अशोकनगर में विधानसभा अध्यक्ष के काफिले की गाड़ियां टकराईं:निर्माणाधीन सड़क पर गिट्टी से हुआ हादसा, नरेंद्र सिंह तोमर सुरक्षित

अशोकनगर-देहरदा मार्ग पर जंघार गांव के पास मंगलवार शाम को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के काफिले की दो गाड़ियां आपस में टकरा गईं। यह हादसा निर्माणाधीन सड़क के किनारे पड़े गिट्टी के ढेर की वजह से हुआ, जिसमें पीएसओ और फॉलो वाहन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। गनीमत रही कि हादसे में विधानसभा अध्यक्ष सहित सभी लोग सुरक्षित हैं और किसी को भी चोट नहीं आई है। घटना के समय काफिला ईसागढ़ से देहरदा मार्ग पर आगे बढ़ रहा था। रास्ते में निर्माणाधीन सड़क का काम चल रहा था। इसी दौरान काफिले में पीछे चल रही पीएसओ (PSO) की गाड़ी सड़क किनारे पड़े गिट्टी के ढेर से अनियंत्रित होकर टकरा गई। पीएसओ की गाड़ी के अचानक रुकने से उसके ठीक पीछे आ रही फॉलो गाड़ी भी आगे वाली गाड़ी से जा भिड़ी। पूर्व विधायक को श्रद्धांजलि देकर लौट रहे थे तोमर यह घटना उस वक्त हुई जब विधानसभा अध्यक्ष का काफिला महुअन गांव से वापस लौट रहा था। नरेंद्र सिंह तोमर महुअन गांव में पूर्व विधायक स्वर्गीय राव राजकुमार सिंह यादव को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए पहुंचे थे। विधानसभा अध्यक्ष की गाड़ी आगे थी, पूरी तरह सुरक्षित हादसे के दौरान विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर जिस मुख्य गाड़ी में सवार थे, वह काफिले में सबसे आगे चल रही थी। हादसे वाली जगह से उनकी गाड़ी पहले ही आगे निकल चुकी थी, इसलिए वे और उनका वाहन पूरी तरह से सुरक्षित रहे। दोनों गाड़ियों को हुआ नुकसान, कोई जनहानि नहीं इस आपस की टक्कर के कारण पीएसओ वाली गाड़ी का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं, पीछे से टकराने के कारण फॉलो गाड़ी का भी अगला हिस्सा डैमेज हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, इस हादसे में किसी भी व्यक्ति को कोई गंभीर चोट नहीं आई है और कोई जनहानि नहीं हुई है।
NHAI की कंस्ट्रक्शन कंपनी में महिला मजदूर से रेप:खंडवा में पीड़िता बोली- नहाते वक्त बाथरूम में घुसा आरोपी; सीधी जिले की रहने वाली है

खंडवा जिले के मांधाता (ओंकारेश्वर) थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे का निर्माण कर रही एक कंपनी के कैंप में महिला मजदूर के साथ ज्यादती का मामला सामने आया है। पीड़िता मूल रूप से सीधी जिले की रहने वाली है। मोरटक्का चौकी पुलिस ने महिला की शिकायत पर केस दर्ज कर फरार आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। 22 वर्षीय पीड़िता अपने पति और रिश्तेदारों के साथ इंदौर-एदलाबाद नेशनल हाईवे परियोजना के तहत मोरगढ़ी गांव के पास केदारेश्वर कंस्ट्रक्शन कंपनी में मजदूरी करती है। 4 मार्च (होली) को काम की छुट्टी थी। सुबह करीब 10 बजे पीड़िता के पति सनावद राशन लेने गए हुए थे। महिला नहाने के लिए बाथरूम गई थी, तभी उसी के गांव का रहने वाला मजदूर धरमराज (पिता राजेश साकेत) अंदर घुस आया और उसके साथ ज्यादती की। आरोपी ने घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। गांव भाग गया आरोपी, पुलिस की टीम सीधी रवाना घटना के दो दिन बाद पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर अपने पति को आपबीती बताई। आरोपी धरमराज को जब इसका पता चला, तो उसने पीड़िता के पति और रिश्तेदारों से झगड़ा किया और अपने गांव (सीधी) भाग गया। आरोपी ने वहां से भी फोन पर जान से मारने की धमकियां दीं। मोरटक्का चौकी प्रभारी लखन डावर ने बताया कि सोमवार को महिला ने शिकायत की थी। मंगलवार को केस दर्ज कर पीड़िता का मेडिकल कराया गया है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की एक टीम सीधी जिले के लिए रवाना कर दी गई है। बाथरूम में दरवाजे नहीं, महिला आरक्षक ने दी साड़ी पुलिस जब मौका मुआयना करने कंस्ट्रक्शन कंपनी के वेयरहाउस पहुंची, तो वहां मजदूरों की स्थिति बेहद खराब मिली। कैंप में महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग बाथरूम तो बनाए गए हैं, लेकिन उनमें दरवाजे ही नहीं हैं। इसी लापरवाही का फायदा आरोपी ने उठाया। मजदूरों ने पुलिस को बताया कि कंस्ट्रक्शन कंपनी ने पिछले चार महीने से उन्हें वेतन नहीं दिया है। पैसे न होने के कारण मजदूरों के पास राशन और कपड़ों तक का अभाव है। पीड़िता के पास भी पहनने के लिए केवल एक साड़ी थी, जिसके बाद एक महिला आरक्षक ने उसे नई साड़ी खरीदकर दी।
मधुबाला बायोपिक में अनीत पड्डा की एंट्री की खबरें गलत:सैयारा फेम एक्ट्रेस के नाम पर अफवाहें तेज, कास्टिंग में अभी किसी का नाम तय नहीं

लेजेंडरी एक्ट्रेस मधुबाला की जिंदगी पर बनने वाली बायोपिक को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चर्चाएं हो रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि फिल्म में मधुबाला का किरदार सैयारा फेम एक्ट्रेस अनीत पड्डा निभाने वाली हैं। हालांकि अब इंडस्ट्री सूत्रों ने इन खबरों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। इंडस्ट्री सोर्स के मुताबिक, अनीत पड्डा को मधुबाला की बायोपिक से जोड़ना पूरी तरह गलत है। सोर्स ने साफ कहा, “अनीत पड्डा को लेकर जो खबरें चल रही हैं, उनमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए कास्ट किए जाने की बात सिर्फ अफवाह है। फिलहाल इस फिल्म की कास्टिंग को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।” दरअसल, मधुबाला की बायोपिक को लेकर समय-समय पर अलग-अलग अभिनेत्रियों के नाम सामने आते रहे हैं। इससे पहले इस भूमिका के लिए दीपिका पादुकोण, कंगना रनोट, माधुरी दीक्षित और कियारा आडवाणी जैसे नाम भी चर्चाओं में रह चुके हैं। हालांकि इनमें से किसी भी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। हाल ही में अनीत पड्डा का नाम सामने आने के बाद यह चर्चा एक बार फिर तेज हो गई थी। मधुबाला भारतीय सिनेमा की सबसे खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं। उन्होंने अपने करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया और अपनी अदाकारी के साथ-साथ अपनी खूबसूरती के लिए भी जानी गईं। उनकी फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में शामिल है। इसी वजह से उनकी जिंदगी पर बनने वाली बायोपिक को लेकर दर्शकों में खास उत्सुकता बनी हुई है। फिल्म प्रेमी यह जानने के लिए उत्साहित हैं कि आखिर बड़े पर्दे पर मधुबाला का किरदार कौन निभाएगा। फिलहाल इंडस्ट्री सूत्रों के बयान के बाद इतना साफ हो गया है कि अनीत पड्डा का नाम इस फिल्म से जोड़ना महज अफवाह है। मेकर्स सही समय आने पर ही फिल्म की कास्टिंग और बाकी जानकारी की आधिकारिक घोषणा करेंगे।
how to lose 14kg weight in 3 months | 3 महीने में 14 किलो वजन कैसे कम करें

Last Updated:March 10, 2026, 18:42 IST How to lose 14kg weight: क्या आप इस गर्मी में वजन कम करना चाहते हैं तो इसके लिए मन में ठान लीजिए. फिटनेस कोच डैन गो इस बारे में 24 घंटे का सीक्रेट प्लान बताया है. उनका यह प्लान आपके वजन कम करने के सफर का ‘रोडमैप’ साबित हो सकता. फिटनेस एक्सपर्ट्स डैन गो का मानना है कि 3 महीने का समय शरीर में बड़े और स्थायी बदलाव लाने के लिए पर्याप्त होता है, बशर्ते आपका नजरिया वैज्ञानिक और संतुलित हो. तो आइए उनके प्लान के बारे में जानते हैं. फिटनेस कोच डैन गो ने बताया है 3 महीने का प्लान. Photo: Canva How to lose 14kg weight: इस गर्मी में वजन कम करना ठान ही लीजिए. अगर आपको लगता है कि इसके लिए बहुत मेहनत की दरकार है तो इसे मन से निकाल लीजिए. वजन कम करना इतना भी मुश्किल नहीं है. दरअसल, फिटनेस कोच डैन गो ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक आसान समर फिटनेस प्लान साझा किया है. डैन गो को लोगों की फिटनेस को बेहतर बनाने का 20 साल से ज्यादा अनुभव है. उन्होंने बताया कि अगर सही तरीके से डेडिकेशन के साथ मेहनत की जाए तो तीन महीने यानी इस गर्मी में आप 14 किलो तक वजन कम कर सकते हैं. इसके लिए उन्होंने पूरा रूटीन और डाइट प्लान बताया है. आइए इसके बारे में जानते हैं. पहले खाने पर ध्यान देंफिटनेस कोच डैन गो ने सबसे पहले डाइट प्लान बताया है. यह तो हम सबको भी पता है कि यदि हमें अपना वजन कम करना है तो बाहर का खाना हमें बंद करना होगा. इसके लिए हमें खुद से कुदरती खाना बनाकर खाना होगा. डैन गो बताते हैं कि अगर 3 महीने में 14 किलो वजन कम करना है तो अपनी डाइट में सबसे पहले प्रोटीन को बढ़ाओ. इसके लिए ग्रीक योगर्ट, चिकन ब्रेस्ट, चिकन थाई, टर्की, फैटी फिश, अंडे और अंडे का सफेद भाग, पनीर (कॉटेज चीज), आदि का हर दिन सेवन करना होगा. इसके बाद भोजन को संतुलित करने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, आलू, शेलफिश, बीन्स और दालें रोज खानी होगा. ऐसा नहीं है कि इनमें से सब चीज रोज खाना है. इनमें से बदल-बदलकर आप इन चीजों को खा सकते हैं. इसके साथ रोज कुछ न कुछ फल जरूर खाएं. जैसे बेरीज़, सेब, संतरा, कीवी और ग्रेपफ्रूट जैसे फाइबर वाले फलों का सेवन करें. डैन गो कहते हैं कि बहुत सारा पानी पिएं और सीमित मात्रा में कॉफी का भी सेवन करें. इस तरह आप अपनी डाइट को संतुलित कर सकते हैं. खाने का समय जरूरीफिटनेस कोच डैन गो कहते हैं कि आप क्या खाते हैं, यह तो मायने रखता ही है लेकिन आप कब खाते हैं यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने सलाह दी कि सोने से कम से कम 3 से 5 घंटे पहले खाना बंद कर देना चाहिए. अक्सर हमारे यहां गांव में शाम होते ही लोग खा लेते हैं. अगर ऐसा ही किया जाए तो इसका सेहत पर बहुत अधिक फायदा होता है. इससे रात में अनहेल्दी या गलत खाने की आदत से बचा जा सकता है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है. अच्छी नींद अगले दिन भूख को नियंत्रित रखने में मदद करती है. इतना ही नहीं दिन में खाने की सही संख्या तय करना भी जरूरी है, जैसे दिन में 2 से 3 बार भोजन करना. खाने का समय भी नियमित होना चाहिए. सुबह उठने के 1–2 घंटे के भीतर पहला भोजन कर लें और दूसरा भोजन उसके बाद तय समय पर लें. इससे शरीर की दिनचर्या संतुलित रहती है. View this post on Instagram
नीमच में लैब टेक्नीशियन ने लगाई फांसी, मौत:3 महीने से पत्नी के घर नहीं आने के कारण डिप्रेशन में था

नीमच शहर के अल्कोलाइड कॉलोनी में मंगलवार को एक 32 साल के युवक रोहित मेघवाल ने अपने घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। परिजनों ने उसे फंदे से उतारकर तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। केंट थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, रोहित के पिता अल्कोलाइड फैक्ट्री में लैब टेक्नीशियन हैं। बताया जा रहा है कि रोहित की पत्नी नर्स है और वह पिछले तीन महीने से अपनी ड्यूटी पर थी और नीमच नहीं आई थी। इसी बात को लेकर रोहित काफी समय से तनाव (डिप्रेशन) में चल रहा था। पुलिस कर रही है जांच केंट थाना प्रभारी निलेश अवस्थी ने बताया कि फिलहाल खुदकुशी की असली वजह साफ नहीं हो पाई है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर पत्नी के घर न आने से डिप्रेशन की बात सामने आई है। पुलिस ने बुधवार को शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजन को सौंप दिया है। अब परिवार और आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।
गर्मी में अंगूर पेट में लगा देगा आग! एक्सपर्ट से जानें खाने का सही तरीका, वरना अस्पताल जाना पड़ेगा

Last Updated:March 10, 2026, 18:21 IST Summer Health Tips: गर्मी में प्यास बुझाने, फिट रहने के लिए हम रसीले फलों का जमकर सेवन करते हैं. इसमें सबसे पहले शुरुआत अंगूर से होती है. लेकिन, अंगूर कई बार एसिडिटी का कारण बन सकता है. कई बीमारियों के प्रभाव को बढ़ा सकता है. सिर्फ अंगूर ही नहीं, कुछ और फल भी हैं, जिनको खाने से पहले सोचना चाहिए. जानें क्यों.. Summer Health Tips: गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाजार में मौसमी फलों की भरमार दिखने लगती है. इस समय अंगूर, तरबूज, संतरे जैसे फल खूब बिक रहे हैं. आम भी जल्द ही आने वाला है. लोग भी इन फलों का सेवन शुरू कर चुके हैं. खासकर अंगूर को लोग स्वाद और सेहत दोनों के लिए अच्छा मानते हैं. हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि किसी भी फल को खाने का सही समय बहुत मायने रखता है. अगर फल सही समय पर खाए जाएं तो शरीर को फायदा मिलता है, लेकिन गलत समय पर खाने से नुकसान भी हो सकता है. कई लोग सुबह उठते ही खाली पेट या रात को सोते समय फल खा लेते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. खरगोन के आयुर्वेद विशेषज्ञ (एमडी) डॉ. संतोष मौर्य बताते हैं कि अंगूर सेहत के लिए फायदेमंद फल माना जाता है. यह शरीर को ठंडक देता है और कई तरह की बीमारियों में मददगार भी होता है. गर्मी में अंगूर खाने से शरीर में पानी की कमी भी नहीं होती. लेकिन, अगर इसका सेवन गलत समय पर किया जाए तो परेशानी भी हो सकती है. चूंकि, सुबह खाली पेट अंगूर खाना सही नहीं माना जाता. इससे पेट में भारीपन, सर्दी, जुकाम या खांसी जैसी समस्या भी हो सकती है, इसलिए इसका सेवन सही समय पर ही करना चाहिए. शुगर पेशेंट को खाना चाहिए अंगूर? डॉ. मौर्य का कहना है कि शुगर के मरीजों को अंगूर खाते समय खास सावधानी रखना चाहिए. अंगूर में प्राकृतिक शुगर की मात्रा ज्यादा होती है. अगर इसे ज्यादा मात्रा में खाया जाए तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है. ऐसे मरीजों को अंगूर सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. साथ ही सुबह खाली पेट या रात के समय अंगूर खाने से भी बचना चाहिए. इससे शरीर पर गलत असर पड़ सकता है. अंगूर खाने का सही समय क्या है?डॉक्टर के मुताबिक, अंगूर खाने का सबसे अच्छा समय दोपहर या खाना खाने के बाद माना जाता है. इस समय शरीर का पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है. ऐसे में अंगूर खाने से शरीर को सही तरीके से पोषण मिलता है. गर्मी के दिनों में अंगूर शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा भी कम होता है, इसलिए सही समय पर इसका सेवन करना शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है. इन फलों को भी खाली पेट खाने से बचेंहेल्थ एक्सपर्ट डॉ. संतोष मौर्य यह भी बताते हैं कि अंगूर के अलावा कुछ और फल भी हैं, जिन्हें सुबह खाली पेट नहीं खाना चाहिए. इनमें तरबूज, केला, आम, संतरा और अनानास शामिल हैं. इन फलों को खाली पेट खाने से पेट से जुड़ी दिक्कतें बढ़ सकती हैं. क्योंकि, खाली पेट इन फलों का सेवन करने से पेट में जलन, एसिडिटी, मुंह में छाले, चेहरे पर पिंपल और पाचन से जुड़ी समस्या हो सकती है. कुछ मामलों में शरीर का शुगर लेवल भी बढ़ सकता है और मैग्नीशियम का संतुलन भी बिगड़ सकता है, इसलिए फलों को सही समय और सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें Location : Khargone,Madhya Pradesh First Published : March 10, 2026, 18:21 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
सुप्रीम कोर्ट में लुधियाना के याचिकाकर्ता को फटकार:CJI ने कहा- जाओ लुधियाना 2-3 और स्वेटर बेचो, याचिका लिखने वाले नुकसान कर देंगे

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक नाटकीय घटनाक्रम हुआ। इस घटनाक्रम के केंद्र में लुधियाना का एक होजरी कारोबारी रहा। लुधियाना के कारोबारी ने भारी भरकम कानूनी शब्दों वाली एक जनहित याचिका दायर की। याचिका पीएम केयर्स फंड के बारे में लगाई गई थी। सीजेआई व दो अन्य जजों की पीठ को याचिका पर शक हुआ तो सीजेआई ने कह दिया कि याचिकाकर्ता इसमें किसी और का मुखौटा बनकर काम कर रहा है। सीजेआई ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाई और उन्हें पास लुधियाना जाकर स्वेटर बेचने को कहा। पीएम केयर्स फड से संबंधित केस की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ कर रही थी। याचिका में कुछ ऐसे शब्द लिखे थे जिसका मतलब याचिकाकर्ता रजनीश सिद्धू खुद नहीं जानते थे। याचिका देख सीजेआई ने पूछी क्वालिफिकेशन सीजेआई ने जब याचिकाकर्ता की याचिका पढ़ी तो तुरंत उससे उसकी क्वालिफिकेशन पूछ ली। जिस पर उसने कहा कि वह 12 वीं पास है और होजरी का कारोबार करता है। जब CJI ने उनके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि पिछले साल उन्होंने लगभग 5.25 लाख रुपए टैक्स भरा था। याचिकाकर्ता ने जब कहा कि उसने पहले कभी किसी हाईकोर्ट में कोई याचिका दायर नहीं की है और यह उनका सीधे सुप्रीम कोर्ट में पहला मामला है। जिस पर सीजेआई ने कहा कि बड़ा बहादुरी का काम किया, सीधा लुधियाना से चलके आ गए। याचिका के मसौदे पर संदेह और ‘परीक्षा’ की चुनौती याचिका के मसौदे पर सीजेआई को शक हुआ तो उन्होंने याचिकाकर्ता को कहा कि मैं आपका एग्जाम करवाऊंगा, अगर आपके उसमें 30 प्रतिशत अंक भी आ गए तो मैं मान लूंगा कि पिटीशन आपने बनाई है। सीजेआई ने पूछा इमानदारी से बताएं याचिका किसने तैयार की CJI ने याचिकाकर्ता को इमानदारी से बताने को कहा कि याचिका किसने तैयार की है, अन्यथा उनके ITR विवरण साथ जोड़ने होंगे। याचिकाकर्ता अपने स्टैंड पर अड़े रहे और कहा, “सर, आप मेरा फोन चेक कर सकते हैं।” याचिकाकर्ता ने बताया कि शुरू में उन्होंने सितंबर में ‘मिस्टर दास’ नाम के एक टाइपिस्ट से इसका मसौदा तैयार करवाया था। विजिलेंस की जांच की धमकी दी तो बदला बयान जब कोर्ट ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो से जांच कराने की चेतावनी दी, तो याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि उन्होंने किसी वकील से सलाह नहीं ली है। उसने कहा कि मुझे किसी वकील पर भरोसा नहीं है, हालांकि मेरे कुछ अच्छे दोस्त वकील हैं। “फिडुशरी रिस्क” का अर्थ नहीं बता पाए याचिकाकर्ता CJI ने याचिका में इस्तेमाल किए गए शब्दों फिडुशरी रिस्क ऑफ कारपोरेट डोनर्स का अर्थ पूछा तो याचिकाकर्ता इसका उत्तर नहीं दे सके। जब उन्होंने अन्य दलीलें देना शुरू किया, तो CJI ने बीच में टोकते हुए कहा कि सिद्धू साहब, यह तो आपने कागज पर लिख रखा है, किसी वकील ने आपको लिख कर दिया है। अंतिम चेतावनी पर, याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया कि उन्होंने 3-4 एआई टूल की मदद से खुद ही याचिका तैयार की है, क्योंकि उनके पास वकील करने के पैसे नहीं थे। उन्होंने बताया कि जो टाइपिस्ट है, उनको 4 जैकेट गिफ्ट करी थी, बहुत अच्छे हैं वह, 1 घंटे का 1000 मांग रहे थे। कोर्ट का फैसला और चेतावनी पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को भविष्य में ऐसी तुच्छ याचिकाएं दायर न करने की चेतावनी दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा “याचिकाकर्ता ने बिना किसी जिम्मेदारी के यह याचिका दायर की है और अस्पष्ट, बेबुनियाद और अपमानजनक आरोप लगाए हैं। पूछताछ में हमने पाया कि याचिकाकर्ता लुधियाना के एक स्कूल से 10+2 पास एक छोटा व्यापारी है। याचिका की भाषा, शब्दावली और ‘संवैधानिक सिद्धांत’ याचिकाकर्ता की अपनी सोच के नहीं हो सकते।” याचिका खारिज करते हुए CJI ने अंत में कहा “जाओ लुधियाना में 2-3 और स्वेटर बेचो। जिन लोगों का काम ऐसी याचिकाएं फाइल करवाना है, वे आप पर जुर्माना (costs) लगवाकर आपका और नुकसान करवा देंगे।” सीजेआई और याचिकाकर्ता के बीच हुई बातचीत, पढ़िए… मुख्य न्यायाधीश : क्या आपने याचिका का मसौदा तैयार किया है? याचिकाकर्ता: जी, मैंने खुद तैयार किया है। मैं अपना फोन यहां जमा करा सकता हूं। मुख्य न्यायाधीश: आपकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या है? याचिकाकर्ता: 12वीं पास। मुख्य न्यायाधीश: किस स्कूल से? याचिकाकर्ता: सनातन धर्म स्कूल, लुधियाना। मुख्य न्यायाधीश: मैं यहीं अदालत में आपके लिए अंग्रेजी की परीक्षा आयोजित करवा दूंगा। अगर आप 30 अंक ले आते हैं, तब मैं इस पर विचार करूंगा। याचिकाकर्ता: जी हां, मैं दे सकता हूं। मुख्य न्यायाधीश: या तो आप सच बताइए, नहीं तो हम भारी जुर्माना लगाएंगे और जांच का आदेश देंगे। याचिकाकर्ता: आप मेरा फोन देख सकते हैं। मुख्य न्यायाधीश: आपने याचिका में लिखा है- “कॉरपोरेट दानदाताओं के लिए फिड्यूशियरी रिस्क”। इसका क्या मतलब है? वकील: मैं याचिका का हवाला दे सकता हूं। मुख्य न्यायाधीश: मैं आखिरी बार पूछ रहा हूं कि यह याचिका किस वकील ने तैयार की है। आपने यह खुद नहीं बनाई है। वकील: मैंने एआई टूल्स पर खोज की थी। मैंने एक टाइपिस्ट को चार जैकेट भी गिफ्ट की थीं और उसने टाइपिंग के लिए 1000 रुपए प्रति घंटे लिए थे। दास सर। मुख्य न्यायाधीश: सुप्रीम कोर्ट के टाइपिस्ट ने यह याचिका तैयार की है। टाइपिस्ट को यहां बुलाइए।
Health Tips : पहाड़ों की ये जड़ी संजीवनी, चुटकियों में कम होगा यूरिक एसिड, तेजी से बढ़ रही मांग

Last Updated:March 10, 2026, 18:11 IST Kilomoda Root Benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों पर उगने वाली जड़ी किलोमोड़ा स्वास्थ्य प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसका इस्तेमाल सदियों से होता आया है. यह जड़ी पहाड़ों की ताजगी और प्राकृतिक पोषण से भरपूर है. लोकल 18 से ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि किलोमोड़ा की जड़ को रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट पीते हैं. यह रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद करती है. यूरिक एसिड की समस्या में भी यह जड़ी रामबाण है. जोड़ों में सूजन और दर्द को भी कम करती है. ऋषिकेश. उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली जड़ी किलोमोड़ा अब स्वास्थ्य प्रेमियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसका इस्तेमाल पारंपरिक आयुर्वेद में सदियों से किया जाता रहा है और आधुनिक समय में भी लोग इसके औषधीय गुणों के कारण इसे अपनाने लगे हैं. स्थानीय लोग इसे “पर्वतीय औषधि” भी कहते हैं क्योंकि यह जड़ी पहाड़ों की ताजगी और प्राकृतिक पोषण से भरपूर होती है. लोकल 18 के साथ बातचीत में ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार बताते हैं कि किलोमोड़ा की प्रमुख विशेषता इसकी जड़ है. इसे रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट पीते हैं. ऐसा करने से यह शरीर के कई अंगों और रोगों पर लाभ पहुंचाती है. सबसे पहले यह रक्तचाप (बीपी) को संतुलित रखने में मदद करती है. इसके नियमित सेवन से उच्च रक्तचाप के मरीजों को फायदा मिल सकता है. यूरिक एसिड की समस्या में भी यह जड़ी असरदार है. यूरिक एसिड के स्तर को नियंत्रित करके यह जोड़ों में सूजन और दर्द को कम करती है. किलोमोड़ा केवल बीपी और यूरिक एसिड तक ही सीमित नहीं है. इसे पाचन तंत्र को मजबूत करने और पेट संबंधी समस्याओं जैसे कब्ज, गैस या अपच में राहत देने के लिए भी उपयोग किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, यह जड़ी शरीर से विषैले तत्वों को भी बाहर निकालती है, जिससे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और शरीर सामान्य बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है. कई लोग इसे सुबह खाली पेट पीते हैं और दिन भर हल्का और ऊर्जा से भरा महसूस करते हैं. हर उम्र के लिए रामबाण स्थानीय लोग किलोमोड़ा का इस्तेमाल अपनी परंपरा के अनुसार करते हैं और इसे प्राकृतिक तरीके से उगाया जाता है. किलोमोड़ा की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि यह हर उम्र के लोग आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि इसके सेवन का सही तरीका और मात्रा जानना जरूरी है, ताकि स्वास्थ्य लाभ अधिकतम हो और किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट से बचा जा सके. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand First Published : March 10, 2026, 18:11 IST
वाहन की टक्कर से बाइक सवार को सिर में चोट:मंडला-रायपुर रोड के चारटोला में हादसा, बिछिया अस्पताल में भर्ती

मंडला जिले के नेशनल हाईवे 30 पर वाहन की टक्कर से बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया। युवक के सिर में चोट लगी है। यह दुर्घटना मंडला-रायपुर रोड पर स्थित चारटोला (पाण्डुतला) के पास हुई। घायल को हाइवे हेल्पलाइन 1033 की एम्बुलेंस से बिछिया अस्पताल पहुंचाया गया है। घायल युवक की पहचान मोहनिया पटपरा निवासी ओमप्रकाश परते के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ओमप्रकाश अपनी बाइक से घर जा रहे थे, तभी हादसा हो गया। इस टक्कर में ओमप्रकाश गंभीर रूप से चोटिल हो गए। मौके पर दिया गया प्राथमिक इलाज स्थानीय लोगों ने तत्काल घटना की सूचना पुलिस और हाइवे हेल्पलाइन 1033 को दी। सूचना मिलते ही हाइवे हेल्पलाइन की एम्बुलेंस टीम, जिसमें ईएमटी रंजीत यादव और ड्राइवर शरद झारिया शामिल थे, मौके पर पहुंची। टीम ने घायल को प्राथमिक इलाज देकर बिछिया अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
चीन में 56 जातीय समूहों को एक पहचान मिलेगी:अलग-अलग समुदायों में शादी को बढ़ावा, बच्चों को कम्युनिस्ट पार्टी से प्रेम सिखाने की बात

चीन में जिनपिंग सरकार एक नए कानून को मंजूरी देने की तैयारी कर रही है, जिसमें अलग-अलग जातीय समूहों (एथनिक ग्रुप्स) को एक ही राष्ट्रीय पहचान दी जाएगी। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस कानून का नाम ‘लॉ ऑन प्रोमोटिंग एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस’ है। चीन में हान, उइगुर, तिब्बती, मंगोल जैसे 56 जातीय समूह हैं। चीन की सरकार पर लंबे समय से आरोप लगते रहे हैं कि वह देश के जातीय अल्पसंख्यकों (एथनिक माइनॉरिटी) को दबाने वाली नीतियां अपनाती है और उन्हें जबरन बहुसंख्यक हान चीनी संस्कृति में घुलने-मिलने के लिए मजबूर करती है। रिपोर्ट के मुताबिक अब चीन की संसद के सालाना सत्र में एक नया कानून पास होने वाला है। एक्सपर्ट्स और ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट का कहना है कि यह कानून अल्पसंख्यकों के अधिकारों तथा उनकी संस्कृति के लिए खतरा बढ़ाएगा। हालांकि चीन सरकार का कहना है कि यह कानून देश में लोगों के बीच एकता बढ़ाने और देश को आधुनिक बनाने के लिए जरूरी है। सरकार इसे ‘जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने वाला कानून’ बता रही है। नए कानून के कुछ मुख्य बातें- मंदारिन को ज्यादा अहमियत दी जाएगी। दूसरी भाषाओं का दर्जा घटेगा। अलग-अलग जातीय समूहों के बीच शादी को प्रोत्साहन मिलेगा और ऐसी शादी रोकने की कोशिशों को गलत माना जाएगा। माता-पिता को बच्चों को यह सिखाना होगा कि वे चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से प्रेम करें। अगर कोई व्यक्ति, संगठन या गतिविधि ऐसी बात कहे या करे जिससे अलग-अलग जातीय समुदायों के बीच झगड़ा, नफरत या अलग होने की मांग बढ़े, तो उस पर रोक लगाई जाएगी। जिनपिंग की नीति को मजबूत करेगा नया कानून चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहले भी कई बार धर्म के ‘चीनीकरण’ की बात कर चुके हैं। इसका मतलब है कि धार्मिक परंपराएं और प्रथाएं भी कम्युनिस्ट पार्टी के हिसाब से चीनी संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप होनी चाहिए। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि नया कानून इसी नीति को और मजबूत करेगा। पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के एरन ग्लासरमैन के मुताबिक, मंदारिन को बढ़ावा देने और अल्पसंख्यकों की पहचान तथा धार्मिक अभिव्यक्ति पर नियंत्रण जैसी नीतियां पहले भी लागू थीं। अब चीन सरकार इन नीतियों को सिर्फ नीति नहीं बल्कि कानून का रूप दे रही है। चीन में अल्पसंख्यक समुदायों पर बंदिशें चीन सरकार का कहना है कि इन हिंसक घटनाओं की वजह से कड़े कदम उठाना जरूरी था। लेकिन संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि 10 लाख से ज्यादा उइगर मुसलमानों को हिरासत शिविरों में रखा गया। चीन सरकार इन्हें ‘री-एजुकेशन और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र’ बताती है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उइगरों की धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाई गई और कई मस्जिदें बंद कर दी गईं। तिब्बत में भी मठों पर कड़ा नियंत्रण है। 18 साल से कम उम्र के बच्चों को अब सरकारी स्कूलों में मंदारिन भाषा में पढ़ाई करनी होती है और वे बौद्ध धार्मिक ग्रंथ नहीं पढ़ सकते। पहले बच्चे मठों के स्कूलों में जाकर भिक्षु बनने की ट्रेनिंग लेते थे। हाल के वर्षों में इनर मंगोलिया में मंगोलियन भाषा की पढ़ाई पर प्रतिबंध और निंग्शिया में हुई मुस्लिम मस्जिदों को गिराने के आदेश के बाद भी विरोध हुआ है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार को इन क्षेत्रों में अस्थिरता की आशंका के कारण नया कानून लाने की जरूरत महसूस हुई। इससे सरकार को उन इलाकों पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा जो चीन को पड़ोसी देशों और वैश्विक व्यापार मार्गों से जोड़ते हैं।







