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'कॉलेज लाइफ एंजॉय' के नाम पर बॉयफ्रेंड बनाने का दबाव:DAVV गर्ल्स हॉस्टल में 5 छात्राओं की शिकायत; अनुचित गतिविधियों के आरोप में छात्रा निष्कासित

'कॉलेज लाइफ एंजॉय' के नाम पर बॉयफ्रेंड बनाने का दबाव:DAVV गर्ल्स हॉस्टल में 5 छात्राओं की शिकायत; अनुचित गतिविधियों के आरोप में छात्रा निष्कासित

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) के गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा की गतिविधियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रथम वर्ष की एक छात्रा के खिलाफ अन्य छात्राओं को कथित रूप से अनुचित गतिविधियों के लिए उकसाने और दबाव बनाने की शिकायत मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच कर उसे हॉस्टल से निष्कासित कर दिया है। हॉस्टल की पांच छात्राओं ने लिखित शिकायत में आरोप लगाया कि संबंधित छात्रा उन्हें बॉयफ्रेंड बनाने के लिए प्रेरित करती थी और इसे ‘कॉलेज लाइफ एंजॉय करने’ का हिस्सा बताती थी। शिकायत के मुताबिक, वह एक मोबाइल ऐप के जरिए बॉयफ्रेंड बनवाने की बात करती थी और अन्य छात्राओं से अज्ञात युवकों से बातचीत और घूमने-फिरने के लिए दबाव बनाती थी। वीडियो कॉल और दबाव की बात आई सामने जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित छात्रा अज्ञात युवकों से वीडियो कॉल पर बातचीत करती थी और अन्य छात्राओं को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करती थी। कुछ छात्राओं ने खुद को असहज और भयभीत महसूस करने की बात कही है। पांच शिकायतकर्ता छात्राओं के अलावा दस से अधिक छात्राओं ने भी जांच के दौरान इन आरोपों की पुष्टि की है। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिक जांच में आरोपों के समर्थन में पर्याप्त तथ्य मिले हैं। वार्डन को आठ दिन पहले मिली थी जानकारी करीब आठ दिन पहले हॉस्टल वार्डन को इस संबंध में शिकायत दी गई थी। शिकायत मिलने के बाद छात्रा के सामान की जांच की गई, जिसमें कुछ आपत्तिजनक सामग्री मिलने की बात सामने आई। उक्त सामग्री को जब्त कर लिया गया है। कुलपति को सौंपी गई रिपोर्ट पूरी जांच रिपोर्ट कुलपति प्रो. राकेश सिंघई और रजिस्ट्रार प्रज्ज्वल खरे को सौंप दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित छात्रा को तत्काल प्रभाव से हॉस्टल से निष्कासित कर दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी छात्राओं से अपील की है कि किसी भी प्रकार के दबाव, उत्पीड़न या अनुचित व्यवहार की स्थिति में तुरंत शिकायत करें। मामले में आगे की प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की संभावना जताई जा रही है। यह खबर भी पढ़ें भोपाल की सगी बहनें धर्मांतरण के आरोप में अरेस्ट:गुजरात और मुंबई लड़कियां सप्लाई करतीं मध्य प्रदेश पुलिस ने भोपाल में काम देने के बहाने धर्मांतरण और सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में दो सगी बहनों को गिरफ्तार किया है। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि वे लड़कियों का धर्मांतरण करवाकर अमीर युवकों को गुजरात और मुंबई तक सप्लाई करती थीं। दोनों ने इतना पैसा कमाया कि भोपाल की अब्बास नगर की एक झुग्गी से निकलकर आशिमा मॉल के पास सागर रॉयल विला में आलीशान विला खरीद लिया। अमरीन और आफरीन नाम की ये बहनें लग्जरी लाइफ स्टाइल जीती थीं। मामले का खुलासा तब हुआ, जब रविवार रात को भोपाल और छत्तीसगढ़ की रहने वाली दो युवतियां राजधानी के बाग सेवनिया थाने पहुंच गईं। दोनों ने थाने में अलग-अलग शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल एक्शन लिया। सोमवार को अमरीन, आफरीन और चंदन यादव को गिरफ्तार कर लिया। तीन अन्य आरोपी बिलाल, चानू और यासिर की तलाश की जा रही है। शराब और ड्रग्स लेने के लिए दबाव डालती थीं

18 लाख साल से मच्छर पी रहे हैं इंसानों का खून, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा | Mosquitoes Sucking Human Blood Since 1.8 Million Years

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होमफोटोनॉलेज मच्छरों को कब लगा इंसानों के खून का चस्का? आज भी हर साल लेते हैं 6 लाख की जान Last Updated:February 26, 2026, 23:17 IST दुनिया का सबसे खतरनाक जानवर कौन है? शेर, शार्क या सांप? जवाब है मच्छर. ये नन्हा सा जीव हर साल करीब 6 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले लेता है. मलेरिया, डेंगू और वेस्ट नाइल वायरस जैसी बीमारियों के जरिए इसने सदियों से इंसानों को खौफ में रखा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मच्छरों ने इंसानों का खून पीना कब शुरू किया? एक नई इंटरनेशनल रिसर्च ने चौंकाने वाला दावा किया है. रिसर्च के मुताबिक, मच्छरों और इंसानों का ये खूनी रिश्ता आज का नहीं, बल्कि करीब 18 लाख साल पुराना है. साइंटिस्ट्स ने डीएनए एनालिसिस के जरिए उस दौर का पता लगाया है जब मच्छरों ने जानवरों को छोड़कर आदिमानवों को अपना शिकार बनाना शुरू किया था. यह कहानी दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों से शुरू होती है, जहां हमारे पूर्वज पहली बार इन नन्हे शिकारियों के संपर्क में आए थे. साइंटिस्ट्स ने एनोफिलीज ल्यूकोस्फायरस ग्रुप के मच्छरों पर की है. ये वही ग्रुप है जिसके मच्छर मलेरिया फैलाते हैं. रिसर्च के लिए 1992 से 2020 के बीच दक्षिण-पूर्व एशिया से इकट्ठा किए गए 11 अलग-अलग प्रजातियों के मच्छरों का डीएनए टेस्ट किया गया. कंप्यूटर मॉडल्स की मदद से उनके म्यूटेशन और इवोल्यूशन की हिस्ट्री चेक की गई. एनालिसिस से पता चला कि मच्छरों में इंसानों का खून पीने की आदत आज से 29 लाख से 16 लाख साल पहले के बीच डेवलप हुई. यह वह दौर था जब आदिमानव यानी होमो इरेक्टस पहली बार दक्षिण-पूर्व एशिया के सुंडालैंड इलाके में पहुंचे थे. सुंडालैंड आज के बोर्नियो, जावा और सुमात्रा जैसे द्वीपों का हिस्सा है. Add News18 as Preferred Source on Google इस बदलाव से पहले मच्छर इस इलाके में रहने वाले दूसरे जानवरों और बंदरों का खून पीकर खुश थे. लेकिन जैसे ही होमो इरेक्टस की आबादी बढ़ी, मच्छरों के भीतर एक जेनेटिक बदलाव यानी म्यूटेशन हुआ. उन्होंने इंसानों की बॉडी ऑडर यानी शरीर की गंध को पहचानने वाले रिसेप्टर्स डेवलप कर लिए. यह समझना जरूरी है कि मच्छरों का यह विकास अचानक नहीं हुआ. इंसानों की त्वचा पतली होती है और वे झुंड में रहते थे, जिससे मच्छरों के लिए खून पीना आसान हो गया. धीरे-धीरे मच्छरों ने इंसानी पसीने और कार्बन डाइऑक्साइड को पहचानने की क्षमता हासिल कर ली, जो उन्हें एक परफेक्ट शिकारी बनाती है. यह रिसर्च इंसानों के इतिहास की खाली जगहों को भी भरती है. दक्षिण-पूर्व एशिया में आदिमानवों के बहुत कम जीवाश्म मिले हैं. ऐसे में मच्छरों के इवोल्यूशन की टाइमलाइन यह साबित करती है कि 18 लाख साल पहले इस इलाके में इंसानों की अच्छी-खासी आबादी मौजूद थी. अगर वहां इंसान नहीं होते, तो मच्छर कभी भी इंसानी खून के प्रति आकर्षित होने वाले जीन डेवलप नहीं करते. पुरानी थ्योरीज मानती थीं कि मच्छरों ने इंसानों को काटना 61 हजार से 5 लाख साल पहले शुरू किया था, लेकिन इस नई खोज ने इतिहास को लाखों साल पीछे धकेल दिया है. आज दुनिया भर में मच्छरों की करीब 3,500 प्रजातियां हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही इंसान की जान की दुश्मन हैं. मलेरिया के अलावा डेंगू, पीला बुखार और जीका वायरस भी इन्हीं की देन हैं. मच्छरों की लार में मौजूद केमिकल्स इंसानी इम्यून सिस्टम को चकमा देने में माहिर होते हैं. साइंटिस्ट्स का मानना है कि मच्छरों के इस पुराने इतिहास को समझकर हम भविष्य में बीमारियों को रोकने के नए तरीके खोज सकते हैं. फिलहाल तो ये साफ है कि जब तक इंसान धरती पर रहेंगे, ये 18 लाख साल पुराना ‘खून का खेल’ जारी रहेगा. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। First Published : February 26, 2026, 23:17 IST

सिवनी में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के दिव्य स्तंभ का लोकार्पण:वर्चुअली शामिल हुए सीएम डॉ. मोहन यादव; देर रात तक हुए धार्मिक आयोजन

सिवनी में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के दिव्य स्तंभ का लोकार्पण:वर्चुअली शामिल हुए सीएम डॉ. मोहन यादव; देर रात तक हुए धार्मिक आयोजन

सिवनी के शंकराचार्य चौक पर ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के दिव्य स्तंभ का लोकार्पण कार्यक्रम हुआ। इस गरिमामय समारोह में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए और जनसमूह को संबोधित किया। सीएम ने स्वामी के योगदान को किया याद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जीवन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के संरक्षण को समर्पित था। उन्होंने सिवनी में इस दिव्य स्तंभ की स्थापना को गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह स्तंभ भविष्य में लोगों को धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगा। साथ ही मुख्यमंत्री ने सरकार द्वारा सनातन मूल्यों के आधार पर किए जा रहे कार्यों और कृष्ण लीला स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया। संतों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति कार्यक्रम में स्वामी सदानंद सरस्वती विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने आदि शंकराचार्य और स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के आध्यात्मिक योगदान बताया। इस दौरान आचार्य महामंडलेश्वर रामकृष्णानंद और ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद सहित अन्य संत भी मौजूद थे। लोकार्पण अवसर पर विधायक दिनेश राय, डीआईजी राकेश सिंह, कलेक्टर शीतला पटले और पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मेहता सहित अन्य अधिकारी व बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। देर रात तक हुए धार्मिक आयोजन दिव्य स्तंभ के लोकार्पण के बाद कार्यक्रम स्थल पर भजन, प्रवचन और आरती जैसे विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देर रात तक इन कार्यक्रमों में शामिल होकर अपनी श्रद्धा प्रकट की। देखें तस्वीरें…

इंदौर में जहरीली गैस फैली, 5 की तबीयत बिगड़ी:लोगों को सांस लेने में परेशानी, उल्टियां हुई; घरों से बाहर निकले लोग

इंदौर में जहरीली गैस फैली, 5 की तबीयत बिगड़ी:लोगों को सांस लेने में परेशानी, उल्टियां हुई; घरों से बाहर निकले लोग

इंदौर के रावजी बाजार थाना क्षेत्र में गुरुवार रात अमोनिया गैस के रिसाव से इलाके में हड़कंप मच गया। गैस के असर से कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई, जिसके बाद दो महिलाओं समेत पांच लोगों को एहतियातन अस्पताल भेजा गया। प्रशासन के मुताबिक सभी की हालत स्थिर है और कोई भी गंभीर नहीं है। सीएमएचओ डॉक्टर माधव हसनी ने बताया कि पांचों की हालत ठीक है। डीसीपी आनंद कालादगी ने बताया कि ककतपुरा पुल के नीचे शहजाद नाम के एक कबाड़ी द्वारा सिलेंडर काटा जा रहा था। इसी दौरान उसमें से अमोनिया गैस का रिसाव शुरू हो गया। गैस फैलते ही आसपास मौजूद लोगों को घबराहट और सांस लेने में परेशानी महसूस होने लगी। डीसीपी ने स्पष्ट किया कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति गंभीर रूप से प्रभावित नहीं हुआ है। सभी लोग सुरक्षित हैं। पुलिस ने कबाड़ी शहजाद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और मामले की जांच जारी है। देखिए तस्वीरें कबाड़ी दुकान में गैस सिलेंडर काटा जा रहा था एक कबाड़ी की दुकान पर गैस से भरा सिलेंडर लाया गया था। बताया जा रहा है कि कबाड़ी सिलेंडर को काट रहा था, उसी दौरान उसमें भरी गैस रिसने लगी। गैस फैलते ही आसपास के लोगों को घबराहट और सांस लेने में परेशानी होने लगी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कबाड़ी को हिरासत में ले लिया। दमकल विभाग की टीम ने सिलेंडर को अपने कब्जे में लेकर मौके से हटाया। क्षेत्र में पानी का छिड़काव भी किया गया, जिसके बाद हालात कुछ हद तक काबू में आए।

दिल्ली में डीबी एमिनेंस अवॉर्ड के 7वें सीजन का आयोजन:केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मध्य प्रदेश के 45 दिग्गजों को सम्मानित किया

दिल्ली में डीबी एमिनेंस अवॉर्ड के 7वें सीजन का आयोजन:केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मध्य प्रदेश के 45 दिग्गजों को सम्मानित किया

नई दिल्ली में गुरुवार को डीबी एमिनेंस अवॉर्ड के सातवें सीजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान और दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी एमडी पवन अग्रवाल मौजूद रहे। कार्यक्रम में दैनिक भास्कर समूह ने मध्य प्रदेश के उन 45 दिग्गजों को सम्मानित किया, जो अपने कामों से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। चिराग ने शिक्षा, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, सामाजिक सेवा, अन्य उद्योगों से जुड़े लोगों को डीबी एमिनेंस अवॉर्ड दिया। चिराग ने कहा- मैं भास्कर ग्रुप का समूह का दिल से हृदय से आभार प्रकट करूंगा। ये भी अपनी रूट से जुड़े रहे। भास्कर ग्रुप का उदय उसमें आप सबके शहर इंदौर की एक अहम भूमिका रही। कार्यक्रम से जुड़ी तस्वीरें… दैनिक भास्कर समूह हर साल लीडर्स को सम्मानित करता है दैनिक भास्कर समूह हर साल यह अवॉर्ड ऐसे लीडर्स को प्रदान करता है, जो अपने-अपने क्षेत्र में अतुलनीय काम कर रहे हैं। दैनिक भास्कर समूह के डिप्टी एमडी पवन अग्रवाल ने इस मौके पर सम्मानित हुए लोगों से कहा कि उन सभी ने अपने कामों से एक मिसाल कायम किया है। उन्होंने कहा कि दैनिक भास्कर का भी प्रयास होता है कि जैसा आप समाज में बदलाव कर रहे हैं, वैसा हम भी करें। समाज में कुछ ना कुछ नया करते रहें। आपके साथ यही जुगलबंदी है। इंदौर दैनिक भास्कर के लिए काफी खास जगह है। क्योंकि वहां 10 साल पहचान बनाने के बाद ही हिम्मत मिली कि पूरे देश में जाएं। डिप्टी एमडी ने कहा कि इस एंटरप्राइजिंग शहर (इंदौर) से ही हमें हिम्मत मिली। यहीं से हमें समझ आया था कि जब आप कुछ काम करते हैं तो उसकी कोई सीमा नहीं है। अगर आपके पास कल्पना है तो पूरा खुला आसमान है। चिराग पासवान ने अवॉर्ड पाने वाले लोगों को बधाई दी कार्यक्रम में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने अवॉर्ड पाने वाले सभी 45 लोगों को बधाई दी और दैनिक भास्कर का धन्यवाद किया। उन्होंने वहां मौजूद उद्यमियों से फूड प्रोसेसिंग में इनोवेशन और निवेश करने की अपील की। चिराग ने आगे कहा- आज हर कोई विकसित भारत की चर्चा करता है, लेकिन बहुत कम लोग अपने योगदान के बारे में सोचते हैं। हम अक्सर सरकारों और प्रशासन से सवाल करते हैं कि विकसित भारत कैसे बनेगा, लेकिन आप वे लोग हैं जिन्होंने खुद से सवाल किया कि ‘मेरा योगदान क्या होगा?’ यदि देश की 140 करोड़ आबादी ईमानदारी से खुद से यह पूछने लग जाए, तो हम लक्ष्य के बहुत करीब होंगे। इसके अलावा इस कार्यक्रम में दैनिक भास्कर समूह के इंदौर के एग्जिक्यूटिव एडिटर अमित मंडलोई, इंदौर के यूनिट हेड दीपक किशोर और नेशनल पॉलिटिकल एडिटर धर्मेंद्र सिंह भदौरिया भी मौजूद थे। कार्यक्रम से जुड़े 5 वीडियो…

भाजपा नेता के भाई ने दलित बस्ती पर हमला किया:जान बचाने पहली मंजिल से कूदी महिला; पत्थरबाजी में एक घायल

भाजपा नेता के भाई ने दलित बस्ती पर हमला किया:जान बचाने पहली मंजिल से कूदी महिला; पत्थरबाजी में एक घायल

नीमच जिले के काली कोटड़ी गांव में गुरुवार दोपहर भाजपा नेता उमराव सिंह गुर्जर के भाई गोपाल गुर्जर और उनके करीब 60 साथियों ने दलित बस्ती पर हमला कर दिया। इस दौरान हमलावरों ने घरों में तोड़फोड़ की और महिलाओं से मारपीट की। हमले में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जबकि एक अन्य महिला ने अपनी जान बचाने के लिए घर की पहली मंजिल से छलांग लगा दी। गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे लोडिंग टेंपो और पांच कारों में सवार होकर आए हमलावरों ने मनीष नायक, पुष्कर और अर्जुन नायक के घरों को निशाना बनाया। उन्होंने घरों में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की। मनीष नायक की पत्नी पूजा मेघवाल पर पत्थर से हमला किया गया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। यहां से शुरू हुआ विवाद यह विवाद 24 फरवरी की रात को शुरू हुआ था, जब दीपेश गुर्जर ने अपनी बिना नंबर की थार गाड़ी से मनीष नायक की बाइक को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में मनीष घायल हो गए थे। पीड़ितों का आरोप है कि मेडिकल जांच के बावजूद पुलिस ने प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर उन्हें ही झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी थी। हमसे टकराने का अंजाम बुरा होगा पीड़ितों के अनुसार, गोपाल गुर्जर, सरदार सिंह, दीपेश और उनके साथियों ने जातिगत गालियां देते हुए धमकी दी कि “इस इलाके में हमारा आतंक है और हमसे टकराने का अंजाम बुरा होगा।” घटना के बाद डरे-सहमे पीड़ित परिवार शाम को नीमच पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। दहशत में परिवार ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आरोपी मछली पालन के बड़े ठेकेदार हैं और उनके राजनीतिक रसूख के कारण पुलिस कार्रवाई करने से बच रही है। पीड़ितों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई और उन्हें सुरक्षा नहीं मिली, तो उनके परिवार की जान को खतरा बना रहेगा।

JNU में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर-जूते फेंके:UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहा था छात्रसंघ; यूनिवर्सिटी ने कोर्ट ऑर्डर का उल्लंघन बताया

JNU में प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर-जूते फेंके:UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग कर रहा था छात्रसंघ; यूनिवर्सिटी ने कोर्ट ऑर्डर का उल्लंघन बताया

दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी(JNU) में स्टूडेंट यूनियन के प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर पत्थर फेंके, पुलिसवालों को काटा और जूते फेंके। पुलिस ने कहा कि इसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन(JNUSU) UGC रेगुलेशन लागू करने की मांग को लेकर मार्च निकाल रहा था। ये मार्च शिक्षा मंत्रालय तक निकाला जाना था लेकिन पुलिस ने इसे बीच में ही रोक दिया। पुलिस का आरोप है कि मार्च रोकने के बाद कुछ प्रोटेस्टर्स ने उनपर हमला कर दिया। इसके बीच यूनिवर्सिटी का भी बयान आया। JNU ने कहा कि यह मांग माननीय सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का उल्लंघन है जिसने रेगुलेशन पर स्टे जारी किया था। JNU के वाइस चांसलर या रजिस्ट्रार के पास रेगुलेशन पर कोई अधिकार नहीं है। पुलिस पर हमले की 3 तस्वीरेंं… JNU ने कहा- हमारी सरकार को जवाबदेही JNU ने सोशल मीडिया X पर एक पोस्ट में कहा कि JNU एक पब्लिक यूनिवर्सिटी है इसलिए सरकार, पार्लियामेंट और भारतीय टैक्सपेयर्स के प्रति जवाबदेह है। यह बहुत बुरा है कि एक महिला OBC वाइस चांसलर पर झूठे आरोप लगाकर हमला किया जा रहा है, सिर्फ पब्लिक प्रॉपर्टी की हिंसा और तोड़-फोड़ के मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए। पहले इस पूरे मामले को समझें UGC के नए कानून का नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में SC, ST और OBC छात्रों के खिलाफ जातीय भेदभाव रोकने के लिए कई निर्देश दिए गए थे। नए नियमों के तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने का निर्देश दिया गया। ये टीमें SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि UGC ने जाति आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई है और इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। सवर्ण जाति के स्टूडेंट्स का आरोप है कि नए नियमों में सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। इनसे उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा मिलेगा। 30 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों पर रोक लगाई सुप्रीम कोर्ट ने 30 जनवरी को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने कहा कि इसके प्रावधान स्पष्ट नहीं हैं और इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान की याचिकाओं पर की, जिनमें आरोप लगाया गया है कि नए नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं। UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और UGC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही नियमों का ड्राफ्ट फिर से तैयार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फिलहाल 2012 के UGC नियम देशभर में लागू रहेंगे। ———— ये खबर भी पढ़ें… ‘करप्शन इन ज्यूडीशियरी’ वाली NCERT किताब पर SC का बैन:कहा- हार्ड कॉपी वापस लें, डिजिटल कॉपी हटाएं सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर वाली NCERT के 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब बैन कर दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि जो किताबें छप चुकी हैं, उसे जब्त कीजिए और डिजिटल कॉपियों को भी हटाइए। पूरी खबर पढ़ें…

‘बोझ है, लेकिन संशोधन की जरूरत नहीं’: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की 5 ‘गारंटियों’ पर डीके शिवकुमार | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:26 फरवरी, 2026, 20:11 IST कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने बाद में कहा कि भले ही पांच “गारंटियां” एक वित्तीय बोझ थीं, राज्य सरकार उन्हें जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ है। कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि बढ़ती लागत के बावजूद, गारंटी को संशोधित करने या वापस लेने की कोई योजना नहीं है, सीएम सिद्धारमैया ने सालाना 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमान लगाया है। (छवि:न्यूज़18/फ़ाइल) कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस राज्य सरकार की प्रमुख “गारंटी” योजनाओं के बारे में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की स्पष्ट टिप्पणी के बाद विवाद की एक नई लहर पैदा कर रही है, जिसे उन्होंने सरकारी खजाने पर “बोझ” कहा है। लेकिन, शिवकुमार बाद में अपना रुख बदलते दिखे और कहा कि भले ही पांच “गारंटियां” एक वित्तीय बोझ थीं, राज्य सरकार उन्हें जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता पर दृढ़ है। उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत के बावजूद, गारंटी को संशोधित करने या वापस लेने की कोई योजना नहीं है, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने हाल ही में सालाना 52,000 करोड़ रुपये से अधिक का अनुमान लगाया है। शिवकुमार ने संवाददाताओं से कहा, ”गारंटी सरकार सहित सभी के लिए बोझ है, लेकिन हम इसे नहीं रोकेंगे।” उन्होंने कहा कि इन योजनाओं की प्राथमिक चिंता व्यापक लीक का पता लगाना है, जहां मृत व्यक्तियों के नाम पर लाभ उठाया जा रहा है। उन्होंने संसाधनों के दुरुपयोग से जुड़े दो प्रमुख मुद्दों पर प्रकाश डाला, यह देखते हुए कि कुछ परिवार चावल के राशन और मूल रूप से बुजुर्ग सदस्यों को आवंटित वित्तीय सहायता का दावा करना जारी रखते हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इससे बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, जिससे सरकार को इन कमियों को दूर करने के लिए एक कठोर जवाबदेही प्रक्रिया शुरू करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया गया है कि धन केवल पात्र, जीवित लाभार्थियों तक ही पहुंचे। उन्होंने कहा, “मैं एक बात कह रहा हूं और आप इसकी अलग तरह से व्याख्या कर रहे हैं। हम योजनाओं को संशोधित नहीं करना चाहते हैं, लेकिन मृत लोगों के नाम पर लाभ उठाया जा रहा है। यहां तक ​​कि उन लोगों के हिस्से से चावल लिया जा रहा है जो बूढ़े हो चुके हैं और उनका निधन हो चुका है। हम इन दो मुद्दों पर जवाबदेही तय करने पर विचार कर रहे हैं।” सरकार की प्रतिक्रिया में, गारंटी कार्यान्वयन समिति के अध्यक्ष एचएम रेवन्ना ने कहा कि इन विसंगतियों की पहचान करने के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण किया गया है। चूँकि योजनाएँ प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणालियों पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं, लाभार्थियों की मृत्यु पर वास्तविक समय के डेटा की कमी के कारण भुगतान लगभग ढाई वर्षों तक बिना ध्यान दिए जारी रहा। रेवन्ना ने कहा कि सरकार अब इन निधियों को पुनः प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा, “हमने इस पर एक सर्वेक्षण किया है। चूंकि पैसा डीबीटी के माध्यम से भेजा जा रहा था, इसलिए यह पता लगाना मुश्किल था कि लाभार्थी जीवित था या मृत और इस प्रकार, पैसा बहता रहा। हमने उस पैसे को वापस लेने पर चर्चा की है और इस वसूली को सुविधाजनक बनाने के लिए मुख्य सचिव, अतिरिक्त सचिव और बैंक अधिकारियों के साथ परामर्श किया है।” सिद्धारमैया ने शिवकुमार की टिप्पणियों को व्यापक संदर्भ प्रदान करने के लिए कदम उठाया और बताया कि “बोझ” शब्द राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के बजाय 52,000 करोड़ रुपये के वार्षिक व्यय के विशाल पैमाने को संदर्भित करता है। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि शुरुआत से ही इन गारंटियों के लिए धन वितरित करने के बावजूद, राज्य के विकास कार्यों को दरकिनार नहीं किया गया है। सिद्धारमैया ने कहा, “गारंटी की कीमत हमें 52,000 करोड़ रुपये से अधिक है। उन्होंने (डीके शिवकुमार) कहा होगा कि इस लिहाज से यह एक बोझ है। लेकिन हम विकास कार्य कर रहे हैं।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 26 फरवरी, 2026, 20:11 IST समाचार राजनीति ‘बोझ है, लेकिन संशोधन की जरूरत नहीं’: कर्नाटक में कांग्रेस सरकार की 5 ‘गारंटियों’ पर डीके शिवकुमार अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक गारंटी योजनाएं(टी)कांग्रेस सरकार कर्नाटक(टी)डीके शिवकुमार टिप्पणी(टी)वित्तीय बोझ कर्नाटक योजनाएं(टी)कल्याणकारी लाभों का दुरुपयोग(टी)प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण कर्नाटक(टी)लाभार्थी जवाबदेही कर्नाटक(टी)सिद्धारमैया गारंटी योजनाएं

भाजपा नेता के गृह प्रवेश में देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी:मोहल्ले में तनाव, कैलाशपुरी में दो पक्ष आमने-सामने

भाजपा नेता के गृह प्रवेश में देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी:मोहल्ले में तनाव, कैलाशपुरी में दो पक्ष आमने-सामने

रीवा शहर के कैलाशपुरी इलाके में गुरुवार शाम एक भाजपा नेता के घर गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया। आरोप है कि लाउड स्पीकर से देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। घटना के बाद मोहल्ले में आक्रोश फैल गया और कुछ देर के लिए दो पक्ष आमने-सामने आ गए। बैकुंठपुर से भाजपा नेता सीताराम साकेत के घर गृह प्रवेश कार्यक्रम रखा गया था। कार्यक्रम के दौरान सुबह करीब 10 बजे से लाउड स्पीकर पर भगवान शंकर, मां दुर्गा, भगवान कृष्ण सहित अन्य देवी-देवताओं के लिए अपशब्द कहे जा रहे थे। मोहल्ले की निवासी रागिनी सिंह बघेल ने बताया कि शुरुआत में लगा कि कार्यक्रम का शोर-शराबा है और बात थम जाएगी, लेकिन आपत्तिजनक टिप्पणियां लगातार जारी रहीं। जब वे और अन्य लोग समझाने पहुंचे तो विवाद की स्थिति बन गई और मारपीट जैसी नौबत आ गई। इसके बाद तत्काल डायल 100 को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों से बातचीत कर फीडबैक लिया। स्थानीय लोगों ने मामले की लिखित शिकायत थाने में देने की बात कही है। इस बीच भाजपा नेता के भतीजे, जो करहिया मंडी में शासकीय सेवक बताए जा रहे हैं, पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उधर, पूरे घटनाक्रम पर भाजपा नेता सीताराम साकेत का कहना है कि उनके घर कार्यक्रम में कई लोग आए थे। “किसी ने कुछ कह दिया होगा। यदि ऐसा हुआ है तो मैं इसे स्वीकार करता हूं और इसके लिए खेद प्रकट करता हूं। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इलाके में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन तनाव का माहौल बना हुआ है।

भक्ति के अंधेरे चेहरे पर सिहरनभरी कहानी:‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ का ट्रेलर रिलीज; 6 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक

भक्ति के अंधेरे चेहरे पर सिहरनभरी कहानी:‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ का ट्रेलर रिलीज; 6 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक

फिल्म ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ का दमदार ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। अंधविश्वास, तांत्रिक अनुष्ठानों और लोक आस्था की जटिल परतों को उधेड़ती यह लोककथा-आधारित थ्रिलर 6 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म को सुदीप्तो सेन का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने इससे पहले The Kerala Story का निर्देशन किया था। चरक मेले की पृष्ठभूमि में सस्पेंस निर्देशक शीलादित्य मौलिक के निर्देशन में बनी यह फिल्म ग्रामीण भारत में प्रचलित कठोर धार्मिक अनुष्ठानों और उनसे जुड़े सामाजिक यथार्थ को सामने लाती है। ट्रेलर में ‘चरक मेला’ की झलक दिखाई गई है। एक ऐसा पारंपरिक उत्सव, जो गहरी आस्था के साथ-साथ खतरनाक रस्मों के लिए भी जाना जाता है। ट्रेलर की शुरुआत मेले की तैयारियों से होती है, जहां पूरा गांव इसे अपनी वर्षों पुरानी मनोकामनाओं की पूर्ति का जरिया मानता है। लेकिन जैसे-जैसे अनुष्ठान उग्र होते जाते हैं, कहानी आस्था और कट्टरता, भक्ति और विनाश के बीच की महीन रेखा पर सवाल खड़े करती नजर आती है। सीबीएफसी से मिली मंजूरी निर्माता सुदीप्तो सेन ने बताया कि फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद Central Board of Film Certification (सीबीएफसी) समिति ने विषयवस्तु को लेकर कुछ आपत्तियां जताई थीं। इसके बाद फिल्म को उच्च समीक्षा पैनल के पास भेजा गया। सुझाए गए बदलावों के साथ फिल्म को मंजूरी मिल गई है। सेन ने कहा कि वे इस निर्णय से संतुष्ट हैं और फिल्म को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने को लेकर उत्साहित हैं। कंटेंट पर भरोसा: पेन स्टूडियोज फिल्म को पेन स्टूडियोज प्रस्तुत कर रहा है, जिसका नेतृत्व डॉ. डॉ. जयंतीलाल गडा कर रहे हैं। गडा का कहना है कि आज के दौर में मजबूत कंटेंट ही सबसे बड़ा आकर्षण है। ‘चरक’ जैसी विचारोत्तेजक कहानी दर्शकों को रोमांच के साथ सोचने पर भी मजबूर करेगी। सशक्त स्टारकास्ट फिल्म में अंजली पाटिल, साहिदुर रहमान, सुभ्रत दत्ता, शशि भूषण, नलनीश नील, शंखदीप और शौनक श्यामल जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। ‘चरक: फेयर ऑफ फेथ’ का निर्माण धवल जयंतीलाल गडा और सिपिंग टी सिनेमा ने सुदीप्तो सेन प्रोडक्शंस के सहयोग से किया है, जबकि राजेश भट्ट एसोसिएट प्रोड्यूसर हैं।अंधविश्वास और आस्था के टकराव को बड़े पर्दे पर पेश करती यह फिल्म अपने विषय और ट्रीटमेंट को लेकर पहले ही चर्चा में आ चुकी है। अब देखना होगा कि रिलीज के बाद दर्शकों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।