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गर्मियों में जरूर खाएं ये 5 फल, स्किन पर आएगी नेचुरल ग्लो, रेगुलर सेवन से गुलाब की तरह खिल उठेगा चेहरा

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Last Updated:April 03, 2026, 23:44 IST These fruits will give skin glow in summer: गर्मियों में कई ऐसे फल मिलते हैं, जो ना सिर्फ संपूर्ण सेहत को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं, बल्कि ये त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं. कौन-कौन से हैं ये फल, जिसके सेवन से आप पा सकते हैं ग्लोइंग, शाइनी, हेल्दी और सॉफ्ट निखरी स्किन, जानें यहां… गर्मियों में स्किन को हेल्दी रखने के लिए कौन सा फल खाना है बेस्ट? which fruits will give your skin natural glow: गर्मियों के आगमन के साथ तापमान अधिक होने से चेहरे की रंगत उड़ जाती है. चेहरे का ग्लो, तापमान की वजह से टेनिंग में बदल जाता है. टेनिंग से बचने और ग्लो पाने के लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट का सहारा लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रकृति ने गर्मियों में हमें ऐसे फल दिए हैं, जो हमारी प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने में मदद करते हैं? आज हम आपको गर्मियों में मिलने वाले ऐसे फलों के बारे में बताएंगे, जो आपकी स्किन को नेचुरल ग्लो देंगे. गर्मियों के ये फल त्वचा पर लाते हैं नेचुरल निखार नारियल पानी नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने और त्वचा को ग्लोइंग एवं मुलायम रखने में मदद करता है. अगर गर्मियों में रोजाना एक नारियल पी लिया जाए तो पेट से लेकर त्वचा दोनों ही स्वस्थ महसूस करते हैं. तरबूज तरबूज में भरपूर मात्रा में विटामिन सी, फाइबर और पानी होता है. विटामिन सी टेनिंग हटाने में मददगार होता है. अगर गर्मियों में टैनिंग से परेशान रहते हैं तो अपने आहार में तरबूज को जरूर शामिल करें. चेहरे को ग्लोइंग बनाने से लेकर तरबूज शरीर के तापमान को भी संतुलित रखने में मदद करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. खीरा खीरा सिर्फ सलाद का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह पेट और त्वचा दोनों के लिए सेहत का खजाना है. खीरा पूरे शरीर को हाइड्रेट रखता है और चेहरे के रूखेपन को भी कम करने में मदद करता है. कई स्किन ट्रीटमेंट में खीरे का इस्तेमाल किया जाता है. आम आम की तासीर भले ही गर्म होती है, लेकिन यह स्किन के लिए फायदेमंद होता है. आम में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो चेहरे का खोया निखार वापस लाने में मददगार होते हैं. अगर सही मात्रा में आम का सेवन किया जाए तो यह पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है. संतरा संतरे में भरपूर विटामिन सी होता है. इसका छिलके से लेकर गूदा तक त्वचा के लिए लाभकारी है. संतरा न सिर्फ चेहरे को गहराई से पोषण देता है, बल्कि गहरे दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करता है. संतरे के छिलके का इस्तेमाल भी फेसपैक में किया जाता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : April 03, 2026, 23:44 IST

5 अप्रैल से 9 दिवसीय श्रीरामकथा का आयोजन:जगद्गुरु रामभद्राचार्य अवधपुरी ग्वारीघाट में सुनाएंगे कथा

5 अप्रैल से 9 दिवसीय श्रीरामकथा का आयोजन:जगद्गुरु रामभद्राचार्य अवधपुरी ग्वारीघाट में सुनाएंगे कथा

जबलपुर के अवधपुरी आयुर्वेदिक कॉलेज) परिसर ग्वारीघाट में 5 अप्रैल से 9 दिवसीय श्रीरामकथा का आयोजन किया जाएगा। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य इस कथा का वाचन करेंगे। कथा का विषय ‘श्रीराम जन्म जग मंगल हेतु’ रखा गया है। यह आयोजन 13 अप्रैल तक चलेगा। समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने एक पत्रकार वार्ता में बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता का संदेश प्रसारित करना है। समापन दिवस पर संगठन की तीसरी वर्षगांठ भी मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि कथा में 35 से अधिक समाजों के प्रतिनिधि यजमान के रूप में शामिल होंगे। कथा पंडाल में सभी वर्गों और जातियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, जिससे श्रीराम सबके हैं, सब श्रीराम के हैं” का भाव साकार हो सके। कथा के दौरान प्रतिदिन 10 से 15 मिनट की नाट्य प्रस्तुतियां भी होंगी। इन प्रस्तुतियों में शबरी, रानी दुर्गावती, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जाएगा। कथा के शुभारंभ दिवस, 5 अप्रैल को नर्मदा मैया का पूजन किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 3 बजे ग्वारीघाट से एक शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो अवधपुरी स्थित कथा स्थल पर समाप्त होगी।

हरा या काला अंगूर, कौन सा है ज्यादा फायदेमंद? आयुर्वेद से जानें दोनों के लाभ

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Last Updated:April 03, 2026, 22:08 IST Which grapes are healthier green or black: अंगूर एक ऐसा फल है, जो लाल, काला, हरा आदि रंगों में मिलता है. ये सभी स्वाद में तो एक ही जैसे होते हैं, लेकिन इनके फायदे और औषधीय गुण क्या एक समान होते हैं? हरे और काले अंगूर की बात करें तो दोनों में से कौन है अधिक पौष्टिक और सेहत के लिए लाभदायक, यहां जान लें. हरा या काला कौन सा अंगूर है अधिक फायदेमंद? फरवरी और मार्च के महीने में अंगूर बहुतायत मात्रा में आसानी से मिल जाते हैं. फरवरी और मार्च का महीना हल्का ठंडा और गर्मी वाला होता है, जिसमें शीतल पदार्थों का सेवन करने का मन करता है. ऐसे मौसम में शीतल पदार्थ का सेवन बीमार करने के लिए काफी है, लेकिन प्रकृति ने ऐसा फल दिया है, जो इस हल्के गर्म मौसम में शीतलता प्रदान करता है, वो हैं अंगूर. अंगूर केवल स्वादिष्ट फल नहीं है, बल्कि कई औषधीय गुणों से भरपूर हैं. अंगूर को आयुर्वेद में द्राक्षा कहा जाता है, जो शरीर को शीतलता और पोषण दोनों देता है. हरा अंगूर शरीर में जल-संतुलन और पित्त शमन में सहायक माना जाता है, जबकि काला अंगूर रक्त को पोषण देने और थकान से उबरने में उपयोगी बताया गया है. वहीं विज्ञान ने भी अंगूर को विटामिन से भरपूर पाया है, जो मस्तिष्क से लेकर हृदय तक के लिए लाभकारी है. यह कोशिकाओं की रक्षा करता है और शरीर में ऊर्जा का प्रसार भी तेजी से करता है. पहले विस्तार में बात करते हैं हरे अंगूर की. हरे अंगूर स्वाद में मधुर और पाचन में हल्के होते हैं. हरे अंगूर में पित्त को शांत करने की क्षमता होती है. यह शरीर में गर्मियों में होने वाले निर्जलीकरण से बचाते हैं और पेट में होने वाली जलन को भी कम करते हैं. अगर गर्मी में लू लगने का खतरा लगता है, तब भी अंगूर का सेवन गर्म हवा से सुरक्षा प्रदान करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. वहीं काले अंगूर हरे अंगूर की तुलना में ज्यादा पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. काले अंगूर का सेवन शरीर में रक्त की मात्रा को बढ़ाता है और बल भी प्रदान करता है. काले अंगूर स्किन को साफ करने और बालों को चमकदार बनाने में भी सहायक हैं. काले अंगूर में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं तो शरीर की आंतरिक कमजोरी और थकावट को भी दूर करते हैं और विटामिन सी और ई मिलकर बालों और स्किन को निखारने का काम करते हैं. अब सवाल है कि अंगूर खाने का सही समय क्या है. वैसे आमतौर पर फल को कभी भी खा लिया जाता है, जो गलत है. अंगूर का सेवन सुबह और दोपहर में कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि अंगूर का सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए. विटामिन सी होने की वजह से ये पेट में जलन पैदा कर सकते हैं. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : April 03, 2026, 22:08 IST

आप भी फेंक देते हैं पपीते का बीज? सच जानने के बाद नहीं करोगे गलती, ये फल से ज्यादा जादुई

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Last Updated:April 03, 2026, 21:41 IST Papaya Seeds Benefits : अक्सर लोग पपीते के बीज को फेंक देते हैं, लेकिन सच्चाई तो ये है कि इसके बीज सेहत के लिए किसी खजाने से कम नहीं. इनमें कुछ खास एंजाइम और पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं. यह पाचन ठीक करने से लेकर वजन कम करने तक कई कामों में रामबाण है. अगर आपका पेट अक्सर खराब रहता है, तो इसके बीज आपके लिए प्राकृतिक इलाज हैं. इसका नियमित सेवन करने से लीवर बेहतर तरीके से काम करता है. पपीते के बीज में पपेन एंजाइम पाया जाता है, जो प्रोटीन को आसानी से तोड़ने में मदद करता है. इसी के चलते खाना जल्दी पचता है और कब्ज, गैस जैसी परेशानियां कम होती हैं. अगर आपका पेट अक्सर खराब रहता है, तो ये बीज आपके लिए प्राकृतिक इलाज साबित हो सकते हैं. वैसे पपीते के फल और पत्तियां भी औषधि है. पपीते के बीज शरीर के अंदर जमा गंदगी को बाहर निकालने में सहायता प्रदान कर सकते हैं. पपीते के बीज में लीवर को डिटॉक्स करने की अद्भुत क्षमता होती हैं. इसके नियमित और सीमित मात्रा में सेवन करने से लीवर बेहतर तरीके से काम करता है और शरीर ज्यादा स्वस्थ महसूस करता है. शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल बलिया में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. प्रियंका हरिनखेड़े के अनुसार, पपीते के बीजों में एंटीबैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं, जो पेट के हानिकारक परजीवियों को खत्म करने में बेहद लाभकारी और गुणकारी होते हैं. इससे पेट दर्द, संक्रमण और अपच जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. Add News18 as Preferred Source on Google अगर आप भी अपना वजन कम करने की सोच रहे हैं या अच्छी तरकीब खोज रहे हैं, तो पपीते के बीज आपकी मदद कर सकते हैं. इनमें फाइबर और खास गुण पाए जाते हैं, जो मेटाबॉलिज्म को तेज करते हैं, जिससे शरीर तेजी से फैट बर्न करता है. सही डाइट के साथ इनका सेवन बड़े लाभकारी होते हैं. पपीते के बीजों में सूजनरोधी गुण पाए जाते हैं, जो जोड़ों के दर्द और गठिया जैसी समस्याओं में बहुत उपयोगी हैं. इसके नियमित सेवन से शरीर में सूजन कम होते हैं और मूवमेंट बेहतर रहता हैं. यह प्राकृतिक तरीके से आराम पाने का एक अच्छा तरीका है. बस सही और सीमित मात्रा का ज्ञान जरूरी है. बेशक पपीते के बीज के कई अद्भुत फायदे हैं, लेकिन कुछ सावधानियां भी बहुत जरूरी हैं. इसके ज्यादा मात्रा में सेवन करने से पेट दर्द, दस्त या जलन हो सकती है. पुरुषों में इसका अधिक सेवन अस्थायी रूप से स्पर्म काउंट को प्रभावित कर सकता है. गर्भवती महिलाओं को इससे दूरी बनाकर रखनी चाहिए. बगैर आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लिए इसका सेवन नहीं करना चाहिए. पपीते के बीजों का सेवन हमेशा सीमित मात्रा और एक्सपर्ट की देखरेख में ही करें. दिन में एक छोटा चम्मच पर्याप्त होता है. इन्हें सुखाकर, पीसकर सलाद, दही या स्मूदी में मिलाकर खाया जा सकता है. उम्र और बीमारी के हिसाब से इसका सही डोज एक एक्सपर्ट ही बता सकता है. इसलिए सावधानी पूर्वक सेवन ही लाभकारी और सुरक्षित है. First Published : April 03, 2026, 21:41 IST

केरलम विधानसभा चुनाव 2026: ‘तेलंगाना जनता से सवाल…’, केरलम में चुनावी प्रचार के बीच सीएम रेवंत रेड्डी बड़ा का बयान

केरलम विधानसभा चुनाव 2026: 'तेलंगाना जनता से सवाल...', केरलम में चुनावी प्रचार के बीच सीएम रेवंत रेड्डी बड़ा का बयान

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने केरलम विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अपनी सरकार की मंजूरी का जिक्र करते हुए सारांश सार पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने जनता से सीधे-सीधे साक्षात्कार की भी बात कही. केरल विधानसभा चुनाव के दौरान चल रहे प्रचार अभियान के दौरान तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपनी सरकार के कार्यों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने राज्य में दिए गए वादों को पूरी ईमानदारी से लागू किया है और अगर किसी को संदेह है, तो वह तेलंगाना ज्ञान खुद जनता से पूछ सकते हैं। किसानों को हर साल 18 हजार की मदद मिलती है सरकारः रेवंत रेवंत रेड्डी ने अपनी किताब में कहा, ‘तेलंगाना में 6 गारंटी को प्रभावी तरीके से लागू किया गया है। यदि आप आश्वस्त नहीं हैं, तो आप वहां के लोगों से पूछ सकते हैं कि सरकार ने क्या काम किया है।’ उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार किसानों, युवाओं और आम जनता के हित में लगातार काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए अनुदान जा रही मंजूरी का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार हर साल करीब 18,000 करोड़ रुपये की रतु भरोसेमंद योजना के तहत किसानों को आर्थिक सहायता के रूप में दे रही है। उनका कहना था कि इससे किसानों की आर्थिक स्थिति को मिली है और कृषि क्षेत्र में स्थिरता आई है। रोज़गार के मुद्दे पर सरकार की उपलब्धियाँ इसके अलावा, उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर भी अपनी सरकार की आवश्यकताओं को पूरा किया। रेवंत रेड्डी ने कहा कि उनकी सरकार ने केवल एक साल में 67,173 सरकारी रोजगार उपलब्ध कराए हैं, जो युवाओं के लिए एक बड़ी राहत है। उन्होंने इसे अपने शासन की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सरकार के सिद्धांतों को बहुत गंभीर बताता है। रेवंत रेड्डी ने सैद्धांतिक संरचना पर काम किया अपने भाषण के दौरान रेवंत रेड्डी ने भी अर्थशास्त्र पर बहस की और कहा कि कुछ लोग केवल आरोप लगाते रहते हैं, जबकि उनकी सरकार जमीन पर काम करने में विश्वास रखती है। उन्होंने अपील की कि वे विकास और काम के आधार पर निर्णय लें। रेवंत रेड्डी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब केरलम में एंबेल्ट मोनाको हॉटाया हुआ है और विभिन्न राजनीतिक दल जनता को एकजुट करने के लिए प्रचार कर रहे हैं। उनके इस बयान में राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी गई है। यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘एआईएमआईएम-आईएसएफ के दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी’, मालदा में हुई घटना पर सीएम ममता बनर्जी का आरोप

बैतूल में ट्रैक्टर ठगी गिरोह से जुड़े दो आरोपी गिरफ्तार:26 लाख के चार वाहन बरामद; धोखे से महाराष्ट्र ले जाकर बेच दिया था

बैतूल में ट्रैक्टर ठगी गिरोह से जुड़े दो आरोपी गिरफ्तार:26 लाख के चार वाहन बरामद; धोखे से महाराष्ट्र ले जाकर बेच दिया था

बैतूल जिले में किसानों के साथ ट्रैक्टर धोखाधड़ी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भैंसदेही पुलिस ने शुक्रवार देर शाम पर्दाफाश किया है। कार्रवाई में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 26 लाख रुपए कीमत के चार ट्रैक्टर बरामद किए हैं। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, 7 फरवरी 2026 को भैंसदेही थाने में किसानों ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी राजेश विजयकर ने ट्रैक्टर को महाराष्ट्र में कुछ समय चलाने के बहाने लिया और बाद में धोखाधड़ी कर बेच दिया। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी राजेश विजयकर (43) निवासी कौडीढाना, भैंसदेही और उसके साथी योगेश पाटिल उर्फ उमेश खरण (45) निवासी बडुरा, जिला अमरावती (महाराष्ट्र) को गिरफ्तार किया। पुलिस ने चार ट्रैक्टर जब्त किए पूछताछ में आरोपियों ने किसानों से ट्रैक्टर लेकर उन्हें महाराष्ट्र में बेचने की बात कबूल की। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो सोनालिका और दो मैसी कंपनी के ट्रैक्टर जब्त किए हैं। बरामद किए गए इन ट्रैक्टरों की कुल कीमत लगभग 26 लाख रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया है। इस गिरोह के तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश सातनकर सहित पुलिस टीम और साइबर सेल के कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

दुनिया का सबसे सस्ता देश: दुनिया का सबसे सस्ता देश कौन है? कोई समुद्री सीमा नहीं है, जानिए भारत से कितनी दूरी है

लाओस में करने के लिए 10 सर्वश्रेष्ठ चीज़ें: लाओस के आकर्षण (2026)

बजट यात्रा 2026: दुनिया के सबसे प्रसिद्ध गंतव्यों के बारे में हम आज आपको बताने जा रहे हैं। खुशी की बात ये है कि ये भारत से सिर्फ 5 घंटे की दूरी पर है। ऐसे में अगर आप विदेश घूमना चाहते हैं लेकिन बजट का लक्ष्य है तो लाओस के लिए सटीक गंतव्य स्थान प्राप्त किया जा सकता है। लाओस को 2025 और 2026 दोनों भाइयों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा देश बताया गया है। यहां एक दिन का खर्च औसत 15 से 25 डॉलर (लगभग 1300-2100 रुपये) तक है, जिसमें रहना, खाना और स्थानीय घूमना शामिल है। वहीं, भारत से लाओस रेस्तरां भी काफी आसान है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता से भी यहां कनेक्टिंग फ्लाइट्स हैं, यहां की यात्रा में करीब 5 से 9 घंटे लगते हैं। हालांकि कोई सीधी उड़ान नहीं है, लेकिन बैंकॉक और हनोई से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। लाओस कैसा देश है? लाओस दक्षिण-पूर्व एशिया का एकमात्र स्थलरुद्ध (स्थलरुद्ध) देश है। इसके बाज़ार चीन, वियतनाम, कंबोडिया, चिन्ता और म्यांमार से हैं। देश का कुल चित्र लगभग 2,36,800 वर्ग किलोमीटर है। यहां का अधिकांश हिस्सा पहाड़ों और घने जंगलों से भरा हुआ है। यहां मेकांग नदी को देश की जीवन रेखा कहा जाता है, खेती और परिवहन के लिए जरूरी है। यहां 2 सीज़न हैं, मई से नवंबर तक बारिश और दिसंबर से अप्रैल तक सूखा मौसम। नवंबर से फरवरी के लिए यात्रा करना सबसे अच्छा माना जाता है। देश में थेरवाद बौद्ध धर्म की व्याख्या है जनसंख्या और यहां की संस्कृति के बारे में बात की जाए तो, 2026 की शुरुआत में लाओस की जनसंख्या करीब 7.97 मिलियन (लगभग 80 लाख) है। यहां औसत आयु 25 वर्ष के आसपास है, यानी युवा आबादी सबसे ज्यादा है। देश में बौद्ध धर्म की गहरी झलक देखने को मिलती है। लुआंग प्रबांग चित्रण विश्व पिरामिड स्थल है, जहां सुबह भिक्षुओं को भिक्षा दर्शन का अनोखा अनुभव मिलता है। पिछले वर्ष 4.6 मिलियन से अधिक बड़ा तूफ़ान आया यहां के लोग काफी सादा जीवन जीते हैं। प्रमुख त्योहारों में लाओ न्यू ईयर (पी माई) और पारंपरिक नाव दौड़ शामिल हैं। आधिकारिक भाषा लाओ है, जो थाई भाषा सेलेट-जुलती है। लाओस एक उन्नत देश है। यहां का उद्योग मुख्य रूप से कृषि, जलविद्युत और बढ़ते पर्यटन पर टिकी है। 80 प्रतिशत से अधिक लोग खेती पर असंबद्ध हैं। चावल, फूलगोभी और रबर मुख्य फसलें हैं।पर्यटन क्षेत्र में तेजी से वृद्धि हो रही है। वर्ष 2025 में लाओस ने 4.6 मिलियन से अधिक बड़े पैमाने पर पर्यटन का स्वागत किया, जो लक्ष्य से अधिक था। लाओस सबसे सस्ता क्यों है? साल 2026 में 5 से 6 मिलियन अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म का प्रदर्शन किया गया। चीन-लाओस रेलवे की वजह से चीनी संगीत की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। हेलोसेफ (HelloSafe) और इंडी स्टोरर जैसे पटाखे के अनुसार लाओस 2025-26 में सबसे सस्ता स्टोर डेस्टिनेशन है। हॉस्टल या गेस्ट हाउस में रात का खर्च 7-10 डॉलर से शुरू होता है। स्थानीय खाना 2 डॉलर में मिल जाता है। अन्यत्र किराया 8 डॉलर प्रतिदिन मिल सकता है। यहां लुआंग प्रबांग के बौद्ध मंदिर और फ्रेंच कॉलोनियल स्मारक बहुत खुबसूरतदिखते हैं। मेकांग नदी पर सनसेट क्रूज़ और वांग वियंग की गुफाएं और ट्यूबिंग भी अद्भुत हैं, इसके अलावा बोलावेन वियन्ग के झरने और फ्लोरिडा प्लांटेशन भी यहां प्रतीकात्मक से लोग देखते हैं। भारतीय ऑब्जेक्टिव के लिए बेहतरीन संस्थान भारतीय रेट्रोस्टॉल के लिए लाओस शांत वातावरण, प्राकृतिक प्रकृति और कम खर्च का बेहतरीन कॉम्बिनेशन ऑफर देता है। मास्टर ऑन अराइवल या ई-वीजा आसानी से मिल जाता है। यदि आप कम बजट में विदेश यात्रा का प्लान बनवा रहे हैं, तो लाओस को अपनी सूची में अवश्य शामिल करें। प्रकृति, संस्कृति और शांति एक साथ, साथ ही जेब पर भी कम खर्च। यह भी पढ़ें: दिल्ली में नकली टूथपेस्ट की मूंगफली का भण्डाफोड़, नामी कंपनी का लोगो (टैग्सटूट्रांसलेट)लाओस सबसे सस्ता देश(टी)बजट यात्रा लाओस(टी)भारत से लाओस उड़ान(टी)लुआंग प्रबांग पर्यटन(टी)किफायती दक्षिण पूर्व एशिया गंतव्य

केरल चुनाव 2026: व्हाट्सएप युद्ध से लेकर एआई वीडियो तक, सोशल मीडिया कैसे चुनावी आख्यानों को आकार दे रहा है | चुनाव समाचार

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आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 20:06 IST केरल की पार्टियाँ चुनावी आख्यानों को आकार देने, युवाओं और गेटेड मतदाताओं को लक्षित करने के लिए एआई संचालित सोशल मीडिया वॉर रूम चलाती हैं, लेकिन अधिकारी बढ़ती गलत सूचना और सांप्रदायिक सामग्री के बारे में चेतावनी देते हैं। एआईसीसी महासचिव और वायनाड लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार प्रियंका गांधी केरल के वायनाड जिले में चुनाव प्रचार के दौरान एक परिवार से मिलीं। (छवि: पीटीआई) केरल के चुनावी विमर्श में सोशल मीडिया अब गौण नहीं रह गया है। यह इस बात का केंद्र है कि राजनीतिक आख्यान कैसे बनाए जाते हैं, लड़े जाते हैं और बढ़ाए जाते हैं। व्हाट्सएप फॉरवर्ड से लेकर एआई-जनरेटेड वीडियो तक, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अभियान के जमीन पर पहुंचने से पहले ही मतदाता धारणा को तेजी से आकार दे रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में, पहचान, समुदाय और शासन के इर्द-गिर्द राजनीतिक रूप से आरोपित आख्यानों ने राज्य में ऑनलाइन लोकप्रियता हासिल की है। ये आख्यान हमेशा जमीनी हकीकतों को सीधे तौर पर प्रतिबिंबित नहीं करते हैं, लेकिन वे यह तय करते हैं कि मतदाता उनकी व्याख्या कैसे करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस बदलाव को पहचान लिया है। अभियान अब डिजिटल-प्रथम दृष्टिकोण के साथ डिज़ाइन किए जा रहे हैं, जहां संदेश को त्वरित उपभोग और उच्च साझाकरण के लिए तैयार किया गया है। द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईटी पेशेवरों और एजेंसियों द्वारा संचालित चौबीसों घंटे चलने वाले वॉर रूम अब केरल में तीनों मोर्चों के लिए सोशल मीडिया-केंद्रित अभियान चला रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक प्रमुख उपकरण के रूप में उभरा है, जिसका उपयोग पार्टियां वीडियो बनाने और राजनीतिक संदेशों को अधिक आकर्षक प्रारूपों में पैकेज करने के लिए कर रही हैं। रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कैसे सीपीआई (एम) के राज्य आईटी केंद्र ने चुनाव-केंद्रित सामग्री की ओर रुख किया है, एआई का उपयोग करके दृश्यों को फिर से बनाया है और शासन की कहानियां सुनाई हैं जहां अभिलेखीय फुटेज सीमित हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने समर्पित एजेंसियों को काम पर रखा है और युवा दर्शकों तक पहुंचने के लिए एआई-संचालित सामग्री और व्यंग्य-शैली वाले वीडियो के मिश्रण का प्रयोग कर रही है। भाजपा भी एलडीएफ और यूडीएफ दोनों के खिलाफ अपनी हमले की रेखाओं को तेज करने के लिए डिज़ाइन किए गए वीडियो सहित एआई-जनित सामग्री और लक्षित संदेश तैनात कर रही है। लेकिन सोशल मीडिया की बढ़ती केंद्रीयता जोखिमों के साथ आती है। वही पारिस्थितिकी तंत्र जो अभियान संदेश को बढ़ाता है, गलत सूचना को भी सक्षम बनाता है। द हिंदू की रिपोर्ट में एक हालिया उदाहरण का हवाला दिया गया है जहां अभिनेता आसिफ अली को सार्वजनिक रूप से उनके नाम पर प्रसारित एक फर्जी, सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील पोस्ट का खंडन करना पड़ा, जिससे यह रेखांकित हुआ कि झूठी कहानियां कितनी तेजी से लोकप्रियता हासिल कर सकती हैं और ध्रुवीकृत प्रतिक्रियाएं शुरू कर सकती हैं। डिजिटल स्पेस पर नज़र रखने वाले पुलिस अधिकारियों ने चुनाव अवधि के दौरान सांप्रदायिक रूप से आरोपित सामग्री में वृद्धि को चिह्नित किया है, जिसे अक्सर वास्तविक और नकली दोनों प्रोफाइलों के माध्यम से प्रसारित किया जाता है। एक मामले में, केरल पुलिस ने एआई-जनरेटेड वीडियो पर कानूनी कार्रवाई शुरू की, जिसमें कथित तौर पर संवैधानिक अधिकारियों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। यह विस्तारित डिजिटल युद्धक्षेत्र बदलती सामाजिक वास्तविकताओं की प्रतिक्रिया भी है। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, राजनीतिक दलों – विशेष रूप से सीपीआई (एम) – ने पिछली हार से सबक लिया है, जिसमें त्रिपुरा में भाजपा का व्हाट्सएप-संचालित अभियान भी शामिल है। सीपीआई (एम) के केएस अरुण कुमार ने कहा, “इसने हमें मतदाताओं तक पहुंचने में डिजिटल संचार और सोशल मीडिया की ताकत का महत्व सिखाया।” “पहले, घर का दौरा प्रचार के केंद्र में था। अब, ज्यादातर लोग काम पर हैं, और गेटेड समुदायों या अपार्टमेंट में, प्रवेश प्रतिबंधित है। उन तक पहुंचने का एकमात्र तरीका मैसेजिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से है,” उन्होंने बताया कि डिजिटल आउटरीच क्यों अपरिहार्य हो गया है। यहां तक ​​कि सांस्कृतिक प्रारूपों को भी इस नए युद्धक्षेत्र के लिए अनुकूलित किया जा रहा है। राजनीतिक रूप से भरे रैप गाने, लघु वीडियो और मीम-आधारित सामग्री का उपयोग अभियान संदेशों को ऐसे प्रारूप में संप्रेषित करने के लिए किया जा रहा है जो युवा मतदाताओं के साथ प्रतिध्वनित होता है और सभी प्लेटफार्मों पर आसानी से फैलता है। तो फिर, सवाल यह नहीं है कि क्या सोशल मीडिया जमीनी हकीकत को पूरी तरह से प्रतिबिंबित करता है। अक्सर ऐसा नहीं होता. लेकिन यह उस लेंस को तेजी से आकार देता है जिसके माध्यम से उस वास्तविकता को देखा जाता है। केरल में, जहां चुनाव बारीकी से लड़े जाते हैं और मतदाता जागरूकता अधिक है, वहां यह नजरिया मायने रखता है। जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 20:06 IST समाचार चुनाव केरल चुनाव 2026: व्हाट्सएप युद्धों से लेकर एआई वीडियो तक, सोशल मीडिया कैसे चुनावी आख्यानों को आकार दे रहा है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग अनुवाद करने के लिए)केरल चुनाव सोशल मीडिया(टी)केरल डिजिटल प्रचार(टी)ऑनलाइन राजनीतिक आख्यान(टी)एआई-जनित राजनीतिक सामग्री(टी)सोशल मीडिया गलत सूचना(टी)व्हाट्सएप चुनाव अभियान(टी)सीपीआई (एम) डिजिटल रणनीति(टी)बीजेपी सोशल मीडिया आउटरीच

‘अबर जीतबे बांग्ला’ बनाम ‘पलटानो डार्कर’: 2026 बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी-बीजेपी का नारा युद्ध तेज हो गया है | चुनाव समाचार

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आखरी अपडेट:03 अप्रैल, 2026, 19:32 IST पश्चिम बंगाल में 2026 के चुनावों से पहले टीएमसी और बीजेपी ने नए नारे लगाए, टीएमसी ने सांस्कृतिक पहचान और बाहरी आख्यान पर जोर दिया, बीजेपी ने शासन और बदलाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए सुर बदले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता के विवेकानन्द युबा भारती क्रीरंगन (वीवाईबीके) में 134वें डूरंड कप के उद्घाटन के दौरान फुटबॉल को किक मारती हुईं। (छवि: पीटीआई) पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संदेश अक्सर घोषणापत्रों से भी तेज गति से प्रसारित होते हैं। जैसे-जैसे राज्य 2026 के विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ रहा है, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच नारे की लड़ाई पहले से ही प्रतियोगिता को परिभाषित कर रही है। टीएमसी की नवीनतम पिच, “जोतोई कोरो हमला, अबर जितबे बांग्ला” (जितना चाहें उतना हमला करें, बंगाल फिर से जीतेगा), अवज्ञा और परिचितता दोनों रखती है। यह ताल “खेला होबे” ​​की याद दिलाती है, जो 2021 के विधानसभा चुनावों का नारा-गान बन गया, जिसने पॉप-सांस्कृतिक यादों के साथ राजनीतिक संदेश को धुंधला कर दिया। देबांगशु भट्टाचार्य द्वारा रैप-जैसे प्रारूप में लिखा और प्रस्तुत किया गया वह प्रारंभिक अभियान, स्तरित सांस्कृतिक संदर्भों पर आधारित था। “बैरे थेके बोर्गी ऐश, नियोम कोरे प्रोति माशे” जैसी पंक्तियाँ बोर्गी शब्द का आह्वान करती हैं, जो बंगाल में ऐतिहासिक रूप से प्रचलित शब्द है। बोर्गी 18वीं सदी के मराठी घुड़सवार हमलावरों को संदर्भित करता है, जिन्होंने 1741 और 1751 के बीच बंगाल में बार-बार घुसपैठ की थी। यह शब्द फ़ारसी बारगीर से लिया गया है, जो राज्य द्वारा सुसज्जित सैनिकों के एक वर्ग को संदर्भित करता है। समय के साथ, बोर्गी ने लोककथाओं और लोरी के माध्यम से बंगाली सांस्कृतिक स्मृति में प्रवेश किया, विशेष रूप से “छेले घुमलो, पाडा जुरालो, बोर्गी एलो देशे”, जो अघोषित रूप से आने वाले बाहरी खतरे का प्रतीक है। वर्तमान राजनीतिक संदर्भ में, टीएमसी का संदेश एक समानांतर खींचता है, जो भाजपा को एक “बाहरी” ताकत के रूप में पेश करता है जो बंगाल के भाषाई और सांस्कृतिक लोकाचार के साथ संरेखित नहीं है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि नया नारा टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी के दिमाग की उपज है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में, पार्टी ने कहा कि नारा और उसके साथ जुड़ी दृश्य पहचान “भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ आम लोगों की शिकायतों और नाराजगी” को दर्शाती है। टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता ने संदेश को पार्टी द्वारा “शोषण, अपमान, धमकी और उत्पीड़न” के खिलाफ “सामूहिक क्रोध” को पकड़ने का प्रयास बताया, जबकि इसे भाजपा को अस्वीकार करने के लिए एक सहज सार्वजनिक कॉल कहा जाता है। यह टीएमसी की अभियान रणनीति में एक पैटर्न जारी है। 2021 में, पार्टी के नारे “बांग्ला निजेर मेयेकेई चाय” ने ममता बनर्जी को बंगाल की “अपनी बेटी” के रूप में पेश किया। 2024 के लोकसभा चुनावों में, “जोनोगोनर गोर्जोन, बांग्ला बीजेपीर बिसोर्जोन” ने इस प्रतियोगिता को भाजपा के खिलाफ लोगों के नेतृत्व वाले पुशबैक के रूप में तैयार किया। भाजपा, अपनी ओर से, स्वर और शब्दावली दोनों को पुन: व्यवस्थित करती दिख रही है। जबकि “जय श्री राम” पिछले चुनाव चक्रों में एक प्रमुख मंत्र के रूप में उभरा था, अब “जॉय मां काली” और “जॉय मां दुर्गा” की ओर एक स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है, जो बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना में गहराई से अंतर्निहित देवताओं का आह्वान करता है। इस सांस्कृतिक पुनर्मूल्यांकन के साथ-साथ, भाजपा ने शासन के मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित रखा है। इसके नारे – “पलटानो डार्कर, चाय बीजेपी सरकार” (परिवर्तन की जरूरत है, हम बीजेपी सरकार चाहते हैं) और “बंचते चाय, बीजेपी ताई” (जीवित रहने के लिए, हमें बीजेपी की जरूरत है) – चुनाव को एक विकल्प के बजाय एक आवश्यकता के रूप में पेश करते हैं। पार्टी का अभियान भ्रष्टाचार के आरोपों, महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित चिंताओं को प्रमुखता से जारी रखता है, जिसमें आरजी कर मामले जैसी घटनाओं का संदर्भ भी शामिल है, जिसके कारण राज्य भर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, और घुसपैठ और अवैध आप्रवासन का मुद्दा, जिसके बारे में उसका दावा है कि यह बंगाल में जनसांख्यिकीय पैटर्न को बदल रहा है। मैसेजिंग में बहुत बड़ा विरोधाभास है। टीएमसी अपनी “अंदरूनी बनाम बाहरी” कथा को तेज करने के लिए बोर्गी जैसे ऐतिहासिक रूप से निहित रूपकों का उपयोग करते हुए पहचान, सांस्कृतिक स्मृति और प्रतिरोध पर झुक रही है। भाजपा, अपनी सांस्कृतिक अपील को स्थानीय बनाने का प्रयास करते हुए, अपने अभियान को शासन की कमियों और परिवर्तन के वादे पर केंद्रित कर रही है। बंगाल की चुनावी राजनीति में नारे सिर्फ प्रचार के औजार नहीं हैं. वे राजनीतिक आशुलिपि के रूप में कार्य करते हैं, जटिल आख्यानों को रैलियों, सोशल मीडिया और स्थानीय प्रवचन में प्रसारित पंक्तियों में संपीड़ित करते हैं। चुनाव होने में कई महीने बाकी हैं, ऐसे में संदेश की लड़ाई से पता चलता है कि 2026 का मुकाबला चुनावी अंकगणित के साथ-साथ प्रतिस्पर्धी आख्यानों द्वारा भी तय किया जाएगा। पहले प्रकाशित: 03 अप्रैल, 2026, 19:32 IST समाचार चुनाव ‘अबर जीतबे बांग्ला’ बनाम ‘पलटानो डार्कर’: 2026 बंगाल चुनाव से पहले टीएमसी-बीजेपी के बीच नारा युद्ध तेज अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव के नारे(टी)टीएमसी अभियान रणनीति(टी)बीजेपी संदेश बंगाल(टी)2026 पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)अंदरूनी बाहरी कथा(टी)राजनीतिक नारे बंगाल(टी)सांस्कृतिक राजनीति 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युवक की ट्रेन की चपेट में आया युवक, मौत:शाजापुर के बेरछा स्टेशन के पास हादसा, ट्रेन से गिरने की जताई आशंका

युवक की ट्रेन की चपेट में आया युवक, मौत:शाजापुर के बेरछा स्टेशन के पास हादसा, ट्रेन से गिरने की जताई आशंका

शाजापुर के बेरछा रेलवे स्टेशन के पास शुक्रवार को एक युवक की ट्रेन की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। घटना सुबह करीब 11 से 12 बजे के बीच हुई। सोनकच्छ का रहने वाला था मृतक सूचना मिलने पर बेरछा थाना पुलिस और रेलवे पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू की। मृतक की पहचान दौलतपुर, थाना सोनकच्छ निवासी गोपाल पिता हिम्मत सिंह के रूप में हुई है। मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए शाजापुर जिला अस्पताल भेजा गया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। ट्रेन से गिरकर मौत की आशंका बेरछा थाना प्रभारी भरत किरण ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृतक दो दिन पहले बारात में शामिल होने के लिए इलाहाबाद प्रयागराज गया था। पुलिस को आशंका है कि वापस आते समय ट्रेन से गिरने के कारण उसकी मौत हुई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।