‘पार्टी मेरा परिवार है, अजित दादा का सपना पूरा करेगी’: सुनेत्रा पवार ने NCP प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:27 फरवरी, 2026, 09:27 IST अपने पति और राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार की मृत्यु के एक महीने बाद सुनेत्रा पवार को एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। सुनेत्रा पवार ने शहरी क्षेत्रों में पार्टी का आधार बढ़ाने और संगठनात्मक प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया। (एक्स/@सुनेत्राअजितपवार) महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वसम्मति से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। अपने पति अजीत पवार की मृत्यु के लगभग एक महीने बाद पार्टी प्रमुख के रूप में चुनी गईं सुनेत्रा पवार ने कहा कि पार्टी उनका परिवार है और नई भूमिका संभालना उनके लिए एक दर्दनाक क्षण था लेकिन इसमें एक बड़ी जिम्मेदारी भी थी। अपने चुनाव के बाद पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी समाज के सभी वर्गों से जुड़ेगी. उन्होंने कहा, “सिर्फ पार्थ और जय ही नहीं, पूरी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी मेरा परिवार है।” इस पर पार्टी सदस्यों ने जोरदार तालियां बजाईं। आज राष्ट्रीय कांग्रेस पक्ष ‘राष्ट्रीय मानक 2026’ यशश्वीरिया पारले। या ताकतात मला पक्षाच्या राष्ट्रीय अध्यक्ष पदाची जबाबदारी सर्वानुमते सोपवून सर्वानि माझ्यावर विश्वास जो व्यक्ति केला, तबादल मी पक्षातिल सर्व ज्येष्ठ नेते, रूबाब, कार्यकर्ते भगिनी-बंधु और… pic.twitter.com/HbbJosXvxb– सुनेत्रा अजित पवार (@SunetraA_Pawar) 26 फ़रवरी 2026 शिव, शाहू, फुले और अंबेडकर की विचारधारा का आह्वान करते हुए उन्होंने आश्वासन दिया कि समाज के किसी भी वर्ग की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “मैं समाज के किसी भी वर्ग को पीछे नहीं छोड़ूंगी। हम सभी को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे।” उन्होंने कहा कि वह पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने और पूरे राज्य और उसके बाहर अपने संगठन को मजबूत करने के लिए ईमानदारी से प्रयास करेंगी। इस अवसर को दर्दनाक और बड़ी जिम्मेदारी का क्षण बताते हुए, पवार ने कहा कि पार्टी अभी भी अपने प्रिय नेता अजीत पवार के असामयिक निधन से उबर नहीं पाई है। उन्होंने कहा कि उनके निधन से एक खालीपन पैदा हो गया है जिसे कभी नहीं भरा जा सकेगा और वह पीछे छूट गई उम्मीदों और जिम्मेदारियों के प्रति गहराई से सचेत हैं। उन्होंने कहा, “वह सह्याद्रि जो दृढ़ता से खड़ी रही और हर संकट को अपने ऊपर ले लिया, अब हमारे साथ नहीं है। मैंने अजितदादा को महाराष्ट्र के विकास के लिए जीवन भर प्रयास करते देखा है। हम उनके सपने को अधूरा नहीं रहने देंगे… हम एक साथ मिलकर इसे पूरा करेंगे,” उनके योगदान को याद करते हुए उनकी आवाज भावनाओं से भर गई। उन्होंने दिग्गज नेता शरद पवार की मां शारदाबाई पवार की वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाने की भी बात की और कहा कि अब से उनका ध्यान महाराष्ट्र के कल्याण और उसके लोगों की भलाई पर होगा। उन्होंने शहरी क्षेत्रों में पार्टी का आधार बढ़ाने और संगठनात्मक प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि पार्टी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा फिर से हासिल करने और अपना आधार मजबूत करने की दिशा में काम करेगी। सुनेत्रा पवार का शीर्ष पद पर निर्वाचन यह निर्णय हाथ उठाकर लिया गया, जिसमें उपस्थित सभी सदस्यों ने अपना समर्थन दिया। यह घोषणा राकांपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल द्वारा की गई, जिससे पूर्व अध्यक्ष अजीत पवार के आकस्मिक निधन के लगभग एक महीने बाद पार्टी के नेतृत्व में स्पष्टता आई, जो 28 जनवरी को बारामती में एक विमान दुर्घटना में मारे गए थे। उन्होंने कहा, “पार्टी को कैसे काम करना चाहिए, इस पर बाहर से दावे और सलाह हो सकती है। लेकिन राकांपा सुनेत्रा पवार के मार्गदर्शन में आगे बढ़ेगी।” अजीत पवार ने 30 जून, 2023 को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था। अपने ढाई साल के कार्यकाल में, पार्टी ने कई चुनाव लड़े, जिनमें लोकसभा चुनाव, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव, नागरिक निकाय चुनाव और अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर और बिहार जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव शामिल हैं। चुनौतियों के बावजूद, पार्टी उनके नेतृत्व में अपनी पकड़ बनाने में कामयाब रही। पार्थ पवार राज्यसभा जाएंगे पटेल ने यह भी घोषणा की कि पार्थ पवार राज्यसभा सीट के चुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार होंगे, जो उनकी मां सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। लोकसभा चुनाव में हार के बाद जून 2024 में सुनेत्रा पवार को एनसीपी से राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्विरोध चुना गया। पटेल ने कहा कि जीत के लिए 37 वोटों की जरूरत है और पार्टी के पास 40 विधायकों का समर्थन है, उन्होंने विश्वास जताया कि वे सभी सर्वसम्मति से पार्थ पवार को वोट देंगे। पहले प्रकाशित: 27 फरवरी, 2026, 09:27 IST समाचार राजनीति ‘पार्टी मेरा परिवार है, अजित दादा के सपने को पूरा करेगी’: सुनेत्रा पवार ने NCP प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)सुनेत्रा पवार एनसीपी अध्यक्ष(टी)सुनेत्रा पवार चुनाव(टी)राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेतृत्व(टी)अजित पवार की मृत्यु(टी)महाराष्ट्र की राजनीति(टी)एनसीपी राष्ट्रीय सम्मेलन(टी)पार्थ पवार राज्यसभा(टी)एनसीपी पार्टी विचारधारा
हादसे रोकने के लिए वाहनों की स्पीड लिमिट 60 KM:गिट्टी-अतिक्रमण से मुक्त होंगे हाईवे, शहर में ट्रैफिक सिग्नल भी लगेंगे

भिण्ड जिले में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। शहरी एवं दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में वाहनों की अधिकतम स्पीड 60 किमी प्रतिघंटा निर्धारित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही हाईवे और शहर की सड़कों को गिट्टी, रेत व अतिक्रमण से मुक्त रखने के आदेश जारी किए गए हैं। यह निर्देश भिण्ड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में दिए। बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, नगर पालिका, पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों को समन्वय बनाकर संयुक्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सड़क किनारे डाली गई गिट्टी, निर्माण सामग्री और अवैध पार्किंग को तत्काल हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि शहरी सीमा में प्रवेश करने वाले मार्गों पर स्पीड लिमिट के बोर्ड प्रमुखता से लगाए जाएं। ओवरस्पीडिंग रोकने के लिए प्रमुख मार्गों और ब्लैक स्पॉट चिन्हित स्थानों पर डिटेक्शन कैमरे स्थापित किए जाएंगे। दुर्घटना संभावित स्थानों की सूची तैयार कर वहां रंबल स्ट्रिप, रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेतक लगाए जाएंगे। बैठक में दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट नहीं पहनने और नाबालिगों के वाहन चलाने पर चिंता व्यक्त की गई। पुलिस विभाग को सघन चेकिंग अभियान चलाकर बिना हेलमेट, बिना लाइसेंस और शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर अधिकतम चालानी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। स्कूल-कॉलेजों के आसपास विशेष निगरानी रखने को भी कहा गया है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए नगर पालिका भिण्ड को प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल शीघ्र स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इंदिरा गांधी चौराहा, लहार चुंगी चौराहा, सुभाष तिराहा और भारौली तिराहा पर सिग्नल लगाने की टेंडर प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है। कलेक्टर ने समयसीमा तय करते हुए जल्द कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके अलावा सड़कों के दोनों ओर अतिक्रमण हटाने, पैदल मार्गों को साफ रखने और अव्यवस्थित पार्किंग पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई निरंतर जारी रखने को कहा गया। हाईवे किनारे ढाबों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के सामने अनियमित पार्किंग पर भी सख्ती बरती जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि आम नागरिकों की भी भागीदारी आवश्यक है। सभी विभाग जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित करें। प्रशासन का दावा है कि इन ठोस कदमों से जिले में सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी और यातायात व्यवस्था अधिक सुरक्षित व सुगम बनेगी।
आरोप- बांग्लादेश सरकार ने डिफाल्टर को सेंट्रल बैंक गवर्नर बनाया:विपक्ष बोला- ये बर्दाश्त नहीं कर सकते, देश में भीड़तंत्र चल रहा

बांग्लादेश में सेंट्रल बैंक के नए गवर्नर की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष का आरोप है कि तारिक रहमान की सरकार ने एक डिफाल्टर को कारोबारी को सेंट्रल बैंक गवर्नर बना दिया है, जो देश में भीड़तंत्र की शुरुआत जैसा है। बांग्लादेश बैंक के नए गवर्नर के रूप में मोस्ताकुर रहमान की नियुक्ति के बाद राजनीतिक घमासान तेज हो गया। जमात ए इस्लामी के प्रमुख और विपक्ष के नेता शफीकुर रहमान ने कहा कि यह फैसला पीएम की शह पर लिया गया है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे पहले सरकार ने अहसान हबीब मंसूर का कार्यकाल अचानक खत्म कर दिया था, जिन्हें मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने नियुक्त किया था। मंसूर ने कहा कि उन्होंने न इस्तीफा दिया और न ही उन्हें हटाए जाने की कोई आधिकारिक सूचना मिली। उन्हें यह खबर मीडिया के जरिए पता चली। गारमेंट कारोबारी रहे हैं मोस्ताकुर रहमान मोस्ताकुर रहमान की नियुक्ति इसलिए अलग मानी जा रही है क्योंकि अब तक बांग्लादेश में केंद्रीय बैंक का गवर्नर आमतौर पर अनुभवी बैंकर, अर्थशास्त्री या वरिष्ठ सिविल सेवक होते रहे हैं। मोस्ताकुर एक कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट और गारमेंट कारोबारी हैं। वे हेरा स्वेटर्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं और हालिया चुनाव में तारिक रहमान की BNP पार्टी की केंद्रीय चुनाव संचालन समिति से भी जुड़े रहे थे। उनकी नियुक्ति को लेकर कर्ज चुकाने से जुड़े पुराने मामलों पर भी सवाल उठ रहे हैं। बीडी न्यूज24 की रिपोर्ट में कहा गया कि उनकी कंपनी 86 करोड़ टका का कर्ज समय पर नहीं चुका पाई थी। एक बैंक अधिकारी ने कहा कि जो इंसान अपनी ही कंपनी के लिए स्पेशल कंडीशन पर कर्ज का पुनर्गठन कराता है, वह देश के बैंकिंग सिस्टम के हितों की रक्षा कैसे करेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ ढाका के पूर्व प्रोफेसर दीन इस्लाम ने भी कहा कि किसी एक्टिव कारोबारी को केंद्रीय बैंक का गवर्नर बनाना गलत संदेश देता है और इससे हितों के टकराव की आशंका बढ़ती है। विपक्ष ने मोस्तकुर को गवर्नर बनाने पर विरोध जताया मोस्ताकुर की नियुक्ति के बाद विपक्षी नेता शफीकुर रहमान ने फेसबुक पर लिखा कि बांग्लादेश बैंक में जो हो रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा कि किसी को भी गवर्नर और उनके सलाहकारों जैसे सम्मानित लोगों को इस तरह अपमानित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से कई समस्याओं से जूझ रही है, तब बांग्लादेश बैंक जैसी महत्वपूर्ण संस्था में इस तरह की कार्रवाई बची हुई अर्थव्यवस्था को भी बर्बाद कर देगी। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और समाज के सभी वर्गों से विरोध करने की अपील की और कहा कि अगर सरकार सच में लोकतांत्रिक और भेदभाव-रहित बांग्लादेश बनाना चाहती है तो ऐसी गतिविधियां तुरंत बंद होनी चाहिए। जरूरी पदों पर नियुक्तियां योग्यता के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक निष्ठा के आधार पर। अहसान हबीब को गवर्नर पद से हटाने का विरोध विवाद की दूसरी बड़ी वजह उनकी नियुक्ति की परिस्थितियां हैं। अहसान हबीब मंसूर 2024 में चार साल के लिए गवर्नर बनाया गया था और उनका कार्यकाल अगस्त 2028 तक था, लेकिन 18 महीने से भी कम समय में ही उनका कार्यकाल खत्म कर दिया गया। मंसूर को हटाए जाने से पहले कुछ अधिकारियों ने उनके खिलाफ तानाशाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। हालांकि, मंसूर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों को साजिश बताया था। अहसान हबीब मंसूर की बर्खास्तगी से देश में कई लोग हैरान हैं। उन्हें 27 साल का अनुभव है। वे IMF जैसी संस्थाओं में काम कर चुके हैं। 2024 में शेख हसीना और उनकी अवामी लीग सरकार के हटने के बाद जब देश में आर्थिक अस्थिरता थी, तब उन्हें जिम्मेदारी दी गई थी। जब उन्होंने पद संभाला था तब फॉरेंन करेंसी रिजर्व 26 अरब डॉलर था। उनके पद छोड़ने तक यह बढ़कर 35 अरब डॉलर हो गया। उन्होंने टका को 122.20 प्रति डॉलर पर स्थिर किया और महंगाई दर को 2024 के 10.49% से घटाकर जनवरी 2026 में 8.58% तक लाने के लिए पॉलिसी अपनाईं। ढाका स्थित HSBC के डायरेक्टर शाहीर चौधरी ने लिखा कि मंसूर ने बहुत कठिन समय में जिम्मेदारी संभाली, जब बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा कमजोर था और 18 महीनों में हालात में सुधार आया। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव और रिकॉर्ड वाले इंसान को कार्यकाल पूरा करने का मौका न देना निराशाजनक है। वहीं NCP नेता नाहिद इस्लाम ने भी फेसबुक पर लिखा कि मंसूर को हटाकर सरकार ने फाइनेंशियल सेक्टर में लूट का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने कहा कि मंसूर ने पद संभालने के बाद फाइनेंशियल सेक्टर में अनुशासन बहाल करने में काफी सफलता हासिल की थी और मोस्ताकुर जैसे कारोबारी के हाथों में देश की सर्वोच्च बैंकिंग संस्था सुरक्षित नहीं रह सकती।
‘दादी मां के बटुए’ से सीखी विद्या, घर पर शुरू की आयुर्वेदिक क्लीनिक, अब हाउसवाइफ से वैद्य बनीं मालती

X ‘दादी मां के बटुए’ से सीखी विद्या, घर पर शुरू की आयुर्वेदिक क्लीनिक उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की मालती वर्मा जड़ी-बूटियों से आयुर्वेदिक दवाएं बनाकर आत्मनिर्भर बन गई है. ग्रेजुएशन के बाद हाउसवाइफ रही मालती ने दीनदयाल शोध संस्थान के दादी मां के बटुए कार्यक्रम से प्रशिक्षण लिया और घर पर छोटी क्लीनिक शुरू की. वह तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा, आंवला, ब्राह्मी और नीम जैसी औषधीय पौधों को जैविक तरीके से उगाकर चूर्ण, काढ़ा और अन्य दवाएं तैयार करती है. बिना रसायन बनी इन दवाओं से मरीजों को लाभ मिल रहा है. बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती और गोंडा से लोग इलाज के लिए पहुंचते है. एक साल में उनकी पहचान बढ़ी है और अच्छी आमदनी भी हो रही है.
3 दोस्तों की सोच से Ashwin AI बना डॉक्टरों का फ्रेंड! बातचीत सुनकर बनाता है मेडिकल रिकॉर्ड, दिल्ली AIIMS में होगी जल्द एंट्री

होमताजा खबरDelhi Ashwin AI बनेगा डॉक्टरों का बेस्ट फ्रेंड, बातचीत सुनकर बनाता है मेडिकल रिकॉर्ड Last Updated:February 27, 2026, 07:15 IST Delhi AIIMS Ashwin AI Medical : अश्विन एआई को तीन दोस्तोने बनाया है. इसे प्रभु राजगोपाल, अनिरुद्ध वर्ना और विजयराजा द्वारा विकसित किया गयाहै. जो AIIMS Delhi में हेल्थकेयर डॉक्यूमेंटेशन को आसान बनाकर मरीजों और डॉक्टरों के लिए मददगार साबित हो रहा है. आइये जानते हैं इसके बारे में ख़बरें फटाफट दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब भारत में भी लगभग हर क्षेत्र में शुरू हो चुका है, लेकिन भारत में खासकर कुछ ऐसे क्षेत्र हैं. जहां AI की सबसे अधिक आवश्यकता है. इनमें से एक प्रमुख क्षेत्र भारत का हेल्थकेयर सेक्टर है, जो काफी बड़ा है. जो अभी भी कई मामलों में अभी भी व्यवस्थित नहीं है. इसलिए यहां AI की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस की जा रही है. इस कड़ी में एक नया नाम Ashwin AI तेजी से उभरकर सामने आया है. यह एक AI-आधारित हेल्थकेयर टूल है, जिसे मरीजों और डॉक्टरों दोनों के काम को आसान बनाने के लिए विकसित किया गया है. ऐसे काम करता है Ashwin AI Ashwin AI के पीछे तीन दोस्तों की सोच और मेहनत है. प्रभु राजगोपाल जो आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर हैं और इस प्लेटफॉर्म में संस्थापक और अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं. अनिरुद्ध वर्ना सह-संस्थापक और सीटीओ हैं, जिन्होंने इसकी तकनीक को मजबूत बनाया है. जबकि विजयराजा सह-संस्थापक और सीओओ हैं. जो इसके ऑपरेशन और ग्रोथ को संभालते हैं. इन तीनों ने मिलकर एक ऐसा AI-आधारित हेल्थकेयर समाधान तैयार किया है, जिसका उद्देश्य डॉक्टरों का समय बचाना और मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाना है. Ashwin AI एक AI-powered क्लीनिकल डॉक्यूमेंटेशन प्लेटफॉर्म है, जो डॉक्टर और मरीज के बीच होने वाली बातचीत को सुनकर उसे अपने-आप डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड में बदल देता है. आसान शब्दों में कहें तो जो काम पहले डॉक्टरों को हाथ से लिखना या कंप्यूटर पर टाइप करना पड़ता था. वह अब AI खुद करता है और चाहे कितना भी पुराना रिकॉर्ड क्यों ना हो. वह सिस्टम में ही रहेगा और आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री कभी भी आप देख सकते हैं. कभी किसी डॉक्टर के पास जा रहे हैं तो उसे भी आप इस सिस्टम के माध्यम से अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री दिखा सकते हैं. यह सिस्टम रियल-टाइम में बातचीत को समझता है. साथ ही उसे व्यवस्थित क्लीनिकल डॉक्यूमेंटेशन में बदलता है और हेल्थकेयर वर्कफ्लो को आसान बनाता है. इससे डॉक्टर कागजी या डिजिटल फॉर्म भरने की बजाय मरीज पर ज़्यादा ध्यान दे पाते हैं. इसकी एक और खास बात यह भी है कि Ashwin AI कई भारतीय भाषाओं को ट्रांसक्राइब करने में सक्षम है और बातचीत को आसान भाषा में लिखित रूप में उपलब्ध करवा देगा. AIIMS Delhi में हुई एंट्री हाल ही में आयोजित AI समिट 2026 में Ashwin AI की जमकर सराहना हुई. जहां इसकी AI-based हेल्थकेयर तकनीक को खास तौर पर सराहा गया. इसके बाद यह प्लेटफॉर्म और अधिक चर्चा में आ गया. Ashwin AI अब सरकारी स्तर पर भी अपनी जगह बना रहा है. टीम इस समय NIC के साथ काम कर रही है और देश के सबसे बड़े मेडिकल संस्थानों में से एक AIIMS, दिल्ली भी जल्द ही अपने सिस्टम में Ashwin AI को इस्तेमाल करने जा रहा है. यह कदम भारत के हेल्थकेयर सिस्टम में AI पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें First Published : February 27, 2026, 07:13 IST
कंप्यूटर लैब में सिस्टम बंद, फिर भी छात्रों का प्रैक्टिकल:RDVV के छात्र बोले- सालों से ऐसा हो रहा; कांग्रेस विधायक ने विधासभा में उठाया मुद्दा

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग में गुरुवार को डिजिटल फॉरेंसिक थर्ड सेमेस्टर का फाइनल वाइवा और प्रैक्टिकल आयोजित हुआ, जिसके लिए कंप्यूटर आवश्यक थे। लेकिन छात्रों का आरोप है कि एक घंटे की लिखित परीक्षा के बाद जब उन्होंने प्रैक्टिकल के लिए कंप्यूटर मांगे तो शिक्षकों ने कह दिया कि उनका प्रैक्टिकल पूरा हो चुका है। इस पर छात्र कक्षा से बाहर निकल आए और नाराजगी जताई। उनका कहना है कि तीन सेमेस्टर में एक बार भी कंप्यूटर ठीक से चालू नहीं हुए, जबकि हर साल हजारों रुपये फीस ली जाती है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पढ़ाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। बिना लैब के तकनीकी पढ़ाई पर सवाल यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लिकेशन (UICSA), जहां BCA और MCA जैसे अहम तकनीकी कोर्स संचालित होते हैं, वहां की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। AICTE से मान्यता प्राप्त इन पाठ्यक्रमों में करीब 150 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन आरोप है कि उन्हें बुनियादी लैब सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि प्रैक्टिकल के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं और वास्तविक प्रयोगशाला अभ्यास के बिना ही उन्हें डिग्री लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप दैनिक भास्कर की टीम को सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर देखा गया कि 23 छात्र-छात्राएं कक्षा में वाइवा परीक्षा दे रहे थे। करीब एक घंटे बाद उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया गया कि प्रैक्टिकल पूरा हो चुका है और अंक परिणाम में जोड़ दिए जाएंगे। एमसीए थर्ड सेमेस्टर की छात्रा रिषिका नामदेव ने बताया कि डिजिटल फॉरेंसिक का फाइनल एग्जाम था, जिसमें वाइवा और प्रैक्टिकल दोनों होना था, लेकिन किसी भी छात्र को कंप्यूटर सिस्टम उपलब्ध नहीं कराया गया। कक्षा में लैब मौजूद है और लगभग 30 सिस्टम रखे हैं, पर छात्रों का कहना है कि एक भी कंप्यूटर चालू हालत में नहीं है। रिषिका के मुताबिक प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए कंप्यूटर संचालन का ज्ञान जरूरी होता है, लेकिन तीन सेमेस्टर गुजरने के बाद भी छात्रों को लैब में काम करने का मौका नहीं मिला। उनका कहना है कि एचओडी से लेकर वीसी और रजिस्ट्रार तक से कई बार सिस्टम उपलब्ध कराने की मांग की गई, मगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि शिक्षकों ने अपनी ओर से कुछ मदद करते हुए लैपटॉप पर सीमित जानकारी दी, लेकिन छात्रों के अनुसार वह पर्याप्त नहीं थी। 17 हजार फीस, पर पढ़ाई शून्य अखिलेश मिश्रा ने दैनिक भास्कर को बताया कि हर छात्र से प्रति सेमेस्टर करीब 17 हजार रुपए फीस ली जाती है और तीन साल में लगभग 54 हजार रुपए जमा कर चुके हैं, लेकिन पढ़ाई की स्थिति बेहद खराब है। उनका कहना है कि छात्र हर साल पास तो हो जाते हैं, मगर वास्तविक ज्ञान नहीं मिल रहा, जो उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा है। छात्रों के अनुसार फाइनल परीक्षा के दिन भी किसी को लैब में नहीं ले जाया गया। उनका दावा है कि विभाग शुरू होने के बाद से ही सिस्टम बंद पड़े हैं और इसी तरह औपचारिक रूप से प्रैक्टिकल कराकर छात्रों को पास कर दिया जाता है, जबकि कंप्यूटर का व्यावहारिक अनुभव उन्हें नहीं मिल पाता। नियामक मानकों पर उठे सवाल AICTE के नियमों के मुताबिक तकनीकी पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थानों में पर्याप्त आधुनिक कंप्यूटर, लाइसेंस प्राप्त सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ होना अनिवार्य है। निर्धारित मानक के अनुसार स्नातक स्तर पर 10 छात्रों पर एक कंप्यूटर और स्नातकोत्तर स्तर पर 4 छात्रों पर एक कंप्यूटर उपलब्ध होना चाहिए। डिजिटल युग में विडंबना एक ओर देश डिजिटल इंडिया और आईटी क्रांति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं विश्वविद्यालय में डिजिटल फॉरेंसिक जैसे विषय का प्रैक्टिकल बिना कंप्यूटर सम्पन्न होना शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विडंबना को उजागर करता है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के नियमानुसार लेकिन, विश्वविद्यालय प्रशासन इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। NAAC की पीयर टीम द्वारा बार-बार आधुनिक लैब्स और अपडेटेड कंप्यूटरों की जरूरत जताने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया! क्या यह प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से धोखाधड़ी नहीं है ?। टैंडर जारी कर दिया है बिना सिस्टम के छात्रों ने वाइवा के साथ प्रैक्टिकल दे दिया। मामले पर कुलसचिव डा सुरेंद्र सिंह का कहा कि सिस्टम को और अधिक बेहतर करने के लिए पीएम उषा योजना के तहत 200 से अधिक कंप्यूटर खरीदे जा रहे है, जिसका टैंडर भी जारी कर दिया है। अब किसी भी छात्र को सिस्टम के चलते परेशानी नहीं होगी। विधानसभा में उठा मुद्दा पूरे मामले की गूंज विधानसभा तक पहुंच चुकी है। जबलपुर पूर्व के कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सदन में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के UICSA विभाग में उपलब्ध कंप्यूटर और तकनीकी संसाधनों की स्थिति को लेकर प्रश्न उठाया था। उन्होंने सरकार से विभाग में संचालित बीसीए और एमसीए पाठ्यक्रमों के लिए उपलब्ध लैब, कंप्यूटर एवं अन्य तकनीकी सुविधाओं की विस्तृत जानकारी मांगी थी। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री ने BCA MCA के लिए 25 कंप्यूटर एवं संसाधनों की उपलब्धता और खरीद प्रक्रिया जारी होने की बात कही, लेकिन जमीनी हकीकत और छात्रों के आरोपों ने इस जवाब पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूरज बड़जात्या बोले- अच्छी कहानी अपनी जगह बना लेती है:एक्शन के शोर के बीच ‘संगमरमर’ में पारिवारिक मूल्यों और लंबे प्रेम सफर की कहानी

सूरज बड़जात्या एक बार फिर प्रेम और पारिवारिक मूल्यों की अपनी विशिष्ट दुनिया के साथ दर्शकों के सामने हैं। अपने नए शो ‘संगमरमर’ के जरिए वह बदलते समय में रिश्तों की गहराई और भावनाओं की निरंतरता को नए अंदाज में प्रस्तुत कर रहे हैं। 25 वर्षों में फैली यह प्रेम यात्रा सिर्फ दो लोगों की कहानी नहीं, बल्कि उन संवेदनाओं का विस्तार है जो पीढ़ियों को जोड़ती हैं। जियो स्टूडियोज के सहयोग से बनी यह श्रृंखला टेलीविजन और ओटीटी के बीच एक सेतु बनाने की कोशिश भी है, जहां पारिवारिक दर्शक और नई पीढ़ी एक साथ जुड़ सकें। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में सूरज बड़जात्या ने प्रेम की बदलती परिभाषाओं पर खुलकर अपनी बात रखी। उनका मानना है कि दौर चाहे कोई भी हो, हर इंसान के भीतर सच्चे प्रेम और सम्मान की चाह समान रहती है। एक्शन और शोर-शराबे के बीच भी भावनात्मक कहानियों की अपनी जगह होती है,बशर्ते उनमें सच्चाई और विश्वास हो। बड़जात्या का विश्वास है कि अच्छी कहानी अंततः अपना रास्ता खुद बना लेती है और परिवार संग देखे जाने वाली फिल्मों की मांग आज भी कायम है। पेश है सूरज बड़जात्या से हुई बातचीत के कुछ प्रमुख अंश.. सवाल: ‘संगमरमर’ आपके लिए कितनी खास है? इसमें आपका क्या जुड़ाव है? जवाब: ‘संगमरमर’ मेरे बहुत करीब है, क्योंकि यह मेरे पिता की पसंदीदा कहानियों में से एक रही है। मैं जियो स्टूडियोज का आभारी हूं कि वे हमारे पास आए और उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा प्रोजेक्ट बनाना है जो टेलीविजन और ओटीटी के बीच सेतु का काम करे। ऐसा कंटेंट जो दोनों माध्यमों पर समान रूप से चले और लोगों को जोड़ सके। इसके बाद हम सब बैठे, लेखिका रजनीता शर्मा जी जुड़ीं और करीब आठ-नौ महीनों तक इस कहानी को गढ़ते रहे। यह अमृता और आदित्य की 25 वर्षों की प्रेम-यात्रा है, जो 1998 में आगरा की गलियों से शुरू होती है। अंताक्षरी के बहाने मुलाकात, फिर परिस्थितियों के कारण शादी न हो पाना, और उसके बाद भी साथ निभाते हुए 25 सालों का सफर। इस यात्रा में जन्म है, मृत्यु है, खुशियां हैं, रक्तचाप की परेशानियां हैं, चिंता के दौरे हैं, सब कुछ है। यह एक परतदार प्रेम कहानी है। ‘संगमरमर’ उस रिश्ते की पवित्रता का प्रतीक है, जो समय के साथ फीका नहीं पड़ता। सवाल : आज के दौर में प्रेम की परिभाषा बदल रही है। ऐसे समय में ‘संगमरमर’ कितनी प्रासंगिक है? जवाब: मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर यह इच्छा होती है कि कोई उसे सच्चा प्रेम करे, सम्मान दे और जिसके साथ वह अपने मन की बातें बांट सके। यह आवश्यकता कभी समाप्त नहीं होती। हम सब सपने देखते हैं। अगर प्रेम के सपने खत्म हो जाएं, तो न ‘सैयारा’ चलेगी, न ‘मैंने प्यार किया’, न ‘हम आपके हैं कौन’। लोग बार-बार इन फिल्मों को इसलिए देखते हैं क्योंकि वे प्रेम का सपना दिखाती हैं। आज समाज में अविश्वास और तनाव अधिक है, इसलिए लोग अपने चारों ओर एक सुरक्षा-घेरा बना लेते हैं। यह स्वाभाविक है, लेकिन मूल भावना वही है,प्रेम और भरोसा। ऐसी कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि भरोसा करना जरूरी है और प्रेम अब भी प्रासंगिक है। सवाल : आपकी सादगी और मासूमियत आज भी बरकरार है। आप बाहरी शोर से खुद को कैसे अलग रखते हैं? जवाब: यह उम्र के साथ अपने आप होता है। समय सिखा देता है कि अंत में वही चीजें मायने रखती हैं जो सच्ची हैं, बाकी सब अहंकार है। मैं चाहता हूं कि जितना समय है, उसमें और कहानियां बनाऊं, ताकि लोग समझ सकें कि जीवन में रिश्ते ही सबसे महत्वपूर्ण हैं। पति-पत्नी महीनों बात नहीं करते, लेकिन कोई परामर्शदाता आकर समस्या हल नहीं करेगा। उन्हें स्वयं ही पहल करनी होगी। अगर आपने इस दुनिया में एक बच्चे को जन्म दिया है, तो आपको लड़ने का अधिकार नहीं है। जिम्मेदारी और समझदारी जरूरी है। सवाल: आज जब एक्शन और बड़े पैमाने की फिल्में चल रही हैं, तब ‘संगमरमर’ जैसी भावनात्मक कहानी लाना क्या जोखिम नहीं है? जवाब: अच्छी कहानी अपनी जगह खुद बना लेती है। हर एक्शन फिल्म सफल नहीं होती और हर दक्षिण भारतीय फिल्म भी नहीं चलती। जो अच्छी होती है, वही दर्शकों तक पहुंचती है। मुझे एक प्रसंग याद है. अभिनेता डैनी साहब को बी. आर. चोपड़ा जी ने एक फिल्म में छोटा-सा दृश्य दिया था। उन्होंने कहा था कि एक दृश्य काफी है। वही दृश्य उन्हें पहचान दिलाने वाला बना। इसलिए अपनी छाप छोड़ने के लिए एक सशक्त क्षण ही पर्याप्त होता है। मेरी फिल्मों ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘हम साथ-साथ हैं’, ‘विवाह’ को शुरुआत में व्यापारिक दृष्टि से संदेह मिला, लेकिन समय के साथ वे दर्शकों के दिलों में बस गईं। यदि आज भी लोग रविवार को परिवार के साथ तीन-तीन घंटे की फिल्म देखते हैं, तो इसका अर्थ है कि ऐसी कहानियों की मांग अब भी है। सवाल : ओटीटी मंच पर पारिवारिक और महिला-केन्द्रित विषय लाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा? जवाब:यह एक संघर्ष है, क्योंकि अक्सर माना जाता है कि पुरुष-केन्द्रित विषय ही अधिक चलते हैं। लेकिन जियो और जियो हॉटस्टार ने पूरा विश्वास दिखाया। उन्होंने कहा कि आप वही बनाइए जो बनाना चाहते हैं। हमने कभी यह सोचकर काम नहीं किया कि कितने दर्शक मिलेंगे या कितनी संख्या आएगी। जब संख्या का विचार हावी हो जाता है, तो ईमान डगमगा जाता है। ‘संगमरमर’ पूरी तरह विश्वास और निष्ठा से बनाई गई है। सवाल : आपकी कहानी कहने में संगीत का विशेष स्थान रहा है। ‘संगमरमर’ का संगीत कितना अलग होगा? जवाब: इस बार हमें पूरी स्वतंत्रता मिली। यह सोचकर कोई बंधन नहीं था कि किस क्षेत्र को पसंद आएगा या कौन-सी आवाज युवाओं को आकर्षित करेगी। हमने सीधे जड़ों से जुड़कर काम किया है। एक ओढ़नी का गीत है, जिसे हर्षदीप ने गाया है, वह पूरी तरह लोक-सुगंध से भरा है। होली का गीत है, जिसमें उत्तर भारत की असली होली का रंग और भाषा है। इसमें ‘नदिया के पार’ जैसी सादगी और मिट्टी की खुशबू है। यह प्रेम, रंग और संस्कृति का संपूर्ण मिश्रण है,एक विशुद्ध राजश्री की प्रस्तुति। सवाल: आपके जो चाहने वाले हैं आपकी फिल्मों का वो बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं,
बनभूलपुरा में 'घर खाली कराने’ की खबरों से डर:वकील बोले- सुप्रीम कोर्ट का ये अंतिम आदेश नहीं; 150 सालों से बसे परिवार भविष्य को लेकर चिंतित

“मेरे दादा करीब 150 साल पहले यहां आकर बसे थे और अब मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी बनभूलपुरा में रह रही है… लेकिन अब बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।” हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रह रहे मोहम्मद जावेद की यह बात उस बेचैनी को बयां करती है जो सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई के बाद पूरे इलाके में महसूस की जा रही है। दशकों से बसे हजारों परिवार अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। सुनवाई के बाद क्षेत्र में यह खबर तेजी से फैल गई कि लोगों को जमीन खाली करनी होगी, जबकि अदालत ने अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। कोर्ट ने पुनर्वास प्रक्रिया आगे बढ़ाने, पात्रता की जांच करने और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन व्यवस्था करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होनी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 5 हजार परिवारों और लगभग 27000 लोगों की जिंदगी से जुड़े इस मुद्दे ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक ढांचे के टूटने की आशंका के बीच लोग अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात तो करते हैं, लेकिन पुनर्वास यदि दूर हुआ तो जीवन व्यवस्था प्रभावित होने का डर भी साफ दिखाई देता है। 24 फरवरी को हुई सुनवाई के बाद बनभूलपुर के लोगों का हाल जानने के लिए पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट… वकील बोले- अंतिम फैसला नहीं, आदेश से भ्रम फैला रहे मामले से जुड़े अधिवक्ता सनप्रीत सिंह आजमानी ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है और न ही तत्काल बेदखली के निर्देश दिए हैं। लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, रेलवे और याचिकाकर्ताओं ने अपने-अपने पक्ष रखे। प्रधानमंत्री आवास योजना समेत विभिन्न नीतियों का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि पात्र लोग पुनर्वास योजनाओं के तहत आवेदन कर सकते हैं। कोर्ट ने 19 मार्च के बाद आवेदन प्रक्रिया संचालित करने, पात्रता की जांच करने और 31 मार्च तक स्थिति स्पष्ट कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। हम कोर्ट का सम्मान करेंगे, लेकिन पुनर्वास यहीं हो “सुप्रीम कोर्ट ने जो ऑर्डर दिया है, हम उसका सम्मान करते हैं। कोर्ट का जो भी आदेश होगा, हम उसे मानेंगे। कोर्ट के साथ-साथ हम उत्तराखंड सरकार से भी अपील करते हैं कि मानवता के आधार पर लोगों को सुविधाएं दी जाएं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोगों को आवास दिया जाए। हमारा रोजगार, कारोबार, बच्चों की पढ़ाई सब यहीं से जुड़ा है। हम चिंता में हैं, लेकिन निगाहें कोर्ट पर टिकी हैं। जो फैसला होगा, उसे मानेंगे।” ‘मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी यहां रह रही है’ स्थानीय निवासी मोहम्मद जावेद कहते हैं, ‘मेरे दादा करीब 150 साल पहले यहां आकर बसे थे। इस जमीन पर मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी रह रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हम सम्मान करेंगे, लेकिन बच्चे यहां पढ़ रहे हैं। कई बच्चे यहां से पढ़कर डॉक्टर और वकील बने हैं। उनके भविष्य का क्या होगा? ‘रोजगार और बच्चों की पढ़ाई यहीं से जुड़ी है’ स्थानीय निवासी फरीद खान ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करना ही पड़ेगा, हम उससे ऊपर नहीं जा सकते। लेकिन यहां लोग लंबे समय से रह रहे हैं। यहीं रोजगार है, बच्चों की पढ़ाई है। अगर कहीं और बसाया जाएगा तो पता नहीं कितनी दूर ले जाया जाएगा। जहां भी बसाया जाए, आसपास ही बसाया जाए। 50-50 साल से लोग यहां रह रहे हैं। ‘गरीबों का मन टूट गया है’ स्थानीय जनप्रतिनिधि इशरत अली कहते हैं- “सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला बताया जा रहा है, उसे सुनकर गरीब लोगों का मन टूट गया है। रमजान का महीना चल रहा है, लेकिन लोग ईद की खुशियां भूल चुके हैं। घर-घर मातम जैसा माहौल है। हमारे बनभूलपुरा में हमेशा खुशियां रहती थीं, लेकिन अब माहौल बोझिल है।” वह आगे कहते हैं- यह क्षेत्र हमेशा कांग्रेस का गढ़ रहा है। मुझे लगता है कि राजनीति के तहत बनभूलपुरा को निशाना बनाया गया है और मुस्लिम समाज के वोट खत्म करने की साजिश की जा रही है। यहां ज्यादातर मकान मुस्लिम समाज के हैं। अब समझिए इस पूरे मामले में कब कब क्या हुआ… ————- ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड में 4 दिन में तैयार हुआ फर्जी स्थायी निवास:बरेली के युवक को हल्द्वानी का बनाया; रिश्तेदार ने खोली CSC संचालक की पोल उत्तराखंड में एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालक ने उत्तरप्रदेश के रईस अहमद को हल्द्वानी का दिखाकर 4 दिनों में फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र बना दिया। मामला तब सामने आया जब 13 नवंबर की शाम एक व्यक्ति की शिकायत पर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने इस फर्जी CSC सेंटर पर छापा मारा। (पढ़ें पूरी खबर)
विदिशा में शराब दुकानों की नीलामी तीन चरणों में आज से होगी शुरू

विदिशा| नई आबकारी नीति 2026-27 के अंतर्गत विदिशा जिले की शराब दुकानों की नीलामी 27 फरवरी से शुरू होगी। कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देशन में जिला निष्पादन समिति ई-टेण्डर एवं ई-टेण्डर-कम-ऑक्शन प्रक्रिया के माध्यम से पूरी नीलामी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न कराएगी। इस वर्ष जिले की 74 कंपोजिट मदिरा दुकानों को 16 समूहों में विभाजित किया गया है, जिनका कुल आरक्षित मूल्य 422.68 करोड़ रुपये तय किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। जिला आबकारी अधिकारी शरद पाठक के अनुसार नीलामी तीन चरणों में होगी: प्रथम चरण 27 फरवरी से 02 मार्च, द्वितीय 03 से 05 मार्च और तृतीय 06 से 17 मार्च 2026 तक। इच्छुक टेंडरदाता ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से कंपोजिट प्रपत्र डाउनलोड कर, दस्तावेज अपलोड कर और वित्तीय प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकेंगे। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित समय सीमा और शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कड़ी निगरानी में संपन्न कराई जाए। ऑनलाइन प्रक्रिया के कारण पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और शासन को अधिक राजस्व प्राप्त होने की संभावना बढ़ेगी। इस कदम से जिले में व्यवस्थित एवं पारदर्शी निष्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
भारत ने दूसरा सबसे बड़ा टोटल बनाया:एक इनिंग में हाईएस्ट सिक्स भी लगाए; दोनों टीमों ने मिलकर 440 रन बनाए

गुरुवार को टीम इंडिया ने टी-20 वर्ल्ड कप का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर खड़ा किया। इसी के साथ एक पारी में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने का रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज कर लिया। चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में खेले गए इस हाई-स्कोरिंग मुकाबले में दोनों टीमों ने मिलकर 440 रन बनाए। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 256 रन बनाए। जवाब में जिम्बाब्वे ने भी दम दिखाया, लेकिन टीम 20 ओवर में 6 विकेट पर 184 रन ही बना सकी। भारत ने मैच 72 रन से अपने नाम किया। पढ़िए IND Vs ZIM मैच के टॉप रिकॉर्ड्स… 1. भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप का दूसरा सबसे बड़ा टोटल बनाया भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप का दूसरा सबसे बड़ा टोटल बना दिया। टीम ने 4 विकेट खोकर 256 रन बना डाले। भारत से आगे सिर्फ श्रीलंका है, जिसने 2007 में केन्या के खिलाफ 260 रन बनाए थे। 2. भारत ने एक टी-20 वर्ल्ड कप इनिंग में हाईएस्ट सिक्स लगाए भारत ने 17 सिक्स लगाए, जो किसी एक वर्ल्ड कप पारी में टीम के सबसे ज्यादा सिक्स हैं। इससे पहले भारत ने 2024 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 15 सिक्स लगाए थे। मौजूदा टूर्नामेंट में भारत अब तक 63 छक्के लगा चुका है, जो किसी एक एडिशन में उसका बेस्ट प्रदर्शन भी है। इस मामले में सिर्फ वेस्टइंडीज (66) भारत से आगे है। 3. भारत ने टी-20 वर्ल्ड कप में 5वीं बार 200+ टोटल बनाया भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 256 रन बनाकर टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास में 5वीं बार 200+ स्कोर का आंकड़ा पार किया। इस सूची में भारत दूसरे स्थान पर है, जबकि साउथ अफ्रीका 6 बार 200+ टोटल बनाकर टॉप पर काबिज है। 4. टी-20 वर्ल्ड कप का दूसरा हाईएस्ट एग्रीगेट स्कोर बना भारत और जिम्बाब्वे के बीच कुल 440 रन बने, जो टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा मैच एग्रीगेट है। इस लिस्ट में टॉप पर 2016 में वानखेड़े में खेला गया साउथ अफ्रीका बनाम इंग्लैंड मुकाबला है, जिसमें 459 रन बने थे। दिलचस्प बात यह है कि 2007 के पहले वर्ल्ड कप में भी भारत और इंग्लैंड के बीच 418 रन बने थे, जो आज भी टॉप हाई-एग्रीगेट मैचों में शामिल है। 5. हार्दिक नंबर-5 या उससे नीचे सबसे ज्यादा फिफ्टी लगाने वाले प्लेयर मिडिल-ऑर्डर और फिनिशर रोल में भारत के हार्दिक पांड्या का रिकॉर्ड टी-20 वर्ल्ड कप में बेहद शानदार रहा है। नंबर-5 या उससे नीचे बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 4 अर्धशतक लगाए हैं, जो इस पोजिशन पर किसी भी बल्लेबाज द्वारा सबसे ज्यादा हैं। उनसे पहले डेविड मिलर, शोएब मलिक और मार्कस स्टोयनिस ने 3-3 हाफ सेंचुरी लगाई हैं। 6. जिम्बाब्वे के खिलाफ सबसे बड़ा पावरप्ले टोटल बना जिम्बाब्वे के खिलाफ टी-20 वर्ल्ड कप में सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर बन गया है। भारत ने शुरुआती 6 ओवर में 80 रन बना दिए। यह ओवरऑल भारत का वर्ल्ड कप में तीसरा सबसे बड़ा पावरप्ले टोटल भी है। इसी वर्ल्ड कप में नामीबिया के खिलाफ 86/1 रन बनाकर भारत ने बेस्ट पावरप्ले टोटल दर्ज किया था। 7. रजा टी-20 में 3 हजार रन और 100 विकेट लेने वाले दूसरे प्लेयर जिम्बाब्वे के ऑलराउंडर सिकंदर रजा ने टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में एक खास उपलब्धि अपने नाम कर ली है। वे 3000 से ज्यादा रन बनाने और 100 से ज्यादा विकेट लेने वाले दुनिया के दूसरे खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले यह कारनामा मलेशिया के वीरनदीप सिंह कर चुके हैं। 8. नगारवा जिम्बाब्वे के लिए एक स्पेल में सबसे ज्यादा रन देने वाले बॉलर रिचर्ड नगारावा जिम्बाब्वे के लिए टी-20 इंटरनेशनल के सबसे महंगे गेंदबाज साबित हुए। उन्होंने अपने 4 ओवर में 62 रन लुटाए। यह किसी भी जिम्बाब्वे गेंदबाज द्वारा एक पारी में दिया गया सबसे ज्यादा रन है। इससे पहले यह अनचाहा रिकॉर्ड क्रिस मपोफू के नाम दर्ज था। 9. मपोसा वर्ल्ड कप के डेब्यू ओवर में दूसरे सबसे महंगे बॉलर जिम्बाब्वे के टिनोटेंडा मपोसा ने अपने टी-20 वर्ल्ड कप का पहला ओवर बेहद महंगा डाला। उन्होंने भारत के खिलाफ 23 रन खर्च किए, जो टूर्नामेंट इतिहास में किसी गेंदबाज के डेब्यू ओवर में दूसरे सबसे ज्यादा रन हैं। इस लिस्ट में उनसे आगे सिर्फ केन्या के स्टीव टिकोलो हैं, जिन्होंने 2007 वर्ल्ड कप में श्रीलंका के खिलाफ अपने एकमात्र ओवर में 25 रन दिए थे।






