बेटी के जन्म को याद कर इमोशनल हुईं प्रियंका:बताया – जल्दबाजी में करनी पड़ी मालती के जन्म की घोषणा, कठिन समय में मंत्र बने सहारा

प्रियंका चोपड़ा ने हाल ही में सरोगेसी से जन्मी बेटी मालती मैरी के समय से पहले जन्म के समय को याद कर इमोनल हो गई। एक्ट्रेस ने यह भी बताया कि वह दौर उनके लिए निजी तौर पर बेहद मुश्किल और ट्रॉमेटिक था। उसी समय उन्हें एक मैसेज मिला कि मीडिया में बच्ची के जन्म की खबर आने वाली है। प्रियंका ने बताया कि वे सही समय पर खुद यह खबर शेयर करना चाहते थे, लेकिन लीक के कारण उन्हें जल्दी में पब्लिक अनाउंसमेंट करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि उस वक्त वे तैयार नहीं थे, क्योंकि बच्ची की सेहत को लेकर स्थिति साफ नहीं थी। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी 27 हफ्ते में पैदा हुई थी और 100 दिनों से अधिक समय तक एनआईसीयू में रही। उस कठिन समय के दौरान मेंटल सपोर्ट के लिए उन्होंने बच्ची के पास धीमी आवाज में महामृत्युंजय मंत्र जैसे मंत्र चलाए थे। प्रियंका ने बताया कि जन्म के वक्त बच्ची की हालत नाजुक थी। एक्ट्रेस ने कहा, “वह पर्पल (रंग) दिख रही थी।” यह समय एक्ट्रेस और उनकी पति के निक जोनस के लिए काफी कठिन रहा। उन्होंने माना कि यह उनके जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में से एक था। यह समय कोविड-19 महामारी के दौरान था, इसलिए अस्पताल में नियम सख्त थे। शुरुआत में मिलने की अनुमति सीमित थी। प्रियंका ने बताया कि बच्ची बहुत छोटी थी। मेडिकल प्रोसीजर के दौरान नर्सों को खास सावधानी रखनी पड़ती थी। एक्ट्रेस ने कहा कि शुरुआती घंटों में वह सुन्न महसूस कर रही थीं। सरोगेट की रिकवरी ठीक रही, लेकिन वह खुद स्थिति को समझने की कोशिश कर रही थीं। एक्ट्रेस ने यह भी बताया कि कई लोग बच्ची के लिए दुआ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मालती का इस दुनिया में आना आसान नहीं था। इलाज के दौरान बच्ची को कई मेडिकल सपोर्ट देने पड़े और छह ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी हुए। एनआईसीयू में मंत्र क्यों चलाए? एनआईसीयू में रहने के दौरान प्रियंका और निक जोनस ने शिफ्ट्स में समय बिताया। दोनों कोशिश करते थे कि बच्ची अकेली न रहे। निक जोनस कभी-कभी गिटार पर गाने गाते थे। प्रियंका ने बच्ची के पास एक आईपॉड रखा। उसमें महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र और ओम नमः शिवाय जैसे मंत्र धीरे आवाज में चलते थे। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें मेंटल सपोर्ट मिला। इससे ध्यान और बैलेंस मेंटेन करने में मदद मिली। प्रियंका ने बताया कि शुरुआत में अस्पताल में एक समय पर एक ही व्यक्ति को मिलने की अनुमति थी। उन्होंने बच्ची की पहली आवाज को बहुत हल्का बताया। उन्होंने कहा, “आवाज बिल्ली जैसी धीमी थी।” डॉक्टरों ने कई मेडिकल सपोर्ट दिए। बच्ची को ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी लगे। इस दौरान दोनों ने अपने प्रोफेशनल वर्क रोक दिए। वे अस्पताल में बच्ची के साथ रहे। प्रियंका ने कहा कि उन्होंने खुद को मजबूत रखने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “मुझे डरने या टूटने का विकल्प नहीं था। मुझे मां के रूप में मौजूद रहना था।” वर्क फ्रंट की बात करें तो प्रियंका चोपड़ा इन दिनों अपनी फिल्म ‘द ब्लफ’ का प्रमोशन कर रही हैं। यह फिल्म प्राइम वीडियो पर 25 फरवरी को रिलीज हुई।
बुखार में क्या खाना चाहिए और किन चीजों से करना चाहिए परहेज? सही डाइट से जल्द होगी रिकवरी

What To Eat and Avoid in Fever: जब हमारे शरीर में किसी तरह का इंफेक्शन हो जाए, तो बुखार आने लगता है. दरअसल शरीर इंफेक्शन फैलाने वाले वायरस और बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए अपना तापमान बढ़ाता है, जिससे लोगों को बुखार महसूस होने लगता है. बुखार के कारण लोगों को कमजोरी, भूख न लगना, सिरदर्द और बदन दर्द जैसी समस्याएं होती हैं. ऐसे समय में सही खानपान बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि सही डाइट रिकवरी में मदद करती है. इससे शरीर को एनर्जी मिलती है और पाचन तंत्र पर अत्यधिक दबाव भी नहीं पड़ता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार बुखार में दवाओं के साथ हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक खाना लेना चाहिए, ताकि शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत मिल सके. यूपी के गाजियाबाद की डाइटिशियन रंजना सिंह ने News18 को बताया कि बुखार में शरीर को हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी होता है. तेज बुखार में पसीना ज्यादा आता है, जिससे शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है. इसलिए नारियल पानी, सादा पानी, नींबू पानी, छाछ, सूप और ओआरएस जैसे तरल पदार्थ फायदेमंद होते हैं. सब्जियों का गर्मागर्म सूप या दाल का पतला सूप शरीर को एनर्जी देने के साथ पाचन में भी आसान होता है. पर्याप्त तरल पदार्थ लेने से डिहाइड्रेशन का खतरा कम होता है और कमजोरी भी कम महसूस होती है. बुखार से रिकवरी के लिए पर्याप्त पानी और फ्लूड लेना बहुत जरूरी होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डाइटिशियन ने बताया कि खाने की बात करें, तो बुखार में हल्का और आसानी से पचने वाला खाना लेना चाहिए. खिचड़ी, दलिया, उबले चावल, दाल, उबली सब्जियां और टोस्ट जैसे विकल्प बेहतर रहते हैं. इनमें कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की संतुलित मात्रा होती है, जो शरीर को एनर्जी देती है. अगर बुखार की वजह से भूख कम लग रही हो, तो थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में कई बार खाना बेहतर होता है. इसके अलावा फल जैसे सेब, केला, पपीता और मौसमी भी शरीर को विटामिन और मिनरल्स प्रदान करते हैं. फीवर से निजात पाने के लिए प्रोटीन से भरपूर चीजों का सेवन करना भी जरूरी है, क्योंकि प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में मदद करता है. दाल, मूंग की खिचड़ी, दही, उबले अंडे या पनीर का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है. इसके अलावा बहुत ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है, जिससे गैस, एसिडिटी या उल्टी की समस्या बढ़ सकती है. लोगों को इन चीजों से परहेज करना चाहिए. बुखार के दौरान जंक फूड, तली-भुनी चीजें, ज्यादा मसालेदार खाना, कोल्ड ड्रिंक्स, चाय-कॉफी और कैफीन वाली चीजों से परहेज करना चाहिए. ये चीजें शरीर में सूजन बढ़ा सकती हैं और डिहाइड्रेशन का खतरा भी बढ़ाती हैं.
बैतूल में पुलिया निर्माण से परेशान छात्रों का चक्काजाम:2 महीने से रास्ता बंद, डायवर्शन न होने से हो रही परेशानी, अफसरों ने दी समझाइश

बैतूल शहर के जेएच कॉलेज चौक पर निर्माणाधीन पुलिया को लेकर गुरुवार को छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। पुलिया निर्माण के कारण पिछले दो माह से कॉलेज की मुख्य सड़क बंद है, जिससे छात्रों, शिक्षकों और आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी असुविधा के चलते छात्रों ने दोपहर में कॉलेज चौक पर चक्काजाम कर दिया, जिससे लगभग आधे घंटे तक यातायात बाधित रहा। डायवर्शन न होने से परेशानी छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिया निर्माण स्थल पर ठेकेदार और नगर पालिका द्वारा सुरक्षित डायवर्शन रोड की व्यवस्था नहीं की गई है। इस कारण परीक्षा देने और कॉलेज पहुंचने वाले छात्र-छात्राएं रोजाना देरी से पहुंच रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि पुलिया निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी है, जिससे असुविधा लगातार बढ़ती जा रही है। मौके पर पहुंचे टीआई को छात्रों ने एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि कॉलेज चौक पर निर्माणाधीन पुलिया में अनियमितताएं हो रही हैं। छात्रों के अनुसार, यहां साधारण पाइप पुलिया पर्याप्त होती, लेकिन जानबूझकर बॉक्स पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे करोड़ों रुपये के शासकीय धन के दुरुपयोग की आशंका है। ठेकेदार से छात्रों की कहासुनी ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि सांसद/विधायक निधि से स्थापित बस स्टॉप को बिना किसी वैधानिक आदेश या अनुमति के हटा दिया गया है। छात्रों ने इसे शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग और आपराधिक कृत्य की श्रेणी में रखा। प्रदर्शन के दौरान पुलिया निर्माण करवा रहे ठेकेदार और छात्र नेताओं के बीच कहासुनी भी हुई, जिसे पुलिस ने बीच-बचाव कर शांत कराया। बाद में मौके पर पहुंची ट्रैफिक पुलिस ने पास से डायवर्शन निकालकर यातायात सुचारू कराया और छात्रों को समझाइश देकर जाम खत्म करवाया। छात्रों ने मांग की है कि पुलिया निर्माण कार्य की तकनीकी और वित्तीय जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही, आवागमन के लिए सुरक्षित डायवर्शन रोड तुरंत बनाई जाए।
भारत-जिम्बाब्वे मैच से पहले अमेरिका से आया ड्यू क्योर केमिकल:इसके स्प्रे से ओस का असर कम होगा, आज चेन्नई में होगा मैच

चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में आज ओस (ड्यू) को बड़ा फैक्टर बनने से रोकने के लिए खास तैयारी की गई है। आज भारत और जिम्बाब्वे के बीच मैच शाम 7 बजे से खेला जाएगा, रात के समय मैदान पर काफी ओस पड़ेगी। जिससे ऐसे हालात में बैटिंग आसान और बॉलिंग उतनी ही मुश्किल हो जाती है। ऐसे में मैच को बराबरी पर लाने के लिए इम्पोर्टेड केमिकल इस्तेमाल किया जाएगा। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, चेपॉक स्टेडियम में ओस का प्रभाव कम करने के लिए ‘ड्यू क्योर’ नाम का एक इम्पोर्टेड केमिकल का इस्तेमाल किया जाएगा जिसे अमेरिका से मंगाया गया है। चेन्नई में बढ़ते तापमान से ओस की चिंता अब तक खेले गए शाम के मुकाबलों में ओस बहुत बड़ा कारण नहीं बनी है, लेकिन इस सप्ताह चेन्नई में तापमान बढ़ने के कारण ओस चिंता का विषय बन सकती है। आज मैच के दौरान ह्यूमिडिटी लेवल 80 से 90 परसेंट के बीच रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि दूसरी पारी के दौरान आउटफील्ड पर ओस का असर देखने को मिलेगा। मेजर लीग बेसबॅाल के मैदानों में इस्तेमाल होता है रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि मंगलवार और बुधवार को ग्राउंड पर ‘ड्यू क्योर’ स्प्रे किया गया था, और आज दोपहर को भी इसे स्प्रे किया जाएगा। जिससे भारत और जिम्बाब्वे के बीच रात के मैच के दौरान ओस का असर कम हो सके। यह केमिकल मेजर लीग बेसबॅाल के मैदानों में इस्तेमाल होता है। IPL में भी हो सकता है इस्तेमाल संभावना है कि BCCI इस तरीके का उपयोग सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में भी कर सकता है। IPL 2026 में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि हाल के साल में ओस ने टी-20 मैचों के नतीजों पर बड़ा असर डाला है। पिच रिपोर्ट और रिकॉर्ड चेपॉक की पिच धीमी और स्पिनर्स को मदद करने वाली होती है, लेकिन इस बार फ्रेश पिच तैयार की गई है। इस बार अच्छा बाउंस देखने को मिल रहा है। ऐसे में यहां रन भी बन रहे हैं। इस वर्ल्ड कप में यहां अब तक 6 मैच खेले गए और सभी में 170+ स्कोर बना है। यहां अब तक 9 टी-20 खेले गए। पहले बैटिंग करने वाली टीम ने 4 और चेज करने वाली टीम ने 5 मैच जीते हैं। यहां का हाईएस्ट टीम स्कोर 200/4 है, जो अफगानिस्तान ने इसी वर्ल्ड कप में कनाडा के खिलाफ बनाया था। यहां पहली पारी का एवरेज स्कोर 182 है। भारतीय टीम ने इस मैदान पर अब तक 3 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं, जिनमें से 2 में जीत दर्ज की है, जबकि 1 मैच में उसे न्यूजीलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। वहीं, जिम्बाब्वे पहली बार यहां खेलेगी। गुरुवार को चेन्नई में मौसम अच्छा रहेगा। आसमान पूरी तरह से साफ रहेगा। 32 डिग्री सेल्शियस अधिकतम और 24 डिग्री सेल्शियस न्यूनतम तापमान रहने की संभावना है। बारिश नहीं होगी। —————————————————– क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विजक्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें ————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… सुपर-8 में आज भारत के सामने जिम्बाब्वे:हारने वाली टीम बाहर होगी, टीम इंडिया को वेस्टइंडीज की हार का भी इंतजार टी-20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 का 8वां मैच आज भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेला जाएगा। मुकाबला शाम 7 बजे से चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में शुरू होगा। टॉस शाम 6.30 बजे होना है। दोनों ही टीमों के लिए करो या मरो का मुकाबला है। हारने वाली टीम सेमीफाइनल की रेस से बाहर हो जाएगी। जीतने वाली टीम के पास चांस बना रहेगा। जीतने वाली टीम को वेस्टइंडीज की हार का इंतजार भी है, अगर विंडीज आज का पहला मैच जीत गई तो रात का मैच जीतकर भी टीम की राह मुश्किल ही रहेगी। सुपर-8 स्टेज में दोनों ही टीमों की शुरुआत खराब रही। भारत को साउथ अफ्रीका ने 76 रन से हराया। वहीं जिम्बाब्वे को वेस्टइंडीज ने 107 रन से हरा दिया। पूरी खबर
भारत-जिम्बाब्वे मैच से पहले अमेरिका से आया ड्यू क्योर केमिकल:इसके स्प्रे से ओस का असर कम होगा, आज चेन्नई में होगा मैच

चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में आज ओस (ड्यू) को बड़ा फैक्टर बनने से रोकने के लिए खास तैयारी की गई है। आज भारत और जिम्बाब्वे के बीच मैच शाम 7 बजे से खेला जाएगा, रात के समय मैदान पर काफी ओस पड़ेगी। जिससे ऐसे हालात में बैटिंग आसान और बॉलिंग उतनी ही मुश्किल हो जाती है। ऐसे में मैच को बराबरी पर लाने के लिए इम्पोर्टेड केमिकल इस्तेमाल किया जाएगा। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, चेपॉक स्टेडियम में ओस का प्रभाव कम करने के लिए ‘ड्यू क्योर’ नाम का एक इम्पोर्टेड केमिकल का इस्तेमाल किया जाएगा जिसे अमेरिका से मंगाया गया है। चेन्नई में बढ़ते तापमान से ओस की चिंता अब तक खेले गए शाम के मुकाबलों में ओस बहुत बड़ा कारण नहीं बनी है, लेकिन इस सप्ताह चेन्नई में तापमान बढ़ने के कारण ओस चिंता का विषय बन सकती है। आज मैच के दौरान ह्यूमिडिटी लेवल 80 से 90 परसेंट के बीच रहने का अनुमान है। इसका मतलब है कि दूसरी पारी के दौरान आउटफील्ड पर ओस का असर देखने को मिलेगा। मेजर लीग बेसबॅाल के मैदानों में इस्तेमाल होता है रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि मंगलवार और बुधवार को ग्राउंड पर ‘ड्यू क्योर’ स्प्रे किया गया था, और आज दोपहर को भी इसे स्प्रे किया जाएगा। जिससे भारत और जिम्बाब्वे के बीच रात के मैच के दौरान ओस का असर कम हो सके। यह केमिकल मेजर लीग बेसबॅाल के मैदानों में इस्तेमाल होता है। IPL में भी हो सकता है इस्तेमाल संभावना है कि BCCI इस तरीके का उपयोग सेमीफाइनल और फाइनल मुकाबलों में भी कर सकता है। IPL 2026 में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि हाल के साल में ओस ने टी-20 मैचों के नतीजों पर बड़ा असर डाला है। पिच रिपोर्ट और रिकॉर्ड चेपॉक की पिच धीमी और स्पिनर्स को मदद करने वाली होती है, लेकिन इस बार फ्रेश पिच तैयार की गई है। इस बार अच्छा बाउंस देखने को मिल रहा है। ऐसे में यहां रन भी बन रहे हैं। इस वर्ल्ड कप में यहां अब तक 6 मैच खेले गए और सभी में 170+ स्कोर बना है। यहां अब तक 9 टी-20 खेले गए। पहले बैटिंग करने वाली टीम ने 4 और चेज करने वाली टीम ने 5 मैच जीते हैं। यहां का हाईएस्ट टीम स्कोर 200/4 है, जो अफगानिस्तान ने इसी वर्ल्ड कप में कनाडा के खिलाफ बनाया था। यहां पहली पारी का एवरेज स्कोर 182 है। भारतीय टीम ने इस मैदान पर अब तक 3 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं, जिनमें से 2 में जीत दर्ज की है, जबकि 1 मैच में उसे न्यूजीलैंड के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। वहीं, जिम्बाब्वे पहली बार यहां खेलेगी। गुरुवार को चेन्नई में मौसम अच्छा रहेगा। आसमान पूरी तरह से साफ रहेगा। 32 डिग्री सेल्शियस अधिकतम और 24 डिग्री सेल्शियस न्यूनतम तापमान रहने की संभावना है। बारिश नहीं होगी। —————————————————– क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विजक्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें ————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… सुपर-8 में आज भारत के सामने जिम्बाब्वे:हारने वाली टीम बाहर होगी, टीम इंडिया को वेस्टइंडीज की हार का भी इंतजार टी-20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 का 8वां मैच आज भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेला जाएगा। मुकाबला शाम 7 बजे से चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में शुरू होगा। टॉस शाम 6.30 बजे होना है। दोनों ही टीमों के लिए करो या मरो का मुकाबला है। हारने वाली टीम सेमीफाइनल की रेस से बाहर हो जाएगी। जीतने वाली टीम के पास चांस बना रहेगा। जीतने वाली टीम को वेस्टइंडीज की हार का इंतजार भी है, अगर विंडीज आज का पहला मैच जीत गई तो रात का मैच जीतकर भी टीम की राह मुश्किल ही रहेगी। सुपर-8 स्टेज में दोनों ही टीमों की शुरुआत खराब रही। भारत को साउथ अफ्रीका ने 76 रन से हराया। वहीं जिम्बाब्वे को वेस्टइंडीज ने 107 रन से हरा दिया। पूरी खबर
हल्दी दूध हैं पीते, तो इसमें मिलाएं ये छोटी सी चीज और फिर देखिए कैसे दौड़ती है नसों में ताकत

Last Updated:February 26, 2026, 14:18 IST लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. यह शरीर की सूजन कम करने, जोड़ों के दर्द में राहत देने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करती है. ऋषिकेश: हल्दी वाला दूध भारतीय घरों में पीढ़ियों से एक प्राकृतिक औषधि की तरह इस्तेमाल होता आया है. सर्दी-जुकाम से लेकर शरीर के दर्द और कमजोर इम्यूनिटी तक, हर छोटी-बड़ी परेशानी में इसे फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेद में इसे गोल्डन मिल्क भी कहा जाता है. लेकिन अक्सर लोग इसे सही तरीके से नहीं बनाते. यही कारण है कि नियमित सेवन के बाद भी उन्हें वह पूरा लाभ नहीं मिल पाता जिसकी उम्मीद होती है. दरअसल हल्दी में मौजूद मुख्य तत्व करक्यूमिन शरीर के लिए बेहद उपयोगी है, पर यह अकेले सही तरह से डिजॉल्व नहीं हो पाता. गर्म दूध के साथ हल्दी के फायदे लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष) ने बताया कि हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. यह शरीर की सूजन कम करने, जोड़ों के दर्द में राहत देने और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करती है. जब इसे गर्म दूध के साथ लिया जाता है, तो इसके गुण और भी प्रभावी हो जाते हैं. दूध में मौजूद हेल्दी फैट करक्यूमिन को घुलने में मदद करता है, क्योंकि करक्यूमिन फैट सॉल्यूबल तत्व है. लेकिन सिर्फ दूध और हल्दी मिलाकर पी लेना ही पर्याप्त नहीं है. कैसे बढ़ाएं गुण आयुर्वेद के अनुसार हल्दी का असली फायदा तभी मिलता है जब उसमें चुटकी भर काली मिर्च या फिर घी मिलाई जाए. काली मिर्च में पिपरीन नामक तत्व पाया जाता है. यह पिपरीन करक्यूमिन के अवशोषण को कई गुना बढ़ा देता है. शोध बताते हैं कि बिना काली मिर्च के शरीर करक्यूमिन का बहुत कम हिस्सा ही उपयोग कर पाता है. लेकिन जब हल्दी और काली मिर्च साथ में ली जाती हैं तो इसका असर 20 गुना तक बढ़ सकता है. यही छोटी सी गलती अधिकतर लोग कर देते हैं. हल्दी दूध में मिलाएं काली मिर्च अगर आप रोज रात में हल्दी दूध पीते हैं, लेकिन उसमें काली मिर्च नहीं डालते, तो आप उसके पूर्ण लाभ से वंचित रह सकते हैं. एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी और एक चुटकी ताजी पिसी काली मिर्च मिलाना पर्याप्त होता है. स्वाद को बेहतर बनाने के लिए चाहें तो थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं, लेकिन शहद को कभी भी उबलते दूध में न डालें. दूध थोड़ा ठंडा होने पर ही मिलाएं. सर्दी-जुकाम में राहत और इम्यूनिटी मजबूत हल्दी और काली मिर्च का यह संयोजन इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ-साथ सर्दी-जुकाम में राहत देता है. यह शरीर की अंदरूनी सूजन कम करता है और डिटॉक्स प्रक्रिया को सपोर्ट करता है. जिन लोगों को जोड़ों में दर्द या मांसपेशियों में जकड़न की समस्या रहती है, उनके लिए यह खास तौर पर फायदेमंद हो सकता है. इसके अलावा यह त्वचा की चमक बढ़ाने और नींद की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद कर सकता है. About the Author Vivek Kumar विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें Location : Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand First Published : February 26, 2026, 14:16 IST
फिटनेस के चक्कर में न कर बैठें गलती! अचानक भारी वजन उठाना कितना खतरनाक? जानिए सब कुछ

आगरा. उत्तर प्रदेश के आगरा में युवाओं के बीच जिम का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. बदलती लाइफस्टाइल और भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहने के लिए लोग जिम को बेहतर विकल्प मान रहे हैं. सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि हर उम्र के लोग अब अपनी सेहत को लेकर सजग हो गए हैं. ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. अचानक हैवी वेट उठाना हो सकता है खतरनाकआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक और फिटनेस एक्सपर्ट डॉ. आशीष मित्तल के अनुसार, जिम में शुरुआत करते समय अचानक भारी वजन उठाना खतरनाक साबित हो सकता है. ज्यादा वजन उठाने से जोड़ों (जॉइंट्स) में समस्या हो सकती है, जो लंबे समय तक परेशानी का कारण बनती है. उन्होंने सलाह दी कि एक्सरसाइज हमेशा जिम ट्रेनर के निर्देशानुसार ही करनी चाहिए. शुरुआत में हल्के वजन से अभ्यास करें और धीरे-धीरे शरीर की क्षमता के अनुसार वजन बढ़ाएं. बिना ट्रेनिंग और निगरानी के हैवी वर्कआउट करना जोखिम भरा हो सकता है. ज्यादा एक्सरसाइज भी बन सकती है समस्याडॉ. मित्तल ने बताया कि कई लोग कम समय में जल्दी रिजल्ट पाने के लिए जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज कर लेते हैं. इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और हार्ट से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है, इसलिए ट्रेनर की सलाह के अनुसार ही वर्कआउट करना चाहिए. हैवी वेट उठाते समय ट्रेनर की मदद जरूर लें, ताकि किसी तरह की चोट से बचा जा सके. जिम के साथ हेल्दी डाइट भी जरूरीफिटनेस सिर्फ एक्सरसाइज से नहीं, बल्कि सही खानपान से भी जुड़ी है. डॉ. आशीष मित्तल के अनुसार, जिम करने वालों को देशी और हेल्दी प्रोटीन युक्त भोजन अपनाना चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि डाइट में अंडा, दाल, स्प्राउट्स, दूध, दही, हरी सब्जियां और खासकर पालक को शामिल करें. बाजार के सप्लीमेंट्स या प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स की बजाय घर का बना भोजन ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद होता है. घर पर भी बना सकते हैं हेल्दी प्रोटीन शेकएक्सपर्ट के मुताबिक, घर पर ही पौष्टिक प्रोटीन शेक तैयार किया जा सकता है. इसके लिए बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स का पाउडर बनाकर दूध में मिलाकर पी सकते हैं. यह शरीर को प्राकृतिक रूप से प्रोटीन और ऊर्जा प्रदान करता है. जिम क्यों बन रहा है पहली पसंद?बदलते दौर में जहां पार्क या खुले मैदान की सुविधा हर जगह उपलब्ध नहीं है, वहां जिम एक बेहतर विकल्प बनकर उभरा है. एक ही स्थान पर सभी तरह की एक्सरसाइज की सुविधा मिलने से लोग जिम को प्राथमिकता दे रहे हैं. हालांकि, फिट रहने के लिए जिम अच्छा विकल्प है, लेकिन सही तरीके और संतुलित डाइट के साथ ही इसका पूरा लाभ लिया जा सकता है.
अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत का वादा किया, कहा- हर घुसपैठिये को बाहर निकालेंगे राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:26 फरवरी, 2026, 13:58 IST अमित शाह ने सुरक्षा और जनसांख्यिकीय चिंताओं का हवाला देते हुए कसम खाई कि भाजपा पश्चिम बंगाल चुनाव जीतेगी और बिहार के सीमांचल से घुसपैठियों को हटाने का वादा किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. (एएनआई) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को विश्वास जताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव जीतेगी, और कहा कि सत्ता में आने पर पार्टी राज्य से “हर एक घुसपैठिये को बाहर निकालेगी”। पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे बिहार के सीमांचल क्षेत्र के अररिया जिले में सशस्त्र सीमा बल के एक समारोह को संबोधित करते हुए। समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से शाह ने कहा, “पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि बीजेपी जीतेगी। नई सरकार बनने पर हम हर एक घुसपैठिये को बाहर निकालेंगे।” केंद्रीय मंत्री ने घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया और आरोप लगाया कि इससे प्रभावित क्षेत्रों का जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि घुसपैठिये राशन और नागरिकों के लिए बनी अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार, खासकर सीमांचल क्षेत्र में घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी. शाह ने जोर देकर कहा कि “घुसपैठियों से मुक्ति का मतलब सिर्फ मतदाता सूची से उनके नाम हटाना नहीं है,” उन्होंने कहा कि सरकार “भारतीय धरती से हर एक घुसपैठिए को हटाने” के लिए एक कार्यक्रम लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। #घड़ी | अररिया, बिहार | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कहते हैं, “…घुसपैठियों से मुक्ति का मतलब सिर्फ मतदाता सूची से उनका नाम हटाना नहीं है। हम भारत की धरती से हर एक घुसपैठिए को बाहर करने के लिए एक कार्यक्रम लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं…नरेंद्र मोदी सरकार… pic.twitter.com/glbvRo1QTk– एएनआई (@ANI) 26 फ़रवरी 2026 उन्होंने कहा, “बिहार में घुसपैठियों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू होगी, खासकर सीमांचल क्षेत्र में। हमने इसी मुद्दे पर पिछले साल यहां विधानसभा चुनाव जीता था। और, विरोधियों के हमारे एजेंडे की आलोचना करने के बावजूद हमें जनादेश मिला।” शाह ने कहा, “बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम इस तरह की जनसांख्यिकीय गड़बड़ी के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं। नरेंद्र मोदी सरकार जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।” शाह ने स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर को भी उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सावरकर को एक निडर देशभक्त बताया, जिनके लेखन ने राष्ट्रवादी भावना को प्रेरित किया और उन्हें 1857 के विद्रोह के विचार को भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया। शाह ने कहा, “चाहे वह अस्पृश्यता उन्मूलन हो, भाषाओं का शुद्धिकरण हो या शुद्ध राष्ट्रवाद की दृष्टि हो, वीर सावरकर ने इन सभी के लिए अपार प्रयास किए।” पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव आने वाले महीनों में होने वाले हैं, जिसके चलते राज्य और पड़ोसी क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। (एजेंसियों से इनपुट के साथ) जगह : अररिया, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 26 फरवरी, 2026, 13:58 IST समाचार राजनीति अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत का वादा किया, कहा- हर घुसपैठिए को बाहर निकालेंगे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
एंजायटी और डिप्रेशन की दवाओं की लत क्यों लग जाती है? साइकेट्रिस्ट ने बताया इस बात में कितनी हकीकत

Last Updated:February 26, 2026, 13:42 IST Truth About Antidepressants: एंजायटी और डिप्रेशन की अधिकतर दवाएं सुरक्षित होती हैं, लेकिन ये दवाएं सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए. कुछ एंटी एंजायटी दवाएं गलत तरीके से या लंबे समय तक लेने पर डिपेंडेंसी पैदा कर सकती हैं. डॉक्टर की निगरानी में सही तरीके से लेने पर ये दवाएं प्रभावी और सुरक्षित रहती हैं. इनसे कोई नुकसान नहीं होता है. अगर सही तरीके से एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं ली जाएं, तो कोई नुकसान नहीं होता है. Anxiety & Depression Treatment: आजकल मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. अधिकतर लोग इन परेशानियों को नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन कुछ लोग मेंटल हेल्थ को लेकर सीरियस हो रहे हैं. जितना मेंटल हेल्थ को लेकर अवरेयरनेस बढ़ी है, उतनी ही इसकी दवाओं से जुड़ी भ्रांतियां बढ़ गई हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इस वक्त एंजायटी और डिप्रेशन सबसे ज्यादा लोगों को प्रभावित कर रहे हैं. इनका इलाज दवाओं से किया जाता है. अक्सर माना जाता है कि एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं लेने से लोगों को इनकी लत लग जाती है या शरीर इन दवाओं पर डिपेंडेंट हो जाता है. हालांकि डॉक्टर्स इन सभी बातों को खारिज करते हैं और इन्हें मेंटल डिजीज के इलाज में असरदार और सुरक्षित बताते हैं. नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर और सीनियर साइकेट्रिस्ट डॉ. प्रेरणा कुकरेती ने News18 को बताया कि मेंटल डिजीज कई तरह की होती हैं और उनके इलाज में अलग-अलग दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. डिप्रेशन और एंजायटी की दवाओं का असर होने में थोड़ा वक्त लगता है और लक्षणों से जल्द राहत दिलाने के लिए मरीजों को शुरुआत में बेंजोडायजेपाइन जैसी दवाएं दी जाती हैं. ये दवाएं जल्द असर दिखाती हैं और मरीजों को राहत मिलती है. हालांकि इन दवाओं को कम वक्त के लिए दिया जाता है और फिर ज्यादा सुरक्षित दवाएं लेने की सलाह दी जाती है. कई बार लोग अपनी मर्जी से बेंजोडायजेपाइन जैसी दवाएं लेते रहते हैं या गलत तरीके से यूज करते हैं, जिससे उनका ब्रेन इन पर डिपेंडेंट हो सकता है. अगर इन दवाओं का उपयोग सही तरीके और कम समय के लिए किया जाए, तो इनसे किसी तरह का नुकसान नहीं होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डॉक्टर कुकरेती ने बताया कि एंजायटी और डिप्रेशन की दवाएं काफी सुरक्षित होती हैं और इनसे एडिक्शन जैसा कोई खतरा नहीं होता है. यह लोगों को सिर्फ भ्रम है कि ये दवाएं लेने से उन्हें आदत लग सकती है. जिस तरह डायबिटीज कंट्रोल करने के लिए लोगों को दवा लेनी पड़ती है, वैसे ही कुछ मरीजों का इलाज लंबा चलता है और उन्हें ये दवाएं लंबे समय तक लेनी पड़ती हैं. इसे डिपेंडेंसी या एडिक्शन समझना गलत है. इन दवाओं को लेकर समस्या तब शुरू होती है, जब मरीज डॉक्टर की निगरानी के बिना खुद ही इन दवाओं की मात्रा बढ़ा देते हैं या इन्हें महीनों तक अपनी मर्जी से लेते रहते हैं. किसी भी दवा को गलत तरीके से लेंगे, तो उसके साइड इफेक्ट जरूर देखने को मिलेंगे. इसलिए दवाओं को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है. एक्सपर्ट की मानें तो कई बार मरीज अपनी मर्जी से अचानक दवाएं बंद कर देते हैं, जिसके बाद उन्हें घबराहट, पसीना आना या चक्कर आने जैसे लक्षण महसूस होते हैं. इसे एंटीडिप्रेसेंट डिस्कन्टिन्युएशन सिंड्रोम कहा जाता है. ये दवाएं ब्रेन फंक्शन में बदलाव लाती हैं, इसलिए इन्हें अचानक बंद नहीं करना चाहिए. जब इन्हें अचानक बंद किया जाता है, तो मस्तिष्क को सामंजस्य बिठाने में समय लगता है. इसे अक्सर लोग विड्रॉल मान लेते हैं और लत समझ बैठते हैं. साइकेट्रिस्ट हमेशा सलाह देते हैं कि दवाओं को कभी भी अचानक बंद न करें, बल्कि उनकी खुराक को धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए. अगर प्रॉपर ट्रीटमेंट लेंगे, तो किसी भी दवा की न तो लत लगेगी और न ही शरीर को किसी तरह का नुकसान होगा. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : February 26, 2026, 13:36 IST
राजस्थान के टोंक में पूर्व भाजपा सांसद द्वारा मुस्लिम महिलाओं को कंबल नहीं दिए जाने के विरोध में हिंदू पड़ोसियों ने रैली निकाली जयपुर समाचार

आखरी अपडेट:26 फरवरी, 2026, 13:29 IST राजस्थान के करेड़ा बुजुर्ग गांव में सुखबीर सिंह जौनापुरिया के कंबल अभियान के दौरान मुस्लिम महिलाओं को कंबल देने से इनकार करने पर आक्रोश फैल गया। 60 वर्षीय शकूरन बानो ने कहा कि धर्म के आधार पर पहचाने जाने के बाद उन्हें अपमानित महसूस हुआ और उन्होंने कंबल वापस करने को कहा। (न्यूज18 हिंदी) राजस्थान के टोंक जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया के कंबल वितरण अभियान के बाद करेड़ा बुजुर्ग गांव में आक्रोश फैल गया, जब एक 60 वर्षीय निवासी सहित कई मुस्लिम महिलाओं को कथित तौर पर कंबल देने से इनकार कर दिया गया और उन्हें पहले से दिए गए कंबल वापस करने के लिए कहा गया। यह घटना जौनापुरिया द्वारा आयोजित एक धर्मार्थ वितरण कार्यक्रम के दौरान हुई, जिन्होंने 2014 और 2019 में लोकसभा में टोंक-सवाई माधोपुर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। कार्यक्रम का एक वीडियो, जो तब से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें पूर्व सांसद महिलाओं से उनके नाम पूछते हैं और निर्देश देते हैं कि कुछ लाभार्थियों को मुस्लिम के रूप में पहचानने के बाद उनसे कंबल वापस ले लिए जाएं। फुटेज में, जौनापुरिया को यह कहते हुए सुना जाता है कि कंबल उन लोगों के लिए नहीं थे जो प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को “गाली” देते हैं, साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर किसी को उनके फैसले से ठेस पहुंची है तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। प्रभावित लोगों में 60 वर्षीय शकूरन बानो भी शामिल थीं, जिन्होंने कहा कि इनकार से उतना नुकसान नहीं हुआ जितना उनके साथ किए गए व्यवहार से हुआ। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर पहचाने जाने पर उन्हें अपमानित महसूस हुआ और उन्होंने कंबल वापस करने को कहा। उनके बेटे हनीफ, जो एक लोहार है, ने कहा कि भौतिक मदद की भरपाई की जा सकती है लेकिन सम्मान की हानि की भरपाई करना कठिन है। इस घटना से करेड़ा बुजुर्ग के निवासी नाराज हैं, हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सांप्रदायिक संबंध शांतिपूर्ण बने हुए हैं। मुसलमानों की आबादी बमुश्किल 3% होने के कारण, निवासियों का कहना है कि दोनों समुदाय लंबे समय से सद्भाव में रहे हैं। एकजुटता दिखाने के लिए, हिंदू निवासियों ने शकूरन बानो के समर्थन में रैली की और घटना की निंदा की। गांव की सरपंच के पति हनुमान चौधरी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने अगले दिन विरोध प्रदर्शन किया और जौनापुरिया का पुतला जलाया। कई निवासियों ने आरोप लगाया कि पूर्व सांसद के कार्यों ने गांव की सांप्रदायिक सद्भाव की परंपरा को चोट पहुंचाई है। शकूरन बानो ने कहा कि घटना के बाद कई हिंदू युवक उनके घर आए और जो कुछ हुआ उस पर खेद व्यक्त किया और उन्हें बताया कि वे इस बात से व्यथित महसूस कर रहे हैं कि उनकी “चाची (चाची)” का अपमान किया गया था। इस विवाद ने राजनीतिक ध्यान आकर्षित किया है, राजस्थान कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के सदस्यों और स्थानीय नेताओं ने बानो के घर का दौरा किया और प्रतीकात्मक संकेत के रूप में कंबल प्रदान किए। टोंक जिला कांग्रेस अध्यक्ष सउद सईदी ने मांग की कि भाजपा जौनापुरिया के खिलाफ कार्रवाई करे और उन्हें पार्टी से बाहर निकाले. जौनापुरिया ने बाद में अपने कार्यों का बचाव करते हुए कहा कि कार्यक्रम एक व्यक्तिगत पहल थी और कंबल केवल लगभग 200 भाजपा महिला कार्यकर्ताओं के लिए थे जिनके नाम पहले से सूचीबद्ध थे। उनके अनुसार, उन्हें संदेह था कि उपस्थित महिलाओं में से कुछ पार्टी कार्यकर्ता नहीं थीं और उन्हें डर था कि अगर कंबल रखने की अनुमति दी गई तो वे बाद में “सांसद को बेवकूफ बनाने” का दावा कर सकती हैं। उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उनकी हरकतें सांप्रदायिक प्रकृति की थीं और उन्होंने कहा कि चूंकि कार्यक्रम निजी तौर पर वित्त पोषित था, इसलिए लाभार्थियों का फैसला करने का अधिकार उनके पास था। जौनापुरिया, जो पहले अपनी परोपकारी गतिविधियों के लिए विख्यात रहे हैं, जिसमें वंचितों के लिए एक मुफ्त कैंटीन चलाना भी शामिल है, जिसकी पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में प्रशंसा की थी, उन्हें पहले भी आलोचना का सामना करना पड़ा है, जिसमें एक पुराना दावा भी शामिल है कि कीचड़ में स्नान करने से कोविड-19 को दूर रखने में मदद मिल सकती है। जगह : टोंक, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 26 फरवरी, 2026, 13:29 IST समाचार शहर जयपुर राजस्थान के टोंक में पूर्व भाजपा सांसद द्वारा मुस्लिम महिलाओं को कंबल नहीं दिए जाने के विरोध में हिंदू पड़ोसियों ने रैली निकाली अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें






