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धुरंधर मूवी वाले SP असलम की पत्नी डायरेक्टर से नाराज:कहा– न बलूचों से दुश्मनी थी, न रहमान डकैत से डरे; आदित्य धर पर केस करेंगी

धुरंधर मूवी वाले SP असलम की पत्नी डायरेक्टर से नाराज:कहा– न बलूचों से दुश्मनी थी, न रहमान डकैत से डरे; आदित्य धर पर केस करेंगी

पाकिस्तान के ल्यारी पर बनी बॉलीवुड फिल्म धुरंधर में संजय दत्त ने पाकिस्तान के एक पुलिस ऑफिसर का रोल किया है। इस ऑफिसर का नाम चौधरी असलम है, जिन्हें पाकिस्तान का सुपरकॉप भी कहा जाता है। चौधरी असलम पाकिस्तान पुलिस में एसपी के पद पर तैनात थे। सिंध पुलिस में काम करते हुए उन्होंने 2009 में ल्यारी के सबसे खूंखार रहमान डकैत का भी एनकाउंटर किया था। करीब चार साल बाद कराची में विस्फोटकों से भरी एक कार उनके काफिले से टकरा गई थी। इसमें असलम के साथ दो अन्य पुलिस अधिकारियों, बॉडीगार्ड और ड्राइवर की मौत हो गई थी। उनके परिवार को आज भी धमकियां मिलती हैं। दैनिक भास्कर ने असलम चौधरी की पत्नी नौरीन चौधरी से फोन पर बातचीत की। नौरीन ने कहा- फिल्म डायरेक्टर आदित्य धर ने उनके पति के किरदार को फिल्माने से पहले उनकी परमिशन नहीं ली। मेरे पति न तो कभी रहमान डकैत से डरे, न ही बलूच विरोधी थे। उनके किरदार को गलत दिखाया गया है। इसके चलते उनके खिलाफ लीगल एक्शन लूंगी। आगे पढ़िए, नौरीन से हुई बातचीत के मुख्य अंश… फिल्म में पति का किरदार देखकर कैसा लगा?
किरदार बहुत अच्छा है। संजय दत्त पर यह काफी फिट बैठता है। उन्होंने मेरे पति असलम चौधरी का किरदार बहुत अच्छी तरह निभाया है, लेकिन कहानी में कुछ बातें सही नहीं दिखाई गई हैं। किन चीजों को अलग तरीके से दिखाया गया है?
असलम चौधरी का किरदार बहुत बड़ा है, लेकिन उसे उतना नहीं दिखाया गया है। उनका काम सिर्फ ल्यारी तक सीमित नहीं था। उन्होंने कराची में कई ऑपरेशन किए थे। जिन सभी मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया गया, उन्होंने कभी भी अपनी फील्ड नहीं छोड़ी। ल्यारी असल में वैसा नहीं है, जैसा दिखाया गया है। ल्यारी कराची का एक छोटा सा इलाका है। फिल्म का कौन सा सीन असलम चौधरी की याद दिलाता है?
तीन-चार सीन ऐसे थे, जब मुझे लगा कि असलम मेरे सामने हैं। लेकिन फिल्म के एक शॉट में जब बम धमाका हुआ, तो मैं आगे नहीं देख सकी। फिल्म में एक सीन गलत है, जिसमें वह बलूच बच्चों को पीटते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि असलम बलूचों के दुश्मन हैं, लेकिन असलियत में ऐसा नहीं था। वह सिर्फ अपराधियों के खिलाफ थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी बच्चों के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया। उनकी मौत किसी राजनीतिक साजिश का नतीजा थी?
नहीं। वे कहते थे कि मैं गोली से नहीं, बम ब्लास्ट से मरूंगा—और वही हुआ। उन्होंने तालिबान के खिलाफ कई ऑपरेशन किए थे। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने फोन करके कहा था कि चौधरी असलम हमारे रास्ते से हट जाओ। तालिबानियों को कराची में चौधरी से ही खतरा था। लेकिन मेरे पति ने उनकी बात नहीं मानी। उन्होंने फोन पर उन लोगों को 20 मिनट तक खरी-खोटी सुनाई थी। चौधरी असलम अपनी पूरी जिंदगी रहमान डकैत से नहीं डरे। अगर वे डरते तो मैं आज अमेरिका या इंग्लैंड में रह रही होती। मैं फिलहाल पाकिस्तानी में ही रह रही हूं। रहमान डकैत के एनकाउंटर के बाद असलम ने घर आकर क्या कहा?
एनकाउंटर से पहले उन्होंने कुछ लोगों का पता लगाया था। अपने प्लान को अंजाम देने वे चार-पांच दिन पहले घर से निकले थे। रहमान ईरान से आ रहा था। असलम ने उसे जंगल में 7 पुलिसकर्मियों के साथ घेर लिया था और उसका एनकाउंटर कर दिया। असलम 6 दिन बाद घर लौटे। वे बहुत खुश थे और मेरे पास आकर बोले- अल्लाह ने मेरी इज्जत बचा ली। चौधरी ने अपना काम पूरा कर लिया है। क्या आपको लगता है कि उनकी दाउद से भी बातचीत हुई थी?
मैंने अपने जीवन में चौधरी असलम से दाउद का नाम कभी नहीं सुना। मुझसे पहले भी ऐसे सवाल पूछे गए हैं। उन्होंने मेरे सामने सिर्फ शोएब खान का नाम लिया था। वह कराची का डॉन था। लाहौर जाकर उसे असलम चौधरी ने ही पकड़ा था। वह जेल गया और हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई थी। मेरे पति ने कभी पैसे के लालच में किसी के सामने सिर नहीं झुकाया। नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ भी उनके काम को जानते थे। उन्होंने सिंध के 300 गरीब परिवारों के घरों में कभी राशन की कमी नहीं होने दी। बलूचों के बारे में बोले एक डायलॉग से विवाद खड़ा हो गया था। सच्चाई क्या है?
मेरे पति बलूच विरोधी नहीं थे। आज भी ल्यारी में कई लोग उनका सम्मान करते हैं। 200 बलूच महिलाएं उनकी पुण्यतिथि पर हमारे घरआई थीं। वे केवल अपराधियों के खिलाफ थे, उन्होंने कभी आम लोगों को परेशान नहीं किया। भले ही वे बलूच हों या नहीं। असलम चौधरी की मौत के समय का घटनाक्रम?
मुझे मेरे चाचा के बेटे का फोन आया था। उसने कहा कि टीवी चालू कीजिए, बड़ी खबर आ रही है। जब मैंने टीवी पर देखा तो पता चला कि असलम को अस्पताल ले जाया गया है। इसलिए मैं तुरंत वहां पहुंची। उस दिन कराची में लगभग बंद जैसी स्थिति थी। पूरे शहर में अफरा-तफरी मची हुई थी। असलम का इंतकाल हो चुका था। एक बार सुबह करीब सात बजे मेरे घर पर भी 350 किलो विस्फोटक से ब्लास्ट किया गया था। उस समय मैं घर पर अकेली थी। मैंने पिछली रात करीब दो बजे चौधरी असलम को फोन किया था और कहा था कि आप समय पर घर आ जाइए। तब उन्होंने बताया था कि उन्हें सूचना मिली है कि अमेरिका या सऊदी की एम्बेसी पर बम ब्लास्ट हो सकता है, इसलिए वे पेट्रोलिंग पर हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि असल में बम तो हमारे ही घर पर फटने वाला है। सुबह 7 बजकर 28 मिनट पर मैं बच्चों के लिए नाश्ता बना रही थी। तभी हमारे घर के पास जोरदार धमाका हुआ था। जमीन में 30 फीट गहरा गड्ढा बन गया और नीचे से पानी का फव्वारा निकलने लगा था। इस धमाके में हमारे 3-4 गनमैन, एक पड़ोसी और एक टीचर की मौत हो गई थी। हमारे घर के आसपास हमेशा गाड़ियां खड़ी रहती थीं। धमाके के बाद गाड़ियां फिल्मी सीन की तरह हवा में उड़कर गिर गई थीं। यह ब्लास्ट किसने करवाया था?
तहरीक-ए-तालिबान ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली थी। क्या आदित्य धर ने इस फिल्म को बनाने से पहले आपसे संपर्क किया?
नहीं, हमसे कोई परमिशन नहीं ली गई। टीजर आने के बाद हमें पता चला कि ऐसी कोई फिल्म बन रही है। उन्होंने “हवा-हवा” गाने के लिए पाकिस्तानी कलाकार को फिल्म रिलीज से पहले ही कॉपीराइट का भुगतान कर दिया था। उन्होंने चौधरी असलम की एंट्री के लिए एक छोटे से सॉन्ग पर 46 लाख रुपए खर्च किए हैं। अब मैंने तय किया है कि इस मामले में मैं आदित्य धर को इंटरनेशनल वकील के जरिए नोटिस भेजूंगी। मैं उनसे पाकिस्तानी करंसी में 25 करोड़ रुपए मुआवजा मांगूंगी। अगर फिल्म 1500 करोड़ रुपए कमा चुकी है, तो 25 करोड़ उसके मुकाबले बहुत छोटी रकम है। लोगों ने तो मुझे यह भी कहा है कि कुल कमाई का 40% लेना आपका हक है। अगर आदित्य धर खुद मान जाते हैं तो ठीक है, नहीं तो मैं कोर्ट के जरिए कार्रवाई करूंगी। क्या चौधरी असलम ने आपको बंदूक चलाना और हैंड ग्रेनेड की ट्रेनिंग दी थी?
उन्होंने मुझे 9MM पिस्टल समेत दो-तीन गन की ट्रेनिंग दी थी। अभी भी मेरे पास हथियार हैं। सभी हथियारों के लाइसेंस हैं। उन्होंने मुझे फायरिंग करना और निशाना लगाना सिखाया था। आप हथियारों की ट्रेनिंग के लिए तैयार हो गईं थीं?
नहीं… मैंने शुरू में ही मना कर दिया था कि मैं बंदूक नहीं चलाना चाहती। तो उन्होंने कहा- चौधरी की पत्नी को किसी भी हालत में डरना नहीं है। मेरी मौत के बाद भी तुम्हारे मन में कोई डर नहीं होना चाहिए। सबको पता होना चाहिए कि नौरी खान कौन है। चौधरी असलम संजय दत्त के बारे में क्या सोचते थे?
उन्हें संजय दत्त बहुत पसंद थे। जब उन्होंने खलनायक वाली फिल्म देखी, तो संजय दत्त की बहुत तारीफ की थी। परिवार में कौन-कौन हैं?
मेरे चार बच्चे हैं। सभी बच्चे पाकिस्तान में हैं। किसी को भी विदेश नहीं भेजा है। मेरे बड़े बेटे की शादी कुछ समय पहले हुई है और अब वह भी पुलिस में शामिल होगा। मैं पिछले 12 वर्षों से तैयार बैठी हूं। अगर कोई हमला करेगा तो तो उसे छोड़ूंगी नहीं। उन्होंने कभी बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं पहनी?
मैं हमेशा उनसे बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने को कहती थी। लेकिन वे मेरी बात नहीं मानते थे। घर में बम धमाके के बाद मैंने बहुत जिद की थी। उस दिन भी घर से निकलने के बाद, थोड़ी दूर जाकर उन्होंने अपनी जैकेट उतार दी थी। वे कहते थे कि मुझे किसी एक्स्ट्रा डिफेंस की जरूरत नहीं है। इससे बेहतर तो मर जाना है। असलम अपनी गाड़ी में नहीं बैठे रहते थे। वह हमेशा पुलिस बल में सबसे आगे रहते थे। असलम ने अपने नाम के आगे चौधरी क्यों लगाया?
कई बड़े ऑपरेशन पूरा करने के बाद उन्हें यह पहचान मिली। उन्होंने मेरी सलाह पर ही सफेद कुर्ते पहनने शुरू कर दिए थे। लोग उन्हें पंजाबी समझते थे, लेकिन वे पठान हैं। मेरे बच्चों ने फिल्म नहीं देखी है। उनका कहना है कि फिल्म में पिता को बहुत क्रूर दिखाया गया है। मैंने उनसे कहा कि संजय दत्त की एक्टिंग देखिए। फिल्म बनाने से पहले मुझसे उनके किरदार के बारे में पूछा जाना जरूरी था। जब वो जेल गए, तो बाहर के सारे काम मैं ही डील करती थी। मैं रहमान दकैत के इलाके में भी गई थी। वहां मेरा पीछा करवाया गया था। मैं और मेरा ड्राइवर गाड़ी लेकर भाग निकले थे। मैंने असलम चौधरी को कई बातें नहीं बताईं। एक रात मुझे शोएब खान के नाम से भी धमकी मिली थी। क्या आपको अभी भी रहमान डकैत के परिवार से धमकियां मिलती हैं?
हां, कुछ समय पहले धमकी मिली थी। कराची में कई गुट हैं। इसीलिए धमकियां मिलती रहती हैं। इसीलिए हमारी सुरक्षा में पाकिस्तान की सेना और सिंध पुलिस तैनात है।

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किरदार बहुत अच्छा है। संजय दत्त पर यह काफी फिट बैठता है। उन्होंने मेरे पति असलम चौधरी का किरदार बहुत अच्छी तरह निभाया है, लेकिन कहानी में कुछ बातें सही नहीं दिखाई गई हैं। किन चीजों को अलग तरीके से दिखाया गया है?
असलम चौधरी का किरदार बहुत बड़ा है, लेकिन उसे उतना नहीं दिखाया गया है। उनका काम सिर्फ ल्यारी तक सीमित नहीं था। उन्होंने कराची में कई ऑपरेशन किए थे। जिन सभी मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया गया, उन्होंने कभी भी अपनी फील्ड नहीं छोड़ी। ल्यारी असल में वैसा नहीं है, जैसा दिखाया गया है। ल्यारी कराची का एक छोटा सा इलाका है। फिल्म का कौन सा सीन असलम चौधरी की याद दिलाता है?
तीन-चार सीन ऐसे थे, जब मुझे लगा कि असलम मेरे सामने हैं। लेकिन फिल्म के एक शॉट में जब बम धमाका हुआ, तो मैं आगे नहीं देख सकी। फिल्म में एक सीन गलत है, जिसमें वह बलूच बच्चों को पीटते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि असलम बलूचों के दुश्मन हैं, लेकिन असलियत में ऐसा नहीं था। वह सिर्फ अपराधियों के खिलाफ थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी बच्चों के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया। उनकी मौत किसी राजनीतिक साजिश का नतीजा थी?
नहीं। वे कहते थे कि मैं गोली से नहीं, बम ब्लास्ट से मरूंगा—और वही हुआ। उन्होंने तालिबान के खिलाफ कई ऑपरेशन किए थे। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने फोन करके कहा था कि चौधरी असलम हमारे रास्ते से हट जाओ। तालिबानियों को कराची में चौधरी से ही खतरा था। लेकिन मेरे पति ने उनकी बात नहीं मानी। उन्होंने फोन पर उन लोगों को 20 मिनट तक खरी-खोटी सुनाई थी। चौधरी असलम अपनी पूरी जिंदगी रहमान डकैत से नहीं डरे। अगर वे डरते तो मैं आज अमेरिका या इंग्लैंड में रह रही होती। मैं फिलहाल पाकिस्तानी में ही रह रही हूं। रहमान डकैत के एनकाउंटर के बाद असलम ने घर आकर क्या कहा?
एनकाउंटर से पहले उन्होंने कुछ लोगों का पता लगाया था। अपने प्लान को अंजाम देने वे चार-पांच दिन पहले घर से निकले थे। रहमान ईरान से आ रहा था। असलम ने उसे जंगल में 7 पुलिसकर्मियों के साथ घेर लिया था और उसका एनकाउंटर कर दिया। असलम 6 दिन बाद घर लौटे। वे बहुत खुश थे और मेरे पास आकर बोले- अल्लाह ने मेरी इज्जत बचा ली। चौधरी ने अपना काम पूरा कर लिया है। क्या आपको लगता है कि उनकी दाउद से भी बातचीत हुई थी?
मैंने अपने जीवन में चौधरी असलम से दाउद का नाम कभी नहीं सुना। मुझसे पहले भी ऐसे सवाल पूछे गए हैं। उन्होंने मेरे सामने सिर्फ शोएब खान का नाम लिया था। वह कराची का डॉन था। लाहौर जाकर उसे असलम चौधरी ने ही पकड़ा था। वह जेल गया और हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई थी। मेरे पति ने कभी पैसे के लालच में किसी के सामने सिर नहीं झुकाया। नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ भी उनके काम को जानते थे। उन्होंने सिंध के 300 गरीब परिवारों के घरों में कभी राशन की कमी नहीं होने दी। बलूचों के बारे में बोले एक डायलॉग से विवाद खड़ा हो गया था। सच्चाई क्या है?
मेरे पति बलूच विरोधी नहीं थे। आज भी ल्यारी में कई लोग उनका सम्मान करते हैं। 200 बलूच महिलाएं उनकी पुण्यतिथि पर हमारे घरआई थीं। वे केवल अपराधियों के खिलाफ थे, उन्होंने कभी आम लोगों को परेशान नहीं किया। भले ही वे बलूच हों या नहीं। असलम चौधरी की मौत के समय का घटनाक्रम?
मुझे मेरे चाचा के बेटे का फोन आया था। उसने कहा कि टीवी चालू कीजिए, बड़ी खबर आ रही है। जब मैंने टीवी पर देखा तो पता चला कि असलम को अस्पताल ले जाया गया है। इसलिए मैं तुरंत वहां पहुंची। उस दिन कराची में लगभग बंद जैसी स्थिति थी। पूरे शहर में अफरा-तफरी मची हुई थी। असलम का इंतकाल हो चुका था। एक बार सुबह करीब सात बजे मेरे घर पर भी 350 किलो विस्फोटक से ब्लास्ट किया गया था। उस समय मैं घर पर अकेली थी। मैंने पिछली रात करीब दो बजे चौधरी असलम को फोन किया था और कहा था कि आप समय पर घर आ जाइए। तब उन्होंने बताया था कि उन्हें सूचना मिली है कि अमेरिका या सऊदी की एम्बेसी पर बम ब्लास्ट हो सकता है, इसलिए वे पेट्रोलिंग पर हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि असल में बम तो हमारे ही घर पर फटने वाला है। सुबह 7 बजकर 28 मिनट पर मैं बच्चों के लिए नाश्ता बना रही थी। तभी हमारे घर के पास जोरदार धमाका हुआ था। जमीन में 30 फीट गहरा गड्ढा बन गया और नीचे से पानी का फव्वारा निकलने लगा था। इस धमाके में हमारे 3-4 गनमैन, एक पड़ोसी और एक टीचर की मौत हो गई थी। हमारे घर के आसपास हमेशा गाड़ियां खड़ी रहती थीं। धमाके के बाद गाड़ियां फिल्मी सीन की तरह हवा में उड़कर गिर गई थीं। यह ब्लास्ट किसने करवाया था?
तहरीक-ए-तालिबान ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली थी। क्या आदित्य धर ने इस फिल्म को बनाने से पहले आपसे संपर्क किया?
नहीं, हमसे कोई परमिशन नहीं ली गई। टीजर आने के बाद हमें पता चला कि ऐसी कोई फिल्म बन रही है। उन्होंने “हवा-हवा” गाने के लिए पाकिस्तानी कलाकार को फिल्म रिलीज से पहले ही कॉपीराइट का भुगतान कर दिया था। उन्होंने चौधरी असलम की एंट्री के लिए एक छोटे से सॉन्ग पर 46 लाख रुपए खर्च किए हैं। अब मैंने तय किया है कि इस मामले में मैं आदित्य धर को इंटरनेशनल वकील के जरिए नोटिस भेजूंगी। मैं उनसे पाकिस्तानी करंसी में 25 करोड़ रुपए मुआवजा मांगूंगी। अगर फिल्म 1500 करोड़ रुपए कमा चुकी है, तो 25 करोड़ उसके मुकाबले बहुत छोटी रकम है। लोगों ने तो मुझे यह भी कहा है कि कुल कमाई का 40% लेना आपका हक है। अगर आदित्य धर खुद मान जाते हैं तो ठीक है, नहीं तो मैं कोर्ट के जरिए कार्रवाई करूंगी। क्या चौधरी असलम ने आपको बंदूक चलाना और हैंड ग्रेनेड की ट्रेनिंग दी थी?
उन्होंने मुझे 9MM पिस्टल समेत दो-तीन गन की ट्रेनिंग दी थी। अभी भी मेरे पास हथियार हैं। सभी हथियारों के लाइसेंस हैं। उन्होंने मुझे फायरिंग करना और निशाना लगाना सिखाया था। आप हथियारों की ट्रेनिंग के लिए तैयार हो गईं थीं?
नहीं… मैंने शुरू में ही मना कर दिया था कि मैं बंदूक नहीं चलाना चाहती। तो उन्होंने कहा- चौधरी की पत्नी को किसी भी हालत में डरना नहीं है। मेरी मौत के बाद भी तुम्हारे मन में कोई डर नहीं होना चाहिए। सबको पता होना चाहिए कि नौरी खान कौन है। चौधरी असलम संजय दत्त के बारे में क्या सोचते थे?
उन्हें संजय दत्त बहुत पसंद थे। जब उन्होंने खलनायक वाली फिल्म देखी, तो संजय दत्त की बहुत तारीफ की थी। परिवार में कौन-कौन हैं?
मेरे चार बच्चे हैं। सभी बच्चे पाकिस्तान में हैं। किसी को भी विदेश नहीं भेजा है। मेरे बड़े बेटे की शादी कुछ समय पहले हुई है और अब वह भी पुलिस में शामिल होगा। मैं पिछले 12 वर्षों से तैयार बैठी हूं। अगर कोई हमला करेगा तो तो उसे छोड़ूंगी नहीं। उन्होंने कभी बुलेटप्रूफ जैकेट नहीं पहनी?
मैं हमेशा उनसे बुलेटप्रूफ जैकेट पहनने को कहती थी। लेकिन वे मेरी बात नहीं मानते थे। घर में बम धमाके के बाद मैंने बहुत जिद की थी। उस दिन भी घर से निकलने के बाद, थोड़ी दूर जाकर उन्होंने अपनी जैकेट उतार दी थी। वे कहते थे कि मुझे किसी एक्स्ट्रा डिफेंस की जरूरत नहीं है। इससे बेहतर तो मर जाना है। असलम अपनी गाड़ी में नहीं बैठे रहते थे। वह हमेशा पुलिस बल में सबसे आगे रहते थे। असलम ने अपने नाम के आगे चौधरी क्यों लगाया?
कई बड़े ऑपरेशन पूरा करने के बाद उन्हें यह पहचान मिली। उन्होंने मेरी सलाह पर ही सफेद कुर्ते पहनने शुरू कर दिए थे। लोग उन्हें पंजाबी समझते थे, लेकिन वे पठान हैं। मेरे बच्चों ने फिल्म नहीं देखी है। उनका कहना है कि फिल्म में पिता को बहुत क्रूर दिखाया गया है। मैंने उनसे कहा कि संजय दत्त की एक्टिंग देखिए। फिल्म बनाने से पहले मुझसे उनके किरदार के बारे में पूछा जाना जरूरी था। जब वो जेल गए, तो बाहर के सारे काम मैं ही डील करती थी। मैं रहमान दकैत के इलाके में भी गई थी। वहां मेरा पीछा करवाया गया था। मैं और मेरा ड्राइवर गाड़ी लेकर भाग निकले थे। मैंने असलम चौधरी को कई बातें नहीं बताईं। एक रात मुझे शोएब खान के नाम से भी धमकी मिली थी। क्या आपको अभी भी रहमान डकैत के परिवार से धमकियां मिलती हैं?
हां, कुछ समय पहले धमकी मिली थी। कराची में कई गुट हैं। इसीलिए धमकियां मिलती रहती हैं। इसीलिए हमारी सुरक्षा में पाकिस्तान की सेना और सिंध पुलिस तैनात है।

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