बुजुर्गों को लंबी नींद से ज्यादा जरूरी गहरी नींद:बबल फुलाएं, गुनगुने पानी में पैर डुबोएं; नींद अच्छी आएगी

बढ़ती उम्र में अच्छी नींद दवाई के जैसी है। इसमें भी लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने से ज्यादा जरूरी है गहरी नींद। यह बात नींद पर हुईं कई रिसर्च में साबित हो चुकी है। अब सवाल यह है कि गहरी नींद आएगी कैसे? इसमें सोने से पहले बबल फुलाना, नमक के गुनगुने पानी में पैर रखकर बैठने जैसे तरीके मदद करेंगे। अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन की रिसर्च कहती है अच्छी नींद के दौरान शरीर खुद को रिपेयर करता है। याददाश्त मजबूत, इम्युनिटी बेहतर होती है। इन परेशानियों को नजरअंदाज न करें, डॉक्टर से मिलें नीचे दी परेशानियों में से यदि 2-3 लगातार 2-3 हफ्ते या उससे ज्यादा समय से हों रही हैं तो नींद विशेषज्ञ या जनरल फिजिशियन से मिलें। रात के वक्त सोने में देर लगना- 30-60 मिनट या उससे ज्यादा समय लगना। रात में 3-4 बार उठना और फिर नींद न आना। जोर से खर्राटे और सांस रुकना – स्लीप एप्निया, ये अटैक का खतरा बढ़ाता है। पैरों में दर्द या अकड़न रेस्टलेस लेग सिंड्रोम। चिंता या पुरानी यादों से परेशानी – दिमाग का लंबे समय तक शांत नहीं होना रात 2-3 बजे उठकर फिर से नहीं सो पाना। ये 5 तरीके आपको गहरी नींद लाने में करेंगे मदद एक रूटीन बनाएं – सोने-उठने का समय रोज एक रखें। रात में चाय-कॉफी से बचें। तरीका – खासकर सोने के लिए अलार्म लगाएं। जैसे रात 10 बजे। वहीं रोज सुबह बिना अलार्म उठने के लिए माइंडसेट करें। बबल ब्लोइंग – सोने से पहले बुलबुले फुलाने से अनिद्रा दूर होती है। तरीका- बिस्तर या कुर्सी पर बैठें। बबल मेकर लें। नाक से 4 सेकंड सांस लें, फिर मुंह से 8-10 सेकंड धीरे-धीरे सांस बाहर फूंकें। इसे 5 से 8 बार दोहराएं। सोने का माहौल बनाएं – कमरा अंधेरा, मन शांत व तापमान सेहत अनुकूल रखें। तरीका – पर्दे बंद करें, फोन को ‘नाइट मोड’ पर डालें। बेडरूम सिर्फ सोने के लिए यूज करें। सोने से पहले टीवी न देखें। पैर डुबोएं- गुनगुने पानी से पैरासिम्पैथेटिक नर्व सक्रिय होते हैं। नींद अच्छी आती है। तरीका- बाल्टी में गुनगुना पानी लें। 1 से 2 चम्मच नमक डालें। सोने से 15-20 मिनट पहले 10 मिनट तक पैर डुबोएं। दिनचर्या – सुबह 20 मिनट वॉक या योग, शाम को सैर करें। रात में हल्का भोजन लें। तरीका- एकाग्र होकर वॉक करें। डाइट में रात में दलिया, खिचड़ी जैसा खाना खाएं। बिना छिलके के भीगे बादाम, गुनगुना दूध लें।
गाजियाबाद में छुट्टी नहीं देने पर बैंक मैनेजर की हत्या:ऑफिस के अंदर गार्ड ने सीने में गोली मारी, राइफल लेकर भागा

गाजियाबाद में पंजाब एंड सिंध बैंक के मैनेजर अभिषेक शर्मा (34 साल) की गार्ड ने गोली मारकर हत्या कर दी। वह बिहार के रहने वाले थे। गार्ड रवींद्र कई दिनों से मैनेजर अभिषेक से छुट्टी मांग रहा था। सोमवार दोपहर करीब 1:45 बजे वह मैनेजर के पास पहुंचा। जहां छुट्टी को लेकर अभिषेक शर्मा से उसका विवाद हो गया। इसी बीच रवींद्र ने बंदूक से उनकी छाती पर गोली मार दी। अभिषेक लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गए। बैंक में अचानक फायरिंग से लोग दहशत में आ गए। इसी बीच आरोपी गार्ड अपने एक अन्य साथी के साथ मौके से भाग निकला। बैंक स्टाफ ने मैनेजर को बाइक से दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई। घटना से जुड़ा बैंक के गेट का एक CCTV सामने आया है, जिसमें गार्ड अपने साथी के साथ दिख रहा था। उसके भागने के कुछ मिनट बाद बैंक मैनेजर को लोग उठाकर ले जाते दिखे। वारदात लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र के बलराम नगर इलाके की है। मामले में ACP ज्ञान प्रकाश राय ने बताया, आरोपी गार्ड बागपत का रहने वाला है। काफी समय से छुट्टी को लेकर मैनेजर अभिषेक शर्मा से विवाद था। इसके चलते उसने यह घटना अंजाम दी। आरोपी की तलाश के लिए टीमें लगा दी हैं और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वारदात से जुड़ी 3 फोटो देखिए… गाजियाबाद में पत्नी के साथ रहते थे अभिषेक बैंक मैनेजर अभिषेक शर्मा बिहार में पटना के लखीपुर के रहने वाले थे। अगस्त, 2025 से वह गाजियाबाद में पत्नी के साथ किराए पर रह रहे थे। इस समय पत्नी बिहार में है। घटना की जानकारी दी गई है। परिवार गाजियाबाद आ रहा है। बैंक मैनेजर ने फोन पर फटकार लगाई थी बैंक कर्मियों के अनुसार, रविवार को बैंक में छुट्टी थी, लेकिन गार्ड सोमवार सुबह भी ड्यूटी पर नहीं आया। इस पर मैनेजर अभिषेक शर्मा ने उसे फोन किया। ड्यूटी पर न आने का कारण पूछते हुए फटकार लगाई थी। गार्ड ने जवाब दिया कि कुछ इमरजेंसी आ गई है। इसलिए आज नहीं आ सकता हूं। अभिषेक ने कहा कि तुरंत बैंक आओ। रवींद्र गुस्से में दोपहर डेढ़ बजे अपने एक साथी के साथ बाइक से बैंक पहुंचा। उसने साथी को बैंक के बाहर खड़ा कर दिया। फिर अंदर जाकर उसने बैंक में जमा अपनी लाइसेंसी बंदूक ली। इसके बाद वह सीधे बैंक मैनेजर के पास पहुंचकर झगड़ने लगा। घटना के समय बैंक में मैनेजर समेत पांच कर्मचारी काम कर रहे थे। जब तक अन्य कर्मचारी कुछ समझ पाते, तब तक गार्ड ने मैनेजर के सीने में गोली मार दी। आर्मी से रिटायर्ड है आरोपी गार्ड पुलिस के अनुसार, गार्ड रवींद्र हुड्डा (45 साल) 2018 में आर्मी से रिटायर्ड हुआ था। वह बागपत के मंसूरपुर थाना क्षेत्र में चांदीनगर का रहने वाला है। रवींद्र की तीन महीने पहले पंजाब एंड सिंध बैंक में एक एजेंसी के जरिए नौकरी लगी थी। रवींद्र के परिवार में तीन बच्चे हैं। इनमें दो लड़की और एक लड़का है। आरोपी रविंद्र शराब का आदी है और आए दिन नशे में लोगों से झगड़ा करता है। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया- हाफ पैंट और टीशर्ट में आया था गार्ड प्रत्यक्षदर्शी आरएन पांडेय ने बताया, मैं भी बैंक आया था। अंदर जा ही रहा था, तभी गोली चलने की आवाज सुनाई दी तो रुक गया। तभी एक व्यक्ति, जो हाफ पैंट और पीली रंग की टीशर्ट में था, वह बाहर आया। उसके एक हाथ में बंदूक थी। उसके साथ एक और व्यक्ति भी था, जो कुर्ता-पैंट और सिर पर पगड़ी पहने था। दोनों बड़े आराम से बैंक से बाहर निकले। मेन रोड पर एक बाइक खड़ी थी। दोनों उसी बाइक से भाग निकले। बैंक के कर्मी मैनेजर को उठाकर बाहर लेकर आए थे। फॉरेसिंक टीम मौके पर पहुंची DCP सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया- फॉरेसिंक टीम मौके पर पहुंच गई है। घटनास्थल का मौका मुआयना किया जा रहा है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा। गाजियाबाद ग्रामीण जोन के पुलिस उपायुक्त सुरेन्द्र नाथ तिवारी ने बताया- पंजाब एंड सिंध बैंक में तैनात गार्ड की बंदूक बैंक में ही जमा थी। गार्ड ने वहीं से बंदूक वापस लेकर बैंक मैनेजर अभिषेक को गोली मार दी। दोनों के बीच कहासुनी हुई थी। ……………. ये खबर भी पढ़िए… स्टंटबाजी में 12वीं के छात्र की मौत, VIDEO: लखनऊ में बुलेट-स्कूटी की भीषण टक्कर, छात्र उछलकर डिवाइडर पर गिरा लखनऊ में बाइक रेसिंग में 12वीं के छात्र की जान चली गई। जनेश्वर मिश्र पार्क के पास बुलेट और कावासाकी बाइक सवार रेस लगा रहे थे। तभी सामने स्कूटी आ गई। स्कूटी से टकराने के बाद बुलेट डिवाइडर से जा भिड़ी। बुलेट सवार 12वीं का छात्र उछलकर डिवाइडर से टकराकर। उसका सिर फट गया। हादसे के बाद वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई। कावासाकी सवार लड़के ने लोगों की मदद से बुलेट सवार दोस्त को अस्पताल पहुंचाया। जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पढ़ें पूरी खबर…
‘कांग्रेस सांसदों को सलाह दें…’: पूर्व पीएम देवेगौड़ा ने संसद में व्यवधान पर सोनिया गांधी को लिखा पत्र | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 16, 2026, 14:44 IST देवेगौड़ा ने विपक्ष में एक वरिष्ठ नेता के रूप में सोनिया गांधी से कांग्रेस नेताओं और सांसदों को अनुशासन बहाल करने और संसदीय मानदंडों को बनाए रखने की सलाह देने का आग्रह किया। देवेगौड़ा और सोनिया गांधी. (फ़ाइल) पूर्व प्रधान मंत्री एचडी देवेगौड़ा ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर संसद में हाल के व्यवधानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने कहा कि इसका नेतृत्व बड़े पैमाने पर विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस सांसदों द्वारा किया जा रहा है। 16 मार्च को लिखे अपने पत्र में, गौड़ा ने कहा कि संसद में और उसके आसपास के अराजक दृश्य – जिसमें नारेबाज़ी, तख्तियां प्रदर्शित करना, धरना और अवरोध शामिल हैं – अभूतपूर्व थे और भारत के संसदीय लोकतंत्र की नींव को नुकसान पहुंचाने का जोखिम था। अपने 65 साल के सार्वजनिक जीवन का हवाला देते हुए, जिसमें से अधिकांश समय उन्होंने विपक्ष में बिताया, पूर्व प्रधान मंत्री ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों से संसद की गरिमा और परंपराओं को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतीत में तीव्र राजनीतिक असहमति के दौरान भी संसदीय मर्यादा कायम रखी गई थी। जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, बीआर अंबेडकर और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेताओं द्वारा अपनाए गए लोकतांत्रिक मूल्यों को याद करते हुए, गौड़ा ने कहा कि उनके द्वारा स्थापित परंपराएं संसदीय आचरण का मार्गदर्शन करती रहनी चाहिए। यह स्वीकार करते हुए कि विपक्ष की भूमिका कठिन और महत्वपूर्ण दोनों है, उन्होंने कहा कि विरोध स्थापित संसदीय नियमों और परंपराओं के भीतर होना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता के रूप में गांधी से कांग्रेस नेताओं और सांसदों को अनुशासन बहाल करने और संसदीय मानदंडों को बनाए रखने की सलाह देने का आग्रह किया। गौड़ा ने कहा कि विपक्ष को विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन उन्होंने आगाह किया कि इस तरह की कार्रवाइयों से भारत के लोकतंत्र के पिछले 75 वर्षों में निर्मित संस्थानों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। मौजूदा बजट सत्र में दोनों सदनों में बार-बार व्यवधान देखा गया है, विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, नारे लगा रहे हैं और तख्तियां प्रदर्शित कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों के कारण बार-बार स्थगन और कार्यवाही रुकी है, सरकार और विपक्ष व्यवधानों की जिम्मेदारी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। पहले प्रकाशित: मार्च 16, 2026, 14:44 IST समाचार राजनीति ‘कांग्रेस सांसदों को सलाह दें…’: पूर्व पीएम देवेगौड़ा ने संसद में व्यवधान पर सोनिया गांधी को लिखा पत्र अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
वाराणसी पहुंचीं अभिनेत्री जैकलिन फर्नांडिस:मां की अस्थियां गंगा में विसर्जित कीं, बोलीं- हमें सनातन धर्म बहुत पसंद

बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलिन फर्नांडिस रविवार को काशी पहुंचीं। यहां उन्होंने अपने पिता एलरॉय फर्नांडीज के साथ अपनी मां की अस्थियां गंगा में विधि-विधान के साथ विसर्जित कीं। इस दौरान जैकलिन ने कहा- हमें सनातन धर्म बहुत पसंद है, इसलिए हम अपनी मां की अस्थियां लेकर काशी आए हैं। काशी में गंगा के पवित्र जल में अस्थि विसर्जन करना हमारी मां को श्रद्धांजलि देने का एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक निर्णय है। उन्होंने यह यात्रा पूरी तरह निजी रखी। वह करीब डेढ़ घंटे वाराणसी में रुकीं। बता दें कि जैकलिन फर्नांडिस की मां किम फर्नांडिस का 6 अप्रैल 2025 को निधन हो गया था। चेहरा ढककर ताज होटल से घाट पहुंचीं जैकलिन फर्नांडिस अभिनेत्री जैकलिन फर्नांडिस ताज होटल से सीधे गंगा घाट पहुंचीं। उन्होंने पहचान छिपाने के लिए अपने चेहरे को कपड़े से ढक रखा था, ताकि वह आम श्रद्धालुओं की तरह पूजा-अर्चना कर सकें। जैकलिन अपने पिता के साथ नाव से गंगा के बीच पहुंचीं। यहां काशी विश्वनाथ मंदिर के सामने पवित्र गंगा नदी में उन्होंने अपनी मां की अस्थियों का विसर्जन किया। यह धार्मिक अनुष्ठान वाराणसी के आचार्य विकास पाण्डेय के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान काशी के अरुण भी मौजूद रहे। अनुष्ठान पूरा होने के तुरंत बाद जैकलिन वापस लौट गईं। 2022 में किम फर्नांडिस को पड़ा था हार्ट स्ट्रोक जैकलिन फर्नांडिस की मां किम फर्नांडिस को साल 2022 में हार्ट स्ट्रोक पड़ा था, जिसके बाद उनका इलाज बहरीन में कराया गया था। किम फर्नांडिस बहरीन की राजधानी मनामा में रहती थीं, जबकि जैकलिन अपने वर्क कमिटमेंट के कारण भारत में रहती हैं। एक इंटरव्यू में जैकलिन ने अपनी मां के बारे में कहा था- अगर उनका अपने पिता से कभी टकराव हो जाता था तो उनकी मां ही दोनों के बीच बात संभालती थीं। उनकी मां का कम्युनिकेशन स्किल बेहद शानदार था। अक्सर उनकी ही बात मानी जाती थी। जैकलिन ने यह भी कहा था कि अगर वह अपनी मां पर कभी किताब लिखेंगी तो उसका टाइटल ‘थ्रू हर आईज’ रखेंगी। उनकी मां को भारतीय कुर्तियां बहुत पसंद थीं। जैकलिन अक्सर भारत से उनके लिए कुर्तियां लेकर जाती थीं, जो उन्हें बेहद पसंद आती थीं। 13 दिन ICU में रहीं किम, 6 अप्रैल 2025 को निधन 24 मार्च को जैकलीन फर्नांडिस की मां किम फर्नांडिस को हार्ट स्ट्रोक आया था। इसके बाद उन्हें इमरजेंसी में मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उनकी हालत लगातार गंभीर बनी रही और उन्हें ICU में रखा गया। करीब 13 दिनों तक इलाज चला। इसके बाद 6 अप्रैल 2025 को उनका निधन हो गया। एयर होस्टेस रह चुकी थीं किम फर्नांडिस जैकलिन फर्नांडिस की मां किम फर्नांडिस मलेशिया की नागरिक थीं। वे पेशे से एयर होस्टेस रह चुकी थीं। उन्होंने श्रीलंकाई बिजनेसमैन एलरॉय फर्नांडिस से शादी की थी। किम और एलरॉय फर्नांडिस के चार बच्चे हैं, जिनमें जैकलिन फर्नांडिस भी शामिल हैं। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… ‘देखा है पहली बार गोरखपुर की आंखों में प्यार’:माधुरी दीक्षित बोलीं- आपसे मिलकर बहुत खुशी हुई; धक-धक गाने पर फैंस झूमे गोरखपुर का प्यार हमेशा याद रहेगा। आपसे मिलकर बहुत खुशी हो रही है। आप की आंखों में एक प्यार झलक रहा है। यह देखकर मुझे अपनी ही फिल्म का डॉयलाग याद आ रहा है…देखा है पहली बार गोरखपुर की आंखों में प्यार। पढ़िए पूरी खबर
सट्टे और जुए की कमाई का दान नहीं:गुना में सजेगा 9 फीट की महाकाली का दरबार; सदस्यों की तनख्वाह से होगा आयोजन

गुना के तलैया मोहल्ले में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर आज जबलपुर से महाकाली की 9 फीट ऊंची प्रतिमा पहुंच रही है, जहां बिना चंदे के समिति सदस्यों की एक महीने की तनख्वाह से 9 दिनों तक ‘गुना की महारानी’ का दरबार सजेगा और शतचंडी यज्ञ चलेगा। झांकी परिसर में समिति द्वारा विशेष बोर्ड लगाए जाएंगे, जिनमें स्पष्ट लिखा होगा कि जुआ, सट्टा या क्रिकेट सट्टा जैसी अवैध गतिविधियों से कमाए गए रुपयों का दान कृपया हमें न दें। समाज में कुरीतियों के खिलाफ संदेश देने के लिए यह कदम उठाया गया है, ताकि लोगों को यह समझाया जा सके कि गलत काम हमेशा गलत ही होता है। बिना चंदे के हो रहा आयोजन, सदस्यों ने दी तनख्वाह इस झांकी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आयोजन समिति इसके लिए किसी भी व्यक्ति के पास चंदा मांगने नहीं जाएगी और यह पूरी तरह से बिना चंदे की झांकी है। झांकी का पूरा खर्च उठाने के लिए समिति के सभी कार्यकर्ताओं और सदस्यों ने अपनी एक माह की तनख्वाह या मजदूरी का योगदान दिया है। जबलपुर के कलाकार ने बनाई 9 फीट की प्रतिमा इस बार ‘गुना की महारानी’ के रूप में महाकाली की जो भव्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है, उसकी ऊंचाई नौ फीट है। इस 9 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण जबलपुर के प्रसिद्ध कलाकार विजय सोनकर द्वारा विशेष रूप से किया गया है। प्रदेश में चैत्र नवरात्रि की एकमात्र झांकी पूरे मध्य प्रदेश में एकमात्र गुना ही ऐसा जिला है, जहां चैत्र नवरात्रि के अवसर पर इस तरह का विशेष दरबार लगाया जाता है। पिछले वर्ष से ही तलैया मोहल्ले में यह झांकी लगना शुरू हुई है, जो आकर्षण का केंद्र रही थी और इसे देखने आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। तीसरे दिन जगराता, दशमी को पालकी में होगा विसर्जन नौ दिनों तक सजने वाले इस दरबार में शतचंडी यज्ञ के साथ-साथ नवरात्रि के तीसरे दिन जगराते का भी आयोजन किया जाएगा। दशमी वाले दिन नौ फीट ऊंचाई वाली माता की प्रतिमा कांधे पर सवार होकर पालकी में झांकी स्थल से सिंगवासा तालाब तक जाएगी।
नंगे पैर खेलने से ‘गोल ऑफ द टूर्नामेंट’ तक:एशियन कप फुटबॉल में 30 गज से गोल दागकर चर्चा में आईं पंजाब की मनीषा कल्याण

2026 विमंस एशियन कप के मैच में भारतीय टीम चीनी ताइपे से 1-0 से पीछे थी। 39वें मिनट में भारत को गोल से 30 गज की दूरी पर फ्री-किक मिली। सामने सफेद जर्सी में चार डिफेंडर दीवार बनकर खड़ी थीं। ऐसे में 24 वर्षीय मनीषा कल्याण एक पल के लिए रुकीं और अपने बाएं पैर से एक ऐसा करारा शॉट दागा कि गेंद क्रॉसबार के निचले हिस्से से टकराकर सीधे गोल लाइन के पार चली गई। वीएआर ने गोल की पुष्टि की और कमेंटेटर ने इसे देखते ही ‘गोल ऑफ द टूर्नामेंट’ करार दिया। भले ही भारतीय टीम यह मैच 1-3 से हारकर ग्रुप में सबसे नीचे रही, लेकिन पंजाब के होशियारपुर की इस बेटी ने दुनिया को भारतीय फुटबॉल की एक उजली तस्वीर जरूर दिखा दी। यह सिर्फ एक गोल की नहीं, बल्कि उस लड़की की कहानी है जिसके नसीब में कभी खेल के जूते नहीं थे। आठ साल पहले पंजाब के मुग्गोवाल गांव के एक सरकारी स्कूल में पीटी टीचर ब्रह्मजीत सिंह ने एक लड़की को लड़कों के साथ नंगे पैर खेलते देखा। वह बेखौफ गोल दाग रही थी। मनीषा के पिता नरेंद्रपाल सिंह की गांव में एक छोटी सी कॉस्मेटिक की दुकान थी। वह अपनी चार बेटियों को सिर्फ पढ़ाना चाहते थे; उनके पास स्पोर्ट्स शूज और ट्रेनिंग के पैसे नहीं थे। कोच ब्रह्मजीत ने पिता को एक महीने तक मनाया और भरोसा दिलाया कि पैसा कभी रुकावट नहीं बनेगा। जब पिता राजी हुए, तो पड़ोसियों ने ताने कसे कि लड़की शॉर्ट्स पहनकर लड़कों के साथ खेलती है, आगे चलकर इसका कुछ नहीं होगा। लेकिन माता-पिता ने इन तानों को अनसुना कर दिया। गांव में लड़कियों की कोई टीम नहीं थी, इसलिए मनीषा खेलने के लिए अक्सर 15 किलोमीटर पैदल चलती या दौड़ती थीं। उनके शानदार खेल और खास हेयरस्टाइल के कारण दोस्तों ने उन्हें ब्राजीलियाई दिग्गज रोनाल्डिन्हो के नाम पर प्यार से ‘डिनो’ बुलाना शुरू कर दिया। नवंबर 2021 में एक बड़ा बदलाव आया। भारत ने ब्राजील के खिलाफ मैच 6-1 से गंवाया, लेकिन इकलौता गोल मनीषा ने किया। वह सीनियर फुटबॉल में ब्राजील के खिलाफ गोल दागने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। इस गोल ने उनके लिए दुनिया के दरवाजे खोल दिए। साइप्रस के क्लब ‘अपोलोन लेडीज’ ने उन्हें साइन किया। शुरुआत में अंग्रेजी न आने के कारण उन्हें मैदान पर पास नहीं मिलते थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और भाषा सीखी। अगस्त 2022 में वह यूईएफए विमंस चैम्पियंस लीग खेलने और गोल करने वाली पहली भारतीय बनीं। ग्रीस के क्लब ‘पाओक’ के लिए 23 मैचों में 8 गोल दागने के बाद, अब वह पेरू के चैम्पियन क्लब ‘एलियांजा लीमा’ में शामिल हैं। सिडनी गई 26 सदस्यीय भारतीय महिला फुटबॉल टीम में मनीषा अकेली खिलाड़ी थीं जो विदेश में इतने ऊंचे स्तर पर खेल रही हैं। यही वजह है कि मनीषा के बेसिक्स, पासिंग और तकनीक बाकी खिलाड़ियों से कहीं ऊंचे स्तर के हैं।
हेल्थकेयर सर्विसेज महंगी, स्टार्टअप्स सस्ते विकल्प दे रहे:अमेरिका में आधे खर्च में पूरे शरीर का एमआरआई स्कैन, ब्लड टेस्ट की सुविधा, ताकि बड़ी बीमारियों का शुरुआत में ही पता लग सके

अमेरिका में महंगी स्वास्थ्य व्यवस्था को टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स से चुनौती मिल रही है। ये कंपनियां डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, वर्चुअल क्लीनिक और एआई आधारित सुविधाओं के जरिये इलाज, जांच और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं मुहैया करा रही हैं। हेल्थकेयर की बढ़ती लागत के बीच मरीज भी अब इलाज के नए विकल्प तलाश रहे हैं। स्टार्टअप्स की फंडिंग भी बढ़ी है। 2025 में अमेरिका के डिजिटल हेल्थ स्टार्टअप्स की वेंचर कैपिटल फंडिंग 35% बढ़कर 1.3 लाख करोड़ रुपए हो गई। ये पब्लिक हेल्थ सिस्टम में बदलाव का संकेत है। हालांकि पहले ऐसे प्रयोग विफल हो चुके हैं। जेपी मॉर्गन चेज और बर्कशायर हैथवे ने मिलकर 2018 में ‘हेवन’ नाम की पहल शुरू की थी, जिसे 3 साल में ही बंद करना पड़ा। स्वास्थ्य सेवाओं में टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स की पैठ बढ़ने के बड़े कारण 20% सरकारी खर्च स्वास्थ्य पर, फिर भी 33% लोग लागत नहीं उठा पा रहे अमेरिकी सरकार हर साल स्वास्थ्य सेवाओं पर करीब 463 लाख करोड़ रुपए खर्च करती है। यह अमेरिका की जीडीपी का पांचवां हिस्सा यानी तकरीबन 20 फीसदी है। इलाज इतना महंगा है कि करीब एक तिहाई (33%) लोगों ने बीते एक साल में बेहिसाब खर्च के कारण या तो इलाज नहीं कराया या टाल दिया। खर्च बढ़ने का असर हेल्थ इंश्योरेंस पर भी दिख रहा है। अमेरिका में 65 साल से कम उम्र के ज्यादातर लोग प्राइवेट बीमा पर निर्भर हैं। गैर-लाभकारी संस्था केएफएफ के मुताबिक, 2015 से परिवार के लिए सालाना इंश्योरेंस प्रीमियम (बीमे की लागत) 50% बढ़ गया है। 45 फीसदी अमेरिकियों को हेल्थ सिस्टम पर भरोसा नहीं, अब वे विकल्प तलाश रहे अमेरिकी जनता का हेल्थ सिस्टम पर भरोसा साल दर साल घट रहा है। गैलप की एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड महामारी की शुरुआत में जहां मरीजों को डॉक्टरों पर 75% भरोसा था, वहीं 2025 में यह घटकर 55% रह गया। यानी 45% अमेरिकी हेल्थ सिस्टम पर भरोसा नहीं करते। डॉक्टर अपॉइंटमेंट से लेकर, बीमा कंपनी चुनने तक पूरी चेन डिजिटल प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म बदलाव ला रहे हैं। ‘सेसम’ और ‘वन मेडिकल’ जैसे प्लेटफॉर्म डॉक्टर से सस्ते ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने में मदद कर रहे हैं। वीसी फर्म जनरल कैटलिस्ट ने हॉस्पिटल और हेल्थ केयर चेन सुम्मा हेल्थ का अधिग्रहण किया है। ये कंपनी बीमा चुनने से लेकर इलाज और बिल पेमेंट तक पूरे सिस्टम को डिजिटली कनेक्ट कर रही है। अब वर्चुअल क्लिनिक; कंसल्टेशन, दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन भी दे रहे कई स्टार्टअप मरीजों को नई टेक्नोलॉजी के जरिये हेल्थ सर्विस दे रहे हैं। ‘हिम्स एंड हर्स’ और ‘रो’ जैसे वर्चुअल क्लीनिक ऑनलाइन कंसल्टेशन व दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन दे रहे हैं। ‘प्रीनुवो’ और ‘फंक्शन हेल्थ’ लगभग आधे खर्च 1,000 से 4,500 डॉलर (4 लाख रुपए तक) में पूरे शरीर का एमआरआई और ब्लड टेस्ट की सुविधा दे रहे हैं, ताकि बड़ी बीमारियां पकड़ में आ सकें। एआई – एक चौथाई यूजर कम से कम एक सवाल स्वास्थ्य संबंधी पूछ रहे हेल्थ सेक्टर में जेनरेटिव एआई की भूमिका बढ़ी है। चैटजीपीटी के डेवलपर्स का कहना है कि उनके करीब 80 करोड़ साप्ताहिक यूजर्स में से एक चौथाई से ज्यादा कम से कम एक सवाल स्वास्थ्य संबंधी पूछते हैं। ओपनएआई में हेल्थ केयर लीड कर रहे डॉ. नेट ग्रॉस का कहना है कि जेनरेटिव एआई इंटरनेट स्क्रॉल करने के पुराने तरीके में बड़ा सुधार ला रहा है। अब यूजर्स ऐसे सॉफ्टवेयर से सीधे बातचीत कर सकते हैं जो उनके लक्षणों, उम्र और मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए उन्हें सलाह देता है।
बीसीजी रिपोर्ट: पार्ट-2 यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिकी पेटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 50 साल में 5 गुना तक बढ़ गई

जब अमेरिका को नोबेल चाहिए, तो भारतीय दिमाग काम आता है। जब स्पेलिंग बी का ताज चाहिए, तो भारतीय बच्चे मैदान मारते हैं। जब नए पेटेंट चाहिए, तो भारतीय वैज्ञानिक कलम उठाते हैं। यह महज संयोग नहीं, यह उस भारतवंशी समुदाय की कहानी है, जो अमेरिका की धरती पर आया तो 2% बनकर, लेकिन अब बौद्धिक दुनिया में अपनी हिस्सेदारी दस गुना से भी ज्यादा बढ़ा ली। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के दूसरे हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिका की बौद्धिक ताकत बने भारतवंशी… यदि अमेरिका आज विज्ञान और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, तो उसमें भारतीय दिमागों का बहुत बड़ा योगदान है। पेटेंट फाइल करने से लेकर वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन तक, भारतीय डायस्पोरा का ग्राफ 1975 से अब तक पांच गुना बढ़ चुका है। हर 10 में से 1 अमेरिकी डॉक्टर भारतीय मूल का है, जो देश के सबसे दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। हर साल 1,800 नए भारतीय डॉक्टर सिस्टम में जुड़ रहे हैं, जो डॉक्टरों की कमी पूरा करने में सबसे आगे हैं। रिसर्च के क्षेत्र में भी यही कहानी है। अमेरिका के शीर्ष 50 कॉलेजों में से 35 में भारतवंशी नेतृत्व की भूमिकाओं में हैं। अमेरिका में 38,000 भारतीय मूल की नर्सें कार्यरत हैं। दो बार नोबेल अवॉर्ड जीत चुके; स्पेलिंग बी में 26 साल में 34 में से 28 विजेता भारतवंशी, शोध पत्रों में 13% भागीदारी है… भारतीय मूल के अमेरिकियों की कहां-कितनी हिस्सेदारी नोबेल पुरस्कार 2 बार फील्ड्स मेडल 1 बार ट्यूरिंग अवॉर्ड 1 बार स्पेलिंग बी विजेता 82% पेटेंट में हिस्सेदारी 10% कंप्यूटर पेटेंट 11% वैज्ञानिक शोध पत्र 13% फोर्ब्स 30 अंडर 30 11% (स्रोत: फोर्ब्स, यूएसपीटीओ और नेचर इंडेक्स के आंकड़े।) -1968 में हर गोविंद खुराना और 2019 में अभिजीत बनर्जी को नोबेल अवॉर्ड प्रदान किया गया। -मंजुल भार्गव ने साल 2014 में फील्ड्स मेडल जीता था, जिसे ‘गणित का नोबेल’ कहा जाता है। -स्पेलिंग बी में 2000 के बाद से 34 में से 28 विजेता भारतवंशी। -2022 से 2024 के बीच पूरे उत्तरी अमेरिका में फोर्ब्स 30 अंडर 30 पुरस्कारों में 11% हिस्सेदारी। -1975 में पेंटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 1.9% थी, जो 2019 में बढ़कर 10% पर पहुंची। शिक्षा – टॉप-50 में से 35 कॉलेजों में यही शीर्ष पर – 22,000 से अधिक भारतीय मूल के प्रोफेसर्स अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। – हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड जैसे संस्थानों के डीन और प्रेसिडेंट के पदों पर भारतीयों का होना अब सामान्य। – अमेरिका के टॉप-50 कॉलेजों पर नजर डालें तो 35 में भारतीय अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका में। यानी अमेरिका के हर दूसरे शीर्ष विश्वविद्यालय में कोई न कोई भारतीय अमेरिकी नेतृत्व में है। तकनीक – एआई की नींव रखने में भी अहम भूमिका जेनरेटिव एआई की नींव रखने वाला 2017 का शोध पत्र गूगल के आठ इंजीनियरों द्वारा लिखा गया था, जिनमें से दो भारतीय मूल के थे। इस शोध को लार्ज मॉडल्स की आधारशिला मानते हैं यानी आज जो चैटजीपीटी आदि चल रहे हैं, वे सब इसी पेपर की देन हैं यानी एआई की नींव रखने में भी बड़ा योगदान। सेहत – अमेरिका के लिए भारतवंशी ‘संकटमोचक’ – 2032 तक अमेरिका में 1.22 लाख डॉक्टरों की कमी होगी। – 2027 तक अमेरिका की 8 लाख नर्सें काम छोड़ देंगी। – हेल्थकेयर में जॉब 2030 तक 10-20% बढ़ेंगी, पर लोग नहीं। – भारतवंशियों का मेडिकल स्कूल में एडमिशन औसत से करीब चार गुना की तेजी से बढ़ रहा है। – भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है जो अमेरिका को नर्सें भेजता है। – सीडीसी और एनएसएफ जैसी बड़ी सरकारी एजेंसियों में भारतीय अमेरिकी 3% टॉप पोजीशन पर हैं। ये डॉक्टर अक्सर सबसे दूरदराज और वंचित इलाकों में सेवा देते हैं, जहां कोई और जाना नहीं चाहता।
धुरंधर 2 ने रिलीज से पहले ₹100 करोड़ कमाए:प्री-सेल्स में 200 करोड़ की टिकट बिक सकती हैं; 19 मार्च को रिलीज

बॉलीवुड फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर रिलीज से पहले ही 100 करोड़ रुपए कमा लिए हैं। फिल्म ने वर्ल्डवाइड एडवांस बुकिंग (प्री-सेल्स) में 100 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया है। शनिवार के कारोबार के अंत तक फिल्म का कुल ग्लोबल एडवांस कलेक्शन लगभग 101 करोड़ रुपए रहा। इसमें भारत से 44 करोड़ और विदेशी बाजारों (ओवरसीज) से 57 करोड़ रुपए आए हैं। बाहुबली 2 का रिकॉर्ड तोड़ा विदेशी बाजारों में फिल्म का जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। ‘धुरंधर’ ने सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के प्री-सेल्स रिकॉर्ड्स बदल दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया में फिल्म ने 1.05 मिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर की कमाई कर ‘बाहुबली: द कंक्लूजन’ का सालों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। ओवरसीज मार्केट में भारी डिमांड विदेशी मार्केट्स में फिल्म की डिमांड इतनी ज्यादा है कि कई जगहों पर सिनेमाघर पहले ही फुल (हाउसफुल) हो चुके हैं। नॉर्थ अमेरिका में एडवांस बुकिंग करीब 3.40 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। ट्रेड जानकारों का मानना है कि यह जल्द ही 4 से 5 मिलियन डॉलर के आंकड़े को छू लेगी। दर्शकों की भारी भीड़ को देखते हुए डिस्ट्रीब्यूटर्स और एग्जीबिटर्स सोमवार और मंगलवार को फिल्म के और ज्यादा शोज बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। 200 करोड़ के क्लब पर नजर वर्ल्डवाइड लेवल पर फिल्म की एडवांस बुकिंग आसानी से 150 करोड़ रुपए के पार निकल जाएगी। अगर भारत में फिल्म का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक रहा, तो प्री-सेल्स का आंकड़ा 200 करोड़ तक पहुंचना भी संभव लग रहा है। इससे पहले ‘पुष्पा 2’, ‘लियो’ और ‘RRR’ जैसी फिल्में इस आंकड़े के करीब रही हैं। हालांकि, अगर ‘धुरंधर’ वहां तक पहुंचती है, तो यह पहली ऐसी फिल्म होगी जो इस मुकाम को हासिल करेगी। धुरंधर को भी शानदार रिस्पॉन्स मिला था इससे पहले फिल्म धुरंधर के पहले पार्ट ने भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार प्रदर्शन किया था। फिल्म ने दुनिया भर में करीब ₹1,303 करोड़ की कमाई की। भारत में फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन ₹1,005.85 करोड़ रहा, जबकि नेट कलेक्शन लगभग ₹836.95 करोड़ हुआ। इसके साथ ही यह भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी सिंगल-लैंग्वेज फिल्म बन गई। विदेशी बाजारों में भी फिल्म धुरंधर को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ओवरसीज में इसने करीब ₹299.5 करोड़ का कारोबार किया। खासतौर पर अमेरिका और कनाडा में फिल्म ने ₹193.06 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर ‘बाहुबली 2’ का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। दिलचस्प बात यह है कि यह बड़ी सफलता फिल्म को तब मिली, जब इसे खाड़ी देशों में रिलीज की अनुमति नहीं मिली थी। इसके अलावा ‘धुरंधर’ भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली ‘A’ रेटेड फिल्म भी बन गई।
बीसीजी रिपोर्ट: पार्ट-2 यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिकी पेटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 50 साल में 5 गुना तक बढ़ गई

जब अमेरिका को नोबेल चाहिए, तो भारतीय दिमाग काम आता है। जब स्पेलिंग बी का ताज चाहिए, तो भारतीय बच्चे मैदान मारते हैं। जब नए पेटेंट चाहिए, तो भारतीय वैज्ञानिक कलम उठाते हैं। यह महज संयोग नहीं, यह उस भारतवंशी समुदाय की कहानी है, जो अमेरिका की धरती पर आया तो 2% बनकर, लेकिन अब बौद्धिक दुनिया में अपनी हिस्सेदारी दस गुना से भी ज्यादा बढ़ा ली। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के दूसरे हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिका की बौद्धिक ताकत बने भारतवंशी… यदि अमेरिका आज विज्ञान और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है, तो उसमें भारतीय दिमागों का बहुत बड़ा योगदान है। पेटेंट फाइल करने से लेकर वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन तक, भारतीय डायस्पोरा का ग्राफ 1975 से अब तक पांच गुना बढ़ चुका है। हर 10 में से 1 अमेरिकी डॉक्टर भारतीय मूल का है, जो देश के सबसे दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। हर साल 1,800 नए भारतीय डॉक्टर सिस्टम में जुड़ रहे हैं, जो डॉक्टरों की कमी पूरा करने में सबसे आगे हैं। रिसर्च के क्षेत्र में भी यही कहानी है। अमेरिका के शीर्ष 50 कॉलेजों में से 35 में भारतवंशी नेतृत्व की भूमिकाओं में हैं। अमेरिका में 38,000 भारतीय मूल की नर्सें कार्यरत हैं। दो बार नोबेल अवॉर्ड जीत चुके; स्पेलिंग बी में 26 साल में 34 में से 28 विजेता भारतवंशी, शोध पत्रों में 13% भागीदारी है… भारतीय मूल के अमेरिकियों की कहां-कितनी हिस्सेदारी नोबेल पुरस्कार 2 बार फील्ड्स मेडल 1 बार ट्यूरिंग अवॉर्ड 1 बार स्पेलिंग बी विजेता 82% पेटेंट में हिस्सेदारी 10% कंप्यूटर पेटेंट 11% वैज्ञानिक शोध पत्र 13% फोर्ब्स 30 अंडर 30 11% (स्रोत: फोर्ब्स, यूएसपीटीओ और नेचर इंडेक्स के आंकड़े।) -1968 में हर गोविंद खुराना और 2019 में अभिजीत बनर्जी को नोबेल अवॉर्ड प्रदान किया गया। -मंजुल भार्गव ने साल 2014 में फील्ड्स मेडल जीता था, जिसे ‘गणित का नोबेल’ कहा जाता है। -स्पेलिंग बी में 2000 के बाद से 34 में से 28 विजेता भारतवंशी। -2022 से 2024 के बीच पूरे उत्तरी अमेरिका में फोर्ब्स 30 अंडर 30 पुरस्कारों में 11% हिस्सेदारी। -1975 में पेंटेंट में भारतवंशियों की हिस्सेदारी 1.9% थी, जो 2019 में बढ़कर 10% पर पहुंची। शिक्षा – टॉप-50 में से 35 कॉलेजों में यही शीर्ष पर – 22,000 से अधिक भारतीय मूल के प्रोफेसर्स अमेरिकी विश्वविद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। – हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड जैसे संस्थानों के डीन और प्रेसिडेंट के पदों पर भारतीयों का होना अब सामान्य। – अमेरिका के टॉप-50 कॉलेजों पर नजर डालें तो 35 में भारतीय अमेरिकी नेतृत्व की भूमिका में। यानी अमेरिका के हर दूसरे शीर्ष विश्वविद्यालय में कोई न कोई भारतीय अमेरिकी नेतृत्व में है। सेहत – अमेरिका के लिए भारतवंशी ‘संकटमोचक’ – 2032 तक अमेरिका में 1.22 लाख डॉक्टरों की कमी होगी। – 2027 तक अमेरिका की 8 लाख नर्सें काम छोड़ देंगी। – हेल्थकेयर में जॉब 2030 तक 10-20% बढ़ेंगी, पर लोग नहीं। – भारतवंशियों का मेडिकल स्कूल में एडमिशन औसत से करीब चार गुना की तेजी से बढ़ रहा है। – भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है जो अमेरिका को नर्सें भेजता है। – सीडीसी और एनएसएफ जैसी बड़ी सरकारी एजेंसियों में भारतीय अमेरिकी 3% टॉप पोजीशन पर हैं। ये डॉक्टर अक्सर सबसे दूरदराज और वंचित इलाकों में सेवा देते हैं, जहां कोई और जाना नहीं चाहता।








