Cancer Prevention : कैंसर के खतरे को औधें मुंह गिरा सकती हैं रसोई की ये 5 चीजें, आज ही डाइट में करें शामिल

Last Updated:February 26, 2026, 18:43 IST Cancer fighting foods: आज की बदलती लाइफस्टाइल और प्रदूषण के बीच कैंसर आज भी लाइलाज बीमारी है, जिसका नाम सुनते ही रूह कांप जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और हमारा खान-पान इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ सबसे बड़ी ढाल बन सकते हैं? डॉक्टरोंऔर शोधकर्ताओं का मानना है कि प्रकृति ने हमें ऐसे कई ‘सुपरफूड्स’ दिए हैं, जिनमें कैंसर कोशिकाओं (Cancer Cells) को पनपने से रोकने की अद्भुत शक्ति होती है. ऐसे में हम उन टॉप 5 खाने की चीजों के बारे में बताएंगे, जो न केवल एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर हैं, बल्कि शरीर के अंदरूनी घावों को भरने और सेल्स को सुरक्षित रखने में भी कारगर हैं. कैंसर से बचाने वाली फूड. बदलती लाइफस्टाइल की वजह से कैंसर से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है. खासकर युवाओं में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. भले ही कोई खुद को पूरी तरह कैंसर से बचा नहीं सकता, लेकिन कुछ खाने की चीजों और आदतों से कैंसर का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है. कैंसर स्पेशलिस्ट बताते हैं कि जिन चीजों में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा ज्यादा होती है. उन चीजों को खाने से कैंसर का जोखिम बहुत कम हो जाता है. इसे इस तरह समझिए कि हमारे शरीर में अरबों कोशिकाएं होती है. कोशिकाओं में रासायनिक चक्र चलता रहता है. इन कोशिकाओं में जब ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है तो फ्री रेडिकल्स की संख्या बढ़ने लगती है. यह फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं की संरचना को बिगाड़ने लगता है जिससे कोशिकाएं कैंसर सेल में बदलने लगती है. लेकिन अगर हमारे भोजन से पर्याप्त एंटीऑक्सीडेंट्स बनते हैं तो ये फ्री रेडिकल्स कम होने लगते हैं. मुख्य रूप से कुदरती चीजें जैसे कि हरी सब्जियां, फल और साबुत अनाज में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा ज्यादा होती है. आइए जानते हैं कि वे कौन-कौन सी चीजें होती हैं जो हमारे शरीर में कैंसर से लड़ने की ताकत बढ़ाती हैं. पोषक तत्वों से भरपूर कंदों में शकरकंद का खास स्थान है. इसमें पानी, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, मिनरल्स और जरूरी विटामिन्स जैसे A, B6, C, पोटैशियम, मैंगनीज के साथ-साथ बीटा कैरोटीन, क्लोरोजेनिक एसिड, एंथोसाइनिन और क्यूमरिन जैसे फायदेमंद तत्व भी पाए जाते हैं. शकरकंद में कैंसर से लड़ने की खूबियां ज्यादा होती हैं. खासकर इसमें मौजूद कैरोटिनॉइड्स पेट, किडनी और ब्रेस्ट कैंसर को कम करने में काफी मदद करते हैं. खास बात ये है कि पर्पल शकरकंद में ब्लूबेरी से तीन गुना ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं. अंकुरित ब्रोकली या स्प्राउट: पकी हुई ब्रोकली से 10 से 100 गुना ज्यादा पोषक तत्व अंकुरित ब्रोकली में होते हैं. इसमें सल्फोराफेन नाम का केमिकल बहुत ज्यादा मात्रा में होता है. यह कैंसर सेल्स की ग्रोथ को रोकने के साथ-साथ ट्यूमर तक जाने वाले ब्लड फ्लो को भी कम करता है. रिसर्च के मुताबिक, यह ब्रेस्ट कैंसर, कोलन कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने में मदद करता है. कीवी फल: इसमें विटामिन सी, फाइबर और पॉलीफेनोल्स भरपूर होते हैं. इससे शरीर में शुरुआती स्तर पर टिशूज को नुकसान होने से रोका जा सकता है. साथ ही कीवी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन्स, सेल्स में होने वाले ‘डीएनए’ डैमेज को ठीक करने में मदद करते हैं. डीएनए डैमेज ही कैंसर सेल्स के बढ़ने का बड़ा कारण है, इसलिए कैंसर रोकने में यह बहुत फायदेमंद है. ग्रीन टी: ग्रीन टी में एपिगैलोकैटेचिन-3-गैलेट नाम का ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट होता है. इसमें मौजूद ये एंटीऑक्सीडेंट कैंसर सेल्स बनने से रोकता है और उन्हें दूसरे अंगों में फैलने से भी कंट्रोल करता है. इसके अलावा ये शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल्स को खत्म करता है और हेल्दी सेल्स के डीएनए को नुकसान से बचाता है. बीन्स: बीन्स में प्रोटीन और फाइबर बहुत ज्यादा होता है. रिसर्च के मुताबिक, जो लोग ज्यादा बीन्स खाते हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा 28% तक कम हो सकता है. क्योंकि ज्यादा फाइबर खाने से कोलन कैंसर का रिस्क भी कम होता है. स्पष्टीकरण: ये जानकारी सिर्फ सामान्य सूचना के लिए दी गई है. हर व्यक्ति का शरीर अलग-अलग तरह का होता है इसलिए जरूरी नहीं कि सब पर एक ही चीज लागू हो. ऐसे में अपनी डाइट या रोजमर्रा की आदतों में कोई बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें. News18 इन जानकारियों के लिए जिम्मेदार नहीं है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने अपने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, स…और पढ़ें First Published : February 26, 2026, 18:43 IST
क्या सिर मुंडवाने से डैंड्रफ की समस्या खत्म हो सकती है? इस बारे में क्या कहते हैं हेयर एक्सपर्ट

Last Updated:February 26, 2026, 18:23 IST Can Going Bald Stop Dandruff: कई लोग डैंड्रफ से छुटकारा पाने के लिए सिर मुंडवा लेते हैं. उन्हें लगता है कि इससे उनकी समस्या दूर हो जाएगी. डॉक्टर्स की मानें तो सिर मुंडवाने से डैंड्रफ का इलाज नहीं होता है, क्योंकि यह स्कैल्प से जुड़ी एक समस्या है. नियमित एंटी-डैंड्रफ शैंपू और सही देखभाल से डैंड्रफ की समस्या से राहत मिल सकती है. डॉक्टर की मानें तो डैंड्रफ की समस्या सिर मुंडवाने से दूर नहीं होती है. Is Head Shaving Cure for Dandruff: अधिकतर लोगों को डैंड्रफ की समस्या का सामना करना पड़ता है. खासतौर से सर्दियों में यह समस्या काफी बढ़ जाती है. डैंड्रफ हो जाए, तो इससे बालों को भी नुकसान होता है और हेयर फॉल बढ़ जाता है. कई लोग डैंड्रफ से निजात पाने के लिए घरेलू नुस्खे अपनाते हैं, तो कुछ तरह-तरह के शैम्पू इस्तेमाल करते हैं. कई लोग सोचते हैं कि अगर सिर मुंडवा देंगे, तो डैंड्रफ भी दूर हो जाएगा. जब बाल ही नहीं रहेंगे, तो डैंड्रफ भी नहीं होगा. अब सवाल है कि क्या वाकई सिर मुंडवाने से डैंड्रफ की समस्या खत्म हो सकती है? चलिए इस बारे में डॉक्टर्स से हकीकत जान लेते हैं. यूपी के कानपुर स्थित जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. युगल राजपूत ने News18 को बताया कि सिर मुंडवाने से डैंड्रफ की समस्या खत्म नहीं होती है. डैंड्रफ बालों से नहीं, बल्कि स्कैल्प से पैदा होता है. जब बाल हटा दिए जाते हैं, तो डैंड्रफ कम दिखाई देता है या आसानी से धोकर निकल सकता है. हालांकि इसकी असली वजह स्किन के अंदर छिपी रहती है. डैंड्रफ तब होता है, जब स्कैल्प में मौजूद तेल यानी सीबम और यीस्ट के प्रति स्किन प्रतिक्रिया करती है. इससे स्किन में जलन होती है और डेड सेल्स तेजी से झड़ने लगती हैं, जो सफेद परत के रूप में नजर आती हैं. मौसम में बदलाव, तनाव, जेनेटिक कारण और संवेदनशील त्वचा इस समस्या को बढ़ा सकते हैं. सिर मुंडवाने के बाद जब बाल आते हैं, तब डैंड्रफ भी लौट आता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर के मुताबिक कुछ मामलों में सिर मुंडवाना नुकसान भी पहुंचा सकता है. बिना बालों के स्कैल्प सीधे धूप, प्रदूषण और हार्श हेयर प्रोडक्ट्स के संपर्क में आ जाती है. रेजर से हल्की कट या जलन भी हो सकती है, जिससे त्वचा की सुरक्षा परत कमजोर पड़ जाती है. इससे सूखापन, खुजली और लालिमा बढ़ सकती है, जो डैंड्रफ को और खराब कर सकती है. डैंड्रफ से राहत पाने का सही तरीका नियमित और उचित देखभाल है. मेडिकेटेड एंटी-डैंड्रफ शैंपू लंबे समय में ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं. शैंपू को कुछ मिनट तक स्कैल्प पर छोड़कर धोने से उसका असर बेहतर होता है. बहुत ज्यादा कठोर साबुन से बार-बार बाल धोने से बचना चाहिए और तनाव को नियंत्रित रखना भी जरूरी है. एक्सपर्ट की मानें तो यह समझना जरूरी है कि डैंड्रफ एक स्किन कंडीशन है, न कि बालों की समस्या. इसलिए इलाज का फोकस स्कैल्प पर होना चाहिए, बाल हटाने पर नहीं. सही देखभाल, संतुलित जीवनशैली और विशेषज्ञ की सलाह से डैंड्रफ को नियंत्रित रखा जा सकता है. मिथकों पर भरोसा करने के बजाय वैज्ञानिक और चिकित्सकीय सलाह अपनाना ही बेहतर उपाय है. अगर आपको समस्या ज्यादा है, तो डॉक्टर से मिलकर अपनी जांच कराएं. परेशानी की वजह का पता लग जाएगा, तो उसे इलाज के जरिए ठीक किया जा सकता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 26, 2026, 18:23 IST
कस्बों में डॉक्टरों की खुशामद:60 लाख तक प्री बोनस, मुफ्त फ्लैट-कार दे रहे, आधी रात कार पंक्चर तो भी सेवक हाजिर; कनाडा में चिकित्सकों की कमी

कनाडा की पहचान जिस स्वास्थ्य व्यवस्था से थी, वही आज डॉक्टरों की भारी कमी की वजह से गंभीर संकट में है। देश की करीब 25% आबादी के पास अपना फैमिली डॉक्टर नहीं है। हालात ऐसे हैं कि छोटे शहर डॉक्टरों को नियुक्त करने के लिए एक-दूसरे से होड़ कर रहे हैं। कस्बों और शहर में आईपीएल नीलामी की तरह डॉक्टरों पर बोली लगा रहे हैं। कहीं, डॉक्टरों को रिझाने के लिए मेयर खुद गाइड बन रहे हैं तो कहीं मुफ्त कार, तो कहीं कोई फ्लैट दे रहा है। अल्बर्टा प्रांत के स्टेटलर कस्बे की कहानी से इसे समझ सकते हैं। स्टेटलर और इसके आसपास के इलाके की आबादी करीब 12 हजार है। कोरोना के बाद कई डॉक्टर मानसिक थकावट के कारण जल्दी रिटायरमेंट ले रहे हैं। 2023 में यहां के 14 फैमिली डॉक्टरों में से 7 ने रिटायरमेंट या ट्रांसफर ले लिया। हालात इतने बिगड़े कि डॉक्टरों की कमी के कारण इमरजेंसी विभाग कुछ दिनों तक बंद रहने लगा। तब मेयर समेत अन्य नेताओं ने बैठक बुलाई। भर्ती टीम के प्रमुख डीन लोवेल बताते हैं, ‘वह संकट का समय था। हमने तय किया कि हम डॉक्टरों को सिर्फ सैलरी नहीं, बल्कि एक वीआईपी लाइफस्टाइल ऑफर करेंगे।’ स्टेटलर ने 7 नए डॉक्टर लाने के लिए करीब 2.5 करोड़ रु. खर्च किए। मेयर ने डॉक्टर के लिए गाइड बनना तय किया। डॉक्टरों के परिवार की हर जरूरत पूरी करने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति की गई है। चाहे रात 12 बजे कार का टायर पंक्चर हो जाए या बच्चों के लिए बेस्ट स्कूल और आइसक्रीम पार्लर खोजना हो। वो व्यक्ति तैयार मिलेगा। घाना से आई डॉ. एवुरा कंकम बताती हैं, ‘जब मैं कस्बे में गई, मेरे बच्चे परेशान हो रहे थे, लेकिन यहां के अपनेपन ने दिल जीत लिया।’ तथ्य – स्टेटलर में आए 7 नए डॉक्टरों में से 6 नाइजीरिया से स्टेटलर में आए 7 नए डॉक्टरों में से 6 नाइजीरिया से हैं। भर्ती टीम के प्रमुख डीन लोवेल कहते हैं, ‘नाइजीरिया जैसे देश डॉक्टर ट्रेंड करते हैं और हम उन्हें ले आते हैं।’ डॉक्टरों को लुभाने के तरीके, नकद बोनस – ओंटारियो के कई कस्बे 60 लाख रु. तक का नकद बोनस दे रहे हैं। वहीं, स्टेटलर हर डॉक्टर को 30 से 43 लाख रु. का नकद जॉइनिंग बोनस दिया गया। लग्जरी सुविधाएं – एक साल के लिए मुफ्त कार और गोल्फ क्लब की मेंबरशिप। ओंटारियो के मुख्यमंत्री डग फोर्ड ने तो डॉक्टरों को अपना फोन नंबर तक दे दिया है कि ‘बस एक कॉल करो और यहां आ जाओ।’
ब्रेन को डिटॉक्स करने के लिए रात में अच्छी नींद जरूरी, मेमोरी भी हो जाएगी बूस्ट, फायदों की लिस्ट बेहद लंबी

Last Updated:February 26, 2026, 17:16 IST Nighttime Brain Detox: गहरी नींद के दौरान ब्रेन का ग्लिम्फैटिक सिस्टम सक्रिय होकर टॉक्सिन्स और वेस्ट प्रोडक्ट्स को साफ करता है. ऐसे में पर्याप्त नींद याददाश्त, भावनात्मक संतुलन और दिमागी सेहत के लिए बेहद जरूरी है. अगर आप रात में पर्याप्त नींद नहीं लेंगे, तो इससे ब्रेन में टॉक्सिन्स जमा हो जाएंगे और आपकी दिमागी सेहत बिगड़ जाएगी. अच्छी नींद के दौरान ब्रेन खुद को रिपेयर करता है और इससे ब्रेन फंक्शन बूस्ट होता है. Sleep and Brain Health: अक्सर कहा जाता है कि स्वस्थ रहने के लिए हर दिन 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेनी चाहिए. अच्छी और गहरी नींद को अक्सर आराम से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह शरीर और ब्रेन की रात की रिपेयरिंग प्रोसेस है. दिनभर की भागदौड़, मानसिक तनाव और शारीरिक थकान के बाद नींद वह समय है, जब शरीर खुद को रिपेयर करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नींद पूरी न हो, तो इसका असर केवल एनर्जी पर नहीं, बल्कि ब्रेन की कार्यक्षमता, भावनात्मक संतुलन और याददाश्त पर भी पड़ता है. इससे ब्रेन हेल्थ बिगड़ सकती है और कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं. हाल ही में लोंगेविटी और प्रिवेंटिव मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर थॉमन पेलोस्की ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के जरिए बताया है कि नींद को सबसे शक्तिशाली डिटॉक्स माना जा सकता है. गहरी नींद के दौरान मस्तिष्क एक विशेष क्लीन-अप सिस्टम सक्रिय करता है, जिसे ग्लिम्फैटिक सिस्टम कहा जाता है. यह प्रणाली सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड (CSF) की मदद से मस्तिष्क में जमा वेस्ट प्रोडक्ट्स, टॉक्सिन्स और अतिरिक्त प्रोटीन को साफ करती है. इसे दिमाग की रात की धुलाई प्रक्रिया कहा जा सकता है, जो हमें अगले दिन के लिए तरोताजा बनाती है. रात की अच्छी नींद ब्रेन को डिटॉक्स करने का बेहतरीन तरीका है. View this post on Instagram
आशा कार्यकर्ताओं ने मानदेय न मिलने पर किया प्रदर्शन:पन्ना कलेक्ट्रेट में धरना, मुख्यमंत्री से मांगों पर कार्रवाई की मांग

पन्ना जिले में आशा और आशा पर्यवेक्षक कार्यकर्ताओं ने महीनों से रुके मानदेय और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। गुरुवार, 26 फरवरी को म.प्र. आशा/ऊषा सहयोगी श्रमिक संघ के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान उन्होंने जमकर नारेबाजी की और धरने पर बैठ गईं। प्रदर्शन के बाद, संघ ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें कार्यकर्ताओं ने अपनी विभिन्न मांगों को विस्तार से रखा। ज्ञापन में बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली ये कार्यकर्ता आर्थिक तंगी का सामना कर रही हैं। पूर्व में घोषित 1000 रुपये की वार्षिक वृद्धि और केंद्र सरकार द्वारा जारी 1500 रुपये की राशि का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें महीनों तक मानदेय नहीं मिलता, और जब मिलता है तो वह अधूरा होता है। कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि रक्षाबंधन, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों पर भी उन्हें बकाया भुगतान नहीं मिला। इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद, उन्हें न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी और सामाजिक सुरक्षा जैसे लाभों से वंचित रखा गया है। आशा कार्यकर्ता करुणा गौतम ने कहा कि शासन-प्रशासन मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए उनकी तारीफ तो करता है, लेकिन जब उनके हक के पैसे देने की बात आती है, तो फाइलें दबा ली जाती हैं। उन्होंने अपनी खराब आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर का किराया देना भी मुश्किल हो रहा है। यूनियन के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मानदेय का नियमित भुगतान और अन्य अनियमितताओं को दूर नहीं किया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप लेगा।
एयर टिकट बुकिंग 48 घंटे में कैंसिल की तो फुल-रिफंड:फ्लाइट से 7 दिन पहले बुकिंग जरूरी, DGCA के नए नियम; जानें बदलाव

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने गुरुवार को हवाई यात्रा के टिकट रिफंड और कैंसिल करने से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक, अब टिकट बुक करने के 48 घंटे के भीतर कैंसिल या बदलाव करने पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लगेगा, यानी टिकट का पूरा अमाउंट रिफंड किया जाएगा। यह फैसला यात्रियों की बढ़ती शिकायतों और हाल ही में इंडिगो की उड़ानों में हुई दिक्कतों के बाद लिया गया है। इस फैसले से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब सवाल 1: DGCA के नए आदेश में बड़ी राहत क्या है? जवाब: सबसे बड़ी राहत ‘जीरो कैंसिलेशन चार्ज’ को लेकर है। अब अगर आप एयर टिकट बुक करते हैं, तो बुकिंग के 48 घंटे के भीतर उसे कैंसिल करने या उसमें कोई बदलाव करने पर एयरलाइन आपसे कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं वसूल सकती। हालांकि, यह सुविधा कुछ शर्तों के साथ मिलेगी। सवाल 2: क्या यह सुविधा हर टिकट पर मिलेगी या कोई समय सीमा भी है? जवाब: इसके लिए ‘फ्री लुक-इन पीरियड’ की शर्त है। यह सुविधा तभी मिलेगी जब टिकट की बुकिंग उड़ान की तारीख से कम से कम 7 दिन पहले की गई हो। अगर आप फ्लाइट से दो-तीन दिन पहले टिकट बुक करते हैं, तो 48 घंटे वाली यह छूट लागू नहीं होगी। सवाल 3: अगर टिकट ट्रेवल एजेंट या ऑनलाइन पोर्टल से बुक किया है, तो रिफंड कौन देगा? जवाब: DGCA ने साफ किया है कि भले ही टिकट ट्रेवल एजेंट या किसी पोर्टल (जैसे मेकमायट्रिप, गोइबिबो आदि) से बुक हुआ हो, रिफंड वापस करने की जिम्मेदारी एयरलाइन की ही होगी। एजेंट एयरलाइन के प्रतिनिधि माने जाते हैं, इसलिए एयरलाइन यह बहाना नहीं बना सकती कि पैसा एजेंट के पास है। सवाल 4: रिफंड का पैसा वापस मिलने में कितने दिन लगेंगे? जवाब: एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करना होगा कि रिफंड की प्रक्रिया हर हाल में 14 वर्किंग डेज (कामकाजी दिनों) के भीतर पूरी हो जाए। 5. मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में रिफंड के क्या नियम हैं? जवाब: अगर यात्री या उसके परिवार का कोई सदस्य (जो उसी PNR पर है) यात्रा के दौरान अस्पताल में भर्ती हो जाता है, तो एयरलाइन को या तो पूरा रिफंड देना होगा या ‘क्रेडिट शेल’ (जिसे बाद में इस्तेमाल किया जा सके) की सुविधा देनी होगी। अन्य बीमारियों के मामले में, एयरलाइन के एरोस्पेस मेडिसिन विशेषज्ञ या DGCA के पैनल में शामिल डॉक्टर की फिटनेस रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जाएगा। सवाल 6: DGCA को नियमों में यह बदलाव करने की जरूरत क्यों पड़ी? जवाब: इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, यात्रियों की ओर से रिफंड न मिलने या देरी से मिलने की शिकायतें लगातार बढ़ रही थीं। दूसरा, दिसंबर 2025 में इंडिगो की उड़ानों में रुकावट आई थी, जिसके बाद मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया और रिफंड प्रक्रिया को सरल बनाने के निर्देश दिए। सवाल 7: क्या किराया बढ़ने पर बदलाव के दौरान अंतर देना होगा? जवाब: नियम के मुताबिक एयरलाइन आपसे ‘कैंसिलेशन फीस’ या ‘चेंज फीस’ नहीं लेगी, लेकिन यदि आप टिकट की तारीख बदलते हैं और उस नई तारीख का बेस फेयर पुराना टिकट बुक करते समय के फेयर से ज्यादा है, तो आपको किराए का अंतर देना पड़ सकता है। सवाल 8: यह नया नियम कब से प्रभावी हुआ है? जवाब: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने संशोधित सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट्स (CAR) को 24 फरवरी को जारी किया है। यह अब से लागू माना जाएगा। सवाल 9: क्या एयरलाइंस अपनी मर्जी से कोई और चार्ज जोड़ सकती हैं? जवाब: नहीं, DGCA के नियम का उल्लंघन करने पर एयरलाइंस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। यात्रियों की सुविधा के लिए नियमों को ‘पैसेंजर फ्रेंडली’ बनाया गया है ताकि एयरलाइंस रिफंड के नाम पर मनमानी न कर सकें। सवाल 10: अगर 48 घंटे बीत जाएं, तो क्या होगा? जवाब: बुकिंग के शुरुआती 48 घंटों के बाद ‘लुक-इन’ ऑप्शन खत्म हो जाएगा। इसके बाद अगर आप टिकट कैंसिल करते हैं या बदलाव करते हैं, तो आपको एयरलाइन की सामान्य पॉलिसी के हिसाब से कैंसिलेशन फीस और अन्य चार्जेस देने होंगे। —————————————————– बिजनेस से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें ED ने अनिल अंबानी का 17 मंजिला घर जब्त किया:कीमत ₹3716 करोड़; बिजनेसमैन की 40 हजार करोड़ के फ्रॉड मामले में जांच जारी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के मुंबई स्थित बंगले ‘एबोड’ को अटैच यानी जब्त कर लिया है। PTI के अनुसार इसकी कीमत करीब 3,716 करोड़ रुपए आंकी गई है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत की गई है। पूरी खबर पढ़ें
अधिकतर परेशानियों में डॉक्टर MRI कराने की देते हैं सलाह, क्या CT Scan और X-Ray हो गए आउटडेटेड?

Last Updated:February 26, 2026, 16:22 IST MRI vs CT Scan vs X-Ray: एमआरआई, सीटी स्कैन और एक्स-रे तीनों का अपना अलग महत्व है. रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिषेक बंसल ने बताया कि MRI सॉफ्ट टिश्यूज और नसों की जांच में बेहतर है, जबकि CT स्कैन इमरजेंसी में तेज और प्रभावी होता है. X-Ray आज भी हड्डियों और फेफड़ों की जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. कोई भी इमेजिंग आउटडेटेड नहीं है. डॉ. अभिषेक बंसल के मुताबिक एमआरआई में रेडिएशन नहीं होता है, जिससे इसे ज्यादा सेफ माना जाता है. Are CT Scans and X-Rays Outdated: एक जमाने में किसी भी तरह की परेशानी होने पर लोगों को एक्स-रे और सीटी स्कैन कराने की सलाह दी जाती थी. अब समय काफी बदल गया है और डॉक्टर्स अधिकतर मामलों में एमआरआई कराने की सलाह देते हैं. MRI के जरिए सेहत से जुड़ी तमाम समस्याओं का आसानी से पता लगाया जा सकता है. सीटी स्कैन और एक्स-रे के मुकाबले MRI की कीमत भी ज्यादा होता है. ऐसे में कई मरीजों के मन में सवाल उठता है कि क्या अब CT स्कैन और X-Ray जैसे पुरानी इमेजिंग तकनीक आउटडेटेड हो चुकी हैं? क्या अब हर बीमारी के लिए MRI ही जरूरी है? इस बारे में डॉक्टर से जानते हैं. दिल्ली के आकाश हेल्थकेयर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अभिषेक बंसल ने News18 को बताया कि एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई तीनों का अपना अलग महत्व है. किसी भी इमेजिंग तकनीक को आउटडेटेड नहीं कहा जा सकता है. X-Ray की बात करें तो यह सबसे पुरानी और तेज इमेजिंग तकनीक में से एक है. हड्डियों में फ्रैक्चर, फेफड़ों के इंफेक्शन जैसे निमोनिया या टीबी और दांतों की जांच में एक्स-रे आज भी बेहद उपयोगी है. एक्स-रे करने में 1 मिनट से कम वक्त लगता है और इसकी कीमत कम होती है. हालांकि इस इमेजिंग में सिर्फ 2D इमेज दिखती है. डॉक्टर बंसल ने बताया कि कंप्यूटेड टोमोग्राफी यानी CT Scan की बात करें, तो यह स्कैन एक्स-रे का एडवांस वर्जन माना जा सकता है. यह शरीर की क्रॉस-सेक्शनल इमेज देता है. यह सिर की चोट, ब्रेन हेमरेज, फेफड़ों की गंभीर समस्या, पेट के आंतरिक अंगों और कैंसर की जांच में उपयोगी माना जाता है. इस स्कैन से लिवर और किडनी की समस्याओं का भी पता लगाया जा सकता है. इमरजेंसी कंडीशंस में CT स्कैन बहुत तेजी से रिजल्ट देता है, इसलिए एक्सीडेंट या स्ट्रोक के मामलों में इसे प्रायोरिटी दी जाती है. सीटी स्कैन 2 मिनट में हो जाता है. इस स्कैन में 3D इमेज दिखती है, लेकिन इसमें एक्स-रे रेडिएशन होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. एक्सपर्ट के मुताबिक मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानी MRI सबसे एडवांस तकनीक है और इसमें रेडिएशन नहीं होता है. एमआरआई में पावरफुल मैग्नेटिक फील्ड और रेडियो वेव्स की मदद से शरीर के अंदर की 3D इमेज ली जाती हैं. MRI हमारी रीढ़ की हड्डी, नसों, मांसपेशियों और सॉफ्ट टिश्यू की समस्याओं में ज्यादा सटीक जानकारी देता है. ट्यूमर, लिगामेंट इंजरी, स्लिप डिस्क या न्यूरोलॉजिकल डिजीज में MRI सबसे सटीक इमेज बनाता है. शरीर के जिन अंगों की इमेज एक्स-रे और सीटी स्कैन में नहीं बन पाती है, उन मामलों में एमआरआई कराने की सलाह दी जाती है. MRI करने में करीब 30 मिनट वक्त लगता है और इसकी कीमत ज्यादा होती है. रेडियोलॉजिस्ट की मानें तो प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए भी MRI को सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें रेडिएशन नहीं होता है. हालांकि CT स्कैन और X-Ray को आउटडेटेड नहीं माना जा सकता है. मरीज की कंडीशन के अनुसार डॉक्टर एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई कराने की सलाह देते हैं. मरीजों को खुद से जांच की मांग करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह पर भरोसा करना चाहिए. MRI, CT स्कैन और X-Ray तीनों आधुनिक चिकित्सा के महत्वपूर्ण उपकरण हैं, जो डायग्नोसिस के अलावा ट्रीटमेंट में भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 26, 2026, 16:21 IST
सीधी में भू-अर्जन कर्मचारी 1 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार:लोकायुक्त टीम ने पकड़ा, 27 लाख मुआवजे पर मांगी थे 13 लाख

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में लोकायुक्त पुलिस रीवा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भू-अर्जन शाखा के कर्मचारी भूपेंद्र पांडेय को 1 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गुरुवार के दिन गिरफ्तार किया है। यह दूसरी बार है जब आरोपी को लोकायुक्त पुलिस ने ट्रैप में पकड़ा है, जिससे विभागीय तंत्र में हड़कंप मच गया है। शिकायतकर्ता शिवबहोर तिवारी, जो ग्राम सदना के निवासी हैं, ने लोकायुक्त को शिकायत दी थी। उनकी नौ डिसमिल जमीन हाईवे परियोजना में प्रभावित हुई थी, जिसके लिए उन्हें 27 लाख रुपये का मुआवजा स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि इस मुआवजा राशि को जारी कराने के लिए कर्मचारी भूपेंद्र पांडेय ने उनसे 13 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने पहले भी मजबूरी में 1 लाख रुपये की राशि दी थी। तय योजना के तहत, गुरुवार को वह दूसरी किस्त के रूप में 1 लाख रुपये देने पहुंचे थे, जबकि शेष राशि पांच दिन बाद देने की बात हुई थी। इसी दौरान उन्होंने लोकायुक्त एसपी से शिकायत की, जिसके बाद सत्यापन कर ट्रैप की रणनीति बनाई गई। लोकायुक्त टीम को मिली सूचना का विधिवत सत्यापन किया गया। आरोप सही पाए जाने पर टीम ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप ऑपरेशन को अंजाम दिया। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, टीम ने उसे तत्काल रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई। लोकायुक्त थाना प्रभारी एस. आर. मरावी ने बताया कि शिकायत के सत्यापन में तथ्य सही पाए जाने पर गुरुवार को आरोपी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आरोपी भूपेंद्र पांडेय के विरुद्ध पूर्व में भी लोकायुक्त पुलिस द्वारा आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जा चुका है।
सिंगरौली के आमो गांव में आधी रात चोर पकड़ाया:ग्रामीणों ने खंभे से बांध; जियावान पुलिस को सौंपा

सिंगरौली जिले के जियावान थाना क्षेत्र के आमो गांव में बुधवार देर रात चोरी की घटना सामने आई। एक घर में घुसे चोर को मकान मालिक ने रंगे हाथों पकड़ लिया। ग्रामीणों ने चोर को खंभे से बांधकर पुलिस को सौंप दिया। यह घटना रात करीब 1 बजे की है। गुरुवार को पुलिस ने मामला दर्ज किया है पीड़ित गृहस्वामी राम रती केवट ने बताया कि रात में उनके घर और किराने की दुकान से कुछ आहट सुनाई दी, जिससे उनकी नींद खुल गई। बाहर निकलने पर उन्होंने देखा कि कुछ लोग दुकान के अंदर घुसे हुए थे। उन्होंने तुरंत शोर मचाया, जिससे गांव के अन्य लोग और उनका बेटा भी मौके पर पहुंच गए। भगदड़ के दौरान राम रती केवट और उनके बेटे ने भागते हुए एक चोर को पकड़ लिया। पकड़े गए आरोपी ने अपना नाम लवकुश बताया। वह घर की बहू के बैग से एक सोने का लॉकेट और किराने की दुकान से कुछ सामान चुराकर भागने की कोशिश कर रहा था। राम रती केवट के अनुसार, उनकी दुकान में यह चौथी चोरी की घटना है। इससे पहले भी तीन बार चोरी हो चुकी है। ग्रामीणों ने चोर को खंभे से बांधकर जियावान थाना पुलिस को सूचना दी। चोर को पकड़कर थाने लाए जियावान थाना प्रभारी डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि ग्रामीणों से सूचना मिलते ही पुलिस टीम रात में मौके पर पहुंची। ग्रामीणों द्वारा पकड़े गए चोर को थाने लाया गया है और मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जीवाजी विश्वविद्यालय में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर प्रतिबंध:नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन

ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय ने परिसर में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस संबंध में एक आदेश जारी किया है और चेतावनी दी है कि नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह कदम शहर में बढ़ते डॉग बाइट के मामलों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर उठाया गया है। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर एक आदेशात्मक बैनर लगाया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति परिसर के अंदर आवारा कुत्तों को भोजन वितरित करते पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रबंधन ने इस निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय में आवारा कुत्तों के हमलों से संबंधित याचिका पर आए आदेश का अनुपालन बताया है। 7-8 लोग डॉग बाइट के शिकार हुए थे दरअसल, ग्वालियर में प्रतिदिन 250 से अधिक डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं। हाल ही में, विश्वविद्यालय परिसर में ही एक आवारा कुत्ते ने एक ही दिन में 7 से 8 लोगों को काट लिया था। इस घटना के बाद छात्र-छात्राओं, प्रोफेसरों और सुबह टहलने आने वाले लोगों में दहशत फैल गई थी। विश्वविद्यालय परिसर में लड़कों और लड़कियों के छात्रावास, प्रोफेसरों के आवास सहित अन्य आवासीय क्षेत्र हैं। यहां प्रतिदिन लगभग पांच हजार लोग सुबह-शाम टहलने आते हैं। ऐसे में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता स्वाभाविक है। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विमलेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि प्रबंधन ने सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को भोजन न देने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि परिसर में डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय आवश्यक हो गया था।






