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असम में 9 अप्रैल को मतदान: क्या कांग्रेस के विरोध के बीच सीएए हिमंत सरमा के दूसरे कार्यकाल की राह तय करेगा? | चुनाव समाचार

Pakistan vs Bangladesh Live Cricket Score, 3rd ODI: Stay updated with PAK vs BAN Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Mirpur. (Picture Credit: AP)

आखरी अपडेट:मार्च 15, 2026, 16:25 IST बांग्लादेश से अवैध आप्रवासन लंबे समय से असम में सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक रहा है असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (X/@himantabiswa) क्या मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) असम में लगातार दूसरी बार सत्ता बरकरार रखेगी या कांग्रेस के नेतृत्व में खंडित विपक्ष एक विश्वसनीय चुनौती पेश करेगा? इस प्रश्न का उत्तर 9 अप्रैल को दिया जाएगा जब राज्य अपनी अगली सरकार के लिए मतदान करेगा। चुनाव आयोग ने रविवार को असम विधानसभा चुनाव 2026 के कार्यक्रम की घोषणा की, जो 9 अप्रैल को एक चरण में होगा। मतगणना 4 मई को होगी। 126 सदस्यीय असम विधान सभा के लिए मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट के इर्द-गिर्द घूमने की उम्मीद है जो अभी भी समर्थन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मैदान में प्रमुख गठबंधन भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन: असम में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कर रही है और इसमें असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल जैसे क्षेत्रीय सहयोगी शामिल हैं। 2021 में पदभार संभालने वाले सरमा राज्य में भाजपा का सबसे प्रमुख चेहरा बने हुए हैं। उनकी सरकार ने बुनियादी ढांचे, कानून-व्यवस्था उपायों और कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है, साथ ही अवैध आप्रवासन और पहचान की राजनीति जैसे मुद्दों पर एक मजबूत राजनीतिक स्थिति भी अपनाई है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गुट: मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस बनी हुई है, जो चुनावी असफलताओं की एक श्रृंखला के बाद अपनी किस्मत को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस फिर से बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाले ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट जैसे क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ नई क्षेत्रीय ताकतों के साथ गठबंधन की तलाश कर सकती है। हालाँकि, असम में विपक्षी एकता ऐतिहासिक रूप से नाजुक रही है, और सीट-बंटवारे की बातचीत विवादास्पद साबित हो सकती है। क्षेत्रीय और उभरते खिलाड़ी कई क्षेत्रीय दल करीबी मुकाबलों में नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें कार्यकर्ता से नेता बने अखिल गोगोई के नेतृत्व वाला रायजोर दल और सीएए विरोधी प्रदर्शनों के बाद गठित असम जातीय परिषद शामिल हैं। ये पार्टियाँ क्षेत्रीय पहचान की अपील करती हैं और प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में सत्ता विरोधी वोटों को विभाजित कर सकती हैं। पिछली बार असम में कैसे मतदान हुआ 2021 के असम विधान सभा चुनाव में, भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने आराम से सत्ता बरकरार रखी। पार्टी ने 60 सीटें जीतीं, जबकि असम गण परिषद ने नौ सीटें हासिल कीं। इस बीच, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल ने छह सीटें जीतीं। गठबंधन ने मिलकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया. कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष लगभग 50 सीटें जीतने में कामयाब रहा, जबकि छोटे क्षेत्रीय दलों ने मुट्ठी भर सीटें हासिल कीं। चुनाव में 80 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो राज्य के राजनीतिक रूप से व्यस्त मतदाताओं को दर्शाता है। 2026 में प्रमुख मतदाता मुद्दे आप्रवासन और पहचान की राजनीति: बांग्लादेश से अवैध आप्रवासन लंबे समय से असम में सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक रहा है। नागरिकता संशोधन अधिनियम का कार्यान्वयन और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर पर बहस राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय बने हुए हैं। जातीय और क्षेत्रीय स्वायत्तता: आदिवासी समूहों और स्वायत्त परिषदों की मांगें, खासकर बोडोलैंड और पहाड़ी जिलों में, चुनावी राजनीति को आकार देती रहती हैं। रोजगार और आर्थिक विकास: विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में युवा बेरोजगारी और आर्थिक अवसर केंद्रीय चिंता बने हुए हैं। बाढ़ प्रबंधन: ब्रह्मपुत्र नदी के कारण बार-बार आने वाली बाढ़ हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती है और एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। मतदान से पहले राजनीतिक साजिशें भाजपा पूरे असम में अपनी संगठनात्मक ताकत को मजबूत कर रही है, जबकि पहले कांग्रेस के प्रभुत्व वाले निर्वाचन क्षेत्रों में विस्तार करने का प्रयास कर रही है। इस बीच, कांग्रेस अपने जमीनी स्तर के नेटवर्क को फिर से बनाने और गठबंधन को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर रही है जो अल्पसंख्यक और भाजपा विरोधी वोटों को मजबूत कर सके। अगर करीबी मुकाबले वाली सीटों पर विपक्षी वोट बंटते हैं तो सीएए विरोधी आंदोलन से पैदा हुए क्षेत्रीय दल बिगाड़ने वालों की भूमिका निभा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भाजपा एक मजबूत संगठनात्मक लाभ और एक लोकप्रिय मौजूदा मुख्यमंत्री के साथ चुनाव में उतर रही है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि अगर विपक्ष एकजुट मोर्चा पेश करने और सत्ता विरोधी भावना को प्रभावी ढंग से प्रसारित करने में कामयाब होता है, तो चुनावी मुकाबला काफी कड़ा हो सकता है। बहुत कुछ अंततः इस पर निर्भर हो सकता है कि क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ गठबंधन करते हैं या स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ते हैं। जगह : असम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 15, 2026, 16:24 IST समाचार चुनाव असम में 9 अप्रैल को मतदान: क्या कांग्रेस के विरोध के बीच सीएए हिमंत सरमा के दूसरे कार्यकाल की राह तय करेगा? अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)भाजपा(टी)कांग्रेस(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम विधान सभा(टी)राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(टी)असम गण परिषद(टी)यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल

झाबुआ में युवक फंदे पर लटका मिला:पत्नी और मोबाइल घर से गायब, फॉरेंसिक एक्सपर्ट की राय लेने शव रतलाम भेजा

झाबुआ में युवक फंदे पर लटका मिला:पत्नी और मोबाइल घर से गायब, फॉरेंसिक एक्सपर्ट की राय लेने शव रतलाम भेजा

झाबुआ जिले के ग्राम छोटा बोलासा में एक युवक का शव उसके घर में फंदे पर लटका मिला है। मृतक की पहचान कालू सिंह के रूप में हुई है। इस घटना के बाद से उसकी पत्नी और मोबाइल फोन घर से गायब हैं, जिससे मामला संदिग्ध लग रहा है। कालू सिंह के पिता कमलेश ने बताया कि वे शनिवार शाम को अपनी पत्नी के साथ खेत पर सोने चले गए थे। घर पर कालू सिंह और उसकी बहू ही थे। रविवार सुबह जब पिता घर लौटे, तो उन्होंने बेटे को फंदे पर लटका देखा। शोर मचाने पर गांव वाले भी वहां इकट्ठा हो गए। पत्नी और मोबाइल गायब, जांच उलझी मृतक के परिजन ने बताया कि कालू सिंह करीब तीन महीने पहले ही एक युवती को भगाकर लाया था। इस मामले में सामाजिक पंचायत के जरिए समझौता भी हो गया था और तब कोई बड़ा विवाद नहीं था। अब युवक की मौत के बाद पत्नी का अचानक गायब होना पुलिस के लिए जांच का विषय बना हुआ है। फॉरेंसिक जांच के लिए रतलाम भेजा शव सारंगी पुलिस ने शव को पहले पेटलावद अस्पताल भेजा था, जहां तीन डॉक्टरों के पैनल ने जांच की। हालांकि, मामले को पेचीदा देखते हुए डॉक्टरों ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट की राय जरूरी बताई। झाबुआ जिले में एक्सपर्ट की कमी के चलते अब शव को रतलाम मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह आत्महत्या है या कुछ और।

शरीर में चुपके-चुपके पनपती रहती हैं किडनी की बीमारियां ! हाई बीपी और डायबिटीज सबसे बड़े कारण

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Tips to Prevent Kidney Diseases: डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की तादाद करोड़ों में पहुंच गई हैं. ये दोनों ही बीमारियां तेजी से फैल रही हैं और हर उम्र के लोग इनकी चपेट में आ रहे हैं. आजकल लाइफस्टाइल और खानपान भी बिगड़ गया है, जिसका बुरा असर सेहत पर पड़ रहा है. कई गलत आदतों ने हमें गंभीर बीमारियों के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिनमें किडनी डिजीज सबसे ज्यादा चिंताजनक है. किडनी की बीमारियां अक्सर साइलेंट किलर की तरह शरीर में चुपके-चुपके पनपती रहती हैं और इनके लक्षण तब स्पष्ट होते हैं, जब समस्या काफी गंभीर हो चुकी होती है. ऐसे में लोगों को अगर हाई बीपी और डायबिटीज की शिकायत हो, तो किडनी की जांच कराते रहना चाहिए, ताकि बीमारियों से बचाव हो सके. नोएडा एक्सटेंशन के यथार्थ हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. उपेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले 2-3 साल में किडनी से जुड़ी ओपीडी में मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब 30 से 45 वर्ष के लोगों में भी किडनी की बीमारियां बढ़ रही हैं. इसका मुख्य कारण सेडेंटरी लाइफस्टाइल, अत्यधिक तनाव, शरीर में पानी की कमी और प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन है. क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) और किडनी स्टोन के मामले सबसे ज्यादा देखे जा रहे हैं. CKD इसलिए भी खतरनाक है, क्योंकि यह बिना किसी शोर के धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती चरणों में मरीज को इसका आभास नहीं होता है. कई मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं, जब क्रॉनिक किडनी डिजीज सीवियर हो जाती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर उपेंद्र के मुताबिक डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर आज भी किडनी डिजीज के सबसे बड़े रिस्क फैक्टर हैं और नेफ्रोलॉजी ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीजों में इनमें से एक या दोनों समस्याएं होती हैं. पेनकिलर्स का ज्यादा या गलत उपयोग, बिना डॉक्टर की सलाह के जिम सप्लीमेंट या स्टेरॉयड लेना, डिहाइड्रेशन और खराब लाइफस्टाइल भी किडनी को नुकसान पहुंचाने के बड़े कारण बन रहे हैं. देर से पहचान होने के कारण डायलिसिस की जरूरत वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिससे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव भी बढ़ता है. हालांकि किडनी रोग से काफी हद तक बचाव संभव है. नई दिल्ली के मॉडल टाउन स्थित यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर एंड एचओडी डॉ. बीएस सोलंकी ने बताया कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी की खराबी के सबसे बड़े कारण हैं. लगभग 60 से 70% क्रॉनिक किडनी डिजीज के मामलों के लिए यही दो बीमारियां जिम्मेदार होती हैं. जब शरीर में ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर अनकंट्रोल रहता है, तो यह किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर देता है. अधिकांश मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं, जब बीमारी स्टेज 3, 4 या 5 तक पहुंच चुकी होती है, जिससे डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है. अगर वक्त रहते इसका पता लग जाए, तो इलाज आसान होता है और ट्रांसप्लांट की जरूरत नहीं पड़ती है. डॉ. सोलंकी ने बताया कि किडनी की बीमारी अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ती है, इसलिए शरीर के संकेतों को समझना बेहद जरूरी है. अगर किसी व्यक्ति को पैरों या चेहरे पर सूजन महसूस हो, पेशाब में बार-बार बदलाव आए या झाग दिखाई दे, तो यह किडनी में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है. इसके अलावा लगातार थकान, भूख में कमी, जी मिचलाना, उल्टी आना या अचानक ब्लड प्रेशर का अनकंट्रोल हो जाना भी किडनी रोग के लक्षण हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. डायबिटीज और बीपी के मरीजों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट, क्रिएटिनिन और यूरिन टेस्ट करवाते रहना चाहिए. बचाव के लिए दिन में कम से कम 2 से 3 लीटर पानी पिएं, नमक का सेवन कम करें, धूम्रपान छोड़ें और वजन को नियंत्रित रखें. संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के जरिए किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थिति और डायलिसिस की नौबत को काफी हद तक टाला जा सकता है.

टाइम मैग्जीन वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट प्लेसेस में भारत के 4 स्थान:पर्यटकों को लुभा रहे ‘जोधपुरी स्ट्रॉबेरी खेत’, 7000 फीट की ऊंचाई पर मिल रहा सुकून

टाइम मैग्जीन वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट प्लेसेस में भारत के 4 स्थान:पर्यटकों को लुभा रहे ‘जोधपुरी स्ट्रॉबेरी खेत’, 7000 फीट की ऊंचाई पर मिल रहा सुकून

पूरी दुनिया में घूमने का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। साल 2025 में करीब 1.5 अरब पर्यटकों ने विदेश यात्रा की, जो पिछले साल से 4% अधिक है। इसी उत्साह को देखते हुए ‘टाइम’ मैग्जीन ने दुनिया के 100 द वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट प्लेसेस ऑफ 2026 की सूची जारी की है। इसमें भारत के भी 4 स्थानों को शामिल किया गया है। यह लिस्ट अंतरराष्ट्रीय लेखकों और संवाददाताओं के फीडबैक के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें नए और रोमांचक अनुभव देने वाले होटल और संग्रहालयों को प्राथमिकता दी गई है। थार के बीच जोधपुर का ‘म्हारो खेत’, खेती के साथ लग्जरी स्टे जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर के बाहरी इलाके में स्थित ‘म्हारो खेत’ थार रेगिस्तान के बीच एग्री-टूरिज्म का शानदार ठिकाना है। 40 एकड़ के रीजेनरेटिव फार्म पर बने इस परिसर में 10 लग्जरी सुइट्स हैं, जो मेहमानों को प्रकृति और खेती के करीब लाते हैं। यहां का मुख्य आकर्षण खेत की ताजी उपज और स्ट्रॉबेरी-अनार के बागान हैं। मेहमान खुद सब्जियां चुनने के साथ कुकिंग लेसन और फार्म वॉक का आनंद ले सकते हैं। भोजन के लिए यहां 3 रेस्टोरेंट्स भी मौजूद हैं। पहाड़ियों में ‘शक्ति प्राण लॉज’, पहुंचने का रास्ता सिर्फ पैदल कुमाऊं। उत्तराखंडके कुमाऊं की पहाड़ियों में स्थित ‘शक्ति प्राण लॉज’ शांति और रोमांच का अनूठा संगम है। 7,000 फीट की ऊंचाई पर बने इस रिट्रीट तक केवल पैदल ही पहुंचा जा सकता है। यहां सौर ऊर्जा से संचालित सिर्फ 7 सुइट्स हैं, जहां से नंदा देवी और पंचाचूली चोटियों के अद्भुत दृश्य दिखते हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह खास है, जहां बर्फीली चोटियों के बीच लकड़ी के फायरप्लेस और सुकून भरा वातावरण मिलता है। पहाड़ियों में लीजिए बाघों और ऐतिहासिक मंदिरों का आनंद राजगढ़। मध्य प्रदेश की मणियागढ़ पहाड़ियों में स्थित ‘द ओबेरॉय राजगढ़ पैलेस’ बुंदेला वंश के 350 साल पुराने निवास को रीस्टोर कर बनाया गया भव्य रिसॉर्ट है। झील के किनारे बसे इस रिसॉर्ट की बड़ी खूबी पन्ना नेशनल पार्क के पास इसकी लोकेशन है, जहां सैलानी बाघ और तेंदुए देख सकते हैं। यहां के विशेषज्ञ मेहमानों को रनेह जलप्रपात और केन अभयारण्य की सफारी कराते हैं। साथ ही, पास ही स्थित यूनेस्को धरोहर खजुराहो के प्राचीन मंदिरों की नक्काशी देखने का अवसर भी मिलता है। एएबीबीसीसी: बार नहीं, ड्रिंक्स का म्यूजियम जैसा एक्सपीरियंस नई दिल्ली। दिल्ली के वसंत विहार में स्थित ‘एएबीबीसीसी’ ड्रिंक्स का एक आधुनिक म्यूजियम है। इसकी शुरुआत एक लैब से होती है, जहां जड़ी-बूटियों और शहद जैसी अनोखी सामग्रियों से पेयों को नया स्वाद दिया जाता है। यहां का मेन्यू समय की यात्रा जैसा है, जो बीता कल, आज और आने वाला कल श्रेणियों में बंटा है। इसमें बैंगन भरते जैसे अनूठे कॉकटेल प्रयोग भी शामिल हैं। अंत में एक म्यूजिक लाउंज है, जहां शानदार साउंड क्वालिटी का आनंद ले सकते हैं।

खाली जेब नर्मदा परिक्रमा पर निकले थे राजीव:180 दिन की पैदल यात्रा का समापन; लौटते समय जेब में थे 2800 रुपए

खाली जेब नर्मदा परिक्रमा पर निकले थे राजीव:180 दिन की पैदल यात्रा का समापन; लौटते समय जेब में थे 2800 रुपए

प्रदेश किसान मोर्चा मंत्री और ‘मैं हूं नर्मदा पुत्र’ अभियान के संस्थापक राजीव पटेल की 180 दिवसीय नर्मदा पैदल यात्रा का रविवार को माकड़खेड़ा स्थित वेदांत विला आश्रम में समापन हो गया। इस समापन समारोह को ‘नर्मदा सेवा संकल्प महोत्सव’ के रूप में मनाया गया, जहां लोगों को नर्मदा सेवा के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर राजीव पटेल ने अपनी नर्मदा परिक्रमा के अनुभव सभी के साथ साझा किए। मां पर कोई कचरा कैसे डाल सकता है उन्होंने बताया कि वे बिल्कुल खाली जेब इस नर्मदा परिक्रमा पर निकले थे, लेकिन लौटते समय उनकी जेब में 2800 रुपए थे। पटेल ने लोगों से अपील करते हुए कहा, “नर्मदा मैया हैं, तो भला कोई अपनी मां के ऊपर कचरा कैसे डाल सकता है। यह भाव मन में होना चाहिए।” 111 कन्याओं के पूजन से हुई शुरुआत नर्मदा सेवा संकल्प महोत्सव की शुरुआत 111 कन्याओं के पूजन के साथ की गई। इस दौरान परिसर में नर्मदा मैया के जयकारे लगाए गए। कार्यक्रम में पधारे संत समाज और उपस्थित अतिथियों का सम्मान करते हुए उन्हें नर्मदा पुराण भी भेंट की गई। 800 से अधिक कुनबी पटेल समाजजन हुए शामिल कार्यक्रम में मालवा निमाड़ इकाई के 800 से अधिक कुनबी पटेल समाजजन शामिल हुए। सभी ने नर्मदा सेवा संकल्प मिशन की सराहना की। समारोह में पूज्य दंडी स्वामी कांची पीठ आश्रम, सांसद गजेंद्रसिंह पटेल, पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे और डॉ. आयुषी भय्यू महाराज देशमुख शामिल रहे। इसके अलावा भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, विधायक राजकुमार मेव और सचिन बिरला भी इस महोत्सव का हिस्सा बने। बड़वानी भाजपा जिलाध्यक्ष अजय यादव, जयदीप पटेल, भारती दीदी ठाकुर और रामलाल पटेल सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

न्यूजीलैंड टी-20 इंटरनेशनल में अपना 10वां सबसे छोटा स्कोर बनाया:7 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर सके, साउथ अफ्रीका को 92 का टारगेट

न्यूजीलैंड टी-20 इंटरनेशनल में अपना 10वां सबसे छोटा स्कोर बनाया:7 बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा पार नहीं कर सके, साउथ अफ्रीका को 92 का टारगेट

साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले टी-20 मुकाबले में न्यूजीलैंड की टीम सिर्फ 91 रन पर ऑलआउट हो गई। इंटरनेशनल टी-20 में यह टीम का 10वां सबसे छोटा स्कोर है। न्यूजीलैंड ने माउंट माउंगानुई के बे ओवल स्टेडियम में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, लेकिन मेजबान टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। पावरप्ले के अंदर ही उसके पांच विकेट गिर गए। इसके बाद टी-20 वर्ल्ड कप 2026 की फाइनलिस्ट रही न्यूजीलैंड की टीम अपने ही घर में 14.3 ओवर में 91 रन पर ऑलआउट हो गई। न्यूजीलैंड की बैटिंग फेल इस मुकाबले में न्यूजीलैंड के लिए जेम्स नीशम ने सबसे ज्यादा 21 गेंदों पर 26 रन बनाए। उनके अलावा कप्तान मिचेल सैंटनर ने 19 गेंदों पर 15 रन, कोल मैकॉन्ची ने 11 गेंदों पर 15 रन और बेवॉन जैकब्स ने 7 गेंदों पर 10 रन की पारी खेली। हालांकि टीम के सात बल्लेबाज दहाई के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सके। न्यूजीलैंड के लिए सबसे बड़ी साझेदारी 7वें विकेट के लिए हुई, जब नीशम और मैकॉन्ची ने 17 गेंदों में 26 रन जोड़े। डेब्यूटेंट मोकोएना ने 3 विकेट लिए साउथ अफ्रीका के लिए डेब्यू कर रहे नकोबानी मोकोएना ने 3.3 ओवर में 26 रन देकर सबसे ज्यादा 3 विकेट लिए। वहीं जेराल्ड कूट्जी और ओटनील बार्टमैन ने 3-3 ओवर में 2-2 विकेट झटके। स्पिनर केशव महाराज ने भी किफायती गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में 25 रन देकर 2 विकेट हासिल किए। इसके अलावा डियान फॉरेस्टर ने 1 ओवर में सिर्फ 4 रन दिए, हालांकि उन्हें कोई विकेट नहीं मिला। दोनों टीमों की प्लेइंग-XI न्यूजीलैंड: डेवोन कॉन्वे, टॉम लैथम (विकेटकीपर), टिम रॉबिन्सन, निक केली, बेवॉन जैक्बस, जेम्स नीशम, कोल मैकॉन्ची, मिचेल सैंटनर (कप्तान), काइल जेमीसन, जकारी फॉल्कस, बेन सियर्स। साउथ अफ्रीका: कॉनर एस्टरहुइजन (विकेटकीपर), जॉर्डन हरमन, टोनी डी जॉर्जी, रुबिन हरमन, जेसन स्मिथ, डियान फॉरेस्टर, जॉर्ज लिंडे, जेराल्ड कूट्जी, केशव महाराज (कप्तान), नकोबानी मोकोएना, ओटनील बार्टमैन।

बीसीजी रिपोर्ट पार्ट-1: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिका की आबादी में भारतवंशी 1.5% ही, लेकिन कुल टैक्स में हिस्सेदारी 6%

बीसीजी रिपोर्ट पार्ट-1: यूएस में भारतवंशियों का कितना दमखम?:अमेरिका की आबादी में भारतवंशी 1.5% ही, लेकिन कुल टैक्स में हिस्सेदारी 6%

अमेरिका के माइक्रोसॉफ्ट (सत्या नडेला), गूगल (सुंदर पिचाई) और एडोबी (शांतनु नारायण) जैसे बड़े संस्थान हों या स्टार्टअप के सरताज 72 यूनिकॉर्न या होटल और किराना स्टोर, हर जगह भारतवंशियों का दबदबा है। खर्च करने और दान करने की बात आए या टैक्स चुकाने की, उसमें भी भारतीय मूल के अमेरिकी अपनी आबादी के हिसाब से कहीं आगे खड़े हैं। बीसीजी और इंडियास्पोरा द्वारा तैयार की गई ‘अमेरिका में भारतवंशियों के दमखम की कहानी’ के पहले हिस्से में पढ़िए, कैसे अमेरिकी इकोनॉमी में अहम भूमिका निभा रहे भारतवंशी… अमेरिका में भारतीय समुदाय की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के आर्थिक ढांचे का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। अमेरिका में भारतवंशियों की महज 1.5% जनसंख्या होने के बावजूद यह समुदाय अमेरिकी खजाने में 5-6% टैक्स का योगदान देता है। सिलिकॉन वैली के बोर्डरूम से लेकर छोटे शहरों की छोटी-छोटी दुकानों तक, भारतीय मूल के उद्यमियों ने लाखों अमेरिकियों के लिए रोजगार पैदा किए हैं। फॉर्च्यून 500 कंपनियों के नेतृत्व से लेकर नए यूनिकॉर्न्स खड़े करने तक, भारतीय मेहनत और मेधा ने अमेरिका को दुनिया के मुकाबले आगे रखा है। सालाना 42 लाख करोड़ खर्च कर रहे हैं अमेरिका में भारतीय मूल का हर परिवार सालाना औसतन 2.8 करोड़ रुपए खर्च कर रहा। – अमेरिका में भारतीय मूल के कुल 51 लाख लोग रहते हैं, जो उत्तराखंड की कुल आबादी का लगभग आधा है। – भारत ने अपने 140 करोड़ लोगों के लिए जितना सालाना बजट बनाया है, उसका 79% अकेले 51 लाख भारतीय अमेरिकी हर साल वहां खर्च कर देते हैं। हर साल 28 लाख करोड़ रु. टैक्स दे रहे अपनी कुल आबादी के हिसाब से देखें तो 4 गुना से भी ज्यादा टैक्स दे रहे भारतवंशी। – भारतीय डायस्पोरा की औसत आयु 36 साल है, अमेरिकियों की 39.2 है। – भारतवंशियों की औसत आय 1.36 लाख डॉलर है, जो अमेरिकियों के 70 हजार डॉलर के मुकाबले करीब दोगुनी। – फॉर्च्यून 500 कंपनियों के सीईओ में 16 भारतवंशी, ये 25 लाख जॉब दे रहे। 91 हजार करोड़ सालाना दे रहे छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों को 2008 से तीन अरब डॉलर से ज्यादा दान दे चुके भारतवंशी। – ओपन डोर्स के अनुसार 2022-23 में भारत से 2.7 लाख छात्रों ने अमेरिकी विवि में स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री के लिए दाखिला लिया, जो अमेरिका में विदेशी छात्र आबादी का 25% है। – ये छात्र सालाना 91,000 करोड़ रुपए खर्च करते हैं। 93,000 नौकरियां पैदा होती हैं। अमेरिका के 60% होटल भारतवंशियों के होटल कारोबार में भारतीयों की भागीदारी 1940 के दशक में कांजी देसाई से शुरू हुई। – भारतवंशी लगभग 60% होटलों के मालिक हैं, जिससे सालाना लगभग 64 लाख करोड़ रु. राजस्व आता है और 40 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं। – भारतवंशी 35-50% छोटी दुकानों के भी मालिक हैं। इनसे करीब 45 लाख करोड़ रु. का राजस्व अर्जित होता है। यूएस में 1.1 करोड़ नौकरियां पैदा कर दीं जहां ज्यादा भारतवंशी काम करते हैं, ऐसे सेक्टर अपेक्षाकृत अधिक रोजगार दे रहे। – अमेरिका में सीधे काम करने वाले 31 लाख भारतीय, 1.15 करोड़ से भी ज्यादा नौकरियां पैदा कर चुके हैं। – जहां अधिकांश भारतवंशी काम करते हैं, जैसे- स्टेम, कारोबार व कला, वे 3.9 गुना जॉब पैदा करते हैं, जबकि बाकी सेक्टरों में ये आंकड़ा 2.7 गुना है। अमेरिका में भारतीय मूल का हर परिवार सालाना औसतन 2.8 करोड़ रुपए खर्च कर रहा। इन्होंने बनाई रिपोर्ट बीसीजी और इंडियास्पोरा ने ‘अमेरिका में भारतीय डायस्पोरा’ नाम से यह रिपोर्ट तैयार की। बीसीजी (बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप) दुनिया की सबसे बड़ी मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनियों में शुमार है। वहीं, अमेरिकी संगठन इंडियास्पोरा दुनिया भर के भारतीय मूल के प्रभावशाली लोगों को एकजुट कर उन्हें सकारात्मक कार्यों में हिस्सेदार बना रहा है।

डाइट करने वालों की पहली पसंद बना लेट्यूस, क्या सच में करता है वजन कम?..यहां जानिए सच्चाई

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Last Updated:March 15, 2026, 14:01 IST डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि लेट्यूस एक हरी पत्तेदार सब्जी है जिसमें कैलोरी बहुत कम होती है और पानी की मात्रा काफी ज्यादा होती है. यही वजह है कि इसे खाने से पेट जल्दी भर जाता है, लेकिन शरीर में ज्यादा कैलोरी नहीं पहुंचती. वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह खास फायदा देता है. आजकल हेल्दी डाइट की बात होती है, तो सबसे पहले जिस हरी सब्जी का नाम सामने आता है, वह है लेट्यूस. सलाद, सैंडविच और बर्गर में इस्तेमाल होने वाला यह पत्ता अब डाइट करने वालों की प्लेट का अहम हिस्सा बन गया है. सोशल मीडिया से लेकर फिटनेस एक्सपर्ट तक इसे वजन कम करने में मददगार बता रहे हैं.,लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में लेट्यूस खाने से वजन कम होता है या यह सिर्फ एक ट्रेंड बनकर रह गया है. डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि लेट्यूस एक हरी पत्तेदार सब्जी है जिसमें कैलोरी बहुत कम होती है और पानी की मात्रा काफी ज्यादा होती है. यही वजह है कि इसे खाने से पेट जल्दी भर जाता है, लेकिन शरीर में ज्यादा कैलोरी नहीं पहुंचती. वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए यह खास फायदा देता है. इसमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाने में भी मदद करता है, जिससे लंबे समय तक भूख कम लगती है. वजन कम करने के लिए सबसे जरूरी होता है कम कैलोरी और ज्यादा पोषण वाला खाना. लेट्यूस इस मामले में काफी अच्छा विकल्प माना जाता है. इसमें विटामिन A, विटामिन C और कुछ जरूरी मिनरल्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को जरूरी पोषण देते हैं. इसलिए कई लोग भारी भोजन की जगह सलाद में लेट्यूस को शामिल करना पसंद करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google लेट्यूस का एक और फायदा यह है कि यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसमें लगभग 90 प्रतिशत तक पानी होता है, जिससे शरीर को ताजगी मिलती है. गर्मियों के मौसम में इसे खाने से शरीर को हल्कापन महसूस होता है. यही वजह है कि कई लोग इसे रोजाना के सलाद में शामिल करते हैं. सिर्फ लेट्यूस खाकर वजन कम करना संभव नहीं है.वजन घटाने के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी होती है. अगर कोई व्यक्ति सिर्फ लेट्यूस खाकर बाकी पोषक तत्वों को नजरअंदाज करता है तो इससे शरीर को नुकसान भी हो सकता है. इसलिए इसे एक हेल्दी डाइट का हिस्सा बनाकर खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है. आजकल कई फिटनेस प्रेमी लोग लेट्यूस रैप, लेट्यूस सलाद और स्मूदी जैसी चीजें भी ट्राई कर रहे हैं. यह न सिर्फ स्वाद में हल्का होता है बल्कि पेट के लिए भी आरामदायक माना जाता है. खासकर जो लोग ज्यादा ऑयली या भारी खाना नहीं खाना चाहते, उनके लिए यह एक अच्छा विकल्प बन सकता है. लेट्यूस वजन कम करने की डाइट में मदद जरूर कर सकता है, लेकिन यह कोई जादुई उपाय नहीं है. अगर इसे संतुलित भोजन, नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ जोड़ा जाए तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. इसलिए वजन घटाने के लिए सिर्फ एक चीज पर निर्भर रहने की बजाय पूरी डाइट और दिनचर्या पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है. First Published : March 15, 2026, 13:59 IST

बड़वानी में शवयात्रा आधे घंटे जाम में फंसी रही:सिद्धेश्वर मंदिर से मंडी मार्ग तक फंसे रहे वाहन, हजारों लोग हुए परेशान

बड़वानी में शवयात्रा आधे घंटे जाम में फंसी रही:सिद्धेश्वर मंदिर से मंडी मार्ग तक फंसे रहे वाहन, हजारों लोग हुए परेशान

बड़वानी में रविवार को एक शवयात्रा आधे घंटे से अधिक समय तक जाम में फंसी रही। यह घटना सिद्धेश्वर मंदिर से कृषि उपज मंडी तक लगे लंबे जाम के कारण हुई, जहां हाट बाजार की वजह से भारी भीड़ थी। रविवार सुबह करीब 11 बजे शहर के राजघाट रोड स्थित कृषि उपज मंडी और उसके बाहर की दुकानों पर हजारों की संख्या में लोग खरीदारी के लिए उमड़ पड़े थे। इसके चलते सिद्धेश्वर मंदिर से कृषि उपज मंडी तक पूरे मार्ग पर वाहनों और लोगों की लंबी कतारें लग गईं। इस दौरान यातायात व्यवस्था संभालने के लिए कोई भी यातायात पुलिसकर्मी या कोतवाली पुलिस जवान मौके पर मौजूद नहीं था। इसी जाम में एक शवयात्रा भी फंस गई। शव वाहन में रखी अर्थी आधे घंटे से ज्यादा समय तक जाम में फंसी रही। परिजनों ने भीड़ से निकलने के लिए काफी मशक्कत की और गुहार लगाई, लेकिन रास्ता नहीं मिल पाया। कड़ी मशक्कत के बाद परिवार के लोग शव वाहन को धीरे-धीरे जाम से बाहर निकालने में सफल रहे, जिसके बाद अंतिम संस्कार हो सका। मनीष पुरोहित ने बताया कि वे बालाजी हॉस्पिटल जा रहे थे और जाम में फंस गए। वहीं, मंडी पहुंचे विपुल ने बताया कि वे धनिया और सौंफ खरीदने आए थे, लेकिन सुबह 10:30 बजे से ही सिद्धेश्वर मंदिर से कृषि उपज मंडी तक पूरे मार्ग पर जाम के हालात बन गए थे। तस्वीरें देखिए…

जाकिर खान अस्पताल में एडमिट:छोटे भाई अरबाज के रमजान व्लॉग में लीलावती हॉस्पिटल में दिखे कॉमेडियन

जाकिर खान अस्पताल में एडमिट:छोटे भाई अरबाज के रमजान व्लॉग में लीलावती हॉस्पिटल में दिखे कॉमेडियन

कॉमेडियन जाकिर खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें वह अस्पताल में भर्ती दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो जाकिर खान के छोटे भाई अरबाज खान ने अपने रमजान व्लॉग में शनिवार को शेयर किया था। व्लॉग में वह दर्शकों को अस्पताल का वह कमरा दिखाते हैं, जहां जाकिर भर्ती हैं। वीडियो में जाकिर एक हॉस्पिटल का गाउन पहने हुए दिख रहे हैं, जिस पर लीलावती हॉस्पिटल का नाम छपा हुआ है। वीडियो में जाकिर और उनके भाई को ICC मेन्स T20 वर्ल्ड कप के दौरान इंडिया बनाम इंग्लैंड मैच देखते हुए भी देखा जा सकता है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि जाकिर 5 मार्च के आसपास अस्पताल में एडमिट हुए। हालांकि अस्पताल में भर्ती होने का कारण अभी सामने नहीं आया है और यह भी जानकारी सामने नहीं आई है कि वह अभी भी अस्पताल में एडमिट हैं या नहीं। वीडियो वायरल होने के बाद फैंस ने सोशल मीडिया पर उनकी सेहत को लेकर सवाल पूछे और जल्द ठीक होने की कामना की। जाकिर ने स्टैंड-अप कॉमेडी से ब्रेक लेने की बात कही थी गौरतलब है कि यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब जाकिर ने हाल ही में स्टैंड-अप कॉमेडी से ब्रेक लेने की बात कही थी। जनवरी में हैदराबाद में एक शो के दौरान उन्होंने कहा था कि वह अपनी सेहत और कुछ अन्य चीजों पर ध्यान देने के लिए ब्रेक लेना चाहते हैं। हालांकि बाद में जाकिर खान ने हेल्थ को लेकर चल रही अटकलों पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि इस स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।