बुरहानपुर स्थित एशिया की पहली अखबारी कागज मिल नेपा लिमिटेड ने बिना किसी आर्थिक पैकेज के उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है।मिल ने महज तीन दिनों में 310 मीट्रिक टन कागज का उत्पादन किया है। 71 साल पुरानी इस मिल का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। आज नेपा डे है और मिल को 71 वर्ष पूरे हो गए हैं। मिल के 71 साल के इतिहास में छह से सात साल ऐसे भी रहे जब कागज उत्पादन पूरी तरह बंद रहा। 2022 में मिल फिर से शुरू हुई, लेकिन अगले चार वर्षों में कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं हो सकी। बार-बार बदले सीएमडी 2024 से 2026 के बीच मिल में तीन सीएमडी बदले गए। आरके चोखानी 26 मार्च 2024 से 15 अप्रैल 2025 तक सीएमडी रहे, जिनके कार्यकाल में 7403 मीट्रिक टन कागज का उत्पादन हुआ। इसके बाद अरविंद वढ़ेरा 16 अप्रैल 2025 से 23 फरवरी 2026 तक सीएमडी रहे, लेकिन उनके कार्यकाल में उत्पादन पूरी तरह बंद रहा। अब भेल भोपाल से आए नरेश सिंह ने पदभार संभालते ही अधिकारियों और कर्मचारियों में नई ऊर्जा भरी। इसके परिणामस्वरूप बंद पड़ी मिल की एक मशीन चालू कर तीन दिनों में 310 मीट्रिक टन कागज का उत्पादन संभव हो पाया। अब दूसरी मशीन को भी चालू करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि मिल को अभी भी सरकार से आर्थिक पैकेज का इंतजार है। लगभग एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों को एडमिन ऑफिस से मिल में स्थानांतरित कर मशीन संचालन में लगाया गया है, जिससे उत्पादन में सुधार देखने को मिला है। 469 करोड़ से हुआ कायाकल्प वर्ष 2022 में 469 करोड़ रुपये की लागत से मिल का कायाकल्प किया गया था। हालांकि एक साल के भीतर ही संचालन धीमा पड़ गया और अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक उत्पादन पूरी तरह बंद रहा। अब एक बार फिर उत्पादन प्रक्रिया शुरू की गई है। अभी भी पैकेज का इंतजार मिल को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए 150 करोड़ रुपये के पैकेज की मांग की गई थी। सांसद सहित कई प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी से भी मिले, लेकिन अब तक कोई घोषणा नहीं हुई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही मिल को पैकेज मिल सकता है। यह है नेपा मिल का इतिहास

















































