, डॉ शमा मोहम्मद द्वारा परोसा गया है। कन्नूर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद शमा ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर खुद को घोषित किया कि उन्हें टिकट नहीं मिला, लेकिन वे हारी नहीं हैं। हालाँकि, उनकी अवज्ञा एक तीखी चुभन के साथ आई: एक सार्वजनिक सवाल कि पार्टी में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बेहद कम क्यों है। मातृवंशीय विरोधाभास केरल एक अनोखा राजनीतिक विरोधाभास प्रस्तुत करता है। यह गहरी मातृसत्तात्मक जड़ों वाला समाज है, जहां 2011 की जनगणना के अनुसार, महिलाएं आबादी का 52% हिस्सा हैं। इसके बावजूद, पार्टी लाइनों से परे राजनीतिक प्रतिनिधित्व हठपूर्वक 10% से नीचे बना हुआ है। इस बार दांव अलग होने की उम्मीद थी। महिला अधिकारों की स्वघोषित चैंपियन प्रियंका गांधी वाड्रा अब राज्य से सांसद हैं, ऐसे में कई लोगों को उम्मीद थी कि इस शक्तिशाली वोट बैंक में महिला उम्मीदवारों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। हालांकि विरोधी भले ही शमा को “हाई-प्रोफ़ाइल” राज्य नेता का लेबल न दें, लेकिन उनकी मुखर असहमति का न केवल केरल में, बल्कि अन्य चुनावी राज्यों में भी महत्वपूर्ण असर हो सकता है। ग्राउंडवर्क बनाम पार्टी पदानुक्रम शमा की निराशा कन्नूर में एक साल से अधिक समय से चल रहे निरंतर जमीनी काम से उपजी है। एक सरकारी स्कूल का उनका हालिया नवीनीकरण एक स्पष्ट संकेत था कि वह निर्वाचन क्षेत्र का पोषण कर रही थीं। उनका तिरस्कार कांग्रेस के भीतर बार-बार एक सवाल उठाता है: क्या जमीन पर उतरना वास्तव में मायने रखता है? लंबे समय से यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि केपीसीसी अध्यक्ष के सुधाकरन यह सीट लेंगे. हालाँकि, पार्टी कथित तौर पर मुख्य रूप से मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र में एक अवसर को “बर्बाद” करने से झिझक रही थी। यहीं पर शमा की उम्मीदें टिकी थीं। उन्हें दरकिनार करके, पार्टी नेतृत्व उन लोगों के प्रति उदासीन दिखने का जोखिम उठा रहा है जो स्थानीय जैविक समर्थन का निर्माण करते हैं, इसके बजाय स्थापित आंतरिक शिविरों का पक्ष लेते हैं जिन्हें राहुल गांधी वर्तमान में एकजुट करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ‘आक्रामक’ महिलाओं के बाहर निकलने का एक पैटर्न? शमा का आरोप उन महिलाओं की शिकायतों की बढ़ती सूची की प्रतिध्वनि है, जिन्होंने महसूस किया है कि सबसे पुरानी पार्टी ने उन्हें दरकिनार कर दिया है। कुछ महीने पहले ही मुमताज पटेल ने टिप्पणी की थी कि कांग्रेस आक्रामक महिला आवाजों से “असहज” बनी हुई है। यह भावना समर्थन की कमी का हवाला देकर शिवसेना में शामिल होने वाली प्रियंका चतुर्वेदी और छत्तीसगढ़ में खुद को निशाना बनाए जाने के दौरान चुप रहने का आरोप लगाने के बाद भाजपा में शामिल होने वाली राधिका खेड़ा के प्रस्थान को दर्शाती है। ये हाई-प्रोफाइल प्रस्थान मुखर, महत्वाकांक्षी महिला नेताओं को प्रबंधित करने के लिए कांग्रेस के भीतर एक प्रणालीगत संघर्ष का सुझाव देते हैं। बीजेपी की रणनीतिक शुरुआत इस अंदरूनी खींचतान का समय कांग्रेस के लिए इससे बुरा नहीं हो सकता. केंद्र कथित तौर पर इसके कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए मौजूदा संसद सत्र में महिला आरक्षण विधेयक का एक संशोधित संस्करण पेश करने की योजना बना रहा है। भाजपा उन राज्यों में इसका लाभ उठाने की इच्छुक है जहां महिला वोट निर्णायक हैं, जैसे असम, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु। शमा का सार्वजनिक आरोप भाजपा को कांग्रेस की महिला समर्थक छवि को चुनौती देने के लिए सही हथियार प्रदान करता है। इसके अलावा, भाजपा पहले से ही असम में प्रियंका गांधी वाड्रा की उपस्थिति को एक सामरिक “भटकाव” के रूप में पेश कर रही है, यह तर्क देते हुए कि उन्हें उस राज्य में होना चाहिए जहां वह एक सांसद के रूप में कार्य करती हैं। वे इसे पार्टी के पुरुष नेतृत्व-खासकर राहुल गांधी-के बाद महिलाओं की भूमिका निभाने का एक और उदाहरण मान रहे हैं। कमरे में बुझाने वाला यंत्र? पिछले विधानसभा चुनावों में एलडीएफ महिला मतदाताओं के समर्थन के दम पर सत्ता बरकरार रखने में कामयाब रही थी। हालांकि कांग्रेस को इस बार वापसी की उम्मीद है, लेकिन “शमा फैक्टर” से गति धीमी होने का खतरा है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अगर पार्टी अपने आंतरिक मतभेदों को दूर नहीं कर सकती है और अपनी महिला आवाजों को दरकिनार करने की संभावनाओं को संबोधित नहीं कर सकती है, तो डॉ. शमा मोहम्मद की असहमति ही वह चिंगारी हो सकती है जो दक्षिण में कांग्रेस की संभावनाओं को खत्म कर देगी। पहले प्रकाशित: मार्च 21, 2026, 18:09 IST समाचार चुनाव ‘इनकार किया लेकिन हारा नहीं’: क्या केरल में कांग्रेस की ‘महिला समस्या’ की कीमत चुकानी पड़ेगी? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
सिर्फ फल ही नहीं, इस पेड़ की पत्तियों में भी छिपे हैं औषधीय गुण! कई गंभीर बीमारियों में कारगर

Last Updated:March 21, 2026, 17:58 IST Health News: आयुर्वेद में एक फल की पत्तियों को काफी फायदेमंद माना गया है. इसका नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. अमरूद में बहुत सारे विटामिन पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर को कई बीमारियों से बचाते हैं. बाराबंकी: अमरूद एक स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है, जिसे बच्चे से लेकर बड़े तक सभी पसंद करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अमरूद सिर्फ फल ही नहीं, बल्कि इसके पत्ते और छाल भी औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. आयुर्वेद में अमरूद को सेहत का खजाना माना गया है. इसका नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. अमरूद में बहुत सारे विटामिन पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर को कई बीमारियों से बचाते हैं. इसके पत्तों का उपयोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, अमरूद के फल, पत्ते, छाल हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने गए हैं. ये हमें ब्लड शुगर, डाइजेशन, पाचन, कब्ज, मोटापा, एनीमिया और स्किन संबंधित कई बीमारियों से छुटकारा दिलाते हैं. कब्ज और गैस से छुटकाराआयुर्वेदिक चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा एमडी मेडिसिन ने बताया कि अमरूद का फल और पेड़ हमारे देश में सब जगह पाया जाता है. इसमे बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं. जिन लोगों को पाचन की समस्या रहती है या कब्ज व गैस बनती है, उन्हें अमरूद के फल का सेवन करना चाहिए. इससे काफी फायदा होता है. साथ ही जिनका पेट खराब रहता है, अधिक दर्द होता है या डायरिया की समस्या है, उन लोगों को भी इसके फल का इस्तेमाल करना चाहिए. सुबह-शाम चार पत्तियां चबाने के फायदेवहीं अगर किसी को ब्लड शुगर है, डाइजेशन की समस्या है, उन लोगों को अमरूद का इस्तेमाल करना चाहिए. वहीं जिन लोगों का वजन बढ़ रहा है या स्किन समस्या, एनीमिया की कमी हो रही है, वहां पर इसकी पत्तियों को पीसकर इस्तेमाल करना चाहिए. ये बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. वहीं जिन्हें शुगर की समस्या है, उन्हें सुबह-शाम चार पत्तियां चबा-चबाकर खानी चाहिए. इससे बहुत ही फायदा होता है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. Location : Bara Banki,Uttar Pradesh First Published : March 21, 2026, 17:58 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
Marma Therapy : क्या होती है मर्म थेरेपी? तेजी से बना रही लोगों में पैठ, रावण संहिता में इसका जिक्र

Last Updated:March 21, 2026, 17:53 IST Marma Therapy Benefits : प्राकृतिक चिकित्सा में मर्म थेरेपी का अलग ही स्थान है. अगर सही तरीके से और विशेषज्ञ की देखरेख में मर्म थेरपी कराई जाए, तो यह शरीर के लिए वरदान से कम नहीं. मर्म थेरेपी शरीर के उन संवेदनशील बिंदुओं पर आधारित है, जहां प्राण ऊर्जा का संचार होता है. मर्म थेरेपी का जिक्र रावण संहिता तक में है. लोकल 18 से जौनपुर की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कुसुम पांडेय बताती हैं कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं. जौनपुर. आयुर्वेद की प्राचीन पद्धतियों में मर्म थेरेपी का विशेष स्थान रहा है और अब जौनपुर में भी यह तेजी से लोकप्रिय हो रही है. जौनपुर की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कुसुम पांडेय बताती हैं कि मर्म थेरेपी न सिर्फ पुरानी चिकित्सा पद्धति है, बल्कि इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों, विशेषकर रावण संहिता में भी मिलता है. यह थेरेपी शरीर के विशेष बिंदुओं (मर्म स्थानों) पर काम करके कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने में सहायक है. डॉ. कुसुम पांडेय ने बताया कि मर्म थेरेपी शरीर के उन संवेदनशील बिंदुओं पर आधारित होती है, जहां प्राण ऊर्जा का संचार होता है. इन बिंदुओं पर हल्का दबाव, स्पर्श या विशेष तकनीक के माध्यम से उपचार किया जाता है, जिससे शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है और रोगों से राहत मिलती है. यह थेरेपी बिना किसी दवा के भी प्रभावी है. सुरक्षित विकल्प डॉ. कुसुम पांडेय के मुताबिक, आजकल लोग तनाव, थकान, सिरदर्द, कमर दर्द और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे में मर्म थेरपी एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आई है. यह शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को बढ़ाती है और लंबे समय तक लाभ देती है. खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते. डॉ. पांडेय बताती हैं कि मर्म थेरेपी का उल्लेख रावण संहिता में मिलने से इसकी प्राचीनता और महत्त्व का अंदाजा लगाया जा सकता है. प्राचीन काल में भी इसका उपयोग योद्धाओं के उपचार और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता था. यह पद्धति आज भी उतनी ही प्रभावी है जितनी पहले थी. जौनपुर में अब धीरे-धीरे लोग आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की ओर आकर्षित हो रहे हैं. मर्म थेरेपी भी इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है. डॉ. कुसुम पांडेय कहती हैं कि लोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए तुरंत दवाइयों का सहारा लेने के बजाय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाना चाहिए. डॉ. कुसुम पांडेय के अनुसार, यदि सही तरीके से और विशेषज्ञ की देखरेख में मर्म थेरेपी कराई जाए, तो यह शरीर को पूरी तरह से संतुलित और स्वस्थ बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है. यही कारण है कि आज के आधुनिक समय में भी यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति फिर से लोगों के बीच अपनी जगह बना रही है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Jaunpur,Uttar Pradesh First Published : March 21, 2026, 17:53 IST
किडनी की पथरी गला देगी, फेफड़ों को साफ करेगी, दिल से लेकर पाइल्स तक में काम आती है ये औषधि! घर पर उगेगी

Last Updated:March 21, 2026, 17:36 IST Health Tips: कई लोग घरों में पत्थरचट्टा का पौधा लगाते हैं, जो खूबसूरत होने के साथ औषधीय गुणों से भरपूर है. आयुर्वेद में इसे जादुई दवा माना गया है. इसकी पत्तियों का रस किडनी स्टोन, जोड़ों के दर्द और मूत्र रोगों में फायदेमंद है. रोज सुबह खाली पेट पत्तियों का सेवन लाभकारी माना जाता है. Health Tips: विंध्य क्षेत्र में प्रकृति ने ऐसे अनेक औषधीय पौधे दिए हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के कई बीमारियों के इलाज में कारगर माने जाते हैं. इन्हीं में से एक है पत्थरचट्टा, जिसे आयुर्वेद में चमत्कारी पौधा कहा जाता है. यह पौधा खासतौर पर गुर्दे की पथरी को गलाने में बेहद उपयोगी माना जाता है. वहीं हृदय, त्वचा, मूत्र और पाचन से जुड़ी कई समस्याओं में भी लाभ पहुंचाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये कि इसे घर पर छोटे से गमले में भी आसानी से उगाया जा सकता है, जिससे यह हर घर की घरेलू जड़ी-बूटी बन सकता है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह ने लोकल 18 को बताया कि पत्थरचट्टा वास्तव में एक रामबाण औषधि है. यह पौधा कम देखभाल में भी तेजी से बढ़ता है और लगभग हर क्षेत्र में पाया जाता है. विशेष रूप से मध्य प्रदेश में इसकी अधिकता देखी जाती है. आमतौर पर इसकी ऊंचाई एक से दो फुट तक होती है और इसके मोटे व रसदार पत्तों में औषधीय गुण भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं, जो शरीर की कई आंतरिक समस्याओं को दूर करने में सहायक होते हैं. जानें क्यों कहा गया ब्रह्म औषधि?डॉ. विपिन सिंह के अनुसार, पत्थरचट्टा का सबसे प्रमुख उपयोग गुर्दे की पथरी को गलाने में होता है. इसके नियमित सेवन से मूत्र मार्ग साफ रहता है और पथरी बनने की संभावना कम हो जाती है. यही वजह है कि इसे मूत्र संबंधी विकारों के लिए एक ब्रह्म औषधि माना जाता है. इसके अलावा यह हृदय रोगियों के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूती देता है और रक्त संचार को बेहतर बनाता है. त्वचा, घाव, सूजन में भी कारगरत्वचा संबंधी समस्याओं में भी यह पौधा काफी असरदार माना गया है. यदि किसी को घाव, सूजन या चोट हो जाए तो इसके पत्तों को कुचलकर रस निकालकर प्रभावित जगह पर लगाने से सूजन कम होती है और घाव जल्दी भरता है. साथ ही यह पाइल्स (बवासीर) जैसी समस्याओं में भी राहत देने का काम करता है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसे पत्थरचट्टा और अमरपत्ता जैसे नामों से जाना जाता है. ऐसे करें सेवनडॉ. विपिन सिंह ने बताया कि पत्थरचट्टा का उपयोग कई रूपों में किया जा सकता है. इसके रस का 10 से 15 मिलीलीटर सुबह-शाम सेवन किया जा सकता है. चूर्ण के रूप में 1 से 3 ग्राम दिन में दो बार पानी के साथ लिया जा सकता है, जबकि काढ़े के रूप में 20 से 30 मिलीलीटर सुबह और शाम सेवन करना लाभकारी होता है. वहीं, त्वचा पर उपयोग के लिए इसके रस को सीधे लगाकर पट्टी बांधी जा सकती है. पत्थरचट्टा सिर्फ एक औषधीय पौधा ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक स्वास्थ्य का खजाना है. यदि इसे सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह कई बीमारियों से बचाव और उपचार में मददगार साबित हो सकता है. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : March 21, 2026, 17:36 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
रश्मिका मंदाना‑विजय देवरकोंड़ा ने थाईलैंड में बिताए रोमांटिक पल:हनीमून के लिए बड़े रिसॉर्ट की बजाय प्राइवेट विला में ठहरे, शादी के बाद प्यारी झलक दिखी

साउथ सिनेमा के चर्चित कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंड़ा की शादी के बाद की पहली तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। दोनों ने शादी के बाद थाईलैंड के खूबसूरत कोह समुई में अपना हनीमून एन्जॉय किया। हनीमून के लिए चुना गया प्राइवेट विला रश्मिका और विजय ने बड़े रिसॉर्ट के बजाय एक प्राइवेट विला में ठहरना पसंद किया। इस विला की लोकेशन समुद्र के पास थी और वहां हरियाली, खुली छत और शांत वातावरण था। तस्वीरों में दोनों हाथ में हाथ डाले, मुस्कुराते और रोमांटिक पलों का आनंद लेते नजर आए। शादी का जश्न और फैंस का प्यार यह कपल पहले उदयपुर में अपनी शादी के जश्न में शामिल हुआ था। 26 फरवरी को उन्होंने एक शानदार समारोह में सात फेरे लिए, जिसमें परिवार और करीबी दोस्तों के अलावा इंडस्ट्री के कई बड़े नाम उपस्थित थे। शादी हजारों फैंस और मीडिया के लिए एक यादगार क्षण बनी रही। शादी की तस्वीरों और वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर फैंस ने कपल को “परफेक्ट जोड़ी” बताया। शादी के बाद से ही फैंस दोनों की हनीमून तस्वीरों के लिए उत्साहित थे। सोशल मीडिया पर वायरल रोमांटिक तस्वीरें फैंस ने दोनों की हनीमून तस्वीरों को खूब लाइक और शेयर किया। तस्वीरों में रश्मिका पीली ड्रेस में और विजय साधारण टी‑शर्ट और पैंट में दिखे। फैंस ने लिखा कि यह कपल स्क्रीन के बाहर भी उतना ही प्यारा है जितना उनकी फिल्मों में लगता है। कई यूजर्स ने यह भी कहा कि यह तस्वीरें “शादी के बाद की सबसे प्यारी झलकियाँ” हैं। काम में भी व्यस्त दोनों सितारे हालांकि हनीमून के बाद रश्मिका मंदाना शूटिंग में लौट चुकी हैं। उनकी आने वाली फिल्मों की शूटिंग फिर से शुरू हो गई है। विजय देवरकोंड़ा भी अपने प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। दोनों ने अपनी निजी और पेशेवर जिंदगी को संतुलित तरीके से संभाला है।
मंडला में युवक चकोर नदी में डूबा, मौत:पिता के साथ मछली पकड़ते समय पैर फिसलने से हादसा

मंडला जिले के नैनपुर थाना क्षेत्र में शनिवार सुबह चकोर नदी में मछली पकड़ने गए 24 साल के युवक की डूबने से मौत हो गई। यह घटना शीतला मंदिर के पीछे स्थित नदी क्षेत्र में हुई, जिससे इलाके में शोक है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर 1 का निवासी संदीप नंदा अपने पिता मनोज नंदा के साथ सुबह करीब 4 बजे मछली पकड़ने के लिए चकोर नदी गया था। इसी दौरान अचानक संदीप का पैर फिसल गया और वह संतुलन बिगड़ने के कारण गहरे पानी में चला गया। अंधेरा और पानी गहरा होने की वजह से वह खुद को संभाल नहीं पाया और डूब गया। मौके पर ही तोड़ा दम हादसे के बाद वहां मौजूद लोगों और परिजन ने तुरंत खोजबीन शुरू की। काफी मशक्कत के बाद संदीप को नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। जवान बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मच गया है। पुलिस की कार्रवाई सूचना मिलते ही नैनपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी बलदेव सिंह मुजाल्दा ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
लग्जरी प्रॉपर्टी वाले निवेशकों का पैसा फंसा:अमेरिका-ईरान युद्ध में झुलस रहे दुबई में विला-अपार्टमेंट की मांग घटी; 2-4 करोड़ की छूट, फिर भी नहीं मिल रहे खरीदार

ब्रिटेन के रियलिटी शो स्टार सैम गॉलेंड ने कुछ महीनों पहले दुबई में एक लग्जरी विला खरीदा। विला की कीमत करीब 19 करोड़ रुपए थी, जो रेनोवेशन के बाद और बढ़ गई। सैम ने प्रॉपर्टी बेचने के लिए हाल में इसे बाजार में उतारा, लेकिन इसी दौरान अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो गया। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से हालत यह है कि अब विला के लिए कोई खरीदार नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कम दाम पर भी घर बेचने की कोशिशें की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इस तरह की मुश्किलें सिर्फ सैम तक सीमित नहीं है। युद्ध के बाद से दुबई में लग्जरी प्रॉपर्टी के दाम औसतन 25% तक गिर चुके हैं और प्रॉपर्टी डील्स की संख्या भी पहले के मुकाबले आधी रह गई है। मार्च की शुरुआत में पिछले साल के मुकाबले 31% कम प्रॉपर्टी के सौदे हुए हैं, जबकि फरवरी की तुलना में ये गिरावट 51% की है। मसलन खरीदार कीमतें गिरने से पहले ही बाजार से बाहर हो गए थे। दुबई को अब तक एक टैक्स-फ्री और राजनीतिक रूप से स्थिर इकोनॉमी माना जाता था। लेकिन ईरानी हमलों के चलते उसके यह छवि दरकती दिख रही है। गोल्डमैन सैक्स के एक्सपर्ट्स का मानना है कि शहर का रियल एस्टेट मार्केट काफी हद तक ‘सेंटीमेंट-ड्रिवन’ रहा है। जैसे ही मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें आईं, लोगों में डर बैठ गया और महंगी प्रॉपर्टी के खरीदार गायब हो गए। लग्जरी प्रॉपर्टी के खरीदार नहीं मिलने के कारण एमार जैसे बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स के शेयरों में भारी गिरावट आई है। कई प्रॉपर्टी मालिक जो अपनी प्रॉपर्टी बेचना चाहते हैं उन्होंने कीमतें भी घटा लीं हैं, इसके बावजूद खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। लग्जरी प्रॉपर्टी के दाम 25% गिरे, सौदों में 51% की भारी कमी दुनियाभर के अरबपतियों की पहली पसंद माने जाने वाले दुबई के लानाई आइलैंड, अरेबियन रैंचेस और पाम जुमेराह आइलैंड्स जैसे इलाकों में प्रॉपर्टी के दाम में 20% की कटौती आम बात हो गई है। निवेशक अपने महंगे विला, पेंटहाउस और लग्जरी अपार्टमेंट्स को 2-4 करोड़ रुपए के डिस्काउंट पर बेचने को तैयार हैं। इससे साफ है कि दुबई का रियल एस्टेट बाजार फिलहाल ठहराव की स्थिति में पहुंच गया है, जहां कीमतों से ज्यादा बड़ी समस्या खरीदारों की कमी है। निवेशकों के लिए यह दौर अनिश्चितता भरा है, क्योंकि उनकी पूंजी कागज पर तो मौजूद है, लेकिन उसे नकदी में बदलना मुश्किल हो गया है। जब तक क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता, बाजार में यह सुस्ती बनी रह सकती है।
PPF-सुकन्या में जमा कर दें मिनिमम अमाउंट:ऑफिस में इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा करें, 31 मार्च तक निपटा लें ये 5 काम

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं। टैक्सपेयर्स के पास टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट और जरूरी कामों को पूरा करने के लिए 31 मार्च 2026 तक का ही समय है। अगर आप पुरानी टैक्स रिजीम में हैं और टैकस बचाना चाहते हैं, तो समय रहते PPF, सुकन्या समृद्धि और NPS जैसी स्कीम्स में निवेश करना होगा। 31 मार्च से पहले ये 5 जरूरी काम निपटा लें 1. PPF-सुकन्या में जमा कर दें मिनिमम अमाउंट अगर आपका पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) अकाउंट है, लेकिन इस वित्त वर्ष में इनमें पैसे नहीं डाल पाए तो अकाउंट एक्टिव रखने के लिए 31 मार्च 2026 तक कुछ रुपए जरूर डाल दें। PPF और SSY में पैसे नहीं डाले जाने पर ये अकाउंट्स इनएक्टिव (बंद) हो सकते हैं। 2. टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट अगर आपने अब तक टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट नहीं किया है तो 31 मार्च तक कर सकते हैं। PPF, टाइम डिपॉजिट और सुकन्या स्कीम सहित ऐसी कई स्कीम्स हैं जिनमें निवेश करके आप टैक्स बचा सकते हैं… 3. ऑफिस में जमा करने होंगे इन्वेस्टमेंट प्रूफ अगर आपने वित्त वर्ष की शुरुआत में अपने ऑफिस को टैक्स बचाने वाले निवेश की घोषणा की थी, तो अब उनके सबूत या दस्तावेज जमा करने का समय है। ज्यादातर कंपनियां फरवरी या मार्च के महीने में निवेश के प्रूफ मांगती हैं। अगर आप समय पर रसीदें या सर्टिफिकेट जमा नहीं करते हैं, तो कंपनी आपकी सैलरी से ज्यादा टीडीएस (TDS) काट सकती है। इससे मार्च महीने की आपकी इन-हैंड सैलरी काफी कम हो सकती है। 4. हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 75 हजार तक की छूट धारा 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर भी टैक्स बेनिफिट मिलता है। खुद के, पत्नी और बच्चों के इंश्योरेंस पर आप 25,000 रुपए तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। अगर आपकी उम्र 60 साल से ज्यादा है तो यह लिमिट 50,000 रुपए है। इसके अलावा, माता-पिता के लिए प्रीमियम भरने पर अलग से 50,000 रुपए तक की छूट मिलती है। यानी कुल मिलाकर आप 75,000 रुपए तक का टैक्स बचा सकते हैं। इसका फायदा लेने के लिए प्रीमियम का भुगतान 31 मार्च 2026 से पहले करना होगा। 5. अपडेटेड रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 मार्च जो टैक्सपेयर्स अपने पिछले दो साल के इनकम टैक्स रिटर्न को अपडेट करना चाहते हैं, वे 31 मार्च से पहले अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। ‘अपडेटेड रिटर्न’ फाइल करने के लिए आपको ITR-U नाम का फॉर्म भरना होगा। इस फॉर्म में आपको यह बताना होगा कि आपने अपडेटेड रिटर्न क्यों फाइल किया है, जैसे कि डेडलाइन चूक जाना, आय का गलत चयन, या ओरिजनल रिटर्न में गलत आंकड़े भरना आदि।






