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बनभूलपुरा में 'घर खाली कराने’ की खबरों से डर:वकील बोले- सुप्रीम कोर्ट का ये अंतिम आदेश नहीं; 150 सालों से बसे परिवार भविष्य को लेकर चिंतित

बनभूलपुरा में 'घर खाली कराने’ की खबरों से डर:वकील बोले- सुप्रीम कोर्ट का ये अंतिम आदेश नहीं; 150 सालों से बसे परिवार भविष्य को लेकर चिंतित

“मेरे दादा करीब 150 साल पहले यहां आकर बसे थे और अब मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी बनभूलपुरा में रह रही है… लेकिन अब बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।” हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रह रहे मोहम्मद जावेद की यह बात उस बेचैनी को बयां करती है जो सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई के बाद पूरे इलाके में महसूस की जा रही है। दशकों से बसे हजारों परिवार अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। सुनवाई के बाद क्षेत्र में यह खबर तेजी से फैल गई कि लोगों को जमीन खाली करनी होगी, जबकि अदालत ने अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। कोर्ट ने पुनर्वास प्रक्रिया आगे बढ़ाने, पात्रता की जांच करने और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन व्यवस्था करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होनी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 5 हजार परिवारों और लगभग 27000 लोगों की जिंदगी से जुड़े इस मुद्दे ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक ढांचे के टूटने की आशंका के बीच लोग अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात तो करते हैं, लेकिन पुनर्वास यदि दूर हुआ तो जीवन व्यवस्था प्रभावित होने का डर भी साफ दिखाई देता है। 24 फरवरी को हुई सुनवाई के बाद बनभूलपुर के लोगों का हाल जानने के लिए पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट… वकील बोले- अंतिम फैसला नहीं, आदेश से भ्रम फैला रहे मामले से जुड़े अधिवक्ता सनप्रीत सिंह आजमानी ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है और न ही तत्काल बेदखली के निर्देश दिए हैं। लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, रेलवे और याचिकाकर्ताओं ने अपने-अपने पक्ष रखे। प्रधानमंत्री आवास योजना समेत विभिन्न नीतियों का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि पात्र लोग पुनर्वास योजनाओं के तहत आवेदन कर सकते हैं। कोर्ट ने 19 मार्च के बाद आवेदन प्रक्रिया संचालित करने, पात्रता की जांच करने और 31 मार्च तक स्थिति स्पष्ट कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। हम कोर्ट का सम्मान करेंगे, लेकिन पुनर्वास यहीं हो “सुप्रीम कोर्ट ने जो ऑर्डर दिया है, हम उसका सम्मान करते हैं। कोर्ट का जो भी आदेश होगा, हम उसे मानेंगे। कोर्ट के साथ-साथ हम उत्तराखंड सरकार से भी अपील करते हैं कि मानवता के आधार पर लोगों को सुविधाएं दी जाएं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोगों को आवास दिया जाए। हमारा रोजगार, कारोबार, बच्चों की पढ़ाई सब यहीं से जुड़ा है। हम चिंता में हैं, लेकिन निगाहें कोर्ट पर टिकी हैं। जो फैसला होगा, उसे मानेंगे।” ‘मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी यहां रह रही है’ स्थानीय निवासी मोहम्मद जावेद कहते हैं, ‘मेरे दादा करीब 150 साल पहले यहां आकर बसे थे। इस जमीन पर मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी रह रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हम सम्मान करेंगे, लेकिन बच्चे यहां पढ़ रहे हैं। कई बच्चे यहां से पढ़कर डॉक्टर और वकील बने हैं। उनके भविष्य का क्या होगा? ‘रोजगार और बच्चों की पढ़ाई यहीं से जुड़ी है’ स्थानीय निवासी फरीद खान ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करना ही पड़ेगा, हम उससे ऊपर नहीं जा सकते। लेकिन यहां लोग लंबे समय से रह रहे हैं। यहीं रोजगार है, बच्चों की पढ़ाई है। अगर कहीं और बसाया जाएगा तो पता नहीं कितनी दूर ले जाया जाएगा। जहां भी बसाया जाए, आसपास ही बसाया जाए। 50-50 साल से लोग यहां रह रहे हैं। ‘गरीबों का मन टूट गया है’ स्थानीय जनप्रतिनिधि इशरत अली कहते हैं- “सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला बताया जा रहा है, उसे सुनकर गरीब लोगों का मन टूट गया है। रमजान का महीना चल रहा है, लेकिन लोग ईद की खुशियां भूल चुके हैं। घर-घर मातम जैसा माहौल है। हमारे बनभूलपुरा में हमेशा खुशियां रहती थीं, लेकिन अब माहौल बोझिल है।” वह आगे कहते हैं- यह क्षेत्र हमेशा कांग्रेस का गढ़ रहा है। मुझे लगता है कि राजनीति के तहत बनभूलपुरा को निशाना बनाया गया है और मुस्लिम समाज के वोट खत्म करने की साजिश की जा रही है। यहां ज्यादातर मकान मुस्लिम समाज के हैं। अब समझिए इस पूरे मामले में कब कब क्या हुआ… ————-
ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड में 4 दिन में तैयार हुआ फर्जी स्थायी निवास:बरेली के युवक को हल्द्वानी का बनाया; रिश्तेदार ने खोली CSC संचालक की पोल उत्तराखंड में एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालक ने उत्तरप्रदेश के रईस अहमद को हल्द्वानी का दिखाकर 4 दिनों में फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र बना दिया। मामला तब सामने आया जब 13 नवंबर की शाम एक व्यक्ति की शिकायत पर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने इस फर्जी CSC सेंटर पर छापा मारा। (पढ़ें पूरी खबर)

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“मेरे दादा करीब 150 साल पहले यहां आकर बसे थे और अब मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी बनभूलपुरा में रह रही है… लेकिन अब बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है।” हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रह रहे मोहम्मद जावेद की यह बात उस बेचैनी को बयां करती है जो सुप्रीम कोर्ट की हालिया सुनवाई के बाद पूरे इलाके में महसूस की जा रही है। दशकों से बसे हजारों परिवार अपने भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। सुनवाई के बाद क्षेत्र में यह खबर तेजी से फैल गई कि लोगों को जमीन खाली करनी होगी, जबकि अदालत ने अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है। कोर्ट ने पुनर्वास प्रक्रिया आगे बढ़ाने, पात्रता की जांच करने और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन व्यवस्था करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में होनी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 5 हजार परिवारों और लगभग 27000 लोगों की जिंदगी से जुड़े इस मुद्दे ने लोगों को चिंता में डाल दिया है। रोजगार, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक ढांचे के टूटने की आशंका के बीच लोग अदालत के फैसले का सम्मान करने की बात तो करते हैं, लेकिन पुनर्वास यदि दूर हुआ तो जीवन व्यवस्था प्रभावित होने का डर भी साफ दिखाई देता है। 24 फरवरी को हुई सुनवाई के बाद बनभूलपुर के लोगों का हाल जानने के लिए पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट… वकील बोले- अंतिम फैसला नहीं, आदेश से भ्रम फैला रहे मामले से जुड़े अधिवक्ता सनप्रीत सिंह आजमानी ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया है और न ही तत्काल बेदखली के निर्देश दिए हैं। लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। उन्होंने बताया कि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार, रेलवे और याचिकाकर्ताओं ने अपने-अपने पक्ष रखे। प्रधानमंत्री आवास योजना समेत विभिन्न नीतियों का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि पात्र लोग पुनर्वास योजनाओं के तहत आवेदन कर सकते हैं। कोर्ट ने 19 मार्च के बाद आवेदन प्रक्रिया संचालित करने, पात्रता की जांच करने और 31 मार्च तक स्थिति स्पष्ट कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। हम कोर्ट का सम्मान करेंगे, लेकिन पुनर्वास यहीं हो “सुप्रीम कोर्ट ने जो ऑर्डर दिया है, हम उसका सम्मान करते हैं। कोर्ट का जो भी आदेश होगा, हम उसे मानेंगे। कोर्ट के साथ-साथ हम उत्तराखंड सरकार से भी अपील करते हैं कि मानवता के आधार पर लोगों को सुविधाएं दी जाएं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लोगों को आवास दिया जाए। हमारा रोजगार, कारोबार, बच्चों की पढ़ाई सब यहीं से जुड़ा है। हम चिंता में हैं, लेकिन निगाहें कोर्ट पर टिकी हैं। जो फैसला होगा, उसे मानेंगे।” ‘मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी यहां रह रही है’ स्थानीय निवासी मोहम्मद जावेद कहते हैं, ‘मेरे दादा करीब 150 साल पहले यहां आकर बसे थे। इस जमीन पर मेरे परिवार की चौथी पीढ़ी रह रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हम सम्मान करेंगे, लेकिन बच्चे यहां पढ़ रहे हैं। कई बच्चे यहां से पढ़कर डॉक्टर और वकील बने हैं। उनके भविष्य का क्या होगा? ‘रोजगार और बच्चों की पढ़ाई यहीं से जुड़ी है’ स्थानीय निवासी फरीद खान ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करना ही पड़ेगा, हम उससे ऊपर नहीं जा सकते। लेकिन यहां लोग लंबे समय से रह रहे हैं। यहीं रोजगार है, बच्चों की पढ़ाई है। अगर कहीं और बसाया जाएगा तो पता नहीं कितनी दूर ले जाया जाएगा। जहां भी बसाया जाए, आसपास ही बसाया जाए। 50-50 साल से लोग यहां रह रहे हैं। ‘गरीबों का मन टूट गया है’ स्थानीय जनप्रतिनिधि इशरत अली कहते हैं- “सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला बताया जा रहा है, उसे सुनकर गरीब लोगों का मन टूट गया है। रमजान का महीना चल रहा है, लेकिन लोग ईद की खुशियां भूल चुके हैं। घर-घर मातम जैसा माहौल है। हमारे बनभूलपुरा में हमेशा खुशियां रहती थीं, लेकिन अब माहौल बोझिल है।” वह आगे कहते हैं- यह क्षेत्र हमेशा कांग्रेस का गढ़ रहा है। मुझे लगता है कि राजनीति के तहत बनभूलपुरा को निशाना बनाया गया है और मुस्लिम समाज के वोट खत्म करने की साजिश की जा रही है। यहां ज्यादातर मकान मुस्लिम समाज के हैं। अब समझिए इस पूरे मामले में कब कब क्या हुआ… ————-
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