सत्तू पराठा रेसिपी: विशेष रूप से हाई प्रोटीन वाला सत्तू का पराठा, पति से लेकर बच्चों के टिफिन तक सभी के लिए परफेक्ट रेसिपी

हाई प्रोटीन रेसिपी: यदि आप खोज में कुछ ऐसा बनाना चाहते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ क्लासिक भी हो, तो सत्तू का पराठा एक बेहतरीन स्थान है। यह न सिर्फ पेट भरने वाला होता है बल्कि प्रोटीन से भरपूर भी होता है, जिससे कि मिनरल एनर्जी बनी रहती है। बता दें कि इसे आप बच्चों के टिफिन से लेकर पति के आदर्श बॉक्स तक आसानी से दे सकते हैं। तो जानें सत्तू पराठा बनाने की आसान विधि- सत्तू भुने हुए चने का आटा होता है, जो बिहार और उत्तर भारत में बहुत लोकप्रिय है। इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और आयरन की मात्रा प्रचुर मात्रा में होती है, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए बहुत बढ़िया माना जाता है। सत्तू पराठा बनाने के लिए आवश्यक सामग्री आटा गूंधने के लिए: स्टफिंग के लिए: सत्तू का पराठा खाने के फायदे क्या हैं? सत्तू का पराठा एक ऐसा नाश्ता है जो स्वाद, सेहत और सुविधा तीनों का प्रभावशाली संयोजन है। इसमें मौजूद प्रोटीन आपकी सेहत के लिए भी अच्छा होता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)सत्तू पराठा रेसिपी(टी)सत्तू का पराठा(टी)सत्तू पराठा कैसे बनाएं(टी)घर का बना सत्तू पराठा(टी)पराठा(टी)हाई प्रोटीन रेसिपी(टी)सत्तू का पराठा कैसे बनाएं
परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

करीब साढ़े 400 साल पहले पश्तून बाबी वंश मुगल शासक हुमायूं के साथ गुजरात पहुंचा। यह अफगानिस्तान का शाही परिवार था, जो मुगल साम्राज्य का अहम हिस्सा बना और कई रियासतों पर शासन किया। मुगल सत्ता कमजोर होने पर बाबी और मराठा (गायकवाड़ वंश) में जंग हुई, जिसमें मराठाओं ने अधिकांश गुजरात पर कब्जा किया, लेकिन बाबी ने जुनागढ़, राधनपुर और बालासिनोर पर शासन जारी रखा। मोहम्मद महाबत खान-3, जूनागढ़ की रियासत के आखिरी नवाब रहे। महाबत खान के एक करीबी रिश्तेदार थे वली मोहम्मद खान बाबी। उन्होंने 1940 में जमाल बख्ते बाबी से शादी की। सालों तक उन्हें संतान नहीं हुई। 1947 में ब्रिटिश हुकूमत खत्म होने पर रियासतें खत्म कर सरकारें बनाई जाने लगीं और भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। 15 अगस्त 1947 को आखिरी नवाब महाबत खान ने जूनागढ़ को पाकिस्तान में शामिल करने की घोषणा की, जिस पर लोगों ने आपत्ति जताई। 20 फरवरी 1948 के जनमत में 99% से ज्यादा लोगों ने भारत में शामिल होने का फैसला किया। जब सरकार बनी तो जूनागढ़ के नवाब माहबत के करीबी रिश्तेदार वली मोहम्मद खान की भी रियासत ले ली गई और बदले में उन्हें 100 बीघा जमीन यानी 40 एकड़ (17 लाख 42 हजार वर्ग फुट) दी गई। राजशाही खत्म होने के बावजूद वो शाही जिंदगी जीते थे। शादी के 14 साल बाद उनके घर खुशखबरी आई। पत्नी जमाल बख्ते ने जूनागढ़ की शाही हवेली में 4 अप्रैल 1954 को बेटी को जन्म दिया। नाम दिया गया, परवीन सुल्ताना वली मोहम्मद खानजी बाबी। वही परवीन बाबी जो हिंदी सिनेमा की मशहूर और टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल रहीं। वही परवीन बाबी जो अपने ग्लैमर, वेस्टर्नाइजेशन और समय से आगे चलने वाली सोच के लिए जानी गईं। जब महिलाएं पर्दे पर भी सिगरेट थामने से कतराती थीं, तब परवीन बाबी मिनी स्कर्ट पहनकर सड़कों पर सिगरेट पीते हुए टहला करती थीं। जब डायरेक्टर बी.आर.इशारा ने उन्हें पहली बार देखा, तब उनकी इसी बोल्डनेस के मुरीद हो गए और उन्हें तुरंत फिल्म ऑफर कर दी। आज परवीन बाबी की 72वीं बर्थ एनिवर्सरी है। अगर आज वो होतीं, तो अपना 72वां जन्मदिन मनातीं। उनकी जिंदगी के आखिरी दिन बेहद दर्दनाक थे। अकेलेपन की हद ये थी कि जब उनकी मौत हुई तो 4 दिनों तक बॉडी बंद घर में सड़ती रही। आज परवीन बाबी की बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनके समय से आगे चलने और जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक किस्से- 54 कमरों की हवेली में हुई परवरिश, पढ़ाई के लिए शर्त पर घर छोड़ा शाही परिवार में जन्मीं परवीन बाबी का बचपन जूनागढ़ की 54 कमरों की हवेली में बीता। इकलौती संतान को ऐशोआराम मिला और घर में 6 नौकर थे। 6 साल की उम्र में पिता का कैंसर से निधन हुआ, जिसके बाद वह दीवान चौक की दो मंजिला हवेली में रहने लगीं। शुरुआती पढ़ाई गुजराती मीडियम स्कूल से हुई। 14 साल की उम्र में मां ने उन्हें पढ़ाई के लिए अहमदाबाद भेजा, हालांकि परिवार इसके खिलाफ था। शर्त रखी गई कि जल्दी शादी कराई जाएगी, जिस पर मां मान गईं और उनका दाखिला सेंट जेवियर कॉलेज में हुआ। कॉलेज में कोर्स न होने के बावजूद परवीन बाबी ने खुद फर्राटे दार अंग्रेजी बोलना सीखा। आगे उन्होंने इंग्लिश और साइकोलॉजी में बेचलर डिग्री ली और अंग्रेजी में मास्टर डिग्री। शर्त के अनुसार 15 साल की उम्र में परवीन की सगाई कजिन जमील खान से हुई, जो पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स में पायलट थे। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद मां ने सगाई तोड़ दी और परवीन को इसकी जानकारी पोस्टकार्ड से मिली। 17 की उम्र में सिगरेट पीती थीं, मिनी स्कर्ट पहनती थीं; यही देख ऑफर हुई फिल्म 1971 में डायरेक्टर बी.आर. इशारा अहमदाबाद में एक नांव दो किनारे की शूटिंग कर रहे थे। भीड़ के बीच उनकी नजर एक लड़की पर पड़ी, जो मिनी स्कर्ट में सिगरेट पी रही थी। लंबी कद-काठी और छरहरे बदन वाली वह लड़की चारमिना सिगरेट थामे हुए थी। वह लड़की परवीन बाबी थीं, जिनकी उम्र 17 साल थी। बी.आर. इशारा समझ गए कि वह खास हैं और उन्होंने फोटोग्राफर से उनकी तस्वीरें लेने को कहा। फोटोग्राफर ने तस्वीरें लीं और बी.आर. इशारा ने परवीन को बुलाकर पूछा- फिल्मों में काम करोगी। आमतौर पर कोई भी लड़की तुरंत हामी भर देती, लेकिन परवीन ने कहा, अगर स्क्रिप्ट पसंद आई तो। बी.आर.इशारा इस एक जवाब में समझ गए कि लड़की में कॉन्फिडेंट की भरमार है। वैसे तो वो कभी अपनी फिल्मों की हीरोइन से किसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं करवाते थे, लेकिन परवीन बाबी का मॉडर्न लुक देख वो भी सोच में पड़ गए। उन्हें लगा कि कहीं ये मॉडर्न ख्यालों वाली लड़की मन न बदल ले। उन्होंने तुरंत कॉन्ट्रैक्ट बनवाया, जिसमें एक ही बात थी कि जब तक उनकी फिल्म नहीं बनती, परवीन किसी दूसरी फिल्म का हिस्सा नहीं बन सकतीं। शाही परिवार से आने के बावजूद परवीन ने फिल्मों में आने का फैसला कर लिया। बेबाक अंदाज में फिल्म मांगी, लॉन्च के लिए डायरेक्टर ने उधार लिया बी.आर. इशारा कॉन्ट्रैक्ट के बाद दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गए और यह बात लगभग भूल गए। इस दौरान परवीन बाबी सितंबर 1971 में कालिको डोम के फैशन शो में शामिल हुईं, जहां साथ काम करने वालीं मॉडल ममता साहू ने उन्हें अपने डायरेक्टर पिता किशोर साहू को सुझाया। किशोर साहू ने परवीन से एक मुलाकात कर उन्हें फिल्म धुंएं की लकीर के लिए फाइनल कर लिया। तभी उन्हें बी.आर.इशारा के कॉन्ट्रैक्ट का पता चला। किशोर साहू ने तुरंत उन्हें कॉल किया और कहा कि जिस हीरोइन से आपका कॉन्ट्रैक्ट है, मैं उसके साथ फिल्म बनाना चाहता हूं। परवीन बाबी का नाम सुनकर उन्हें फिर वो लड़की याद आई। लेकिन उनकी फिल्म बनने में देरी थी, तो उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर परवीन को वो फिल्म करने की इजाजत दे दी। कुछ महीने बीते। बी.आर.इशारा, मुंबई के राजकमल स्टूडियो में एक फिल्म की मिक्सिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। वो सीढ़ियों पर बैठे सिगरेट पी ही रहे थे कि अचानक परवीन उनके ठीक बाजू में आकर बैठ गईं। उन्होंने न हाल पूछा न कोई और बात की, सीधे कहा- आप मेरे साथ फिल्म क्यों नहीं बनाते। बी.आर.इशारा इस सवाल से घिर गए। उनके जहन
परवीन बाबी को सिगरेट पीते देख डायरेक्टर ने फिल्म दी:शाही परिवार से थीं; 3 लिव-इन रिलेशनशिप रहे, अमिताभ बच्चन को मानती थीं हत्यारा

करीब साढ़े 400 साल पहले पश्तून बाबी वंश मुगल शासक हुमायूं के साथ गुजरात पहुंचा। यह अफगानिस्तान का शाही परिवार था, जो मुगल साम्राज्य का अहम हिस्सा बना और कई रियासतों पर शासन किया। मुगल सत्ता कमजोर होने पर बाबी और मराठा (गायकवाड़ वंश) में जंग हुई, जिसमें मराठाओं ने अधिकांश गुजरात पर कब्जा किया, लेकिन बाबी ने जुनागढ़, राधनपुर और बालासिनोर पर शासन जारी रखा। मोहम्मद महाबत खान-3, जूनागढ़ की रियासत के आखिरी नवाब रहे। महाबत खान के एक करीबी रिश्तेदार थे वली मोहम्मद खान बाबी। उन्होंने 1940 में जमाल बख्ते बाबी से शादी की। सालों तक उन्हें संतान नहीं हुई। 1947 में ब्रिटिश हुकूमत खत्म होने पर रियासतें खत्म कर सरकारें बनाई जाने लगीं और भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ। 15 अगस्त 1947 को आखिरी नवाब महाबत खान ने जूनागढ़ को पाकिस्तान में शामिल करने की घोषणा की, जिस पर लोगों ने आपत्ति जताई। 20 फरवरी 1948 के जनमत में 99% से ज्यादा लोगों ने भारत में शामिल होने का फैसला किया। जब सरकार बनी तो जूनागढ़ के नवाब माहबत के करीबी रिश्तेदार वली मोहम्मद खान की भी रियासत ले ली गई और बदले में उन्हें 100 बीघा जमीन यानी 40 एकड़ (17 लाख 42 हजार वर्ग फुट) दी गई। राजशाही खत्म होने के बावजूद वो शाही जिंदगी जीते थे। शादी के 14 साल बाद उनके घर खुशखबरी आई। पत्नी जमाल बख्ते ने जूनागढ़ की शाही हवेली में 4 अप्रैल 1954 को बेटी को जन्म दिया। नाम दिया गया, परवीन सुल्ताना वली मोहम्मद खानजी बाबी। वही परवीन बाबी जो हिंदी सिनेमा की मशहूर और टॉप एक्ट्रेसेस में शामिल रहीं। वही परवीन बाबी जो अपने ग्लैमर, वेस्टर्नाइजेशन और समय से आगे चलने वाली सोच के लिए जानी गईं। जब महिलाएं पर्दे पर भी सिगरेट थामने से कतराती थीं, तब परवीन बाबी मिनी स्कर्ट पहनकर सड़कों पर सिगरेट पीते हुए टहला करती थीं। जब डायरेक्टर बी.आर.इशारा ने उन्हें पहली बार देखा, तब उनकी इसी बोल्डनेस के मुरीद हो गए और उन्हें तुरंत फिल्म ऑफर कर दी। आज परवीन बाबी की 72वीं बर्थ एनिवर्सरी है। अगर आज वो होतीं, तो अपना 72वां जन्मदिन मनातीं। उनकी जिंदगी के आखिरी दिन बेहद दर्दनाक थे। अकेलेपन की हद ये थी कि जब उनकी मौत हुई तो 4 दिनों तक बॉडी बंद घर में सड़ती रही। आज परवीन बाबी की बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर जानिए उनके समय से आगे चलने और जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक किस्से- 54 कमरों की हवेली में हुई परवरिश, पढ़ाई के लिए शर्त पर घर छोड़ा शाही परिवार में जन्मीं परवीन बाबी का बचपन जूनागढ़ की 54 कमरों की हवेली में बीता। इकलौती संतान को ऐशोआराम मिला और घर में 6 नौकर थे। 6 साल की उम्र में पिता का कैंसर से निधन हुआ, जिसके बाद वह दीवान चौक की दो मंजिला हवेली में रहने लगीं। शुरुआती पढ़ाई गुजराती मीडियम स्कूल से हुई। 14 साल की उम्र में मां ने उन्हें पढ़ाई के लिए अहमदाबाद भेजा, हालांकि परिवार इसके खिलाफ था। शर्त रखी गई कि जल्दी शादी कराई जाएगी, जिस पर मां मान गईं और उनका दाखिला सेंट जेवियर कॉलेज में हुआ। कॉलेज में कोर्स न होने के बावजूद परवीन बाबी ने खुद फर्राटे दार अंग्रेजी बोलना सीखा। आगे उन्होंने इंग्लिश और साइकोलॉजी में बेचलर डिग्री ली और अंग्रेजी में मास्टर डिग्री। शर्त के अनुसार 15 साल की उम्र में परवीन की सगाई कजिन जमील खान से हुई, जो पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स में पायलट थे। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद मां ने सगाई तोड़ दी और परवीन को इसकी जानकारी पोस्टकार्ड से मिली। 17 की उम्र में सिगरेट पीती थीं, मिनी स्कर्ट पहनती थीं; यही देख ऑफर हुई फिल्म 1971 में डायरेक्टर बी.आर. इशारा अहमदाबाद में एक नांव दो किनारे की शूटिंग कर रहे थे। भीड़ के बीच उनकी नजर एक लड़की पर पड़ी, जो मिनी स्कर्ट में सिगरेट पी रही थी। लंबी कद-काठी और छरहरे बदन वाली वह लड़की चारमिना सिगरेट थामे हुए थी। वह लड़की परवीन बाबी थीं, जिनकी उम्र 17 साल थी। बी.आर. इशारा समझ गए कि वह खास हैं और उन्होंने फोटोग्राफर से उनकी तस्वीरें लेने को कहा। फोटोग्राफर ने तस्वीरें लीं और बी.आर. इशारा ने परवीन को बुलाकर पूछा- फिल्मों में काम करोगी। आमतौर पर कोई भी लड़की तुरंत हामी भर देती, लेकिन परवीन ने कहा, अगर स्क्रिप्ट पसंद आई तो। बी.आर.इशारा इस एक जवाब में समझ गए कि लड़की में कॉन्फिडेंट की भरमार है। वैसे तो वो कभी अपनी फिल्मों की हीरोइन से किसी तरह का कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं करवाते थे, लेकिन परवीन बाबी का मॉडर्न लुक देख वो भी सोच में पड़ गए। उन्हें लगा कि कहीं ये मॉडर्न ख्यालों वाली लड़की मन न बदल ले। उन्होंने तुरंत कॉन्ट्रैक्ट बनवाया, जिसमें एक ही बात थी कि जब तक उनकी फिल्म नहीं बनती, परवीन किसी दूसरी फिल्म का हिस्सा नहीं बन सकतीं। शाही परिवार से आने के बावजूद परवीन ने फिल्मों में आने का फैसला कर लिया। बेबाक अंदाज में फिल्म मांगी, लॉन्च के लिए डायरेक्टर ने उधार लिया बी.आर. इशारा कॉन्ट्रैक्ट के बाद दूसरी फिल्मों में व्यस्त हो गए और यह बात लगभग भूल गए। इस दौरान परवीन बाबी सितंबर 1971 में कालिको डोम के फैशन शो में शामिल हुईं, जहां साथ काम करने वालीं मॉडल ममता साहू ने उन्हें अपने डायरेक्टर पिता किशोर साहू को सुझाया। किशोर साहू ने परवीन से एक मुलाकात कर उन्हें फिल्म धुंएं की लकीर के लिए फाइनल कर लिया। तभी उन्हें बी.आर.इशारा के कॉन्ट्रैक्ट का पता चला। किशोर साहू ने तुरंत उन्हें कॉल किया और कहा कि जिस हीरोइन से आपका कॉन्ट्रैक्ट है, मैं उसके साथ फिल्म बनाना चाहता हूं। परवीन बाबी का नाम सुनकर उन्हें फिर वो लड़की याद आई। लेकिन उनकी फिल्म बनने में देरी थी, तो उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल कर परवीन को वो फिल्म करने की इजाजत दे दी। कुछ महीने बीते। बी.आर.इशारा, मुंबई के राजकमल स्टूडियो में एक फिल्म की मिक्सिंग के सिलसिले में पहुंचे थे। वो सीढ़ियों पर बैठे सिगरेट पी ही रहे थे कि अचानक परवीन उनके ठीक बाजू में आकर बैठ गईं। उन्होंने न हाल पूछा न कोई और बात की, सीधे कहा- आप मेरे साथ फिल्म क्यों नहीं बनाते। बी.आर.इशारा इस सवाल से घिर गए। उनके जहन
सेहत का विज्ञान- गर्मियों के लिए समर हेल्थ गाइड:हीट, डिहाइड्रेशन से बचना है तो बदलें खानपान, जानें सही डाइट, न करें 4 गलतियां

गर्मियों में सिर्फ कम खाना ही नहीं, बल्कि सही और समझदारी से खाना ज्यादा जरूरी होता है। तेज गर्मी में शरीर पसीने के जरिए पानी के साथ-साथ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम और पोटेशियम भी खो देता है। इससे डिहाइड्रेशन, थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। साथ ही भूख कम लगना और पाचन धीमा होना भी आम समस्या है। ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ की डाइटरी गाइडलाइंस के अनुसार, इस मौसम में पानी से भरपूर, हल्का और आसानी से पचने वाला खाना शरीर को बेहतर सपोर्ट करता है। गर्मियों ये खाएं, हाइड्रेशन और पाचन सही रहेगा इन्हें कैसे और कब खाना सबसे फायदेमंद? सुबह: पानी, तरबूज, खरबूजा या नींबू पानी। मिड-मॉर्निंग: छाछ या नारियल पानी। गोंद कतीरा: भिगोकर ½–1 चम्मच, दिन में (सुबह या दोपहर)। दोपहर: हल्का खाना- दाल, दही, मौसमी सब्जी और सलाद। शाम: फल, नट्स या भुने चने और छाछ। रात: जल्दी और हल्का खाएं। सूप या दाल-चावल के साथ लौकी/तोरी या दही-चावल। ऐसी 4 गलतियां, जो गर्मियों में नहीं करनी चाहिए गर्मियों में अक्सर हम प्यास बुझाने या पेट भरने के चक्कर में ऐसी गलतियां करते हैं, जो शरीर को ठंडा रखने की बजाय बीमारी और डिहाइड्रेशन का कारण बन जाती हैं। 1. ज्यादा कैफीन से डिहाइड्रेशन मायो क्लिनिक के अनुसार, 2–3 कप तक कैफीन आमतौर पर सुरक्षित होती है, लेकिन ज्यादा मात्रा लेने पर डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है। कैफीन पेशाब के जरिए शरीर से पानी और सोडियम बाहर निकालती है। इसलिए गर्मियों में ज्यादा कैफीन लेने से शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है। 2. बहुत ठंडा पानी पीने से पाचन धीमा बहुत ठंडा पानी पीने से शरीर में थोड़े समय के लिए ब्लड सर्कुलेशन बदल सकता है। नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स यूके के अनुसार, ठंड से ब्लड वेसल्स सिकुड़ती हैं और पाचन थोड़ा धीमा हो सकता है। 4-5°C का पानी पीने पर शरीर उसे सामान्य तापमान तक लाने में ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है। कुछ मामलों में ठंडा पानी माइग्रेन, ब्लोटिंग या रिफ्लक्स बढ़ सकता है। 3. ज्यादा शुगर और कोल्ड ड्रिंक्स से सुस्ती गर्मियों में ज्यादा शुगर वाले ड्रिंक्स या मीठा खाना प्यास और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ाता है। शुगर तुरंत एनर्जी देती है, लेकिन थोड़ी देर बाद थकान और सुस्ती महसूस होने लगती है। ज्यादा शुगर से शरीर का इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बिगड़ सकता है, वजन बढ़ सकता है और हीट एग्जॉशन का खतरा भी बढ़ जाता है। 4. रात को भारी खाना न खाएं गर्मियों में रात को भारी और मसालेदार खाना पाचन पर ज्यादा दबाव डालता है और शरीर का तापमान बढ़ा सकता है। ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन अमेरिका’ की स्टडी के अनुसार, मसालेदार खाना नींद को प्रभावित कर सकता है। इसलिए रात में हल्का और कम मसाले वाला खाना बेहतर रहता है, ताकि पाचन सही रहे और नींद भी अच्छी आए। रेणु रखेजा जानी-मानी न्यूट्रिशनिस्ट एवं हेल्थ कोच हैं। @consciouslivingtips
TMC का आरोप-भवानीपुर के रिटर्निंग ऑफिसर शुवेंदु अधिकारी के नजदीकी:हटाने की मांग की; इस सीट से भाजपा नेता और CM ममता में मुकाबला

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कोलकाता की भवानीपुर सीट के रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को हटाने की मांग की है। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल को शिकायत पत्र सौंपकर आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी बीजेपी नेता शुवेंदु अधिकारी के नजदीकी है। TMC के मुताबिक, RO की शुवेंदु अधिकारी से नजदीकी से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। भवानीपुर सीट से शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं और वे नंदीग्राम से भी उम्मीदवार हैं। चुनाव से जुड़े अपडेट्स
ग्वालियर में बदमाशों की फायरिंग का VIDEO:गली में जाते हुए कहे अपशब्द; पीछे से एक बदमाश बना रहा था वीडियो

ग्वालियर में बदमाशों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। उपनगर ग्वालियर में दो बदमाशों ने फायरिंग की वारदात को अंजाम दिया है। एक बदमाश ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। घटना शुक्रवार रात राय कॉलोनी की बताई जा रही है। वहीं, वायरल वीडियो पुलिस के पास पहुंचने के बाद मामले की जांच शुरू हो गई है। हाथ में अवैध कट्टा लिए घूमते आए नजर 18 सेकेंड के वीडियो में दो बदमाश एक गली के अंदर हाथ में अवैध कट्टा लेकर जा रहे हैं। गली में जाते-जाते बदमाश फायरिंग कर रहे हैं और गाली-गलौज भी कर रहे हैं। इन दोनों बदमाशों का तीसरा साथी मोबाइल से पूरा घटनाक्रम शूट करता नजर आ रहा है। वीडियो अब पुलिस अधिकारियों तक पहुंच चुका है, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है। यह वीडियो काली माता मंदिर, राय कॉलोनी इलाके का है। इसमें फायरिंग करने वाले बदमाशों को पुलिस ने चिन्हित कर लिया है। जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी होगी एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल का कहना है कि आरोपियों की पहचान कर ली गई है। जल्द ही इस मामले में एफआईआर दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।
इंदौर में 30 से ज्यादा वूमन अचीवर्स का हुआ सम्मान:घर की जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर पहचान बनाने का संदेश

इंदौर में शुक्रवार को संस्था ‘आकार विमेन ग्रुप’ द्वारा अभिवन कला केंद्र में “मंजिलें और हम” (वूमन अचीवर्स अवार्ड सेरेमनी) का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 100 से अधिक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली 30 से अधिक महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. निकिता कुशवाह ने कहा कि यह आयोजन पूर्णतः महिलाओं और उनके बच्चों के समग्र विकास पर केंद्रित था। उन्होंने बताया कि संस्था केवल उपलब्धियों पर अवार्ड देने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की पूरी जर्नी, उनकी सफलता और आगे कैसे आगे बढ़ा जाए, इस पर गहराई से काम करती है। महिलाओं को यह समझाया जाता है कि वे किस तरह अपनी क्षमताओं को पहचानकर सफलता प्राप्त कर सकती हैं। डॉ. निकिता वर्ष 2024 में मिसेस एशिया पैसिफिक विनर रह चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने मिसेज यूनिवर्स प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, पेरिस में फैशन शो में भागीदारी की और कांस्य सम्मान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए कोई रुकावट नहीं है, जरूरत सिर्फ आगे बढ़ने के हौसले की है। जो महिलाएं घर-परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं, उनके लिए घर से बाहर भी अवसरों की एक दुनिया है, बस पहला कदम उठाने की जरूरत है। संस्था अध्यक्ष मोहिब उन्नीसा ने बताया कि बचपन से उन्होंने यह विचार सुना था कि यदि एक पुरुष शिक्षित होता है तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन यदि एक महिला शिक्षित होती है तो पूरी दुनिया शिक्षित हो सकती है। इसी उद्देश्य के साथ आकार ग्रुप की स्थापना की गई। उन्होंने बताया कि उनके साथ डिजिटल एंटरप्रिनर प्रियंका सूर्यवंशी और भोपाल की अल्मास जुड़ी हैं तथा जल्द ही जबलपुर में भी संस्था की गतिविधियां प्रारंभ की जाएंगी। इवेंट एंबेसेडर प्रियंका सूर्यवंशी ने कहा कि संस्था महिलाओं को केवल मंच ही नहीं देती, बल्कि उन्हें स्किल ट्रेनिंग, ग्रूमिंग सेशन्स और पर्सनालिटी डेवलपमेंट के माध्यम से आगे बढ़ने की दिशा भी प्रदान करती है। महिलाओं और उनके बच्चों के लिए नियमित ग्रूमिंग सेशन आयोजित किए जाते हैं, जिनमें उन्हें आत्मविश्वास के साथ बोलना, आगे बढ़ना और समाज में अपनी पहचान बनाना सिखाया जाता है। कार्यक्रम में पैनल डिस्कक्शन भी हुआ। इस मौके पर सीए, कॉलेज आर्टिस्ट, योग प्रशिक्षक, वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी प्रोफेशनल्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं और उनके बच्चों को सम्मानित किया गया। आयोजन ने यह संदेश दिया कि नारी शक्ति को अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वह हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू सकती है।
गर्मियों में जरूर खाएं ये 5 फल, स्किन पर आएगी नेचुरल ग्लो, रेगुलर सेवन से गुलाब की तरह खिल उठेगा चेहरा

Last Updated:April 03, 2026, 23:44 IST These fruits will give skin glow in summer: गर्मियों में कई ऐसे फल मिलते हैं, जो ना सिर्फ संपूर्ण सेहत को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं, बल्कि ये त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं. कौन-कौन से हैं ये फल, जिसके सेवन से आप पा सकते हैं ग्लोइंग, शाइनी, हेल्दी और सॉफ्ट निखरी स्किन, जानें यहां… गर्मियों में स्किन को हेल्दी रखने के लिए कौन सा फल खाना है बेस्ट? which fruits will give your skin natural glow: गर्मियों के आगमन के साथ तापमान अधिक होने से चेहरे की रंगत उड़ जाती है. चेहरे का ग्लो, तापमान की वजह से टेनिंग में बदल जाता है. टेनिंग से बचने और ग्लो पाने के लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट का सहारा लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रकृति ने गर्मियों में हमें ऐसे फल दिए हैं, जो हमारी प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने में मदद करते हैं? आज हम आपको गर्मियों में मिलने वाले ऐसे फलों के बारे में बताएंगे, जो आपकी स्किन को नेचुरल ग्लो देंगे. गर्मियों के ये फल त्वचा पर लाते हैं नेचुरल निखार नारियल पानी नारियल पानी शरीर को हाइड्रेट रखने और त्वचा को ग्लोइंग एवं मुलायम रखने में मदद करता है. अगर गर्मियों में रोजाना एक नारियल पी लिया जाए तो पेट से लेकर त्वचा दोनों ही स्वस्थ महसूस करते हैं. तरबूज तरबूज में भरपूर मात्रा में विटामिन सी, फाइबर और पानी होता है. विटामिन सी टेनिंग हटाने में मददगार होता है. अगर गर्मियों में टैनिंग से परेशान रहते हैं तो अपने आहार में तरबूज को जरूर शामिल करें. चेहरे को ग्लोइंग बनाने से लेकर तरबूज शरीर के तापमान को भी संतुलित रखने में मदद करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. खीरा खीरा सिर्फ सलाद का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह पेट और त्वचा दोनों के लिए सेहत का खजाना है. खीरा पूरे शरीर को हाइड्रेट रखता है और चेहरे के रूखेपन को भी कम करने में मदद करता है. कई स्किन ट्रीटमेंट में खीरे का इस्तेमाल किया जाता है. आम आम की तासीर भले ही गर्म होती है, लेकिन यह स्किन के लिए फायदेमंद होता है. आम में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो चेहरे का खोया निखार वापस लाने में मददगार होते हैं. अगर सही मात्रा में आम का सेवन किया जाए तो यह पूरे शरीर के लिए फायदेमंद है. संतरा संतरे में भरपूर विटामिन सी होता है. इसका छिलके से लेकर गूदा तक त्वचा के लिए लाभकारी है. संतरा न सिर्फ चेहरे को गहराई से पोषण देता है, बल्कि गहरे दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करता है. संतरे के छिलके का इस्तेमाल भी फेसपैक में किया जाता है. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : April 03, 2026, 23:44 IST
5 अप्रैल से 9 दिवसीय श्रीरामकथा का आयोजन:जगद्गुरु रामभद्राचार्य अवधपुरी ग्वारीघाट में सुनाएंगे कथा

जबलपुर के अवधपुरी आयुर्वेदिक कॉलेज) परिसर ग्वारीघाट में 5 अप्रैल से 9 दिवसीय श्रीरामकथा का आयोजन किया जाएगा। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य इस कथा का वाचन करेंगे। कथा का विषय ‘श्रीराम जन्म जग मंगल हेतु’ रखा गया है। यह आयोजन 13 अप्रैल तक चलेगा। समरसता सेवा संगठन के अध्यक्ष संदीप जैन ने एक पत्रकार वार्ता में बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक समरसता का संदेश प्रसारित करना है। समापन दिवस पर संगठन की तीसरी वर्षगांठ भी मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि कथा में 35 से अधिक समाजों के प्रतिनिधि यजमान के रूप में शामिल होंगे। कथा पंडाल में सभी वर्गों और जातियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, जिससे श्रीराम सबके हैं, सब श्रीराम के हैं” का भाव साकार हो सके। कथा के दौरान प्रतिदिन 10 से 15 मिनट की नाट्य प्रस्तुतियां भी होंगी। इन प्रस्तुतियों में शबरी, रानी दुर्गावती, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जाएगा। कथा के शुभारंभ दिवस, 5 अप्रैल को नर्मदा मैया का पूजन किया जाएगा। इसके बाद दोपहर 3 बजे ग्वारीघाट से एक शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो अवधपुरी स्थित कथा स्थल पर समाप्त होगी।
हरा या काला अंगूर, कौन सा है ज्यादा फायदेमंद? आयुर्वेद से जानें दोनों के लाभ

Last Updated:April 03, 2026, 22:08 IST Which grapes are healthier green or black: अंगूर एक ऐसा फल है, जो लाल, काला, हरा आदि रंगों में मिलता है. ये सभी स्वाद में तो एक ही जैसे होते हैं, लेकिन इनके फायदे और औषधीय गुण क्या एक समान होते हैं? हरे और काले अंगूर की बात करें तो दोनों में से कौन है अधिक पौष्टिक और सेहत के लिए लाभदायक, यहां जान लें. हरा या काला कौन सा अंगूर है अधिक फायदेमंद? फरवरी और मार्च के महीने में अंगूर बहुतायत मात्रा में आसानी से मिल जाते हैं. फरवरी और मार्च का महीना हल्का ठंडा और गर्मी वाला होता है, जिसमें शीतल पदार्थों का सेवन करने का मन करता है. ऐसे मौसम में शीतल पदार्थ का सेवन बीमार करने के लिए काफी है, लेकिन प्रकृति ने ऐसा फल दिया है, जो इस हल्के गर्म मौसम में शीतलता प्रदान करता है, वो हैं अंगूर. अंगूर केवल स्वादिष्ट फल नहीं है, बल्कि कई औषधीय गुणों से भरपूर हैं. अंगूर को आयुर्वेद में द्राक्षा कहा जाता है, जो शरीर को शीतलता और पोषण दोनों देता है. हरा अंगूर शरीर में जल-संतुलन और पित्त शमन में सहायक माना जाता है, जबकि काला अंगूर रक्त को पोषण देने और थकान से उबरने में उपयोगी बताया गया है. वहीं विज्ञान ने भी अंगूर को विटामिन से भरपूर पाया है, जो मस्तिष्क से लेकर हृदय तक के लिए लाभकारी है. यह कोशिकाओं की रक्षा करता है और शरीर में ऊर्जा का प्रसार भी तेजी से करता है. पहले विस्तार में बात करते हैं हरे अंगूर की. हरे अंगूर स्वाद में मधुर और पाचन में हल्के होते हैं. हरे अंगूर में पित्त को शांत करने की क्षमता होती है. यह शरीर में गर्मियों में होने वाले निर्जलीकरण से बचाते हैं और पेट में होने वाली जलन को भी कम करते हैं. अगर गर्मी में लू लगने का खतरा लगता है, तब भी अंगूर का सेवन गर्म हवा से सुरक्षा प्रदान करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. वहीं काले अंगूर हरे अंगूर की तुलना में ज्यादा पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. काले अंगूर का सेवन शरीर में रक्त की मात्रा को बढ़ाता है और बल भी प्रदान करता है. काले अंगूर स्किन को साफ करने और बालों को चमकदार बनाने में भी सहायक हैं. काले अंगूर में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं तो शरीर की आंतरिक कमजोरी और थकावट को भी दूर करते हैं और विटामिन सी और ई मिलकर बालों और स्किन को निखारने का काम करते हैं. अब सवाल है कि अंगूर खाने का सही समय क्या है. वैसे आमतौर पर फल को कभी भी खा लिया जाता है, जो गलत है. अंगूर का सेवन सुबह और दोपहर में कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि अंगूर का सेवन खाली पेट नहीं करना चाहिए. विटामिन सी होने की वजह से ये पेट में जलन पैदा कर सकते हैं. About the Author Anshumala अंशुमाला हिंदी पत्रकारिता में डिप्लोमा होल्डर हैं. इन्होंने YMCA दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से काम कर रही हैं. न्यूज 18 हिंदी में फरवरी 2022 से लाइफस्टाइ…और पढ़ें First Published : April 03, 2026, 22:08 IST









