होममेड मटका कुल्फी रेसिपी: बाजार में बिकने वाली मटका मलाई कुल्फी अब घर पर, न गैस और न दूध की चिंता; नोट करें रेसिपी

21 मार्च 2026 को 23:35 IST पर अद्यतन किया गया होममेड मटका कुल्फी रेसिपी: गर्मियों के मौसम में ठंडा मटका मलाई कुल्फी का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है। अक्सर हमें लगता है कि बाजार में जैसी क्रीमी कुल्फी बनाने के लिए चौदह दूध का आटा या गैस के पास खड़ा रखा जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इस नई और आसान रेसिपी के साथ आप बिना गैस जलाए और बिना दूध को फ्लोट किए, परफेक्ट टेक्सचर वाली कुल्फी तैयार कर सकते हैं। आइए जानते हैं।
मंडला में पुलिया से गिरी बाइक, चार युवकों की मौत:बीजाडांडी में हादसा; मृतकों की शिनाख्त की जा रही

मंडला जिले के बीजाडांडी थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात एक सड़क हादसे में चार युवकों की मौत हो गई। यह घटना भैंसवाही गांव के पास हुई, जहां एक मोटरसाइकिल पुलिया से नीचे गिर गई। पुलिस के अनुसार, मोटरसाइकिल पर चार युवक सवार थे। पुलिया से गिरने के कारण सभी चारों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही डायल 112 और बीजाडांडी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सभी शवों को बीजाडांडी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। बीजाडांडी थाना प्रभारी अनिता कुडापे ने घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि शवों को स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया है और मृतकों की शिनाख्त की जा रही है।
कल डबरा शहर में 4 घंटे लाइट बंद:सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक तारों को बदलने का काम होगा

ग्वालियर के डबरा और आसपास के क्षेत्रों में रविवार, 22 मार्च 2026 को बिजली कटौती रहेगी। यह कटौती 33 केवी टेकनपुर, 11 केवी बल्ला का डेरा और 11 केवी इंडस्ट्रियल फीडर पर जरूरी मेंटेनेंस और सुधार कार्यों के चलते की जा रही है। बिजली कंपनी के मुताबिक, टेकनपुर और बल्ला का डेरा फीडर पर कंडक्टर ऑग्मेंटेशन यानी तारों को बदलने या क्षमता बढ़ाने का काम होगा। इसके साथ ही इंडस्ट्रियल फीडर पर केबलीकरण का काम भी किया जाएगा। इन तकनीकी सुधारों की वजह से संबंधित इलाकों की बिजली सप्लाई बंद रखी जाएगी। प्रभावित होने वाले मुख्य इलाके कटौती के कारण शहर के कई प्रमुख क्षेत्र प्रभावित होंगे, जिनमें शामिल हैं: प्रीति कॉलोनी, थाने के पीछे, झांसी रोड, गंदे नाले के पास, ढ़ीमरपुरा, ठाकुर बाबा रोड, कटौ की पुलिया, बल्ला का डेरा, रामनिवास कॉलोनी, बायपास रोड इंडस्ट्रियल एरिया, चमेली वाली डीपी, सूर्य नगर, विवेक विहार, नहर रोड, रघु नगर, दीदार कॉलोनी, सोसा का चक, नैना मार्केट, लक्ष्मी कॉलोनी, बचन सिंह सरदार वाला एरिया, सरपंच सरदार वाला एरिया, अमरपुरा खेड़ी, चीनोर रोड, गौतम विहार कॉलोनी, डबरा गाँव, पिछोर रोड संस्कृति नगर तक, अरु तिराहे, ग्लोबल स्कूल, सेवाधाम, आईपीएस स्कूल ब्रिजपुर, खानगार का मिल, सेहराई रोड अम्बेडकर कॉलोनी और सोसाइटी रोड। समय और सावधानी बिजली कटौती सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक होगी कंपनी ने साफ किया है कि काम की स्थिति को देखते हुए कटौती के समय को घटाया या बढ़ाया भी जा सकता है।
90 हजार भक्तों ने किए मां शारदा के दर्शन:नवरात्रि के तीसरे दिन करीब 80 हजार लोग सीढ़ियां चढ़कर पहुंचे दरबार

चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन शनिवार को मैहर की मां शारदा देवी के दरबार में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए और अपनी मन्नतें मांगीं। भारी भीड़ के बावजूद प्रशासन की चौकस व्यवस्था के चलते भक्तों को दर्शन करने में कोई परेशानी नहीं हुई। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को कुल 89,936 श्रद्धालुओं ने मां शारदा के दर्शन किए। भक्तों ने अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग रास्तों का चुनाव किया। सबसे ज्यादा 79,413 भक्त सीढ़ियों के रास्ते मंदिर पहुंचे। 3,200 श्रद्धालुओं ने उड़नखटोले (रोपवे) का आनंद लेते हुए दर्शन किए। 1,323 भक्तों ने वैन के जरिए मंदिर तक का सफर तय किया। सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम सीढ़ी मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक हर जगह पुलिस और मंदिर समिति के लोग मुस्तैद रहे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खास इंतजाम किए गए थे, जिससे कहीं भी अफरा-तफरी का माहौल नहीं बना। प्रशासन ने भक्तों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की हैं ताकि नवरात्रि के नौ दिनों तक श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के शांतिपूर्वक दर्शन कर सकें।
सरपंच संघ अध्यक्ष, भाई समेत अन्य पर केस दर्ज:बालाघाट में मंदिर के निर्माणाधीन ढांचे में देवी-देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा की थी

बालाघाट में गर्रा चौक पर शासकीय भूमि पर निर्माणाधीन मंदिर से दुर्गा प्रतिमा हटाने और ढांचा गिराने के मामले में पुलिस ने सरपंच संघ अध्यक्ष वैभवसिंह बिसेन, उनके बड़े भाई युवा नेता विशाल बिसेन सहित अन्य लोगों पर शासकीय कार्य में बाधा डालने का प्रकरण दर्ज किया है। यह कार्रवाई चैत्र नवरात्र के दौरान हुई थी। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने शनिवार को प्रेस को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैभव बिसेन और विशाल बिसेन समेत अन्य लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस प्रतिमा स्थापित करने के मामले की भी जांच कर रही है। चैत्र नवरात्र के दिन गर्रा चौक पर मंदिर के निर्माणाधीन ढांचे में देवी-देवताओं की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इसके बाद गर्रा में तनाव का माहौल बन गया था। प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद देर रात प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित स्थल से हटाकर प्रशासन अपने साथ ले गया था। पुलिस के अनुसार, मंदिर के नाम पर सड़क मद की भूमि पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का ढांचा खड़ा किया गया था। एसपी ने बताया कि यह भूमि सड़क विस्तार के लिए आरक्षित थी। इस पर ढांचा खड़ा कर उसे मंदिर का रूप देने का प्रयास किया जा रहा था। पुलिस ने इसे धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ और लोगों को उकसाने का प्रयास बताया, जिसके बाद प्रतिमाओं को हटाने और शासकीय जमीन पर बने कथित मंदिर के ढांचे को गिराने की कार्रवाई की गई। इस मामले में सरपंच संघ अध्यक्ष वैभवसिंह बिसेन ने आरोपों को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि दशकों से उसी स्थान पर मां दुर्गा की पूजा की जाती रही है और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कर दुर्गा प्रतिमा स्थापित की गई थी। बिसेन ने दावा किया कि उन्होंने धर्म को बचाने का काम किया है। युवा विशाल बिसेन ने बताया कि यह हमारे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। हमने प्रशासन के साथ मिलकर उनकी कार्यवाही में ग्रामीणों से चर्चा में सहयोग किया है, यदि प्रशासन का सहयोग अपराध है तो फिर कोई, ऐसा सहयोग नहीं करेगा। सहयोग को लेकर कलेक्टर से बात हुई थी। फिर यह मामला दर्ज किया जाना, कानून का गलत इस्तेमाल है। यह हमें परेशान करने का काम है।
नवरात्र की पूजा में इस्तेमाल होने वाला ये घास, सेहत के लिए वरदान, चौंकाने वाले फायदे

Last Updated:March 21, 2026, 22:10 IST Durva Grass Benefits: चैत्र नवरात्र जैसे पूजा पाठ में दुर्वा घास का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन इसके औषधीय गुण इसे हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेद में इसे घाव को जल्दी ठीक करने जैसे ट्रीटमेंट के लिए उपयोग होता रहा है. ख़बरें फटाफट Durva Grass Health Benefits: चैत्र नवरात्र आते ही पूजा-पाठ में कई चीजों का महत्व बढ़ जाता है, जिनमें दूब घास भी खास होती है. मान्यता है कि बिना दूब घास के मां जगदम्बा की पूजा अधूरी मानी जाती है. नवरात्र में मां को दूब अर्पित की जाती है और कन्या पूजन के समय भी इससे पैर छूने की परंपरा है. अधिकतर लोग दूब घास को सिर्फ धार्मिक नजर से देखते हैं, लेकिन यह सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है. आयुर्वेद में इसे ‘अमृत’ कहा गया है, यानी ऐसी चीज जो शरीर को ताकत और संतुलन दे. यह न सिर्फ इंसानों के लिए बल्कि पशुओं के लिए भी लाभकारी मानी जाती है. दूब घास के फायदेदूब घास शरीर में कफ और वात को संतुलित करने में मदद करती है. अगर शरीर में इनका असंतुलन हो जाए, तो दूब का सेवन फायदेमंद हो सकता है. लेकिन इसे इस्तेमाल करने से पहले इसके सही तरीके जानना जरूरी है. दुर्वा घास का बाहरी उपयोग- दूब घास में खून रोकने की क्षमता होती है. अगर कहीं चोट लग जाए और खून रुक न रहा हो, तो दूब का लेप लगाने से खून रुकने में मदद मिलती है. यह घाव को जल्दी भरने और संक्रमण से बचाने में भी सहायक है. गर्मियों की शुरुआत में कई लोगों को नाक से खून आने या सिरदर्द की समस्या हो जाती है. ऐसे में दूब का रस नाक में डालने से राहत मिल सकती है. इसके साथ ही मुल्तानी मिट्टी को भिगोकर सूंघना भी फायदेमंद माना जाता है. अगर त्वचा में जलन हो रही हो, तो दूब का लेप ठंडक देता है और आराम पहुंचाता है. दुर्वा घास का आंतरिक उपयोग- दूब घास का सेवन पेट से जुड़ी समस्याओं में मददगार होता है. साथ ही, मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द में भी यह राहत दे सकती है. हालांकि, दूब का रस पीने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. दूब घास सिर्फ पूजा का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सेहत के लिए भी एक प्राकृतिक और आसान उपाय है, जो अंदर और बाहर दोनों तरह से शरीर को फायदा पहुंचाती है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 21, 2026, 22:10 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
गर्मी में क्यों खाना चाहिए पुदीना? बॉडी को कूलिंग ही नहीं, मिलते हैं ये जबरदस्त फायदे

Last Updated:March 21, 2026, 21:23 IST Pudina Khane Ke Fayde: गर्मी में पुदीना के पत्तों का सेवन सिर्फ बॉडी को अंदर से ठंडा नहीं करता, बल्कि इससे पाचन संबंधित समस्या भी दूर रहती है. यदि आपको डिहाइड्रेशन जल्दी होता है, तो ये आपके लिए पुदिना के पत्ते नेचुरल रेमिडी साबित हो सकते हैं. अगर आप खुद को ठंडा, हल्का और तरोताजा रखना चाहते हैं, तो पुदीना अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें. यह छोटा सा पत्ता आपके बड़े काम आ सकता है. ख़बरें फटाफट Mint Health Benefits: गर्मियों की शुरुआत होते ही मन अपने आप ठंडी और ताजगी भरी चीजों की तरफ खिंचने लगता है. बाजार में रसीले फल तो खूब मिलते हैं, लेकिन सब्जियों में वो ताजगी कम नजर आती है. ऐसे समय में एक चीज है जो हर बार काम आती है वो है पुदीना. इसकी खुशबू ही मन को ठंडक पहुंचा देती है, और स्वाद तो लाजवाब होता ही है. अक्सर हम पुदीने को सिर्फ चटनी या रायते तक ही सीमित रखते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे एक असरदार औषधि माना गया है. खासकर गर्मियों में यह शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. आयुर्वेद के अनुसार पुदीना कफ और पित्त को संतुलित करता है और शरीर को अंदर से ठंडा रखता है. इसका स्वाद थोड़ा तेज और कसैला होता है, लेकिन जिस भी चीज में इसे मिलाया जाए, उसका स्वाद निखर जाता है. पुदीने के पत्तों के हेल्थ बेनिफिट्स गर्मी के मौसम में कई लोगों को खाना खाने के बाद गैस या सिरदर्द की परेशानी होती है. ऐसे में खाने के साथ या इसके बाद पुदीना का सेवन राहत दिलाने का काम करता है. गर्मियों में भारी और तला-भुना खाना खाने से अक्सर खट्टी डकारें, पेट में भारीपन और गैस की समस्या हो जाती है. ऐसे में पुदीना बहुत काम आता है. यह पेट की गर्मी को कम करता है, पाचन तंत्र को शांत करता है और अम्लता (एसिडिटी) को भी घटाता है. अगर कोई इरिटेबल बाउल सिंड्रोम से परेशान है, तो उसके लिए भी पुदीना फायदेमंद माना जाता है. इसे आप चटनी या रायते के रूप में आसानी से अपने खाने में शामिल कर सकते हैं. तेज गर्मी में कई बार सिरदर्द और घबराहट भी होने लगती है. पुदीने की तासीर ठंडी होती है और इसमें मेन्थॉल नाम का एक तत्व पाया जाता है. यह शरीर में जाकर दिमाग को ठंडक का एहसास कराता है, जिससे तुरंत राहत मिलती है. लू से बचने के लिए भी पुदीना काफी मददगार होता है. पुदीना सिर्फ खाने में ही नहीं, बल्कि लगाने में भी फायदेमंद है. अगर चेहरे पर बार-बार मुंहासे हो रहे हों, तो पुदीने का लेप लगाने से आराम मिलता है. इससे टैनिंग भी कम होती है और त्वचा साफ दिखने लगती है. अगर सिरदर्द बना रहता है या तनाव ज्यादा महसूस होता है, तो पुदीने की चाय भी एक अच्छा विकल्प है. यह न सिर्फ सिरदर्द में राहत देती है, बल्कि मन को भी शांत करती है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 21, 2026, 21:23 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
कहीं आप भी तो कूड़े में नहीं फेंक रहे खजाना? इस फल के छिलके में चौंकाने वाले गुण, कई बीमारियों में कारगर

Last Updated:March 21, 2026, 20:52 IST Orange Health Benefits: संतरा स्वास्थ्य के साथ सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि इसके छिलके में भी औषधीय गुण होते हैं. आइए एक्सपर्ट से इसके फायदे के बारे में जानते हैं. संतरे के छिलके में विटामिन-सी, फ्लेवोनोइड्स और पेक्टिन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. यह शरीर में जमा खराब तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक होता है, जिससे व्यक्ति अंदर से स्वस्थ होने का अनुभव करता है. संतरे का छिलका त्वचा की देखभाल में किसी प्राकृतिक जादू से कम नहीं है. इसका उपयोग करने से चेहरे के दाग-धब्बे कम होते हैं और त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है. यह मुंहासों को कंट्रोल करने में भी मदद करता है और एक बेहतरीन क्लींजर की तरह काम करता है, इससे त्वचा एकदम साफ और ताजा नजर आती है. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, संतरे का छिलका पाचन तंत्र के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें फाइबर और पेक्टिन पाया जाता हैं, जो कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत देता हैं. अगर इसे सही मात्रा में सेवन किया जाए, तो पाचन तंत्र को दुरुस्त बना सकता है और पेट से जुड़ी परेशानियों को कम कर सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google संतरे का छिलका दिल की सेहत के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है. यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है और ब्लड प्रेशर को संतुलित बनाए रखने में यह सहायक होता है. यहीं नहीं, इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में बेहद लाभकारी और गुणकारी हैं. संतरे का छिलका मुंह की सफाई और ताजगी के लिए भी एक शानदार घरेलू उपाय है. इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं, जो सांसों की बदबू दूर करते हैं और दांतों के दाग हटाने में मदद कर सकते हैं. इसके सही, नियमित और सीमित उपयोग से आपका ओरल हेल्थ बेहतर बन सकता है. इसके साथ चटनी आपको ताजगी का एहसास भी होगा. हालांकि, संतरे के छिलके के कुछ नुकसान भी हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. अधिक मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द, गैस या दस्त जैसी समस्याएं हो सकती है. छिलकों पर कीटनाशकों का असर हो सकता है, इसलिए इन्हें उपयोग से पहले अच्छी तरह धोना जरूरी है. संवेदनशील त्वचा वालों को इसे सीधे लगाने से बचना चाहिए. संतरे के छिलके को इस्तेमाल के लिए सुखाकर पाउडर बनाया जा सकता है और चाय में डाल सकते हैं या दही और गुलाब जल के साथ मिलाकर फेस पैक बना सकते हैं. हमेशा साफ और बेहतर हो, तो ऑर्गेनिक संतरे का उपयोग करें. थोड़ी सावधानी और समझदारी से यह साधारण सा छिलका आपकी सेहत और सुंदरता का राज बन सकता है. बगैर डॉक्टर की सलाह इसका प्रयोग हानिकारक होता है. First Published : March 21, 2026, 20:52 IST
2 सहकारी कर्मचारियों का निलंबन रद्द करने की मांग:बालाघाट में सहकारी कर्मचारियों का सम्मेलन, बोले- छोटे बारदाने से धान खुले में पड़ा

बालाघाट में सहकारी कर्मचारियों ने अपनी रुकी हुई मांगों और समस्याओं को लेकर शनिवार को एक सम्मेलन किया। इस दौरान कर्मचारियों का सस्पेंशन खत्म करने और सोसायटियों में रखे धान को गोदामों तक पहुंचाने जैसी मुख्य मांगें जोर-शोर से उठाई गईं। सहकारी कर्मचारी महासंघ के बैनर तले हुए इस सम्मेलन में जिले भर से 100 से ज्यादा कर्मचारी शामिल हुए। बैठक में दो कर्मचारियों के निलंबन, धान के उठाव में हो रही देरी, कम वेतन और दूसरी बड़ी दिक्कतों पर विस्तार से चर्चा की गई। निलंबन रद्द करने की मांग महासंघ के अध्यक्ष पी.सी. चौहान ने बताया कि सरकारी निर्देशों के मुताबिक धान खरीदी का अच्छा काम करने के बावजूद लालबर्रा और डोंगरमाली के दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। यूनियन ने प्रशासन से मांग की है कि इन कर्मचारियों का निलंबन तुरंत वापस लिया जाए। धान की बर्बादी और शॉर्टेज का डर चौहान ने यह मुद्दा भी उठाया कि खरीदी के वक्त छोटे बारदाने मिलने की वजह से बहुत सारा धान खुले में पड़ा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर धान का समय पर उठाव नहीं होता और धूप में सूखकर वजन कम होता है, तो इसके लिए कर्मचारियों को जिम्मेदार मानकर उन पर कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संगठन की मजबूती पर जोर सम्मेलन के अंत में उन्होंने सभी साथियों से अपील की कि वे अपने हक और अधिकारों की लड़ाई के लिए संगठन के साथ एकजुट रहें। उनका कहना था कि एकता के दम पर ही प्रशासन के सामने अपनी बात मजबूती से रखी जा सकती है।
'धुरंधर 2' में आतिफ अहमद जैसे किरदार पर बढ़ा विवाद:राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज, ISI कनेक्शन दिखाने पर फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर घिरे

फिल्म धुरंधर 2 के सिनेमाघरों में आने के बाद एक नया विवाद तेजी से उभर रहा है। विवाद का केंद्र वह कथित अतीक अहमद से प्रेरित किरदार है, जिसे फिल्म में आतिफ अहमद के नाम से दिखाया गया है। इस पर राजनीतिक दलों, समाजिक समूहों और दर्शकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। इस दौरान आलोचना, समर्थन और सोशल मीडिया प्रतिक्रियाओं ने फिल्म को मनोरंजन से आगे एक राजनीतिक बहस में बदल दिया है। फिल्म के रिलीज के बाद कई समाचार चैनलों और रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि आतिफ अहमद का किरदार उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर‑राजनेता अतीक अहमद से प्रेरित लगता है और कथित तौर पर खुफिया एजेंसी संबंधित कनेक्शनों को भी संदर्भित करता है, जिससे विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। कई नेताओं ने फिल्म में दिखाए गए ISI‑कनेक्शन वाले तत्वों को गलत और संवेदनशील मसलों को भड़काने वाला बताया है। समाजवादी पार्टी के नेता एस.टी. हसन ने फिल्म पर समाज में तनाव फैलाने और नफरत पैदा करने का आरोप लगाया है, साथ ही कहा है कि इस तरह की फिल्मों से दर्शकों में गलत संदेश जा सकता है। दूसरी तरफ, सपा विधायक अबू आजमी ने फिल्म को पाकिस्तानी फिल्म तक कह दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में ये विषय क्यों उठाया गया। उनके इस बयान ने विवाद को और भड़का दिया। विरोधी दलों ने इस फिल्म को राजनीतिक प्रोपेगैंडा तक कह दिया है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस और AIMIM के नेताओं ने आरोप लगाया कि फिल्म का कथानक मौजूदा राजनीतिक गुटों को लाभ पहुंचाने वाला प्रतीत होता है, और यह राजनैतिक माहौल को प्रभावित करना चाहता है। जिससे जनता और सरकार के बीच भ्रम फैल सकता है। वहीं कुछ समर्थक नेताओं का मानना है कि फिल्म में दिखाया गया हिस्सा वास्तविकता का एक परिप्रेक्ष्य है और इसे मनोरंजन और सिनेमा की रचना के रूप में समझा जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि सच दिखाना गलत नहीं होना चाहिए। उनका यह बयान फिल्मकारों को रचनात्मक स्वतंत्रता देने की वकालत करता है। डायरेक्टर आदित्य धर का रुख जहां विवाद राजनीतिक गलियारों तक पहुंचा है, वहीं फिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई लंबा बयान नहीं दिया है। इसके बजाय, उन्होंने फिल्म की सफलता और दर्शकों की प्रतिक्रिया के लिए आभार जताते हुए ट्विटर/सोशल मीडिया पर कहा कि फिल्म के प्रति प्रेम देखकर वह आभार महसूस कर रहे हैं और उन्होंने अपनी टीम एवं कलाकारों को धन्यवाद भी दिया है। विश्लेषण के स्तर पर यह समझा जा रहा है कि आदित्य धर और टीम ने अपनी फिल्म को एक थ्रिलर‑स्पाय जॉनर में रखा है, जिसमें कुछ वास्तविक घटनाओं से प्रेरित तत्व शामिल हैं, लेकिन फिल्म का मतलब किसी सटीक ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में देखने के बजाय इसे एक मनोरंजक कथा के रूप में लेना चाहिए। सोशल मीडिया और दर्शकों की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। कुछ दर्शकों का कहना है कि फिल्म दर्शकों को मनोरंजन और थ्रिल देती है और इसमें जो राजनीतिक बिंदु हैं वे सिनेमा का हिस्सा हैं। वहीं कुछ उपयोगकर्ताओं ने सीधे कहा है कि कुछ डायलॉग या कथानक प्रोपेगैंडा जैसा प्रतीत होता है, खासकर जब यह विचार किया जाता है कि राजनीतिक गुटों को आतंरिक मुद्दों से जोड़कर दिखाया गया है, जिसे वे गलत या अतिरंजित मानते हैं। Reddit चर्चा में एक उपयोगकर्ता ने लिखा कि फिल्म का राजनीतिक लहजा कुछ ज्यादा ही स्पष्ट है और कुछ घटनाओं को अतिरिक्त रूप से जोड़कर दिखाया गया लगता है, जिससे लोग इसे राजनीतिक एजेंडा के रूप में भी पढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ सोशल मीडिया टिप्पणियां कहती हैं कि यह सब सिर्फ एक फिल्म है और लोगों को इसे मनोरंजन के नजरिए से लेना चाहिए, इसे राजनीतिक धरने या प्रोपेगैंडा के रूप में नहीं देखना चाहिए। विश्लेषण: क्या सच है और क्या फिल्मी दृष्टि? बीते कुछ दिनों से बढ़ते विवाद और आलोचनाओं के बीच यह स्पष्ट है कि ‘धुरंधर 2’ ने मनोरंजन से ऊपर राजनीतिक सवाल उठाए हैं। चाहे वह नाम‑जुड़ाव के आधार पर हो, कथानक के राजनीतिक संकेत के कारण, या फिर वास्तविक जीवन से प्रेरित तत्व को कहानी में शामिल करने के संदर्भ में। विश्लेषकों का कहना है कि फिल्मकारों ने पुरानी घटनाओं, खुफिया तत्वों और राजनीतिक मोड़ों का इस्तेमाल एक थ्रिलर के रूप में किया है, जैसा कि दुनिया भर की कई जासूसी फिल्मों में होता आया है। यह जरूरी नहीं कि हर बार फिल्म में दिखाई गई हर बात वास्तविकता की सीधी परछाई हो, बल्कि यह संयोजन और सिनेमाई ड्रामा का हिस्सा हो सकता है। हालांकि विवाद बहुत तेजी से चल रहा है और कुछ नेताओं के तीखे बयानों के कारण यह राजनीतिक बहस में बदल गया है, लेकिन फिल्म के प्रति दर्शकों की प्रतिक्रिया मिश्रित है। कुछ इसे मनोरंजन और राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व मानते हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक संदेश देने वाला समझते हैं। दोनों ही धाराएं सोशल मीडिया और समाचार प्लेटफॉर्म पर सामने आ रही हैं, जिससे यह विवाद और गहरा होता जा रहा है।






