‘धुरंधर’ की स्क्रिप्ट चोरी मामले में आदित्य धर को राहत:बॉम्बे हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल तक संतोष कुमार को आरोपों को दोहराने से रोका

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को फिल्म प्रोड्यूसर संतोष कुमार के खिलाफ एक अंतरिम आदेश पारित किया है। इस आदेश के तहत उन्हें फिल्म धुरंधर और इसके सीक्वल धुरंधर: द रिवेंज की स्क्रिप्ट चोरी के आरोपों को दोहराने या फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर के खिलाफ कोई भी मानहानिकारक (defamatory) बयान देने से अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर की बेंच ने यह फैसला आदित्य धर द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे की सुनवाई के दौरान सुनाया। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि संतोष कुमार को नोटिस दिया गया था, लेकिन उनकी ओर से कोई पेश नहीं हुआ। आदेश में कहा गया कि अगली सुनवाई तक कुमार इस तरह के शब्दों को दोहराने से परहेज करें। यह आदेश केवल संतोष कुमार पर लागू रहेगा और 16 अप्रैल तक प्रभावी रहेगा, जब मामले की अगली सुनवाई होगी। बता दें कि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके संतोष कुमार ने दावा किया था कि ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ की कहानी उनकी साल 2023 में रजिस्टर्ड स्क्रिप्ट ‘डी साहेब’ से चुराई गई है। इसके बाद धर ने कुमार को लीगल नोटिस भेजा, जिसमें इन आरोपों से इनकार किया गया और आगे ऐसी टिप्पणी न करने की चेतावनी दी गई। नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर धर ने हाईकोर्ट का रुख किया और बयानबाजी पर रोक तथा हर्जाने की मांग की। उनके वकील बीरेंद्र सराफ ने कोर्ट में कहा कि कुमार के बयान मानहानिकारक और इमेज को नुकसान पहुंचाने वाले हैं। वहीं, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कथित मानहानिकारक टिप्पणियां व्यापक रूप से शेयर की गई थीं। इसके आधार पर अदालत ने सीमित अंतरिम राहत देने का फैसला लिया।
कबाड़ बीनने वाले ने की 5 लाख की चोरी:नर्मदापुरम में रैकी कर सूने मकान में घुसा; खंडवा से गिरफ्तार हुआ 19 वर्षीय शादाब

नर्मदापुरम के जुमेराती क्षेत्र में 3 अप्रैल को सूने मकान का ताला तोड़कर 5 लाख रुपए के सोने-चांदी के जेवर और नकदी चोरी करने वाले 19 वर्षीय आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कबाड़ बीनने का काम करने वाले इस आरोपी ने पहले घर की रैकी की और फिर वारदात को अंजाम दिया। वर्तमान में कोतवाली पुलिस ने आरोपी को उसके गांव सिहाड़ा (खंडवा) से गिरफ्तार कर चोरी किया गया 5 लाख रुपए का पूरा माल बरामद कर लिया है। 3 अप्रैल को गांव गया था फरियादी का परिवार कोतवाली थाना टीआई कंचन सिंह ठाकुर ने बताया कि 3 अप्रैल को फरियादी रामगोपाल पाण्डे अपने परिवार के साथ गांव गए थे। इसी दौरान अज्ञात व्यक्ति ने उनके घर में घुसकर गोदरेज का ताला तोड़ा और सोने-चांदी के आभूषण व 2,500 रुपए नकद चोरी कर लिए। फरियादी की रिपोर्ट पर पुलिस ने चोरी का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी। सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से खंडवा पहुंची पुलिस एसपी सांई कृष्णा के मार्गदर्शन और एसडीओपी जितेंद्र पाठक के नेतृत्व में कोतवाली टीआई ने टीम गठित की। टीम ने घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध व्यक्ति की लोकेशन खंडवा में ट्रेस की। इसके बाद पुलिस टीम खंडवा के ग्राम सिहाड़ा पहुंची और संदिग्ध की पहचान 19 वर्षीय शेख शादाब (पिता शेख नौशाद) के रूप में की गई। रैकी के बाद दिया था वारदात को अंजाम पुलिस टीम ने शेख शादाब को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिस पर उसने चोरी करना स्वीकार कर लिया। आरोपी ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से नर्मदापुरम में रहकर कबाड़ बीनने का काम कर रहा था। 3 अप्रैल को उसने फरियादी रामगोपाल पाण्डे के सूने मकान की पहले रैकी की और फिर घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से 5 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के जेवर बरामद कर लिए हैं।
एनर्जी का खजाना है ये काला चना! गर्मी में थकान और सुस्ती भगाएगा दूर, सुबह खाने से पूरे दिन देगा ताकत

Last Updated:April 09, 2026, 07:46 IST Kaala Chana Superfood: पलामू के आयुर्वेद एक्सपर्ट शिव पाण्डेय के मुताबिक नाश्ते में काला चना और दोपहर में सत्तू का शरबत गर्मी में ऊर्जा का सूपरफूड है. इससे ठंडक और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. ख़बरें फटाफट पलामू: गर्मी के मौसम में तेज धूप, उमस और लगातार काम करने के कारण शरीर जल्दी थक जाता है. कई बार दिन में ही सुस्ती और नींद महसूस होने लगती है, जिससे काम करने की क्षमता प्रभावित होती है. ऐसे में दिन की शुरुआत यानी सुबह का नाश्ता बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है. यदि नाश्ता पौष्टिक और संतुलित हो, तो पूरे दिन शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. इस कड़ी में काला चना एक सस्ता, सुलभ और बेहद फायदेमंद विकल्प बनकर सामने आता है, जिसे ‘पावर बूस्टर’ कहना गलत नहीं होगा. जानें आयुर्वेद के एक्सपर्ट से पलामू के आयुर्वेद के एक्सपर्ट शिव पाण्डेय ने लोकल 18 को बताया कि काला चना प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है. जो शरीर को ताकत देने के साथ-साथ पाचन को भी दुरुस्त रखता है. इसे नाश्ते में शामिल करने का सबसे आसान तरीका है. रात में एक कटोरी काला चना भिगोकर रख दें. सुबह इसे छानकर तैयार कर लें और नाश्ते के समय इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, धनिया पत्ता, काला नमक, धनिया पाउडर और थोड़ा सा सौंफ मिलाकर स्वादिष्ट मिश्रण तैयार करें. यह नाश्ता न केवल स्वाद में लाजवाब होता है. बल्कि शरीर को ठंडक भी देता है और दिनभर तरोताजा बनाए रखता है. रोग प्रतिरोधक बढ़ जाएगी क्षमता एक्सपर्ट ने आगे कहा कि नियमित रूप से इस तरह तैयार काला चना खाने से शरीर में ऊर्जा की कमी नहीं होती और थकान दूर रहती है. साथ ही यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है, जिससे आप गर्मी के दुष्प्रभावों से बचे रहते हैं. इस नाश्ते को गर्मी के दिनों अपने डाइट में शामिल कर सकते है. सत्तू का शरबत है बेहतरीन विकल्प वहीं, दोपहर के समय शरीर को ठंडक देने के लिए सत्तू का शरबत भी एक बेहतरीन विकल्प है. जौ और चने से तैयार सत्तू न केवल शरीर को ठंडा रखता है. बल्कि लू से भी बचाव करता है. इसके लिए 200 ग्राम पानी में 50 ग्राम सत्तू मिलाएं और उसमें बारीक कटा प्याज, धनिया पत्ता, नींबू का रस, काला नमक और पुदीना की चटनी मिलाकर पीएं. यह पेय शरीर में तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है और अंदर से शीतलता बनाए रखता है. उन्होंने बताया कि आज के समय में जहां लोग कोल्ड ड्रिंक्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं. वहीं, काला चना और सत्तू जैसे पारंपरिक आहार कहीं ज्यादा स्वास्थ्यवर्धक और असरदार हैं. यदि आप गर्मी में खुद को फिट, एक्टिव और तरोताजा रखना चाहते हैं तो इन देसी उपायों को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें. About the Author Brijendra Pratap Singh बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें Location : Palamu,Jharkhand First Published : April 09, 2026, 07:44 IST
‘वंदे मातरम’ पर घमासान:पार्षद ने वंदे मातरम गाने से किया इंकार; आपत्ति ली तो बोलीं-एक्ट दिखाओ

नगर निगम के बजट सत्र में बुधवार को ‘वंदे मातरम’ पर घमासान हुआ। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के वंदे मातरम गाने से साफ इनकार करने पर सदन ‘गद्दार’ और ‘गुंडागर्दी’ के नारों से गूंज उठा। इसी बवाल के बीच 8,455 करोड़ का बजट बिना किसी सार्थक चर्चा के पास हो गया और बैठक तय समय से ढाई घंटे पहले ही खत्म कर दी गई। भाजपा पार्षद सुरेश कुरवाड़े ने फौजिया पर वंदे मातरम से बचने के लिए देर से आने का तंज कसा। इस पर फौजिया ने दो-टूक कहा, मैं नहीं गाऊंगी, वो एक्ट दिखाओ जिसमें यह अनिवार्य है। भाजपा पार्षद महेश बसवाल, मनोज मिश्रा, योगेश गेंदर व रूपा पांडे ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताते हुए कार्रवाई की मांग की। सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया को सदन से बाहर कर दिया। विवाद बढ़ाते हुए कांग्रेसी पार्षद रुबीना खान ने कहा, कुरान इसकी इजाजत नहीं देता। अमेरिका ने ईरान के खामेनेई को शहीद किया, तो वहां से तेल क्यों ले रहे हैं? सिर्फ मुस्लिमों को टारगेट किया जा रहा है। संविधान में धर्म पालन की छूट है। इस्लाम में वंदे मातरम नहीं बोल सकते। – फौजिया शेख, कांग्रेसी पार्षद जिस देश का अन्न-जल लेते हैं, उसका सम्मान न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। ईरान के नेता को श्रद्धांजलि देते हैं, लेकिन भारत माता की जय बोलने में पेट दर्द होता है। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर वंदे मातरम नहीं गाना है, वहां तक भी ठीक है, लेकिन ऐसे सदन में सार्वजनिक रूप से राष्ट्रगीत का अपमान कैसे कर सकते हैं कि नहीं गाऊंगी। – राजेन्द्र राठौर, एमआईसी सदस्य कांग्रेस की रग-रग में वंदे मातरम है। फौजिया के बयान से पार्टी का सरोकार नहीं। – चिंटू चौकसे, नेता प्रतिपक्ष
धुरंधर मूवी वाले SP असलम की पत्नी डायरेक्टर से नाराज:कहा– न बलूचों से दुश्मनी थी, न रहमान डकैत से डरे; आदित्य धर पर केस करेंगी

पाकिस्तान के ल्यारी पर बनी बॉलीवुड फिल्म धुरंधर में संजय दत्त ने पाकिस्तान के एक पुलिस ऑफिसर का रोल किया है। इस ऑफिसर का नाम चौधरी असलम है, जिन्हें पाकिस्तान का सुपरकॉप भी कहा जाता है। चौधरी असलम पाकिस्तान पुलिस में एसपी के पद पर तैनात थे। सिंध पुलिस में काम करते हुए उन्होंने 2009 में ल्यारी के सबसे खूंखार रहमान डकैत का भी एनकाउंटर किया था। करीब चार साल बाद कराची में विस्फोटकों से भरी एक कार उनके काफिले से टकरा गई थी। इसमें असलम के साथ दो अन्य पुलिस अधिकारियों, बॉडीगार्ड और ड्राइवर की मौत हो गई थी। उनके परिवार को आज भी धमकियां मिलती हैं। दैनिक भास्कर ने असलम चौधरी की पत्नी नौरीन चौधरी से फोन पर बातचीत की। नौरीन ने कहा- फिल्म डायरेक्टर आदित्य धर ने उनके पति के किरदार को फिल्माने से पहले उनकी परमिशन नहीं ली। मेरे पति न तो कभी रहमान डकैत से डरे, न ही बलूच विरोधी थे। उनके किरदार को गलत दिखाया गया है। इसके चलते उनके खिलाफ लीगल एक्शन लूंगी। आगे पढ़िए, नौरीन से हुई बातचीत के मुख्य अंश… फिल्म में पति का किरदार देखकर कैसा लगा? किरदार बहुत अच्छा है। संजय दत्त पर यह काफी फिट बैठता है। उन्होंने मेरे पति असलम चौधरी का किरदार बहुत अच्छी तरह निभाया है, लेकिन कहानी में कुछ बातें सही नहीं दिखाई गई हैं। किन चीजों को अलग तरीके से दिखाया गया है? असलम चौधरी का किरदार बहुत बड़ा है, लेकिन उसे उतना नहीं दिखाया गया है। उनका काम सिर्फ ल्यारी तक सीमित नहीं था। उन्होंने कराची में कई ऑपरेशन किए थे। जिन सभी मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया गया, उन्होंने कभी भी अपनी फील्ड नहीं छोड़ी। ल्यारी असल में वैसा नहीं है, जैसा दिखाया गया है। ल्यारी कराची का एक छोटा सा इलाका है। फिल्म का कौन सा सीन असलम चौधरी की याद दिलाता है? तीन-चार सीन ऐसे थे, जब मुझे लगा कि असलम मेरे सामने हैं। लेकिन फिल्म के एक शॉट में जब बम धमाका हुआ, तो मैं आगे नहीं देख सकी। फिल्म में एक सीन गलत है, जिसमें वह बलूच बच्चों को पीटते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि असलम बलूचों के दुश्मन हैं, लेकिन असलियत में ऐसा नहीं था। वह सिर्फ अपराधियों के खिलाफ थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी बच्चों के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया। उनकी मौत किसी राजनीतिक साजिश का नतीजा थी? नहीं। वे कहते थे कि मैं गोली से नहीं, बम ब्लास्ट से मरूंगा—और वही हुआ। उन्होंने तालिबान के खिलाफ कई ऑपरेशन किए थे। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने फोन करके कहा था कि चौधरी असलम हमारे रास्ते से हट जाओ। तालिबानियों को कराची में चौधरी से ही खतरा था। लेकिन मेरे पति ने उनकी बात नहीं मानी। उन्होंने फोन पर उन लोगों को 20 मिनट तक खरी-खोटी सुनाई थी। चौधरी असलम अपनी पूरी जिंदगी रहमान डकैत से नहीं डरे। अगर वे डरते तो मैं आज अमेरिका या इंग्लैंड में रह रही होती। मैं फिलहाल पाकिस्तानी में ही रह रही हूं। रहमान डकैत के एनकाउंटर के बाद असलम ने घर आकर क्या कहा? एनकाउंटर से पहले उन्होंने कुछ लोगों का पता लगाया था। अपने प्लान को अंजाम देने वे चार-पांच दिन पहले घर से निकले थे। रहमान ईरान से आ रहा था। असलम ने उसे जंगल में 7 पुलिसकर्मियों के साथ घेर लिया था और उसका एनकाउंटर कर दिया। असलम 6 दिन बाद घर लौटे। वे बहुत खुश थे और मेरे पास आकर बोले- अल्लाह ने मेरी इज्जत बचा ली। चौधरी ने अपना काम पूरा कर लिया है। क्या आपको लगता है कि उनकी दाउद से भी बातचीत हुई थी? मैंने अपने जीवन में चौधरी असलम से दाउद का नाम कभी नहीं सुना। मुझसे पहले भी ऐसे सवाल पूछे गए हैं। उन्होंने मेरे सामने सिर्फ शोएब खान का नाम लिया था। वह कराची का डॉन था। लाहौर जाकर उसे असलम चौधरी ने ही पकड़ा था। वह जेल गया और हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई थी। मेरे पति ने कभी पैसे के लालच में किसी के सामने सिर नहीं झुकाया। नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ भी उनके काम को जानते थे। उन्होंने सिंध के 300 गरीब परिवारों के घरों में कभी राशन की कमी नहीं होने दी। बलूचों के बारे में बोले एक डायलॉग से विवाद खड़ा हो गया था। सच्चाई क्या है? मेरे पति बलूच विरोधी नहीं थे। आज भी ल्यारी में कई लोग उनका सम्मान करते हैं। 200 बलूच महिलाएं उनकी पुण्यतिथि पर हमारे घरआई थीं। वे केवल अपराधियों के खिलाफ थे, उन्होंने कभी आम लोगों को परेशान नहीं किया। भले ही वे बलूच हों या नहीं। असलम चौधरी की मौत के समय का घटनाक्रम? मुझे मेरे चाचा के बेटे का फोन आया था। उसने कहा कि टीवी चालू कीजिए, बड़ी खबर आ रही है। जब मैंने टीवी पर देखा तो पता चला कि असलम को अस्पताल ले जाया गया है। इसलिए मैं तुरंत वहां पहुंची। उस दिन कराची में लगभग बंद जैसी स्थिति थी। पूरे शहर में अफरा-तफरी मची हुई थी। असलम का इंतकाल हो चुका था। एक बार सुबह करीब सात बजे मेरे घर पर भी 350 किलो विस्फोटक से ब्लास्ट किया गया था। उस समय मैं घर पर अकेली थी। मैंने पिछली रात करीब दो बजे चौधरी असलम को फोन किया था और कहा था कि आप समय पर घर आ जाइए। तब उन्होंने बताया था कि उन्हें सूचना मिली है कि अमेरिका या सऊदी की एम्बेसी पर बम ब्लास्ट हो सकता है, इसलिए वे पेट्रोलिंग पर हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि असल में बम तो हमारे ही घर पर फटने वाला है। सुबह 7 बजकर 28 मिनट पर मैं बच्चों के लिए नाश्ता बना रही थी। तभी हमारे घर के पास जोरदार धमाका हुआ था। जमीन में 30 फीट गहरा गड्ढा बन गया और नीचे से पानी का फव्वारा निकलने लगा था। इस धमाके में हमारे 3-4 गनमैन, एक पड़ोसी और एक टीचर की मौत हो गई थी। हमारे घर के आसपास हमेशा गाड़ियां खड़ी रहती थीं। धमाके के बाद गाड़ियां फिल्मी सीन की तरह हवा में उड़कर गिर गई थीं। यह ब्लास्ट किसने करवाया था? तहरीक-ए-तालिबान ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली थी। क्या आदित्य
सिर्फ सीटों से कहीं अधिक: बड़े दांव वाले आमना-सामना जो असम की राजनीतिक आत्मा को परिभाषित करेंगे | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:09 अप्रैल, 2026, 05:43 IST आज असम का नक्शा कई ‘प्रतिष्ठा की लड़ाइयों’ से भरा पड़ा है, जहां मार्जिन बेहद कम होने की उम्मीद है असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (बाएं) और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई। (फ़ाइल छवि: पीटीआई) जैसे ही असम में गुरुवार को मतदान होने जा रहा है, राजनीतिक माहौल ऐतिहासिक परिणाम की भावना से भर गया है। 25 मिलियन से अधिक मतदाता एक एकल, उच्च जोखिम वाले चरण में 126 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने मत डालने के पात्र हैं। जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का लक्ष्य मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में अपने एक दशक पुराने प्रभुत्व को मजबूत करना है, वहीं नव सक्रिय विपक्ष, कांग्रेस पार्टी के गौरव गोगोई के नेतृत्व वाला असम सोनमिलिटो मोर्चा अपने पारंपरिक गढ़ को फिर से हासिल करने के लिए लड़ रहा है। आज असम का नक्शा कई “प्रतिष्ठा की लड़ाइयों” से भरा पड़ा है, जहां मार्जिन बेहद कम होने की उम्मीद है। क्या जोरहाट की लड़ाई सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई है? दिन की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली प्रतियोगिता निस्संदेह ऊपरी असम के जोरहाट में है। यह सीट बीजेपी के दिग्गज नेता हितेंद्र नाथ गोस्वामी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के बीच बेहद प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है. गोगोई के लिए, यह चुनाव एक तरह से घर वापसी है और उस क्षेत्र में उनके परिवार की विरासत की परीक्षा है, जिस पर कभी उनके पिता, दिवंगत तरुण गोगोई का प्रभुत्व था। हालाँकि, भाजपा ने जोरहाट को बरकरार रखने के लिए अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत लगा दी है, और प्रतियोगिता को अपने “डबल-इंजन” विकास मॉडल और जिसे वे “वंशवादी राजनीति” कहते हैं, के बीच एक विकल्प के रूप में तैयार किया है। दोनों पक्ष जोरहाट को ऊपरी असम के चाय-बेल्ट में मूड के लिए बैरोमीटर के रूप में मान रहे हैं, यहां का परिणाम संभवतः संकेत देगा कि पूरे राज्य के लिए हवा किस तरफ बह रही है। क्या मुख्यमंत्री जालुकबारी में अपना किला बरकरार रख सकते हैं? निचले असम में, सभी की निगाहें जलुकबरी पर हैं, जो निर्वाचन क्षेत्र मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का पर्याय बन गया है। 2001 से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे सरमा का मुकाबला कांग्रेस की प्रतिद्वंद्वी बिदिशा निओग से है। जबकि सरमा एक ऐसे नेता के विश्वास के साथ मैदान में उतरे हैं, जिन्होंने असमिया राजनीति को मौलिक रूप से नया आकार दिया है, विपक्ष ने अपने अभियान को प्रशासनिक पारदर्शिता और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कथा के “अधूरे वादों” के मुद्दों पर केंद्रित किया है। प्रतियोगिता को “असम की आत्मा” की लड़ाई के रूप में चित्रित करने के विपक्ष के प्रयासों के बावजूद, जालुकबारी भाजपा के लिए एक दुर्जेय किला बना हुआ है। यहां सरमा का प्रदर्शन सिर्फ एक सीट के बारे में नहीं है; यह पूरे पूर्वोत्तर में एनडीए के विस्तार के प्राथमिक वास्तुकार के रूप में उनके अधिकार के बारे में है। नाज़िरा और शिवसागर में मुकाबला इतना महत्वपूर्ण क्यों है? राज्य के ऐतिहासिक हृदय की ओर बढ़ते हुए, नाज़िरा और शिवसागर में झड़पें हो रही हैं जो क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य को फिर से परिभाषित कर सकती हैं। नाज़िरा में, विपक्ष के नेता, देबब्रत सैकिया, भाजपा के मयूर बोरगोहेन के खिलाफ फिर से कड़ी चुनावी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह सीट दशकों से कांग्रेस का गढ़ रही है और यहां हार पार्टी के मनोबल के लिए एक विनाशकारी झटका होगी। इस बीच, शिवसागर में, रायजोर दल के फायरब्रांड नेता, अखिल गोगोई, असम गण परिषद (एजीपी) और भाजपा गठबंधन के ठोस दबाव के खिलाफ अपनी सीट का बचाव कर रहे हैं। ये निर्वाचन क्षेत्र स्वदेशी राजनीति के केंद्र हैं, जहां भूमि अधिकारों और पहचान पर बहस अक्सर राष्ट्रीय आख्यानों पर भारी पड़ती है। जैसे-जैसे दिन चढ़ेगा, इन प्रमुख क्षेत्रों में मतदान यह निर्धारित करेगा कि क्या विपक्ष का “संयुक्त मोर्चा” वास्तव में भाजपा की मजबूत चुनावी मशीनरी को नुकसान पहुंचा सकता है। पहले प्रकाशित: 09 अप्रैल, 2026, 05:43 IST समाचार चुनाव केवल सीटों से कहीं अधिक: बड़े दांवों का आमना-सामना जो असम की राजनीतिक आत्मा को परिभाषित करेगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)असम चुनाव(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)असम चुनाव(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)गौरव गोगोई(टी)विधानसभा चुनाव
धुरंधर-2 से वायरल जैस्मिन सबसे महंगी पंजाबी फीमेल सिंगर:एक सॉन्ग की फीस ₹35 लाख; जालंधर में पैदा हुईं, कभी ₹20 में CD बेचती थीं

धुरंधर-2 फिल्म के गीत जाइए सजना से सुर्खियों में आईं जैस्मिन सैंडलस पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री की सबसे हाईली पेड महिला सिंगर बन गई हैं। जैस्मिन ने गीत के लिए ली जाने वाली फीस का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया। लेकिन म्यूजिक इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक वे एक गीत के लिए 30 से 35 लाख रुपए लेती हैं। जालंधर में जन्मी जैस्मिन का सफर भी संघर्ष भरा रहा है। वह कभी कैलिफोर्निया में 20-20 रुपए में अपने गीतों की सीडी बेचती थीं। आज उनकी नेटवर्थ करीब 60 करोड़ रुपए बताई जा रही है। सैन फ्रांसिस्को में उनका करीब 20 करोड़ का लग्जरी घर भी है। फीस के मामले में जैस्मिन के बाद नेहा कक्कड़, निमरत खैहरा और सुनंदा शर्मा का नाम शामिल है। अब पढ़िए जैस्मिन का सिंगर बनने का पूरा सफर… गुलाबी एल्बम से मिली पहचान, बॉलीवुड तक पहुंचीं जैस्मिन का 2008 में पहला गाना मुस्कान हिट हुआ। लेकिन असली पहचान उन्हें 2012 में एल्बम गुलाबी से मिली, जिसमें उन्होंने रैपर बोहेमिया के साथ काम किया। 2014 में बॉलीवुड ने उनकी आवाज को पहचाना। सलमान खान की फिल्म किक के लिए यो यो हनी सिंह के साथ गाए गाने यार ना मिले को लोगों ने खूब पसंद किया। इस एक गाने ने जैस्मिन को रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद गैरी संधू के साथ इलीगल वेपन जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में फेमस कर दिया। सबसे मोटी फीस और करोड़ों की नेटवर्थ संघर्ष के दिनों से लेकर आज तक जैस्मिन की फीस में जमीन-आसमान का अंतर आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अब जैस्मिन बॉलीवुड या फिल्म के गानों के लिए 30 लाख से 35 लाख प्रति गाना चार्ज करती हैं। उनके एक लाइव कॉन्सर्ट की फीस भी लगभग 10 लाख से 25 लाख के बीच बताई जाती है। उनकी अनुमानित नेटबर्थ लगभग 60 करोड़ रुपए है।
हिमाचल में अप्रैल में सामान्य से 169% अधिक बारिश:तापमान में 11॰C की गिरावट, आज भी 5 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट

हिमाचल प्रदेश में अप्रैल में असामान्य बारिश से दिसंबर-जनवरी जैसी सर्दी लौट आई है। राज्य में बीते एक सप्ताह में सामान्य से 169 फीसदी अधिक बारिश हुई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है। अप्रैल में बर्फबारी के साथ ओलावृष्टि ने कई जगह सेब के बगीचों को तबाह किया है। मौसम विभाग के अनुसार- 2 से 8 अप्रैल के बीच प्रदेश में सामान्य तौर पर 16 मिलीमीटर बारिश होती है, लेकिन इस बार 43 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। इस असामान्य वर्षा ने पूरे प्रदेश में ठंड का असर बढ़ा दिया है। प्रदेश का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 11 डिग्री सेल्सियस नीचे चला गया है, जबकि कई शहरों में यह गिरावट 14 डिग्री तक पहुंच गई। कांगड़ा का अधिकतम तापमान सामान्य से 14.1 डिग्री गिरने के बाद 18 डिग्री सेल्सियस रह गया है। मंडी में 11.1 डिग्री की गिरावट के बाद तापमान 18.7 डिग्री दर्ज हुआ। मनाली में पारा 10.8 डिग्री लुढ़ककर 8.6 डिग्री तक पहुंच गया है। ऊना का तापमान 10.4 डिग्री गिरकर 22.4 डिग्री रहा, जबकि शिमला में 8.5 डिग्री की गिरावट के साथ पारा 11.4 डिग्री तक पहुंच गया। वहीं धर्मशाला का अधिकतम तापमान 11.1 डिग्री गिरकर 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ऊंचाई वाले इलाकों में हल्का हिमपात होने के आसार मौसम विभाग ने आज भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम खराब रहने की संभावना जताई है। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में आंधी-तूफान को लेकर येलो अलर्ट जारी किया गया है। ऊंचाई वाले इलाकों में हल्का हिमपात भी हो सकता है। कल से वेस्टर्न डिस्टरबेंस कमजोर पड़ेगा हालांकि राहत की बात यह है कि कल से वेस्टर्न डिस्टरबेंस कमजोर पड़ने की संभावना है। इसके बाद अगले 48 घंटों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में मौसम साफ रहने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार 12 अप्रैल से प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ हो जाएगा।
वेदविद्या प्रतिष्ठान के सचिव की नियुक्ति पर हाईकोर्ट का नोटिस:छड़ी से छात्र को पीटने के बाद फिर सुर्खियों में प्रतिष्ठान, जवाब के लिए 6 सप्ताह का समय

महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान में छड़ी से छात्र की पिटाई का वीडियो वायरल होने के बाद अब प्रतिष्ठान के सचिव विरूपाक्ष जड्डीपाल की नियुक्ति को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर बेंच ने अहम आदेश जारी करते हुए महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, सचिव विरूपाक्ष जड्डीपाल सहित अन्य के खिलाफ नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब मांगा है। उच्च न्यायालय ने वेद शिक्षक स्वप्निल पाठक द्वारा दायर रिट याचिका में सचिव जड्डीपाल की नियुक्ति को अवैध बताया है। इसके बाद कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए नोटिस जारी कर छह सप्ताह में जवाब तलब किया है। एडवोकेट गार्गी पाठक ने बताया कि 9 जनवरी 2026 को इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में विरूपाक्ष जड्डीपाल की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। उनके अनुसार वर्ष 2017 में जड्डीपाल की नियुक्ति उज्जैन के सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान में सचिव पद पर हुई थी। हमने आरटीआई के माध्यम से मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन और सांदीपनि वेद विद्या प्रतिष्ठान से नियम और आरआर की प्रतियां मांगीं, लेकिन दोनों जगह से कॉपी नहीं मिली। इसके बाद किए गए शोध में पता चला कि सचिव पद पर जड्डीपाल की नियुक्ति पूरी तरह अवैध है और उन्हें नियम विरुद्ध पद पर रखा गया है। गार्गी पाठक ने बताया कि सचिव पद की नियुक्ति के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर होना जरूरी है, जबकि उनकी नियुक्ति उस समय हुई जब वे 2017 में तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम नामक डीम्ड विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उनका डेप्युटेशन पीरियड 2022 में समाप्त हो गया था, इसके बाद भी मंत्रालय से डेप्युटेशन एक्सटेंशन नहीं हुआ, फिर भी वे 2026 तक सचिव पद पर बने हुए हैं। यह सेक्रेटरी पोस्ट ए ग्रेड की पब्लिक ऑफिसर की पोस्ट है, जिस पर नॉन पब्लिक ऑफिसर को बैठा दिया गया है। बिना पूर्व स्वीकृति के पद पर जमे रहे याचिकाकर्ता स्वप्निल पाठक ने बताया कि वर्ष 2022 में प्रारंभिक प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद भी डॉ. जड्डीपाल को उनके मूल संगठन वापस नहीं भेजा गया और वे बिना पूर्व स्वीकृति के पद पर अवैध रूप से बने रहे। बाद में 15 जून 2023 को मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने प्रतिष्ठान के ज्ञापन के नियम 19 के शब्दों में कथित हेरफेर कर 10 जुलाई 2024 को उनकी प्रतिनियुक्ति को अगले 5 वर्षों के लिए बढ़ा दिया। भारत सरकार के नियमों में प्रतिनियुक्ति को 7 वर्ष से अधिक बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे यह विस्तार अवैध हो जाता है। प्रतिष्ठान के ज्ञापन के नियम 19 में 10 वर्षों की प्रतिनियुक्ति का कोई उल्लेख नहीं है। भर्ती और प्रशासनिक अनियमितताओं के गंभीर आरोप याचिका में आरोप लगाया गया है कि डॉ. जड्डीपाल प्रतिष्ठान के सचिव के रूप में अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं और संस्थान के उद्देश्यों के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं। उनके कार्यकाल में भारी भर्ती अनियमितताएं, प्रशासनिक धोखाधड़ी और वैदिक विद्वानों तथा वेद पाठशालाओं का उत्पीड़न हुआ है, जो जन नीति के विरुद्ध बताया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पूर्णतः अपात्र होने के कारण वे इस पद पर बने रहने के अयोग्य हैं और उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। इसी को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया है। ये खबर भी पढ़ें.. गुरुकुल में छात्र को डंडे से पीटा…दर्द से चीखता रहा,VIDEO उज्जैन में महर्षि सांदीपनी राष्ट्रीय वेदविद्या संस्थान (गुरुकुल) में एक टीचर ने छात्र को डंडे से बेरहमी से पीटा। इस दौरान छात्र दर्द से चीखता रहा, लेकिन टीचर लगातार उसे मारता रहा। घटना का वीडियो शनिवार को सामने आया है। बताया जा रहा है कि वह छात्र को दूसरे के बिस्तर पर सोने की बात पर पीट रहा था।पूरी खबर पढ़ें
इम्यूनिटी बूस्ट करने से लेकर बीपी कंट्रोल करने तक, खरबूज के बीज में छिपा सेहत का राज, फेंकने की भूल न करें

Last Updated:April 08, 2026, 23:37 IST Muskmelon Seeds Benefits: खरबूज ही नहीं इसके बीज भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं. ये एक प्राकृतिक और सस्ता सुपरफूड हैं, जो बिना किसी नुकसान के शरीर को मजबूत बनाते हैं. इसलिए इन्हें रोजाना के खाने में शामिल करना एक अच्छा विकल्प है. ख़बरें फटाफट अच्छी सेहत के लिए रोजाना के खाने में छोटे-छोटे बदलाव करना बहुत फायदेमंद होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि पोषक तत्वों से भरपूर खरबूजे के बीजों को अपने आहार में शामिल करें. ये छोटे-छोटे बीज शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं. National Health Mission के अनुसार, खरबूजे के बीज प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं. ये शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने, हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं. इसलिए इन्हें रोजाना के खाने में शामिल करना एक अच्छा विकल्प है. खरबूज के बीज के फायदेआयुर्वेद के अनुसार, खरबूजे के बीज स्वास्थ्य के लिए बहुत उपयोगी माने जाते हैं। इनमें मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत करता है. फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कब्ज की समस्या को कम करता है. साथ ही, इसमें मौजूद विटामिन और खनिज शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. इन बीजों का नियमित सेवन शरीर की रक्षा प्रणाली को मजबूत करता है, जिससे सर्दी-जुकाम जैसी आम बीमारियों से बचाव होता है. ये शरीर में सोडियम का स्तर संतुलित रखते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है. फाइबर की अच्छी मात्रा होने के कारण ये पाचन को सही रखते हैं और पेट साफ रखने में मदद करते हैं. साथ ही, ये दिमाग को तेज बनाने और याददाश्त सुधारने में भी सहायक होते हैं. खरबूजे के बीज बालों और नाखूनों के लिए भी फायदेमंद होते हैं. इनमें मौजूद पोषक तत्व बालों को मजबूत बनाते हैं और नाखूनों को स्वस्थ रखते हैं. डाइट में शामिल करने का तरीकाइन्हें अपनी डाइट में शामिल करना बहुत आसान है. आप इन्हें हल्का भूनकर नमक या मसालों के साथ स्नैक की तरह खा सकते हैं. इसके अलावा, सलाद, दही या नाश्ते में भी मिला सकते हैं. कुछ लोग इन्हें चाय या दूध के साथ भी लेना पसंद करते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर रोज थोड़ी मात्रा में इन बीजों का सेवन किया जाए, तो शरीर को कई फायदे मिल सकते हैं. ये एक प्राकृतिक और सस्ता सुपरफूड हैं, जो बिना किसी नुकसान के शरीर को मजबूत बनाते हैं. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें Location : New Delhi,Delhi First Published : April 08, 2026, 23:37 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.









