Tuesday, 25 Aug 2026 | 02:50 AM

Trending :

EXCLUSIVE

Marma Therapy : क्या होती है मर्म थेरेपी? तेजी से बना रही लोगों में पैठ, रावण संहिता में इसका जिक्र

authorimg

Last Updated:

Marma Therapy Benefits : प्राकृतिक चिकित्सा में मर्म थेरेपी का अलग ही स्थान है. अगर सही तरीके से और विशेषज्ञ की देखरेख में मर्म थेरपी कराई जाए, तो यह शरीर के लिए वरदान से कम नहीं. मर्म थेरेपी शरीर के उन संवेदनशील बिंदुओं पर आधारित है, जहां प्राण ऊर्जा का संचार होता है. मर्म थेरेपी का जिक्र रावण संहिता तक में है. लोकल 18 से जौनपुर की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कुसुम पांडेय बताती हैं कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं.

जौनपुर. आयुर्वेद की प्राचीन पद्धतियों में मर्म थेरेपी का विशेष स्थान रहा है और अब जौनपुर में भी यह तेजी से लोकप्रिय हो रही है. जौनपुर की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कुसुम पांडेय बताती हैं कि मर्म थेरेपी न सिर्फ पुरानी चिकित्सा पद्धति है, बल्कि इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों, विशेषकर रावण संहिता में भी मिलता है. यह थेरेपी शरीर के विशेष बिंदुओं (मर्म स्थानों) पर काम करके कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने में सहायक है. डॉ. कुसुम पांडेय ने बताया कि मर्म थेरेपी शरीर के उन संवेदनशील बिंदुओं पर आधारित होती है, जहां प्राण ऊर्जा का संचार होता है. इन बिंदुओं पर हल्का दबाव, स्पर्श या विशेष तकनीक के माध्यम से उपचार किया जाता है, जिससे शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है और रोगों से राहत मिलती है. यह थेरेपी बिना किसी दवा के भी प्रभावी है.

सुरक्षित विकल्प

डॉ. कुसुम पांडेय के मुताबिक, आजकल लोग तनाव, थकान, सिरदर्द, कमर दर्द और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे में मर्म थेरपी एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आई है. यह शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को बढ़ाती है और लंबे समय तक लाभ देती है. खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते.

डॉ. पांडेय बताती हैं कि मर्म थेरेपी का उल्लेख रावण संहिता में मिलने से इसकी प्राचीनता और महत्त्व का अंदाजा लगाया जा सकता है. प्राचीन काल में भी इसका उपयोग योद्धाओं के उपचार और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता था. यह पद्धति आज भी उतनी ही प्रभावी है जितनी पहले थी. जौनपुर में अब धीरे-धीरे लोग आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की ओर आकर्षित हो रहे हैं. मर्म थेरेपी भी इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है. डॉ. कुसुम पांडेय कहती हैं कि लोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए तुरंत दवाइयों का सहारा लेने के बजाय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाना चाहिए.

डॉ. कुसुम पांडेय के अनुसार, यदि सही तरीके से और विशेषज्ञ की देखरेख में मर्म थेरेपी कराई जाए, तो यह शरीर को पूरी तरह से संतुलित और स्वस्थ बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है. यही कारण है कि आज के आधुनिक समय में भी यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति फिर से लोगों के बीच अपनी जगह बना रही है.

About the Author

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
जंग के बीच ट्रम्प सरकार में उथल-पुथल:24 घंटे में निकाले गए आर्मी चीफ और अटॉर्नी जनरल; काश पटेल-तुलसी गबार्ड को भी हटाने की चर्चा

April 3, 2026/
12:46 pm

अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी को हटाए जाने के बाद अब ट्रम्प सरकार में कुछ और बड़े अफसरों को...

रूस की तरफ से मध्यस्थ बनेंगे पूर्व चीफ जस्टिस चंद्रचूड़:यूक्रेन के सरकारी बैंक से चल रहा विवाद; रूस पर संपत्ति छीनने का आरोप

August 12, 2026/
3:27 pm

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के सरकारी बैंक ओश्चादबैंक से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय...

फिंच बोले- ग्रीन की जगह साइफर्ट को मौका मिले:KKR कीमत की जगह प्रदर्शन देखे; IPL 2026 में एक भी मैच नहीं जीत सकी

April 16, 2026/
4:32 pm

IPL 2026 में खराब प्रदर्शन कर रही KKR की रणनीति पर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान आरोन फिंच ने सवाल उठाए।...

U-19 Star Suryawanshis Slump | Sri Lanka Try-Series Final

June 21, 2026/
4:30 am

दांबुला6 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत-ए और श्रीलंका-ए के बीच ट्राई नेशन वनडे सीरीज का फाइनल आज खेला जाएगा। दांबुला...

Telangana Intermediate 1st, 2nd Year Results 2026 (OUT) Live: Manabadi TS Inter Supplementary Results Link, Mark Memos Download Here.

June 11, 2026/
5:45 pm

आखरी अपडेट:11 जून, 2026, 17:45 IST मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीन उम्मीदवार तरूण चुघ,...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Marma Therapy : क्या होती है मर्म थेरेपी? तेजी से बना रही लोगों में पैठ, रावण संहिता में इसका जिक्र

authorimg

Last Updated:

Marma Therapy Benefits : प्राकृतिक चिकित्सा में मर्म थेरेपी का अलग ही स्थान है. अगर सही तरीके से और विशेषज्ञ की देखरेख में मर्म थेरपी कराई जाए, तो यह शरीर के लिए वरदान से कम नहीं. मर्म थेरेपी शरीर के उन संवेदनशील बिंदुओं पर आधारित है, जहां प्राण ऊर्जा का संचार होता है. मर्म थेरेपी का जिक्र रावण संहिता तक में है. लोकल 18 से जौनपुर की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कुसुम पांडेय बताती हैं कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं.

जौनपुर. आयुर्वेद की प्राचीन पद्धतियों में मर्म थेरेपी का विशेष स्थान रहा है और अब जौनपुर में भी यह तेजी से लोकप्रिय हो रही है. जौनपुर की आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. कुसुम पांडेय बताती हैं कि मर्म थेरेपी न सिर्फ पुरानी चिकित्सा पद्धति है, बल्कि इसका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों, विशेषकर रावण संहिता में भी मिलता है. यह थेरेपी शरीर के विशेष बिंदुओं (मर्म स्थानों) पर काम करके कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने में सहायक है. डॉ. कुसुम पांडेय ने बताया कि मर्म थेरेपी शरीर के उन संवेदनशील बिंदुओं पर आधारित होती है, जहां प्राण ऊर्जा का संचार होता है. इन बिंदुओं पर हल्का दबाव, स्पर्श या विशेष तकनीक के माध्यम से उपचार किया जाता है, जिससे शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है और रोगों से राहत मिलती है. यह थेरेपी बिना किसी दवा के भी प्रभावी है.

सुरक्षित विकल्प

डॉ. कुसुम पांडेय के मुताबिक, आजकल लोग तनाव, थकान, सिरदर्द, कमर दर्द और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. ऐसे में मर्म थेरपी एक प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आई है. यह शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को बढ़ाती है और लंबे समय तक लाभ देती है. खास बात यह है कि इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते.

डॉ. पांडेय बताती हैं कि मर्म थेरेपी का उल्लेख रावण संहिता में मिलने से इसकी प्राचीनता और महत्त्व का अंदाजा लगाया जा सकता है. प्राचीन काल में भी इसका उपयोग योद्धाओं के उपचार और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता था. यह पद्धति आज भी उतनी ही प्रभावी है जितनी पहले थी. जौनपुर में अब धीरे-धीरे लोग आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा की ओर आकर्षित हो रहे हैं. मर्म थेरेपी भी इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है. डॉ. कुसुम पांडेय कहती हैं कि लोगों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए तुरंत दवाइयों का सहारा लेने के बजाय प्राकृतिक और आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाना चाहिए.

डॉ. कुसुम पांडेय के अनुसार, यदि सही तरीके से और विशेषज्ञ की देखरेख में मर्म थेरेपी कराई जाए, तो यह शरीर को पूरी तरह से संतुलित और स्वस्थ बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है. यही कारण है कि आज के आधुनिक समय में भी यह प्राचीन चिकित्सा पद्धति फिर से लोगों के बीच अपनी जगह बना रही है.

About the Author

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.