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डायबिटीज मरीज भी रख सकते हैं रोजा? किन बातों का रखें ध्यान, वरना दिन में दिखेंगे तारे, डॉक्टर से जानें

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रोजे में खाने के बीच लंबा अंतराल शरीर के अंदर पाचन तंत्र में बदलाव ला सकता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए समस्या पैदा कर सकता है. रोजे के दौरान शुगर स्तर में काफी बदलाव आ जाता है. इससे मरीज को हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है. यह अचानक ब्लड शुगर कम होने का संकेत होता है और मरीज बेहोश हो सकता है. लोकल 18 ने इस बारे में अलीगढ़ के डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. हामिद अशरफ से बात की. वे बताते हैं कि अगर रमजान में डायबिटीज मरीज रोजे रख रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें. ऐसा करना क्यों जरूरी है, आइये जानते हैं.

अलीगढ़. रमजान का पवित्र महीना 19 फरवरी से शुरू हो चुका है, जिसमे पूरे 30 रोजे रखे जाएंगे. इन 30 दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है. इस्लाम को मानने वाले सभी लोग इस दौरान उपवास रखते हैं, जिसे रोजा कहा जाता है. पवित्र कुरान के अनुसार, बीमार लोगों को उपवास करना जरूरी नहीं है, लेकिन कई लोग डायबिटीज होने पर भी पूरे महीने रोजा रखते हैं. वैसे तो शुगर की समस्या होने पर खाने-पीने के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए. लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर डायबिटीज के मरीज भी रोजा रख सकते हैं.

सबसे पहले ये काम

रमजान में रोजा कितने घंटे का होगा यह सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है. रोजे में सुबह की पहली किरण से लेकर सूरज डूबने तक कुछ भी नहीं खाया जाता है. खाने के बीच लंबा अंतराल शरीर के अंदर पाचन तंत्र में बदलाव ला सकता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए समस्या पैदा कर सकता है. ऐसी समस्या से बचने के लिए डायबिटीज मरीज डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डायबिटीज के स्पेशलिस्ट डॉक्टर हामिद अशरफ बताते हैं कि शुगर रोगी भी रोजे रख सकते हैं, मगर इसके लिए डॉक्टर से परामर्श जरूरी है ताकि स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर न पड़े.

डॉ. हामिद बताते हैं कि उपवास के दौरान शुगर स्तर में काफी बदलाव आ जाता है. इससे मरीज को हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है. यह अचानक ब्लड शुगर कम होने का संकेत होता है और मरीज बेहोश हो सकता है. इसका मतलब होता है कि खून में शुगर का अचानक बढ़ जाना जिससे कमजोरी, प्यास, सिर दर्द और नजर में धुंधलापन आ सकता है. इस समस्या को इंसुलिन की उचित मॉनिटरिंग करके स्थिति को संभाल जा सकता है.

रमजान के दौरान डायबिटीज के मरीज अगर रोजे रखे जा रहे हैं तो शुरुआत से पहले ब्लड शुगर की जांच जरूर करें. उपवास में डिहाइड्रेशन एक सामान्य और गंभीर जोखिम है, जिसका सामना विशेष रूप से मधुमेह के रोगियों को करना पड़ता है. ऐसे में नींबू पानी, छाछ, नारियल का पानी, खरबूजे, कम चीनी वाले ताजे फलों का रस, गुलाब के शरबत का पर्याप्त सेवन करें. टाइप वन व टाइप टू मधुमेह रोगी अथवा जिन्हें निरंतर इंसुलिन लेने की जरूरत होती है, उनके लिए थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद अपने रक्त में ग्लूकोज की निगरानी करना जरूरी है. अगर मरीज का शुगर 70 से कम हो या 300 से अधिक पहुंच जाए तो उसे तुरंत रोजा खोल लेना चाहिए.

About the Author

Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें

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अलीगढ़. रमजान का पवित्र महीना 19 फरवरी से शुरू हो चुका है, जिसमे पूरे 30 रोजे रखे जाएंगे. इन 30 दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है. इस्लाम को मानने वाले सभी लोग इस दौरान उपवास रखते हैं, जिसे रोजा कहा जाता है. पवित्र कुरान के अनुसार, बीमार लोगों को उपवास करना जरूरी नहीं है, लेकिन कई लोग डायबिटीज होने पर भी पूरे महीने रोजा रखते हैं. वैसे तो शुगर की समस्या होने पर खाने-पीने के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए. लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर डायबिटीज के मरीज भी रोजा रख सकते हैं.

सबसे पहले ये काम

रमजान में रोजा कितने घंटे का होगा यह सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है. रोजे में सुबह की पहली किरण से लेकर सूरज डूबने तक कुछ भी नहीं खाया जाता है. खाने के बीच लंबा अंतराल शरीर के अंदर पाचन तंत्र में बदलाव ला सकता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए समस्या पैदा कर सकता है. ऐसी समस्या से बचने के लिए डायबिटीज मरीज डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डायबिटीज के स्पेशलिस्ट डॉक्टर हामिद अशरफ बताते हैं कि शुगर रोगी भी रोजे रख सकते हैं, मगर इसके लिए डॉक्टर से परामर्श जरूरी है ताकि स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर न पड़े.

डॉ. हामिद बताते हैं कि उपवास के दौरान शुगर स्तर में काफी बदलाव आ जाता है. इससे मरीज को हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है. यह अचानक ब्लड शुगर कम होने का संकेत होता है और मरीज बेहोश हो सकता है. इसका मतलब होता है कि खून में शुगर का अचानक बढ़ जाना जिससे कमजोरी, प्यास, सिर दर्द और नजर में धुंधलापन आ सकता है. इस समस्या को इंसुलिन की उचित मॉनिटरिंग करके स्थिति को संभाल जा सकता है.

रमजान के दौरान डायबिटीज के मरीज अगर रोजे रखे जा रहे हैं तो शुरुआत से पहले ब्लड शुगर की जांच जरूर करें. उपवास में डिहाइड्रेशन एक सामान्य और गंभीर जोखिम है, जिसका सामना विशेष रूप से मधुमेह के रोगियों को करना पड़ता है. ऐसे में नींबू पानी, छाछ, नारियल का पानी, खरबूजे, कम चीनी वाले ताजे फलों का रस, गुलाब के शरबत का पर्याप्त सेवन करें. टाइप वन व टाइप टू मधुमेह रोगी अथवा जिन्हें निरंतर इंसुलिन लेने की जरूरत होती है, उनके लिए थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद अपने रक्त में ग्लूकोज की निगरानी करना जरूरी है. अगर मरीज का शुगर 70 से कम हो या 300 से अधिक पहुंच जाए तो उसे तुरंत रोजा खोल लेना चाहिए.

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